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Published / 2024-04-05 22:48:39
कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक होता जा रहा बर्ड फ्लू

  • क्या कोरोना से भी बड़ी महामारी बनेगा बर्ड फ्लू, भारत में कितना खतरा?

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में अलग-अलग तरह की बीमारियों पर लगातार रिसर्च चलती रहती है। इसी क्रम में बर्ड फ्लू पर भी हाल ही में एक रिसर्च हुई है। पीट्सबर्ग में बर्ड फ्लू पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को बड़ा खतरा बताया है। आशंका जतायी है कि आने वाले समय में ये बीमारी बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित कर सकती है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि बर्ड फ्लू का वायरस एच5एन1 बहुत तेजी से अपने पांव पसार रहा है। इससे पक्षी और अब जानवर तक संक्रमित हो रहे हैं। अगर यह वायरस इसी तरीके से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में ये कोरोना से भी खतरनाक महामारी का रूप ले सकता है। बर्ड फ्लू कोविड से भी 100 गुना खतरनाक हो सकता है। 

वैज्ञानिक ये आशंका इसलिए जता रहे हैं क्योंकि बर्ड फ्लू पहले की तुलना में अब बहुत ही तेजी से फैल रहा है। पहले ये बीमारी मुर्गियों में ही ज्यादा होती थी। लेकिन अब गाय, बिल्ली और मनुष्य भी इससे संक्रमित हो रहे हैं। अमेरिका में मुर्गियों और 337,000 चूजों में बर्ड फ्लू का संक्रमण मिला है। इससे बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत हो रही है। अमेरिका में गायों में भी बर्ड फ्लू से मरने के मामले सामने आ रहे हैं।

हाल ही में अमेरिकी के टेक्सास में डेयरी फार्म में काम करने वाला एक व्यक्ति H5N1 वायरस से पॉजिटिव पाया गया था। इसी वजह से ही वैज्ञानिकों ने इसपर रिसर्च की है, जिसमें पता चला है कि बर्ड फ्लू के वायरस में कई तरह के म्यूटेशन हो रहे हैं। इस बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या बर्ड फ्लू कोविड से बड़ा खतरा बन सकता है और क्या भारत में ये किसी नई महामारी का रूप ले सकता है? ये जानने के लिए हमने एक्सपर्ट्स से बातचीत की है।

क्या है बर्ड फ्लू?

राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में डॉ एनआर रावत बताते हैं कि बर्ड फ्लू एच5एन1 इन्फ्लूएंजा वायरस की वजह से होता है। ये वायरस पक्षियों में फैलता है और उनकी सांस की नली पर हमला करता है। जिससे पक्षियों को सांस लेने में परेशानी होती है और इलाज न मिलने पर उनकी मौत हो जाती है।

ये वायरस पक्षियों के मल और उनकी लार से एक दूसरे में फैलता है। इसकी संक्रमण दर इतनी अधिक होती है कि कुछ ही दिनों में ये वायरस लाखों पक्षियों को संक्रमित कर सकता है और उनकी मौत का कारण बन सकता है।

Published / 2024-03-26 23:20:34
लोगों को जीवन रक्षा की निःशुल्क ट्रेनिंग दे रहे डॉ मुमताज

  • झारखंड का ये अधिकारी दे रहा जीवन बचाने का मंत्र
  • 10 हजार लोगों को दे चुका कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देने की ट्रेनिंग

एबीएन हेल्थ डेस्क। झारखंड के उत्पाद शुल्क आयुक्त फैज एक्यू अहमद मुमताज) ने एक अभिनव कार्यक्रम शुरू करके एक साहसिक कदम उठाया है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन कौशल सिखाना है। उनके नेतृत्व में 10 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।

वे अब पूरे राज्य में आपात स्थिति के दौरान जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार हैं। कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक ऐसी तकनीक है। जिसका उपयोग दिल के दौरे या फिर सांस लेने में कठिनाई जैसी आपात स्थितियों के दौरान काम आती है। 

प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा तुरंत सीपीआर दिए जाने पर व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना थोड़ी ज्यादा बढ़ जाती है। हाल ही में, छत्तीसगढ़ में एक बुजुर्ग महिला से जुड़ी एक प्रेरक घटना से फैज एक्यू अहमद मुमताज सीपीआर के महत्व को समझाया।

बिहार की अपनी यात्रा के दौरान जानलेवा स्थिति का सामना करने के बावजूद, सीपीआर की बदौलत वह होश में आ गयीं। अहमद मुमताज ने बताया कि अपनी पत्नी, डॉ हेना शादियाह के साथ बातचीत से प्रेरित होकर, उन्होंने समय पर सीपीआर हस्तक्षेप सुनिश्चित करके जीवन बचाने का मिशन शुरू किया। 

उन्होंने उत्पाद शुल्क विभाग के भीतर सीपीआर प्रशिक्षण सत्र शुरू किये, जो तेजी से जिला कार्यालयों, बार और क्लबों तक फैल गये। न्यूनतम संसाधनों और 1-1.5 घंटे के छोटे प्रशिक्षण सत्र के बावजूद अहमद मुमताज की पहल ने गति पकड़ी है।
बता दें कि अहमद मुमताज का दृष्टिकोण प्रशिक्षण से परे तक फैला हुआ है।

उनका लक्ष्य एक प्रभावशाली प्रभाव पैदा करना है। जहां प्रशिक्षित व्यक्ति प्रशिक्षक बन जाए, जिससे सीपीआर विशेषज्ञता का प्रभाव कई गुना बढ़ जाये। अब बागवानी निदेशक के रूप में अपनी नई भूमिका में बदलाव करते हुए, मुमताज झारखंड के समाज में सीपीआर शिक्षा को शामिल करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

चिकित्सा पेशेवर सीपीआर को स्वास्थ्य जागरूकता के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में पहचानते हुए इस पहल का समर्थन करते हैं। डॉ डीपी सिंह एक सामान्य चिकित्सक, संभावित रूप से कई लोगों की जान बचाने के लिए मुमताज के प्रयासों की प्रशंसा करते हैं। एक अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ दानिश इजाज सीपीआर की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हैं।

राजधानी रांची में रुइन हाउस और स्वर्णरेखा बार एंड रेस्तरां ने सीपीआर प्रशिक्षण के परिवर्तनकारी प्रभाव की प्रशंसा करते हुए प्रशंसापत्र साझा किए हैं। इन प्रतिष्ठानों के कर्मचारी अब आपात स्थिति के दौरान निर्णायक रूप से कार्य करने के लिए सशक्त महसूस करते हैं।

स्वर्णरेखा बार एंड रेस्तरां के मालिक सिकंदर रजवार ने विशेष रूप से मुमताज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके कर्मचारी अब हृदय संबंधी आपात स्थितियों को आत्मविश्वास से संभालने में सक्षम हैं। मुमताज ने व्यापक सीपीआर जागरूकता की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पहचानते हुए, उत्पाद शुल्क विभाग के भीतर सीपीआर सत्र शुरू किये।

सीमित बजट पर काम करने और न्यूनतम संसाधनों की आवश्यकता के बावजूद ये सत्र अत्यधिक प्रभावी साबित हुए हैं, जो प्रति प्रशिक्षण केवल 1-1.5 घंटे तक चलते हैं। मुमताज एक ऐसे प्रभाव की कल्पना करते हैं। जहां प्रशिक्षित व्यक्ति प्रशिक्षक बन जाते हैं। जिससे पूरे समुदाय में सीपीआर विशेषज्ञता का प्रभाव बढ़ जाता है।

Published / 2024-03-24 19:44:01
सावधानी के साथ लें होली का मजा : डॉ सरोज राय

एबीएन हेल्थ डेस्क। राग, रंग, उल्लास और हुड़दंड का त्योहार होली 21 मार्च को है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस रंगीन त्योहार को पसंद करते हैं और एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेल कर और खा-पीकर इसे मनाते हैं। 

पहले के समय में होली पारंपरिक तरीके से मनायी जाती थी, जिसमें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों का प्रयोग होता था, लेकिन आजकल मिलावटी व सिंथेटिक रंगों का प्रचलन काफी अधिक बढ़ गया है। ऐसे रंग हमारी त्वचा, आंखों, नाखून, बाल एवं आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। 

इन रासायनिक रंगों से त्वचा पर खुजली, दाने, एलर्जी, एग्जिमा, ब्रेकआउट आदि होने लगता है। लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर हम होली का त्योहार मस्ती और हर्षोल्लास के साथ मना सकते हैं। 

  1. हमेशा प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों से ही होली खेलें।
  2. गीले रंगों की जगह सूखे रंगों का प्रयोग करें।
  3. होली खेलने से पहले शरीर की खुली त्वचा जैसे कि चेहरे, गर्दन, हाथ-पांव के पीछे मॉइश्चराइजर या ऑलिव ऑयल को अच्छे से लगा कर उसके ऊपर सनस्क्रीन अवश्य लगायें। 
  4. होंठों पर सनस्क्रीन युक्त लिप बाम तथा नाखून पर नेल पॉलिश लगाना मत भूलिये।
  5. बालों को धोकर सुखाकर तेल लगायें और अच्छी तरह से बांध लें, हमेशा पूरे गहरे रंग के सूती कपड़े पहने
  6. आभूषण पहन कर होली ना खेलें। 
  7. आंखों को बचाने के लिए सनग्लास लगायें। 
  8. ज्यादा देर तक रंगों को शरीर पर न रहने दें। अधिक देर तक धूप में रंग न खेलें।
  9. पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और खानपान का ध्यान रखें। 
  10. अगर आप अस्थमा या एक्जिमा के मरीज हैं, तो रंगों से दूर ही रहें।
  11. रंगों को छुड़ाने में हड़बड़ी न करें। अधिक साबुन, सोदा, केरोसिन आदि का प्रयोग ना करें। 
  12. दही-बेसन, एलोवेरा आदि की मदद से रंगों को  छुड़ायें। 

किसी भी तरह की तकलीफ होने पर स्वयं इलाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में चर्म रोग विशेषज्ञ से अवश्य मिलें।

Published / 2024-03-21 21:37:51
हुड़दंग में रखें ख्याल मखमली त्वचा का

  • होली के अवसर पर बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंग कैमिकल युक्त होते हैं जो त्वचा व बालों को रूखा बना देते हैं। ऐसे में रंग-गुलाल से खेलने घर से बाहर निकलें तो चेहरे पर सनस्क्रीन लोशन अप्लाई करें व बालों में तेल लगा लें। वहीं खेलने के बाद क्लिंजिंग क्रीम का प्रयोग मुंह पर करें व अच्छे शैंपू से बालों को धोयें।

प्रतिमा अरोड़ा 

एबीएन हेल्थ डेस्क। होली की मस्ती में अपने रेशमी बालों की हिफाजत करना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि होली के रंगों में कई तरह के रसायन जैसे लेड आक्साइड, मरकरी सल्फाइट, कॉपर सल्फेट, कांच के कण, अभ्रक और धूल की भी अच्छी-खासी मौजूदगी होती है। 

ये रसायन जहां एक तरफ हमारे बालों की चमक छीन लेते हैं, वहीं त्वचा को रूखी और बेजान बना देते हैं। इसलिए जरूरी है कि होली खेलते समय अपनी दमकती हुई त्वचा और रेशम जैसे बालों की फिक्र जरूर करें। 

सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल 

होली खेलते समय लोग अकसर गुलाल और गीले रंगों का इस्तेमाल करते हैं। ये रंग प्राकृतिक नहीं होते हैं। इनमें रासायनिक तत्व और चमकने वाली माइका तथा लेड जैसे रसायन होते हैं। इस कारण इन रंगों से होली खेलने के बाद स्किन पर निशान पड़ना, त्वचा का बदरंग होना जैसी समस्याएं आम हैं। 

होली अगर खुली जगह पर खेली जाती है, तो उस दौरान त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें पड़ती हैं जिनका बुरा असर होता है। इससे त्वचा रूखी हो जाती है, त्वचा में नमी की कमी हो जाती है और दाग-धब्बे भी पड़ जाते हैं। इसलिए होली खेलने के लिए जब घर से बाहर निकलें तो उसके 20 मिनट पहले त्वचा पर सनस्क्रीन लोशन लगा लें। 

ध्यान रहे कि वही सनस्क्रीन क्रीम लगाएं, जिसका एसपीएफ स्तर 20 या इससे ज्यादा हो। यदि आपकी त्वचा अधिक संवेदनशील है और उस पर जल्दी दाग-धब्बे होते हैं तो और ज्यादा एसपीएफ वाला सनस्क्रीन चुनें।

हल्का मेकअप

ज्यादातर सनस्क्रीन ऐसे होते हैं जिनमें त्वचा को मॉयश्चराइज करने की क्षमता होती है। यदि आपकी त्वचा रूखी है तो सनस्क्रीन को पहले चेहरे पर लगाएं, इसके बाद थोड़ी देर इंतजार करके मॉयश्चराइजर लगायें। 

दिन के समय हल्का मेकअप किया जा सकता है। आंखों को आईपेन से या काजल से संवारें और लिपग्लोस का इस्तेमाल करें। यह हल्का मेकअप कैमिकल युक्त रंगों से त्वचा को बचाने में सहायक हो सकता है। 

साबुन के बजाय क्लिंजिंग क्रीम से धोयें मुंह 

होली खेलने के बाद त्वचा से रंग छुड़ाने के लिए तुरंत साबुन से चेहरा न धोएं। क्योंकि साबुन से इसमें रूखापन आ जाता है। इसकी बजाय क्लिंजिंग क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करें। इससे चेहरे पर मसाज करें। इसके बाद गीली रूई से चेहरे को पोंछ लें। आंखों के आसपास की जगह को साफ करें। हल्के हाथों से की गयी साफ-सफाई होली के रंगों को आसानी से हटा सकती है। 

होली के अगले दिन लगायें शहद-दही 

होली के अगले दिन सूर्य की किरणों से सम्पर्क में रहने से त्वचा को होने वाली नुकसान जैसे रूखापन और दाग धब्बों को हटाने के लिए दो टेबल स्पून शहद में आधा कप दही मिलायें। इसमें थोड़ी मात्रा हल्दी की मिलाकर इस मिश्रण को चेहरे, गर्दन और बाजू पर लगाएं। 

इसे त्वचा पर 20 मिनट तक लगाने के बाद ताजे पानी से धो दें। शहद एक प्राकृतिक मॉयश्चराइजर है और यह त्वचा को मुलायम बनाता है। इसमें मिलायी दही त्वचा को पोषण देती है और होली के रंगों में मिलाए गए रासायनिक तत्वों से उसे सुरक्षा देती है। 

बालों में फिर जान डालें ये उपाय 

होली के रंग सिर की त्वचा ही नहीं बल्कि बालों को भी रूखा और बेजान बना देते हैं इसलिए होली खेलने के लिए घर से निकलने से पहले बालों की सुरक्षा के लिए उस पर तेल की परत चढ़ा लें। होली खेलने के बाद बालों को धोने के दौरान इसे पहले सादे पानी से अच्छी तरह धोएं ताकि बालों में लगे सूखे रंग और माइका के छोटे कण बालों को नुकसान न पहुंचाएं। 

इसके बाद किसी हर्बल शैम्पू से बालों को धोएं। सिर से रंगों को अच्छी तरह छुड़ाने के लिए शैम्पू को थोड़ी देर सिर में लगाकर अच्छी तरह सिर की मालिश करें और इसके बाद इन्हें पानी से धो दें। पानी के एक मग में थोड़ा सा नीबू मिलाएं और इससे सिर धोएं। बालों को आखिरी बार बीयर से भी धोया जा सकता है। 

यह बालों को मुलायम बनाता है और उनकी कंडीशनिंग करता है। नींबू का जूस बीयर में मिलाएं और इसे बालों पर शैम्पू करने के बाद लगाएं। इसे थोड़ी देर के लिए यूं ही छोड़ दें और सादे पानी से बालों को धोएं।

Published / 2024-03-12 13:21:22
साइलेंट हार्टअटैक से बचाव में सहायक है नाड़ीशोधन प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। योग के आठ अंगों में से चौथा अंग है प्राणायाम। प्राण+आयाम से प्राणायाम शब्द बनता है। प्राण का अर्थ जीवात्मा माना जाता है, लेकिन इसका संबंध शरीरांतर्गत वायु से है जिसका मुख्य स्थान हृदय में है। व्यक्ति जब जन्म लेता है तो गहरी श्वास लेता है और जब बह मृत्यु को प्राप्त होता है तो पूर्णत: श्वास छोड़ देता है। तब यह सिद्ध हुआ कि वायु ही प्राण है। 

आयाम के दो अर्थ है- प्रथम नियंत्रण या रोकना, द्वितीय विस्तार करना, योगाचार्य महेश पाल विस्तार पूर्वक बताते हैं कि योगग्रंथ हठयोग प्रदीपिका के अनुसार मानव शरीर में 72000 नस - नाड़ियों का जाल बिछा हुआ है नाड़ियों के शुद्धिकरण का कार्य नाड़ी शोधन प्राणायाम द्वारा किया जाता है, नाड़ी शब्द का अर्थ है, मार्ग या शक्ति का प्रवाह और शोधन का अर्थ होता है, शुद्ध करना। 

नाड़ी शोधन का अर्थ हुआ, वह अभ्यास जिससे नाड़ियों का शुद्धिकरण हो। नाड़ी शोधन प्रभावी प्राणायाम है, जो मस्तिष्क, हृदय, शरीर और भावनाओं को सही रखता है नाड़ियां मानव शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा चैनल हैं जो विभिन्न कारणों से अवरुद्ध हो सकती हैं। नाड़ी शोधन प्राणायाम एक सांस लेने की तकनीक है जो इन अवरुद्ध ऊर्जा चैनलों को साफ़ करने में मदद करती है, तनाव के कारण नाड़ियां अवरुद्ध हो जाती हैं।

भौतिक शरीर में विषाक्तता के कारण भी नाड़ियों में रुकावट आती है शारीरिक और मानसिक आघात के कारण नाड़ियां अवरुद्ध हो जाती हैं अस्वस्थ जीवन शैली के कारण भी देखे जाते हैं, इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना मानव शरीर में सबसे महत्वपूर्ण नाड़ियों में से तीन हैं। 

जब इड़ा नाड़ी सुचारू रूप से काम नहीं करती है या अवरुद्ध हो जाती है, तो व्यक्ति को सर्दी, अवसाद, कम मानसिक ऊर्जा और सुस्त पाचन एवं बायां नासिका अवरुद्ध होने का अनुभव होता है। जबकि जब पिंगला नाड़ी सुचारू रूप से काम नहीं करती है या अवरुद्ध हो जाती है, तो व्यक्ति को गर्मी, तेज गुस्सा और जलन, शरीर में खुजली, शुष्क त्वचा और गला, अत्यधिक भूख, अत्यधिक शारीरिक या यौन ऊर्जा और दाहिनी नासिका अवरुद्ध हो जायेगी।

नाड़ी शोधन हठ योग के अंतर्गत ध्यान या धारणा प्रारम्भ करने के पूर्व कम से कम तीन माह तक चारो संध्याओं (प्रातः काल, दोपहर, संध्याकाल, अर्धरात्रि) में किया जाने वाला प्राणायाम है। नाड़ियों के शोधन हो जाने से ध्यान ऊर्जा के उर्ध्वगमन में बाधा समाप्त हो जाती है।नाड़ी शोधन में सांस लेने में जितना समय लगता है उससे अधिक समय सांस रोकने और छोड़ने में लगता है।

