टीम एबीएन, रांची। झारखण्ड सिविल सेवा के कुल तीन सौ बयालीस (342) प्रशिक्षु पदाधिकारियों को संस्थागत प्रशिक्षण के साथ योगाभ्यास प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से दिया गया है। रांची स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में अभी चल रहे नवनियुक्त 342, प्रशिक्षु पदाधिकारियों को उनकी शारिरिक तंदुरूस्ती और मानसिक स्वास्थ्य के लिये पूरे प्रशिक्षण काल में पीटी के साथ योग का प्रशिक्षण दिया गया है।
स्वामी मुक्तरथ जी ने कहा कि अधिकारियों की संख्याबल को देखते हुए दो योग प्रशिक्षक को लगाया गया ताकि उन्हें योग का पूरा लाभ मिल सके। लगभग डेढ़ महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में अधिकारियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि योग से इस ठंढ के मौसम में हमलोगों को बहुत ज्यादा लाभ मिला, दिन भर स्फूर्ति बनी रहती थी और मन तरोताजा रहता था। इसे हमलोग अपने जीवनचर्या में शामिल करेंगे।
मुक्तरथ जी ने कहा कि महानिदेशक डॉ मनीष रंजन प्रशिक्षुओं को योग के लिये काफी प्रोत्साहित करते थे। ताकि पदाधिकारी अपने दिनभर के चलने वाले प्रशिक्षण काल में थकें नहीं और सजग रहते हुए विषयों को समझ पायें। प्रशिक्षण के समापन पर डॉ मनीष रंजन ने कहा कि अधिकारियों ने योग कक्षा की बहुत प्रशंसा किये हैं। इन्हें योग से काफी लाभ मिला है। निश्चित ही योग से समग्र स्वास्थ्य पर लाभ मिलता है। मुक्तरथ जी ने कहा कि यह प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें राज्य के विभिन्न विभाग के महत्वपूर्ण पदों के लिये चयनित पदाधिकारी थे।
207 डिप्टी कलक्टर, पैंतीस डीएसपी, छप्पन राज्य कर पदाधिकारी, दो कारा अधीक्षक, दस झारखण्ड शिक्षा सेवा, एक जिला समादेष्टा, आठ सहायक निबन्धक, चौदह श्रम अधीक्षक, छह प्रोबेशन पदाधिकारी, और तीन उत्पाद निरीक्षक की संख्या थी। सभी ने बहुत ही रुचिपूर्ण तरीके से योगासन, प्राणायाम, शिथिलीकरण, मुद्रा और ध्यान के प्रशिक्षण को प्राप्त किये। इनलोगों ने जीवन में योग को शामिल करने की महत्ता पर विश्वास प्रगट किये।
टीम एबीएन, रांची। राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब लाभुकों को एक ही सूचीबद्ध अस्पताल में उपलब्ध सभी रोगों का इलाज मिल सकेगा। यह नयी व्यवस्था नये बीमा वर्ष से लागू होगी। इसके लिए झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी द्वारा नया टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस संबंध में आज नामकुम स्थित निदेशालय भवन में प्री-बिड मीटिंग का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने की। बैठक के दौरान प्री-बिड में शामिल बीमा कंपनियों द्वारा उठाई गई सभी शंकाओं का समाधान किया गया। शंकाओं से संबंधित समाधान को तीन दिनों बाद वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा।
कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने बताया कि यह योजना वर्ष 2025 में लागू हुई थी, लेकिन लाभुकों की यह शिकायत सामने आ रही थी कि एक ही अस्पताल में सभी रोगों का इलाज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए नयी व्यवस्था लायी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए बीमा वर्ष से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जायेंगी।
उन्होंने बीडर्स से कहा कि ऐसे अस्पतालों का ही चयन किया जाए, जहां उपलब्ध सभी चिकित्सीय सेवाओं का लाभ लाभुकों को मिल सके। उनका कहना था कि योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी स्थिति में लाभुकों को परेशानी न हो और उन्हें प्रभावी, सुलभ एवं कैशलेस इलाज मिल सके।
बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा तथा पदाधिकारी कुणाल भारती, अंशु कुमार सिंह और विवेक कुमार उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को पूरी योजना और बीड प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
जानकारी दी गयी कि राज्य से बाहर देशभर में 237 अस्पतालों को सूचीबद्धता के लिए चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही 12 लिस्टेड अस्पतालों को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध करना चयनित बीमा कंपनी के लिए आवश्यक होगा। इन अस्पतालों में वास्तविक दरों पर बीमा कंपनी द्वारा भुगतान किया जायेगा।
इन 12 प्रमुख अस्पतालों में सीएमसी वेल्लोर, शंकर नेत्रालय, नारायण इंस्टीट्यूट आॅफ कार्डियक साइंसेज, एआईजी हैदराबाद, टाटा ग्रुप के सभी अस्पताल, आईएलबीएस नई दिल्ली, अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई, मेदांता गुड़गांव, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नारायण हेल्थ बेंगलुरु और बीएम बिरला अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड के सभी बड़े अस्पतालों की सूची तैयार की गई है, जिन्हें बीमा कंपनी को सूचीबद्ध करना अनिवार्य होगा।
