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Published / 2022-02-12 14:12:47
5 से 15 साल के बच्चों को जल्द लगेगा टीका

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार विशेषज्ञों से सिफारिश मिलने पर जल्द से जल्द पांच से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान शुरू करेगी। मंडाविया ने कहा कि विशेषज्ञों के समूह ने अभी तक इस आयु वर्ग के टीकाकरण पर कोई सिफारिश नहीं दी है। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया गुजरात के गांधीनगर में भाजपा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने यहां आए थे। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कब और किस आयु वर्ग को टीके की खुराक देनी है, इसका फैसला वैज्ञानिकों के समूह की सिफारिश के आधार पर लिया जाता है। हमने एक सप्ताह के भीतर एहतियाती समूह के लिए उसकी सिफारिश को लागू किया था। पांच से 15 वर्ष आयु वर्ग के लिए भी उसकी सिफारिश मिलने पर उसे निश्चित रूप से लागू करेंगे। देश में 15-18 वर्ष आयु वर्ग के लिए कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान पिछले महीने शुरू हुआ था। पिछले साल जुलाई-अगस्त में सीरो सर्वेक्षण से पता चला कि 67 प्रतिशत बच्चों में भी एंटीबॉडीज बनीं और बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं दिए।

Published / 2022-02-11 13:30:46
हमें स्वस्थ और रोगमुक्त करेगा यूनानी चिकित्सा पद्धति

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक- 11.02.2022 को आयुष निदेशालय, नामकुम में यूनानी दिवस मनाया गया जिसमें जनाब हकीम अजमल खान को याद किया गया। हकीम अजमल खान का जन्म 11 फरवरी 1868 को हुआ था, उन्ही को याद कर 11 फरवरी को यूनानी दिवस प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।  भारत सरकार आयुष मंत्रालय द्वारा 11 फरवरी को 2017 से यूनानी दिवस मनाया जाने लगा है। यूनानी दिवस मनाने का उद्देश्य-यूनानी चिकित्सा जो एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिससे मूल रूप से औषधिय पौधो के माध्यम से ईलाज किया जाता है। इस पद्धति के बताये गये सिद्वान्तों से हम स्वस्थ एवं रोग मुक्त रह सकते हैं। साथ ही राज्य की आम जनता को विलुप्त हो रहे यूनानी पद्धति के बारे में लोगो को जागरूक करना है। हकीम अजमल खान आजीवन यूनानी चिकित्सा पद्धति के विकास के लिए संघर्ष करतें रहे। उन्होने करोल बाग दिल्ली में आयुर्वेदिक यूनानी कालेज की स्थापना किया। वे कांग्रेस के निर्वाचित अध्यक्ष थे। मुस्लिम लीग तथा जामिया इसलामिया विश्वविद्यालय के संस्थापक थे।  कार्यशाला को संबोधित करते हुए डा0 फजलुस समी, निदेशक आयुष ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के महत्व को बताते हुए गुड हेल्थ एवं वेलनेस पर प्रकाश डाला साथ ही यूनानी पद्धति का जीवन में प्रसन्नता, सम्पन्न्ता के बारे में जानकारी दी। साथ ही साथ राज्य योग केंद्र रांची में भी डॉ मुकुल कुमार दिक्षित के द्वारा यूनानी दिवस का आयोजन किया गया। मंच संचालन डॉ अमरेन्द्र कुमार पाठक ने किया, डॉ मुकुल कुमार दिक्षित, डॉ जफर इकबाल, डॉ अनुज कुमार मंडल, विमल कुमार केशरी, डॉ सच्चिदानंद सिंह, डॉ अशोक पासवान, मो अबुतलहा अलतमश, अमन कुमार सिंह, डॉ अर्चना कुमारी एवं निदेशालय के सभी कर्मी उपस्थित थे।

Published / 2022-02-09 14:15:54
अभी आयेंगे कोरोना के कई और वैरिएंट : डब्ल्यूएचओ

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से कम हो रहे हैं और ओमिक्रॉन वैरिएंट, अन्य देशों की अपेक्षा भारत में कम प्रभावी रहा है। ऐसे में अगर आप सोच रहे हैं कि कोरोना का यह अंतिम वैरिएंट था और अब इस महामारी से हमें आजादी मिल गई है, तो आपकी सोच गलत साबित हो सकती है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिकों की ओर से दावा किया गया है कि नए वैरिएंट के सामने आने का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। डब्ल्यूएचओ की कोविड-19 तकनीकी प्रमुख मारिया वॉन बताती हैं कि कोरोना का नया वैरिएंट और भी ज्यादा प्रभावी होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक, नया वैरिएंट और भी ज्यादा संक्रामक होगा, क्योंकि यह मौजूद वैरिएंट ओमिक्रॉन को ओवरटेक करके बनेगा। यह वैरिंएट गंभीर व मध्यम कुछ भी हो सकता है। अगर यह ज्यादा प्रभावी रहा तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी चकमा दे सकता है। खुद को बदलता रहता है वायरस : कोई भी वायरस प्रकृति में सर्वाइव करने के लिए खुद में बदलाव करता रहता है। हालांकि, कुछ वायरस ऐसे भी होते हैं, जिनमें काफी कम बदलाव देखने को मिलते हैं, लेकिन कुछ वायरस प्रतिरक्षा व वैक्सीन के अनुसार खुद को बदलते हैं। कोरोना के डेल्टा और ओमिक्रॉन ऐसे ही वैरिएंट थे। ऐसे में अगला वैरिएंट खतरनाक साबित हो सकता है। पांच लाख लोगों को लील का ओमिक्रॉन : भले ही ओमिक्रॉन का असर भारत में बहुत ज्यादा न देखने को मिला हो, लेकिन यह अन्य देशों में बहुत अधिक प्रभावी रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन हऌड के अनुसार नवंबर में ओमिक्रॉन को चिंताजनक वैरिएंट घोषित किया गया था। इसके बाद से पूरी दुनिया में इससे पांच लाख मौतें हो चुकी हैं। यह अब तक 13 करोड़ लोगों को संक्रमित कर चुका है।ओमिक्रॉन के बारे में शुरू से ही कहा गया था कि यह बेहद संक्रामक है। यह अब भी दुनियाभर में सक्रिय है। हालांकि इसने भारत में डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन पूरी दुनिया के मामलों को देखें तो इसके पीड़ितों की संख्या बहुत ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ के इंसीडेंट मैनेजर अब्दी महमूद ने इससे हुई मौतों को लेकर अफसोस जताया है। कई देशों में अभी नहीं आया ओमिक्रॉन का पीक : मारिया कोविड-19 पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव का कहना है कि ओमिक्रॉन के सामने आए मामलों की संख्या चौंकाने वाली है। यह संक्रमण के मामले में पिछले वैरिएंट के बराबर नजर आ रहा है। जबकि अभी कई देशों में इसका पीक आना बाकी है। पिछले लगातार कई हफ्तों में इससे मरने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है, इससे वह बेहद चिंतित है।

Published / 2022-02-09 03:08:14
ओमिक्रोन : नवंबर के बाद से पांच लाख मौतें, 13 करोड़ संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन भी मनुष्य का बड़ा दुश्मन निकला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के अनुसार नवंबर में ओमिक्रॉन को चिंताजनक वैरिएंट घोषित किया गया था। इसके बाद से पूरी दुनिया में इससे पांच लाख मौतें हो चुकी हैं। यह अब तक 13 करोड़ लोगों को संक्रमित कर चुका है। ओमिक्रॉन के बारे में शुरू से ही कहा गया था कि यह बेहद संक्रामक है। यह अब भी दुनियाभर में सक्रिय है। हालांकि इसने भारत में डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन पूरी दुनिया के मामलों को देखें तो इसके पीड़ितों की संख्या बहुत ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ के इंसीडेंट मैनेजर अब्दी महमूद ने इससे हुई मौतों को लेकर अफसोस जताया है। ओमिक्रॉन को लेकर भारत व दुनियाभर में पाया गया है कि इससे उन लोगों की मौत ज्यादा हुई है, जिन्होंने कोरोना रोधी वैक्सीन नहीं लगवाए थे। इससे संक्रमित उन्हीं लोगों को अस्पताल में भर्ती करने भी जरूरत पड़ी, जिन्होंने टीकों की खुराक नहीं ली थी। डब्ल्यूएचओ के मैनेजर महमूद ने सोशल मीडिया चैनलों से चर्चा में कहा कि ओमिक्रॉन अब डेल्टा के मुकाबले का वैरिएंट बन चुका है, हालांकि इससे संक्रमित लोगों को कम गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है, लेकिन वैक्सीन ईजाद होने के बाद भी पांच लाख लोगों की मौत होना अफसोजनक है। सभी लोग कह रहे हैं कि ओमिक्रॉन हल्का है, लेकिन वे भूल रहे हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसे "चिंताजनक वैरिएंट" घोषित किए जाने के बाद से अब तक यह पांच लाख लोगों की जान ले चुका है। कोविड-19 पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव का कहना है कि ओमिक्रॉन के सामने आए मामलों की संख्या चौंकाने वाली है। यह संक्रमण के मामले में पिछले वैरिएंट के बराबर नजर आ रहा है। जबकि अभी कई देशों में इसका पीक आना बाकी है। पिछले लगातार कई हफ्तों में इससे मरने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है, इससे वह बेहद चिंतित है।

Published / 2022-02-05 07:13:40
स्पुतनिक लाइट टीके के आपातकालीन उपयोग की सरकारी पैनल ने की सिफारिश

एबीएन डेस्क। भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के एक विशेषज्ञ पैनल ने शुक्रवार को, कोविड-19 रोधी टीके "स्पुतनिक लाइट" के सीमित आपातकालीन उपयोग की सिफारिश की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न नियामक प्रावधानों की शर्तो के तहत यह सुझाव दिया गया है। स्पुतनिक लाइट, स्पुतनिक-वी के "कम्पोनेंट-1" की तरह ही है। डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज के अनुसार, स्पुतनिक लाइट को अर्जेंटीना और रूस समेत 29 देशों में मान्यता प्राप्त है। सिफारिश को अंतिम मंजूरी के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के पास भेजा गया है।

Published / 2022-02-03 08:40:13
ब्लड कैंसर के मरीजों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा

एबीएन हेल्थ डेस्क। बड़े बुजुर्गों से सुना करते थे कि तंदरूस्ती हजार नियामत है, लेकिन पिछले दो वर्ष से दुनिया में बीमारी के अलावा और किसी बात पर चर्चा नहीं हो रही। तंदरूस्ती तो छोड़िए, जिंदा रहना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है, ऐसे में अगर किसी को कैंसर जैसी नामुराद बीमारी हो तो उसके लिए जिंदगी की डोर को थामे रखना और भी मुश्किल हो जाता है। हाल के एक शोध से पता चला है कि अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में ब्लड कैंसर के रोगियों को कोविड की चपेट में आने का जोखिम 57 प्रतिशत तक ज्यादा होता है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसर ठोस ट्यूमर वाले कैंसर रोगियों की तुलना में रक्त कैंसर वाले लोगों को लंबे समय तक संक्रमण और कोविड-19 से मृत्यु का अधिक जोखिम हो सकता है। शोध के मुताबिक ब्लड कैंसर के रोगियों में अन्य प्रकार के कैंसर वाले रोगियों की तुलना में कोविड-19 का जोखिम 57 प्रतिशत अधिक था। इसमें भी ब्लड कैंसर या ल्युकेमिया, मॉयलोमा के रोगी सर्वाधिक चपेट में आ रहे हैं। महामारी के इस दौर में यूं तो सभी मुश्किल में हैं, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कतें कैंसर के मरीजों को हो रही हैं। यही नहीं कोरोना के कारण कैंसर पीड़ितों के इलाज और उनके देखभाल में भी काफी बदलाव आया है। इस बाबत डॉ राजित चानना, सलाहकार, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, दिल्ली ने कहा कि कैंसर पीड़ित के साथ ही उनकी देखभाल करने वालों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। इस संबंध में अमेरिका के न्यूयार्क स्थित मोंडफोर मेडिकल सेंटर में विषाणु विज्ञानियों का कैंसर मरीजों पर किया गया शोध काबिलेगौर है। अध्ययन में नमूने के तौर पर कोरोना संक्रमित 218 कैंसर मरीजों को गहन निगरानी में रखा गया। अध्ययन के दौरान 20 दिन में ही 61 मरीजों की संक्रमण से मौत हो गई। यह आंकड़ा अध्ययन में शामिल कोरोना संक्रमित कैंसर मरीजों का 28 फीसदी है जबकि इस दौरान अमेरिका में कोरोना से मौत की दर 5.8 फीसदी ही थी। चिकित्सकों के मुताबिक टीका हर हाल में शरीर को सुरक्षा ही प्रदान करता है, ऐसे में अपने चिकित्सक की सलाह से टीका लगवाने के प्रति कोई शंका नहीं होनी चाहिए। अखबारों की सुर्खियों और समाचार चैनलों से आए दिन पता चलता है कि हर दिन देश दुनिया में कोरोना के कितने मामले सामने आ रहे हैं और बीमारी की कौन सी लहर चल रही है या आने वाली है। यह देख सुनकर मन सिहर जाता है कि बीमारी का एक नया स्वरूप दुनिया के किसी कोने में फिर सिर उठा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब हमें इस बीमारी के साथ जीने की आदत डाल लेनी होगी, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है, जीने का जज्बा बनाए रखना। बीमारी कोई भी हो अगर यह याद रखें कि इस बीमारी से लड़ने वाले आप अकेले नहीं हैं, और इलाज संभव है तो डर कुछ कम जरूर हो जाएगा।

Published / 2022-02-02 08:40:15
जॉयडस ने शुरू की तैयारी, बच्चों को बगैर सुई वाली वैक्सीन की लगेगी तीन खुराक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दवा कंपनी जॉयडस फार्मा ने अपनी तीन खुराक वाली कोरोना रोधी वैक्सीन जायकोव-डी (ZyCoV-D) की आपूर्ति सरकार को शुरू कर दी है। जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। इससे 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को यह आसानी से लगाई जा सकेगी। यह इंजेक्टर के जरिये दी जाएगी। दर्द नहीं के बराबर होगा। यह 12 से 18 साल के वायु वर्ग वालों के साथ बड़ों को भी लग सकेगी। बुधवार को कंपनी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वह अपनी तीन डोज वाली वैक्सीन बाजार में मुहैया कराने की भी योजना बना रही है। जायकोव-डी वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया की पहली डीएनए प्लाजमिड वैक्सीन होगी। देश में लग रही कोरोना की बाकी वैक्सीनों से अलग जायकोव-डी के तीन डोज देने की जरूरत होगी। देश में अभी 15 से 18 साल तक किशोरों को भारत बायोटेक की कोवाक्सिन दी जा रही है। अब जायकोव-डी बच्चों के लिए दूसरी वैक्सीन हो जाएगी। अब 12 से 18 साल तक के किशोरों को भी टीके लग सकेंगे। दुनियाभर में आरएनए वैक्सीन की मौजूदगी सबसे ज्यादा है, वहीं जायडस कैडिला की यह वैक्सीन विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है।

Published / 2022-01-31 12:25:00
हे भगवान! रिम्स के डॉक्टरों ने पेट में ही छोड़ दिया था तौलिया, फिर...

टीम एबीएन, रांची। आप देश भर में इस तरह मामले सुने होंगे। लेकिन अब हमारा राज्य भी इस मामले में पीछे नहीं रहा। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एक बार फिर बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण करीब एक माह तक महिला दर्द से कराहती रही, जब जांच हुआ तो पता चला कि डॉक्टर ने पेट में ही तौलिया छोड़ दिया था। अस्पताल की ये फजीहत रिम्स के स्त्री रोग विभाग और सर्जरी विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। दरअसल, रिम्स के स्त्री रोग विभाग की डॉ मीना मेहता की यूनिट के डॉक्टरों की लापरवाही से 28 वर्षीय महिला सीमा करीब एक महीने से पेट दर्द से कराहती रही। लेकिन, पीड़िता की शिकायत के बाद भी डॉक्टर इस मामले में गंभीर नहीं हुए, जिस कारण महिला निजी अस्पताल के पास गई जहां सिटी स्कैन के बाद पता चला कि महिला के पेट में एक बड़ा तौलिया है जिसके बाद महिला का आॅपरेशन किया गया। पीड़ित परिवार के अनुसार गर्भवती महिला के पेट में सर्जरी के दौरान तौलिया छोड़ दिया गया था। बाद में निजी अस्पताल में सिटी स्कैन के दौरान पता चला कि पेट में तौलिया है। बरियातू के ही एक निजी अस्पताल में आपरेशन कर तौलिया निकाला गया। आॅपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर बतायी जा रही है। जानकारी के अनुसार पांच जनवरी को रिम्स में मेन रोड रांची की रहनेवाली 28 वर्षीय महिला रिम्स के प्रसूति विभाग में एडमिट हुई थी। गर्भवती महिला का बच्चा उसके पेट में फंस गया था, जिसके बाद चिकित्सकों के कहने पर महिला का आॅपरेशन किया गया। इसके कुछ दिन बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गयी। लेकिन, महिला का स्टीच नहीं सूखा। उसके पेट के हिस्से में सर्जरी के लिए किए गए छिद्र से लगातार खून व पस बहता रहा। इसके बाद पीड़िता सीमा फिर डॉ मीना मेहता के पास गयी और अपनी पीड़ा बतायी। इस पर डॉ मीना ने उसे सर्जरी विभाग में रेफर कर दिया, जिसके बाद उसे घाव सूखने की दवा दी गयी। लेकिन, फायदा नहीं हुआ। जिस कारण पीड़िता के परिजन महिला को लेकर निजी अस्पताल गये। निजी अस्पताल में जब महिला के पेट का स्कैन हुआ, तो पता चल कि रिम्स में आॅपरेशन के बाद डॉक्टरों ने तौलिया पेट में छोड़ दिया था। फिर महिला का निजी अस्पताल में आॅपरेशन कर तौलिया बाहर निकाला गया।

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