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Published / 2023-02-17 18:52:17
मेदांता रांची की एक और उपलब्धि, क्रिटिकल केस में मरीज का किया सफल उपचार, स्वस्थ जीवन जी रही मरीज

  • मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी 

टीम एबीएन, रांची। अपनी एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम, अत्याधुनिक तकनीक और मरीज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मेदांता रांची सफल उपचार में लगातार उपलब्धि हासिल कर रहा है। मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी। उपचार के बाद महिला अभी एकदम स्वस्थ्य जीवन जी रही है। 

मेदांता रांची के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेदांता रांची में एक 70 वर्षीय महिला का केस आया था। इनको शार्टनेस आफ ब्रेथ था। जिसकी ग्रेडिंग इनवाईएचए क्लास 4 थी। ये महिला रात में सो भी नहीं पाती थी। रात भर बैठ कर रहती थी। 

इनकी सांस इतनी फूल रही थी। मेदांता रांची में जब इनका इलाज शुरू हुआ तो बहुत सारे मेडिसिन दिए गए। लेकिन इन महिला मरीज की प्रॉब्लम ठीक नहीं हो पा रही थी। मरीज का इजेकशन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, जबकि उनकी डायग्नोसिस डीसीएम था साथ ही इसीजी में एलबीबीबी था।  

डॉ मुकेश ने बताया कि इसके बाद मरीज को एक डिवाइस लगाने की प्लानिंग की गई। इस डिवाइस को सीआरटीडी कहा जाता है। उस डिवाइस को मेदांता रांची में गत गुरुवार को लगाया गया। डिवाइस को लगाने के बाद मरीज की इलाज में काफी सुधार है। पहले जितना शार्टनेस आफ ब्रेथ था, वह काफी कम हो गया है। इस डिवाइस को लगाने से धीरे-धीरे इसका इंप्रूवमेंट और बढ़ेगा। आने वाले 15 से 20 दिन में वो मरीज आक्सीजन के बिना वह अपना काम कर लेंगी। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस को लगाने के लिए सबसे पहले हृदय में 3 तार डालने होते हैं। 3 चेंबर में 3 तार इस डिवाइस को चलाते हैं। और साथ में इन वायर के साथ एक बैटरी कनेक्टेड होता है। जिसे पल्स जनरेटर कहा जाता हैं। पल्स जनरेटर में  बैटरी होता है। इसको स्किन के नीचे लेफ्ट साइड के सोल्जर के नीचे स्किन में फिट कर दिया जाता है। 

चेस्ट के अपर पार्ट में बैटरी को फिट कर दिया जाता है और फिर डिवाइस को तीन तार से कनेक्ट कर दिया जाता है। ये तार हर्ट का जो कॉन्ट्रैक्टलिटी उसे सिंक्रोनाइज करके रेगुलेटेड वे में कॉन्ट्रैक्ट करवा देते हैं। यानी मरीज का जो इजेक्शन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, इसको इंप्रूव कर के 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक जा सकते हैं। यह 60 प्रतिशत भी हो सकता है। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस की बैटरी एक तरह से कैपेसिटर है। इसमें चार्ज स्टोर होता है। इसके 3 तार में से एक तार शॉकवेव देता है। अगर पेशेंट को कभी और अरिदिमिया होता है। वीटी/वीएफ होता है तो उसके अंदर एक तार शॉकवेव देगा और आटोमेटिक डिफाइब्रिलेशन देकर अरिदिमिय को खत्म कर देगा। जिसके कारण पेशेंट की जान बच जायेगी। इस मशीन को लगाने का मुख्य कारण यही है कि बहुत सारे मरीज जिनके हृदय का फंक्शन कम होता है और अरिदिमिया होने का चांस ज्यादा होता है। इसको लगाने से अगर कोई अरिदिमिया हो तो वह आॅटोमेटिक शॉक देकर उसको कन्वर्ट कर देता है और मरीज की जान बच जाती है। 