इनमें सीजीएचएस अंतर्गत अनुबंधित अस्पताल (एनएबीएच मान्यता प्राप्त), सीजीएचएस अंतर्गत अनुबंधित लेकिन नॉन-एनएबीएच, एनएबीएच मान्यता प्राप्त तथा अन्य अस्पताल शामिल हैं। साथ ही राज्य से सटे अन्य राज्यों में स्थित कई दर्जन अस्पतालों को भी सूची में शामिल किया गया है, ताकि लाभुकों को इलाज में किसी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें सहज एवं कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
टीम एबीएन, रांची। राज्य में स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को 31 जनवरी 2026 तक हेम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट करने का निर्देश दिया है।
बैठक में रांची के तीन सूचीबद्ध निजी अस्पतालों, राज हॉस्पिटल, रानी हॉस्पिटल और समर हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को हेम 2 पर माइग्रेट करने का अनुमोदन दिया गया। यह निर्देश उन्होंने मंगलवार को अपने कार्यालय कक्ष में आहूत समीक्षा बैठक के दौरान दिये। बैठक में अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं सिद्धार्थ सान्याल, अस्पताल प्रबंधन से जुड़े प्रतिनिधि, बीमा कंपनियों के पदाधिकारी तथा जसास के अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर विभिन्न समितियों द्वारा किये जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की गई और स्वास्थ्य योजनाओं से संबंधित तात्कालिक प्रतिवेदनों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यकारी निदेशक ने लाभुकों, निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के समक्ष आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को गंभीरता से सुना और उनके शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिये।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पताल पहले ही हेम 2.0 प्रणाली पर अपग्रेड हो चुके हैं, जबकि कुछ निजी अस्पताल अभी भी हेम 1 पर ही कार्य कर रहे हैं। इससे योजनाओं के सुचारु संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है, जिसे देखते हुए सभी निजी अस्पतालों को तय समय-सीमा के भीतर माइग्रेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया।
समीक्षा के दौरान कार्यकारी निदेशक ने बीमा कंपनियों को उन रोगों की विस्तृत विवरणी प्रस्तुत करने को कहा, जिनमें पैकेज राशि अधिक है और जिनका उपयोग भी ज्यादा हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के बाहर जिन अस्पतालों में मरीजों का उपचार कराया जा रहा है, उनकी पूरी सूची उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया, ताकि इलाज की प्रवृत्ति और खर्च का विश्लेषण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि हेम 2.0 के माध्यम से इलाज की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और लाभुक-अनुकूल बनाया जा सकेगा। इससे न केवल मरीजों को समय पर बेहतर सेवाएं मिलेंगी, बल्कि अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय भी मजबूत होगा। बैठक में सभी संबंधित पक्षों से निर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने की अपील की गयी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी आम जनता तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से आज एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता का आयोजन एनएचएम के अभियान निर्देशक शशि प्रकाश झा ने किया। मौके पर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, डॉ. कमलेश, डॉ. पंकज कुमार सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अभियान निर्देशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि इस संवाद का मुख्य उद्देश्य यह है कि आम लोग सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें, क्योंकि जागरूकता के अभाव में कई योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।
उन्होंने मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 10 फरवरी से 25 फरवरी तक पूरे राज्य में घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवाएं दी जायेंगी। इस अभियान में पंचायत स्तर के सभी पीआरआई प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी, ताकि प्रत्येक घर तक दवा पहुंच सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं है और फाइलेरिया का उपचार होने के बाद संभव नहीं है, इसलिए रोकथाम ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है।
मलेरिया के संबंध में उन्होंने कहा कि लगातार रोकथाम अभियान चलाये जा रहे हैं, लेकिन मच्छरदानी के उपयोग में लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण संक्रमण के मामले सामने आते हैं।
कुष्ठ रोग को लेकर उन्होंने बताया कि 30 जनवरी से 13 फरवरी तक विशेष अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि कुष्ठ रोग हाथ मिलाने से नहीं, बल्कि लंबे समय तक निकट संपर्क में रहने से हो सकता है। समय पर जांच और उपचार से इस रोग पर पूरी तरह नियंत्रण संभव है।
टीबी के विषय में उन्होंने कहा कि इसका वन-टू-वन इलाज उपलब्ध है। मरीजों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर इलाज कराना चाहिए। टीबी मरीजों को उपचार के दौरान 1000 प्रतिमाह पोषण सहायता भी दी जाती है।
अभियान निर्देशक ने लोगों से अपील की कि वे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नियमित जांच करायें। उन्होंने बताया कि यहां 106 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं और 64 तरह की जांच सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर सभी सीएचओ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिसमें लोगों से जांच कराने का आह्वान किया गया।
साथ ही ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच पर भी जोर दिया गया। पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए प्रबंध निदेशक ने कहा कि राज्य में 11 फरवरी 2025 से 20 जनवरी 2026 तक चार लाख 18 हजार 666 केसेस आयुष्मान भारत- मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत दर्ज किया चुके हैं।
निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने थैलेसीमिया से जुड़े चाईबासा मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि जांच टीम रवाना हो चुकी है और शीघ्र रिपोर्ट उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह मामला तीन वर्ष पुराना है, फिर भी पूरी जांच की जायेगी। उन्होंने बताया कि अगले दो महीनों में 237 नयी एंबुलेंस राज्य में शामिल की जायेंगी, जो पुरानी एंबुलेंस का स्थान लेंगी।
वर्तमान में 108 सेवा के तहत 487 एंबुलेंस संचालित हैं, जबकि 100 से अधिक छोटी एंबुलेंस भी पूरे राज्य में कार्यरत हैं। नई एंबुलेंस में जीपीएस और ट्रैकिंग की सुविधा होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शव वाहन और एंबुलेंस अलग सेवाएं हैं। प्रत्येक जिले में दो शव वाहन की व्यवस्था की गयी है और आवश्यकता के अनुसार और शव वाहन खरीदे जायेंगे।
प्रेस वार्ता के अंत में प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि सप्ताह में एक दिन पत्रकारों के लिए निर्धारित किया जायेगा, जिसमें विभाग अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों की नियमित जानकारी मीडिया के माध्यम से साझा करेगा।
टीम एबीएन, रांची। छवि रंजन, कार्यकारी निदेशक, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसायटी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय समिति द्वारा 5 लाख रुपये से अधिक एवं 20 लाख रुपये तक की अनुशंसा से संबंधित मामलों पर विचार हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में निदेशक, स्वास्थ्य सेवायें डाॅ सिद्धार्थ सान्याल, अपर कार्यकारी निदेशक, श्रीमती सीमा सिंह और महाप्रबंधक, जसास श्री प्रवीण चंद्र मिश्रा के साथ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं आंतरिक वित्तीय सलाहकार उपस्थित थे। बैठक में कुल 18 गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में गंभीर बीमारी से ग्रसित 18 मरीजों को चिकित्सा अनुदान की राशि स्वीकृत करने पर सर्वसम्मति बनी। इन मामलों में कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट एवं अन्य जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल हैं। जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुशंसित राशि को अनुमोदन प्रदान किया गया।
एक मरीज के उपचार हेतु 10 लाख रुपये से अधिक (16 लाख रुपये) की सहायता राशि की आवश्यकता को देखते हुए, राज्य स्तरीय समिति द्वारा इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति हेतु भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक के दौरान यह पाया गया कि कुछ जिलों से प्राप्त आवेदनों में मरीज की वर्तमान चिकित्सीय स्थिति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इस पर कार्यकारी निदेशक, जसास श्री छवि रंजन ने निर्देश दिया कि सभी सिविल सर्जन स्वयं अथवा नामित पदाधिकारी के माध्यम से मरीज का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सत्यापन किया जाएगा।
कार्यकारी निदेशक, जसास छवि रंजन ने यह भी निर्देश दिया गया कि अस्पतालों से प्राप्त उपचार अनुमान का सत्यापन संबंधित सिविल सर्जन द्वारा किए जाने के बाद ही निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं के माध्यम से प्रस्ताव को राज्य स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
राज्य सरकार मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को समय पर एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में फाइलेरिया यानी हाथीपांव उन्मूलन को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में नेपाल हाउस स्थित अपर मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में स्टेट टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आहूत बैठक में 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम की रणनीति, चुनौतियों और विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम पर भी चर्चा की गयी। इस बैठक में अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, उप निदेशक डॉ लाल माझी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और पीरामल स्वास्थ्य के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
बैठक में प्रस्तुति के क्रम में बताया गया कि फाइलेरिया एक गंभीर परजीवी रोग है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलता है। दुनिया के 72 देश लिम्फेटिक फाइलेरिया से प्रभावित हैं, जहां 88.8 करोड़ लोग जोखिम में हैं। भारत में अब तक लगभग 6 लाख लिम्फोडेमा और 2 लाख हाइड्रोसील मरीज चिह्नित किये गये हैं।
झारखंड में 57,436 लिम्फोडेमा मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं। राज्य में फाइलेरिया के उन्मूलन को लेकर सरकार ने इसे मिशन मोड में चलाने का निर्णय लिया है।
10 फरवरी 2026 से राज्य के 14 जिलों—बोकारो, देवघर, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, कोडरमा, लोहरदगा, पाकुड़, रामगढ़, रांची, साहेबगंज और सिमडेगा के 87 चिह्नित प्रखंडों के 14,496 गांवों में एमडीए कार्यक्रम संचालित किया जायेगा। इसके अंतर्गत लगभग 1.75 करोड़ आबादी को फाइलेरिया रोधी दवाएं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में सेवन कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई पहल शुरू की हैं। लिम्फोडेमा मरीजों के उपचार हेतु 215 कार्यशील एमएमडीपी क्लिनिक हैं जहां समुचित इलाज मिल सकेगा। 5053 मरीजों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है और 1714 हाई-प्रायोरिटी गांव चिह्नित किये गये हैं। पंचायत स्तर पर 230 एमडीए मिशन स्क्वाड का गठन किया गया है और 289 सामुदायिक स्वयंसेवकों की भागीदारी इसमें होगी। बेहतर मानिटरिंग के लिए राज्य मुख्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना की गयी है, जहां गूगल शीट के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एमडीए के दौरान केवल दवा वितरण नहीं, बल्कि दवा सेवन सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि यदि समुदाय के सभी पात्र लोग लगातार 5 वर्षों तक वर्ष में एक बार दवा का सेवन करें, तो झारखंड से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव है। उन्होंने सभी विभागों से इसे जन आंदोलन के रूप में लेने और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से समुदाय को जागरूक करने की अपील की।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने निपाह वायरस संक्रमण को लेकर राज्य भर में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के मामलों की पुष्टि के बाद झारखंड में भी एहतियात बरतना आवश्यक है।
वर्तमान में राज्य में निपाह वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन संभावित जोखिम को देखते हुए निगरानी और तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस के लक्षणों जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, मानसिक भ्रम, दौरे या बेहोशी के मामलों पर विशेष निगरानी रखने को कहा है।
साथ ही पश्चिम बंगाल से आए व्यक्तियों की ट्रैवल हिस्ट्री के आधार पर स्क्रीनिंग, सर्विलांस और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश में संक्रमण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन, संदिग्ध मामलों के नमूनों की जांच निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कराने और राज्य व जिला सर्विलांस इकाई को त्वरित सूचना देने को कहा गया है।
आम जनता को जागरूक करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गिरे हुए या आंशिक रूप से खाए गए फलों का सेवन न करने, कच्चा खजूर रस न पीने, बीमार व्यक्ति से अनावश्यक संपर्क से बचने और लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों से बचने और केवल सरकारी सूचना स्रोतों पर भरोसा करने को कहा गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, सरायकेला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर में नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संस्थान की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए भविष्य बदलने वाला कदम बताया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन कोल्हान के लिए ऐतिहासिक है। सरायकेला में उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेज का सपना अब हकीकत बन गया है। यह संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान करेगा बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज की सेवा के लिए योग्य डॉक्टर तैयार करेगा।
उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्तमान में 10 मेडिकल कॉलेज हैं, और सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इसे 20 तक बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि चाईबासा, कोडरमा और बोकारो में सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने मेडिकल स्टूडेंट्स को भरोसा दिलाया कि उन्हें संस्थान से उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी और समय-समय पर वे संस्थान से संपर्क बनाए रखेंगे ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र में और सुधार किया जा सके।
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