हेल्थ

View All
Published / 2023-05-05 18:57:40
अजब-गजब : मां के गर्भ में बच्चे की ब्रेन सर्जरी

दुनिया में पहली बार डॉक्टरों ने किया ऐसा चमत्कार

एबीएन नॉलेज डेस्क। चिकित्सकों की एक टीम ने मां के गर्भ में ही पल रहे एक अजन्मे बच्चे की ब्रेन सर्जरी कर चमत्कार किया है। इस तरह की यह दुनिया की पहली सर्जरी है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डॉक्टरों की एक टीम ने गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के अंदर एक दुर्लभ रक्त वाहिका की असामान्य स्थिति का इलाज करने के लिए उसकी ब्रेन-सर्जरी की है।

अमेरिकी शहर बोस्टन में डॉक्टरों की एक टीम ने यह सफल सर्जरी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गैलेन मालफॉर्मेशन की नस के रूप में जानी जाने वाली दुर्लभ बीमारी का इलाज करने के लिए सफलतापूर्वक भ्रूण की सर्जरी की गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भ के अंदर हुई यह सर्जरी अल्ट्रासाउंड-गाइडेड प्रक्रिया थी। 

यह सर्जरी मार्च में हुई थी लेकिन इसके बारे में पूरी रिपोर्ट गुरुवार को स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित हुई है। सीएनएन के मुताबिक, गैलेन मालफॉर्मेशन की स्थिति तब विकसित होती है, जब ब्रेन से हार्ट तक खून पहुंचाने वाली रक्त नलिका का विकास भ्रूण के अंदर नहीं हो पाता है।

इस नली के विकसित नहीं होने से बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है और उसे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है।  बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के रेडियोलॉजिस्ट के स्पेशलिस्ट डॉ डैरेन ओरबैक ने बताया कि ऐसी स्थिति में बच्चे के ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट फेल होने का खतरा रहता है। 

ओरबैक के मुताबिक, आमतौर पर ऐसे मामलों में बच्चे के जन्म लेने के बाद उसका इलाज किया जाता है और उसके ब्रेन में एक कैथेटर डालकर उसके ब्लड सप्लाई की गति को कम किया जाता है। बतौर डॉक्टर इस प्रक्रिया में 50 से 60 फीसदी बच्चे बहुत कमजोर हो जाते हैं और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में मृत्युदर भी 40 फीसदी के करीब होती है।

Published / 2023-04-24 14:18:36
झारखंड : मलेरिया के प्रकोप को देख स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना के बाद गढ़वा में मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि गढ़वा जिले के 7 प्रखंड डेंजर जोन में आ गये हैं। इन 7 प्रखंडों में मलेरिया का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 

हालांकि स्वास्थ्य महकमा बीमारी की रोकथाम को लेकर अभियान चला रहा है, लेकिन जरूरी है कि आम जनता भी सावधानियां बरतें। गढ़वा जिले में मलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या से हड़कंप मचा है। एक्शन मोड में आए स्वास्थ्य महकने ने जिले के सात प्रखंडों को डेंजर जोन घोषित कर दिया है। इन प्रखंडों में मेराल, धुरकी, बंशीधर नगर, भवनाथपुर, माझीयाओ, रंका और भंडरिया शामिल हैं।

मौसम में बदलाव है वजह : गढ़वा जिले में कभी भीषण गर्मी तो कभी बारिश से मौसम में हो रहे बदलाव के चलते मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के रोकथाम को लेकर अभियान चलाया है। जिसके तहत लगभग 25 हजार ऐसे सैम्पल कलेक्ट किये गये, जिन्हें बुखार था। 

हालांकि सभी सैंपल्स की रिपोर्ट निगेटिव आयी, लेकिन जब सैंपल्स को पटना भेज कर क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया तो दो पॉजिटिव मरीज भी मिले। जिसमें एक मेराल और एक माझीयाओ के हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरुकता फैलाने कोशिश कर रहा है ताकि ज्यादा लोग बीमारी की चपेट में न आये।

ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान : मलेरिया के ज्यादातर मरीज ग्रामीण इलाकों से मिलते हैं ऐसे में ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जगह-जगह पर डीडीटी का छिड़काव भी किया जा रहा है। मलेरिया मच्छर की फीमेल प्रजाति एनोफिलीज के काटने से फैलता है।

 इस मच्छर में प्लाज्मोडियम नाम का जीवाणु पाया जाता है। इसी से संक्रमित होकर लोग बीमार पड़ते हैं। मलेरिया के लक्षण शुरुआत के 2 से 3 दिनों के अंदर ही दिखने लगते हैं। मलेरिया होने पर बुखार आना, सिर दर्द होना, उल्टी होना, मन मचलना, ठंड लगना, चक्कर आना, थकान होना, पेट दर्द, थकान और बैचेनी होना जैसे लक्षण शामिल हैं।

हालांकि अब तो वैक्सीन्स से मलेरिया का बचाव हो जाता है, लेकिन कई बार ये बीमारी मौत का कारण भी बन जाती है। ऐसे में जरूरी है कि मलेरिया से बचाव के लिए सावधानियां बरती जाये।

इसके लिए

  • मच्छर-दानी लगाकर सोएं और सफाई का ध्यान रखें।
  • घर के अंदर और आस-पास मच्छर मारनेवाली दवा छिड़कें।
  • मोस्कीटो रिपेलेंट मशीनों का इस्तेमाल जरूर करें।
  • घर के दरवाज़ों और खिड़कियों पर जाली लगायें।
  • ऐसे कपड़े पहनें जो पूरे शरीर को ढंकें।
  • घर के अंदर या आस-पास पानी जमा ना होने दें।

Published / 2023-04-12 08:35:21
क्या पहली बार आयुर्वेदिक फॉर्मूले से रुकेगी कैंसर की रफ्तार?

एबीएन हेल्थ डेस्क। करीब एक दशक लंबी रिसर्च के बाद दुनिया में पहली बार पारंपरिक चिकित्सा के दम पर कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकी जायेगी। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए) के डॉक्टरों ने आयुर्वेद सिद्धांतों के जरिए वी2एस2 नामक दवा की खोज की है जिसे हाइड्रो एल्कोहलिक तत्वों से तैयार किया है।

दवा को बाजार में आने से पहले क्लीनिकल ट्रायल से गुजरना होगा जिसकी शुरुआत मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल से होने जा रही है। इस प्री क्लीनिकल ट्रायल के बाद जम्मू में उसके आगे का परीक्षण किया जायेगा। एनआईए के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि प्री क्लीनिकल ट्रायल जल्द ही मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में शुरू होंगे। इसके बाद जयपुर और जम्मू कश्मीर में ट्रायल पूरा होगा। 

पारंपरिक चिकित्सा और वैज्ञानिक तथ्यों को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ ज्योति कोडे ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस अध्ययन के लिए मॉडल तैयार किया गया है। क्लीनिकल ट्रायल फेज पूरा करने में करीब दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है लेकिन इस अवधि में उनके पास ठोस परिणाम होंगे और फिर यह उपचार पद्धति में शामिल हो सकती है।

संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद के कई अध्यायों में कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ रोकने का वर्णन मिलता है। इन्हीं फाॅर्मूला को लेकर लंबे समय से डॉक्टर अध्ययन कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान इसमें थोड़ी रुकावट आई थी लेकिन जब प्रयोगशाला में यह तैयार हुआ तो इसमें कैंसररोधी गुणों की पुष्टि हुई। साथ ही, पता चला कि यह इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी सहायक है।

Published / 2023-04-11 18:35:26
रांची में न्यूरोथैरेपी चिकित्सा कैंप का शुभारंभ

टीम एबीएन, रांची। श्री माहेश्वरी सभा रांची एवं लायंस क्लब रांची नार्थ के सयुंक्त प्रयास से आज दिनांक 11 अप्रैल को स्थानीय माहेश्वरी भवन में न्यूरोथैरेपी चिकित्सा कैंप का शुभारंभ किया गया। यह कैंप 11 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलेगा। 

नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे 10 दिनों तक रांची में रोगियों का इलाज कर उन्हें लाभान्वित करेंगे। न्यूरोथैरेपी एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जिसके द्वारा जटिल से जटिल एवं पुराने से पुराने रोगों का उपचार किया जाता है।  

इस पद्धति द्वारा मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र और हार्मोन असंतुलन के विकार को दूर कर उपचार किया जाता है। यह दवा रहित नैसर्गिक उपचार पद्धति है। तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र को ठीक कर बीमारी के मूल कारण को समाप्त किया जाता है। शरीर के केंद्र नाभि को व्यवस्थित कर रोग को नष्ट किया जाता है।  

विभिन्न पुरानी और गंभीर बीमारियां जैसे :- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों का दर्द, कब्ज और पेट की अन्य बीमारियां, पीठ और कमर का दर्द, मंद बुद्धि या अवसाद, अम्ल पित्त से संबंधित बीमारियां, अस्थमा या सांस की बीमारी, बवासीर, अनिंद्रा, अनियमित या पीड़ादायक मासिक, चक्कर आना आदि सभी तरह के रोगों का उपचार संभव है। 

कैंप का उद्घाटन झारखंड बिहार प्रदेश माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष श्री राज कुमार मारु तथा लायंस क्लब के पूर्व जिलापाल श्री संजीव पोद्दार ने किया। श्री राज कुमार मारु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे कई रोगी जिनका इलाज अब दवाइयों से संभव नहीं है उन्हें इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से लाभ मिलेगा। 

नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे ने बताया की वर्तमान में रहन-सहन एवं खानपान के कारण शरीर में हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है एवं तंत्रिका तंत्र में विकार पैदा होने लगता है इलाज से हार्मोन को संतुलित एवं तांत्रिक तंत्र को मजबूती प्रदान कर रोगों का निवारण किया जाता है। 

लायंस क्लब के पूर्व जिला पाल श्री संजीव पोद्दार ने कैंप के आयोजक श्री नरेन्द्र लाखोटिया एवं श्री मुरारी लाल राजगढ़िया की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को रांची की जनता तक पहुंचा कर उल्लेखनीय कार्य किया है। 

श्री माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष किशन साबू ने बताया कि भविष्य में इस तरह के वैकल्पिक चिकित्सा कैंप का आयोजन किया जाता रहेगा। चिकित्सा परामर्श एवं इलाज प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक तथा संध्या 4 बजे से 7 बजे तक चलेगा।

आज के उद्घाटन कार्यक्रम में शिव शंकर साबू, रोहित अग्रवाल, प्रभात साबू, मनोज चौधरी, अमित मालपानी, अंकुर डागा, मंजू दरगड़, अजय दरगड़ उपस्थित रहे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2023-04-10 18:48:42
कोरोना संक्रमण के साथ ही बढ़ने लगी सख्तियां

  • कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ देशभर में हो रहीं मॉकड्रिल, स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश जारी 

एबीएन हेल्थ डेस्क। देश के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्तियों का दौर लौटने लगा है। कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना फिर अनिवार्य कर दिया है, तो कई प्रदेशों ने बेहद सावधान रहने की हिदायत दी है। जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है। 

देशभर में मॉकड्रिल शुरू 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी अस्पतालों, पॉलिक्लीनिक व डिस्पेंसरियों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, कोरोना संक्रमण के चलते किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश भर में सरकारी और निजी अस्पतालों में दो दिन मॉकड्रिल होगी। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में तैयारियों को परखने का निर्देश दिया था, साथ ही तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल करने के भी निर्देश दिये थे। जिसके बाद आज देशभर में मॉकड्रिल शुरू हो गई हैं। 

चेन्नई के राजीव गांधी जनरल हॉस्पिटल में भी कोरोना महामारी की तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल की गई, जिसका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण भी किया। संक्रमण को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियातन सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। 

जिला प्रशासन और पंचायतों को भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। केरल सरकार ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग नागरिकों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया है। 

पुडुचेरी प्रशासन ने भी तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक स्थलों पर मास्क अनिवार्य कर दिया है। वहीं, यूपी सरकार ने राज्य के सभी हवाईअड्डों पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सरकारी आदेश में पॉजिटिव पाए जाने वाले नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने को भी कहा गया है।

Published / 2023-04-07 14:08:25
चीन पर भड़क उठा डब्ल्यूएचओ

  • कहा-आपके पास कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े अधिक डेटा हैं

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर से चीन पर सवाल उठाये हैं। सही तरह से जानकारी न देने पर नाराजगी भी जाहिर की है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने चीन पर कोविड-19 की उत्पत्ति पर जानकारी साझा करने का दबाव डाला है।

उन्होंने कहा कि उन्हें निश्चित तौर पर ये पता है कि कोरोना वायरस के उत्पत्ती के संबंध में चीन के पास अधिक जानकारी है। डॉ टेड्रोस ने आगे कहा कि उन्होंने चीन से जल्द से जल्द सारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख के अनुसार, कोरोना वायरस के पहली बार उभरने के बाद से तीन से भी अधिक सालों से इसको लेकर सारी परिकल्पनाएं चर्चा की मेज तक ही सीमित हैं।

डब्ल्यूएचओ ने और क्या कहा?

डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने जिनेवा में मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन के पास जो जानकारी है, उसकी पूरा जाने बिना, कोरोना के संबंध में सभी बातें परिकल्पनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की उत्पत्ती के संबंध में यह डब्ल्यूएचओ की स्थिति है और इसलिए हम चीन से इस पर सहयोग करने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर बीजिंग पूरा डेटा दे देता है तो हमें पता चल जायेगा कि क्या हुआ या यह (कोरोना) कैसे शुरू हुआ।

रेकून कुत्ते से फैला कोरोना?

