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Published / 2022-12-22 20:49:19
दारू : बड़वार-जरगा बिरहोर टोला के कई बच्चे-बड़े चर्म रोग से पीड़ित

नहीं हो रहा है कोई समुचित इलाज, खतरे में लोगों का जीवन 

रौशन सिन्हा 

टीम एबीएन, दारू (हजारीबाग)। प्रखंड क्षेत्र के पुनाई पंचायत के जरगा और इरगा पंचायत के बड़वार बिरहोर टोला के दर्जनों बच्चे गंभीर चर्म और अन्य रोगों से पीड़ित है पर इनका समुचित इलाज नही हो पा रहा है। सरकार के तरफ से इन्हें विशेष संरक्षित समुदाय का दर्जा दिया गया है पर इनके इलाज की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है। 

चर्म रोग से पीड़ित बच्चों के माता पिता का कहना है कि इन बच्चों के इलाज वे गरीबी के कारण नहीं करा पा रहे हैं उनके मुहल्ले में बीडीओ, सीओ, मुखिया सहित कई लोग आते हैं पर किसी भी तरह से उनकी मदद नही मिल पाई है। लुप्त होती इस समुदाय की तरफ यदि ठीक से नहीं ध्यान दिया गया तो इनकी स्तिथि दिन ब दिन और खराब होती जायेगी। 

जरगा का लक्ष्मण बिरहोर की आंखों में कुछ दिन पूर्व मिट्टी चली गयी थी जिसका भी इलाज वो ठीक से नहीं करा पा रहा है उसे एक आंख से दिखना पूरी तरह से बंद हो गया है और उसकी दूसरी आंख की भी रोशनी कम हो रही है। उसकी तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण वो दिन भर घर में पड़ा रहता है और कोई मेहनत मजदूरी के काम भी नहीं कर पाता है। पंचायत के मुखिया अनिल कुमार देव ने उसकी आंखों का इलाज करवाने का भरोसा दिलाया है।

Published / 2022-12-22 09:02:14
चीन में बढ़ रहे कोरोना मामलों पर जानें क्या बोले डब्ल्यूएचओ प्रमुख

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन चीन में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों की खबरों को लेकर बेहद चिंतित है, क्योंकि देश ने अपनी शून्य कोविड नीति को मोटे तौर पर छोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। 

टेड्रोस ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को चीन में कोविड-19 की गंभीरता, विशेषकर अस्पतालों और गहन देखभाल इकाइयों में भर्ती मरीजों को लेकर और अधिक जानकारी की आवश्यकता है, ताकि जमीन पर स्थिति का व्यापक जोखिम आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि चीन में गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों की खबरों के बीच बदल रही स्थिति को लेकर डब्ल्यूएचओ बहुत चिंतित है।

Published / 2022-12-21 20:35:43
पीठ दर्द से हो सकती हैं कई बीमारियां, रहें सतर्क : डॉ आनंद झा

  • विशेष पहल के साथ मेदांता रांची ने शुरू किया विशेष बैकएक क्लिनिक  

टीम एबीएन, रांची। आमतौर पर पीठ के दर्द को लोग हल्के में ले लेते हैं लेकिन एक पीठ का दर्द कई अन्य बीमारियों का सूचक भी हो सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। पीठ के दर्द से परेशान लोगों के लिए मेदांता रांची ने विशेष पहल की है और विशेष बैकएक क्लीनिक यानी पीठ के दर्द की क्लीनिक की शुरूआत की है।  

रिडीटिंग पेन के बारे में विशेष जानकारी देते हुए मेदांता रांची के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि वैसे मरीज जिनके पीठ में दर्द हो रिडीटिंग पेन यानी जिसे साइटिका कहते हैं, इस दर्द के कारण जिसके पैर में दर्द होता हो या चलने में परेशानी हो चलने के बाद बैठ जाना पड़ता हो। अगर ऐसे लक्षण हो तो वह इस क्लीनिक में संपर्क कर सकते हैं।  

डॉक्टर आनंद ने बताया कि अगर पीठ में दर्द हो तो उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। वह आगे चलकर धीरे-धीरे सूनापन पैदा कर सकता है और अगर वक्त रहते इलाज न किया जाए तो पैरालाइसिस भी हो सकता है। डॉक्टर आनंद ने यह भी बताया कि बैकएक में भी कई तरह के दर्द होते हैं। इसमें अपर बैकएक, मिडल बैकएक और लोअर बैकएक होता है। इन सब में कॉमन बैकएक कॉमन होता है। जिसे कमर का दर्द भी कहा जाता है।  

इस क्लिनिक में शनिवार को सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक संपर्क किया जा सकता है। बैकएक के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेदांता रांची ने इस पहल को किया है। ऐसे मरीज जो बैकएक से परेशान हैं, उनके इलाज के लिए मेदांता की एक्सपर्ट टीम रहेगी।

Published / 2022-12-09 17:40:00
नजरअंदाज न करें सिर का दर्द, मेदांता रांची ने शुरू किया विशेष हेडेक क्लीनिक

टीम एबीएन, रांची। सिर का दर्द भले ही कहने के लिए आम हो लेकिन इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जब भी सिर का दर्द हो, डॉक्टर से जरूर सलाह लें। सिरदर्द के इलाज के लिए मेदांता रांची ने विशेष पहल की है। इसके लिए विशेष सिरदर्द क्लिनिक को शुरू किया गया है। इस विशेष क्लिनिक के बारे में और जानकारी देते हुए मेदांता रांची के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर कुमार विजय आनंद ने बताया कि इस क्लीनिक में सिर दर्द से पीड़ित मरीज को एक प्रश्नोत्तरी दी जाएगी। उसके बाद कुछ अन्य पैरामीटर पर मरीज को देखा जाएगा।डॉ कुमार विजय आनंद ने बताया कि सिर दर्द के कई प्रकार होते हैं। 

सिरदर्द को सामान्यत: दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है, प्राइमरी और सेकेंडरी हेडेक। प्राइमरी हेडेक जिसमें माइग्रेन, टेंशन हेडेक, क्लस्टर सिरदर्द के अलावा कई अन्य तरह के सिरदर्द होते हैं। जिसका डायग्नोसिस मरीज के द्वारा जो जानकारी मिलती है, उसके आधार पर किया जाता है। सेकेंडरी हेडेक वैसे हेडेक होते हैं, जिसमें कुछ गंभीर अंडरलाइन कारण होते हैं, जैसे इंफेक्शन, स्ट्रोक, ट्यूमर, वैस्कुलाइटिस इत्यादि। ऐसे मरीजों में कई टेस्टों स्कैन करने की जरूरत होती है। क्लीनिक में वैसे मरीज जो सिर के विभिन्न तरह के दर्द से परेशान हैं, वह प्रत्येक बुधवार सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। 
 

क्लीनिक में वैसे मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी जो दूरदरज के क्षेत्र से अपना इलाज करवाने आएंगे। क्लिनिक में सिर दर्द के बारे में जागरूकता देने के साथ ही यह भी जानकारी दी जाएगी कि अगर सिर में दर्द है तो डॉक्टर से क्यों मिलना चाहिए? अगर किसी को सिर में दर्द है जो उनकी डेली लाइफ को और उनके कार्य को प्रभावित कर रहा है तो डॉक्टर से क्यों मिलना चाहिए?  यदि सिर का दर्द रीसेंट आनसेट यानी हाल ही में शुरू हुआ हो या बहुत गंभीर शुरूआत हो, सिर के दर्द के साथ बुखार हो, सिर के दर्द के साथ चक्कर आ रहे हो, उल्टी जैसा हो रहा है, सेंस में कमी महसूस हो रही हो या फिर अचानक गिर गए हो, सिर में दर्द के साथ दृष्टि में परिवर्तन हुआ हो, तो न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत मिलना चाहिए। 
 

डॉ कुमार विजय आनंद ने बताया कि मेदांता रांची में इस तरह की पहल पहली बार की जा रही है। वही इस क्लिनिक के बारे में और जानकारी देते हुए मेदांता रांची के ऊ्र१ीू३ङ्म१ विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता सेहत को लेकर बराबर पहल करता रहता है। मेदांता की कोशिश यह होती है कि लोगों को हर तरह की बीमारी के बारे में सचेत करने के साथ ही उचित और सुविधा पूर्ण इलाज उपलब्ध कराई जाए। मेदांता सेहतमंद इंसान, स्वास्थ्य समाज और उन्नत सुविधा के साथ इलाज के अपने मुख्य ध्येय को हमेशा सर्वोपरि रखता है।

Published / 2022-11-29 22:29:18
डब्ल्यूएचओ का ऐलान : अब इस नाम से जाना जायेगा मंकीपॉक्स...

एबीएन हेल्थ डेस्क। मंकीपॉक्स बीमारी को अब "एमपॉक्स" के नाम से जाना जायेगा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह ऐलान किया है। दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ विमर्श कर डब्ल्यूएचओ ने मंकीपॉक्स का नाम बदला है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ को शिकायतें मिली थीं, जिसमें मंकीपॉक्स नाम का इस्तेमाल आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियों के लिए किया जा रहा था। इसके बाद इसके नाम को बदलने पर विचार किया गया।

फिलहाल मंकीपॉक्स और एमपॉक्स दोनों ही नाम का इस्तेमाल होगा लेकिन अगले एक साल में मंकीपॉक्स नाम को पूरी तरह हटा दिया जायेगा। मंकीपॉक्स को इसका नाम इसलिए मिला क्योंकि इस बीमारी से जुड़े वायरस की पहचान सबसे पहले 1958 में डेनमार्क में शोध के लिए रखे गये बंदरों में हुई थी। हालांकि यह बीमारी कई जानवरों में पाई जाती है, और चूहों आदि जैसे रोडेन्ट्स जानवरों में खूब मिलती है। इस साल की शुरूआत में कई देशों में इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे।

यह वायरस पशुओं से फैलना शुरू हुआ और इंसानों में बहुत तेजी से फैला। 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो में पहली बार मनुष्यों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए थे। इसके बाद से इसका प्रचार मनुष्यों में मुख्य रूप से कुछ पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों तक सीमित रहा। हालांकि इस साल इसके केस भारत सहित कई देशों में भी मिले। इस साल 110 देशों से लगभग 81,107 पुष्ट मामले मंकीपॉक्स के मिले। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 55 लोगों की मौत भी दुनियाभर में इस साल मॉकीपॉक्स से हुई।
 

लक्षण


• मंकीपॉक्स चेचक की तरह होता है।
• इससे संक्रमण के 7 से 10 दिन में व्यक्ति में लक्षण दिखने लगते हैं। 
• इसमें लक्षण को तौर पर संक्रमित व्यक्ति को बुखार महसूस होता है। 
• शरीर में दर्द और थकान भी महसूस हो सकती है। यह पहला चरण है। 
• संक्रमण के दूसरे चरण में त्वचा पर कहीं-कहीं गांठ दिखने लगती हैं और चकते आ जाते हैं और फिर यही चकत्ते बडे़ दानों में बदल जाते हैं।

Published / 2022-11-28 23:00:08
स्टडी का दावा... भारत में 75% मरीजों का हाई ब्लडप्रेशर आउट ऑफ कंट्रोल, हार्ट पेशेंट्स को ज्यादा खतरा

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में हाई ब्लडप्रेशर के एक चौथाई से भी कम मरीजों का ब्लडप्रेशर कंट्रोल रहता है। रिसर्च जर्नल ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ’ में प्रकाशित एक स्टडी में इसका खुलासा हुआ है। हार्ट पेशेंट के लिए हाई ब्लड प्रेशर एक अहम कारक है, जो समय से पहले मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। 
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, नई दिल्ली और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने 2001 के बाद प्रकाशित 51 स्टडीज की डिटेल में समीक्षा की है। इसी आधार पर भारत में हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रण की दरों का पता चला। रिसर्चर्स ने पाया कि 21 अध्ययनों (41 प्रतिशत) में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के बीच हाई ब्लडप्रेशर के नियंत्रण की सबसे खराब दर है। 
छह अध्ययनों (12 प्रतिशत) में ग्रामीण मरीजों के बीच नियंत्रण की दर ज्यादा खराब पाई गई। इस रिसर्च स्टडी के लेखकों ने कहा, भारत में हाई ब्लडप्रेशर के एक चौथाई से भी कम मरीजों का रक्तचाप 2016-2020 के दौरान नियंत्रण में था। हालांकि, पिछले कुछ वर्ष के मुकाबले नियंत्रण दर में सुधार हुआ। रिसर्चर्स का कहना है कि हृदय रोगियों की मौत की संख्या कम करने में उच्च रक्तचाप की बेहतर नियंत्रण दर हासिल करना बेहद अहम है। कारण कि हाई ब्लड प्रेशर भारत में मौत की प्रमुख वजहों में से एक है।

Published / 2022-11-26 10:23:40
अब लीजिये... एक ही मच्छर फैला रहा है डेंगू-चिकनगुनिया

रिसर्च में हुए खुलासे ने सबको चौंकाया, सकते में लोग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है। हर दिन तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बदलते मौसम में तमाम बीमारियां घेर लेते हैं। चिकनगुनिया और डेंगू के मामले भी काफी तेजी से बढ़ जाते हैं। एक रिसर्च सामने आई है, जिसके बाद मेडिकल डिपार्टमेंट भी अलर्ट हो गया है।

इस रिसर्च में बताया गया है कि एडीज एजिप्टी मच्छर एक ही समय में डेंगू और चिकनगुनिया दोनों वायरस ले जा रहा है, जिसके कारण शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में दोनों ही बीमारियों के काफी मामले सामने आ रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) वायरोलॉजी विभाग की रिसर्च टीम ने ही इसका खुलासा किया है। 

इस स्टडी ने खतरे को दोगुना बढ़ा दिया है। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही घातक होता है। अगर समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यक्ति की मौत तक हो जाती है। दोनों विषाणुओं को एक साथ ले जाने वाले मच्छर के कारण लोगों को डेंगू और चिकनगुनिया दोनों के सह-संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। यह निष्कर्ष शहर में 2022 में अब तक चिकनगुनिया के 101 मामलों के बाद आया है जोकि छह साल के उच्च स्तर में हैं। इसके अलावा डेंगू के 839 मामले सामने आये हैं।

एक ही मच्छर ने दोनों को चौंकाया
वायरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख राधाकांत राठो ने कहा कि इस मौसम के दौरान एडीज मच्छर डेंगू या चिकनगुनिया के मामले एक ही मच्छर के काटने से आ रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि दोनों बीमारियों वाले मच्छर के काटने से दोनों बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू वायरस और चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्यों में एक समवर्ती वायरल संक्रमण हो सकता है।

डेंगू और चिकनगुनिया दोनों बीमारी फैलाता है ये एडीज

रिसर्च टीम ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया के वायरस मच्छर में एक साथ प्रतिकृति बनाने में सक्षम हैं। लार के माध्यम से एक ही मच्छर के काटने में दोनों वायरस के संक्रामक कणों को शरीर में फैलाने की क्षमता रखते हैं। राठो ने कहा कि यह देखा गया है कि एडीज एजिप्टी डेंगू रोग के फैलाव के लिए प्राथमिक वेक्टर प्रजाति होती है। इसी तरह, वही मच्छर चिकनगुनिया वायरस को प्रसारित करने की क्षमता भी रखता है। कभी-कभी मच्छर दोनों संक्रमणों को एक साथ भी फैला देता है।

Published / 2022-11-24 14:43:34
हार्ट अटैक आने पर जान बचाने में सीपीआर का अहम रोल : डॉ तापस साहू, मेदांता हाॅस्पिटल रांची

टीम एबीएन, रांची। बदलते दौर में हर्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर वक्त पर उपचार ने हो तो ये खतरनाक भी साबित हो सकता है। उम्मीद की एक किरण यह भी है कि हर्ट अटैक के खतरे से बाहर निकालने में सीपीआर एक अहम रोल निभाता है। मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू का कहना है कि अगर किसी को हर्ट अटैक आता है और वक्त पर सीपीआर दे दिया जाए तो मरीज की जीवन को बचाया जा सकता है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने बताया कि आम बोलचाल की भाषा में कार्डियोपलमनरी रिससिटेशन को सीपीआर कहा जाता है। दरअसल, यह इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस, दिल के रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। यह हर्ट के बंद होने के बाद फिर चालू करने की प्रक्रिया है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि अगर हम किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत होती है। जैसे कि अगर किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो प्रति मिनट 100 - 120 सीपीआर देना चाहिए। दबाव का ख्याल रखना चाहिए। 30 सीपीआर देने के साथ ही दो बार सांस भी देना चाहिए। प्रति दो मिनट में पांच साइकिल पूरा होना चाहिए। एक साइकिल में तीस सीपीआर होना चाहिए। वो कहते हैं, सीपीआर के साथ ही डिफिब्रिलेटर मशीन की भी जरूरत पड़ती है। इससे मरीज की जान को बचाए जाने की संभावना और बढ़ जाती है। सीपीआर और ऑटोमेटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मशीन अगर मिल जाए तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने कहा कि सीपीआर देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित हो जाने के बाद इसे आम आदमी भी दे सकता है। पोस्ट कोविड ऐसी घटनाएं बढ़ गई है। दरअसल कोरोना फेफड़े पर असर डालने के साथ-साथ शरीर के और भी कई अंगों पर अपना दुष्प्रभाव डालता है। 
जिससे हार्टअटैक की घटनाएं बढ़ गई है। हर्ट अटैक न हो, इसके लिए खुद को भी कुछ चीजों पर ध्यान रखना होगा। अगर वजन ज्यादा है तो कंट्रोल करना होगा। मधुमेह के रोगी हैं तो भोजन संतुलित करना होगा साथ ही दवा और इन्सुलिन लेते रहना चाहिए। हरी सब्जी और फल का ज्यादा सेवन लाभदायक होगा। बीपी पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। भोजन में तेल व वसा का जितना कम प्रयोग होगा, उतना बेहतर होगा। इसके अलावा टहलना एक बेहतर माध्यम है। सप्ताह में अगर कम से कम 150 मिनट ब्रिस्क वॉक करते हैं तो इससे खुद को फिट रखा जा सकता है।

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