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Published / 2023-12-21 21:10:28
सदगुरु के इन उपायों से नियेत्रित करें ब्लड और यूरिन शुगर

  • ब्लड और यूरिन में बढ़ गया है शुगर का स्तर, सदगुरु के इन 4 उपायों को तुरंत अपना लें, डायबिटीज हो भी सकती है रिवर्स
  • सदगुरु के मुताबिक डायबिटीज मरीज बॉडी को एक्टिव रखें और कुछ खास अनाज का सेवन करें तो 6 हफ्तों में ब्लड शुगर को नॉर्मल रख सकते हैं
  • डायबिटीज, ब्लड शुगर,डायबिटीज कंट्रोल करने के टिप्स
  • ब्लड शुगर को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप मिट्टी का स्नान कीजिये

एबीएन हेल्थ डेस्क। डायबिटीज एक तेजी से फैलने वाली बीमारी बनती जा रही है। देश और दुनियां में डायबिटीज मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। डायबिटीज एक क्रॉनिक बीमारी है जिसमें शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का कम उत्पादन होता है। इंसुलिन का कम उत्पादन ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ाने में जिम्मेदार है। 

इंसुलिन एक तरह का हार्मोन होता है जो पाचन ग्रंथि से बनता है। इस हार्मोन का काम खाने को एनर्जी में बदलना है। जब इंसुलिन का कम उत्पादन होने लगता है तो ब्लड में शुगर का स्तर हाई होने लगता है। 

ब्लड शुगर हाई होने से बॉडी में उसके लक्षण दिखने लगते हैं। बार-बार प्यास लगना, यूरीन का अधिक डिस्चार्ज होना, भूख ज्यादा लगना, वजन कम होना, घाव देरी से भरना और आंखों की रोशनी कम होना ब्लड शुगर हाई होने के संकेत हैं। ब्लड शुगर चेक करने के लिए लोग पेशाब और ब्लड का टेस्ट करते हैं। 

सदगुरु जग्गी वासुदेव के मुताबिक एक बार आपका सिस्टम नियामित हो जाये तो आपकी डायबिटीज रिवर्स भी हो सकती है। सदगुरु के मुताबिक डायबिटीज मरीज बॉडी को एक्टिव रखें और कुछ खास अनाज का सेवन करें तो 6 हफ्तों में ब्लड शुगर को नॉर्मल रख सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे कौन से 4 उपाय हैं जिन्हें अपनाकर ब्लड शुगर न सिर्फ कंट्रोल हो सकती है बल्कि रिवर्स भी हो सकती है। 

इन अनाज का करें सेवन 

सदगुरु के मुताबिक जिन लोगों की ब्लड शुगर हाई रहती है वो डाइट में रागी का सेवन करें। रागी एक ऐसा अनाज है जो बेहद धीरे-धीरे घुलता है। इस अनाज का सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर तेजी से नहीं बढ़ता। 

रागी एक ऐसा अनाज है जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 से कम है। रागी को अपने आहार में शामिल करते समय उसके सेवन की मात्रा पर कंट्रोल करना जरूरी है। रागी में हाई प्रोटीन होता है जो भूख को कंट्रोल करता है। आप रागी का सेवन खिचड़ी, रागी के चावल, दाल और सब्जियों में कर सकते हैं। 

गार्डनिंग करें ब्लड शुगर नॉर्मल रहेगी 

अगर आप ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए कुछ ज्यादा नहीं कर सकते तो आप गार्डनिंग करें। पेड़-पौधों के साथ वक्त गुजारें। आप गार्डन में नंगे पांव वॉक करें आपका ब्लड सर्कुलेशन दुरुस्त रहेगा, बॉडी एक्टिव रहेगी, तनाव दूर होगा और ब्लड में शुगर का स्तर भी नॉर्मल रहेगा। 