डॉ मुकेश ने बताया कि इस मरीज के सांस फूलने का मुख्य कारण रिड्यूस्ड हार्ट फंक्शन था। हृदय का जो पंपिंग फंक्शन है, वह रिड्यूस हो चुका था। वैसे जो नॉरमल पर्सन होते हैं उनके हृदय का फंक्शन 60 प्रतिशत से ऊपर होता है। इस मरीज के हर्ट का पंपिंग फंक्शन 27 प्रतिशत तक हो चुका था। डॉक्टर मुकेश ने बताया कि मेदांता रांची में कार्डियक क्रिटिकल केयर के लिए सारी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। 

वहीं मेदांता रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता रांची में इलाज की सारी विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध है। यहां डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम है, जो किसी भी हालात में इलाज करने में सक्षम हैं। इसी कारण से मेदांता रांची चिकित्सा के क्षेत्र में नया आयाम हासिल कर रहा है।

Published / 2023-02-14 18:04:36
अब नया खतरा... मारबर्ग वायरस की चपेट में आ सकती है पूरी दुनिया

  • शरीर से पसीने की तरह निकलने लगता है खून, डब्ल्यूएचओ ने बुलायी आपात बैठक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूरा विश्व अभी कोरोना वायरस के कहर से उबरी भी नहीं है कि एक और खतरनाक वायरस मारबर्ग ने चिंता बढ़ा दी है। इस मारबर्ग वायरस से अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी में अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला से मिलते-जुलते इस बेहद घातक वायरस के लिए कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। ऐसे में इसे रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। 

इस नये वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की भी चिंता बढ़ा दी है और उसने इसे लेकर एक आपात बैठक बुलाई है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने एक बयान में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इक्वेटोरियल गिनी में नये मारबर्ग वायरस के प्रकोप पर चर्चा करने के लिए मारबर्ग वायरस वैक्सीन कंसोर्टियम की एक तत्काल बैठक बुलायेगा। संगठन ने इसके साथ ही बताया कि यह बैठक भारतीय समयानुसार मंगलवार शाम 7:30 बजे होगी। 

कितना खतरनाक है मारबर्ग वायरस 

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मारबर्ग एक बेहद घातक वायरस है, जो चमगादड़ों से लोगों में पहुंचता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को रक्तस्रावी बुखार आता है और धीरे-धीरे उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि अब तक सामने मिले मरीजों में से 88 फीसदी की मौत हो गयी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की अफ्रीका इकाई के निदेशक डॉ मतशिदिसो मोइति ने बताया कि मारबर्ग वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक है जो कि इबोला वायरस की फैमिली से ही संबंध रखता है। यह वायरस इंसानों में फ्रूट बैट से पहुंचा है और इससे संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 88 प्रतिशत है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद अचानक लक्षण दिखने शुरू होते हैं। 

क्या हैं इसके लक्षण 

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने बताया है कि मारबर्ग वायरस के लक्षण 2 से लेकर 21 दिनों की अवधि के बीच अचानक शुरू होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द होते हैं। इन लक्षणों के कुछ दिनों बाद छाती, पीठ और पेट पर दाने निकल आते हैं। इसके अलावा उल्टी, सीने में दर्द, गले में खराश, पेट में दर्द और दस्त इस वायरस के लक्षण हो सकते हैं।

Published / 2023-02-08 18:07:13
मिलावट के कारण 2050 तक 70% लोग होंगे कैंसर पीड़ित : दिनकर सबनीस

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, झारखंड प्रांत के तत्वावधान में होचर, कांके स्थित नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय परिसर में उपभोक्ता जागरण पर एक संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी का शुभारंभ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेहताब सिंह कौरव, प्रांत अध्यक्ष पिंटू चाकिया, ग्राम संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति व रांची महानगर संपर्क सहप्रमुख अमरेंद्र सिंह व प्राचार्य डॉ बिरेन्द्र साहू ने संयुक्त रूप से भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि एवं वेद मंत्रों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया गया। 

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस ने कहा कि ग्राहकों को न्याय पाने के चेतना जागरण करने के निमित्त ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक आयाम अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के रूप में गठित हुआ है। उन्होंने कहा भारतीय उपभोक्ता अथवा ग्राहक को बाजार में कानून की जानकारी के अभाव में कई प्रकार के अन्याय का सामना करना पड़ता है। एमआरपी अथवा अधिकतम खुदरा मूल्य ग्राहक के लिए विक्रय मूल्य नहीं है, ग्राहक इस मूल्य से मोलभाव कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि किसी प्रकार के ग्राहक को कठिनाई होती है तो वह उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा के अपने अधिकार को प्राप्त कर सकते हैं। आज विज्ञापन के भ्रम अथवा मोह जाल में भारतीय समाज ऐसा फंस गया है जो अपने पारंपरिक खाद्य सामग्री अथवा जीवन शैली को नकारते हुए आरामदायक चीजों को प्राथमिकता देकर रोग को आमंत्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज मिलावट चरम पर है। डब्ल्यूएचओ ने चेताया है कि यदि सामग्रियों में मिलावट पर रोक नहीं लगाई गई तो 2050 तक 70% लोग कैंसर से पीड़ित हो जायेंगे। 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेहताब सिंह कौरव ने कहा समाज के प्रत्येक व्यक्ति एक ग्राहक के रूप में है,जो प्रतिदिन अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बाजार पर आश्रित होता है। ग्राहकों की सुविधा के लिए ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 48 वर्ष पूर्व अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की स्थापना की थी। ग्राहकों के लिए 1986 में कानून भी बनाया गया परंतु आज भी अपने अधिकार को प्राप्त करने में समाज पीछे है। उन्होंने कहा जब तक रहोगे मौन, तो सुनेगा कौन अर्थात ग्राहक को अपने अधिकार के लिए आवाज उठाना ही चाहिए। 

संगोष्ठी में उद्बोधन के पूर्व नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय के प्राचार्य डॉ बिरेन्द्र साहू ने राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को शॉल ओढ़ाकर एवं झारखंड के सदानों का इतिहास नामक पुस्तक भेंट करके तथा अन्य पदाधिकारियों को शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा अंग वस्त्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का अध्यक्षता प्रांत  अध्यक्ष पिंटू चाकिया एवं संचालन प्रांत संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति ने किया।

संगोष्ठी में दुलाल उरांव, भीम हो, राजू कुमार, शिव प्रसाद साहू, बबलू कुमार साहु, उर्मिला केरकेट्टा, सुनीता मुंडा, विजय उरांव, बालचंद उरांव, सुनीता कश्यप, कुसुम टोप्पो, सुजीत उपाध्याय, राम किशोर साहू, राकेश चंद्र झा, मनीष साहू, अनु देवी, रिंकी देवी सहित लगभग 550 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के झारखंड प्रांत अध्यक्ष पिंटू चकिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2023-01-20 09:37:31
बढ़ता भारत : दूसरे देशों से तकनीक साझा करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने भारत से मांगी मदद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 600 से ज्यादा कोरोना वायरस के स्वरूपों की पहचान करने में भारतीय वैज्ञानिकों को सफलता मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विनोद स्कारिया ने कहा कि हमें खुशी है कि भारत अब दूसरे देशों को जीनोम साइंस में प्रशिक्षित कर रहा है। 
इसका एक सफल परिणाम मालदीव में देखने को मिला, जब उस देश ने अपने यहां कोरोना संक्रमण को लेकर पहला जीनोम सीक्वेंस किया। तीन से चार दिन तक चले इस प्रशिक्षण में उनकी टीम ने मालदीव के वैज्ञानिक और डॉक्टरों का  मार्गदर्शन किया।

600 से ज्यादा कोरोना वायरस के स्वरूपों की पहचान करने में भारतीय वैज्ञानिकों को मिली सफलता 

सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा डब्ल्यूएचओ : कोरोना महामारी को नियंत्रण में लाने के लिए डब्ल्यूएचओ बीते लंबे समय से सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। भारत की तरह दूसरे देशों को भी वायरस की पहचान करने में सक्षम बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने यह पहल शुरू की है। किसी भी जीव के डीएनए में मौजूद समस्त जीनों का अनुक्रम संजीन या जीनोम कहलाता है। कोरोना महामारी में नवंबर 2020 में सरकार ने पहली बार जीनोम विज्ञान का सहारा लेते हुए कोरोना वायरस के विभिन्न स्वरूपों की पहचान करना शुरू किया था। इसके लिए बाकायदा एक नेटवर्क स्थापित किया गया, जिसमें अब देश की 53 से ज्यादा प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

Published / 2023-01-14 09:57:19
अब लीजिये... इस कोरोना वैक्सीन से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

  • फिर भी फाइजर-बायोनटेक वैक्सीन लगाने की सलाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। इस जानलेवा महामारी से रोकथाम के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। लेकिन इन सब के बीच यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने शुक्रवार को एक ऐसी जानकारी दी है जो कि चिंताजनक है। 

दरअसल, अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि अमेरिकी दवा निर्माता फाइजर इंक और जर्मन पार्टनर बायोएनटेक के अपडेटेड बाइवेलेंट कोविड-19 शॉट  से बुजुर्गों में ब्रेन स्ट्रॉक का खतरा हो सकता है। हालांकि, फिर भी सीडीसी ने लोगों को वैक्सीन लेते रहने की सलाह दी है।

65 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए खतरा : सुरक्षा निगरानी प्रणाली ने कहा कि एक सीडीसी वैक्सीन डेटाबेस ने एक संभावित सुरक्षा मुद्दे को उजागर किया था जिसमें 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को 22-44 दिनों की तुलना में फाइजर/बायोएनटेक बाइवेलेंट शॉट प्राप्त करने के 21 दिनों के बाद इस्केमिक स्ट्रोक होने की अधिक संभावना थी। बता दें कि इस्कीमिक स्ट्रोक मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को रक्त पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका में किसी अवरोध (थक्के या एम्बोलाइ) के कारण होते हैं।

Published / 2023-01-13 11:32:38
बूस्टर डोज में कोवोवैक्स भी शामिल

  • सरकारी समिति ने की बाजार में उतारने की सिफारिश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने अहम फैसला लेते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (के कोविड रोधी वैक्सीन कोवोवैक्स को बाजार में उतारने संबंधी मंजूरी दिये जाने की सिफारिश की है। यह एक बूस्टर खुराक है जो कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले वयस्कों को ही लगायी जानी है। 

आधिकारिक सूत्रों ने कल गुरुवार को इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एसआईआई के निदेशक (सरकारी और नियामक मामले) प्रकाश कुमार सिंह ने हाल में भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखकर कुछ देशों में कोविड-19 महामारी के बढ़तों मामलों को देखते हुए 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में कोवोवैक्स वैक्सीन के लिए मंजूरी देने की मांग की थी।

बूस्टर डोज के लिए सिफारिश
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने बुधवार को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया और कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक लेने वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में कोविड रोधी टीके कोवोवैक्स के लिए विपणन मंजूरी देने को लेकर सिफारिश की थी।

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 28 दिसंबर, 2021 को वयस्कों में आपातकालीन स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी और नौ मार्च, 2022 को कुछ शर्तों के साथ 12 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए मंजूरी दी थी। डीसीजीआई ने सात से 11 साल आयु वर्ग के बच्चों के लिए 28 जून, 2022 को इसे मंजूरी दी थी। कोवोवैक्स को नोवावैक्स से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए तैयार किया जाता है। इसे सशर्त विपणन मंजूरी के लिए यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने अनुमोदित किया है।

आदर पूनावाला ने जतायी थी उम्मीद
इससे पहले रविवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पूनावाला ने कहा था कि उनके कोवोवैक्स टीके को अगले 10 से 15 दिनों में कोविडरोधी बूस्टर खुराक के तौर पर मंजूरी मिल जायेगी। पूनावाला ने रविवार को यहां भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा कि टीका कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन स्वरूप के खिलाफ बहुत असरदार है। राज्यों और जिलों को कोविशील्ड टीके नहीं मिलने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास आपूर्ति के लिए टीके का पर्याप्त भंडार है।

उन्होंने कहा कि कोवोवैक्स को अगले 10-15 दिनों में बूस्टर खुराक के रूप में मंजूरी मिल जायेगी। यह वास्तव में सबसे अच्छा बूस्टर है क्योंकि यह कोविशील्ड की तुलना में ओमीक्रॉन के खिलाफ बहुत असरदार है। पूनावाला ने कहा कि हर कोई भारत की ओर आशा की नजर से देख रहा है, न केवल स्वास्थ्य सेवा के मामले में बल्कि इसलिए कि देश एक विशाल और विविध आबादी की देखभाल करने में कामयाब रहा है और इसने कोविड-19 महामारी के दौरान 70 से 80 देशों की मदद भी की।

Published / 2023-01-13 08:45:19
स्वस्थ जीवन के लिए घटायें चीनी की मात्रा...

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के देशों को मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें में सुझाया गया है कि स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देश किस तरह राजकोषीय नीतियां तैयार कर सकते हैं। दिशानिर्देशों के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से पर फिलहाल मंत्रणा चल रही है।

इसमें कहा गया है कि कर प्रणाली का सहारा लेकर चीनी युक्त पेय पदार्थों (एसएसबी) का उत्पादन नियंत्रित किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने विशेषकर उन देशों के अनुभव से सीखने की सलाह दी है जो चीनी युक्त पेय पदार्थों पर अतिरिक्त कर लगा रहे हैं। ऐसे देशों में ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको शामिल हैं।

इस चिंता का एक मजबूत आधार है। विकासशील देशों सहित पूरी दुनिया में आवश्यकता से अधिक चीनी का इस्तेमाल मधुमेह (टाइप 2 डायबिटीज) का एक प्रमुख कारण माना जाता है। कार्बन युक्त पेय पदार्थ (कार्बोनेटेड ड्रिंक्स), एनर्जी ड्रिंक्स़, फलों के रस ये सभी एसएसबी की श्रेणी में रखे गए हैं।

मधुमेह जीवनशैली से जुड़ा रोग है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशेषकर, उन देशों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है जहां मधुमेह की बीमारी तेजी से फैल रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार खराब गुणवत्ता वाले, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ पूरी दुनिया में धूम्रपान से भी अधिक संख्या में लोगों को लील रहे हैं।

सरकारें निकोटिन का सेवन करने से रोकने के लिए राजकोषीय नीति का इस्तेमाल करती रही हैं, इसलिए यह आशा करने का तर्कपूर्ण कारण है कि सरकार मधुमेह पर नियंत्रण के लिए भी ऐसी ही नीतियां आजमा सकती है।

हालांकि भारत में कुछ अलग तरह की समस्याएं हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना कुछ ऐसी है जिसमें वर्तमान में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। वातित पेय (एयरेटेड ड्रिंक्स) पर सिगरेट की तरह ही 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इस पर और कर लगाना बुद्धिमानी नहीं होगी क्योंकि जीएसटी संरचना को अस्थिर करने से बचना ही उचित रहेगा।

एक और कर श्रेणी जोड़ने से पूरा जीएसटी तंत्र और पेचीदा हो सकता है। इस श्रेणी में मीठे एवं प्रसंस्कृत फल रस लाये जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इस समय फ्रूट जूस का वर्गीकरण इस बात की व्याखात्मक रेखा है कि अतिरिक्त चीनी (एडेड शुगर) या अन्य मीठी सामग्री मायने रखती हैं या नहीं। इन पर 12 प्रतिशत दर से कर लगता है।

इस वर्गीकरण को दो और श्रेणियों में विभाजित करना सीधा उपाय होगा। इनमें एक श्रेणी एडेड शुगर वाली और दूसरी प्राकृतिक रसों वाली हो सकती है। एडेड शुगर वाली श्रेणी पर कार्बन फ्रूट जूस की तरह ही कर लगाया जा सकता है। वास्तव में एडेड शुगर ही समस्या की जड़ है, न कि कार्बन का मिश्रण।

वास्तव में परिष्कृत चीनी युक्त सभी उत्पादों पर ऊंचा कर लगाया जा सकता है। इससे खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां अधिक चीनी युक्त उत्पाद बेचने के बजाय अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर तरीके खोज सकती हैं। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामान्य तंदुरुस्ती के लिए इन उपायों के परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। इसके अलावा उत्पादों पर एडेड शुगर का लेबल चिपकाया जा सकता है जैसा कि शाकाहारी एवं मांसाहारी उत्पादों के मामले में होता है।

इस विषय पर खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं दे पाया है। रोजमर्रा की जरूरतों के सामान बनाने वाली कंपनियों की मुहिम इसका एक कारण हो सकता है। उत्पादों पर सूचना स्पष्ट होने से उपभोक्ताओं का ध्यान तत्काल इसकी तरफ जाता है। केवल उत्पाद में उपयोग में लाए गए तत्त्वों के नाम अंकित करने से उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित नहीं होता है।

उत्पादों पर स्पष्ट लेबल होने से उपभोक्ताओं को चयन करने में आसानी होगी। दुनिया में इस संदर्भ में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां तंबाकू उत्पादों की तरह ही स्वास्थ्य संबंधी वैधानिक चेतावनी अंकित करना जरूरी होता है। इस दिशा में नियामकीय हस्तक्षेप की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों में मधुमेह के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाना भी सरकार की तरफ से एक अच्छा प्रयास हो सकता है।

Published / 2023-01-12 18:34:25
ठंड में पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें हर्ट के मरीज, रखें बीपी का ख्याल : डॉ नीरज प्रसाद

  • मेदांता रांची के डॉक्टर ने लोगों को दी सलाह 

एबीएन हेल्थ डेस्क। ठंड के मौसम में हार्ट के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें कई ऐसे भी है जिन की हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे पेशेंट्स मरीजों को इस मौसम में विशेष रूप से अपना ख्याल रखने की जरूरत है। मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी डॉक्टर नीरज प्रसाद का कहना है कि कड़ाके की ठंड में कुछ सावधानियां जरूर रखनी पड़ेगी ताकि हालात विपरीत न हो। 

डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि कुछ ऐसे भी केस होते हैं। जिनको हल करना बहुत मुश्किल होता है। कार्डियोजेनिक शॉक वाले केस काफी चैलेंजिंग होते हैं। इनमें तीन ऐसे लिजन्स होते हैं, जिनके इलाज के दौरान काफी सावधानी रखनी होती है। इनमें एक नस होती है जिसकी शुरूआत मुंह से होती है और उसमें दो-तीन ब्रांच निकलते हैं। मुंह से निकलने वाली नस में जो बीमारी होती है और उसे खोला जाता है तो बीपी क्रैश करने का डर होता है। इस हालत में बहुत सावधानी और तेजी से इलाज करना पड़ता है। इसके अलावा सीटीओ क्रॉनिक टोटल ओकुलजन होता है। यह अगर पूरी तरीके से बंद हो तो भी मैं इसे खोल देता हूं। डॉक्टर नीरज बताते हैं कि हर 3 महीने में कोई न कोई एक चैलेंजिंग केस आता है। कई केस ऐसे भी आए हैं जिन में मरीजों को 10 से ज्यादा ब्लॉकेज देखा गया। अभी तक मैंने 18 ब्लॉकेज को ठीक किया है। 

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद बताते हैं कि शीतकालीन मौसम में तीन तरह की दिक्कतें आती है। तापमान कम हो जाता है, तब हमारे शरीर की नसें सिकुड़ जाती है तो रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। जिसके कारण ब्लॉक टूट जाते हैं। इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ठंड के वक्त 65 साल के ऊपर के लोगों को बहुत दिक्कत होती है। उनको इस मौसम में बचाकर चलना चाहिए।  

अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो किसी भी प्रकार के वैसे खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। जिनमें निकोटिन होता है। इसके अलावा कभी भी तनाव न लें। तनाव के कारण ब्लड प्रेशर क्रिएट होता है। ब्लड प्रेशर के कारण कभी-कभी हार्ट अटैक होने का डर बना रहता है। अगर भोजन कर रहे हैं तो कोशिश रखें कि वह सात्विक हो। कई लोग प्रतिदिन नॉनवेज का सेवन करते हैं। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल बनता है जो खतरनाक हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से न केवल हार्ट बल्कि ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है। साथ ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान रखना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर नहीं होना चाहिए। इससे आर्टरी पर असर पड़ सकता है।  

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि ठंड के दिनों में पानी की कमी से हार्ट के वेंट्रिकल में क्लॉट बनता है। वह कभी मस्तिष्क में या कहीं और चल जाता है पर वह हानिकारक हो सकता है। ये कम पानी पीने से होता है। इसलिए इस मौसम में पानी पीने में कमी नहीं होनी चाहिए। हल्का गर्म पानी पी सकते हैं।

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