एबीएन हेल्थ डेस्क। आज के दौर में हम शारीरिक स्वास्थ्य को तो प्राथमिकता देते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कर देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि हम भावनात्मक तनाव को गंभीरता से क्यों नहीं लेते? जब तक कोई बड़ी समस्या न हो, तब तक हम इसे नजरअंदाज करते रहते हैं। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य का ख़्याल रखना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही अपने जीवन में संतुलन बना सकता है, बेहतर निर्णय ले सकता है और खुशहाल जीवन जी सकता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। आज दुनियाभर के लोगों में बीमारियों ने अपना घर बना लिया है। लाख जागरूकता के बावजूद लोग इसपर सफलता पाने में असफल हो रहे हैं। जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। इन सबके बीच मानसिक स्वास्थ्य लोगों के बीच आम समस्या बनकर रह गयी है। जिसपर काबू पाना अब बेहद ही जरूरी हो गया है। आज इन्हीं समस्याओं से पार पाने की कोशिश में एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अदिति भसीन से एबीएन के प्रधान संपादक नंदकिशोर मुरलीधर ने खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश...
उत्तर: जब हम बीमार पड़ते हैं, तो डॉक्टर के पास जाते हैं, दवा लेते हैं, आराम करते हैं। लेकिन जब मन थक जाता है, टूट जाता है, तब क्या करते हैं? ज़्यादातर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मानसिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ़ मानसिक बीमारियों से बचना नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को समझना, तनाव को संभालना और एक संतुलित जीवन जीना भी है।
उत्तर: पहले इंसान अपनों के साथ बैठकर दिल की बातें करता था, लेकिन आज हमारी दुनिया मोबाइल स्क्रीन में सिमट गई है। सोशल मीडिया पर हम हंसते-मुस्कुराते चेहरों को देखते हैं और अपनी ज़िंदगी से तुलना करने लगते हैं। पढ़ाई, करियर, रिश्तों का दबाव और समाज की उम्मीदें हमें अंदर ही अंदर तोड़ देती हैं। यही कारण है कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, और स्ट्रेस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
उत्तर: क्योंकि हमें बचपन से यही सिखाया गया कि मज़बूत बनो, रोओ मत, कमज़ोर मत पड़ो। लेकिन क्या कभी किसी ने यह सिखाया कि अगर दर्द हो, तो उसे महसूस करो, अगर कुछ भारी लग रहा है, तो किसी से बात करो? हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना अभी भी आसान नहीं है, लेकिन हमें इस सोच को बदलना होगा।
उत्तर: सबसे पहले हमें खुद को समझना होगा—क्या चीज़ हमें परेशान कर रही है? क्या हमें वाकई मदद की ज़रूरत है? छोटी-छोटी चीज़ें, जैसे सुबह उठकर थोड़ा ध्यान लगाना, खुद से प्यार करना, सोशल मीडिया से थोड़ा दूर रहना, अपनों से खुलकर बात करना—ये सब हमारी मानसिक सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं। अगर ज़रूरत लगे, तो किसी मनोवैज्ञानिक या थेरेपिस्ट से मदद लेने में झिझकें नहीं।
उत्तर: EFT (Emotional Freedom Techniques) एक ऐसी तकनीक है जो हमारे शरीर के ऊर्जा बिंदुओं पर टैपिंग करके भावनात्मक तनाव को कम करने में मदद करती है। जैसे जब हमें डर लगता है तो दिल तेज़ धड़कने लगता है, वैसे ही हमारे शरीर में कई जगह भावनाओं का असर पड़ता है। EFT से हम इन भावनाओं को पहचानकर उन्हें ठीक कर सकते हैं, जिससे तनाव और चिंता कम होती है।
उत्तर: मैंने खुद ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं—लोगों का खो जाना, खुद से जूझना, और यहां तक कि कैंसर से भी लड़ना। लेकिन इन अनुभवों ने मुझे सिखाया कि मानसिक शक्ति कितनी ज़रूरी है। मैं बतौर मनोवैज्ञानिक और एडवांस EFT प्रैक्टिशनर लोगों को उनकी भावनाओं को समझने, खुद को अपनाने और अपने दर्द से उबरने में मदद करती हूं। मेरी संस्था Healing Taps With Aditi मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर काम कर रही है, ताकि हर किसी को यह समझ आए कि वे अकेले नहीं हैं।
मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ़ एक शब्द नहीं, बल्कि हमारे जीने का तरीका है। जब मन हल्का होगा, तभी ज़िंदगी भी खूबसूरत लगेगी। तो खुद से प्यार करें, अपनी भावनाओं को समझें और अगर ज़रूरत हो, तो मदद लेने से न हिचकें। याद रखें—आपकी भावनाएं भी उतनी ही अहम हैं, जितने आप खुद।
एबीएन हेल्थ डेस्क। होली नजदीक आ रही है। रंगों का त्योहार होली पर एक-दूसरे को गुलाल लगाया जाता है, लेकिन कभी-कभी गुलाब से त्वचा पर रिएक्शन हो जाता है जिससे लोग रंगों का इस्तेमाल करने से डरते हैं। वहीं, झारखंड में महिलाओं ने होली के लिए प्राकृतिक विधि से हर्बल गुलाल बनाकर तैयार किया है।
इस साल भी राज्य के बाजारों में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के अंतर्गत सखी मंडल की महिलाओं ने पलाश हर्बल गुलाल बनाकर तैयार किया है। विभिन्न जिलों की हजारों महिला उद्यमियों द्वारा इस हर्बल गुलाल का उत्पादन किया जा रहा है। आज से 13 मार्च 2025 तक रांची, हजारीबाग, पलामू, चतरा, रामगढ़, खूंटी और लोहरदगा में पलाश हर्बल गुलाल बिक्री स्टॉल का शुभारंभ किया गया।
सभी जिलों के प्रमुख केंद्रों पर स्टॉल लगाये गये हैं। पलाश हर्बल गुलाल के अलावा यहां रागी लड्डू, हैंडमेड चॉकलेट, कुकीज और अन्य उत्पादों की भी बिक्री की जा रही है। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के प्रमुख कार्यालय, एफएफपी भवन, सचिवालय (धुर्वा), झारखंड उच्च न्यायालय परिसर, प्रमुख व्यावसायिक स्थल, रांची मॉल, न्यूक्लियस मॉल, स्प्रिंग सिटी मॉल (हिनू), डोरंडा बाजार, अटल वेंडर मार्केट, पैंटालूंस (लालपुर), रिलायंस मॉल (कांके रोड), मोरहाबादी मैदान, एजी मोड़ आदि जगहों पर स्टॉल लगाये गये हैं।
सखी मंडल की महिलाओं ने इस हर्बल गुलाल को पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया है, जो त्वचा के लिए सुरक्षित है। इसमें सूखे हुए पलाश के फूलों का प्रयोग किया गया है। इसमें हरा रंग बनाने हेतु सूखा हुआ पालक साग, गुलाबी रंग बनाने हेतु चुकंदर, पीला रंग बनाने हेतु हल्दी एवं फूल, लाल रंग के लिए फूल का प्रयोग किया गया है और नीले रंग के लिए सिंदूर समेत अन्य प्राकृतिक फूलों और पत्तियों का उपयोग किया गया जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक है।
इसे सुगंधित बनाने के लिए प्राकृतिक एसेंस मिलाये गये हैं। इस प्रकार के गुलाल त्वचा को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचता। राज्य की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किये गये इस अभियान से हजारों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे औपचारिक रूप से मान्यता दी, जिससे यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन बन गया। योगाचार्य महेश पाल बताते है कि यह दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी दिन है।नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है। वह जीवनदायिनी है,भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता, और त्याग का स्वरूप माना गया है।
महिलाओं की भागीदारी को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष और उनके हक की भी लड़ाई की कहानी बयां करता है। इस वर्ष की थीम एक्सीलरेट एक्शन यानी कार्रवाई में तेजी लाना और तेजी से कार्य करना रखी है।
यह थीम हमें बताती है कि महिलाओं को अपने ऊपर बहुत मेहनत और तेजी से काम करने की जरूरत हैं। यह लोगों, सरकारों और संगठनों को महिलाओं के उत्थान, समान अवसर प्रदान करने और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। इस दिवस का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करना और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।
यह दिन महिलाओं के सशक्तिकरण, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और राजनीति में उनके योगदान की पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके अधिकारों और अवसरों की वकालत करता है। परिवार, समाज, देश एवं दुनिया के विकास में जितना योगदान पुरुषों का है, उतना ही महिलाओं का है। नया भारत-सशक्त भारत-विकसित के निर्माण की प्रक्रिया में महिलाएं घर परिवार की चार दीवारों को पार करके राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं।
आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, फिर भी कई चुनौतियां उनके सामने खड़ी हैं। जिसमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और समाज में आज भी घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा में असमानता, दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी बुराइयां मौजूद हैं। वहीं दूसरी और महिलाएं अपने कार्यों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वह अपने स्वास्थ की ओर ध्यान ही नहीं दे पा रही हैं।
वह दिन प्रतिदिन गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित होती जा रही हैं, जिनमें हृदय रोग,किडनी रोग, लीवर के रोग, माइग्रेन, साइनस, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, शुगर (डायबिटीज), अर्थराइटिस (जोड़ों मैं दर्द), मोटापा, डिप्रेशन, लिकोरिया, तनाव, पीसीओडी (PCOD), थायराइड, अस्थमा, चिड़चिड़ापन, गैस, कब्ज, दुबलेपन आदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बहुत तेजी से महिलाओं में बढ़ रही है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जिस प्रकार से महिलाओं के अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करने का कार्य कर रहा है उसी तरह स्वास्थ्य के प्रति भी उन्हें जागरूक करना पड़ेगा। अगर महिला दिन प्रतिदिन इसी तरह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित रही तो वह विभिन्न क्षेत्रों में अपने योगदान देने से वंचित हो सकती हैं।
महिलाओं को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग होना पड़ेगा अगर हम पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं है तो हम किसी भी कार्य को अच्छे तरीके से नहीं कर सकते हैं। अपने आप को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा माध्यम है योग प्राणायाम। नारी योग के द्वारा स्वयं को स्वस्थ बनाकर अपने परिवार व समाज को भी स्वस्थ रखने में सक्षम बन सकती हैं।
योग शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य एवं विचारों में उच्च गुणवत्ता लाने के साथ भारतीय सनातन संस्कृति व आध्यात्मिक से जोड़ने का कार्य भी करता है। प्रत्येक महिलाओं को अपने जीवन में योग को स्थान देना चाहिए और संतुलित आहार शैली व व्यवस्थित दिनचर्या को जीवन में अपनाना चाहिए, जिससे कि वह विभिन्न प्रकार के रोगों से बचे रहे और अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते हुए अपने जीवन की उच्च सफलता तक पहुंच सके।
एबीएन हेल्थ डेस्क। 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे औपचारिक रूप से मान्यता दी, जिससे यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन बन गया। योगाचार्य महेश पाल बताते है कि यह दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी दिन है।नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है। वह जीवनदायिनी है,भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता, और त्याग का स्वरूप माना गया है।
महिलाओं की भागीदारी को हर क्षेत्र में बढ़ावा देने और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष और उनके हक की भी लड़ाई की कहानी बयां करता है। इस वर्ष की थीम एक्सीलरेट एक्शन यानी कार्रवाई में तेजी लाना और तेजी से कार्य करना रखी है।
यह थीम हमें बताती है कि महिलाओं को अपने ऊपर बहुत मेहनत और तेजी से काम करने की जरूरत हैं। यह लोगों, सरकारों और संगठनों को महिलाओं के उत्थान, समान अवसर प्रदान करने और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। इस दिवस का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करना और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।
यह दिन महिलाओं के सशक्तिकरण, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और राजनीति में उनके योगदान की पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके अधिकारों और अवसरों की वकालत करता है। परिवार, समाज, देश एवं दुनिया के विकास में जितना योगदान पुरुषों का है, उतना ही महिलाओं का है। नया भारत-सशक्त भारत-विकसित के निर्माण की प्रक्रिया में महिलाएं घर परिवार की चार दीवारों को पार करके राष्ट्र निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं।
आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, फिर भी कई चुनौतियां उनके सामने खड़ी हैं। जिसमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और समाज में आज भी घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा में असमानता, दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी बुराइयां मौजूद हैं। वहीं दूसरी और महिलाएं अपने कार्यों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वह अपने स्वास्थ की ओर ध्यान ही नहीं दे पा रही हैं।
वह दिन प्रतिदिन गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित होती जा रही हैं, जिनमें हृदय रोग,किडनी रोग, लीवर के रोग, माइग्रेन, साइनस, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, शुगर (डायबिटीज), अर्थराइटिस (जोड़ों मैं दर्द), मोटापा, डिप्रेशन, लिकोरिया, तनाव, पीसीओडी (PCOD), थायराइड, अस्थमा, चिड़चिड़ापन, गैस, कब्ज, दुबलेपन आदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बहुत तेजी से महिलाओं में बढ़ रही है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जिस प्रकार से महिलाओं के अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करने का कार्य कर रहा है उसी तरह स्वास्थ्य के प्रति भी उन्हें जागरूक करना पड़ेगा। अगर महिला दिन प्रतिदिन इसी तरह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित रही तो वह विभिन्न क्षेत्रों में अपने योगदान देने से वंचित हो सकती हैं।
महिलाओं को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग होना पड़ेगा अगर हम पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं है तो हम किसी भी कार्य को अच्छे तरीके से नहीं कर सकते हैं। अपने आप को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा माध्यम है योग प्राणायाम। नारी योग के द्वारा स्वयं को स्वस्थ बनाकर अपने परिवार व समाज को भी स्वस्थ रखने में सक्षम बन सकती हैं।
योग शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य एवं विचारों में उच्च गुणवत्ता लाने के साथ भारतीय सनातन संस्कृति व आध्यात्मिक से जोड़ने का कार्य भी करता है। प्रत्येक महिलाओं को अपने जीवन में योग को स्थान देना चाहिए और संतुलित आहार शैली व व्यवस्थित दिनचर्या को जीवन में अपनाना चाहिए, जिससे कि वह विभिन्न प्रकार के रोगों से बचे रहे और अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते हुए अपने जीवन की उच्च सफलता तक पहुंच सके।
एबीएन हेल्थ डेस्क। हाल के दिनों में अस्थमा के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं की,भारत में करीब 35 मिलियन लोग अस्थमा से प्रभावित हैं। अस्थमा को दमा भी कहा जाता है। अस्थमा फेफड़ों में वायुमार्ग से संबंधित एक बीमारी है, विशेषकर इसमें साँस लेने और छोड़ने में तकलीफ महसूस होती है, ब्रोन्कियल ट्यूबों में सूजन हो जाती है, जिसके कारण मांसपेशियों के बीच से हवा पास करने में दिक्कत होती आपके फेफड़ों में कई छोटे-छोटे वायुमार्ग होते हैं, जो हवा से आक्सीजन को छानकर आपके ब्लड में पहुंचाते हैं।
लेकिन जब वायुमार्ग की परत में सूजन आ जाती है और मांसपेशियों में तनाव होता है, तो अस्थमा के संकेत आपको मिलने लगते हैं। फिर वायुमार्ग में बलगम भर जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है, जिसके कारण छाती में जकड़न और खांसी जैसी स्थिति महसूस होती है। इसे अस्थमा या दमा भी कहते हैं।
जब अस्थमा होता तो हमारे सामने कई लक्षण नजर आते हैं जिसमें छाती में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, थकान बलगम वाली खांसी या सूखी वाली खांसी, एक्सरसाइज के दौरान ज्यादा हालत गंभीर होना, रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाना,बार-बार इंफेक्शन होना, हंसते समय खांसी का बढ़ना, जैसे ही हमारे सामने यह लक्षण नजर आते हैं हमें तुरंत प्राथमिक चिकित्सा के रूप योग प्राणायाम प्रारंभ कर देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
योग के अंतर्गत भस्त्रिका प्राणायाम व भुजंगासन का अभ्यास किया जाना चाहिए, भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन आने से बचाव होता है जिससे हमें सांस लेने मै कठिनाई नहीं होती है, भुजंगासन के अभ्यास करने से छाती की जकड़न व एलर्जी दूर होती है और यह वायु मार्ग में बलगम भरने से रोकता है।
जिससे हम अस्थमा जैसी गंभीर समस्या से बच्चे रहते हैं, अस्थमा रोग होने के पीछे कई कारण होते हैं जिसमें आनुवंशिक कारण वायरल संक्रमण का इतिहास हाइजीन हाइपोथिसिस, एलर्जी रेस्पिरेटरी इंफेक्शन जैसी स्वास्थ्य स्थितियां, तंबाकू धूम्रपान, खराब लाइफस्टाइल, अव्यवस्थित भोजनचर्या, प्रदूषण अस्थमा रोग हमारी अवस्थित जीवनचार्य वह हर चर्चा के कारण हो जाता है।
तब हमारे शरीर में इससे होने वाले कई अन्य शारीरिक समस्याएं जन्म लेती है जिसमें, फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होना, श्वसन तंत्र की विफलता, निमोनिया, और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। इन सारी समस्याओं से बचाव के लिए और हमारी इम्यूनिटी क्षमता विकसित करने के लिए योग प्राणायाम अति आवश्यक है।
भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम हम सुखासन पद्मासन में बैठ जाएं दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें और धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लें और छोड़ें यह अभ्यास 5 मिनट तक करे, भुजंगासन के अभ्यास के लिए हम पेट के वल लेट जाएं दोनों हाथों को पास में रखते हुए लंबी गहरी सांस खींचते हुए दोनों हाथों को कोहनी तक सीधा रखें और नाभी तक शरीर को उठाए।
फिर आसमान की ओर ऊपर देखें कुछ देर रोककर रखे फिर वापस आ जाए, इससे हमें कई शारीरिक व मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं, हमें हमारे दिनचर्या में योग प्राणायाम को अवश्य शामिल करना चाहिए, जिससे हम अस्थमा सहित अन्य बीमारियों से हम बचे रहे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भगवान शिव राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के प्रतीक माने जाते हैं, योगाचार्य महेश पाल बताते है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का विशेष अवसर है। महाशिवरात्रि, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं और महाशिवरात्रि का व्रत रखने से पापों का नाश होता है। मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रतिवर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, योग विद्या मै भगवान शिव को आदियोगी आदि गुरु आदि नामो से जाना जाता है। भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को योग की विद्या का ज्ञान दिया, जिसको संकलित हठयोगीक ग्रंथ शिवसंहिता में किया गया। जिसमें योग ज्ञान का वर्णन, नाड़ी संस्थान का वर्णन करने के साथ ही पांच प्राण उप प्राण का वर्णन, आसन व प्राणायाम व मुद्रा और साधक की घट परिचय निष्पत्ति आदि अवस्था का वर्णन मिलता है।
आगे इसमें साधक के प्रकार व सप्त चक्र किस तरह हमारे जीवन में उपयोगी हैं। उसका विस्तार से माता पार्वती जी को भगवान शिव द्वारा बताया गया है। सामान्य मानव जीवन के लिए योग आवश्यक है। योग के द्वारा मानव अपने मन व इंद्रियों को स्थिर कर स्वयं को संसार के सभी बंधनों से मुक्त कर सकता है और धर्म की राह पर आगे बढ़कर योग द्वारा अपनी चेतना को विकसित कर अपने जीवन के उद्देश्य को पूर्ण करने में सफल हो जाता है।
ध्यान के बारे में बताया गया है कि मस्तक में जो शुभ्र-वर्ण का कमल है। योगी प्रभात-काल में उस पदम में गुरू का ध्यान करते हैं कि वह शांत, त्रिनेत्र, द्विभुज है और वह वर एवं अभय मुद्रा धारण किये हुए हैं। इस प्रकार यह ध्यान, गुरू का स्थूल ध्यान है। वही मूलाधार और लिंगमूल के मध्यगत स्थान में कुण्डलिनी सार्पाकार में विद्यमान हैं। इस स्थान में जीवात्मा दीप-शिखा के समान अवस्थित है।
इस स्थान पर ज्योति रूप ब्रह्म का ध्यान करे। पूर्व जन्म के पुण्य उदय होने पर साधक की कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होती है। यह शक्ति जाग्रत होकर आत्मा के साथ मिलकर नेत्ररंध्र-मार्ग से निकलकर उर्ध्व-भागस्थ अर्थात ब्रह्मरंध्र की तरफ जाती है और जब यह राजमार्ग नामक स्थान से गुजरती है तो उस समय यह अति सूक्ष्म और चंचल होती है। इस कारण ध्यान-योग में कुंडलिनी को देखना कठिन होता है।
साधक शांभवी-मुद्रा का अनुष्ठान करता हुआ, कुंडलिनी का ध्यान करे, इस प्रकार के ध्यान को सूक्ष्म-ध्यान कहते हैं। इस दुर्लभ ध्यान-योग द्वारा आत्मा का साक्षात्कार होता है और ध्यान सिद्धि की प्राप्ति होती है।योग आध्यात्मिक चरम व भगवान शिव के शरण मैं पहुंचाने का एक माध्यम है। जिसके द्वारा हम भगवान शिव का साक्षात्कार कर पाते और हम समस्त बंधनों से मुक्त होकर हमारी आत्मा उस परम सत्य में लीन हो जाती है।
महाशिवरात्रि को शिव तत्त्व को आत्मसात करने, नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। इसलिए मानव जीवन में योग आवश्यक है योग से हम स्वस्थ रहते हैं और आध्यात्मिक के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपनी आत्मा को परमात्मा में लीन कर देते हैं जिससे कि हमारे जीवन के उद्देश्य पूरा हो जाता, इसलिए हमें हमारी दिनचर्या में योग को जरूर स्थान देना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) ने राज अस्पताल के आपातकालीन विभाग को एनएबीएच की मान्यता दी। बोर्ड ने राज अस्पताल के आपातकालीन विभाग का मूल्यांकन किया है, और पाया कि यह एनएबीएच बोर्ड के सभी मानकों का बखूबी अनुपालन करता है।
राज हॉस्पिटल, रांची के प्रबंध निदेशक डॉ बीरेंद्र कुमार ने कहा कि एनएबीएच की मान्यता भारत में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मानक निर्धारित करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं में सर्वोत्तम गुणवत्ता और सुरक्षा के मानकों को पूरा कर सकें। वर्तमान में एनएबीएच कि मान्यता भारत में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उच्चतम बेंचमार्क मानक हैं।
आपातकालीन विभाग के प्रमाणीकरण के लिए निर्धारित किये गये मानक आपातकालीन विभाग में भर्ती मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल और सुरक्षा के लिए रूपरेखा प्रदान करते हैं।
ये मानक किसी संगठन को उनकी सेवाओं के विभिन्न पहलुओं में निरंतर गुणवत्ता बनाये रखने में मदद करते हैं। उनका लक्ष्य देश में न्यायसंगत, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली आपातकालीन चिकित्सीय सेवाएं स्थापित करना है, जिससे मरीजों को इलाज के सर्वोत्तम परिणाम मिल सकें।
आपातकालीन विभाग के प्रमुख चिकित्सक डॉ. श्याम प्रसाद (एम डी, एम ई एम) ने कहा कि 255 विभिन्न उद्देश्यों एवं 49 गुणवत्ता मानकों के कठोर निरीक्षण प्रक्रिया के बाद, राज अस्पताल को यह मान्यता प्रदान किया गया है, जिसके बाद राज अस्पताल का यह आपातकालीन विभाग एनएबीएच की गुणवत्ता मान्यता प्राप्त करने वाला झारखंड का पहला और एकमात्र अस्पताल बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज अस्पताल, रांची को पहले ही अस्पताल के लिए एनएबीएच की 5वें संस्करण की पूर्ण मान्यता मिल चुकी है और एनएबीएच इमरजेंसी के साथ हमारा अस्पताल यह उपलब्धि हासिल करने वाला पूरे झारखंड राज्य में एकमात्र अस्पताल बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 10 बेड हैं जो मरीज की इलाज एवं देखभाल के लिए उन्नत तकनीक, हर तरह की जाँच, आक्सीजन लाइन, आवश्यक दवाओं और मरीजों की उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सीय देखभाल के लिए आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित हैं। वैसे मरीज जो गंभीर रूप से बीमार है उनको भी तत्काल चिकित्सीय सहायता देने के लिए आपातकालीन विभाग में वेंटिलेटर तक की भी सुविधा उपलब्ध है। डॉ श्याम ने बताया कि हमने आपातकालीन विभाग में ही, गंभीर एवं समय-संवेदनशील बीमारियों से पीड़ित मरीजों जैसे की सड़क यातायात में दुर्घटनाग्रस्त, मस्तिष्क स्ट्रोक, दिल का दौरा, सेप्सिस इत्यादि का इलाज किया है।
कई बार हमने ऐसे मरीजों को थ्रोम्बोलाइज किया है जिन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था और इससे मरीज की जान बच गई और उन्हें जल्दी से ठीक होने में मदद मिली। एनएबीएच द्वारा निर्धारित मानक यह सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल गंभीर रूप से बीमार या घायल सभी रोगियों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और समय पर देखभाल प्रदान करे।
राज अस्पताल के सीईओ- साहिल गंभीर ने कहा कि राज अस्पताल शहर का 30 साल से अधिक पुराना कॉपोर्रेट अस्पताल है और मेरी हमेशा से यह इच्छा रही है कि जब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल में सर्वोत्तम मानक स्थापित करने की बात आती है तो हमारा संगठन इस क्षेत्र में अग्रणी रहे। फरवरी 2023 में जब हमारे अस्पताल को एनएबीएच की, 5वां संस्करण पूर्ण मान्यता प्रदान किया गया तो हमने अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की और हमारे आपातकालीन विभाग को एनएबीएच की मान्यता हमारी एक और उपलब्धि है। वर्तमान में राज अस्पताल, रांची में 25 से अधिक चकित्सिय विभाग एवं 8 अति विशिष्ट चकित्सिय सेवाएं उपलब्ध है जहां हम मरीज को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उपचार और देखभाल प्रदान करते हैं। हमारा अस्पताल 24 घंटे सातों दिन उन्नत जांच की सेवाओं, ए एल एस, फार्मेसी और विशेषज्ञ देखभाल से सुसज्जित है। हम आर्थिक और नैतिक दोनों तरीकों से इस क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान के रूप में हम शिक्षा पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और उन डॉक्टरों के लिए जो आपातकालीन चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर करना चाहते है उनके लिए केवल आपातकालीन चिकित्सा पर केंद्रित 3 वर्षो का मास्टर्स इन इमरजेंसी मेडिसन (एमईएम) कार्यक्रम सफलतापूर्वक चला रहे हैं जिसे (सोसाइटी आफ इमरजेंसी मेडिसिन इन इंडिया (एसईएमआई) के द्वारा मान्यता प्राप्त है।
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