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Published / 2026-04-08 21:11:05
विश्व होम्योपैथी दिवस 10 अप्रैल को, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम

होम्योपैथी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में बना रही है पहचान : संजय सर्राफ 

एबीएन हेल्थ डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथी के महत्व, उसके सिद्धांतों तथा समाज में उसके योगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है।

होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका आधार समरूपता का सिद्धांत, अर्थात जिस पदार्थ से किसी स्वस्थ व्यक्ति में रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं, उसी पदार्थ को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में देकर रोगी का उपचार किया जाता है। इस पद्धति की शुरूआत 18वीं शताब्दी में जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. हैनिमैन ने की थी। विश्व होम्योपैथी दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना तथा इसके सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी उपचार के रूप में प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।

इसके माध्यम से यह भी बताया जाता है कि होम्योपैथी केवल रोग के लक्षणों को नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उपचार करती है। आज के समय में, जब लोग दवाइयों के दुष्प्रभावों से चिंतित रहते हैं, होम्योपैथी एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दवाएं प्राकृतिक तत्वों से बनी होती हैं और इनके दुष्प्रभाव अत्यंत कम होते हैं। 

बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा, होम्योपैथी उपचार व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर भी बल देती है। यही कारण है कि यह केवल रोग को दबाने के बजाय जड़ से समाप्त करने का प्रयास करती है। भारत में भी यह चिकित्सा पद्धति अत्यंत लोकप्रिय है और सरकार द्वारा इसे आयुष प्रणाली के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है।

विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न संगोष्ठियों, स्वास्थ्य शिविरों, कार्यशालाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। चिकित्सक, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी इस दिन होम्योपैथी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध और उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। साथ ही, आम जनता को मुफ्त परामर्श और दवाएं भी वितरित की जाती हैं। 

विश्व होम्योपैथी दिवस न केवल एक चिकित्सा पद्धति के सम्मान का दिन है, बल्कि यह हमें समग्र स्वास्थ्य की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न विभिन्न रोगों के बीच होम्योपैथी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में अपनी पहचान बना रही है। इस दिवस के माध्यम से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि प्राकृतिक और संतुलित उपचार पद्धतियां हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं।

Published / 2026-04-07 23:05:44
कोलकाता के जाने-माने कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ प्रतीम सेनगुप्ता ने रांची के होटल बीएनआर में किया मीडिया संवाद

  • कोलकाता के जाने-माने कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ प्रतीम सेनगुप्ता ने रांची के होटल बीएनआर में किया मीडिया संवाद

टीम एबीएन, रांची। मंगलवार को चाणक्य होटल में कोलकाता के सबसे जाने-माने कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ प्रतीम सेनगुप्ता के नेतृत्व में रांची के होटल बीएनआर में मीडिया संवाद किया गया, जिसमेें रांची के जाने माने डॉक्टर, बिजनेसमैन, सामजसेवी एवं पत्रकार बंधु लोग शामिल हुए।

Nephrocare India Ltd. के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ प्रतिम सेन गुप्ता ने अपने संगठन का परिचय मीडिया के माध्यम से लोगो को दिया। साथ ही, वे झारखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य में किडनी की देखभाल की सेवाओं को मज़बूत करने में अपनी रुचि व्यक्त किया और अपने अनुभव को सभी के सामने साझा किया।

Nephrocare India Ltd.का एक परिचय

Nephrocare India Ltd एक पब्लिक लिस्टेड और तेज़ी से बढ़ने वाला हेल्थकेयर संगठन है, जो किडनी की 360-डिग्री समग्र देखभाल देने के लिए समर्पित है। इसकी सेवाओं में आधुनिक डायलिसिस देखभाल (जिसमें सेंटर और सैटेलाइट यूनिट शामिल हैं), क्रोनिक किडनी रोग (CKD) का शुरुआती पता लगाना और रोकथाम, किडनी ट्रांसप्लांट में सहायता, ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल, और समुदाय-आधारित जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रम शामिल हैं। इसका दृष्टिकोण क्लिनिकल उत्कृष्टता को पहुँच और सामर्थ्य के साथ जोड़ता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें अभी तक पूरी सुविधाएँ नहीं मिली हैं।

पिछले कुछ सालों में, संगठन ने ऐसे किडनी देखभाल मॉडल बनाने पर ध्यान दिया है जिन्हें बढ़ाया जा सके और जो लंबे समय तक चल सकें। इसके लिए इसने मानकीकृत प्रोटोकॉल अपनाए हैं, जिससे लागत को नियंत्रित रखते हुए गुणवत्तापूर्ण इलाज के परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। इसका मिशन शुरुआती हस्तक्षेप, मरीज़ों की शिक्षा और एकीकृत देखभाल वितरण प्रणालियों के माध्यम से किडनी रोग के बोझ को कम करना है।

इस संबंध में, कोलकाता स्थित यह संगठन अपनी सेवाओं का विस्तार झारखंड राज्य में करने और एक मज़बूत किडनी देखभाल तंत्र विकसित करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है। हम ये प्रस्ताव देते हैं:

  • • मुख्य ज़िलों में अत्याधुनिक डायलिसिस सेंटर स्थापित करना
    • सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग और CKD का शुरुआती पता लगाने वाले कार्यक्रम लागू करना
    • किडनी स्वास्थ्य सेवा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की पहलों का समर्थन करना
    • किफायती और मानकीकृत इलाज सेवाएँ सुनिश्चित करना
    • हेल्थकेयर पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना 
    Nephhrocare की व्यवस्था राँची के सीनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल एवं देवानिका हॉस्पिटल के साथ मिलकर राँची में कार्य कर रहे है।

Nephrocare का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झारखंड के लोगों को किडनी की सुलभ, उच्च-गुणवत्ता वाली और व्यापक देखभाल मिले, जिससे इलाज के परिणाम बेहतर हों और लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य देखभाल के बोझ में कमी आए। Nefrocare@डॉ प्रतिम सेन गुप्ता ने नेन्फ्रोलॉजी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। भारत की सबसे बड़ी डायलिसिस सेवा प्रदाता कंपनी है जो किडनी की गंभीर बीमारियों के लिए हीमोडायलिसिस, पेरिटोनियल डायलिसिस और घर पर डायलिसिस जैसी व्यापक सेवाएं प्रदान करती है। यह मुख्य रूप से 288+ शहरों में उन्नत तकनीक के साथ डायलिसिस और किडनी प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती है। 

नेफ्रोकेयर क्या है? 

  1. परिभाषा: नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज लिमिटेड (NHSL) भारत की अग्रणी किडनी केयर श्रृंखला है जो संगठित क्षेत्र में सबसे ज्यादा डायलिसिस उपचार प्रदान करती है।
  2. सेवाएं: केंद्र-आधारित डायलिसिस, होम हीमोडायलिसिस, ऑन-कॉल डायलिसिस, और ऑन-व्हील्स डायलिसिस।
  3. उपलब्धता: 21 राज्यों में 500+ से अधिक क्लीनिक, जिसमें छोटे शहरों (Tier II, III) पर विशेष ध्यान दिया गया है। 

INDmoney INDmoney +3 रोग का उपचार कैसे जानें? (Treatment Options)

  1. नेफ्रोकेयर के तहत किडनी रोग का उपचार नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) के परामर्श से किया जाता है। 
  2. डायलिसिस (Dialysis): जब किडनी काम करना बंद कर देती है, तो मशीन द्वारा रक्त को साफ किया जाता है।
  3. किडनी प्रत्यारोपण (Transplantation): गंभीर मामलों में, डॉक्टर जीवित या मृत दाता से किडनी प्रत्यारोपण का मूल्यांकन करते हैं।
  4. जीवनशैली और आहार: नेफ्रोकेयर व्यक्तिगत योग सत्र और पुनर्वसन सेवाएं भी प्रदान करता है।
  5. दवाएं: रक्तचाप, मधुमेह, और प्रोटीन की हानि को नियंत्रित करने के लिए दवाओं का उपयोग। @Kidney Research UK@Kidney Research UK@+4
  6. कैसे जांचें (How to Know) : यदि आपको किडनी की समस्या के लक्षण (जैसे सूजन, पेशाब में बदलाव, थकान) महसूस हों, तो आप नेफ्रोकेयर के वेबसाइट के माध्यम से या किसी नजदीकी क्लीनिक में जाकर अपनी जांच और उपचार शुरू करा सकते हैं।

नेफरोकेयर इंडिया लिमिटेड के कार्यक्रम में सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल की ओर से डॉ राहुल सिन्हा, डॉ रजनीश कुमार, डॉ रंजीत कुमार, राँची के प्रतिष्ठित व्यवसाई राज कुमार पोद्दार, कोलकाता के जाने माने पत्रकार श्री रित्विक, डॉ सुनील mk रूंगटा, डॉ धीरज कुमार नेफ़्रॉलोजिस्ट, डॉ नीरज कुमार, सौमित्र कुमार, अर्जमंन नसीम, अरफ़ा हबीब, निशांत कुमार सहित गण मान्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता

MD, DM (Nephrology)

संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर Nephrocare India Ltd.

Published / 2026-04-06 20:23:43
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर स्वयं को योग से स्वस्थ बनाने का ले संकल्प : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। 7 अप्रैल को पूरे विश्व में  विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि  आज के आधुनिक दौर में जहां एक ओर तकनीकी विकास ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर अनियमित दिनचर्या, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को तेजी से बढ़ाया है। 

ऐसे परिवेश में योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति होते हुए भी आधुनिक विज्ञान द्वारा प्रमाणित एक प्रभावी और समग्र समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। भारतीय योग परंपरा के महान ऋषि पतंजलि ने योग को चित्त की वृत्तियों के नियंत्रण के रूप में परिभाषित किया है, जो यह स्पष्ट करता है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन का भी विज्ञान है। 

वर्तमान वैज्ञानिक शोध भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि शरीर और मस्तिष्क का गहरा संबंध है और मानसिक संतुलन बनाये रखने से शारीरिक स्वास्थ्य स्वत: बेहतर होता है। योग इसी सिद्धांत पर कार्य करता है और शरीर, मन तथा आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो योग शरीर में होने वाली कई महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को संतुलित करता है। 

जब व्यक्ति तनाव में होता है, तब शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। योग, विशेषकर प्राणायाम और ध्यान, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करते हैं, जिससे शरीर रिलैक्स अवस्था में आता है और इन तनाव हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है। इसके साथ ही योग करने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे सकारात्मक हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो मानसिक शांति, खुशी और संतुलन प्रदान करते हैं। 

हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में भी योग अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। नियमित योगाभ्यास से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। हृदय गति संतुलित होती है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम घटता है। इसके अतिरिक्त योग और प्राणायाम शरीर में आॅक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाते हैं, जिससे कोशिकाओं का कार्य बेहतर होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। 

यही कारण है कि नियमित योग करने वाले व्यक्तियों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक पायी जाती है। आज की जीवनशैली में, जहां लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, शारीरिक गतिविधियों की कमी होती है और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। योग एक संतुलनकारी भूमिका निभाता है। यह न केवल शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है। 

विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी, नाड़ी शोधन जैसे प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करते हैं, जबकि ताड़ासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन और वज्रासन जैसे योगासन शरीर के विभिन्न अंगों को सक्रिय और संतुलित रखते हैं। नियमित ध्यान अभ्यास से व्यक्ति मानसिक रूप से शांत, स्थिर और जागरूक बनता है। 

योगाचार्य महेश पाल  का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन केवल 30 मिनट योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर ले, तो वह अनेक शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बच सकता है। योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और इसे हर आयु वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार आसानी से कर सकते हैं। 

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम केवल स्वास्थ्य के महत्व को समझें ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं। योग एक ऐसा सरल, सुलभ और वैज्ञानिक मार्ग है, जो हमें संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है। यदि हम नियमित रूप से योग का अभ्यास करें, तो हम न केवल स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

Published / 2026-04-06 20:21:17
लापरवाही : बिना जांच एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती का हो गया आॅपरेशन

एचआईवी पॉजीटिव थी गर्भवती, बिना जांच के कर दिया आॅपरेशन, खुलासे के बाद डॉक्टरों में मचा हड़कंप 

टीम एबीएन, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक एचआईवी संक्रमित महिला का बिना पूर्व जांच के आपरेशन कर दिया गया, जिससे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के बीच चिंता बढ़ गयी है। जानकारी के अनुसार महिला पिछले तीन वर्षों से एचआईवी संक्रमित थी लेकिन उसने अपनी बीमारी की जानकारी चिकित्सकों से छिपा ली। 

इसी आधार पर उसे सामान्य मरीज मानते हुए लेबर रूम में नियमित प्रक्रिया के तहत आॅपरेशन किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब सदर अस्पताल से आई रिपोर्ट में महिला के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। इसके बाद रिम्स में हड़कंप मच गया। 

आपरेशन में शामिल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने एहतियातन पीईपी (पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस) दवाओं का सेवन शुरू कर दिया है, जो संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए दी जाती हैं। 

फिलहाल अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले की आंतरिक जांच कर रहा है। इस घटना ने मरीजों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी साझा करने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है। साथ ही अस्पतालों में जांच प्रक्रिया की अनिवार्यता और सतर्कता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

Published / 2026-04-02 18:57:38
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की समीक्षा बैठक

अस्पताल सूचीबद्धता और एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन पर जोर 

टीम एबीएन, रांची। अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की अध्यक्षता में आज झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन, वन विभाग के विशेष सचिव राजीव लोचन बक्शी, संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, डीआईसी, डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, अपर कार्यकारी निदेशक श्रीमती सीमा सिंह, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा सहित विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे। 

बैठक में अस्पताल सूचीबद्धता, हॉस्पिटल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल पोर्टल 2.0 पर अस्पतालों के माइग्रेशन की स्थिति, फायर सेफ्टी एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृतियां, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्राधिकरण तथा बिल्डिंग प्लान अप्रूवल की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गयी। 

समीक्षा के दौरान बताया गया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर अस्पतालों के माइग्रेशन में झारखंड की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है और निजी अस्पतालों का माइग्रेशन प्रतिशत काफी कम है। कई अस्पतालों में फायर सेफ्टी एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति और बिल्डिंग प्लान अप्रूवल नहीं होने के कारण माइग्रेशन में समस्या आ रही है।

बैठक में यह भी बताया गया कि जब तक सूचीबद्ध अस्पताल एचईएम 2.0 पर माइग्रेट नहीं करते हैं तब तक इंसेंटिव बंद रहेगा। आने वाले समय में जल्द ही प्री-आथराइजेशन भी एनएचए के निर्देश के अनुसार बंद कर दिया जायेगा। साथ ही अस्पताल में कोई भी नया स्पेशलिटी नहीं जोड़ा जा रहा है। जसाज द्वारा पूर्व में समय-समय पर अस्पतालों को प्रमंडलवार प्रशिक्षण दिया गया है। 

अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक लाइसेंस एवं स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा अस्पतालों के माइग्रेशन कार्य को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया गया। बैठक में आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गयी और सभी आवश्यक वैधानिक लाइसेंस उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया।

Published / 2026-04-01 20:43:45
स्वास्थ्य सेवाओं में देश का तीसरा अग्रणी राज्य बना झारखंड

एनक्यूएएस प्रमाणन में 56% तक पहुंचा आंकड़ा 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में तेज प्रगति दर्ज की गयी है। 

आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, डी आई सी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित सभी संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। 

बता दें कि सरकार के द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन के तहत गुणवत्ता आश्वसन मानक प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थानों को प्रति बेड 10000 सालाना, 3 साल तक देने का प्रावधान है। जिसमें से 25% राशि उक्त स्वास्थ्य संस्थान में कार्य करने वाले पदाधिकारी एवं कर्मियों के बीच वितरित किए जाने का भी प्रावधान है। शेष 75% राशी से प्राथमिकता के आधार पर उक्त स्वास्थ्य संस्थान में जन सुविधा को उन्नत किए जाने का भी प्रावधान है। साथ ही सर्टिफिकेट प्राप्त संस्थान को आयुष्मान भारत योजना के तहत दिए जाने वाले राशि में भी 15% की बढ़ोतरी किए जाने का प्रावधान है। 

बैठक में बताया गया कि मार्च 2025 तक जहां केवल 8 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र ही राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्रमाणित थे, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया है। राज्य सरकार ने दिसंबर 2026 तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 

जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों एवं कर्मियों को सम्मानित करने की योजना भी बनायी गयी है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत अस्पतालों में बुनियादी ढांचे में सुधार, दवाओं की नियमित उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती तथा उन्नत जांच सुविधाएं सुनिश्चित की गयी हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। 

इस दिशा में प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह एवं एनएचएम अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा द्वारा नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्यों की निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में आए इस व्यापक सुधार से राज्य की आम जनता को सीधा लाभ मिल रहा है और सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

Published / 2026-03-20 21:59:36
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की बैठक में अहम फैसले, नये अस्पतालों के आवेदन अस्वीकृत

एचईएम 2.0 पोर्टल माइग्रेशन और सूचीबद्धता मामलों पर विस्तृत चर्चा, मानकों में कमी पर कड़ा रुख 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन की अध्यक्षता में राज्य सूचीबद्धता समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। यह बैठक कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यालय कक्ष में संपन्न हुई, जिसमें समिति के सभी सदस्यों ने भाग लिया।  

बैठक के दौरान सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन से संबंधित विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु निर्धारित मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जायेगा। 

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि नए आवेदनों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (ठऌअ) के दिशा-निदेर्शों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेजों की कमी है। इनमें नगर निकाय/विकास प्राधिकरण/जिला परिषद/पंचायत द्वारा स्वीकृत भवन योजना की अनुपलब्धता प्रमुख रही। 

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) की गाइडलाइन के अनुसार 1 मार्च 2026 से अस्पतालों की सूचीबद्धता के लिए एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस की उपलब्धता अनिवार्य कर दी गयी है। ऐसे में जो अस्पताल इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनकी सूचीबद्धता नहीं की जा सकेगी। 

इस निर्देश के तहत अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप अपनी हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसका उद्देश्य अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। 

इन कमियों को ध्यान में रखते हुए समिति ने आवेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया तथा संबंधित अस्पतालों को इसकी सूचना देने के निर्देश दिये गये। वहीं, पहले से सूचीबद्ध निजी अस्पताल ने पोर्टल पर माइग्रेशन से संबंधित अनुरोध को समिति ने स्वीकृति प्रदान की। बैठक में निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

Published / 2026-03-17 19:40:33
झारखंड : राज्य के सभी जिलों में शुरू होगा टेली आईसीयू

मरीजों को घर के पास मिलेगी सुपर स्पेशलिटी सुविधा 

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

मैनपावर व उपकरणों की कमी दूर करने पर जोर 

टीम एबीएन, रांची। आज अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के कार्यालय कक्ष में टेली आईसीयू के संदर्भ में सभी सदर अस्पतालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य के सभी सदर अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में टेली आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए आवश्यक उपकरणों और मैनपावर की तत्काल व्यवस्था करने को कहा गया। 

उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के पांच जिले—गुमला, सिमडेगा, चतरा और रांची सदर टेली आईसीयू से जुड़े हुए हैं। इन अस्पतालों का मेंटर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) है, जहां से सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर टेली आईसीयू एवं एआई तकनीक के माध्यम से गंभीर मरीजों की निगरानी कर उन्हें परामर्श दे रहे हैं। 

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस व्यवस्था को सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। बैठक में संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। 

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त नियुक्तियां भी की जाएंगी। वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया गया। 

मेडिकल उपकरणों की खरीद पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। जिन अस्पतालों में उपकरणों की खरीद लंबित है, उनकी निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से उपकरण उपलब्ध कराये जायेंगे। 

बैठक में एसएनए स्पर्श और मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान एनएचएम के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने जिलों से अद्यतन जानकारी ली। अधिकांश जिलों द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया और शेष राशि भी शीघ्र खर्च करने के निर्देश दिये गये।  

बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन, विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा, पंकज, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला एवं संयुक्त निदेशक रीतु सहाय सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।

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