हेल्थ

View All
Published / 2021-03-27 15:41:21
चर्म रोगों, मोटापा, कब्ज रोगों में अद्भुत लाभकारी व गुणकारी है मिट्टी स्नान

लोहरदगा। पतजंलि योग समिति भारत स्वाभिमान लोहरदगा के तत्वावधान में जिला के सेन्हा प्रखंड के चितरी ग्राम के कोयल नदी तट पर मिट्टी स्नान, हवन यज्ञ एवं भोजन प्रसाद का कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर जिला संरक्षक एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में जिला प्रभारी प्रवीण कुमार भारती, पतजंलि के अभय भारती ने सभी को कोयल नदी तट पर मिट्टी स्नान कराते हुए दंड बैठक, सूर्य नमस्कार, आसन व प्राणायाम का अभ्यास कराया। प्रवीण कुमार भारती ने बताया मिट्टी स्नान चर्म रोगों, मोटापा, कब्ज आदि रोगों में अद्भुत लाभकारी है एवं गुणकारी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत चालक सच्चिदानंद अग्रवाल ने कहा कि पतजंलि योग समिति जिला में योग आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा कर रही है। वनवासी कल्याण केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पतजंलि लोहरदगा ने इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों में प्राकृतिक चिकित्सा और योग आयुर्वेद के प्रति जिलेवासियों को जागरूक किया है। आचार्य शरत चन्द्र आर्य ने हवन कराते हुए इसके वैज्ञानिक प्रमाण पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में होली मिलन समारोह का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिनेश प्रजापति , नवनीत गौड़, बन्दे उरांव, राजीव रंजन, शरत चन्द्र आर्य, रघुनंदन शर्मा, सुधीर अग्रवाल, शिवराज विजय, तरुण देवघरिया, शिक्षक श्रीराम झा, तीजन यादव, विजय जायसवाल, वरुण , वैधनाथ मिश्र सहित बहुत से लोग शामिल थे।

Published / 2021-03-27 12:43:30
वैज्ञानिक का दावा : प्रदूषण से प्रभावित हो रही लोगों की सेहत

नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वैज्ञानिक का दावा तेजी से वायरल हो रहा है। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में प्रफेसर डॉ शन्ना स्वान ने अपनी रिसर्च में कहा है कि पॉल्यूशन के कारण पुरुषों का प्राइवेट पार्ट छोटा हो रहा है। उन्होंने अपनी रिसर्च के आधार पर एक किताब लिखी है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि मानवता के आगे बांझपन का संकट पैदा हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक केमिकल फैथेलेट्स एंडोक्राइन सिस्टम पर असर करता है। स्काई न्यूज के मुताबिक, डॉ स्वान ने अपनी किताब में लिखा है कि प्रदूषण की वजह से पिछले कुछ सालों में जो बच्चे पैदा हो रहे हैं, उनके लिंग का आकार छोटा हो रहा है। किताब में आधुनिक दुनिया में पुरुषों के घटते स्पर्म, महिलाओं और पुरुषों के जननांगों में आ रहे विकास संबंधी बदलाव और इंसानी नस्ल के खत्म होने की बात कही गई है। अध्ययन के दौरान आज कल के बच्चों में एनोजेनाइटल डिस्टेंस कम हो रहा है। यह लिंग के वॉल्यूम से संबंधित समस्या है। फैथेलेट्स रसायन का उपयोग प्लास्टिक बनाने के काम आता है। ये रसायन इसके बाद खिलौनों और खाने के जरिए इंसानों के शरीर में पहुंच रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक फैथेलेट्स सिंड्रोम की जांच उस वक्त शुरू की जब उन्हें नर चूहों के लिंग में अंतर दिखाई दिया। स्टडी के दौरान डॉ। स्वान ने पाया कि सिर्फ नर चूहे के लिंग ही नहीं, बल्कि मादा चूहों के भ्रूण पर भी इसका असर पड़ रहा है। उनके प्रजनन अंग छोटे होते जा रहे हैं। तब उन्होंने फैसला किया कि वो इंसानों पर अध्ययन करेंगी। चूहों के बाद इंसानों पर रिसर्च की और उन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए। रिपोर्ट में यह बात भी कही है कि फैथेलेट्स शरीर के अंदर एस्ट्रोजेन हॉर्मोन की नकल करता है। इससे शारीरिक विकास संबंधी हॉर्मोन्स की दर प्रभावित होती है और मनुष्य के शरीर के अंग बिगड़ने लगते हैं। हालांकि पुरुषों के प्राइवेट पार्ट के छोटे होने की इस तरह की ये कोई पहली रिसर्च नहीं है। इससे पहले 2017 में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिमी देशों के पुरुषों का स्पर्म काउंट पिछले चार दशकों में 50% से भी ज्यादा तक कम हो गया है। डॉ स्वान का मानना है कि जिस तरह से फर्टिलिटी रेट कम हो रहा है, उससे अधिकतर पुरुष 2045 तक ऐसे स्?पर्म बना पाने में नाकाम हो जाएंगे जिससे भ्रूण बन सके।

Published / 2021-03-26 13:58:00
केमिकल वाली नहीं हर्बल होली खेलें

रांची। केमिकल वाले रंग स्किन पर एक्ने, एलर्जी और जलन का कारण बनते हैं। इनसे बचने के लिए फूल, पत्तियों, सब्जियों और मसालों से तैयार रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये स्किन के लिए फायदेमंद होते हैं और आंखों को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। इस बारे में नेचुरोपैथी एक्सपर्ट बताते हैं कि कैसे हर्बल कलर घर पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और कैसे सेलिब्रेट करें सेफ होली। नीम की पत्तियों से बनायें हरा रंग : नीम की पत्तियों को पीसकर तैयार हुए पेस्ट से हरा रंग बना सकते हैं। इस पेस्ट को पानी में मिलाकर की रंग खेला जा सकता है। यह फेसपैक की तरह भी काम करेगा। नीम एंटीबैक्टीरियल और एंटीएलर्जिक होने के कारण स्किन के लिए फायदेमंद है और यह कील, मुंहासों की समस्या में राहत देता है। नीम की पत्तियों को सुखाकर इसके पाउडर को भी गुलाल की तरह लगाया जा सकता है। चुकंदर से बनायें लाल रंग : इस मौसम में चुकंदर आसानी से उपलब्ध है। इसे घिसकर पानी में उबाल लें और लाल रंग तैयार है। गहरा पिंक रंग चाहते हैं तो इसमें पानी ज्यादा मिलाएं। इसके अलावा इसे पीसकर पेस्ट भी बना सकते हैं। खासबात है कि यह रंग आंखों और मुंह में चले जाने पर नुकसान भी नहीं होता है। बच्चों को नुकसान से बचाने के लिए इस रंग को पिचकारी में भरकर भी दे सकते हैं। मक्के के आटे में हल्दी मिलाकर बनायें पीला रंग : ये रंग बनाने के लिए हल्दी बेहद मुफीद है। हल्दी एंटीसेप्टिक और एंटीइंफ्लेमेट्री होती है जो स्किन के लिए काफी फायदेमंद है। पीला रंग तैयार करने के लिए हल्दी को जौ या मक्के के आटे में मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं। इसे रंग की तरह इस्तेमाल करें। यह डेड स्किन हटाकर नेचुरल स्क्रब की तरह काम करेगा। हल्दी को आरारोट या चावल के पाउडर में भी मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

Published / 2021-03-24 12:15:28
मानसिक तनाव से मुक्ति के साथ शुगर लेवल भी कंट्रोल रखता है कच्चा पनीर

पनीर का नाम आते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। क्योंकि पनीर ऐसी चीज है, जो लोगों को सब्जी के साथ ही अन्य खाद्य पदार्थों में भी बहुत अच्छी लगती है। लोग इसे शौक से खाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है की पनीर को कच्चा खाने के अनगिनत फायदे हैं, आज हम उन्हीं फायदों के बारे में आपको बताएंगे। पनीर में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, वसा, कैल्शियम, फास्फोरस, फोलेट और कई न्यूट्रिएंट्स होते हैं। पनीर का सेवन करने से व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है, इसी के साथ शुगर लेवल भी कंट्रोल होता है। क्योंकि पनीर में सेलेनियम, कैल्शियम, फास्फोरस और पोटेशियम पाया जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। पनीर खाने से व्यक्ति की याददाश्त भी बढ़ती है और हड्डियां भी मजबूत होती है। वैसे तो पनीर का सेवन शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। लेकिन उसे खाने का वक्त भी सही होना चाहिए। कच्चा पनीर आपको दोपहर के भोजन से 1 घंटे पहले खाना ठीक रहता है। क्योंकि इससे आप अधिक खाने से बच जाते हैं। इसी के साथ एक्सरसाइज के कुछ घंटे बाद भी पनीर का सेवन लाभदायक रहता है। इसके बाद आप रात को सोने से करीब 1 घंटे पहले भी पनीर खा सकते हैं। वैसे तो बाजार की चीजें खाने से आपका मोटापा बढ़ता है। लेकिन अगर आप पनीर का सेवन करेंगे, तो यह मोटापे से मुक्ति दिलाएगा। इसमें लिनेलाइक एसिड की मात्रा होती है। जो शरीर में फैट बर्न करने की रफ्तार को तेज करता है। अगर आपके शरीर की हड्डियां कमजोर है। तो आपको पनीर का इस्तेमाल करना चाहिए। पनीर में कैल्शियम, फास्फोरस होने के कारण यह आपका इम्यून सिस्टम तो मजबूत करता ही है, साथ ही तनाव को दूर करने में भी मदद करता है। आज की व्यस्तम जिंदगी में काम के अत्यधिक प्रेशर के चलते कई लोग टेंशन की चपेट में आ जाते हैं। इसके लिए कच्चे पनीर का सेवन करना बहुत जरूरी है। कच्चे पनीर का सेवन करने से इम्यून सिस्टम, कॉलेस्ट्रॉल लेवल, शुगर लेवल, बाबासीर आदि के लिए काफी फायदेमंद होता है। अगर आप रोजाना एक समय भी कच्चे पनीर का सेवन करेंगे, तो आपके शरीर में फाइबर की कमी पूरी हो जाएगी। इससे आपको कई समस्याओं से निजात मिलेगी।

Published / 2021-03-23 11:45:52
कोरोना : 45 साल से अधिक के सभी लोगों को एक अप्रैल से लगेगा टीका

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज इस बात की जानकारी दी कि एक अप्रैल से 45 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोरोना का वैक्सीन लगाया जायेगा। प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के इस निर्णय के बारे में जानकारी दी। प्रकाश जावड़ेकर ने लोगों से आग्रह किया कि 45 साल से अधिक के लोग कोरोवा वैक्सीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करायें। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन कोरोना वायरस के बचाव का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। इसलिए सभी लोग वैक्सीन लगवायें। मंत्री ने लोगों को आश्वस्त किया कि कोरोना वैक्सीन देश में पर्याप्त मात्रा में है, इसलिए पैनिक होने के जरूरत नहीं है, सभी को वैक्सीन मिलेगा। सरकारी अस्पताल में वैक्सीन फ्री मिलेगा और निजी अस्पतालों में यह फ्री मिलेगा।

Published / 2021-03-22 12:05:42
ट्रांसपैरेंट मास्क दिलायेगा अस्थमा मरीजों को राहत, चश्मा भी नहीं होगा धुंधला

कोरोना से बचाव में मास्क आज भी सबसे बड़ा हथियार है। हालांकि, वैक्सीन के निर्माण की खबर सुनते ही कुछ लोग मास्क को गंभीरता से नहीं ले रहे। लेकिन, बढ़ते मामलों को देखते हुए मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है। लेकिन, अस्थमा के मरीज और जो चश्मा पहनते हैं उन्हें लगातार मास्क पहनना टार्चर से कम नहीं लग रहा है। इन समस्याओं को देखते हुए वैज्ञानिकों ने पॉलीमर से बना पारदर्शी मास्क बनाया है, जिसकी खुद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी तारीफ की है। आइए जानते है इस मास्क की खासियत... लोग क्यों नहीं पहनना चाहते मास्क कुछ लोगों को मास्क पहनने से सांस की समस्या उत्पन्न हो रही है ज्यादातर अस्थमा के मरीज इसे पहनने से बचते हैं जो चश्मा पहनते है वे यदि नाक के ऊपर तक मास्क पहने तो शीशे में भांप आ जाता है कुछ लोग अपने खूबसूरती छिपाना नहीं चाहते, लगातार पहनने से बॉडी में पर्याप्त मात्रा में आॅक्सीजन नहीं जाता, जिससे सिर दर्द आदि की समस्या कुछ लोगों को होती है क्या है ट्रांस्पैरेंट मास्क की खासियत चंडीगढ़ के चंडीगढ़ की सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट आर्गनाइजेशन के वैज्ञानिकों ने इस पारदर्शी मास्क बनाया है। जो केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ हर्षवर्धन को भी भाया। उन्होंने न केवल इसकी तारीफ की बल्कि इसे पहना भी। इस मास्क को आसानी से धोया जा सकता है। सीएसआईओ की वैज्ञानिक डॉ सुनीता मेहरा की मानें तो यह मास्क पॉलीमर से बना हुआ है। यह कोरोना को शरीर में प्रवेश करने से रोकने में कारगर है, क्योंकि यह मास्क चारों ओर से बंद होता है, इसे लगाने के बाद सांस नहीं फूलती सांस छोड़ने के बाद भी भाप नहीं जमती यदि मिली माइक्रो ड्रॉपलेट भी गिर जाए तो इसे आसानी से धो कर हटाया जा सकता है। आपकी ब्यूटी भी नहीं छुपेगी, क्योंकि यह पारदर्शी है। सुरक्षा लिहाज से भी यह खास है। एयरपोर्ट आदि जगहों पर सीसीटीवी में लोगों की आसानी से पहचान हो पाएगी। क्या है कीमत : इस मास्क को महज 150 से 200 रुपये में खरीदा जा सकता है। हालांकि, कुछ दिनों में इसके बाजार में आने के बाद इसकी कीमत और कम हो सकती है। आपको बता दें कि इसके अलावा एक चश्मा भी तैयार किया जा रहा है। जिसे लगाने के बाद आंखें भी कोरोना से सुरक्षित रहेंगी। जिसकी लागत करीब 250 रुपये होगी।

Published / 2021-03-20 12:51:12
नाक के भीतर वायु गुहाओं का सूजन है साइनस

मौसम में बदलाव होने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा ही एक साइनस का इंफेक्शन है, जिससे बहुत से लोग परेशान रहते हैं। साइनस इंफेक्शन क्या है : साइनसाइटिस या साइनस इंफेक्शन नाक के मार्ग के भीतर वायु गुहाओं का सूजन है। यह एलर्जी और रासायनिक या साइनस की जलन को उत्तेजित कर सकता है। अधिकांश लोग साइनस इंफेक्शन को अन्य लोगों में नहीं फैलाते हैं। यह कई तरह का होता है और इसका तुरंत इलाज जरूरी है। साइनसाइटिस के लक्षण : साइनसाइटिस के मुख्य लक्षणों में साइनस का सिरदर्द, चेहरे पर थकान, साइनस और कानों और दांतों में दबाव या दर्द, बुखार, नाक से पानी निकलना, नाक का भरा हुआ महसूस होना, गले में खराश, खांसी और चेहरे की सूजन होना आदि शामिल हैं। साइनस का इलाज : साइनस संक्रमण का आमतौर पर रोगी के इतिहास और शारीरिक परीक्षण के आधार पर निदान किया जाता है। बैक्टीरियल साइनस का आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। एलर्जी साइनसाइटिस के प्रारंभिक उपचार से माध्यमिक बैक्टीरिया साइनस संक्रमण को रोका जा सकता है। साइनस संक्रमण के घरेलू उपचार में एसिटामिनोफेन, डिकॉन्गेस्टेंट और म्यूकोलाईटिक्स जैसी ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं शामिल हैं। साइनस के लिए घरेलू उपचार खूब पानी पीयें : अपने सिस्टम से वायरस को बाहर निकालने में मदद करने के लिए, सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड हैं। हर 2 घंटे में कम से कम 8 औंस पानी पीने का लक्ष्य रखें। जीवाणुरोधी गुणों वाले खाद्य पदार्थ खायें : वायरस से लड़ने के लिए अपने भोजन में लहसुन, अदरक, और प्याज जैसे जीवाणुरोधी खाद्य पदार्थ शामिल करें। आप अदरक की चाय पी सकते हैं और इसमें कच्चा शहद मिलाएं। शहद एंटीआॅक्सिडेंट का खजाना है और इसमें जीवाणुरोधी और एंटिफंगल गुण हैं। नेजल स्प्रे : दिन के दौरान और बिस्तर पर जाने से पहले नेजल स्प्रे का उपयोग करें। ये आपके स्थानीय दवा की दुकान से खरीदे जा सकते हैं और दिन में कई बार उपयोग किया जाता है ताकि भीड़ को तोड़ने में मदद मिल सके। ऐसे स्प्रे से बचें जिनमें आॅक्सीमेटाजोलिन होता है क्योंकि आप इस स्प्रे पर निर्भर हो सकते हैं। तेल का इस्तेमाल करें : नीलगिरी का तेल साइनस को खोलने और बलगम से छुटकारा पाने में मदद कर सकता है। एक अध्ययन में पाया गया है कि नीलगिरी के तेल, सिनेल में मुख्य घटक, तीव्र साइनसिसिस वाले लोगों को तेजी से ठीक होने में मदद करता है। साइनस या ऊपरी श्वसन संक्रमण को कम करने के लिए नाक, छाती और पीठ पर नीलगिरी के तेल का उपयोग करें। गर्म सेक के साथ चेहरे का दर्द कम करें : नम, गर्म गर्मी लागू करने से साइनस के दर्द को शांत करने में मदद मिल सकती है। चेहरे के दर्द को कम करने के लिए अपनी नाक, गाल और आंखों के आसपास गर्म, नम तौलिये रखें। यह बाहर से नाक के मार्ग को साफ करने में भी मदद करेगा। डॉक्टर के पास कब जाएं अगर शरीर का तापमान 100.4 से अधिक है लक्षण जो 10 से अधिक दिनों तक रहे हैं लक्षण जो खराब होते जा रहे हैं ऐसे लक्षण जो ओटीसी दवा से कम नहीं हो रहे पिछले एक साल में कई साइनस संक्रमण यदि आपको आठ हफ्तों या उससे अधिक समय तक साइनस संक्रमण है, या प्रति वर्ष चार से अधिक साइनस संक्रमण हैं, तो आपको क्रोनिक साइनसिसिस हो सकता है।

Published / 2021-03-19 11:53:36
प्राकृतिक तरीके से गर्मियों में त्वचा को रखें दुरुस्त

गर्मियों के मौसम में त्वचा शुष्क होकर फटने लगती है। त्वचा रूखी हो जाती है। रूखी त्वचा की देखभाल न की जाए तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। इससे त्वचा में खुजली व जलन की समस्या आने लगती है। लापरवाही से त्वचा में दरार व खून आने लगता है। सूरज की किरणों, प्रदूषण, सर्द हवाओं व शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी होने लगती है स्किन संबंधी समस्या के लिए प्राकृतिक तरीकों से छुटकारा पा सकते हैं। पपीता : फटी त्वचा पर पपीता लगाना भी लाभकारी है। इसके गूदे का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाकर मसाज करें और 10-15 मिनट के लिए लगे हुए छोड़ दें। बाद में गुनगुने पानी से धोएं। पपीते में मौजूद विटामिन ए और पापेन नामक एंजाइम डेड स्किन को हटाने के साथ स्किन पर पड़े दाग-धब्बे को हटाने और स्किन के लचीलेपन को भी बेहतर करने का काम करता है। जैतूर और अरंडी के तेल : त्वचा में नमी बनाएं रखने के लिए 3 चम्मच जैतून व एक चम्मच अरंडी के तेल को मिलाकर चेहरे पर लगाकर भाप लें। इससे त्वचा की डेड स्किन हटेगी। गुनगुने पानी में डूबे हुए कपड़े को हल्का निचोड़कर चेहरे पर ढंकें व ठंडा होने पर हटाएं। इससे त्वचा मुलायम हो जाएगी। नींबू : गर्मियों में नींबू का रस लगाने से त्वचा नरम होती है। ग्लिसरीन के साथ नींबू का रस मिलाकर त्वचा पर लगाएं। संतरे के फेस पैक से चेहरे पर निखार आता है। नींबू रस त्वचा पर लगाने से शुरू में हल्की जलन हो सकती है। रस को चेहरे पर लगाकर 10 मिनट बाद उसे धो लें। इससे फटी त्वचा में फायदा होगा।

Page 56 of 57

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse