एबीएन हेल्थ डेस्क। आंध्रप्रदेश की राजधानी अमरावती में चल रहे सेकंड आल इंडिया योगासन पुलिस गेम में योगासन भारत के जॉइंट सेक्रेटरी एवं योगासना पुलिस गेम के कंपटीशन डायरेक्टर वेद प्रकाश शर्मा ने योगासन जजेस को योग सत्र में योग का अभ्यास कराया।
उन्होंने क्रिया योग के बारे में जानकारी दी। नेशनल योगासना जज योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि वेदप्रकाश शर्मा मध्य प्रदेश योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। साथ ही वे पिछले कई समय से मध्य प्रदेश व देश में योगासन खेल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
योग सत्र में वेद प्रकाश शर्मा ने क्रिया योग के बारे में बताया कि आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में क्रिया योग मानव जीवन में संतुलन और शांति लाने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। यह केवल एक योग विधि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक जागृति का विज्ञान है।
क्रिया योग का अर्थ है क्रिया (कर्म) के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार। श्री शर्मा ने आगे बताया कि इसमें श्वास-प्रश्वास, ध्यान और प्राणायाम का संयोजन होता है, जो शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलित करता है।
क्रिया योग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योग सूत्र में वर्णन है जिसके अंतर्गत तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्राणिधान को रखा गया है इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सुधरता है, जिससे पाचन, रक्त संचार और श्वसन तंत्र मजबूत होते हैं। मानसिक स्तर पर यह योग मन को शांत, स्थिर और एकाग्र बनाता है। तनाव, चिंता और असंतुलन धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।
भावनात्मक रूप से व्यक्ति अधिक करुणामय और संतुलित हो जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से क्रिया योग आत्मा की अनुभूति का मार्ग है। यह व्यक्ति को बाहरी आसक्तियों से मुक्त कर उसकी अंतर्निहित चेतना से जोड़ता है। वर्तमान समय में जब मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के बावजूद आंतरिक शांति से दूर है, तब क्रिया योग ही वह साधना है जो जीवन को शांति, स्थिरता और आत्मिक आनंद प्रदान कर सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिना किसी ट्रेडमार्क, मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स और एक्सपायरी डेट का पानी बेचना लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं के प्रति घोर लापरवाही व सेवाओं में कमी है। इसके लिए विक्रेता जवाबदेह है। उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने पर पीड़ित को राहत मिल सकती है।
एक दुकानदार एक्सपायरी डेट की पानी की बोतल बेच रहा था। स्थानीय लोगों की शिकायत पर खाद सुरक्षा अधिकारी ने छापेमारी की, तो उसकी दुकान में 766 बोतलें एक्सपायर डेट की पायी गयी। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने उनमें से 16 बोतलें तो जांच के लिए सील कर दी जबकि 750 पानी की बोतलें मौके पर ही नष्ट करवा दी, ताकि भविष्य में उनका कोई उपयोग न कर सके। यह घटना जिला श्रावस्ती के हरदत्त नगर गिरंट थाना क्षेत्र की है।
एक उपभोक्ता ने जब दुकान से पानी की बोतल को खरीदा तो उसने देखा कि पानी की पैकिंग के समय जो एक्सपायरी डेट अंकित है वह बीत चुकी है। इस पर उसने इसकी सूचना एसडीएम को दी। एसडीएम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद सुरक्षा अधिकारी को मामले में कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
जिसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पुलिस टीम के साथ संबंधित दुकान में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान उक्त एक्सपायरी डेट की पानी की बोतलें पकड़ी गयी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि एक्सपायरी डेट के पानी के नमूने की रिपोर्ट आने के बाद दुकानदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी।
इसी प्रकार ग्वालियर में बिना किसी ट्रेडमार्क, मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स और एक्सपायरी डेट का पानी बाजार में बेचकर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट ने की है। उन्होंने तहसील दिवस पर जनसुनवाई के दौरान एक्सपायरी डेट का बोतल बंद पानी बेचने वालों के खिलाफ एडीएम को कार्रवाई करने के निर्देश दिये।
जनसुनवाई के दौरान लोगों ने क्षेत्र की दुकानों पर बिना मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स व बिना एक्सपायरी डेट अंकित किए पानी के पाउच बिकने की शिकायत की थी। उपभोक्ता अपने साथ खाली पाउच लेकर आये थे। इन पाउच में ट्रेडमार्क, मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट छपी हुई नहीं थी। जिसे जिला मजिस्ट्रेट ने गंभीरता से लिया और दोषी दुकानदारों के विरुद्ध कार्यवाही की गयी।
दरअसल, पानी जिसे जल ही जीवन कहा गया है, हमारे स्वास्थ्य में एक अहम योगदान करता है। तभी तो चिकित्सक भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह देते हैं। पानी का सेवन न सिर्फ हमारे शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखता है बल्कि इसका असर हमारी त्वचा और सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
वहीं शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन से लेकर थकान, सिरदर्द, चक्कर आना और कब्ज जैसी समस्या हो सकती है। लेकिन शायद ही हम कभी यह सोचते हो कि बोतल बंद पानी की भी एक्सपायरी डेट होती है। वास्तव में हम कितने दिनों तक का रखा हुआ या फिर बोतल बंद पानी पी सकते हैं?
खराब पानी बेचना सेवाओं में कमी
कानून की दृष्टि से भी एक्सपायरी डेट का पानी बेचना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत उपभोक्ताओं के प्रति घोर लापरवाही व सेवाओं में कमी की परिधि में आता है। जिसके लिए विके्रता को जवाबदेह ठहराया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा या अन्य राहत उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने पर मिल सकती है।
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक रहे संजय जैन का कहना है कि अगर पानी पूरी तरह से शु्द्ध है तो वह खराब नहीं होता है। क्योंकि शुद्ध पानी में किसी भी तरह के बैक्टीरिया, मिनरल्स और अशुद्धियां नहीं पाई जाती हैं। जब तक पानी में किसी तरह की अशुद्धि नहीं होती है तब तक वह खराब भी नहीं होता है। यदि पानी किसी गंदे कंटेनर या किसी खराब चीज के संपर्क में नहीं आता है वह तब तक खराब नहीं होता। लेकिन स्टोर किये गये पानी की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उसको कैसे और किस जगह पर स्टोर किया गया है।
वहीं बोतल बंद पानी को ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखा जाता है तो ऐसी बोतल में रखा पानी एक्सपायरी डेट के बाद भी काफी समय तक सेफ रख सकता हैं। लेकिन तब भी इसका टेस्ट बदल सकता है। इसलिए ऐसे पानी को पीना कतई सही नहीं है। वही अगर पानी की बोतल खुल गई है तो इस पानी को 2-3 दिन के अंदर तक ही पी सकते हैं। क्योंकि बोतल खुलने के बाद इसमें बैक्टीरिया और फंगस होने की संभावना बढ़ जाती है।
टीम एबीएन, रांची। 12 अक्टूबर 2025 को आई एमए रांची में एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, रांची ने द पिंक कार्पेट का आयोजन किया गया। जो स्तन कैंसर चैंपियनों और महिला आइकनों के साहस का सम्मान करने के लिए समर्पित एक अनोखा रैंप वॉक था। गो पिंक, गेट स्क्रीनिंग थीम के साथ, इस कार्यक्रम में प्रारंभिक जांच का आह्वान किया गया, जागरूकता बढ़ायी गयी और स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं को एकजुट किया गया।
झारखंड राज्य आरोग्य सोसाइटी, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार, रांची की कार्यकारी निदेशक श्रीमती नेहा अरोड़ा, आईएएस की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। इस कार्यक्रम में 60-80 स्तन कैंसर से उबर चुकी महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों की विभिन्न महिला आइकनों ने आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। इस कार्यक्रम में परिवारों, चिकित्सा पेशेवरों, गैर-सरकारी संगठनों आदि सहित 120 से अधिक अतिथि भी शामिल हुए।
आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत एक्सक्यूटिव निदेशक अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर हॉस्पिटल के सईद अहमद अंसारी ने किया। रैंप वॉक केवल फैशन के बारे में नहीं, बल्कि शक्ति, सुंदरता और आशा के बारे में भी था। मंच पर चलने वाली थ्राइवर्स ने स्तन कैंसर से उबर कर एक प्रतीक बनकर समय पर जांच के महत्व का एक सशक्त संदेश दिया। वरिष्ठ डॉक्टरों और अस्पताल के प्रतिनिधियों ने स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और नियमित जांच के महत्व के लिए एचसीजी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
उन्होंने महिलाओं से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और समय पर जांच कराने का भी आग्रह किया। एचसीजी कैंसर अस्पताल, रांची में रेडिशन आन्कोलॉजी के वरिष्ठ डॉक्टर, डॉ. मो आफताब आलम अंसारी ने कहा, स्तन कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर, यह समझना जरूरी है कि कैंसर अब उम्र की सीमा तक सीमित नहीं है। हालांकि आनुवंशिकी एक भूमिका निभाती है, लेकिन जीवनशैली, आहार और पर्यावरणीय कारक युवा महिलाओं में जोखिम को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं।
निष्क्रिय आदतें, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और देर से गर्भधारण इस प्रवृत्ति में योगदान दे रहे हैं। द पिंक कार्पेट जैसे आयोजन समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बनाते हैं, जो जीवित बचे लोगों की कहानियों के माध्यम से परिवारों को प्रेरित करते हैं और समय पर पहचान और समय पर चिकित्सा देखभाल के जीवन-रक्षक महत्व पर जोर देते हैं। एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, रांची में चिकित्सा सलाहकार, डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने कहा कि महिलाओं का एक छोटा सा हिस्सा ही जानता है कि स्वयं स्तन परीक्षण कैसे करें।
डर और कलंक अक्सर उन्हें मदद लेने से रोकते हैं। जागरूकता कार्यक्रम शीघ्र पहचान को प्रोत्साहित करने, बातचीत को बढ़ावा देने और समुदायों को स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने तथा एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं सईद अहमद अंसारी कार्यकारी निदेशक, एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, रांची ने कहा कि यह पहल वास्तव में जागरूकता- संचालित कार्यक्रमों की शक्ति को रेखांकित करती है।
इसे मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया हमें ऐसे कार्यक्रमों को और अधिक बार आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे समुदायों को शीघ्र कार्रवाई करने, समय पर चिकित्सा मार्गदर्शन प्राप्त करने और एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए सशक्त बनाया जा सके। निरंतर जागरूकता प्रयासों ने यह सुनिश्चित करने में मदद की है कि स्वास्थ्य हर दिन प्राथमिकता बना रहे न कि केवल संकट के समय में।
श्री इरशाद खान, मुख्य परिचालन अधिकारी, एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, रांची, ने कहा, एचसीजी में, जागरूकता फैलाना हमेशा हमारे प्रयासों का केंद्र रहा है। पिंक कार्पेट ऐसी कई पहलें हैं जिनके माध्यम से हम स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में लोगों को शिक्षित, सशक्त और समर्थन देने का प्रयास कर रहे हैं। वर्षों से, हमारी प्रतिबद्धता न केवल उन्नत उपचार प्रदान करने की रही है, बल्कि समुदायों को सूचित और प्रेरित रखने की भी रही है।
एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल के द पिंक कार्पेट रैंप वॉक ने न केवल स्तन कैंसर से उबरी महिलाओं के साहस का जश्न मनाया, बल्कि जागरूकता, सशक्तिकरण और समय पर देखभाल के प्रति अस्पताल की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, प्रारंभिक जांच के लिए समुदाय-व्यापी आह्वान भी किया। एचसीजी अब्दुर रज्जाक अंसारी कैंसर अस्पताल, रांची, कैंसर देखभाल में उत्कृष्टता का एक समर्पित केंद्र है, जो प्रत्येक रोगी को बेहतर जीवन स्तर के साथ-साथ व्यक्तिगत कैंसर देखभाल और उपचार प्रदान करने पर केंद्रित है।
इस केंद्र में नवीनतम अत्याधुनिक उपकरण हैं जो इसके विशेषज्ञों की उच्च कुशल टीम को कई नवीन अनुसंधान परियोजनाओं में शामिल होने में सक्षम बनाते हैं। इसने सर्जिकल आन्कोलॉजी, मेडिकल आॅन्कोलॉजी और रेडिएशन आन्कोलॉजी, पीईटी सीटी जैसी विशेषज्ञ निदान सुविधाओं के साथ बाल चिकित्सा आन्कोलॉजी में भी उच्च मानक प्राप्त किए हैं। उच्च-स्तरीय विकिरण प्रणालियां और सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ उपचार योजनाएं भी उपलब्ध हैं। मौके पर मनोरंजन राय ब्रांडिंग कम्युनिकेशन मैनेजर, विकास कुमार सिंह मार्केटिंग हेड समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
टीम एबीएन रांची। आज विश्व मानशिक स्वास्थ्य दिवस पर डीएवी कपिलदेव और डीएवी गाँधीनगर पब्लिक स्कूल में स्वामी मुक्तरथ का मानशिक स्वास्थ्य पर व्याख्यान माला हुआ। स्वामी जी मानसिक बीमारियों की पहचान और इसके रोकने के उपाय पर योग के महत्वपूर्ण प्रभावों की जानकारी दिये।
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका में कम उम्र के बच्चों में मानसिक उतावलापन और क्राइम टेंडेंसी तथा बहरापन बढ़ने लगा तथा दूसरी ओर योरोप में भी नशा और पागलपन बढ़ने लगा तब पहली बार 10 अक्टूबर 1992 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ की पहल पर इसे मनाया गया।
इस बत्तीस वर्षों के अंतराल में इसके रोकथाम पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। ये पागलपन और विक्षिप्तता, अवसाद, आत्महत्या, ड्रग-एडिक्शन, पारिवारिक विखराव में वृद्धि ही हुई है। भारत ने दुनियाँ को इसके रोकने का प्रबल उपाय अध्यात्म और योग बताया है। यहाँ के योगीयों और मनीषियों ने अमेरिका, योरोप, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में जाकर बहुत काम किया है और लगातार कर रहे हैं नहीं तो स्थिति और भी गड़बड़ हो जाती। योग मानसिक तंदुरूस्ती तथा तनावमुक्ति के लिये बहुत प्रभावकारी साधन है।
आचार्य मुक्तरथ जी ने कहा कि हमलोग सिर्फ विक्षिप्तता और अवसाद को ही मानसिक रोग समझ रहे हैं पर बहुत सारी हरकते मानसिक रोग के अंतर्गत आती है। बार-बार पैर हिलाना, अंगुलियों को कुरेदना, आँखें मिचलाना, कहीं भी थूक फेंकना, पेशेंस का कम होना, धैर्य की कमी, बार-बार गुस्सा आना,अपराध वृति, अनिद्रा, विद्वेष,घबराहट ये सब मानसिक हैं। यहाँ तक कि कब्ज, पाचन तन्त्र के रोग, दमा, स्किन प्रॉब्लम भी मानसिक समस्याओं का वजह है।
एबीएन सोशल डेस्क। मानसिक तनाव को दूर करने में कुछ खास पहलुओं को अपनाने की जरूरत है जिसमें योग, ध्यान, संगीत, मित्रों के साथ वार्तालाप, सत्संग, पांच मिनट गहरे श्वसन का अभ्यास, कीर्तन बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।
योगासन में सूर्य नमस्कार, योगमुद्रा, शशांकासन, धनुरासन, कूर्मासन, अर्ध-मत्स्येन्द्रासन, सर्वांगासन प्रमुख है। प्राणायाम में भस्त्रिका, नाड़ीशोधन, भ्रामरी प्रमुख है। ध्यान - योगनिद्रा मानशिक रोग को रोकने में बहुत प्रभावशाली है।
दुनिया में तनाव और मानशिक समस्याओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए 10 अक्टूबर 1992 को लोगों में जागरूकता हेतू विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की घोषणा की गई। पर इतने लम्बे समय में भी हमलोग अभी तक मानसिक रोगियों की वृद्धि को रोकना तो दूर की बात रही, हम मानसिक रोग को पहचानने से भी बहुत दूर रहे हैं। केवल विक्षिप्त लोगों को ही हम पागल मान बैठे और यहीं तक हमारी धारणा सीमित रही।
आये दिन तोड़-फोड़, जरा सी बातों पर गंभीर लड़ाई छेड़ देना, परिवार के बीच बेतरतीब झगड़े, भाई-भाई के बीच का झगड़ा, पति-पत्नी के रिश्ते ध्वस्त हो रहे हैं, प्रतिस्पर्धाओं में ईर्ष्या ने जगह बना ली है। धैर्य (पेशेंस) बिल्कुल खत्म हो रहा है, मस्तिष्क में नकारात्मक सोच बढ़ रहे हैं, प्रवृत्ति गंदी हो रही है, वायुमंडल को हम गंदा कर रहे हैं क्या ये मानसिक अस्वस्थता नहीं है?
आज के मनोविश्लेषक और मनोवैज्ञानिक इसे भी मानसिक रोगियों की श्रेणी में खड़ा कर रहे हैं। सिर्फ पागलपन, अवसाद, चिन्ता, फ्रस्टेशन, अनिद्रा, तनाव, स्क्रीजोफ्रेनिया, भय, कुंठा आदि ही मानसिक बीमारी नहीं है बल्कि उच्च-रक्तचाप,हृदय रोग, कब्ज,पाचन प्रणाली की समस्या, अल्सर,कैन्सर, दमा,माइग्रेन जैसी बीमारियां भी मानसिक हैं।
हमें बहुत जल्द इसे समझने की जरूरत है नहीं तो स्थिति बहुत खराब हो जायेगी। इन सभी समस्याओं को समझने के साथ हमें भारत की शक्तिशाली विद्या योग को भी समझने की बहुत जरूरत है जिसे हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने दिया था। यह विद्या पूर्णरूप से मानसिक स्वास्थ्य को प्रदान करता है।
योग मानसिक समस्याओं को दूर करता है, इसके बिना मनोवैज्ञानिक उपचार अधूरा लम्बे वर्षों के बाद भी मानसिक रोग को दूर करने में योग के व्यापक प्रभाव से दूर हैं। योग भारत की ऐसी विद्या है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की विस्तृत चर्चा है। इसके अलावा भी हमारे बहुत सारे धार्मिक शास्त्रों में भी मानस रोग की चर्चा का उल्लेख मिलता है।
वर्तमान समय में योग के द्वारा कठिन व्याधियों को दूर किया जा रहा है। मानसिक समस्याओं पर भी विदेशों में खास करके योरोप में काफी रिसर्च हो चुके हैं जो बहुत सफल और महत्वपूर्ण साबित हुआ है। हमें सही रूप से योग को जानने की जरूरत है और इसके उपचारात्मक बिधियों को समझने की जरूरत है। यदि हम अपने दिनचर्या में योग को शामिल करते हैं तो बहुत बड़ा मानसिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है इसमें कोई दो मत नहीं है।
मानसिक तनाव को दूर करने में कुछ खास पहलूओं को अपनाने की जरूरत है जिसमें योग, ध्यान, संगीत,मित्रों के साथ वार्तालाप,सत्संग, पाँच मिनट गहरे श्वसन का अभ्यास, कीर्तन बहुत लाभदायक सिद्ध होगा। योगासन में- सूर्यनमस्कार, योगमुद्रा, शशांकासन, धनुरासन,कुर्मासन, अर्ध-मत्स्येन्द्रासन, सर्वांगासन प्रमुख है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। हरी मटर और छोले दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स है। दोनों ही भारतीय खानपान का अहम हिस्सा हैं और स्वाद में भी लाजवाब होते हैं। ये दोनों ही लेग्यूम्स फैमिली से आते हैं। हालांकि, इनके न्यूट्रिशन वैल्यू और फायदे अलग-अलग होते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि दोनों सेहत को एक जैसे फायदे देते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। हरी मटर में जहां विटामिन सी और फाइबर भरपूर पाया जाता है।
वहीं, छोले प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आपके लिए कौन ज्यादा फायदेमंद है। आज की भागदौड़ भरी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल में बैलेंस बनाना एक चैलेंज बन गया है। ऐसे में खानपान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। हमे हमनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करने की जरूरत हो जो पूरा पोषण भी दें और वजन को भी कंट्रोल करें। सर्दियों के मौसम में खाई जाने वाली हरी मटर और छोले वेट लॉस से लेकर इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करते हैं। आइए, दोनों की न्यूट्रिशन वैल्यू एक नजर डालते हैं।
हरी मटर पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, के, फोलेट और मिनिरल्स पाए जाते हैं। इसे खाने से शरीर को भी कई फायदे मिलते हैं। हेल्थलाइन के मुताबिक, हरी मटर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी कम होता है। फाइबर होने की वजह से हरी मटर डाइजेशन को भी बेहतर बनाने का काम करती है। हरी मटर में मिनिरल्स, मैग्नीशियम और पोटेशियम पाया जाता है, जो हार्ट हेल्थ को बनाए रखने में मददगार है। हालांकि, अगर आप हरी मटर का सेवन जरूरत से ज्यादा करते हैं तो इससे ब्लोटिंग जैसी शिकायत होने का भी खतरा रहता है।
छोले भी पोषक तत्वों का खजाना है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा डायटरी फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक जैसे पोषक तत्वों का भी बेहतरीन स्रोत है। छोले में विटामिन बी और हेल्दी अनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी पाया जाता है। इसका सेवन शरीर के लिए काफी फायदेमंद है।
प्रोटीन होने की वजह से छोले पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं, जिससे बार-बार खाने की क्रेविंग से बचा जा सकता है। मसल्स गेन करने वालों के लिए भी छोले एक बेहतरीन स्रोत है। हेल्थलाइन के मुताबिक, 1 कप छोले में करीब 14.5 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर डाइजेशन को बेहतर बनाने में भी छोले बेनिफिशियल हैं। छोले और हरी मटर दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। लेकिन दोनों के न्यूट्रिशन वैल्यू में काफी अंतर है।
साथ ही ये सेहत को भी अलग-अलग फायदे देते हैं। छोले जहां प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत माने जाते हैं, जो मसल्स गेन करने वाले, वजन कंट्रोल करने वाले और ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए फायदेमंद है। वहीं, हरी मटर विटामिन सी भरपूर है। ये कम कैलोरी वाला फूड है जो वेट लॉस में हेल्प करता है। हालांकि, दोनों ही जरूरत से ज्यादा खाने से ब्लोटिंग, गैस और कब्ज जैसी शिकायत कर सकते हैं। ऐसे में आप अपनी जरूरत के हिसाब से इन दोनों को डाइट में शामिल करें।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री मंदिर में चल रहे योग सत्र के दोरान योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि, दुनिया तेजी से बदल रही है जिसके कारण बदलती मानवीय जीवनशैली का सबसे गंभीर प्रभाव मानव हृदय पर पड़ा है। आज हृदय रोग केवल वृद्धावस्था तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह युवाओं में भी बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं।
पिछले दो-तीन वर्षों से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। 50 वर्ष से कम उम्र के 50 फीसदी और 40 वर्ष से कम उम्र के 25 फीसदी लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम देखा गया है कुछ वर्षों पूर्व पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले कम थे। एक नए शोध में यह हृदय रोग अब बराबर देखे गए। हृदय रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई।
कुछ वर्षों पूर्व वृद्धावस्था में होने वाली इस बीमारी ने युवकों को भी शिकार बना लिया है। वर्तमान में हार्ट अटैक युवाओं में होने के अनेकों अनेक कारणों का समावेश होता रहा है! इसमें आधुनिक खान पान और जीवन शैली महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया के कुल हृदय रोगियों में से 60 प्रतिशत मरीज अकेले भारत में ही होने की संभावना व्यक्ति की गई है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है।
वर्ष 2025 का विषय है एक धड़कन न चूकें यह संदेश केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सामूहिक चेतावनी है कि यदि अब भी लोग, समाज और सरकारें सक्रिय नहीं हुए तो हृदय रोग एक वैश्विक महामारी का रूप ले लेगा। चूंकि हार्ट अटैक समस्या का संभावित समाधान जीवनशैली में सख्त आचार संहिता अपनाकर ओर अपनी दिनचर्या में योग प्राणायाम को शामिल कर हृदयघात से होने वाली मौतों को रोकने में सहभागी बनें अगर हम हार्ट अटैक क्या है और कैसे होता है? इसे समझने की कोशिश करें तो, हार्ट अटैक, इसे चिकित्सकीय भाषा में मायोकार्डियलइंफाशन कहा जाता है, तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है।
यह स्थिति प्राय: तब उत्पन्न होती है जब कोरोनरी आर्टरी (हृदय की रक्तवाहिका) में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य तत्वों का जमाव जमा होकर ब्लॉकेज पैदा कर देता है। इस ब्लॉकेज से हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिलती और परिणामस्वरूप हृदय की कोशिकाएं मरने लगती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह व्यक्ति की जान भी ले सकता है। इसके लक्षण कई बार अचानक और गंभीर हो सकते हैं जैसे सीने में तेज दर्द या दबाव, पसीना आना, सांस फूलना, जबड़े या बांह में दर्द, मतली या बेहोशी।
वहीं, कुछ मामलों में हल्के संकेत भी मिलते हैं जिन्हें लोग सामान्य थकान या गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही लापरवाही जीवन के लिए घातक सिद्ध होती है। हार्ट अटैक की समस्या से बचाव के लिए योग प्रणामी काफी उपयोगी है जिसमें योग और प्राणायाम के द्वारा हार्ट अटैक की समस्याओं से बचा जा सकता है योग के अंतर्गत सूर्य नमस्कार, ताड़ासन त्रियक ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, वीरभद्रासन, अनुलोम विलोम प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, योगनिद्रा ध्यान आदि के अभ्यास से हार्ट अटैक की समस्या से बचा जा सकता है।
वहीं अपनी दैनिक दिनचर्या में परिवर्तन कर और अपनी भोजनाचार्य को व्यवस्थित कर, अपनी दिनचर्या में योग को शामिल किया जा सकता है और हार्ट अटैक के साथ-साथ अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है, अगर हम जीवनशैली और हार्ट अटैक का संबंध को समझने की करें तो, आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जीवनशैली हृदय के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। अधिकतर मामलों में पाया गया है कि हृदय रोग सीधे-सीधे व्यक्ति की आदतों और दिनचर्या से जुड़े होते हैं।
तनाव और अनियमित नींद मानसिक दबाव और नींद की कमी हार्मोनल असंतुलन पैदा कर हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवनशैली विकल्पों में बदलाव कर ले तो हृदय रोग से होने वाले 80 फीसदी समयपूर्व मौतों को रोका जा सकता है। हम विश्व हृदय दिवस को एक वैश्विक बहुभाषी अभियान को समझने की कोशिश करें तो, हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि एक वैश्विक अभियान है जिसमें विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और देशों को एक मंच पर लाकर हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है।
सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन मिलकर नीतिगत हस्तक्षेप की दिशा में कदम उठाते हैं। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को याद दिलाना है कि उनका हृदय ही उनकी जीवन शक्ति है और उसकी देखभाल सबसे पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, कैंडी, आइसक्रीम, चॉकलेट, कोक, और सोडा जैसी हाई कार्बोहाइड्रेड, शुगर ओर पेंटी, फैटी एसिड वाली चीजों को कंफर्ट फूड में रखा गया है। इनसे हार्ट अटैक का रोग खतरा 33 प्रतिशत बढ़ जाता है। यदि प्रतिदिन लगभग 800/900 ग्राम फल और सब्जियां खाते हैं, तो उनमें हार्ट अटैक का खतरा लगभग 30 प्रतिशत कम होता है।
हृदयाघात की जोखिम बढ़ने के 6 कारणों में से 4 कारण तो जीवनशैली से जुड़े है, जिन्हें नियन्त्रित कर हृदय घात के खतरे को काफी कम करके दिल को मजबूत किया जा सकता। उपरोक्त थीम वैश्विक स्तरपर एक चेतावनी है कि हम सभी को अपने और अपने प्रियजनों के हृदय की जिम्मेदारी लेनी होगी।
इस जागरण अभियान में सरकारों और समाज की भूमिका को समझने की कोशिश करें तो हृदय स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकारों और समाजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है
यदि यह प्रयास सामूहिक रूप से किए जाएं तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। अत: अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि हृदय की धड़कन अमूल्य है। एक धड़कन न चूकें केवल एक नारा नहीं बल्कि एक जीवन मंत्र है। हृदय स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सामूहिक प्रयास और सरकारी नीतियां तीनों जरूरी हैं।
यदि लोग आज ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाना शुरू करें, समय पर जांच कराएं और चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लें तो असामयिक मौतों को रोका जा सकता है। हृदय एक बार रुक जाए तो जीवन ठहर जाता है, इसलिए अब समय है कि दुनिया भर की सरकारें, समाज और व्यक्ति मिलकर यह संकल्प लें कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और मजबूत हृदय की धड़कन उपहार में देंगे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। पोटैशियम, फाइबर, विटामिन बी6 और विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर केला एक ऐसा फल है जो न केवल स्वाद में मीठा और नरम होता है, बल्कि सेहत के भी किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है, लेकिन क्या इसे खाने के तुरंत बाद पानी पीना सही है? ये जानने के लिए स्टोरी में बने रहिये।
केला एक ठंडा फल माना जाता है, जो पचने में समय लेता है। ऐसे में अगर आप केला खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीते हैं तो बलगम, खांसी और सर्दी जैसी समस्याओं को बुलावा दे सकते हैं। आयुर्वेद में सलाह दी जाती है कि केला खाने के कम से कम 20 से 30 मिनट बाद ही पानी पीना पीना चाहिए।
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। अइठठी६२24.ूङ्मे इस जानकारी के लिए जिÞम्मेदारी का दावा नहीं करता है।)
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