सांस लेते समय सांस की गति इतनी धीमी होनी चाहिए की सांस लेने की आवाज स्वयं को ही आए नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के लिए कमर गर्दन सीधी कर ले सुखासन पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाए फिर ज्ञान मुद्रा का चयन करें उसके पश्चात बांयी नासिक से सांस ले और फिर कुछ देर रोक कर रखे फिर धीरे-धीरे दांयी नासिक से सांस छोड़ दें उसके पश्चात दांयी नासिक से सांस ले और बांयी नासिका सांस से छोड़ दें जैसा कि अनुपात के माध्यम से बताया जा रहा है प्रारंभ में स्वास का अनुपात 1:1:1,उसके पश्चात 1:2:2, अभ्यस्त होने के बाद 1:4:2 के अनुपात में अभ्यास किया जाता है अर्थात अगर आप 15 सेकेंड सांस लेते हैं तो 60 सेकेण्ड रोक कर रखे और 30 सेकेण्ड तक छोड़े ये प्रक्रिया 10 मिनिट तक दोहराएं, नाड़ीशोधन प्राणायाम से हृदय, फेफड़े व मस्तिष्क के स्नायु को बल मिलता है, जिससे वो स्वस्थ बने रहते हैं।

साथ ही यह मन को शांत और एकाग्र करने वाला है। इसके अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिंता, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, नींद न आना, अंगों में कम्पन, मल्टिपल सिरॉसिस आदि मन-मस्तिष्क के विकारों में लाभ पहुंचता है। यह हमारे भीतर शान्ति व धैर्य को बढ़ाकर संकल्प शक्ति, निर्णय शक्ति, और संतुलन शक्ति का विकास करता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साइलेंट हार्ट अटैक काफी खतरनाक है। इसकी पहचान कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। कई बार साइलेंट अटैक के लक्षणों को लोग ऐसे ही नज़रअंदाज कर बैठते हैं। छाती में हल्का दर्द या अचानक सांस फूलने को साधारण बात समझकर नज़रअंदाज कर देते हैं। 

एक स्टडी के मुताबिक करीब 45 प्रतिशत लोगों को हार्ट अटैक के कोई लक्षण नहीं होते हैं। जिसे साइलेंट हार्ट अटैक माना जाता है। जैसा कि नाम से जाहिर है कि ऐसे हार्ट अटैक में बिना किसी लक्षण के अटैक आता है। ये ज्यादा खतरनाक माना जाता है। ऐसी स्थिति में लोगों को पहले हार्ट अटैक का पता नहीं चल पाता है। लोग सही इलाज भी नहीं करवाते हैं और फिर दूसरा अटैक खतरनाक साबित हो जाता है। 

साइलेंट हार्ट अटैक एक गंभीर बीमारी है जिसका हमें पता भी नहीं चलता और यह हमें मृत्यु की ओर ले जाती है कोरोना काल के पश्चात पूरे देश में साइलेंट हार्ट अटैक के कैस बढ़ते जा रहे हैं। जिसमें देखा जा रहा है कि 9 साल से लेकर 50 साल तक के बच्चों युवाओं और बुजुर्गों में यह अटेक गंभीर रूप से चिंता का विषय बनता जा रहा है, साइलेंट हार्ट अटैक का मतलब है कि आपके दिल को ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। इससे दिल को आघात पहुंचता है। 

आमतौर पर, रक्त का थक्का कोरोनरी धमनियों में से एक के माध्यम से रक्त के प्रवाह को रोककर दिल के दौरे का कारण बनता है। कोरोनरी धमनी की ऐंठन रक्त प्रवाह को रोक देती है जिससे साइलेंट हार्ट अटैक की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। 

नाड़ी शोधन प्राणायाम के अभ्यास से शुद्ध ऑक्सीजन हृदय तक पहुंचती है जिसके माध्यम से कोरोनरी धमनी के अवरोध दूर हो जाते हैं। धमनी और शिराओं के अवरोधों को दूर कर रक्त का थक्का जमने से रूक जाता है, जिससे साइलेंट हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। यह प्राणायाम नस- नाड़ियों (धमनी, शिराओं) के शोधन का कार्य करता है। 

साइलेंट हार्ट अटैक आने के कई कारण होते हैं, जिसमें मधुमेह, मोटापा, जेनेटिक, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, योग व्यायाम की कमी, मादक पदार्थों का सेवन, जंक फूड का सेवन, योग प्राणायाम का महत्व बढ़ रहा है वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह अधिक स्वीकार होता जा रहा है।

छंदोग्य उपनिषद के अनुसार  प्राण एक आंतरिक मैट्रिक्स (सूक्ष्म ऊर्जा) है और वायु एक बाहरी मैट्रिक्स (स्थूल ऊर्जा) है योग के अनुसार स्थूल शरीर (अन्नमय कोष) का पोषण सूक्ष्म शरीर (प्राणमय कोष) द्वारा होता है जिसमें चक्र और नाड़ियां होती हैं। यह नाड़ियां प्राण को ले जाती हैं जो चक्र को उत्तेजित करती हैं और इस तरह विभिन्न अंगों और प्रणालियों को पोषण देती है और मानव शरीर में सभी शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। 

एक शोध के अनुसार नाड़ी शोधन प्राणायाम के 20 मिनट के अभ्यास का प्रभाव श्रवण प्रतिक्रिया समय में महत्वपूर्ण परिवर्तन के साथ-साथ हृदय गति परिवर्तनशीलता को कम करने के लिए पाया गया और कार्डियोरेस्पिरेटरी मापदंडों में सुधार देखा गया जो कार्डियोरेस्पिरेटरी दक्षता में वृद्धि का संकेत है। यह खोज इंगित करती है कि नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास रक्तचाप को कम करता है और आवश्यक उच्च रक्तचाप वाले रोगियों में प्रतिक्रिया समय में सुधार करता है।

हमें हमारे शरीर में साइलेंट हार्ट अटैक के संकेत मिलते ही तुरंत सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और इस प्रकार के अटैक से बचाव के लिए  दैनिक दिनचर्या में सुधार कर योग प्राणायाम को आवश्यक रूप से शामिल करे एवं सात्विक भोजन को अपनी आहारचर्या में शामिल करना चाहिए।

Published / 2024-02-29 22:10:48
उम्र : चार साल और आंख में घुस गयी पेन की निब, जानें कैसे बची जान...

जानें रिम्स के डॉक्टरों ने कैसे बचायी मासूम की जान

टीम एबीएन, रांची। रांची में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक बच्चे की आंख में पेन की निब घुस गयी। हालांकि रिम्स के डॉक्टरों ने आपरेशन कर बच्चे की आंखें बचा लीं है। बताया जा रहा है कि देवघर जिले के 4 साल का एक बच्चा अपने घर में पेन से खेल रहा था, लेकिन पेन पलंग के नीचे गिर गई। 

पलंग के नीचे अंधेरा होने की वजह से बच्चे को ठीक से दिखा नहीं और पेन उठाने के दौरान पेन की निब इसकी आंख में जा घुसी। यह निब करीब 8.7 मिलीमीटर अंदर धंसी हुई थी। परिजनों ने इस बच्चे को रिम्स में भर्ती कराया, जहां आपरेशन कर बच्चे की आंख से निब सफलतापूर्वक निकली गई। 

सर्जरी करने वाले आस्टियोपैथी डॉक्टर की टीम जिसमें प्रमुख रूप से डॉ राहुल प्रसाद ने बताया कि आपरेशन के दौरान आंखों के रेटिना को बचाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन 2 घंटे के आॅपरेशन के बाद सफलतापूर्वक निब को बाहर निकाला लिया गया और अब बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है।

Published / 2024-02-11 14:36:08
झारखंड : तापमान में भारी अंतर से बीमार पड़ रहे लोग

  • झारखंड में अचानक क्यों बीमार पड़ रहे लोग? डॉक्टर ने बताई वजह, कहा- हम तैयार हैं

एबीएन हेल्थ डेस्क। झारखंड में लोग अचानक बीमार पड़ रहे हैं। पल-पल बदल रहा मौसम का मिजाज इसकी बड़ी वजह बतायी जा रही है।

अधिकतम और न्यूनतम तापमान में एक सप्ताह में 07 से 18 डिग्री का अंतर देखने को मिल रहा है। दिन में लोगों को गर्मी का अहसास हो रहा है तो सुबह व शाम में तेज ठंड लग रही है। 9 मार्च को अधिकतम तापमान 26.3 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस रहा। 

गर्मी के कारण लोगों ने स्वेटर का इस्तेमाल करना कम कर दिया है और रात में पंखा चला रहे हैं। इससे सर्दी-खांसी, बुखार, गले में खरास, कफ जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। एमजीएम और सदर अस्पताल की ओपीडी में सर्वाधिक मरीज मौसमी बीमारियों के पहुंच रहे हैं। 

शनिवार को एमजीएम ओपीडी के मेडिसिन विभाग में कुल 342 मरीजों ने इलाज कराया, जिसमें आधे से अधिक मरीज मौसमी बीमारियों के थे। वहीं, सदर अस्पताल में 190 लोगों ने मेडिसिन ओपीडी में इलाज कराया, जिसमें 109 मरीज सर्दी-खांसी, बुखार, गले में दर्द, सिर में दर्द जैसी बीमारियों के थे।

एमजीएम में पर्याप्त मात्रा में है दवाइयां उपलब्ध-अधीक्षक

एमजीएम अधीक्षक डॉ कुमार ने बताया कि मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अस्पताल पूरी तरह से तैयार है। फिलहाल सर्दी-खांसी, जुकाम, वायरल फीवर समेत अन्य सभी तरह की दवा अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। एमजीएम के चिकित्सक डॉ. बलराम झा ने बताया कि अभी रात में पंखा चलाकर सोना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि मौसम में उतार-चढ़ाव हो रहा है। 

इससे बच्चों को सर्वाधिक परेशानी हो सकती है। क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। पंखे की हवा से गले में संक्रमण हो सकता है। अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए यह मौसम खतरनाक साबित हो सकता है। खासकर मार्निंग वॉक के दौरान पर्याप्त कपड़े जरूर पहनें।

Published / 2024-01-05 22:07:52
कोरोना का टेंशन : देश के 12 राज्यों में पैर पसार चुका है नया वैरिएंट

12 राज्यों में फैला कोविड-19 का नया वैरिएंट जेएन.1, चार जनवरी तक सामने आये इतने नए केस

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोविड-19 के नये उपस्वरूप जेएन -1 से संक्रमित होने के मामले 12 राज्यों में चार जनवरी तक बढ़कर 619 हो गये। अधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। 

उन्होंने बताया गया कि इनमें से 199 मामले कर्नाटक में दर्ज किये गये, जबकि केरल में 148, महाराष्ट्र में 110, गोवा में 47, गुजरात में 30, आंध्र प्रदेश में 30, तमिलनाडु में 26, दिल्ली में 15, राजिस्थान में चार जबकि तेलंगाना, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक मामले दर्ज किये गये हैं। 

अधिकारियों ने कहा कि संक्रमित होने के मामले बढ़ रहे हैं और देश में जेएन.1 उपस्वरूप का पता चला है, लेकिन अभी चिंता की कोई बात नही है क्योंकि संक्रमित लोगों में से अधिकांश व्यक्ति घरेलू उपचार का विकल्प अपना रहे हैं जो मामूली रूप से बीमार होने का संकेत है। 

केंद्र ने पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को देश में कोविड-19 के नये मामलों की संख्या में वृद्धि और जेएन.1 उपस्वरूप का पता चलने के मद्देनजर निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है। 

राज्यों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से साझा किये गए विस्तृत दिशा-निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। ये दिशा-निर्देश कोविड-19 के लिए संशोधित निगरानी रणनीति को लेकर जारी किये गये हैं। 

राज्यों से कहा गया है कि वे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति का जल्द पता लगाने के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में इन्फ्लूएंजा और गंभीर श्वसन जैसी बीमारी से पीड़ित होने के के मामलों की नियमित रूप से निगरानी करें और जिला वार रिपोर्ट भेजें। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तेजी से बढ़ते प्रसार को देखते हुए जेएन.1 को अध्ययन के एक अलग प्रकार के रूप में वगीर्कृत किया है, लेकिन कहा है कि इससे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य को कम खतरा है।

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