टीम एबीएन, रांची। पारस हेल्थकेयर ने आज अपने नये लोगो के लॉन्च के साथ अपने नये ब्रांड अभियान का अनावरण किया, जो उपचार और विश्वास का प्रतीक होते हुए इनोवेशन और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पारस हेल्थकेयर (जिसे अब पारस हेल्थ कहा जायेगा) ने अपने 4 ब्रांड मूल्यों करुणा, सुगमता, मितव्यता और उत्कृष्टता पर जोर दिया है और ध्यान केंद्रित किया है।
पारस हेल्थ का नया दृष्टिकोण एक स्वस्थ भारत के लिए साझेदारी करना है और इसका मिशन बुनियादी सुविधाओं और उपचार की कमी वाले समुदायों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुलभ बनाना है। नई पहल के एक हिस्से के रूप में, पारस हेल्थ ने रोगियों की क्लिनिकल परीक्षण आवश्यकताओं के लिए प्रयोगशालाओं के एक नये वर्टिकल, पारस लैब्स में प्रवेश की घोषणा की है।
पारस हेल्थ का भारत में 6 अस्पतालों का एक नेटवर्क है जो आज की तारीख में 1500 बेड संचालित करता है। 2006 में गुरुग्राम में अपने पहले अस्पताल के साथ शुरू हुई श्रृंखला का विस्तार पटना, दरभंगा, उदयपुर, पंचकुला, रांची तक हो गया है और अब यह श्रीनगर और कानपुर तक फैल गया है। यह नई सुविधाएं और शुरुआत मरीजों को सहायता प्रदान करने वाली सेवाएं प्रदान करेंगे और उन्हें सुव्यवस्थित करेंगे।
इसके अतिरिक्त, ईएमआर और डिजिटल केयर टचप्वाइंट लागू किए जायेंगे, जिससे मरीज अपने घरों में आराम से प्रमुख सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। पारस हेल्थ द्वारा डिजिटल रोगी रिकॉर्ड बनाये रखा जाएगा, जिससे उनके रोगियों के अनुरूप उपचार और देखभाल की जा सके।
मौके पर पारस हेल्थ के प्रबंध निदेशक डॉ धर्मिंदर नागर ने कहा कि पिछले 17 वर्षों से पारस हेल्थ अपने मरीजों को सस्ती, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। लक्ष्य हमेशा देश के किसी भी हिस्से में मौजूद होना रहा है जहां उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता होती है, और संगठन ने एक विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में खुद के लिए एक प्रतिष्ठा बनायी है जो अपने रोगियों की जरूरतों को पहले रखती है।
हमारा परिवर्तन केवल हमारे नाम और लोगो में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पारस हेल्थ के भविष्य के रोडमैप को भी ध्यान में रखता है, जिसमें न केवल अस्पताल बल्कि रोगियों के घरों से उपचारात्मक, निवारक और देखभाल भी शामिल होगी।
पारस हेल्थ के ग्रुप सीओओ डॉ सैंटी साजन ने कहा कि पारस हेल्थ का मिशन हमेशा सभी को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा है। हमारे पास उन लोगों की एक असाधारण टीम है जो अपने रोगियों और उनके परिवारों के लिए सबसे अच्छी देखभाल प्रदान करने के बारे में जुनूनी हैं।
डॉक्टरों, नर्सों और सहायक सेवाओं की हमारी असाधारण टीम हमारे कम्पास हैं। हम क्लीनिकल उत्कृष्टता, सहानुभूति और बेहतरीन देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और रोगी परिणामों को बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
रोगी - चिकित्सक - प्रक्रिया - लोग - प्लेस ( पेशंट- फिजिशियन- प्रोसेस-पीपल-प्लेस ) के हमारे 5 स्वास्थ्य सेवा स्तंभ निश्चित रूप से हमारे समुदायों की सभी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के लिए हमारी देखभाल और प्रतिबद्धता में विश्वास बढ़ाना जारी रखेंगे।
पारस हेल्थ अपने नेटवर्क के तहत 9,000+ बेड के साथ 2031 तक भारत में सबसे बड़ा निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बनने की इच्छा रखता है। इसमें से लगभग 5000 बेड वित्त वर्ष 2028 तक आॅर्गेनिक और इनॉर्गैनिक विस्तार के माध्यम से जोड़े जायेंगे। 2,000+ बेड की प्रतिबद्ध विस्तार पाइपलाइन को कानपुर, श्रीनगर और पंचकूला विस्तार के माध्यम से पूरा किया जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के शोधार्थियों ने एक अध्ययन में दावा किया है कि कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप का उप स्वरूप एक्सबीबी.1.5 अत्यधिक संक्रामक है। यह उप स्वरूप काफी तेजी से प्रसारित होने की क्षमता रखता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, तीन साल बाद भी कोरोना वायरस का खौफ बना हुआ है। हालांकि, इसके खिलाफ अत्यधिक प्रभावी टीके मौजूद हैं। बावजूद इसके वायरस में आनुवंशिक बदलावों की निगरानी बेहद जरूरी है। द लैंसेट इंफेक्शन डिजीज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के जरिये जापानी शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक टीम हाल ही में नये एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप को चिह्नित करने में सफलता हासिल की है, जिसका पहली बार अक्तूबर 2022 में पता चला था।
जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के प्रोफेसर केई सातो ने बताया कि ओमिक्रॉन का एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप पिछले स्वरूप की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकता है और इसमें अगले स्वरूप को पैदा करने की क्षमता भी ज्यादा है। ऐसे में महामारी वृद्धि को लेकर आशंका जतायी जा सकती है। उसके लिए हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर सावधानीपूर्वक निगरानी करनी चाहिए।
स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन : शोधकर्ताओं के अनुसार, एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन है। टोक्यो विश्वविद्यालय के सिस्टम वायरोलॉजी विभाग के प्रो केइया उरीउ ने बताया कि स्पाइक प्रोटीन में अमीनो एसिड प्रतिस्थापन और वायरल में वृद्धि देखी गई है जो पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में प्रमुख समस्या बनी हुई है। बीते साल एक्सबीबी.1.5 वैरिएंट ने एक्सबीबी.1 वंशज को जन्म दिया था जिसके स्पाइक प्रोटीन में प्रतिस्थापन होने की वजह से अमेरिका में तेजी से फैला था। शोधकर्ताओं का मानना है कि सभी देशों को वायरस के बदलावों पर गंभीरता से निगरानी रखनी चाहिए।
बढ़ रहा कोरोना का ग्राफ एक दिन में 754 नए मामले दर्ज : देश में चार महीने के अंतराल के बाद एक दिन में कोरोना संक्रमण के 700 से अधिक मामले सामने आये हैं। इसके साथ ही कोरोना के इलाजरत मरीजों की संख्या बढ़कर 4,623 पहुंच गयी है। इससे पहले पिछले साल 12 नवंबर को देश में कोरोना के 734 मामले दर्ज किये गये थे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कर्नाटक में संक्रमण से एक मरीज की मौत के बाद देश में मृतक संख्या बढ़कर 5,30,790 हो गयी है।
अब तक रिपोर्ट किये गये कोविड मामलों की कुल संख्या 4.46 करोड़ (4,46,92,710) तक पहुंच गयी है। भारत में अभी तक कुल 4,41,57,297 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोविड-19 से मृत्यु दर 1.19 फीसदी है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.80 फीसदी है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। एक समय था जब हार्ट संबंधी समस्याएं उम्रदराज लोगों को ही ज्यादा हुआ करती थीं। लेकिन आज हार्ट की बीमारी के शिकार हर आयुवर्ग के लोग हैं। भारत में एक बड़ी आबादी हृदय रोग से पीड़ित है और हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या वजह है? कहीं खानपान व लाइफस्टाइल में गड़बड़ हो रही है? जानिये उन गड़बड़ियों के बारे में जो युवाओं में हार्ट अटैक के कारणों को बढ़ावा दे रही हैं।
पेट की चर्बी
युवाओं में बैली फैट का बढ़ना और मोटापा दिल का दौरा पड़ने का सबसे बड़ा कारण है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की नयी रिपोर्ट के अनुसार अगर आपका बीएमआई सामान्य है और पेट के आसपास चर्बी की मात्रा अधिक है तो आपको दिल का दौरा पड़ने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है। ऐसे में व्यायाम और खुराक दोनों का ख्याल जरूरी है।
पोषण का स्तर
शोध बताते हैं कि भारत में 47 प्रतिशत लोगों को विटामिन बी12 की कमी है। विटामिन बी12 की कमी दिल का दौरा पड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण रिस्क फेक्टर है। बी12 की कमी से सीरम होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है जो दिल के दौरे से सीधा संबंध रखता है। जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी और विटामिन ई की कमी वाले आहार को भी हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जोड़ा जाता है। साथ ही सैचुरेटेड फैट्स, ट्रांस फैट्स और नमक यानी सोडियम का अत्यधिक सेवन हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
नींद की अहमियत
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार जो वयस्क रोज रात को 7 घंटे से कम सोते हैं उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका काफी अधिक होती है। इसका कारण यह है कि नींद की कमी से अकसर तनाव बढ़ता है। जो आपको दिन भर गतिहीन बनाकर रखता है। इस वजह से आप भूख लगने पर बाहर से कुछ अनहेल्दी भी खा ही लेते हैं। यह सभी कारण शरीर में फैट को जमा करते हैं। जिसका आपके दिल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
तनाव के असर
ज्यादातर लोग हर समय कुछ न कुछ सोच रहे होते हैं। इससे शरीर में स्ट्रैस हार्मोन बढ़ जाते हैं जो पेट के चारों तरफ फैट बनकर जमा होने लगते हैं। बहुत लोग तनाव में अधिक भोजन करते हैं। जिसके चलते अनहेल्दी फूड खा लेते हैं और ओवर ईटिंग के शिकार हो जाते हैं। इससे शरीर में कैलोरी का स्तर बहुत बढ़ जाता है। फैट और बढ़ जाता है। तनाव के चलते अनिद्रा दोष हो जाता है। ये सब स्थितियां हृदय रोग की आशंका बढ़ा देती हैं। तनाव हाई ब्लडप्रेशर या हाइपरटेंशन के कारणों में से एक है। दिल के दौरे का एक कारण हाई ब्लड प्रेशर भी है।
तनाव
तनाव को कैसे डील करते हैं यह आपकी ओवरआॅल वेलनेस पर प्रभाव डालता है। मनोवैज्ञानिक शोधों से यह बात सामने आई कि तनाव उन व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है जो यह विश्वास करने लगते हैं कि तनाव की वजह से उनपर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
सक्रियता
सन 2020 में हुए एक शोध में यह पाया गया कि शहरों में रहने वाले 60 प्रतिशत लोग निष्क्रिय या कम एक्टिव हैं। शारीरिक सक्रियता कम होना भी हृदय रोग बढ़ाता है। इसलिए यदि आपको एक ही स्थान पर बैठकर काम करना है तो अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज व योग को जरूर शामिल करें। स्वस्थ हृदय के लिए प्रतिदिन ढाई घंटा व्यायाम या योग करने की सलाह दी जाती है।
धूम्रपान का कारक
धूम्रपान करने से ब्लडस्ट्रीम में रसायन निकलते हैं। जो धमनियों और नसों के रक्त को गाढ़ा कर देते हैं और थक्का बनने का कारण बनते हैं। यह थक्के रक्तप्रवाह में बाधक बनते हैं। परिणाम स्वरूप दिल का दौरा पड़ता है। तम्बाकू का प्रयोग लगभग 11।9 प्रतिशत युवाओं द्वारा किया जाता है। यह चिंता का बड़ा कारण है।
ये सभी कारण इस युवा पीढ़ी की बदलती जीवनशैली की वजह से हैं। हमने देर से सोना शुरू कर दिया है। फास्टफूड का सेवन ज्यादा है। वक्त-बेवक्त भोजन करते हैं। न सोने का समय निश्चित,न ही उठने का व न ही भोजन करने का। युवा पीढ़ी की एक निश्चित दिनचर्या ही नहीं है। ये सभी कारण केवल हृदय रोग ही नहीं बल्कि पीसीओडी, असामान्य लिपिड प्रोफाइल, अवसाद, एंग्जाइटी आदि का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। हमारी पुरानी पीढ़ी अपने खानपान और जीवनशैली को लेकर बहुत सजग रही है। समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा रहा है जिसे आज की युवा पीढ़ी को अपने बड़ों से सीखने की जरूरत है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में मौसमी इंफ्लूएंजा के उप-स्वरूप एच3एन2 के मामलों में वृद्धि के बीच केन्द्र ने कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण दर में क्रमिक बढ़ोतरी को लेकर शनिवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे तुरंत निपटने की जरूरत है। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) या गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) के मामलों के रूप में पेश होने वाले श्वसन संबंधी रोगों की एकीकृत निगरानी के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया।
राज्यों से दवाओं और मेडिकल आॅक्सीजन की उपलब्धता, कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के खिलाफ टीकाकरण जैसी अस्पताल की तैयारियों का जायजा लेने का भी अनुरोध किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शनिवार को लिखे एक पत्र में कहा है, हालांकि पिछले कुछ महीनों में कोविड-19 के मामले कम होते जा रहे है लेकिन कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण दर में क्रमिक वृद्धि हुई है जो चिंता का एक मुद्दा है और इससे तेजी से निपटा जाना चाहिए।
भूषण ने कहा कि नए मामलों की कम संख्या, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में कमी और कोविड-19 टीकाकरण के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जांच, इलाज और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन किये जाने की जरूरत है।
देशभर के कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अन्य आइएलआइ और एसएआरआइ में बढ़ते रुझान के मद्देनजर, केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संगठनों के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के लिए हाल में एक बैठक आयोजित की गई थी।
उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किए जा रहे नमूनों में इंफ्लुएंजा ए (एच3एन2) विशेष रूप से चिंता का विषय है। यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बच्चे, बुजुर्ग लोग और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों में एच1एन1, एच3एन2 का अधिक खतरा है। भूषण ने पत्र में कहा है कि इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। देशभर में धूमधाम से होली मनाने के बाद अब देश में कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। बता दें कि जहां भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 440 नये मामले आने के बाद देश में अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 4,46,89,512 हो गयी है।
वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 3,294 पर पहुंच गयी है। इसके साथ ही देश में एक और नये वायरस ने दस्तक दिया है जिससे अब तक दो लोगों की मौत भी हो गयी है।
बता दें कि इंफ्लूएंजा अब जानलेवा बनता जा रहा है। देश में अब तक एच3एन2 से दो मौत के मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से एक मौत हरियाणा जबकि दूसरी मौत कर्नाटक में हुई है। देश में एच3एन2 के कुल 90 मामले आ चुके हैं। वहीं, एच1एन1 के 8 मामले मिले हैं।
कुल इंफ्लूएंजा के तीन प्रकार होते हैं : एन1एन1, एच3एन2 और इन्फ्लूएंजा इ, जिसको यामा गाटा कहा जाता है। भारत में फिलहाल दो तरह के इंफ्लूएंजा वायरस एच1एन1 और एच3एन2 के मामले पाये गये हैं।
इसके साथ ही इंफ्लुएंजा अ का सबटाइप एच3एन2 वायरस है, जिसको लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने भी एडवाइजरी जारी की है। इस बीमारी में आपको तेज बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, गले में दर्द, तेज खांसी, सर्दी जुकाम फेफड़े जाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। एम्स के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने देश में फैल रहे एच3एन2 इन्फ्लूएंजा से लोगों को सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह कोरोना के जैसी ही फैलता है। इससे बचने के लिए मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बार-बार हाथ धोते रहें। बुजुर्गों और पहले से ही किसी बीमारी से परेशान लोगों को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को हेल्थ एक्सपर्ट्स के साथ एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की। इसमें एक्सपर्ट्स ने कहा कि देश में कोरोना के मामले कम हुए हैं, लेकिन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। यह फ्लू कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट्स ने इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने की सलाह दी है।
पिछले दो महीने से राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद फ्लू के बढ़ते मामलों से लोगों में डर है, क्योंकि इससे जूझ रहे मरीजों में कोरोना जैसे ही लक्षण देखने को मिल रहे हैं। बीते कुछ दिनों में दिल्ली और आसपास के इलाकों से कई ऐसे मरीज अस्पताल पहुंचे हैं, जो 10-12 दिनों से तेज बुखार के साथ खांसी से परेशान हैं।
आईसीएमआर की रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो-तीन महीनों से इन्फ्लूएंजा वायरस का एक सब-टाइप एच3एन2 फैल रहा है। देश के कई हिस्सों में लोगों में इसी स्ट्रेन के लक्षण मिले हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाकी सब-टाइप्स की तुलना में इस वैरिएंट की वजह से लोग अस्पतालों में ज्यादा भर्ती होते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमए भवन में रविवार को हड्डी रोग पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में आईएमए सचिव डॉ सौरभ चौधरी, डॉ सुनील कुमार व डॉ राजेश ठाकुर शामिल थे। डॉ चौधरी ने कहा कि साइलेंट महामारी की तरह ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ रही है। इसके प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है।
अधिकांश लोगों को यह बीमारी तब समझ में आती है, जब उनकी हड्डियां किसी न किसी कारण से टूट जाती है। 50 वर्ष के बाद लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त हो जाती है। इस दौरान हड्डियां अंदर से खोखली हो जाती है और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज संभव है। अगर किसी व्यक्ति को पीठ में दर्द, आसानी से बोन फ्रैक्चर हो जाना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना सहित अन्य परेशानी हो तो उसे नजर अंदाज न करें। उसकी जांच कराएं।
वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील कुमार ने घुटने के दर्द वाले रोगी का इलाज कैसे करना है, उसके बारे में बताया। इस अवसर पर आइएमए के अध्यक्ष डॉ जीसी माझी सहित दर्जन भर डाक्टर उपस्थित थे।
टीम एबीएन, रांची। विज्ञान और तकनीक हेल्थ सेक्टर में आये दिन कुछ नई मशीनें लेकर आ रहे हैं, जो मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी रामबाण होते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं झारखंड की राजधानी रांची की। यहां धुर्वा स्थित पारस एचईसी हॉस्पिटल में 3डी विजन के माध्यम से लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन किया गया है।
पारस हॉस्पिटल के डॉक्टर संजय ने ABN से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि 3डी विजन आने से न सिर्फ मरीजों को फायदा होगा, बल्कि हम जैसे डॉक्टर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और जब डॉक्टर का कॉन्फिडेंट होगा तो ऑपरेशन बेहतर और सटीक होगा। हेल्थ सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी एक क्रांति है। डॉक्टर संजीव कुमार ने कहा कि लेप्रोस्कोपिक में रोगी के पेट में पोर्ट से छेद कर कार्बन डाईऑक्साइड गैस भरी जाती है। ऐसा करने से रोगी का पेट फूल जाता है।
इसके बाद तीन और सूराख बनाये जाते हैं। इन तीन सूराखों में एक से एचडी कैमरा और दो से सर्जरी उपकरण पेट के अंदर डाले जाते हैं। कंसोल की मदद से चिकित्सक पेट के भीतर उपकरणों के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं और उस हिस्से को काट-काट कर निकालते हैं, जो बीमारी का कारण होता है। 3डी कैमरे से हमें स्पष्ट रूप से चीजें दिखती हैं। सबसे बड़ी बात है कि हम काफी गहराई तक जा कर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे बारीक नसें बहुत आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। साथ ही बहुत स्पष्ट दिखाई देने से ऑपरेशन भी बहुत जल्द और सटीक होता है। इस ऑपरेशन में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता।
डॉक्टर संजीव कुमार कहते हैं इस ऑपरेशन में आधुनिक मशीन का उपयोग होगा। पर इसमें कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं है। सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50,000 रुपये का खर्च आता है, 3डी के बाद भी इसका खर्च यही रहेगा। साथ ही 24 घंटे के अंदर हम मरीज को डिस्चार्ज कर देते हैं। इससे मरीज बड़ी जल्दी स्वस्थ होगा व जल्दी डिस्चार्ज होगा तो खर्च भी कम आयेगा। लेप्रोस्कोपिक 3डी माध्यम से ऑपरेशन करा चुकीं कविता कहती हैं कि ऑपरेशन के बाद बहुत जल्दी डिस्चार्ज कर दिया गया। जिस वजह से खर्च काफी कम आया व आराम भी है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse