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Published / 2023-10-14 17:48:16
सदर अस्पताल रांची में लगा मानसिक स्वास्थ्य पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 14 अक्टूबर 2023 को सदर अस्पताल रांची के सभागार में जिला स्तरीय तनाव प्रबंधन एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। 

कार्यशाला की शुरुआत एनएमएचपी कार्यक्रम के स्टेट कंसलटेंट शांतना मैडम ने किया। सभा में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को संबोधित कहते हुए शांतना मैडम ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन, मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहता है कि यह सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है, वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है।

कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए मनोचिकित्सक डॉक्टर वीना मिस्त्री ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य  मनुष्य के सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। मानसिक विकार में अवसाद दुनिया भर में सबसे बड़ी समस्या है। 

यह कई सामाजिक समस्याओं जैसे- बेरोज़गारी, गरीबी और नशाखोरी आदि को जन्म देती है।मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है, और यह सबसे बड़ी दौलत में से एक है जिसे हर कीमत पर बचाने की जरूरत है।

कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रबंधक सुश्री जीरन मैडम, डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस एवं लॉजिस्टिक कंसलटेंट सरोज कुमार चौधरी, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम असिस्टेंट अभिषेक देव, डॉ नाजिया कैसर, सदर अस्पताल रांची की एएनएम, जीएनएम, नर्सिंग स्टाफ एवं पैरामेडिकल कर्मी मौजूद रहे।

Published / 2023-10-10 18:51:04
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अप्रैल 1948 को की थी मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 10 अक्टूबर 2023 को मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष पर सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार ने सर्वप्रथम सिविल सर्जन कार्यालय के प्रांगण से फिरायालाल चौक तक प्रभात फेरी का आयोजन किया। जिसमें एनएमटीसी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने भाग लिया। 

तत्पश्चात सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में सिविल सर्जन महोदय की अध्यक्षता में परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम सिविल सर्जन ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अप्रैल 1948 को शुरुआत की थी। 

पूरे विश्व में यह 1950 में लागू किया गया। जिसका मकसद मानसिक तौर पर लोगों को स्वस्थ रखा जाना है। खास तौर पर कोविद-19 महामारी के दौरान लोगों में मानसिक अवसाद या मानसिक रूप से लोगों में अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ी है। 

कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी एनसीडी सेल रांची डॉक्टर शोभा किस्पोट्टा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास होता है। 

इस स्थिति में व्यक्ति दूसरों के साथ सकारात्मक तरीके से बातचीत कर सकता है। साथ ही तनाव की समस्या से निपटने की क्षमता भी रखता है। मानसिक स्वास्थ्य विकार कई प्रकार के होते हैं। इनमें से कुछ सामान्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रकार में ये शामिल हैं ।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए जिला नोडल पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि हमें कुछ महत्वपूर्ण चीजों  को समझना अत्यंत आवश्यक है उदाहरण के तौर पर। 

चिंता (एंग्जायटी) 

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एक विकार चिंता भी है। चिंता के कारण वास्तविक या काल्पनिक स्थितियों में अत्यधिक चिंता या भय उत्पन्न हो सकता है। 

अवसाद (डिप्रेशन) 

यह मानसिक समस्या सामान्य उदासी या दुख से अलग होती है। इसमें व्यक्ति को काफी दुख, क्रोध, निराश या फ्रस्टेशन हो सकती है।

बाइपोलर डिसआर्डर 

बाइपोलर विकार को पहले मैनिक डिप्रेशन कहा जाता था। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारी-बारी से मेनिया (असामान्य रूप से भावनाओं को प्रकट करना) और अवसाद होता है। 

ईटिंग डिसआर्डर 

यह विकार भोजन और शरीर की छवि से संबंधित जुनूनी व्यवहार होता है। इस समस्या में व्यक्ति बहुत कम खाता है या फिर जरूरत से ज्यादा खाने लगता है। 

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर 

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी यह विकार ऐसी घटनाओं के बाद उत्पन्न होता है, जिसकी कभी आशा न की गई हो। इसमें किसी तरह की लड़ाई , किसी अपने की मृत्यु या गंभीर दुर्घटना शामिल है। इस समस्या की चपेट में आने वाला व्यक्ति तनाव और डर महसूस करता है। 

सिजोफ्रेनिया और सायकोटिक विकार 

यह एक गंभीर मानसिक रोग है। इसमें लोग ऐसी चीजों को देखने, सुनने और विश्वास करने लगते हैं, जो वास्तविक में हैं ही नहीं। 

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (एडीएचडी) 

यह बच्चों में पाये जाने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को अपने व्यवहार को नियंत्रित रखने में परेशानी होती है। 

एडिक्टिव डिसआर्डर

इस मानसिक समस्या के अंतर्गत व्यक्ति को शराब या ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत लग सकती है। इस लत के कारण व्यक्ति की जान को भी जोखिम हो जाता है। 

पर्सनालिटी डिसआर्डर

इस स्थिति में व्यक्ति की पर्सनालिटी यानी बिहेवियर में पूरी तरह बदलाव हो जाता है। इससे व्यक्ति के सोचने-समझने, खाने-पीने और सोने के समय में भी बदलाव होता है, जिसका असर व्यक्ति के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। 

इससे व्यक्ति को तनाव होना भी काफी आम हो जाता है। मनोचिकित्सक डॉ वीना मिस्त्री द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया कि हम मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों को कैसे समझ पाएंगे इसके लिए हमें विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालें की आवश्यकता है।  

बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण-  

  • खाने या सोने की आदतों में बदलाव  
  • पसंदीद लोगों और गतिविधियों से दूरी बनाना  
  • ऊर्जा हीन या लो एनर्जी का एहसास होना  
  • सुन्न महसूस करना जैसे कि कुछ भी मायने नहीं रखता है  
  • अजीब सा दर्द महसूस होना  
  • असहाय या निराश महसूस करना  
  • धूम्रपान, शराब पीना और ड्रग्स का अधिक उपयोग करना  
  • कन्फ्यूज्ड होना, चीजों को भूलना और गुस्सा आना  
  • परेशान, चिंतित या डरा हुआ महसूस करना  
  • मूड स्विंग्स के कारण रिश्तों में दरार पड़ना।

इस कार्यक्रम के दौरान जिला कार्यक्रम सहायक अभिषेक देव, फाइनेंशियल एवं लॉजिस्टिक कंसलटेंट सरोज कुमार चौधरी, मनोवैज्ञानिक नाजिया, जिला सलाहकार सुशांत कुमार, सोशल वर्कर सतीश कुमार एवं डाटा एंट्री आपरेटर सौरव आनंद मौजूद रहे।

Published / 2023-09-29 18:48:49
झारखंड : अब डराने लगा है डेंगू का आंकड़ा

झारखंड में कहर ढा रहा डेंगू, 39 नये केस मिले, अबतक 1447 मरीजों की पुष्टि

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में डेंगू के मरीजों की संख्या में रोज इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के मुताबिक गुरुवार को राज्य में डेंगू के 39 नये मरीज मिले हैं। इनमें 26 पूर्वी सिंहभूम, 9 साहिबगंज व 4 धनबाद के हैं। 

इस बीच, गुरुवार को टीएमएच जमशेदपुर में डेंगू पीड़ित एक आठ साल के बच्चे की मौत हो गयी। राज्य में अबतक 1447 डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई है, जिनमें 901 पूर्वी सिंहभूम के हैं। रांची में 69 मरीज मिल चुके हैं। 

आरडीपी से नहीं हो रहा अत्यधिक लाभ चिकित्सकों के अनुसार डेंगू से मिलने वाले सिर्फ दस फीसदी मरीजों को ही प्लेटलेट्स की कमी हो रही है। जिनका प्लेटलेट्स कम हो रहा है उन्हें सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ रही है। 

आरडीपी से मरीजों को बहुत अधिक लाभ नहीं हो रहा है। पर, ब्लड बैंक में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए किट न्यूनतम साढ़े नौ हजार रुपये में मिल रहा है। ऐसे में निम्न आय वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Published / 2023-09-27 23:39:04
कोरोना से 7 गुना घातक वायरस ने दी दस्तक

  • एक और महामारी को लेकर डब्ल्यूएचओ की चेतावनी

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया पर असर डाला। इसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में कैद हैं। इस महामारी ने लाखों लोगों की जान ली है। 

हाल ही में इस महामारी से हम उबरे ही थे कि वैज्ञानिकों ने एक संभावित महामारी को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस महामारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने  डिजीज एक्स  का नाम दिया है। डब्ल्यूएचओ ने चेताया है कि यह महामारी दुनिया में फैलना आरंभ हो चुकी है। 

यूके के हेल्थ एक्सपर्ट्स ने डिजीज एक्स को लेकर कहा कि जल्द ही एक नयी महामारी के रूप उभर सकती है। ये कोविड-19 से ज्यादा घातक साबित हो सकती है। 1918-1920 में स्पैनिश फ्लू ने दुनिया में हाहाकार मचाया था। इससे दुनिया भर में 5 करोड़ लोगों की जान चली गयी थी। 

डिसीज एक्स के कारण भी इतनी मौत होने की उम्मीद है। यूके की वैक्सीन टास्कफोर्स की चेयरमेन रहीं डेम केट बिंघम के अनुसार,  डिसीज एक्स कोरोना वायरस से 7 गुना ज्यादा खतरनाक महामारी हो सकती है। यह करीब 5 करोड़ लोगों की जान ले सकती है।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कोरोना से लगभग 70 लाख मौतें हुई थीं। इस महामारी ने चिंताओं को बढ़ा दिया है। अब डिसीज एक्स को कोरोना से भी अधिक घातक बताया जा रहा है। आइये जानने की कोशिश हैं कि डिसीज एक्स है क्या, कैसे फैलता है, इससे बचने के उपाए क्या है?

डिसीज एक्स क्या है? 

डिसीज एक्स एक टर्म की तरह है। इसका प्रयोग ऐसी बीमारी के बारे में बताने को लेकर किया जाता है जो इंफेक्शन से फैल जाती है। इसे लेकर मेडिकल साइंस भी अनजान है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डिसीज एक्स  बिना किसी उपचार वाला एक नया वायरस है। 

ये जीवाणु, बैक्टीरिया या फंगस भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है, डिसीज एक्स एक  रोगजनक एक्स  के कारण हो सकता है. ये दूसरी बीमारी के फैलने कारण होता है। यह आरएनए वायरस की तरह जूनोटिक बीमारी से जुड़ा हो सकता है। 

यह जंगली या घरेलू जानवरों में होगा और फिर उनसे इंसानों में फैलने की उम्मीद लगायी जा रही है। कई विशेषज्ञों के अनुसार, लैब में होने वाली दुर्घटनाएं और बायोटेररिज्म की वजह से  डिसीज एक्स  हो सकता है जो संभावित रूप से वैश्विक विनाशकारी हो सकता है।

Published / 2023-09-26 14:08:22
अब लीजिये... रोज आठ ग्राम नमक खा रहे हैं भारतीय

  • रक्तचाप और स्ट्रोक की मुख्य वजह, कई बीमारियों की जतायी आशंका

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारतीय अपने भोजन में जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि प्रत्येक भारतीय रोजाना आठ ग्राम नमक खा रहा है, जबकि रोजाना अधिकतम पांच ग्राम नमक ही पर्याप्त है। 

अधिक नमक रक्तचाप (बीपी), ब्लॉकेज और स्ट्रोक जैसी बीमारियों की वजह बन रहा है। राष्ट्रीय एनसीडी निगरानी सर्वेक्षण (एनएनएमएस) की रिपोर्ट में भारतीयों के यूरिन में सोडियम की मात्रा भी अधिक पायी जा रही है। 

इस रिपोर्ट को बंगलूरू स्थित भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (आईसीएमआर- एनसीडीआईआर) के शोधकर्ताओं ने पूरा किया है। सर्वे में भाग लेने वालों की यूरिन जांच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने की है।

गैर संचारी रोगों को लेकर उच्च सोडियम युक्त आहार लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। डब्ल्यूएचओ ने सभी सदस्य देशों से कहा है कि एक व्यक्ति के लिए दिनभर में अधिकतम पांच ग्राम नमक का सेवन ही काफी होता है, लेकिन भारत में इससे 60 फीसदी अधिक नमक खा रहे हैं।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नमक ज्यादा पसंद

मेडिकल जर्नल नेचर में प्रकाशित सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने बताया कि देश के 150 केंद्रों पर दो तरह से 12 हजार लोगों पर अध्ययन किया गया। 

इनमें से एक समूह के यूरिन नमूने लेकर जांच की गयी, जबकि दूसरे समूह से बातचीत से सर्वे पूरा किया। 18 से 69 साल की आयु के 10,659 लोगों ने सर्वे में भाग लिया, जिनमें से 2,266 की यूरिन जांच की गयी।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नमक का स्वाद ज्यादा पसंद है। इतना ही नहीं, शहरी लोग नमकीन और चिप्स के जरिये नमक का अधिक सेवन कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भोजन के साथ चुटकी भर नमक ऊपर से लेते हैं।

गैस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा

एनसीडीआईआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर ने बताया, आहार में सोडियम का उच्चस्तर स्ट्रोक और हृदय विफलता के जोखिम को भी बढ़ाता है। 

नमक के सेवन के हानिकारक हृदय संबंधी प्रभावों के अलावा यह गैस्ट्रिक कैंसर के लिए एक संभावित जोखिम कारक भी हो सकता है। भारत में गैर संचारी रोगों का भार काफी अधिक है।

सालाना होने वाली कुल मौतों में अकेले हृदय रोगों (सीवीडी) का अनुमान 28.1 फीसदी है। इतना ही नहीं, साल 1990 में 7.8 लाख मौतों की तुलना में 2016 में 16.3 लाख मौतें उच्च रक्तचाप के कारण हुईं।

Published / 2023-09-14 20:38:41
केरल: कोझिकोड में निपाह वायरस का एक और केस

24 साल का हेल्थ वर्कर संक्रमित, अलर्ट जारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस के एक और मामले की पुष्टि हुई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बुधवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने एक बयान में कहा कि एक निजी अस्पताल के 24 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी के निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। 

इसके साथ ही केरल में निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर पांच हो गयी है। राज्य सरकार ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए रोकथाम क्षेत्र और प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। जिसके बाद मरीजों के संपर्क में आये लोगों की सूची भी चिंता का कारण बन गई है क्योंकि 700 लोग मरीजों के संपर्क में आए हैं। 

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि इन 700 में से लगभग 77 लोग हाई रिस्क की श्रेणी में हैं। निपाह से संक्रमित लोगों के लिए राज्य सरकार ने कई तरह की गाइडलाइंस बनाई हैं। उच्च जोखिम वाले निपाह रोगियों को अपने घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है। 

निपाह के जिन दो मरीजों की मौत हुई है, उनके रूट प्रकाशित कर दिए गए हैं, ताकि लोग उन रास्तों का उपयोग बिल्कुल भी न करें। इसके साथ ही निपाह वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोझिकोड में त्योहारों और समारोहों में बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी गई है। 

कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस से जिले में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच के लिए सीमा पर चेकपोस्ट खोलने को कहा है। पुलिस को केरल से राज्य में प्रवेश करने वाले फलों की जांच करने का निर्देश दिया गया है।

Published / 2023-09-07 17:57:08
कोडरमा में नेचुरोपैथी सेंटर का उद्घाटन

  • पांच बीमारी को छोड़ सभी प्रकार की बीमारी का होगा इलाज

टीम एबीएन, कोडरमा। न्यू कॉलोनी कोडरमा में नेचुरोपैथी सेन्टर का विधिवत उद्घाटन हजारीबाग के सुरेंद्र कुमार पांडेय के द्वारा फीता काट कर किया गया। मौके पर सेंटर में पूजा कर वातावरण को शुद्ध किया गया।

वहीं उद्घाटन में आये लोगों को इसके बारे में बताते हुए गौतम कुमार पांडेय ने कहा कि नेचुरोपैथी के माध्यम से पांच बीमारी को छोड़कर जिसमें एक्सीडेंटल, डिलीवरी, पोलियो ग्रसित, सीरियस रोगी और 90 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को छोड़कर हर प्रकार के रोग का ईलाज किया जायेगा।

आगे उन्होंने बताया कि यहां पर फियोथैरेपी और आयुर्वेद के माध्यम से गारंटी के साथ ईलाज किया जायेगा। साथ ही एक अच्छा प्लेटफार्म भी दिया जायेगा। इसमें पुराने से पुराने रोग जैसे बांझपन, लकवा, गठिया इत्यादि का इलाज किया जायेगा।

मौके पर सेंटर के संचालक सत्यम कुमार मेहता, चंद्रप्रकाश चौधरी, करण कुमार सन्तोष, विनोद कुमार पांडेय, चंदन कुमार, विक्रम कुमार, गौतम कुमार, सुनील कुमार, मुकेश कुमार के साथ काफी संख्या में लोगउपस्थित थे।

Published / 2023-09-06 17:01:42
वायु प्रदूषण से होने वाली मौत पर गुटेरस के दावे से सकते में दुनिया

  • विश्व में प्रदूषित वायु से प्रत्येक वर्ष असमय हो जाती है 70 लाख लोगों की मौत : गुटेरस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष प्रदूषित वायु से 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मौत हो जाती है।  गुटेरेस ने आज यहां सात सितंबर को मनाये जाने वाले नीले आकाश के लिए स्वच्छ वायु का अंतरराष्ट्रीय दिवस पर यह बात कही। 

उन्होंने कहा कि विश्व की करीब 99 प्रतिशत आबादी कालिख, गन्धक और विषैले रासायनों वाली वायु में सांस ले रही है और इसका वैश्विक तापमान में वृद्धि से गहरा संबंध है। यहां जारी बयान में उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में अधिक गंभीर है। 

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण किसी सीमा में नहीं बंधा रहता और इसके दूषक तत्व हजारों किलोमीटर तक फैलते जाते है। प्रत्येक महाद्वीप पर जलवायु संकट का विनाशकारी प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए हमें मिलकर स्वच्छ वायु के लिए काम करना होगा। 

उन्होंने कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन, विशेषकर कोयले का उपयोग कम करने, स्वच्छ अक्षय उूर्जा को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए मैंनेे एक जलवायु एकजुटता संधि का प्रस्ताव रखा है। जिसकेे अंतर्गत सभी बड़े उत्सर्जकों को अपने उत्सर्जन को कम करने का प्रयास करेंंगे और संपन्न देश वित्तीय और तकनीकी सहायता जुटायेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने एक एक्सिलरेशन एजेण्डा का प्रस्ताव भी रखा है।

उन्होंने आग्रह किया हैै कि सभी देश इसे लागू करे। उन्होंने कहा कि हमें रसोई में स्वच्छ ईंधन और विद्युत वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। हमें लोगों को पैदल और साइकिल से चलने के लिए प्रोत्साहित करना और जिम्मेदारी से कचरा प्रबंधन का व्यवहार में लाना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ पृथ्वी के लिए वायु सर्वहितकारी और सबकी जिम्मेदारी को अपनाना होगा।

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