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Published / 2023-08-05 21:18:10
अब राजधानी रांची में मिलेगी देश के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा

टीम एबीएन, रांची। देश के प्रसिद्ध हॉस्पिटल चेन्नई महिपाल के हृदय रोग, हड्डी और अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवा झारखंड वासियों को 1 सितंबर से रांची में ही उपलब्ध हो जायेगी। यह सुविधा राजधानी के लालपुर स्थित कमल फार्मा में मिलेगी, जहां आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम का उद्घाटन किया गया। 

मुख्य अतिथि रांची के सांसद संजय सेठ ने आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के कार्यालय का उद्घाटन कमल फार्मा लालपुर चौक में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रांची में चिकित्सा सहायता केंद्र का खुलना एक बहुत बड़ी सेवा है। इससे मरीजों की समस्याओं का समाधान तो तुरंत हो जायेगा। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई के बड़े अस्पतालों के डॉक्टर यहां बैठेंगे। इससे रांची सहित झारखंड के लोगों को इलाज के लिए बाहर के राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। 

रांची के पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने कहा की बीमारी किसी भी परिवार के लिए सबसे परेशानी वाला सबब होता है। ऐसे समय में बीमार व्यक्ति और उनके परिजनों को सहायता की जरूरत होती है। रांची में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम द्वारा मरीजों और उनके परिजनों को मेडिकल सुविधा मुहैया करायी जायेगी, जो अनूठी पहल है। 

चेंबर आफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा इस संस्था के माध्यम से मरीजों को रांची में ही देश के बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टर उपलब्ध कराया जा रहा है और उन्हें इलाज में सहयोग किया जायेगा। जो झारखंड और रांची के लिए पहली और अनूठी पहल है। 

रांची इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के एसोसिएट पार्टनर बजरंग वर्मा और कमल नाथ महतो ने बताया कि सितंबर महीने से चेन्नई के प्रसिद्ध महिपाल अस्पताल के हृदय, हड्डी सहित अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर यहां अपनी सेवा देंगे। जिससे रांची समेत झारखंड के जिलों के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके अलावा हमारी संस्था की ओर से यदि कोई पेशेंट इलाज के लिए बाहर जाते हैं। तो उनकी सारी व्यवस्था वाहन, ठहरने के लिए रूम के साथ संबंधित हॉस्पिटल में इलाज में मरीजों और उनके परिजनों को सहयोग किया जायेगा। 

उद्घाटन कार्यक्रम में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के सीईओ सुमित वैद्य, एसपी चट्टोराज, महिला रोग विशेषज्ञ डॉ करुणा शाहदेव, वार्ड 11 के पूर्व पार्षद अभय कुमार सिंह, रमेश सिंह, अजय पोद्दार, श्रीराम शर्मा, बसंत दास, अजय गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित थे।

Published / 2023-08-03 20:02:24
रोबोटिक की मदद से की गयी जटिल गॉलब्लैडर सर्जरी

एबीएन हेल्थ डेस्क। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने रोबोट की मदद से एक जटिल गाल ब्लैडर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। फोर्टिस अस्पताल शालीमार के रोबोटिक- लैप जीआई ओंकोलॉजी, बेरियाट्रिक एंड मिनीमल इन्वेसिव सर्जरी के प्रधान निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप जैन ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि 36 वर्षीय महिला का गॉल ब्लैडर आसपास फैली छोटी आंत एवं बड़ी आंत में बुरी तरह से फंसा हुआ था और बाइल डक्ट भी फंसी थी। 

डॉ जैन ने बताया कि पीड़ित महिला का सीटी स्कैन और पेट स्कैन किया गया और रोबोट की मदद से उनका गालब्लैडर निकालने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि महिला का इलाज समय पर इलाज न किया जाता तो गालब्लैडर आसपास के अंगों से और चिपक सकता था। उनके गॉलब्लैडर की दीवार भी सख्त हो गयी थी। 

उन्होंने कहा, हमने सफलतापूर्वक उनकी रोबोटिक सर्जरी की। रोबोटिक-असिस्टेंस से की जाने वाली सर्जरी खासतौर से इस प्रकार की जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में काफी संभावनाओं से भरपूर है। 

उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी काफी फायदेमंद होती है। इसके प्रयोग के लिए लचीले उपकरणों के साथ-साथ बाइल डक्ट को ठीक प्रकार से देखने के लिए विशेषज्ञ तकनीकों का भी लाभ मिलता है।

Published / 2023-07-28 11:03:06
अंग-अंग में औषधीय गुण समेटे है जामुन...

एबीएन हेल्थ डेस्क। प्रकृति में हर गुण विद्यमान है। कहीं प्रकृति औषधीय गुण समेटे हुए है, तो कहीं विष से भी भर पड़ा है। आइये आज ऐसे ही औषधीय गुण से भरपूर एक फल जामुन की चर्चा करते हैं :

?अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।

?जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।

?पहले के जमाने में गांवों में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे जमोट कहते हैं।

?दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहां जल के स्रोत बंद नहीं हुए हैं।

?भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख केएन श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहां लकड़ी की वो तख्ती साबुत है, जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।

?स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।

?एक रिसर्च के मुताबिक जामुन की पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाये जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।

?सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदें मिक्स करके पी सकते हैं।

?जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं, जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।

?जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं।

तो है न जामुन बड़े ही काम की चीज...

Published / 2023-07-27 11:13:24
तेजी से बढ़ रहे हैं आंखों की समस्याओं के केस

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी एबीएन हेल्थ डेस्क। कुछ दिन से बारिश और मौसम की वजह से आई फ्लू कंजेक्टिवाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। इसे देख हैल्थ डिपार्टमेंट ने एहतियात के तौर पर एडवाइजरी भी जारी की है। वहीं, पीजीआई एडवांस आई सेंटर के एचओडी डॉ एसएस पांडव की मानें तो 3 दिन में वायरल के केस बढ़े हैं। बुधवार को ओपीडी में आई फ्लू के 50 केस आये। डॉक्टर्स की मानें तो हर सीजन में केस देखे जाते हैं। 5 दिन में वायरल ठीक हो जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक तेज गर्मी के बाद बारिश से मौसम में तेजी से बदलाव आता है। हवा के साथ प्रदूषण और नमी से फंगल इन्फैक्शन की समस्याएं पैदा होती हैं सबसे ज्यादा आंखों से जुड़ी दिक्कतें परेशान करती हैं। फंगल इन्फैक्शन बढ़ने से आंखों का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। आई फ्लू होने पर जलन, दर्द और लालपन जैसी परेशानी होती है, जिसका कारण एलर्जिक रिएक्शन है। ज्यादातर शुरुआत एक-आंख से होती हैं, कुछ समय बाद दूसरी मैं आ जाती है। फ्लू आमतौर पर अपने-आप ठीक हो जाता है, लेकिन आंखों को साफ रखना बहुत जरूरी है। आई फ्लू के लक्षण और बचाव • आंखें लाल और जलन होना। चुभन और सूजन आना। • पलकों पर पीला और चिपचिपा तरल जमा होना। • खुजली होना और पानी आना। • बार-बार आंखों को न छुएं और साफ पानी से धोते रहें। • साफ करने के लिए टिश्यू पेपर • या साफ कपड़े का इस्तेमाल करें। • मरीज से आई कॉन्टैक्ट न बनायें। • टीवी मोबाइल से दूरी बनायें। • आंखों पर काला चश्मा पहनें। • डॉक्टर के पास जरूर जायें।

Published / 2023-07-22 15:45:22
आंखों में दिखें ये लक्षण तो हो जायें सतर्क

  • झारखंड के इस शहर में तेजी से बढ़ रहे हैं कंजक्टिवाटिस के मरीज, ये हैं लक्षण और बचाव

एबीएन हेल्थ डेस्क। शहर में इस समय बरसात व गर्मी के कारण कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। इसमें कंजक्टिवाइटिस भी उन्हीं बरसाती बीमारियों में एक है, जो आंखों को संक्रमित कर रहा है। इसको जय बांग्ला भी कहा जाता है। 

इस बीमारी से बच्चों से लेकर बड़े तक शिकार हो रहे हैं। एमजीएम और सदर अस्पताल में प्रतिदिन दस से 20 मरीज इलाज कराने के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे इसके चपेट में आ रहे हैं। 

इसकी शुरुआत एक आंख से होती है, लेकिन जल्द ही दूसरी आंख भी इसकी चपेट में आ जाती है। लगातार दवा डालने से तीन से पांच दिनों के अंदर यह पूरी तरह ठीक हो जाता है।

लक्षण

आंख लाल होना, जलन, खुजली, चुभन, तेज दर्द, सूजन, आंख से लगातार पानी गिरना, पलकों पर चिपचिपाहट और आंख में बार-बार कीचड़ का जमा होना।

बचाव

स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें, अगर कोई भी लक्षण दिखाई दे तो घर से बाहर न जायें और परिवार में भी लोगों से शारीरिक दूरी बनाकर रखें, आंखों को बार-बार हाथ न लगायें, खुजली होने पर आंखों को बिल्कुल मले नहीं, आई ड्रॉप डालने से पहले और बाद में हाथों को साबुन से अवश्य धो लें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।

Published / 2023-07-15 08:37:59
सावधान : बनावटी मिठास बन सकता है कैंसर का कारण

  • डब्ल्यूएचओ की चेतावनी- आर्टिफिशियल स्वीटनर आपकी सेहत के लिए जहर! बन सकता है कैंसर का कारण

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा घोषणा किये जाने के बाद कि आहार पेय में व्यापक रूप से उपयोग किये जाने वाला कृत्रिम मिठास कैंसर का कारण हो सकता है, डॉक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर (डीएके) ने शुक्रवार को इसे गंभीर चिंता का विषय कहा। 

डीएके के अध्यक्ष डॉ निसार उल हसन ने कहा कि आहार पेय लोगों के जीवन का नियमित हिस्सा बन चुका है और इन पेय पदार्थों से कैंसर का संबंध होना खतरनाक है।

उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ की शाखा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) ने कृत्रिम मिठास एस्पाट्रेम को लीवर कैंसर के बढ़ते खतरे से जोड़ा है। यह निष्कर्ष अमेरिका और यूरोप में किये गये तीन बड़े मानव अध्ययनों पर आधारित है, जिन्होंने कृत्रिम रूप से मीठे पेय पदार्थों की जांच की। इसमें कहा गया कि यह जोखिम विशेष रूप से उन लोगों में ज्यादा है जो इन शीतल पेय को ज्यादा पीते हैं।

डीएके अध्यक्ष निसार ने कहा कि मोटापे और मधुमेह की बढ़ती चिंताओं के परिणामस्वरूप कम चीनी वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में एस्पार्टेम का अत्यधिक उपयोग हुआ है, कम कैलोरी वाले कृत्रिम मिठास का उपयोग डाइट कोक, पेप्सी, शून्य चीनी और अन्य आहार सोडा में चीनी के विकल्प के रूप में किया जाता है, जिसका उद्देश्य यह है कि कृत्रिम मिठास उपभोक्ताओं के शरीर का वजन को संतुलित करने और गैर-संचारी रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा कि हालांकि, शोध में पाया गया है कि फ्री शुगर की जगह एस्पार्टेम जैसे कृत्रिम मिठास से लंबी अवधि में वजन कंट्रोल करने में मदद नहीं मिलती है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मिठास को मधुमेह और हृदय रोग में वृद्धि के साथ-साथ उच्च मृत्यु जोखिम से भी जोड़ा गया है।

डॉ निसार ने कहा- लोगों को आहार पेय से बचना चाहिए क्योंकि एस्पार्टेम से कोई स्वास्थ्य लाभ प्राप्त नहीं होता है और यह एक संभावित कैंसरकारी तत्व है। उन्हें आहार में मिठास को अत्यधिक कम करना चाहिए। खाद्य उद्योग को कृत्रिम मिठास के बिना उत्पाद तैयार करने के अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

Published / 2023-07-06 23:02:23
झारखंड में येलो फीवर को लेकर अलर्ट

  • जल्द शुरू होगा वैक्सीनेशन, रिम्स में जल्द शुरू होगा येलो फीवर वैक्सीनेशन
  • राज्य में बढ़ते येलो फीवर केस को लेकर हुआ फैसला
  • येलो फीवर को लेकर अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में येलो फीवर को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। तेजी से फैल रहे येलो फीवर को लेकर सरकार और प्रशासन भी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। इस देखते हुए झारखंड वासियों के लिए राहतभरी खबर सामने आयी है। 

अब प्रदेश वासियों को येली फीवर के वैक्सीनेशन के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी कमर कसना शुरू कर दिया है। इसके लिए फकटर में जल्द ही येलो फीवर वैक्सीनेशन शुरू किया जायेगा। जिसके लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली गयी है और अब जल्द ही लोगों को येलो फीवर का टीका लगना शुरू हो जायेगा।

बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से रीजनल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर अधिकारी डॉ कैलाश कुमार रिम्स पहुंचे थे और अपने टीम के साथ सेंटर खोलने के लिए निरीक्षण भी कर रहे थे। जैसे ही सर्टिफिकेशन मिलता है, वैसे ही येलो फीवर वैक्सीनेशन की शुरूआत कर दी जायेगी। इसके लिए रिम्स के पीएसएम विभाग में दो कमरे भी आवंटित कर दिये गये हैं।

कैसे फैलता है येलो फीवर

आपको बता दें कि एक खास प्रजाति के मच्छर की वजह से येलो फीवर फैलता है। इसके वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट की जरूरत विदेश जाने से पहले पड़ती है।

 येलो फीवर वायरस से उत्पन्न एक हैमरैजिक रोग है, जो संक्रमित मच्छर के काटने से इंसान में फैलता है। इस बुखार को येलो फीवर इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें येलो शब्द पीलिया की ओर संकेत करता है। कुछ रोगियों में इसके लक्षण भी देखे जाते हैं और यह बुखार मनुष्य के पूरे शरीर को ही प्रभावित कर के रख देता है।

Published / 2023-06-30 14:39:58
सावधान... कोल्ड ड्रिंक और च्युइंगगम से कैंसर का खतरा

डब्ल्यूएचओ की स्टडी रिपोर्ट दे रही टेंशन

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर पर रिसर्च करने वाली एजेंसी ने अपनी स्टडी में पाया है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर ड्रिंक्स में कैंसर पैदा करने वाले तत्व हो सकते हैं। यह स्टडी अगले महीने प्रकाशित होने वाली है। स्टडी में पाया गया है कि कोल्ड ड्रिंक्स और च्यूइंगगम में भी कैंसर पैदा करने वाले तत्व हो सकते हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़ी संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) की स्टडी में यह जानकारी दी गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएआरसी की इस रिपोर्ट को हाल ही में मंजूरी दी गई है और जुलाई में इसे प्रकाशित किया जायेगा।

इस स्टडी में यह नहीं बताया गया है कि किसी इंसान को कितनी मात्रा में इन चीजों को खाना-पीना चाहिए। इस बारे में डब्ल्यूएचओ की एक और एजेंसी जेईसीएफए है, जिसकी ओर से इसे लेकर एडवाइजरी जारी की जा सकती है। आईएआरसी ने पहले भी ऐसी कई रिपोर्ट्स दी हैं, जिसकी दुनिया भर में चर्चा हुई थी। 

यही नहीं कई मामले तो अदालत तक भी पहुंचे और मैन्युफैक्चरर्स को अपने आइटम्स की रेसिपी में बदलाव करना पड़ा था। कुछ कंपनियां यह भी आरोप लगाती रही हैं कि आईएआरसी की स्टडी जनता को भ्रमित करने वाली रही है।

डब्ल्यूएचओ की एक और संस्था जेईसीएफए इस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है। इसके बाद उसकी ओर से एक लिस्ट जारी की जा सकती है, जिसमें कैंसर के खतरे वाली चीजों की जानकारी हो सकती है। 14 जुलाई को आईएआरसी की रिपोर्ट का प्रकाशन होना है।

जेईसीएफए के मुताबिक 60 किलोग्राम वजन वाले किसी भी वयस्क को 12 से 36 कैन सोडा ही पीना चाहिए। इससे अधिक का सेवन करना खतरनाक हो सकता है। इस रिपोर्ट का अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया भर के देशों में पालन किया जाता है और एडवाइजरी के तौर पर इस्तेमाल होता है।

एआरसी की रिपोर्ट्स का दुनिया भऱ में असर देखने को मिलता रहा है। इसी संस्था ने 2015 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ग्लिफोसेट, जो एक तरह का कीटनाशक होता है, से भी कैंसर का खतरा होता है। इस दवा को पत्तेदार फसलों को कीटों से बचाव के लिए छिड़का जाता रहा है। 

उसकी इस रिपोर्ट पर अदालतों में भी मामले चले। गौरतलब है कि उस रिपोर्ट के बाद से ही यह आम धारणा बनी है कि कीटनाशक के अत्यधिक इस्तेमाल से पैदा होने वाली फसल में कैंसरकारक तत्व होते हैं।

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