पिछले महीने के आखिर में, अचानक ये बात सामने आई कि रेकून कुत्ते, जो एसएआरएस- सीओवी -2 वायरस के समान वायरस फैलाने में सक्षम हैं, के कारण कोरोना वायरस का प्रसार हुआ। इधर, शोधकर्ता जो सटीक डेटा की तलाश में हैं, उनका कहना है कि उक्त तर्क (वायरस जानवर से इंसानों में फैला) संक्रमण के प्रसार के कारणों को सपोर्ट तो करता है, लेकिन कारण यही होगा ये निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है। 

डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने गुरुवार को पत्रकार को बताया कि नया डेटा सुराग प्रदान करता है, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, जिसमें जोर देकर कहा गया है कि डेटा  जनवरी और फरवरी 2020 में तीन साल से अधिक समय पहले एकत्र किया गया था  जिसे बहुत पहले साझा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, जानकारी के बिना, उचित आकलन करने के लिए डेटा के बिना, हमारे लिए ठोस जवाब देना बहुत मुश्किल है और वर्तमान समय में, हमारे पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि महामारी कैसे शुरू हुई।

 उन्होंने निश्चित तौर पर कहा कि चीन के अविश्वसनीय वैज्ञानिकों ने कहीं अधिक अध्ययन किया है और बहुत अधिक डेटा एकत्र किया है जो खोज में प्रासंगिक हो सकता है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि उनके पास अधिक जानकारी है, वैज्ञानिकों, सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों और सरकारों की आवश्यकता है। यह कोई खेल नहीं है।

वुहान से हुई कोरोना की शुरुआत

कोरोनावायरस की शुरुआत दिसंबर, 2019 में सबसे पहले चीन के बंदरगाह शहर वुहान से हुई थी। इसकी चपेट में अब तक दुनिया के 68 करोड़ 45 लाख 87 हजार 758 लोग आ चुके हैं। इनमें 65 करोड़ 74 लाख 80 हजार 712 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 68 लाख 36 हजार 267 मरीजों की मौत हो चुकी है। दुनिया में अभी 2 करोड़ 02 लाख 70 हजार 779 मरीज ऐसे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

Published / 2023-04-05 21:32:46
लोगों को कई खतरनाक बीमारी दे गया कोरोना...

  • भारत में हुए रिसर्च में सामने आई बड़ी खबर 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार सार्स-सीओवी-2 वायरस से होने वाला डिमेंशिया से जूझ रहे रोगियों में इस रोग को और बढ़ा सकता है। जर्नल आॅफ अल्जाइमर्स डिसीज रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि डिमेंशिया के सभी प्रकारों वाले प्रतिभागियों को सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद डिमेंशिया और तेजी से बढ़ा। 

मानवीय समझ पर कोरोना के प्रभाव को लेकर अभी तक विस्तृत जानकारी का अभाव है, वहीं विशेषज्ञों ने इसे ब्रेन फॉग की संज्ञा दी है। अनुसंधानकतार्ओं ने पहले से डिमेंशिया से जूझ रहे 14 रोगियों में संज्ञानात्मक विकास पर कोरोना के प्रभावों का अन्वेषण किया जिन्हें सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद सोच-समझ संबंधी समस्या और बढ़ गई थी। 

इन रोगियों में चार अल्जाइमर्स रोग, पांच वस्क्युलर डिमेंशिया, तीन पार्किंसन से ग्रस्त थे और दो रोगी फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया की वजह से व्यवहार में बदलाव के शिकार थे। इन प्रतिभागियों का चयन कुल 550 डिमेंशिया रोगियों में से किया गया जिन्होंने मई 2013 से सितंबर 2022 के बीच पश्चिम बंगाल में बर्द्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल, बांगड़ इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस और निजी क्लीनिक में इलाज कराया। 

उन्होंने कहा कि रोगियों में समस्या तेजी से बिगड़ने का पता चला। मुख्य अध्ययनकर्ता और बांगुर इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस के सौविक दुबे ने कहा कि ब्रेन फॉग एक अस्पष्ट शब्द है जिसमें कोरोना के बाद विभिन्न संज्ञानात्मक आयाम को लेकर कोई विशेष कारक स्पष्ट नहीं किया गया है।

Published / 2023-03-26 16:24:51
रांची : सीसीएल गांधीनगर अस्पताल में 29 को लगेगा नि:शुल्क हृदय रोग जांच शिविर

टीम एबीएन, रांची। सीसीएल के केंद्रीय अस्पताल, गांधीनगर, कांके रोड में 29 मार्च की सुबह नौ बजे से नि:शुल्क हृदय रोग संबंधी चिकित्सीय शिविर का आयोजन किया जायेगा। 

शिविर में यशोदा अस्पताल, हैदराबाद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ प्रमोद कुचलाकांति हृदय रोग से ग्रसित मरीजों की जांच करेंगे एवं चिकित्सीय सलाह देंगे। निःशुल्क हृदय संबंधी चिकित्सीय सलाह का राज्य के सभी लाभ उठा सकते हैं।

Page 24 of 56

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse