हेल्थ

View All
Published / 2022-11-22 22:30:52
अब लीजिये... बीमारी एक्स बन सकती है अगली महामारी!

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी को इस सदी की सबसे बड़ी महामारी घोषित की जा चुकी है। इस वायरस की तबाही के बाद दुनियाभर में वैज्ञानिक भविष्य में आने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि वह रोगजनकों की एक सूची बना रहा है जो भविष्य में प्रकोप या महामारी का कारण बन सकते हैं। इन रोगजनकों को एक प्रतिउपाय के रूप में कड़ी निगरानी में रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से ऐसे रोगाणुओं को चिह्नित किया जायेगा, जिन पर प्राथमिकता के तौर पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ द्वारा रोगजनकों की पहली सूची 2017 में प्रकाशित की गई थी और अंतिम को 2018 में जारी किया गया था। संगठन अगली लिस्ट 2023 के शुरुआत में जारी कर सकता है।
वर्तमान सूची में कोविड -19, क्रीमियन-कोंग रक्तस्रावी बुखार, इबोला वायरस रोग और मारबर्ग वायरस रोग, लस्सा बुखार,मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, निपाह और हेनिपाविरल रोग, रिफ्ट वैली बुखार, जीका और रोग शामिल हैं। सभी वैज्ञानिक तथाकथित बीमारी एक्स पर भी विचार करेंगे - एक अज्ञात रोगजनक जो एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी का कारण बन सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने इस सूची को अनुसंधान समुदाय के लिए एक संदर्भ बिंदु कहा है ताकि वे अगले खतरे का प्रबंधन करने के लिए अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह लिस्ट क्षेत्र में विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार की गई है। एक वैश्विक अनुसंधान समुदाय के रूप में सब सब एकमत हैं कि उन्हें परीक्षण, उपचार और टीके विकसित करने के लिए कहां ऊर्जा और धन का निवेश करने की आवश्यकता है।

Published / 2022-11-19 23:01:37
सर्दियों में बढ़ानी है इम्यूनिटी तो लें ये खाद्य सामग्री

एबीएन हेल्थ डेस्क। रहन-सहन में बदलाव के साथ ही सर्दी का सीजन हमारे खानपान में भी कई परिवर्तन लाता है। सर्दी में जहां खाने के लिए कई सारे विकल्प मौजूद होते हैं तो वहीं बदलते माहौल की वजह से हमारी इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है।
कमजोर इम्यूनिटी की वजह से इस मौसम में सर्दी, खांसी, फ्लू, गले की खराश, बुखार और संक्रमण आदि होना काफी आम बात है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण भी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से लोग आसानी से इसकी चपेट में भी आ सकते हैं। अगर आप सर्दियों में खुद को फिट और सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो इन आदतों के जरिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं।
घी
सर्दी में घी का सेवन शरीर के लिए काफी अच्छा माना गया है। घी का सेवन करने के लिए आप दाल और सब्जियों में छौंक लगा सकते हैं। इसके अलावा आप बने हुए खाने के ऊपर घी डालकर खा सकते हैं। घी न सिर्फ आपके खाने के स्वाद को बढ़ाएगा बल्कि आपको गर्म रखने के मदद करेगा।
लहसुन
खाने में लहसुन का सेवन सर्दियों में आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। गर्म तासीर होने की वजह से लहसुन आपको गर्म रखेगा। इतना ही नहीं गर्म रखने के साथ ही लहसुन आपके शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाता है, जिससे आप इंफेक्शन से बच सकते हैं। आप सूप, चटनी या अचार के रूप में लहसुन का सेवन कर सकते हैं।
हरी सब्जियां
सर्दियों का मौसम कई तरह की सब्जियां और फल भी अपने साथ लेकर आता है। हरी सब्जियों के लिए सर्दी का मौसम काफी अच्छा माना जाता है। ऐसे में आप सर्दी में गाजर, चुकंदर, मूली और अन्य हरी सब्जियां अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
अदरक
अदरक भी तासीर में गर्म होती है। सर्दियों में इसके सेवन से पाचन संबंधी कोई परेशानी नहीं होती है। इसके अलावा अदरक सर्दी-जुकाम में भी काफी उपयोगी माना गया है। आप अदरक की चाय, पानी या काढ़ा आदि के जरिए इसका सेवन कर सकते हैं।
गुड़
गुड़ की तासीर भी बेहद गर्म होती है। आप गुड़ की चाय या गुड़ के लड्डू आदि बनाकर खा सकते हैं।
तिल और मूंगफली
तिल और मूंगफली भी आपको सर्दियों में फिट रखने में काफी मददगार साबित होंगे। सर्दियों में इनका सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। प्रोटीन से भरपूर मूंगफली आपके अंदर विटामिन बी, अमीनो एसिड और पॉलीफेनॉल की पूर्ति करेगी। वहीं, तिल के बीज आपको जरूरी फैटी एसिड और विटामिन ई देंगे, जो हड्डियों, स्किन और बालों के लिए अच्छे माने जाते हैं।

Published / 2022-11-14 21:10:54
उत्तम जीवनशैली और योग से ही आग की तरह फैलते मधुमेह पर रोक लगाना संभव : आचार्य मुक्तरथ

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व मधुमेह दिवस पर आज सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र, एवं आरोग्य भारती के सौजन्य से सरोवर एनक्लेव, कांके रोड में मधुमेह की रोकथाम विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें आरोग्य भारती से आये विशिष्ट अतिथि डॉ देवेन्द्रनाथ तिवारी स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति कैसे हो इस पर वृहत रूप से प्रकाश डाले। उन्होंने कहा, घर के रसोईघर से लेकर आस-पास उपलब्ध वनस्पतियाँ कई बीमारियों को दूर कर सकता है। मधुमेह के रोकथाम के लिए जीवनशैली को बेहतर करने की जरूरत है। योगाभ्यास और मानसिक हल्केपन के लिए मेडिटेशन करना बहुत लाभदायक है। 
मुख्य वक्ता आचार्य मुक्तरथ जी ने मधुमेह के रोकथाम पर योग का एक विस्तृत रूपलेखा प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा आज माताओं के पास घर में  शरीरिक कार्यों को करने को कुछ नहीं है। रसोई घर में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। जो मेहनत दादी और नानी सबेरे से साम तक करती थीं वो अब कहीं नहीं है। 
व्यायाम का अभाव और मानसकि आपाधापी मधुमेह को हर दिन बढ़ा रहा है। आग की तरह फैलते मधुमेह को रोकने के लिए हमें अपने जीवनशैली को मजबूत बनाना होगा। हर व्यक्ति को प्रतिदिन एक घण्टे योगाभ्यास,20 मिनट प्राणायाम और 10 मिनट ध्यान करने की जरूरत है। कुछ भी करें खुश होकर करें, जो उपलब्धि मिली उसमें प्रसन्नचित होकर भगवान को धन्यवाद दें।  24 घण्टे में डेढ़ घण्टा अपने स्वास्थ्य के लिए समय दें। सत्यानन्द योग मिशन का बहुत बड़ा प्रयोग स्वामी मुक्तरथ के निर्देशन में मानसिक स्वास्थ्य पर चल रहा है। 

Published / 2022-11-14 17:10:59
विश्व मधुमेह दिवस पर मेदांता रांची के डॉक्टर्स ने कहा, जीवन शैली में बदलाव, खान पान में परहेज से ही नियंत्रण संभव

टीम एबीएन, रांची। डाइबिटीज ऐसी बीमारी है तो धीरे से शरीर मे घर बनाती है। हालांकि इसे  इसे कंट्रोल में लाया जा सकता है। अगर कंट्रोल में लाने के बाद परहेज न किया जाए तो शरीर के लिए घातक हो सकता है। विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर मेदांता रांची के एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि अगर परहेज बंद करने के बाद दोबारा डायबिटीज होता है तो शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और यह मरीज के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है।  
मेदांता रांची के कंसल्टेंट फिजिसियन डॉक्टर (लेफ्टिनेंट कर्नल) निलभ कुमार ने कहा कि डायबिटीज का इलाज इसलिए करते हैं कि मरीज को आगे चलकर आर्गन डैमेज न हो। 

अगर किसी को डायबिटीज है तो आगे चलकर उसे हर्ट, किडनी, स्ट्रोक, नर्व्स की प्रॉब्लम और रेटिना की दिक्कत हो सकती है। अगर इसे कंट्रोल में रखा जाए तो आगे चलकर दिक्कत कम होगी। इफेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज है, उसे 20 साल तक डायबिटीज रहा और शुरू के 10-15 साल अगर किसी मरीज ने डायबिटीज को अगर कंट्रोल में रखा तो उसका इफेक्ट आगे चलकर बहुत फायदेमंद होता है। अगर किसी ने डायबिटीज होने के बाद शुरू के 5 से 10 सालों में इनिशियल कंट्रोल नहीं रखा है तो ऐसे हालत में आने वाले 5 से 10 सालों में टारगेट आॅर्गन डैमेज होने का रिस्क ज्यादा हो जाता है। टाइप वन, टाइप टू, टाइप 3 और टाइप फॉर डायबिटीज के प्रकार होते हैं। इसमें टाइप वन डायबिटीज होता है, वह जेनेटिक होता है। टाइप टू डायबिटीज में इन्वायरमेंट, लाइफस्टाइल और जेनेटिक तीनों का मेकअप रहता है।  
मेदांता रांची के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर एंड न्यूरो एनिस्थेसिया के डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज होता है, तो मरीज के नर्व्स सिस्टम पर असर पड़ता है। अगर किसी को 5 या 10 साल तक डायबिटीज है और वह कंट्रोल में नहीं है तो एक मेडिकल की भाषा में शब्द है जिसे डायबिटीज न्यूरोपैथी कहते हैं। दरअसल लंबे वक्त के डायबिटीक को दिक्कत होती है, जिसके चलते उसे पैरों में सनसनाहट और झिनझिनापन महसूस होता है। हाथ और पैरों में झिनझिनापन रहता है, इसे ही डायबीटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। पैरों में सूनापन या झीनझिनापन हो जाना, उसके लक्षण है। अगर हम डायबिटीज को कंट्रोल में रखते हैं तो इस से रिलेटेड जितने भी उसके कॉम्प्लिकेशंस हैं, कंट्रोल में रहेंगे। डायबिटीज ऐसी बीमारी है कि अगर एक बार यह हो जाता है तो पैंक्रियास में बदलाव हो जाते हैं। अगर हम डायबिटीज को अच्छे से कंट्रोल करें तो कई सारे कॉम्प्लिकेशंस को प्रिवेंट कर सकते हैं। अगर किसी को डायबिटीज हो जाता है तो सबसे पहले उसे अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। 

Published / 2022-11-12 22:31:52
ठंड के 10 सुपरफूड जो रखे बीमारियों से दूर

एबीएन हेल्थ डेस्क। हमारे खान पान और लाइफस्टाइल पर शुगर का लेवल काफी हद तक निर्भर करता है, सर्दियों में शुगर लेवल बढ़ता-घटता रहता है, इसलिए जरूरी है कि हम ठंड में क्या खाएं जिससे डायबिटीज कंट्रोल रहे। ठंड के ऐसे 10 आहार हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है, उनके फायदे जानते हैं। मेथी : सर्दियों मेथी खूब आती है, मेथी खाने से शुगर कंट्रोल होती है। आप चाहें तो मेथी का साग, लड्डू, पराठे कुछ भी बना सकते हैं। मेथी में फाइबर और आयरन भरपूर है। इससे शुगर कंट्रोल रहती है। वे साग सर्दियों में वजन कम करता है, इससे पेट भरा सा रहता है और डायबिटीज कंट्रोल रहती है। रोजाना खाली पेट मेथी का पानी पीने से शुगर लेवल सही रहता है। बाजरा : बाजरा सर्दियों का सबसे बेहतरीन मिलेट है, ये डायबिटीज के मरीजों के लिए बेस्ट है। बाजरे में हाई फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर है, फाइबर से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है, वहीं मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन और ग्लूकोज रिसेप्टर की क्षमता को बढ़ाता है। इससे शुगर आसानी से पच जाता है और डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है। बाजरा की रोटी खाने से पाचन क्रिया अच्छी होती है। ये खराब कोलेस्ट्रोल में भी कमी लाने में मदद करता है। बाजरा में ट्रिप्टोफेन पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन स्तर को बढ़ता है और तनाव में कमी लाता है। रागी : मिलेट में रागी भी बहुत लाभकारी है, रागी की रोटी खाने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। रागी में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स भरपूर मात्रा में है, रागी खाने से कोलेस्ट्रोल कम होता है, शुगर भी कंट्रोल में रहती है। रागी की रोटी खाने से वजन भी कम होता है। पालक : पालक हरी सब्जियों में सबसे बेस्ट है, इसमें आयरन, विटामिन्स, मिनरल्स भरपूर मात्रा में है। पालक खाने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। पालक में फोलेट या फोलिक एसिड होता है,जो ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को सही रखने में मदद करता है। वजन कम करने और पेट साफ रखने में मददगार है। पालक का जूस, पालक की सब्जी बहुत ही फायदेमंद है। नट्स : नट्स डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है,सर्दियों में रात को भिगोकर सुबह नट्स खाएं, जैसे बादम, अखरोट,खजूर भिगोकर खाने से ज्यादा फायदे मिलते हैं। इसमें विटामिन ई, आयरन और कई पोषक तत्व होते हैं, जो प्लॉक के विकास को रोकतें है और धमनियों को संकीर्ण होने से बचाते हैं। इनमें ओमेगा थ्री, फैटी एसिड होते हैं। गुड़ : चीनी की जगह गुड़ खाना फायदेमंद होता है। ठंड में गुड़ की कई चीजें बनती है, डायबिटीज मरीज अगर गुड़ का सेवन करते हैं तो ब्लड शुगर लेवल ठीक रहेगा। डायबिटीज के मरीज को हर दिन गुड़ खा सकते हैं लेकिन एक मात्रा निर्धारित कर लें। मुनक्का : किशमिश की तरह मुनक्का भी बहुत फायदेमंद है, जिससे खून बढ़ता है। मुनक्का देखने में थोड़ा बड़ा होता है। ये हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। इसका नियमित सेवन करना हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। इसमें पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है,जो हाई ब्लड प्रेशर को कम कंटोल करता है। रोजाना दूध में मुनक्का भिगोकर खाने से बहुत फायदे मिलते हैं। अश्वगंधा : डायबिटीज के मरीजों के लिए अश्वगंधा काफी फायदेमंद है। इससे तनाव कम होता है, इसमें मौजूद औषधीय गुणों से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है। आपका ब्लड शुगर का लेवल सही रहता है, सुबह सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। अमरूद : डायबिटीज के मरीज के लिए फायदेमंद फल है अमरूद। ठंड में काफी मिलते हैं, अमरूद में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो कब्ज को कम करने में मदद करता है। रोजाना 1 अमरूद खाने से टाइप -2 डायबिटीज नहीं होती। शकरकंद : शकरगंद मतलब मीठा आलू, इसे खाने से शुगर नहीं बढ़ती बल्कि कंट्रोल में रहती है। इसमें नेचुरल मीठा रहता है।

Published / 2022-11-12 22:29:33
एक बार नहीं, चार बार होता है डेंगू

एबीएन हेल्थ डेस्क। डेंगू एक बार नहीं बल्कि चार बार होता है लेकिन जिन्हें दूसरी बार डेंगू होता है उनका जोखिम बढ़ जाता है। अगर एक बार डेंगू हो गया तो दूसरी बार के स्ट्रेन से बचने का प्रयास करना चाहिए, वरना जान का खतरा बढ़ जाता है। कई लोगों को काफी दिनों बाद डेंगू का बुखार दूसरी बार आता है लेकिन दूसरी बार में बचाव पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं क्योंकि इस दौरान हड्डियां कमजोर हो जाती है। दोबारा कैसे होता है डेंगू : डेंगू एक ऐसा वायरस है जो एक व्यक्ति को दोबारा भी इंफेक्ट कर सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि जिन लोगों को एक बार डेंगू हो गया है उन्हें दोबारा नहीं हो सकता है। डेंगू के मच्छर एडीज इजिप्टी के काटने पर किसी भी व्यक्ति को डेंगू दोबारा भी हो सकता है, इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए वरना ये जानलेवा बन सकता है। एक बार डेंगू वायरस से ठीक होने के कुछ समय बाद शरीर में डेंगू के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता तैयार होती है,इसलिए इसका बचाव बहुत जरूरी है। डॉक्टर कहते हैं कि एक बार के बाद जब दोबारा डेंगू का इंफेक्शन होता है तो वो ज्यादा खतरनाक साबित होता है। इस दौरान 150 हजार से 450 तक प्लेटलेट होना आवश्यक है लक्षण : तेज बुखार आना, शरीर, हाथ पैर और सिर में दर्द, मांसपेशियों में, हड्डियों में दर्द होना, अकड़न और उल्टी का मन होना, बीपी लो हो जाना, धीरे-धीरे कई बार बेहोशी आ जाना, प्लेटलेट्स का गिर जाना, शरीर में खून का चलना धीमा होना। कैसे करें बचाव : तरल पदार्थों का सेवन करें, पपीता, खट्टा फल खायें, जिस जगह ज्यादा गंदगी या मच्छर है वहां से दूर रहें, दवाएं, मच्छर की नेट लगायें, कुलर और किसी ठंडी हवा से बचें, कहीं भी पानी जमा न रखें, खिड़की दरवाजे बंद रखें और बाहर जाने से पहले कवर करें।

Published / 2022-11-11 18:48:32
सामाजिक सतर्कता और वक्त पर इलाज ही न्यूमोनिया से बचाव : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय

टीम एबीएन, रांची। न्यूमोनिया फेफड़ों का इंफेक्शन है। अगर वक्त रहते इसका इलाज किया जाये, तो मरीज का बचाव संभव है। विश्व निमोनिया दिवस पर मेदांता रांची की एसोसिएट कंसलटेंट डॉक्टर देवदत्ता बंदोपाध्याय ने न्यूमोनिया के प्रति आगाह करते हुए यह बातें कही। डॉ देवदत्ता ने बताया कि न्यूमोनिया के होने के कई कारण है। यह बैक्टीरिया वायरस, इन्फ्लूएंजा, कोविड, फंगल इनक्शन जैसे कारणों से होता है। आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में न्यूमोनिया एक लीडिंग कॉज आॅफ डेथ में गिना जाता है। वैसे लोग जिनको हर्ट डिजीज, क्रॉनिक लंग डिजीज, दमा, सीओपीडी, किडनी के पेशेंट, कैंसर के पेशेंट को ज्यादा खतरा होता है वैसे व्यक्ति जिनको दमा है उनको निमोनिया होने का खतरा अन्य से छह से सात गुना ज्यादा बढ़ जाता है। उनका कहना था कि न्यूमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसे वक्त पर अगर इसका इलाज किया जाए तो इससे पूरी तरीके से बचाव किया जा सकता है। न्यूमोनिया को कंट्रोल करने के लिए एजुकेशन और अवेयरनेस बहुत जरूरी है। कोई भी अगर अपने निमोनिया के लक्षणों पर ध्यान रखें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें तो इससे बचाव संभव है। इसके लक्षणों में बुखार आना, खांसी, सांस फूलना, हाथ, पैर व मुंह में नीलापन, बहुत तेजी से सांसों का चलना होता है। कभी-कभी वैसे लोग जो पूरी तरीके से चेतना में नहीं होते हैं। उनको सुस्ती या बेहोशी जैसा अनुभव होता है। वो भी न्यूमोनिया का लक्षण हो सकता है। मौसम में हो रहे बदलाव पर डॉ देवदत्ता ने बताया कि ठंड के मौसम में निमोनिया होने के चांसेस ज्यादा हो जाते हैं। एक तो मौसम में बदलाव रहता है दूसरा इस मौसम में सीजनल वायरल फीवर भी लोगों को होता है। ठंड के मौसम में कई बार लोग रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करते हैं या फिर सूर्य के धूप से दूर रहते हैं। पानी कम पीते हैं। ऐसे लोगों को निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है। कई बार लोग सर्दी जुकाम को नजरअंदाज भी कर देते हैं कि मौसम में बदलाव से ऐसा हो सकता है। इस मौसम में इन सारी बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। कई ऐसे वैक्सीन भी हैं जिनको लेने से न्यूमोनिया से बचाव किया जा सकता है। ये वैक्सीन हाई रिस्क पेशेंट, बुजुर्गों और बच्चों को लगाया जाता है जिससे इस गंभीर बीमारी से बचाव हो सके। मेदांता में निमोनिया के बेहतर इलाज के बारे में डॉक्टर का कहना था कि हमारे यहां बेहतर ओपीडी और आईपीडी की सेवा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त आईसीयू, प्रतिदिन निमोनिया के पेशेंट का ख्याल रखना, क्रिटिकल निमोनिया पेशेंट के लिए आईपीडी सर्विसेज की सुविधा है। मेदांता न्यूमोनिया को लेकर वक्त वक्त पर जागरूक भी करता है।

Published / 2022-11-09 21:39:12
डाइबिटिज और यूरिक एसिड में क्या है अंतर...

एबीएन, हेल्थ डेस्क। आज के दौर में हाई यूरिक एसिड के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। जब हमारे लिवर में बनने वाला यूरिक एसिड किसी वजह से शरीर से बाहर नहीं निकल पाता, तो यह शरीर के छोटे जॉइंट्स में जमा हो जाता है। इसकी वजह से गाउट की समस्या हो जाती है और किडनी पर भी असर पड़ता है। कुछ मामलों में यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से किडनी स्टोन हो जाता है तो कई बार किडनी फेलियर की नौबत भी आ जाती है। कई लोग यूरिक एसिड को डायबिटीज की तरह लाइलाज बीमारी मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। डायबिटीज की तुलना हाई यूरिक एसिड से करना सही नहीं है। इस बारे में हकीकत एक्सपर्ट से जान लेते हैं। नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ अमरेंद्र पाठक के मुताबिक जब हमारे शरीर में लिवर या किडनी की फंक्शनिंग बिगड़ जाती है, तब यूरिक एसिड यूरिन के जरिए बाहर नहीं निकल पाता। इससे यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है। दूसरी तरफ डायबिटीज में मरीजों के शरीर में इंसुलिन रजिस्टेंस पैदा हो जाता है और ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। डायबिटीज को दवाओं के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इस बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि यूरिक एसिड की परेशानी को इलाज के जरिए पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। दोनों बीमारियों में यह सबसे बड़ा अंतर माना जा सकता है। जड़ से खत्म हो सकती है यूरिक एसिड की समस्या : डॉ अमरेंद्र पाठक कहते हैं कि यूरिक एसिड बढ़ने पर अगर शुरुआत में ही इलाज कराया जाए तो इसे आसानी से कंट्रोल कर जड़ से खत्म किया जा सकता है। जब यूरिक एसिड हद से ज्यादा बढ़ जाता है तब इसे खत्म करने के लिए लंबा इलाज कराने की जरूरत होती है। डॉक्टर धीरे-धीरे यूरिक एसिड की दवाइयां कम करते जाते हैं और जब यह पूरी तरह ठीक हो जाता है तो दवाइयां बिल्कुल बंद कर देते हैं। हालांकि डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां बंद नहीं करनी चाहिए।

Page 29 of 56

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse