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Published / 2024-12-31 13:09:30
चेस्ट पेन (एंजाइना रोग) बना जीवन के लिए खतरा बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में दिन प्रतिदिन हमारा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है जिसमें एक गंभीर समस्या हमारे सामने निकल कर आ रहे हैं वह है चेस्ट पेन (एंजाइना  रोग), सर्दी मै बढ़ता सीने का दर्द बच्चों व युबाओ को हार्ट अटैक व उनके  जीवन को संकट मै डाल रहा है।

चेस्ट पेन की वजह से कई बच्चे, युवा, वरिष्ठजन अपनी जान गवा चुके हैं। योगाचार्य महेश पाल बताया कि नये साल की सुरूआत को अपने दिनचर्या मैं योग-प्राणायाम को शामिल कर करे और प्रत्येक दिन योग अभ्यास करे, जिससे कि हम पूरे साल स्वस्थ बने रहे।

एनजाइना से तात्पर्य सीने में दर्द या बेचैनी से है जो आमतौर पर कोरोनरी हृदय रोग के कारण होता है। यह दिल के दौरे जैसा महसूस हो सकता है जिसमें आपकी छाती में दबाव या सिकुड़न होती है। इसे कभी-कभी एनजाइना पेक्टोरिस या इस्केमिक चेस्ट पेन कहा जाता है, कोरोनरी धमनियाँ रक्त वाहिकाएँ हैं जो आपके हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाती हैं।

यदि आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है तो यह आपकी धमनियों में जमा हो जाता है और उन्हें संकरा कर देता है।यदि आपकी धमनियाँ गंभीर रूप से संकरी हैं तो उनमें प्रवाहित होने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है और आपके हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता है।

एनजाइना के लक्षण तब शुरू हो होते हैं जब आपके दिल को सामान्य से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और उसे ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसा तब होता है जब आप शारीरिक रूप से ज़्यादा मेहनत करते हैं या भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं एवं अधिक कोलेस्ट्रॉल और भारी खाना खाने के बाद भी ऐसा देखने मै आता है। 

एंजाइना रोग या सीने का दर्द होने के कुछ कारण है जिसमें पसलियों, पसली की कार्टिलेज, सीने की मांसपेशियों (पेशी-कंकालीय सीने की दीवार का दर्द), या सीने की नाड़ियों के विकार, फेफड़े को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (प्लूराइटिस),हृदय को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (पेरिकार्डाइटिस), पाचन संबंधी विकार (जैसे कि इसोफ़ेजियल रिफ़्लक्स या इसोफ़ेजियल ऐंठन, अल्सर रोग या पित्ताशय की पथरी), दिल का दौरा या एंजाइना (अक्यूट करोनरी सिंड्रोम और स्टेबल एंजाइना), योग व प्राणायाम से। चेस्टपेन (एंजाइना) से बचा जा सकता है जिसमें नाड़ी शोधन, सूर्य भेदी, भ्रामरी प्राणायाम, सूर्य नमस्कार,  चकरासन, उष्ट्रासन, वज्रासन, नाड़ीशोधन प्राणायाम नाड़ीयो के विकारों को दूर करता है।

सूर्यभेदी प्राणायाम कोरोनरी धमनी के अवरोधों को दूर कर कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है जो चेस्ट पेन का मुख्य कारण है, सूर्य नमस्कार शरीर में ऊर्जा का संचार करता है मोटापा को नियंत्रित करता है, चक्रासन पाचन संबंधी विकारों को दूर करता है।

भ्रामरी प्राणायाम भावनात्मक रूप से स्ट्रांग बनता है चेस्ट पेन की समस्या से बचाव के लिए हमें हमारी दिनचर्या व भोजनचर्या को ठीक कर  प्रत्येक दिन योग अभ्यास  करना होगा, 2025 नया साल के रूप में हमारे सामने आ रहा है हम नित्य प्रतिदिन योग को अवश्य शामिल करें और 2025 में पूर्ण रूप से अपने आप को स्वस्थ बनायें।

Published / 2024-12-30 20:29:19
एक सिगरेट पीने से घट जाते हैं जीवन के 22 मिनट

एक सिगरेट पीने से घट जाते हैं जीवन के 22 मिनट, शोध से चौंकाने वाले खुलासे आये सामने 

एबीएन हेल्थ डेस्क। धूम्रपान, जो एक आम सी लगने वाली आदत है, कहीं न कहीं हमारी उम्र को चोरी-चुपके कम कर रही है। धूम्रपान से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों को लेकर हाल ही में किये गये एक शोध में चौंकाने वाले आकड़े सामने आये हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के अध्ययन के अनुसार, एक सिगरेट पीने से पुरुषों के जीवन से औसतन 17 मिनट और महिलाओं के जीवन से 22 मिनट कम हो जाते हैं। यह आंकड़े पिछले अनुमानों से कहीं अधिक हैं, जिसमें एक सिगरेट से जीवन के 11 मिनट कम होने की बात कही गयी थी। यानी तीन सिगरेट पीने से जिंदगी के एक घंटे से ज्यादा का समय बीत जाता है। 

क्या कहता है शोध? 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया है कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान संचयी होता है। यानि जितनी जल्दी कोई व्यक्ति इस आदत को छोड़ता है, उतनी ही लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने की संभावना होती है। शोध में यह भी पाया गया कि एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति जो दिन में 10 सिगरेट पीता है, अगर 1 जनवरी को धूम्रपान छोड़ देता है, तो 8 जनवरी तक वह जीवन के एक पूरे दिन के नुकसान को रोक सकता है। फरवरी के अंत तक उसका जीवन एक सप्ताह तक बढ़ सकता है और अगस्त आते-आते यह अवधि एक महीने तक हो सकती है। 

क्यों है धूम्रपान इतना खतरनाक? 

धूम्रपान से सिर्फ उम्र ही कम नहीं होती, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों जैसे कि कैंसर, दिल की बीमारी और फेफड़ों की बीमारी का भी कारण बनता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में ये बीमारियां होने का खतरा काफी ज्यादा होता है। 

धूम्रपान पर विशेषज्ञों की क्या राय? 

यूसीएल अल्कोहल और तंबाकू अनुसंधान समूह की प्रमुख शोधकर्ता डॉ सारा जैक्सन ने कहा, धूम्रपान छोड़ने का फायदा किसी भी उम्र में महसूस किया जा सकता है। यह स्वास्थ्य में तत्काल सुधार लाता है और जीवन प्रत्याशा बढ़ाता है। उन्होंने धूम्रपान छोड़ने के लिए उपलब्ध विभिन्न उपचार और संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी। 

वहीं यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने क्विट स्मोकिंग ऐप और आनलाइन पर्सनल क्विट प्लान जैसे संसाधनों के जरिए धूम्रपान छोड़ने वालों की मदद की पेशकश की है। ब्रिटिश सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री एंड्रयू ग्वेने ने इसे एक जानलेवा और महंगी आदत बताते हुए कहा कि नये साल के मौके पर धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लेने का यह सही समय है। 

रॉयल कॉलेज आफ फिजिशियन के प्रोफेसर संजय अग्रवाल ने बताया कि धूम्रपान करने वाली हर सिगरेट जीवन के अनमोल मिनट छीन लेती है और हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भी विनाशकारी प्रभाव डालती है। उन्होंने धूम्रपान को रोकथाम योग्य मृत्यु और बीमारियों का प्रमुख कारण बताया। 

कैसे छोड़ें धूम्रपान 

धूम्रपान छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन यह संभव है। कई तरीके हैं जिनकी मदद से आप धूम्रपान छोड़ सकते हैं जैसे कि 

  • एनएचएस क्विट स्मोकिंग ऐप: यह ऐप आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद करने के लिए कई तरह की टिप्स और सलाह देता है। 
  • आनलाइन पर्सनल क्विट प्लान: यह एक व्यक्तिगत योजना है जो आपको धूम्रपान छोड़ने में मदद करती है। 
  • डॉक्टर से सलाह लें: आप अपने डॉक्टर से धूम्रपान छोड़ने के लिए दवाएं या अन्य उपचार के बारे में पूछ सकते हैं।

Published / 2024-12-28 17:49:28
900 यूनिवर्सिटी और 40,000 बच्चों के तकनीकी पदाधिकारी का दायित्व निभा रहे रांची आर्य प्रहलाद भगत

  • रांची के नटराज योग संस्थान के संचालक आर्य प्रहलाद भगत का आॅल इंडिया यूनिवर्सिटी योगासन चैंपियनशिप में तकनीकी पदाधिकारी के रूप में निभा रहे है दायित्व

एबीएन हेल्थ डेस्क। आल इंडिया युनिवर्सिटी गेम्स 2024-25 उड़ीसा के भुनेश्वर के किट युनिवर्सिटी में आयोजित हैं। जिसमें देशभर से 900 युनिवर्सिटी और चालीस हजार से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया है। 

जिसमें रांची जिला से नटराज योग संस्थान के संचालक आर्य प्रहलाद भगत की प्रतिनियुक्ति झारखंड से तकनीकी पदाधिकारी के तौर पर हुई है, यह बहुत अभूतपूर्व है और योगासन भारत ने उन्हें यह मौका प्रदान किया है। योगासन खेल संघ झारखंड के महासचिव विपिन पांडेय एवं सभी पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं प्रेषित की है।

Published / 2024-12-10 21:43:40
सावधान : गंदा पानी पीने से फैल रही ये गंभीर बीमारियां

एबीएन हेल्थ डेस्क (चंडीगढ़)। भले ही आजकल आरओ का जमाना हो लेकिन भारत में अभी भी कई लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। भारत में गंदे पानी पीने के कारण लोगों में गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, भारत में गंदा पानी पीने के कारण शहर व गांव में मौत की संख्या काफी बढ़ी है। आज हम आपको बताएंगे कि गंदे पानी के कारण कौन-कौन सी बीमारियां फैल रही हैं। 

डायरिया 

गंदा खाना और पानी पीने के कारण होने वाला डायरियां मौत की वजह भी बन सकता है। यह बीमारी ज्यादा छोटे बच्चों में देखने को मिलती है। अगर दो हफ्ते तक बीमारी ठीक ना हो तो उससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसमें उल्टी-दस्त, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन, त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब ठीक से न होना, मल में खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। 

टाइफॉइड 

बैक्टीरिया के कारण होने वाला साल्मोनेला टाइफी ज्यादातर गांवों में देखने को मिलता है क्योंकि यहां साफ-सफाई की काफी कमी होती है। एक जीवाणु संक्रमण है, जो आगे चलकर टाइफाइड बुखार का कारण बनता है। इसमें बुखार, मतली, उल्टी, दस्त, और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। 

हेपेटाइटिस ए 

हेपेटाइटिस ए एचएएस वायरस के कारण होने वाला लीवर रोग है, जो दूषित पानी या भोजन से फैलता है। अगर बुखार, भूख न लगना, मतली, पेट में दर्द, पीलिया, थकावट, पीला या स्लेटी रंग का मल व पेशाब और सारे शरीर में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

पेचिश 

पेचिश को खूनी दस्त भी कहा जाता है, जो गंदा पानी और दूषित भोजन से होती है। इसके कारण आंतों में सूजन आ जाती है। यह आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक रहता है लेकिन फिर भी अगर यह बीमारी ठीक न हो तो इससे जान जा सकती है। इसमें उच्च बुखार मतली व उल्टी, पेट में मरोड़, खूनी दस्त, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

Published / 2024-12-07 20:19:34
महिलाओं में बढ़ता पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम रोग एक गंभीर समस्या बचाव के लिए करें योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। आज के समय में व्यस्त जीवन और खराब लाइफ स्टाइल की वजह से कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। लोगों को खुद के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय नहीं मिल पा रहा है। खासकर महिलाएं जो घर और बाहर के कामों को तो अच्छे से संभाल लेती हैं लेकिन खुद की छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देती है। वह छोटी-छोटी समस्याएं आगे जाकर गंभीर बीमारी के रूप में  उभरती हैं। 

इन्हीं में से एक है पीसीओडी, योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि जब पीसीओडी होता है तो हमारे सामने कई लक्षण नजर आते हैं जिनमें चेहरे पर कील मुहासे होना, वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का पूरी तरह बंद हो जाना, ज्यादा रक्तस्राव होना, त्वचा का काला पड़ना, चेहरे पर बाल उगना, सर दर्द होना नींद में  कमी आदि, पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज, पीसीओडी की समस्या महिलाओं और लड़कियों में बहुत ही कॉमन हो गयी है। 

नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड रिसर्च के अनुसार हमारे देश में करीब 10% से भी अधिक महिला आबादी पीसीओडी की समस्या से ग्रसित हो गयी है और यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पीसीओडी का मतलब है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज जो महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। यह महिला में होने वाला एक हार्मोनल विकार है, जहां हार्मोन संतुलन बिगड़ने के कारण ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट का निर्माण होता है जो गांठ की तरह दिखाई देते हैं। 

पीसीओडी के कारण महिलाओं में बांझपन, अनियमित पीरियड्स, इत्यादि जैसी कई समस्याएं सामने आती है। पीसीओडी की समस्या अधिकतर 14 वर्ष से 45 वर्ष की लड़कियों व महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती हैं। पीसीओडी होने के पीछे कई कारण है जिसमें अनहेल्दी लाइफस्टाइल, आनुवांशिक कारण, मोटापा इन्सुलिन रेजिस्टेंस, हाइड्रोजन लेवल का हाई होना, फास्ट फूड जंक फूड का सेवन, अव्यवस्थित भोजनाचार्य, सिगरेट शराब या  नशीली पदार्थों का सेवन, पीरियड्स असंतुलन होना, योग प्राणायाम मेडिटेशन व व्यायाम न करना, तनाव में रहना आदि कारणों की वजह से महिलाएं पीसीओडी की समस्या से ग्रसित हो जाती हैं। 

ओव्यूलेशन की कमी गर्भाशय के स्तर को हर एक मेंस्ट्रुअल के समय बहने से रोकती है। पीसीओडी से ग्रस्त महिलाओं को साल में नौ पीरियड्स कम आते हैं, जिससे कि गर्भाशय की मोटी परत काफी बढ़ जाती है। इस वजह से एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया और एंडोमेट्रियल कैंसर अंतगर्भाशय मैं होने का खतरा बढ़ जाता है। 

पीसीओडी की समस्या से बचाव के लिए सहयोगी चिकित्सा के रूप में हमें हमारे दैनिक दिनचर्या में योग प्राणायाम को महत्व देना चाहिए जिसमें, भुजंगासन, शसकासन, बद्धकोणासन, उष्ट्रासन, सेतुबंध आसन, तितली आसान, सूर्य नमस्कार भुजंगासन-पेल्विक एरिया पर हल्का दबाव डालता है। अंडाशय को उत्तेजित करता है और पीसीओडी के लक्षणों को दूर करने में मदद करती है।  

  • शसकासन- यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को शांत करके विश्राम प्रदान करता है। मासिक धर्म में ऐंठन और पीएमएस के लक्षणों में सुधार करता है। 
  • बद्धकोणासन-  पेल्विक एरिया में ब्लड सकुर्लेशन में सुधार करता है। 
  • उष्ट्रासन- यह मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है। 
  • सूर्य नमस्कार- मन की एकाग्रता बढ़ाने और वेट लॉस कर शरीर को लचीला बनाता है। 
  • नौका चलानासन- करने से पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलती हैं एवं हार्मोंस को बैलेंस करने में मदद मिलती है।  
  • नाड़ीशोधन प्राणायाम- तनाव को कम करता है और हारमोंस को बैलेंस करता है। 
  • कपालभाति - ओवेरी में सिस्ट होने से बचाता है और आंतरिक अंगों को स्वस्थ बनाता है। 
  • भ्रामरी प्राणायाम- तनाव व अनिद्रा की समस्या को दूर करता है एवं हार्मोन बैलेंस करता है, दिन प्रतिदिन अवस्थित दिनचर्या व भोजनचर्या के कारण हम कई छोटी-छोटी समस्याओं से घिर रहे हैं। सभी समस्याओं से बचाव में सहायक है योग प्राणायाम, हमारे जीवन में योग को महत्व दें और स्वयं को स्वस्थ व सामर्थवान बनायें।

Published / 2024-11-30 19:57:22
योग से ही कार्डियक अरेस्ट से बचाव संभव : योगाचार्य महेश पाल

योगाचार्य बोले- कार्डियक अरेस्ट रोग बच्चों युवाओं वयस्कों के लिए बना घातक, बचाव के लिए करें योग प्राणायाम

एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में बदलती दैनिक दिनचर्या व आहार चर्या के कारण हम कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से घिरते जा रहे हैं जिनमें एक है कार्डियक अरेस्ट रोग। इसे एससीए के नाम से भी जाना जाता है, तब होता है जब दिल अचानक और अप्रत्याशित रूप से धड़कना बंद देता है। जब दिल धड़कना बंद हो जाता है, तो रक्त शरीर में ठीक से प्रसारित नहीं हो पाता है और मस्तिष्क और अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।  

योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि जब मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता है, तो इससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है और मस्तिष्क की कोशिकाएं आक्सीजन की कमी के कारण मरना शुरू कर देती हैं। शरीर में अन्य प्रणालियों के विपरीत, हृदय में साइनस नोड नामक अपना स्वयं का विद्युत उत्तेजक होता है। जिसमें हृदय के ऊपरी दायें कक्ष में विशेष कोशिकाओं का एक समूह होता है। 

साइनस नोड द्वारा उत्पन्न विद्युत आवेग हृदय के माध्यम से एक व्यवस्थित तरीके से प्रवाहित होते हैं ताकि हृदय की धड़कन की दर और लय को नियंत्रित किया जा सके और हृदय से शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त की पंपिंग की जा सके। बहुत से लोग कार्डियक अरेस्ट को हार्ट अटैक समझ लेते हैं। हार्ट अटैक में दिल की धड़कन रुकती नहीं है, जबकि कार्डियक अरेस्ट होता है। 

यह तब होता है जब रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में यांत्रिक रुकावट के कारण हृदय की मांसपेशियों का एक विशेष हिस्सा रक्त की आपूर्ति से वंचित हो जाता है। बड़े पैमाने पर दिल का दौरा पड़ने से कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। कार्डियक अरेस्ट ज्यादातर 60 वर्ष की आयु के लोगों में होता है, लेकिन वर्तमान समय में यह बच्चों और युवा वयस्कों में भी देखा जाने लगा है।

कार्डियक अरेस्ट रोग होने से पहले हमारे शरीर में कुछ लक्षण हमारे सामने आते हैं जिसमें, स्पर्शनीय नाड़ी का अभाव (ऐसी स्थिति जिसमें नाड़ी को महसूस नहीं किया जा सकता), असामान्य या अनुपस्थित श्वास, थकान और कमजोरी, चक्कर आना और बेहोशी, सीने में दर्द, घबराहट और सांस लेने में तकलीफ, उल्टीकरना आदि यह लक्षण जब हमें हमारे शरीर में नजर आते हैं तो तुरंत हमें डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और सहयोगी चिकित्सा के रूप में योग प्राणायाम प्रारंभ कर देना चाहिए।

अतालता तब होती है जब विद्युत आवेगों का यह प्रवाह प्रभावित होता है अतालता (एरेथमिया) के कारण दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। दिल धीरे-धीरे या तेज या अनियमित रूप से धड़कने लगता है। सभी अनियमितताएं जरूरी नहीं कि चिंता का कारण हों, लेकिन उनमें से कुछ गंभीर हो सकती हैं जिससे दिल की धड़कन अचानक बंद हो सकती है, जिससे दिल का काम करना बंद हो सकता है। जिन लोगों को हृदय संबंधी कोई अंतर्निहित समस्या है या जो जन्मजात हृदय दोष के साथ पैदा हुए हैं, उनमें हृदयाघात होने की संभावना अधिक होती है। 

सामान्य स्वस्थ हृदय वाले व्यक्ति में हृदयाघात होने के लिए कोई बाहरी ट्रिगर होना चाहिए जो सबसे पहले अनियमित हृदय गति का कारण बनता है। अचानक हृदयाघात से मस्तिष्क में आॅक्सीजन युक्त रक्त की कमी के कारण बेहोशी आ जाती है और इसके परिणामस्वरूप यदि यह स्थिति 8 मिनट से अधिक समय तक चलती है तो जीवित बचे लोगों में मस्तिष्क क्षति हो सकती है यदि रिकवरी में 10 मिनट से अधिक समय लगे तो मृत्यु होने की संभावना  बढ़ जाती है।

कार्डियक अरेस्ट रोग होने के कई कारण देखे गये हैं जिनमें, उच्चरक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे मोटापा, गतिहीन जीवनशैली, धूम्रपान और शराब पीना। हृदयाघात या अन्य हृदय विकारों जैसे हृदय ताल विकार, जन्मजात हृदय दोष, हृदय विफलता और कार्डियोमायोपैथी का पारिवारिक इतिहास। पृौढ अबस्था, विद्युतीय झटका, अवैध दवाओं (कोकीन या एम्फेटामिन) का उपयोग। 

पोटेशियम मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का असंतुलन, कार्डियक अरेस्ट रोग से बचाव के लिए योग प्राणायाम हमारे लिए काफी लाभदायक है जिसमें ताड़ासन, वृक्षासन सेतुबंध आसन, पश्चिमोत्तानासन सूर्य नमस्कार, वज्रासन, पर्वतासन, भुजंगासन, सवासन नाड़ीशोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, आज्ञा चक्र पर ध्यान। 

  • भुजंगासन- यह आपके पेट की चर्बी को कम करता है और थकान और तनाव को दूर करता है। 
  • पश्चिमोत्तानासन- रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह को कंट्रोल करता है हृदय स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा आसन है। 
  • ताड़ासन- यह पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है। 
  • वृक्षासन- शारीरिक संतुलन व उच्च रक्त चाप को कंट्रोल करने में सहायक है। 
  • सूर्य नमस्कार- शरीर को लचीला बनाता है कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है रक्त में आॅक्सीजन की पूर्ति करता है शरीर में ओज तेज बल की वृद्धि करता है। 
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम- मस्तिष्क में आक्सीजन युक्त रक्त की पूर्ति करता है और मस्तिष्क में कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करता है, उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करता है। 
  • भ्रामरी प्राणायाम- तनाव अवसाद व अनिद्रा की समस्या से निजात दिलाता है। 
  • आज्ञा चक्र पर ध्यान- मन व शरीर के बीच संतुलन लाने का काम करता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है। हमारे हारमोंस को बैलेंस करता है। पूर्ण रूप से  हमारे मस्तिष्क को शांत और एकाग्र करता है। योग हमें एक नयी ऊर्जा शक्ति के साथ नया जीवन देने का कार्य करता है और हमें विभिन्न रोगों व समस्याओं से उभरने का काम करता है। इसलिए हमें  दैनिक दिनचर्या में प्रतिदिन योग अभ्यास जरूर करना चाहिए।

Published / 2024-11-25 16:15:47
योगाचार्य महेश पाल सम्मानित

  • योगाचार्य महेश पाल को योग के क्षेत्र में विशेष कार्य करने व योग में प्राप्त उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर महर्षि पतंजलि योग रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत सरकार के आयुष विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाली योग के क्षेत्र में संस्था अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर महर्षि पतंजलि योग रत्न सम्मान समारोह का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली के संविधान सभागार भवन मै 24 नवंबर को आयोजित किया गया।

जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा, राजऋषि वेदमूर्ति आचार्य, स्वामी अमित देव  डॉ ईश्वरन आचार्य, डॉ एसपी मिश्रा, डॉ मंगेश योगगुरु, नितिन पाठक, योगाचार्य दीपनारायण पाल अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

भारत के अलग-अलग राज्यों में विशेष योग्यता प्राप्त योगाचार्य व योगगुरु जिन्होंने योग के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल की और योग के प्रचार प्रसार  को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जो कार्य किया उन सभी कार्य को देखते हुए महर्षि पतंजलि योग रत्न अवार्ड के लिए चयनित किया गया।

योगाचार्य महेश पाल का चयन योग के क्षेत्र में 21000 सूर्य नमस्कार पूर्ण करने, योग के क्षेत्र में रिसर्च कार्य करने, योगासना खेल मै राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल जज के रूप में कार्य करने, योग व स्वास्थ विषय पर आर्टिकल लेखन से समाज को जागरूक करने, बच्चों व युवाओं को योग से प्रेरित कर संस्कार विकसित करने, योग शिविरों के द्वारा लोगों मैं योग के महत्व को समझाने आदि कार्यो के लिए महर्षि पतंजलि योगरत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। 

योगाचार्य ने उद्बोधन देते हुए कहा कि योग से हमारी सोयी हुई इक्षा शक्ति जागृत होती हैं जिससे हम बड़े बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, योगाचार्य महेश पाल मध्य प्रदेश के प्रथम योगाचार्य हैं जिन्हें महर्षि पतंजलि योग रत्न अवॉर्ड दिया गया है। 

योगाचार्य महेश पाल ने अपनी योग की पढ़ाई उत्तराखंड से की है एवं योग की सेवाएं मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में दे चुके हैं जिसमें गुजरात, असम, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली आदि इस अवसर पर पतंजलि परिवार व  मित्र जनों द्वारा बधाई शुभकामनाएं दी।

Published / 2024-11-09 19:15:37
युवाओं में घटता स्पर्म काउंट बढ़ती नपुंसकता की समस्या निदान योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में युवाओं की बदलती दैनिक दिनचर्या व अव्यवस्थित भोजनचर्या के कारण  युवाओं में घटता स्पर्म काउंट नपुंसकता को जन्म दे रहा है जिसके कारण नव वैवाहिक जोड़े माता पिता बनने में असमर्थ होते जा रहे हैं योगाचार्य महेश पाल बताते है कि यह समस्या 40 से अधिक के उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। वर्तमान समय में यह समस्या बहुत तेजी से युवा वर्ग में देखने में आ रही है।

एक शोध में यह आशंका व्यक्त की गयी है कि 2025 तक सर्वाधिक नपुंसकता की संख्या बाला देश भारत बन सकता है इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी), जिसे नपुंसकता के रूप में भी जाना जाता है, इरेक्शन पाने और उसे बनाए रखने में असमर्थता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक बहुत ही आम स्थिति है, खासकर  यह वृद्ध पुरुषों में पायी जाती है।

यह अनुमान लगाया गया है कि 40 से 70 वर्ष की आयु के बीच के आधे पुरुषों में यह किसी न किसी हद तक होती है, लेकिन वर्तमान समय में यह समस्या युवा वर्ग में भी देखने में आ रही है, कम शुक्राणु संख्या को आलिगोस्पर्मिया भी कहा जाता है। शुक्राणुओं की पूरी तरह कमी को एजोस्पर्मिया कहा जाता है। यदि आपके वीर्य में प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से कम शुक्राणु हैं, तो आपके शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम मानी जाती है। 

कम शुक्राणुओं की संख्या का मुख्य लक्षण गर्भधारण न कर पाना, अंडकोष क्षेत्र में दर्द, सूजन या गांठ, चेहरे या शरीर पर कम बाल या गुणसूत्र या हार्मोन संबंधी स्थिति, किसी पुरुष में शुक्राणु कम होने के कई कारण हो सकते हैं।  हार्मोन में अनुवाँशिक असंतुलन टेस्टोस्टेरोन की कमी, अधिक धूम्रपान व अधिक शराब का सेवन, नशा, अव्यवस्थित जीवन शैली, मानसिक तनाव व चिंता, मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फास्ट फूड जंक फूड, मानव शरीर में अंतर स्त्रावी तंत्र प्रजनन अंगों को विनियमित करने और भावनात्मक संतुलन बनाये रखने के लिए हार्मोन की श्रृंखला जारी करने का काम करता है।

जब हमारी जीवन शैली व आहार शैली असंतुलित होती है व इन सभी कारणों से शरीर तंत्रिकाओं के माध्यम से प्रजनन प्रणाली को नियंत्रित करने की क्षमता को देता है जिससे हार्मोन असंतुलित हो जाते है और स्पर्म काउंट कम होने लगता है प्रजनन अंग काम करना बंद कर देते हैं और नपुंसकता धीरे-धीरे जन्म ले लेती है। नपुंसकता से बचाव के लिए अपनी जीवन शैली व आहार शैली को व्यवस्थित करते हुए योग को अपने दिनचर्या में स्थान देना होगा।

यह योग अभ्यास प्रजनन तंत्र को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं जिसमें पश्चिमोत्तानासन, उत्तांन आसान, जानुसिरासन, कंदरासन, भद्रासन, तितली आसन, धनुरासन, सूर्य नमस्कार, नाड़ीशोधन प्राणायाम, अनुलोम विलोम, कपालभाती, भ्रामरी  चंद्रभेदी प्राणायाम, वज्रासन- यह आसन श्रोणि क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में मदद करता है, तथा यौन क्रिया से जुड़ी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को मजबूत बनाता है सर्वांगासन- यह आसन जीवन शक्ति को बढ़ाता है और स्तंभन दोष को दूर कर सकता है। 

भुजंगासन- प्रजनन अंगों को उत्तेजित करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाने जाता हैं, पश्चिमोत्तानासन- आसन पैल्विक मांसपेशियों को खींचता है और विश्राम देता है, तनाव और चिंता को कम करता है, धनुरासन- पेट और पैल्विक मांसपेशियों को मजबूत करके, धनुरासन प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रास :- गुर्दे, यकृत और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है तथा प्रजनन प्रणाली को पुनर्जीवित करने में मदद करता है जानु शीर्षासन :- श्रोणि क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे स्तंभन स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। सेतुबंधासन-जननांगों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, तथा तनाव और थकान को कम करता है। व्यवस्थित दैनिक दिनचर्या का आहार से हम विभिन्न प्रकार के रोगों के साथ-साथ आने वाले गंभीर रोगों से बच सकते हैं अपने जीवन को स्वस्थ पूर्वक बना सकते हैं इसलिए हमें हमारे जीवन में योग को स्थान देने की आवश्यकता है।

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