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Published / 2021-12-16 15:27:48
70 गुना तेजी से संक्रमित कर रहा ओमिक्रोन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस का ओमिक्रोन स्वरूप, डेल्टा और कोविड-19 के मूल स्वरूप की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है लेकिन इससे होने वाले रोग की गंभीरता काफी कम है। एक अध्ययन में यह कहा गया है। अध्ययन में इस बारे में प्रथम सूचना दी गई है कि ओमिक्रोन स्वरूप किस तरह से मानव के श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। हांगकांग विश्वविद्यालय के अनुसंधानकतार्ओं ने पाया कि ओमीक्रोन, डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में 70 गुना तेजी से संक्रमित करता है। अध्ययन से यह भी प्रदर्शित होता है कि फेफड़े में ओमीक्रोन से संक्रमण मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में काफी कम है, जिससे रोग की गंभीरता कम होने का संकेत मिलता है। अनुसंधानकतार्ओं ने ओमीक्रोन का अलग तरह से संचरण होने और इससे होने वाले रोग की गंभीरता सार्स-कोवी-2 के अन्य स्वरूपों से भिन्न रहने को समझने के लिए एक्स-वीवो कल्चर का उपयोग किया। यह पद्धति फेफड़े के इलाज के लिए फेफड़े से निकाले गये उत्तक का उपयोग करती है। हांगकांग विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर माइकल चान ची वाई और उनकी टीम ने ओमीक्रोन को अन्य स्वरूपों से सफलतापूर्वक अलग किया तथा अन्य स्वरूप से होने वाले संक्रमण की तुलना मूल सार्स-कोवी-2 से की। टीम ने पाया कि ओमिक्रोन मानव में मूल सार्स-कोवी-2 और डेल्टा स्वरूप की तुलना में कहीं अधिक तेजी से प्रतिकृति बनाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि संक्रमण के 24 घंटे बाद ओमिक्रोन स्वरूप ने डेल्टा और मूल सार्स-कोवी-2 की तुलना में करीब 70 गुना अधिक प्रतिकृति बनाई। हालांकि, ओमिक्रोन ने मानव के फेफड़े की कोशिका में मूल सार्स-कोवी-2 वायरस की तुलना में 10 गुना से भी कम प्रतिकृति बनाई, जिससे पता चलता है कि इससे होने वाले रोग की गंभीरता कम है। चान ने एक बयान में कहा कि यह जिक्र करना जरूरी है कि मानव में रोग की गंभीरता न सिर्फ वायरस की प्रतिकृति द्वारा निर्धारित होती है बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा से भी निर्धारित होती है।

Published / 2021-12-15 12:04:21
ओमिक्रॉन का खौफ : डब्ल्यूएचओ ने कहा- वैक्सीन को कर सकती है बेअसर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओमिक्रॉन को लेकर दुनियाभर में डर के साथ संक्रमण भी तेजी से फैलता जा रहा है। बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि कोविड-19 के टीके ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कम असरदार हो सकते हैं। टीके की दोनों खुराक के बावजूद शख्स में कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में कहा कि ओमिक्रॉन वैक्सीन या कोरोना संक्रमण से ठीक होकर शरीर में पैदा होने वाली एंटीबॉडी से कम प्रभावी नहीं हो सकता है। हालांकि अभी डब्ल्यूएचओ का ये भी कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट को अभी बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक डाटा की आवश्यकता है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने मंगलवार को एक आॅनलाइन ब्रीफिंग में की गई टिप्पणी के अनुसार, कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन चिंता का विषय है। कोरोना के अन्य वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन ज्यादा संक्रामक और जोखिमभरा है। अप्रैल में डेल्टा संस्करण को चिंता के एक प्रकार के रूप में वगीर्कृत किए जाने के बाद पहली बार जीआइएसएआइडी वैश्विक विज्ञान डेटाबेस पर पंजीकृत डेल्टा अनुक्रमों का प्रतिशत इस सप्ताह चिंता के अन्य रूपों की तुलना में कम हो गया है।

Published / 2021-12-15 11:57:37
ठंड में फेशियल पैरालिसिस का खतरा ज्यादा : डॉ पीके वर्मा

गढ़वा। सदर अस्पताल के सामने स्थित चैधरी जेनरल एंड लकवा हॉस्पिटल परिसर में हृदय, मधुमेह, नस एवं लकवा रोग विशेषज्ञ डॉ पीके वर्मा ने लगभग 45 मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर उचित परामर्श दिया। जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, माइग्रेन, पैरालाइसिस, साइटिका, गठिया, लंबर एंड सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, जोड़ों में दर्द, छाती में दर्द, नींद न आना, घबराहट, गैस्ट्राइटिस जैसी कई विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज शामिल थे। मौके पर डॉ वर्मा ने कहा कि एक खास बीमारी बेल पाल्सी अर्थात फेशियल पैरालिसिस (लकवा के कारण चेहरा टेढ़ा होना) है जिसका खतरा ठंड में ज्यादा होता है। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज के मरीजों और गर्भवती महिलाओं में बेल्स पाल्सी का जोखिम अधिक होता है। परिवार में पहले से किसी को है तो अन्य सदस्यों को भी हो सकती है। अगर सही समय पर यानी साढ़े चार घण्टों के अंदर इलाज शुरू हो जाये तो पूरी तरह ठीक हो जाती है। बीमारियों से बचने के लिए ठंड से बचने की जरूरत है, गर्म पानी एवं भोजन का सेवन करें, गर्म कपड़े पहने। हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ कुलदेव चैधरी ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हूं। जिला मुख्यालय में पंचकर्म एवं लकवा हॉस्पिटल खुलने से मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है। मौके पर संजय दुबे, शिवकुमार दूदून, बिस्मिला अंसारी, फैयाज अंसारी, रीना गुप्ता, अंजली कुमारी, प्रियंका यादव, अमरजीत चैधरी आदि लोग उपस्थित थे।

Published / 2021-12-02 12:34:26
ओमिक्रॉन अलर्ट : देश में कोरोना के नये वैरिएंट की एंट्री, कर्नाटक में मिले दो मामले

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया के कई देशों में सामने आ रहे कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने दहशत मचा रखी है। अब देश में भी ओमिक्रॉन की एंट्री हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में ओमिक्रॉन के दो मामले सामने आए हैं। दोनों मामले कर्नाटक मे मिले हैं। इनमें एक संक्रमित की उम्र 66 और दूसरे की 46 साल है। उनके सभी संपर्कों की पहचान कर ली गई है और उनकी निगरानी की जा रही है। प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। बुधवार रात मिली दोनों की रिपोर्ट : इनकी रिपोर्ट बुधवार को देर रात मिली। दोनों का इलाज चल रहा है और उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि हमें डर या भय का माहौल नहीं बनाना है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वैक्सीन को अपनाना है। सरकार हालत पर नजर बनाए हुए है। आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा स्थापित 37 प्रयोगशालाओं के इंसाकॉग कंसोर्टियम के जीनोम सीक्वेसिंग के जरिए कर्नाटक में अब तक ओमिक्रॉन के दो मामलों का पता चला है। हमें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता बेहद जरूरी है। कोविड सम्मत व्यवहार की आवश्यकता है। अब तक गंभीर लक्षण नहीं मिले : इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट का अब तक कोई गंभीर लक्षण नहीं मिला है। सभी ओमिक्रॉन संबंधित मामलों में अब तक हल्के लक्षण पाए गए हैं। देश और दुनिया भर में अब तक ऐसे सभी मामलों में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखा है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि सामने आ रहे सबूतों का अध्ययन किया जा रहा है। लगभग 29 देशों में अब तक ओमिक्रॉन वैरिएंट के 373 मामले दर्ज किए गए हैं।

Published / 2021-12-01 15:05:50
वैज्ञानिक का खुलासा - नये वेरिएंट ओमिक्रॉन को देख पैरों तले खिसक गयी थी जमीन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दक्षिण अफ्रीका से दुनिया के कई देशों में फैले कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर एक बार फिर से दुनिया भर में हाहाकार मच गई है। नए वैरिएंट का पता लगाने वाली दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी प्राइवेट टेस्टिंग लैब लैंसेट लैबोरेटरी की प्रमुख वैज्ञानिक राक्वेल वियाना का एक बड़ा बयान सामने आया है। दरअसल, उन्होंने बतावैज्ञानिक का खुलासा - नये वेरिएंट ओमिक्रॉन को देख पैरों तले खिसक गयी थी जमीन या कि जब उन्होंने जिनोम सिक्वेंसिंग के दौरान नए वैरिएंट के म्यूटेशंस को देखा तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। नए वैरिएंट को देखकर आश्चयर्चकित हो गई थीं साईंटिस्ट : नए वैरिएंट को देखकर वह आश्चयर्चकित हो गई थीं। वियाना ने बताया कि सबसे पहले 19 नवंबर को जब वे कोरोना वायरस के 8 नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग कर रही थीं तो वायरस के म्यूटेट होने की रफ्तार को देखकर वह बहुत हैरान हो गई थीं। मुझे मेरी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था : वियाना ने ने बताया कि मुझे मेरी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं खुद से ही सवाल कर रही थी कि कहीं मैंने प्रोसेस में कोई गलती तो नहीं कर दी, मेरा दिल बैठ रहा था, क्योंकि मुझे लग रहा था कि अगर मेरी खोज सही निकली तो मेरे सामने जो सैम्पल थे, उनका बहुत बड़ा असर होने वाला था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उन्हें कैसे बताऊं कि मैंने क्या खोजा है उन्होंने तुरंत जोहान्सबर्ग स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ कम्यूनिकेबल डिजीजेज में अपने साथी और जीन सीक्वेंसर डेनियल अमोआको को फोन किया और बताया कि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उन्हें कैसे बताऊं कि मैंने क्या खोजा है उन्होंने बताया कि मैंने अमोआको से कहा कि मुझे लग रहा है कि यह नया वेरिएंट है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में मिले इस यह नया वेरिएंट पूर्ण टीकाकरण करा चुकी आबादी में भी तेजी से फैल सकता है, इस डर के कारण अन्य प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। अमोआको ने कहा कि 32 अन्य नमूनों की जांच के बाद, यह स्पष्ट था, यह डरावना था, इसके बाद 24 नवंबर को इसके बारे में एनआईसीडी अधिकारियों और विभाग ने डब्ल्यूएचओ को जानकारी दी गई।

Published / 2021-11-29 01:57:00
वैक्सीन पर भारी पड़ेगा कोरोना वायरस का ओमिक्रोन वेरिएंट? - डॉ गुलेरिया

एबीएन डेस्क। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को लेकर दुनिया भर में लोग दहशत में हैं। कुछ ऐसे ही हालात भारत में भी हैं। सरकार इस नए वेरिएंट को लेकर गंभीरता से काम कर रही है क्योंकि कई देशों में इससे संक्रमण फैलना शुरू हो गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रमुख डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना वायरस के नए ओमिक्रोन स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में 30 से अधिक परिवर्तन मिले हैं, जो इसे प्रतिरक्षा तंत्र से बचने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है और इसलिए इसके खिलाफ टीकों की प्रभावशीलता का मूल्याकंन गंभीरता से करने की जरूरत है।स्पाइक प्रोटीन की उपस्थिति पोषक कोशिका में वायरस के प्रवेश को आसान बनाती है और इसे फैलने देने और संक्रमण पैदा करने के लिए जिम्मेदार है। एम्स के निदेशक डॉ गुलेरिया ने बताया, कोरोना वायरस के नए स्वरूप में स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में कथित तौर पर 30 से अधिक उत्परिवर्तन हुए हैं और इसलिए इसके प्रतिरक्षा तंत्र से बच निकलने की क्षमता विकसित करने की संभावना है। अधिकांश टीके स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाकर काम करते हैं, इसलिए स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में इतने सारे परिवर्तन से कोविड-19 टीकों की प्रभावशीलता कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, भारत में प्रयुक्त होने सहित अन्य टीकों की प्रभावशीलता का गंभीर मूल्यांकन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भविष्य की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके प्रसार, तीव्रता और प्रतिरक्षण क्षमता से बच निकलने के सामर्थ्य पर अधिक जानकारी में क्या सामने आता है। अधिकारियों ने कहा कि भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्टिया इनसाकोग कोरोना वायरस के नए स्वरूप बी.1.1.1.529 पर बारीकी से नज़र रख रहा है और देश में इसकी उपस्थिति का अभी तक पता नहीं चला है। डॉ गुलेरिया ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और उस क्षेत्र में जहां मामलों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है, दोनों के लिए बहुत सतर्क रहने और आक्रामक निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, साथ ही, हमें सभी से इमानदारी से कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करने के लिए कहना चाहिए और अपनी सुरक्षा को कम नहीं करना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लोगों को टीके की दोनों खुराकें मिलें और जिन लोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उन्हें इसे लेने के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

Published / 2021-11-27 07:26:26
WHO ने जताई चिंता : कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन के आगे वैक्सीन व बूस्टर डोज सब फेल !

एबीएन डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) की एक सलाहकार समिति ने दक्षिण अफ्रीका में पहली बार सामने आए कोरोना वायरस के नए वैरिएंट को बेहद तेजी से फैलने वाला चिंताजनक स्वरूप करार दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना के इस नए वैरिएंट के आगे वैक्सीन व बूस्टर डोज सब फेल हो सकते हैं। WHO ने ग्रीक वर्णमाला के तहत इसे ओमीक्रॉन नाम दिया है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की ओर से शुक्रवार को की गई यह घोषणा पिछले कुछ महीनो में वायरस के नए प्रकार के वर्गीकरण में पहली बार की गई है। इसी वर्ग में कोरोना वायरस के डेल्टा प्रकार को भी रखा गया था जिसका प्रसार दुनियाभर में हुआ था। तेजी से फैलने वाले वैरिएंट के सामने आने के बाद से यह डर बढ़ गया है कि यह संभावित रूप से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ओमीक्रॉन की वजह से कई देशों को प्रभावित क्षेत्रों से यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी से गिरावट आई है। इस वैरिएंट की घोषणा गुरुवार को साउथ अफ्रीका में वैज्ञानिकों ने की थी। अब यह दो अन्य देशों इजरायल और बेल्जियम में भी पाया गया है। इससे पहले बोत्सवाना और हांगकांग में इसके मामले सामने आ चुके हैं। WHO का कहना है कि अब तक वैरिएंट के लगभग 100 जीनोम अनुक्रमों की सूचना मिली है। गौर करने वाली बात यह है कि कई संक्रमित व्यक्तियों को पूरी तरह से वैक्सीन लग चुकी थी। इसमें इजरायल का एक व्यक्ति भी शामिल है जिसे वैक्सीन की बूस्टर डोज भी दी जा चुकी थी। भारत ने शुक्रवार को 15 दिसंबर से नियमित अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी। अब तक के वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि नया वैरिएंट डेल्टा सहित किसी भी अन्य स्वरूप की तुलना में तेजी से फैल रहा है। इसका सबूत टीका लगवा चुके लोगों का संक्रमण की चपेट में आना है। यह संकेत है कि इस वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की प्रभाविकता पर भी असर पड़ सकता है।

Published / 2021-11-18 03:02:31
शोध : चाय-कॉफी का सेवन घटा सकता है आघात और मस्तिष्क रोग का जोखिम

एबीएन डेस्क। चाय-कॉफी से होने वाले नुकसान तो अकसर सुर्खियां बनते हैं लेकिन अब इनके शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। एक शोध में सामने आया है कि चाय-कॉफी की चुस्कियां आघात और डिमेंशिया (मस्तिष्क रोग) का जोखिम घटा सकती हैं। फायदेमंद चुस्कियां : सेवन करने वालों में 32% तक कम मिला खतरा चीन की तिआंजिन मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा जारी अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने दिनभर में दो-तीन कप कॉफी या तीन-पांच कप चाय या फिर दोनों के चार-छह कप पीए, उनमें आघात व डिमेंशिया का जोखिम सबसे कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने 10 से 14 साल की अवधि में 50 से 74 साल के 3.60 लाख प्रतिभागियों पर यह अध्ययन किया है। अध्ययन में चाय और कॉफी का संतुलित सेवन करने वाले लोगों में डिमेंशिया का 28 फीसदी और आघात का 32 फीसदी कम जोखिम मिला। छह कप से ज्यादा बढ़ सकता है खतरा : वहीं, कुछ अध्ययन यह भी बता चुके हैं कि रोजाना तीन कप कॉफी पीना अल्जाइमर का खतरा घटा सकता है। हालांकि, एक दिन में छह कप से ज्यादा कॉफी पीने वालों में डिमेंशिया या मस्तिष्क विकारों का जोखिम बढ़ भी सकता है।

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