बॉडी पर मिट्टी का लेप लगायें 

ब्लड शुगर को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप मिट्टी का स्नान कीजिये। आप मिट्टी लीजिये और उसे अपनी पूरी बॉडी पर लगायें। इस मिट्टी को 30-40 मिनट तक बॉडी पर लगा रहने दें। जब मिट्टी सूख जाये, तो आप इसे पानी से वॉश कर लीजिये। ये सरल उपाय आपके व्यान प्राण को सरल करता है। इस लेप को लगाकर आप अपनी ब्लड शुगर को नॉर्मल कर सकते हैं। 

इन योगासन को कीजिये 

कुछ योगासन ऐसे हैं जो स्वभाविक रूप से ब्लड में शुगर के स्तर पर असर डालते हैं। सदगुरु के मुताबिक एनर्जी सिस्टम और शरीर को स्थिर करके बिना दवाई के भी डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है। कुछ प्रक्रियाएं जैसे शंभी महामुद्रा का सहारा लेकर आप आसानी से डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं। शांभवी महामुद्रा एक शक्तिशाली योगिक क्रिया है जो बॉडी को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। इस क्रिया का सहारा लेकर आप डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं।

Published / 2023-12-21 18:22:49
कोरोना से लड़ने की तैयारी : रिम्स में 30 बेड रिजर्व

कोरोना को लेकर जारी हुई एडवाइजरी

टीम एबीएन, रांची। कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर केंद्र सरकार के गाइडलाइन के बाद झारखंड में भी तैयारियां तेज कर दी गयी हैं। इसको लेकर सभी स्तर पर समीक्षा की जा रही है। मंगलवार को स्वास्थ्य परियोजना निदेशक ने सभी जिले के सिविल सर्जन को रांची मुख्यालय बुलाकर के बैठक की थी। इसके साथ ही उन लोगों से जिले में चल रही तैयारियों की जानकारी ली थी।

कोरोना की तैयारी के मद्देनजर झारखंड के स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिले के उपायुक्तों को पत्र भेजकर कोरोना प्रोटोकॉल और कोविड-19 के दौरान पालन किये जाने वाले मानकों का फिर से एक बार समीक्षा करने के निर्देश दिये हैं। सभी डीसी को यह निर्देश दिया गया है कि आवश्यक दवाइयों का भंडारण किया जाये और अस्पतालों का एक बार फिर से निरीक्षण किया जाये।

कोरोना के नये वेरिएंट को लेकर के रांची में भी तैयारी तेज हो गयी है। रिम्स प्रबंधन ने भी इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मिली जानकारी के अनुसार कोविड वार्ड को तैयार किया गया है। रिम्स में कोविड 19 के लिए 30 बेड को रिजर्व कर दिया गया है। 

बता दें कि कोविड के नये वेरिएंट को लेकर के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री आज सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक करेंगे। इस दौरान वे सभी राज्यों में कोरोना को लेकर चल रही तैयारियां का जायजा भी लेंगे। 

रांची के सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य मुख्यालय से मिले दिशा-निर्देश के अनुसार सभी तैयारियां की जा रही है। सदर अस्पताल में 30 बेड का कोरोना आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) यानी सर्दी खांसी बुखार जैसे लक्षणों के साथ आये मरीज का कोरोना जांच निश्चित रूप से करने के आदेश दिये गये हैं। सभी सीएचसी, पीएचसी में जांच किट, आक्सीजन की आपूर्त्ति के लिए उपलब्ध कंसेंट्रेटर, सिलेंडर या जहां जहां पीएसए प्लांट हैं उसकी कार्यशीलता जांच कर तैयारी पूरी कर लेने को कहा गया है।

Published / 2023-12-16 21:42:42
भारत में बनती है दुनिया की 60% वैक्सीन : डीआरडीओ वैज्ञानिक

एबीएन हेल्थ डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में इंस्टिट्यूट आॅफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अनंत नारायण भट्ट ने कहा है कि भारत प्राचीन काल से ही औषधियों के उत्पादन की जननी रही है और वर्तमान समय में अपना देश पूरी दुनिया में लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन के उत्पादन का केंद्र है।

डॉ भट्ट गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय व फार्मेसी संकाय के संयुक्त तत्वावधान एवं ट्रांसलेशन बायोमेडिकल रिसर्च सोसायटी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए शनिवार को गोरखपुर में कहा कि एडवांसेज एंड आपर्चुनिटीज इन ड्रग डिस्कवरी फ्रॉम नेचुरल प्रोडक्ट्स श्बायोनेचर कॉम.2023 विषयक संगोष्ठी में जैव पॉलिमर एल्गिनेट से हेमोस्टैटिक एजेंट का विकास बिंदु पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ भट्ट ने बताया कि गनशॉट से अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से भारत के सेना के जवानों का जीवन खतरे में आ जाता है। उनके रक्तस्राव को रोकने हेतु एक स्वदेशी औषधि का निर्माण किया है जिसकी क्षमता अन्य दवाओं की अपेक्षा काफी बेहतर है। यह औषधि एलिग्नेट रसायन पर आधारित है।

एक अन्य सत्र की अध्यक्षता करते हुए इंस्टिट्यूट आफ मॉलिक्यूलर एंड आयुर्वेदिक बायोलॉजी के निदेशक एवं बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ राजा वशिष्ट त्रिपाठी ने आयुर्वेद के विभिन्न आयामों व पर महायोगी गोरखनाथ जी के ग्रंथो के सबद दोहावली को लेते हुए आहार-विहार पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कहा- हमें आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान को साथ में रखकर कदम से कदम मिलाकर आगे अध्ययन की जरूरत है जो भविष्य में मानवता के समग्र विकास हेतु एक वरदान साबित होगा। 

डॉ त्रिपाठी ने कहा कि भारत के वैदिक ग्रंथ मार्गदर्शक ग्रंथ हैं जिनके द्वारा संपूर्ण विश्व को निरोगी बनाया जा सकता है। जरूरत बस इन ग्रंथों में निहित ज्ञान को अपनाने की है। हमारा शरीर हर प्रकार के बीमारियो से निपटने की क्षमता रखता है और इस क्षमता का ज्ञान वैदिक ग्रंथों में वर्णित है।

संगोष्ठी के एक सत्र में मुंबई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रो आरवी होसुर ने द्दहर्बोलॉमिक्स, एन इमर्जिंग फ्रंटियर, विषय पर बात करते हुए कहा कि आयुर्वेद में सभी रोगों से निदान संबंधी सामग्री संकलित है। उन्होंने त्रिफला की उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि त्रिफला एंटीआक्सीडेंट, सूजनरोधी और जीवाणुरोधी प्रभाव वाला एक प्राचीन हर्बल उपचार है। यह हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। 

त्रिफला पुरातन काल से प्रचलित महत्वपूर्ण औषधि है। त्रिफला को हर उम्र के लोग रसायन औषधि के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके नियमित सेवन से पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है। यह औषधि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर रोगों में भी लाभकारी है। आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला में ऐसे गुण हैं जो पाचन शक्ति बढ़ाने और वजन घटाने में सहायक हैं।

सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय पुणे के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की डॉ शिल्पी शर्मा ने मधुमेह के प्रबंधन के लिए प्राकृतिक यौगिकों की क्षमता की खोज विषय पर अपना शोध अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों में लगभग सभी लाइलाज बीमारियों के इलाज हैं। 

मधुमेह जैसी भयानक बीमारी का इलाज भी आज वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया है और अब प्राकृतिक संसाधनों से इसकी दवाई भी बनाई जा रही है जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा। आईआईटी इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ हेम चन्द्र झा ने अश्वगंधा बैक्टीरिया और वायरस से प्रेरित गैस्ट्रिक के खिलाफ एक संभावित चिकित्सीय एजेंट है विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि अश्वगंधा चूर्ण या किसी भी माध्यम में इसे लेने से यह शरीर को स्वस्थ ही बनाता है। यह विभिन्न रोगों से लड़ने में और असामान्य बीमारी से हमें बचाने में भी कारगर सिद्ध होता है।

Published / 2023-12-16 11:46:51
कोरोना की एक और लहर ने एक बार फिर बढ़ाया टेंशन

  • कोविड-19 के नये वैरिएंट जेएन.1 से संक्रमित सात मरीज मिले 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना की एक और लहर एक बार फिर पूरी दुनिया को सताने वाली है। चीन में मिले सबवैरिएंट जेएन.1. के सात मामले ने एक बार फिर लोगों का टेंशन बढ़ा दिया है। चीन ने कोविड-19 के नये वैरिएंट जेएन.1 से संक्रमित सात लोगों का पता लगाया है। 

देश के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण और रोकथाम प्रशासन का कहना है कि फिलहाल देश में इसका खतरा काफी कम है। हालांकि, साथ ही अधिकारियों ने इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि आगे यह खतरनाक नहीं हो सकता है। 

यूके, आइसलैंड, फ्रांस और अमेरिका में फैलने से पहले जेएन.1 वैरिएंट की पहचान सबसे पहले लक्जमबर्ग में की गयी थी। आइए जानते हैं कि क्या है कोविड-19 का नया वैरिएंट, इससे खतरा आदि।

Published / 2023-11-30 20:53:47
सावधान... एक और नयी बीमारी का टेंशन दे रहा चीन

  • चीन की रहस्यमयी बीमारी को लेकर झारखंड में भी अलर्ट
  • सिविल सर्जन ने कहा- इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार

टीम एबीएन, रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में एक बार फिर एक ऐसी बीमारी का खतरा मंडरा रहा है जो लोगों को मास्क पहनने पर मजबूर कर रहा है। दरअसल, इन दिनों चीन में एक और स्वास से जुड़ी बीमारी इन्फ्लूएंजा ने दस्तक दे दी है और इसका असर भारत में भी पड़ने की आशंकाएं जतायी जा रही है। इस बीमारी के शिकार ज्यादातर छोटे बच्चे हो रहे हैं।

चीन से आये फ्लू को लेकर केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है। जिसके बाद झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। रांची के सदर अस्पताल में भी यह कवायद शुरू हो गयी है और बेड और दवाइयों के पुख्ता इंतजाम किये जा रहे हैं।

सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर ने कहा कि इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार है और एहतियात बरती जा रही है, लेकिन डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि पूरे देश में वैक्सीन लगाये गये हैं और इम्यूनिटी मजबूत करायी गयी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि हर लेवल पर तैयारियां की जा रही है और ब्लॉक लेवल पर बजी दवाइयां लेने को कहा गया है। ट्रेनिंग भी दी जा रही है और ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं बीएसए प्लांट का भी मॉक ड्रिल किया जा रहा है।

Published / 2023-11-23 21:14:12
मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स अस्पताल ने रचा इतिहास, बिना चीरा लगाये हृदय वाल्व का सफलतापूर्ण उपचार

  • मेदांता रांची हॉस्पिटल ने पहली बार ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन विधि से वाल्व प्रत्यारोपित कर बुजुर्ग मरीज की जान बचायी 
  • झारखंड में पहली बार मेदांता रांची हॉस्पिटल ने ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन विधि का प्रयोग कर आओरटिक वाल्व स्टेनोसिस का इलाज, पुराने (खराब), क्षतिग्रस्त वाल्व को हटाये बिना एक नया वाल्व लगाकर मिनिमल इनवेसिव प्रकिया से किया गया 

एबीएन हेल्थ डेस्क। मेदांता रांची के कार्डियक साइंस टीम के डॉक्टर द्वारा प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया कर हृदय रोगों से जुड़े मुद्दों पर बात की। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डाक्टरों ने बताया कि मेदांता रांची इलाज के साथ लोगों को हृदय रोगों से जुड़े खतरों के बारे में जाकरूक करता है। विभिन्न माध्यमों से पैदा की गई जागरूकता हृदय रोगियों को उनकी स्थिति को खराब होने से बचाने और हृदय को स्वस्थ जीवन शैली जीने में मदद करती है। 

हृदय रोगों के कई रूपों को स्वस्थ जीवन शैली विकल्पों के साथ रोका या इलाज किया जा सकता है, जबकि अन्य के लिए दवा या सर्जरी की आवश्यकता होती है। दिल की बीमारियों का जल्दी पता चलने पर इलाज आसान होता है। मेदांता अस्पताल अक्सर इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए हृदय रोगों के बारे में प्रचार-प्रसार करने में अग्रणी रहा है। सभी हृदय संबंधी आपात स्थितियां जैसे कार्डियक अरेस्ट, तीव्र हृदय विफलता, कार्डियक अतालता, अस्थिर एनजाइना और विकारों को पूरा करना। 

मौके पर मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने एक अनोखा और अद्वितीय मेडिकल स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि मेदांता रांची के डाक्टरों ने एक मरीज का सफल इलाज किया। यह झारखंड में पहला केस, जहां बिना सर्जरी के मरीज के दिल के वाल्व को बदला गया है। उन्होंने बताया कि यह इलाज का एक बहुत ही एडवांस फॉर्म है, जिसमे ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन पद्धति का इस्तेमाल किया गया है।  

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि मरीज उनके पास कुछ समय पहले आई थी। मरीज को रात में सोने में काफी दिक्कत होती है, उनकी सांस भी फूलने लगती थी। मरीज की समस्या को सुनने के बाद पहले उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।

डाक्टरों को चेकअप के दौरान पता चला कि मरीज को सीवियर कैल्सीफिक एसिस यानी यह एक ऐसी बीमारी  है, जिसमें मरीज के दिल का एक वाल्व सूख जाता है, जिसकी वजह से खून के प्रवाह में दिक्कत आती है। मरीज को इसकी वजह से अक्सर बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत और थकावट होती थी। इसके साथ ही उन्हें बाएं वेंट्रिकुलर डिसफंक्शन भी था यानी उनका दिल कमजोर हो चुका था। इसलिए मरीज को अक्सर  दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।  

मरीज की समस्या को देखते हुए डाक्टरों की एक टीम का गठन किया गया । डाक्टरों ने समझा कि क्योंकि मरीज का  दिल कमजोर है इसलिए कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता, उनका इलाज इस तरह से करना होगा उनका दिल सुरक्षित भी हो जाए और उन्हें कोई तकलीफ भी ना हो। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस वाल्व को बदलने के दो तरीके थे- एक सर्जरी के माध्यम से और दूसरा नस के माध्यम से वाल्व का प्रत्यारोपन करना। काफी सोचने के बाद यह निर्णय लिया गया कि दूसरा तरीका अपनना चाहिए क्योंकि दिल कमजोर और सर्जरी की वजह से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता है। डाक्टरों की टीम ने 14 नवंबर को ळं५्र पद्धति के माध्यम से इलाज किया, जिसमें मरीज के नस के माध्यम से वाल्व का प्रत्यारोपन किया गया। जिसके बाद मरीज पूरी तरह से स्वास्थ है। 

मौके पर मेदांता रांची के डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने कहा कि हमारी कोशिश होती है विभिन्न हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों के लिए हृदय देखभाल की सुलभ और किफायती सुविधाएं प्रदान करे। उन्होंने कहा कि मेदांता रांची में कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर टीम उपलब्ध है। इसके बारे में और जानकारी देते हुए उन्होंने बतलाया, मेदांता रांची में कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर की विश्वस्तरीय प्रशिक्षित मेडिकल टीम है।

उन्होंने इसकी अहमियत पर प्रकाश डाला और यह भी बताया की मेडिकल टीम इमरजेंसी कार्डियक  संबंधित समस्याओं के लिए 24 गुणा 7 सुविधाएं उपलब्ध है इसके अलावा जन्मजात हृदय रोग तथा वयस्कों के अति जटिल हृदय संबंधित समाधान आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के साथ उपलब्ध है, मेदांता रांची में हृदय रोग संबंधित समस्याओं के लिए झारखंड की सबसे बड़ी कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर टीम में से एक है।

Published / 2023-11-06 19:06:42
वेबिनार में चिकित्सकों ने दिये दंत सुरक्षा और उसकी मजबूती के टिप्स

टीम एबीएन, रांची। वेबिनार का आयोजन 6/11/23 संध्याकाल में दंत्य प्रतिस्थापन विषयगत केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना लाभार्थी कल्याण संघ भारत ने आज संध्या को एक वेबिनार का आयोजन किया। इसमें देश भर के लाभार्थी भाग लिये। वेबिनार विश्वनाथ पांडे की अध्यक्षता में हुई।इसका संचालन डॉक्टर दिलीप गांगुली जन सम्पर्क प्रमुख ने की।

संघ के महासचिव टी के दामोदरण ने धन्यवाद देते हुए कहा कि वेबिनर से दंत स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है और व्यापक जानकारी मिली है। वेबिनार के अतिथि दंत चिकित्सक रशमीत कुमार, बीडीएस, एमडीएस (ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी हैप्पी टूथ मल्टीस्पेशलिटी डेंटल क्लिनिक, लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल के सामने, एजी रोड, डोरंडा रांची)  ने कहा कि दंत प्रतिस्थापन विषयगत मामले में भले ही दंत स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है।

फिर भी अधिकांश लोग दांतों की समस्याओं जैसे दांतों का झड़ना, मसूड़े की सूजन और दांतों की सड़न आदि का अनुभव करते हैं। शुरुआती दिनों में लापता दांतों को केवल डेन्चर या ब्रिज से बदला जा सकता। हालांकि, दंत चिकित्सा प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास के साथ, उच्च दंत प्रत्यारोपण उपलब्ध हैं। डेंटल इम्प्लांट सर्जरी एक लोकप्रिय और सुरक्षित डेंटल प्रक्रिया है और इसे लापता दांतों के लिए एक अच्छा प्रतिस्थापन माना जाता है। 

जबड़े की हड्डी की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य कारक दंत प्रत्यारोपण सर्जरी की संभावना निर्धारित करते हैं। प्रत्यारोपण का लाभ यह है कि वे प्राकृतिक दांतों के रूप में दिखाई देते हैं, मुस्कान बनाये रखते हैं और प्रत्यारोपण के आसपास हड्डी को सुरक्षित रूप से ठीक करने की सुविधा देकर मुंह की समग्र संरचना को बनाये रखते हैं। 

क्योंकि हड्डी ठीक होने में समय लगता है, उपचार पूरा होने में कुछ समय लग सकता है।ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि दंत प्रत्यारोपण की गहराई समझ लें। दंत प्रत्यारोपण कृत्रिम उपकरण हैं जो एक दंत चिकित्सक रोगी के जबड़े की हड्डी में रखता है। वे टाइटेनियम स्क्रू से बने स्थायी फिक्सेशन होते हैं, जो लापता दांत को बदलने के लिए मसूड़ों के नीचे जबड़े की हड्डी में शल्य चिकित्सा द्वारा प्रत्यारोपित किये जाते हैं। 

  • दंत प्रत्यारोपण तीन भागों से बना होता है :- ताज, सीमा और प्रत्यारोपण।

दांतों के प्रतिस्थापन के लिए दंत प्रत्यारोपण को एक प्रभावी दीर्घकालिक समाधान के रूप में दिखाया गया है। यदि किसी व्यक्ति के एक या अधिक दांत टूट गये हैं, तो उन्हें दांतों के बीच के अंतराल को भरने के लिए दांत प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है। बताया कि डेंटल इम्प्लांट सर्जरी में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें डेंटल इम्प्लांट साइट (जिसे ऑसियोइंटीग्रेशन के रूप में जाना जाता है) के आसपास ठीक से ठीक होने के लिए जबड़े की हड्डी की आवश्यकता होती है।

इम्प्लांट को एक प्राकृतिक दांत के समान गमलाइन में पकड़ना होता है। प्रत्यारोपण जबड़े की हड्डी के भीतर एक शल्य प्रक्रिया द्वारा रखा जाता है और यह कृत्रिम दांत की जड़ के रूप में कार्य करता है। इस प्रक्रिया के लिए टाइटेनियम पहली पसंद है, क्योंकि यह इम्प्लांट को जबड़े की हड्डी के साथ सफलतापूर्वक जोड़ देता है। 

मजबूती से अपनी जगह पर बना रहता है और किसी ब्रिजवर्क की तरह क्षतिग्रस्त नहीं होगा। डेंटल इम्प्लांट सर्जरी एक डेंटल प्रक्रिया है जो लापता या क्षतिग्रस्त दांतों को कृत्रिम दांतों से बदल देती है जो असली दांतों की तरह दिखते और काम करते हैं। यह ऑपरेशन खराब फिटिंग वाले डेन्चर या ब्रिजवर्क के लिए एक स्वागत योग्य विकल्प हो सकता है।

दंत प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए पसंदीदा उपचार है जिनके एक या अधिक दांत टूट चुके हैं। प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए उपयुक्त हैं, जिनका एक दुर्घटना में दांत टूट गया है, या दांत गंभीर रूप से सड़ चुके हैं और दांत निकालने की आवश्यकता है। यहां कुछ कारण बताये गये हैं कि किसी को दंत प्रत्यारोपण की आवश्यकता क्यों पड़ सकती है: कैविटी (दांतों की सड़न, दबाना या पीसने की आदत, दांत की जड़ का फ्रैक्चर, चेहरे की चोट  कटे ओट मसूढ़े की बीमारी कुछ मामलों में, कुछ कारकों के कारण दंत प्रत्यारोपण सफल नहीं हो सकते हैं। 

नीचे दी गयी स्थितियों में कोई व्यक्ति दंत प्रत्यारोपण प्राप्त करने के योग्य नहीं हो सकता है। धुआं, विकिरण उपचार गर्दन या सिर पर, अनियंत्रित मधुमेह, रक्त के थक्के विकार कैंसर जैसी पुरानी बीमारी, खराब रोग प्रतिरोधक क्षमता और जबड़े की हड्डी कमजोर होना।

दंत प्रत्यारोपण से दंत प्रत्यारोपण बेहतर पाचन, चबाने की क्षमता में सुधार करता है। यह आपके आत्मसम्मान को बढ़ाता है।यह आपके बचे हुए दांतों को हिलने से रोकता है। यह आपकी मुस्कान को बरकरार रखता है।यह दांतों को प्राकृतिक रूप देता है। यह स्थायी या हटाने योग्य डेंटल ब्रिज और डेन्चर को बनाए रखने में मदद करेगा। 

अन्य स्वास्थ्य लाभों के अलावा आत्मविश्वास में सुधार करने के लिए दंत प्रत्यारोपण महत्वपूर्ण है। आगे बताया कि दंत प्रत्यारोपण उपचार में जोखिम दुर्लभ हैं, और जब वे उत्पन्न होते हैं, तो वे अक्सर हल्के और प्रबंधनीय होते हैं। इम्प्लांट साइट पर संक्रमण या मामूली रक्तस्राव हो सकता है। साथ ही आसपास के ऊतकों और तंत्रिका क्षति में मामूली चोट लग सकती है, जिससे असुविधा या सुन्नता हो सकती है।

ऊपरी जबड़े में दंत प्रत्यारोपण साइनस गुहाओं में से एक में फैल सकता है, जिससे साइनस की समस्या हो सकती है। दुर्लभ परिस्थितियों में मामूली रक्तस्राव का पता लगाया जा सकता है। दंत प्रत्यारोपण के अधिकांश ऑपरेशन सफल होते हैं। उचित मौखिक स्वच्छता का अभ्यास करके संक्रमण से बचा जा सकता है, जैसे कि दिन में दो बार दांतों को ब्रश करना और इंटरडेंटल ब्रश का उपयोग करके अपने दांतों के बीच सफाई करना। 

आपको तंबाकू उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए और धूम्रपान से बचना चाहिए।प्रत्यारोपण प्रक्रिया के पहले सप्ताह के दौरान, दंत चिकित्सक किसी भी दर्द और दर्द का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं और इबुप्रोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द दवाओं का सुझाव देगा। 

सर्जरी के बाद मामूली असुविधा होगी और दंत चिकित्सक नरम खाद्य पदार्थ खाने, दर्द और सूजन को कम करने के लिए आइस पैक लगाने और सर्जिकल साइट के ठीक होने तक धैर्य बनाए रखने की सलाह देंगे। डेंटल इम्प्लांट सुरक्षित हैं और लापता दांतों को बदलने का एक प्रभावी तरीका है। 

एक बार डालने के बाद, दंत प्रत्यारोपण जबड़े की हड्डी में मिल जाते हैं। डाक्टर रशमित ने अंत में कई लाभार्थी भागीदारों के प्रश्नों के उत्तर संतोषजनक दिये।

द्वारा- गणेश प्रसाद चौधरी कार्यपालक सदस्य केंद्रीय सारकार स्वास्थ्य सेवा लाभार्थी कल्याण एसोसिएशन, झारखण्ड रांची 
मोबाइल 9308255900

Published / 2023-11-05 23:06:21
जानें थायराइड के कारण, लक्षण और निदान...

दो तरह का होता है थायराइड, ये लक्षण दिखें तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज 

एबीएन हेल्थ डेस्क। थायराइड की समस्या अमूमन महिलाओं में देखी जाती है, हालांकि कई पुरुषों को भी थायराइड हो जाता है। शरीर में हार्मोन के इंबैलेंस की वजह से ये बीमारी होती है। हमारे गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि होती है, जो हार्मोन का निर्माण करती है। 

जब किसी वजह से इस एंडोक्राइन ग्रंथि की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। जिसकी वजह से थायराइड की समस्या से जूझना पड़ता है। इस बीमारी से पीड़ित होने पर सेहत संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अधिकतर लोग शरीर में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन इससे यह समस्या गंभीर हो सकती है। 

थायराइड भी दो तरह का होता है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन ज्यादा बनने लगता है तब हाइपरथायरायडिज्म की समस्या होती है और जब यह हार्मोन कम मात्रा में बने तो व्यक्ति हाइपोथायरायडिज्म का शिकार होता है। थायराइड के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाये तो लाइफस्टाइल में बदलाव कर और कुछ ट्रीटमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

हाइपरथायराइड होने पर दिखते हैं ये लक्षण

अगर किसी को हाइपरथायराइड की समस्या हो तो वजन कम होना, भूख ज्यादा लगना, मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द, धड़कन तेज होना, घबराहट महसूस होना, बिना वजह चिड़चिड़ापन और पसीना ज्यादा आने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। 

हाइपोथायराइड के क्या हैं लक्षण 

जब कोई हाइपोथायराइड से पीड़ित होता है तो उसे पसीना कम आना, बालों का ज्यादा झड़ना, थकान, चेहरे पर सूजन, कब्ज, स्ट्रेस महसूस होना, धड़कनों की गति कम महसूस होना, मांसपेशियों में अकड़न, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

इन चीजों से करें परहेज 

थायराइड के लक्षण दिखाई दे रहे हो तो सोयाबीन और उससे बनी चीजों का सेवन न करें, क्योंकि सोयाबीन में फाइटोएस्ट्रोजन पाया जाता है जो थायराइड हार्मोन बनाने वाले एंजाइम की कार्यक्षमता पर असर डाल सकता है। इसके अलावा इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अल्कोहल, कैफीन युक्त चीजों जैसे चाय-कॉफी, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड्स से भी परहेज करना चाहिए। 

लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव 

हेल्दी रहने के लिए यह बहुत जरूरी है कि रोजाना कुछ वक्त एक्सरसाइज के लिए निकाला जाये। थायराइड की समस्या में भी रोजाना वर्कआउट करने से काफी फायदा मिल सकता है, क्योंकि इससे आप अपना वेट मेंटेन रख पाते हैं। वहीं अपनी डाइट में तोरई, लौकी, परवल, मशरूम जैसी सब्जियां शामिल करें। इसके अलावा गाय का दूध, नारियल पानी, ग्रीन टी, बादाम, मूंगफली जैसे फूड्स भी फायदेमंद रहते हैं।

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