एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वैरिएंट भारत में तेजी से फैल रहा है। वायरस के डेल्टा वैरिएंट के बाद अब ओमिक्रॉन एक प्रमुख वैरिएंट बनता जा रहा है जिसके कारण लोग संक्रमित हो रहे हैं। यह वैरिएंट न्यूनतम संपर्क के साथ तेज गति से फैलने के लिए जाना जाता है। हालांकि ओमिक्रॉन के चलते संक्रमण के ज्यादा गंभीर मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन यह वैरिएंट लोगों को कमजोर बना रहा है। और इससे भी बुरी बात यह है कि ओमिक्रॉन संक्रमण के लक्षण COVID-19 के बताए गए लक्षणों से अलग हैं। कोरोना के मामलों में स्वाद और गंध की कमी, बुखार और फ्लू शामिल हैं। लेकिन अमिक्रॉन में एक और लक्षण जुड़ा है। कुछ लक्षण कानों में भी दिखाई दे सकते हैं : स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के एक समूह ने इस संक्रमण के एक नए लक्षण की खोज की है। ओमिक्रॉन वैरिएंट आंखों से लेकर हृदय और मस्तिष्क तक के शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लक्षण कानों में भी दिखाई दे सकते हैं। क्या हैं ओमिक्रॉन के कान के लक्षण : स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने यह समझने के लिए COVID पॉजिटिव रोगियों के इंटरनल इयर मॉडल का परीक्षण किया कि वायरस सिस्टम को कैसे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने पाया कि मरीज कान में दर्द और अंदर झुनझुनी की भी शिकायत कर रहे हैं। यह एक ऐसा लक्षण है जो अभी तक वायरस से जुड़ा नहीं है। यदि आपको कान में दर्द, कान का बजना, सीटी जैसी सनसनी, कान में झुनझुनी महसूस हो रही है, तो यह कोरोना वायरस के लक्षण का संकेत हो सकता है और इससे भी बुरी बात यह है कि यह पूरी तरह से टीकाकरण वाले रोगियों में सबसे अधिक दिखाई दे रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 संक्रमण का असर बच्चों की तुलना में वयस्कों पर अधिक है। बच्चों में न तो मृत्यु दर ज्यादा है और न ही उनमें गंभीर लक्षण विकसित हो रहे हैं। यह तथ्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों के द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है। 12 से 18 वर्ष की आयु के 197 ऐसे रोगियों पर अध्ययन किया गया जो, पहली व दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए। अध्ययन में पता चला है कि अस्पताल में भर्ती 84.6% किशोरों को बहुत ही हल्के लक्षण प्रतीत हुए। वहीं 9.1% को मध्यम और 6.3% में गंभीर लक्षण विकसित हुए। इसमें बुखार और खांसी सबसे आम लक्षण थे, जिनमें से 14.9% को यह महसूस हुए। वहीं 11.5% बच्चों के शरीर में दर्द था, 10.4% बच्चों को कमजोरी महसूस हुई। सिर्फ 6.2% बच्चे ही ऐसे सामने आए, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। जबकि, उसी अस्पताल में दूसरी लहर के दौरान 50.7 प्रतिशत वयस्कों को सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई। अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित सिर्फ 7.3% बच्चों को ऑक्सीजन की आवश्यकता महसूस हुई, जबकि 2.8% को ऑक्सीजन के उच्च प्रवाह की आवश्यकता पड़ी। 24.1% बच्चों को स्टेरॉयड और 16.9% बच्चों को एंटीवायरल दवा रेमेडिसविर दी गई। जिस अस्पताल में यह अध्ययन किया गया वहां कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किशोरों की मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत रही। जबकि, वयस्कों की मृत्यु दर 19.1% रही, जो बच्चों की तुलना में छह गुना अधिक है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोविड-19 की तीसरी लहर में दूसरी लहर की तुलना में काफी कम मौतें हुई हैं और टीकाकारण की उच्च दर के बाद मामलों में वर्तमान वृद्धि गंभीर बीमारी या मौत का कारण नहीं बन रही है। सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सरकार ने कहा कि भारत के 94 प्रतिशत वयस्कों को कोविड टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है, जबकि 72 प्रतिशत लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। सरकार ने कहा कि 15-18 वर्ष आयु वर्ग में 52 प्रतिशत ने अपनी कोविड टीके की पहली खुराक प्राप्त कर ली है। उसने कहा कि देश के 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड के 50,000 से अधिक उपचाराधीन मरीज हैं और 515 जिलों में साप्ताहिक संक्रमण दर पांच प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। दिल्ली की कोविड स्थिति पर सरकार ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या काफी कम है। सरकार ने कहा कि दिल्ली में 11-18 आयु वर्ग के लोगों में ऊपरी श्वास नलिका में कोरोना वायरस संक्रमण के सामान्य लक्षण हैं जबकि कोविड के लगभग 99 प्रतिशत वयस्क मरीजों में बुखार, खांसी, गले में खराश के सामान्य लक्षण हैं।
एबीएन डेस्क। भारत में कोरोना वायरस टीकाकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप (NTAGI) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने एलान किया है कि भारत में 12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण मार्च में शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि तब तक 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण पूरा हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में अगले चरण में बच्चों को टीका लगाए जाने की उम्मीद है। डॉ अरोड़ा के मुताबिक, देश में 15-18 आयु वर्ग के 7.5 करोड़ लोग हैं। इनमें से 3.45 करोड़ किशोरों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है। चूंकि, किशोरों को कोवाक्सिन लगाई जा रही है, इसलिए 28 से 42 दिन के अंदर उन्हें टीके की दूसरी खुराक भी दे दी जाएगी। यानी 15-18 आयु वर्ग का वैक्सिनेशन मार्च तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद 12 से 14 साल वाले बच्चों का टीकाकरण पूरे जोर-शोर से शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, 15 से 18 आयु वर्ग के किशोर टीकाकरण प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और टीकाकरण की इस गति को देखते हुए इस आयु वर्ग के बाकी लाभार्थियों को जनवरी के अंत तक पहली खुराक लग जाने की संभावना है और उसके बाद उनकी दूसरी खुराक फरवरी के अंत तक दिए जाने की उम्मीद है। अरोड़ा ने कहा कि 15-18 वर्ष के आयु वर्ग का टीकाकरण हो जाने के बाद, सरकार मार्च में 12-14 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान शुरू करने के बारे में नीतिगत फैसला कर सकती है। उन्होंने बताया कि 12-14 वर्ष के आयु वर्ग में अनुमानित आबादी 7.5 करोड़ है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमितों को नयी समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह समस्या खांसी और कफ की है। बुखार तो दो दिनों में उतर जा रहा है, लेकिन खांसी निगेटिव होने के बावजूद रहती है। चिकित्सकों का मानना है कि मौसम के बदलने से खांसी और कफ कायम है। उनके अनुसार इसमें सर्वाधिक आवश्यकता परहेज की है। बुखार उतरने के बाद हमें लगता है कि हम ठीक हो गए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। बुखार में भी जिस तरह से परहेज कर रहे थे, उसके बाद कम से कम पांच दिनों तक परहेज की जरूरत है। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकतर मरीजों को वे लोग कम समय के लिए ही दवा देते हैं, क्योंकि वायरल की एक अवधि है। मरीजों में सहनशीलता नहीं है। वे लोग चिकित्सक से दिखाने या सलाह लेने के बाद मेडिकल स्टोर में जाकर अपने मन से दवा ले रहे हैं, जो उनके लिए ठीक नहीं। कुछ संक्रमितों में यह देखने को मिल रहा है कि उनमें सीआरपी व डी डीमर जल्दी कम नहीं हो रहा है, लेकिन ऐसे मरीजों की संख्या कम है। कुछ लोग स्वत: सीआरपी, सीबीसी और डी डाइमर की जांच करा ले रहे हैं, जो ठीक नहीं। वे लोग कोरोना की दूसरी लहर से डरे हुए हैं। इससे बचने की जरूरत है। ठीक हुए मरीजों की आपबीती अब तक खांसी है। पहले ही दिन से थी। बाद में जांच कराने पर पॉजिटिव निकला। बुखार दो दिनों में ठीक हो गया, लेकिन खंसी अब भी है।
एबीएन डेस्क। महाराष्ट्र में वैक्सीनेशन कितने लोगों की हो चुकी है इस सवाल का जवाब देते हुए राज्य के वैक्सीन ऑफिसर डॉ सचिन देसाई ने बताया है कि महाराष्ट्र में किशोरों को लगाई जाने वाली कोविड वैक्सीन इन दिनों कम पड़ गई है। अब तक राज्य में 90 प्रतिशत लोगों को कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ लग चुकी है, वहीं 62 प्रतिशत लोगों को दूसरी डोज़ भी लगाई जा चुकी है। अभी महाराष्ट्र के 94 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें पहली डोज़ नहीं लगी है और दूसरा डोज़ की अनुमति होने के बावजूद भी 1 करोड़ 13 लाख लोगों ने दूसरी डोज़ नहीं ली है। अब तक 15 से 18 साल के 60 लाख किशोरों को वैक्सीन की डोज़ लगाई जानी थी लेकिन अभी केवल 24 लाख किशोरों को ही वैक्सीन लगाई गई है। उन्होंने बताया कि रोजाना 4.5 लाख डोज़ दी जा चुकी हैं और मौजूदा वैक्सीन स्टॉक 20 दिनों तक चल सकता है। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से कोविशील्ड के 50 लाख डोज़ और कोवैक्सीन के 40 लाख डोज़ मांगे थे, इस महीने 13 लाख कोवैक्सीन डोज़ मिली हैं।
एबीएन डेस्क। कोरोना का नया संक्रमण देश में तेजी से पैर पसार रहा है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि ओमीक्रोन वेरिएंट डेल्टा की तुलना में बहुत हल्का है पर इसे रोका नहीं जा सकता है, उनका कहना है कि ओमीक्रोन से हर कोई संक्रमित हो सकता है, इससे बचा नहीं जा सकता। देश के शीर्ष महामारी विज्ञानी और सरकारी विशेषज्ञ के अनुसार, कोविड अब भयावह बीमारी नहीं है क्योंकि नया वेरिएंट घातक नहीं, बल्कि हल्का है। उन्होंने कहा कि ओमीक्रोन से बहुत कम रोगी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं और देश इससे निपट सकता है। ICMR के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष महामारी विशेषज्ञ डॉ जयप्रकाश मुलीयिल के हवाले से कहा गया है कि हममें से ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि वह ओमिक्राॅन से संक्रमित हो गए हैं। शायद 80 प्रतिशत से अधिक को यह भी नहीं पता चलेगा कि वे इससे संक्रमित हुए थे। इससे पहले पिछले दो दिनों क दौरान अलग-अलग साक्षात्कारों में दो IIT प्रोफेसरों ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा था कि देश में एक तरह की हर्ड इम्युनिटी बन गई है और वर्तमान लहर उम्मीद से जल्द खत्म हो जाएगी। मुंबई और कुछ अन्य शहरों में लहर कम हो रही है। ICMR की जांच नीति में संशोधन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वायरस केवल दो दिनों में संक्रमण को दोगुना कर देता है, इससे जांच का नतीजा आने से पहले ही संक्रमित व्यक्ति इसे बड़ी संख्या में लोगों को फैला चुका होता है। आप जब जांच करते हैं तब भी आप बहुत पीछे चल रहे होते हैं। वहीं इस बीच एक नए अध्ययन में कहा गया है कि भारत में टीके लगाए जाने से पहले ही 85 प्रतिशत भारतीय कोविड से संक्रमित हो चुके थे। लिहाजा, टीके का पहला डोज व्यवहारिक रूप से पहली बूस्टर डोज था। बताते चलें कि बुधवार को कोरोना के कुल 1.94 लाख नए मामले देशभर में आये हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश को मेडिकल ऑक्सीजन के संबंध में इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखने की सलाह दी। स्वास्थ्य मंत्री की ये सलाह ऐसे समय में आई है जब देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के चलते कोविड-19 संक्रमण के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है। पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के साथ एक कोविड-19 समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए, मंडाविया ने अपने समकक्षों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी प्रकार के ऑक्सीजन बुनियादी ढांचे की जांच इस तरह की जाए कि यह चलने की स्थिति में हो।मंडाविया ने कहा, जैसा कि हम महामारी के इस उछाल से लड़ रहे हैं ऐसे में हमारी तरफ से तैयारियों में कोई चूक न हो। केंद्र और राज्यों के बीच समग्र तालमेल निर्बाध और प्रभावी महामारी प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्यों से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के वास्ते नियमित समीक्षा करने, हर जिले में टेलीकंसल्टेशन हब स्थापित करने और उपलब्ध बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में व्यापक जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। बैठक दोपहर 3:30 बजे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ हुई। इससे पहले दिन में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपने समकक्षों को अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में तेजी से बदलाव की चेतावनी दी थी।उन्होंने कहा कि वर्तमान उछाल में पांच से 10 प्रतिशत सक्रिय मामलों में अब तक अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है। हालांकि, स्थिति तेजी से बदल रही है और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी तेजी से बदल सकती है।
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