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Published / 2022-02-21 15:12:33
यूक्रेन पर हमला से बचाव के लिए पुतिन संग बैठक करेंगे बाइडन!

एबीएन सेंट्रल डेस्क। व्हाइट हाउस ने कहा है कि रूस अगर यूक्रेन पर हमला नहीं करे तो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ सैद्धांतिक रूप से बैठक करने को तैयार हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मध्यस्थता से यह स्थिति बनी है। अमेरिका ने लगातार आगाह किया है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है और साथ ही रूस के ऐसा करने पर उस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी है। उधर, रूस ने यूक्रेन पर हमला करने के अमेरिकी दावों को खारिज किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, राष्ट्रपति ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि हम हमला शुरू होने के क्षण तक कूटनीतिक समाधान तलाश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साकी ने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी बृहस्पतिवार को यूरोप में मुलाकात करेंगे, बशर्ते रूस सैन्य कार्रवाई की तरफ नहीं बढ़े। साकी ने एक बयान में कहा, राष्ट्रपति बाइडन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सैद्धांतिक रूप से बैठक करने को तैयार हैं, अगर बैठक के बाद हमला नहीं हो। हम कूटनीतिक रास्ते पर चलने को हमेशा तैयार हैं। साकी ने कहा कि बाइडन ने मैक्रों से रविवार को बात की थी और दोनों नेताओं ने यूक्रेन की सीमाओं पर रूस के सैनिकों की तैनाती के जवाब में कूटनीतिक और प्रतिरोधात्मक प्रयासों पर चर्चा की। एक अनुमान के अनुसार, यूक्रेन के सीमाओं पर रूस ने अपने 1,50,000 सैनिकों की तैनाती की है, जबकि 30 जनवरी तक वहां एक लाख सैनिक ही थे। उन्होंने कहा, अगर रूस ने युद्ध का रास्ता चुना तो हम त्वरित एवं गंभीर कार्रवाई करने को भी तैयार हैं। वर्तमान में, रूस तेजी से यूक्रेन पर व्यापक स्तर पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक साक्षात्कार में कहा था कि राष्ट्रपति बाइडन युद्ध को रोकने के लिए पुतिन के साथ किसी भी जगह और किसी भी समय, किसी भी प्रारूप में बातचीत करने के लिए तैयार हैं। ब्लिंकन ने कहा था, जैसा हमने पहले ही कहा है कि हर कदम आक्रमण की आशंका उत्पन्न कर रहा है। ये सभी उकसावे की कार्रवाई है, ताकि अपने कदमों को उचित ठहराया जा सके। गौरतलब है कि रूस ने रविवार को यूक्रेन की उत्तरी सीमाओं के पास सैन्य अभ्यास बढ़ा दिया था। उसने यूक्रेन की उत्तरी सीमा से लगे बेलारूस में करीब 30,000 सैनिकों की तैनाती की है। साथ ही यूक्रेन की सीमाओं पर 1,50,000 सैनिकों, युद्धक विमानों और अन्य साजो-सामान की तैनाती कर रखी है। कीव की आबादी करीब 30 लाख है।

Published / 2022-02-21 07:44:29
कनाडा : एक माह बाद ट्रक चालकों का विरोध खत्म

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना से जुड़ी स्वास्थ्य नीतियों का करीब एक महीने तक विरोध करने वाले ट्रक चालकों व अन्य से कनाडा की राजधानी ओटावा की सड़कों को पूरी तरह से खाली करा लिया गया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण अमेरिका-कनाडा सीमा की कुछ चौकियों समेत राजधानी के प्रमुख हिस्सों को भी हफ्तों तक बंद करना पड़ा था। पहले यह विरोध प्रदर्शन सीमा पार के ट्रक चालकों के लिए अनिवार्य टीकाकरण के आदेश के खिलाफ था। लेकिन बाद में यह कोविड प्रतिबंधों और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के विरोध पर केंद्रित हो गया था। इस विरोध प्रदर्शन के कारण प्रधानमंत्री ट्रूडो को अपना आवास छोड़कर परिवार के साथ गुप्त स्थान पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बीते शनिवार और रविवार को पूरे दिन दंगा रोधी पुलिस ट्रक चालकों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारियों को हटाने में लगी थी। जिसके बाद कनाडा में संसद के आसपास के सभी इलाकों में अब स्थिति नियंत्रण में हैं। ओटावा में जुटे सभी प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मियों ने खदेड़ दिया है और ट्रकों के लगातार बज रहे हॉर्न अब शांत हो चुके हैं। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए घुसी पुलिस ने अब तक आंदोलन के नेताओं सहित कुल 191 लोगों को गिरफ्तार किया है और उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस बीच ज्यादातर विश्लेषकों को संदेह है कि यह विरोध प्रदर्शन कनाडा की राजनीति पर कोई ऐतिहासिक असर छोड़ेगा, लेकिन इसने कनाडा के दो प्रमुख दलों को झकझोर कर रख दिया है।

Published / 2022-02-21 06:46:04
यूक्रेन : डोनेट्स्क शहर में धमाके की आवाज सुन पुतिन से मिलने को तैयार बाइडेन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्वी यूक्रेन में रूसी समर्थित अलगाववादी के कब्जे वाले शहर डोनेट्स्क में धमाके की आवाज सुनी गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को हुए इस ब्लास्ट की वजह अभी तक पता नहीं चली है। यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने अपनी सेना को युद्ध के लिए आगे बढ़ने का आदेश दे दिया है। विभाग का कहना है कि रूसी सेना को हमले का आदेश दे दिया है या योजना के अंतिम चरण पर काम चल रहा है। हालांकि वाइट हाउस और पेंटागन ने इस बात पर मोहर नहीं लगाई है। रविवार को रूस ने यूक्रेन की उत्तरी सीमा से सैनिकों को वापस लेने की मांग को रद्द कर दिया। रूस ने सैन्य अभ्यास को बढ़ा दिया, जो कि कल ही समाप्त होने वाला था। यूक्रेन के पड़ोसी देश बेलारूस में करीब 20,000 सैनिकों को तैनात किया गया है। फिलहाल टैंक, युद्धक विमानों, तोपखाने आदि के साथ करीब 150,000 रूसी सैनिक यूक्रेन की सीमाओं के बाहर तैनात हैं। यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों की मौजूदगी से चिंता बढ़ी हुई है। आशंका जताई जा रही है कि उनका इस्तेमाल यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला करने के लिए किया जा सकता है, जो तीन घंटे से भी कम की दूरी पर स्थित है। यूक्रेन शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते पर चलेगा : सीमा पर बढ़ती हिंसा के बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संकट के समाधान की मांग की है। वलोडिमिर जेलेंस्की ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि मुझे नहीं पता कि रूसी संघ के राष्ट्रपति क्या चाहते हैं, इसलिए मैं एक बैठक का प्रस्ताव कर रहा हूं। यूक्रेन शांतिपूर्ण समाधान के लिए केवल कूटनीतिक रास्ते पर ही चलता रहेगा।

Published / 2022-02-21 02:49:51
पुतिन के हमले के आदेश पर यूक्रेन की ओर बढ़े रूसी टैंक : अमेरिकी खुफिया विभाग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी खुफिया विभाग के सूत्रों ने दावा किया है कि रूसी टैंक यूक्रेन की ओर बढ़ने लगे हैं। इन सूत्रों के अनुसार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी बलों को यूक्रेन पर हमले का आदेश दे दिया है और अब हमले की अंतिम योजना पर काम चल रहा है। यूक्रेन सीमा की ओर बढ़ रहे टैंक : इस योजना के तहत रूस, मिसाइल और हवाई हमले से पहले साइबर हमले से शुरुआत करेगा और अंत में जमीनी टुकड़ियां यूक्रेन के शहरों पर कब्जा करेंगी। रूस की अग्रिम पंक्ति की सेना के वाहनों, टैंकों पर पेंट से जेड अक्षर बनाया गया है और ये टैंक यूक्रेन सीमा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। ऐसे निशान युद्ध के दौरान मित्र और शत्रु की पहचान करने के लिए बनाए जाते हैं। यूक्रेनी विश्लेषकों का दावा है कि यूक्रेन के पास भी रूस की तरह के ही टैंक और वाहन हैं इसलिए अपनी ही सेना की गोलाबारी से बचने के लिए ये निशान बनाए गए हैं। वाहनों पर इस तरह के निशान बनाने की शुरुआत पहले खाड़ी युद्ध के दौरान अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाओं ने की थी। तब उन्होंने एक दूसरे को निशाना बनाने से बचने के लिए वाहनों पर उलटा वी का निशान बना दिया था। रूस की किसी के भूभाग को कब्जा करने की कोई मंशा नहीं है : राजदूत रूस और यूक्रेन के बीच गहराते युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका स्थित रूसी राजदूत एनातोली एंतोनोव ने रविवार को कहा कि रूस की किसी अन्य देश की जमीन पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि रूस डोनबास क्षेत्र को यूक्रेन के हिस्से के रूप में देखता है। एंतोनोव ने कहा, मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि डोनबास और लुहांस्क यूक्रेन का ही हिस्सा हैं, जिसको लेकर विवाद चल रहा है।

Published / 2022-02-20 17:11:51
बेलारूस से यूक्रेन पर हमला कर सकता है रूस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के मसले पर रूस दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। शायद यही वजह है कि अमेरिका और नाटो उसके किसी वादे पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की फौज पड़ोसी देश बेलारूस से यूक्रेन पर हमला करने की तैयारी कर रही हैं। बेलारूस में रूसी सैनिकों की तादाद बढ़ती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि रूस ने ऑफिशियल स्टेटमेंट में ये कहा था कि उसकी सेनाएं अभ्यास के बाद बेलारूस और क्रीमिया दोनों जगह से बेस पर लौट रही हैं। बेलारूस के डिफेंस मिनिस्टर के बयान से रूसी साजिश के संकेत साफ नजर आते हैं। बेलारूस में रूसी सैनिकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे यह संकेत मिलते हैं कि रूस अब अपने देश से नहीं बल्कि बेलारूस से यूक्रेन पर हमला करने का प्लान बना रहा है। पिछले हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स में कहा गया था कि बेलारूस में रूस के 13 हजार सैनिक मौजूद हैं और यहां दोनों देशों की सेनाएं मिलिट्री एक्सरसाइज कर रही हैं। इसके बाद रूस और बेलारूस दोनों ने कहा था कि एक्सरसाइज अब खत्म हो गई है और रूसी फौज अपने देश लौट रही है। खास बात यह है कि क्रीमिया को लेकर भी रूस ने यही वादा किया था और इस बारे में रूसी डिफेंस मिनिस्ट्री ने बयान भी जारी किया था। अब अमेरिकी रिपोर्ट्स कुछ और ही बता रही हैं। रूसी सरकार कई बार दुनिया को भरोसा दिलाने की नाकाम कोशिश कर चुकी है कि वो यूक्रेन पर हमले का इरादा नहीं रखती। तनाव कम करने के लिए डिप्लोमैटिक लेवल पर कई कोशिशें भी जारी हैं, हालांकि अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। शनिवार को बेलारूस की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि एक्सरसाइज खत्म हो चुकी है और रूसी फौज देश वापस जा रही है।

Published / 2022-02-20 06:41:02
अब हांगकांग में कहर बरपा रहा ओमिक्रॉन...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में कोरोना के कम होते मामलों के बीच हांगकांग में महामारी अपने चरम पर पहुंच गई है। हांगकांग में कोरोना को लेकर कड़े नियमों की वजह से महीनों तक महामारी नियंत्रित रही पर हाल के दिनों में यहां मामले तेजी से बढ़ हैं। आलम ये है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव नजर आने लगा है। हांगकांग में ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से कोरोना महामारी की ये लहर आई है। यहां पिछले साल दिसंबर में ओमिक्रॉन का पहला मामला सामने आया था और तब इसे फैलने से रोकने के लिए तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए गए। इसमें फ्लाइट पर बैन सहित एक जगह पर दो लोग से अधिक के खड़े होने पर पंबादी भी शामिल थी। हालांकि, इसके बावजूद संक्रमण के मामले काफी बढ़ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार शुक्रवार तक हांगकांग में पिछले दो महीनों में 20,200 कोरोना केस सामने आ चुके हैं। ये संख्या पिछले करीब दो साल में कोरोना के आए 12 हजार मामलों से भी अधिक है। संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण हांगकांग के अस्पतालों पर बोझ बढ़ता जा रहा है। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी स्थानीय सरकार से हालात पर काबू पाने के लिए तेजी से कदम उठाने को कहा है।

Published / 2022-02-20 03:49:24
नाटो की आशंका- यूक्रेन पर पूरी ताकत से आक्रमण की तैयारी में रूस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने भले ही कहा हो कि वह यूक्रेन बॉर्डर से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा है लेकिन अमेरिका ने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया। NATO के एक अधिकारी ने कहा कि अब स्टाफ को यूक्रेन की राजधानी से पश्चिमी शहर लीव में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके अलावा बेल्जियम में भी अधिकारियों को भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा बहुत जरूरी है इसलिए उन्हें कीव से लीव और ब्रुसेल्स में शिफ्ट किया गया है। कई अन्य पश्चिमी देशों ने पहले ही अपने राजनयिकों को कीव से हटाकर दूसरे शहर भेज दिया है। लीव शहर पोलैंड के बॉर्डर पर है और इसके आसपास रूस की सेना नहीं है। वहीं बुसेल्स में NATO का हेडक्वार्टर भी है। अमेरिका की अगुआई वाले NATO और जो बाइडन ने कहा था, रूस कुछ ही हफ्ते में यूक्रेन को निशाना बनाने जा रहा है और पहला टारगेट कीव हो सकता है। यूक्रेन NATO का सदस्य नहीं है और यहां इसकी कोई फोर्स भी नहीं है। हालांकि 1990 के बाद से कीव में NATO ने अपने दो दफ्तर बनाए थे। एक दफ्तर इसलिए बनाया गया था ताकि नाटो और यूक्रेन सरकार के बीच संवाद स्थापित हो सके और रक्षा, सुरक्षा के मामले पर ध्यान रखा जा सके। NATO चीफ ने कहा, रूस के सारे लक्षण बता रहे हैं कि वह पूरी ताकत से यूक्रेन पर हमला करने की योजना बना रहा है। हम सब इस बात पर सहमत हैं कि हमले के चांस बहुत ज्यादा हैं। पहले नाटो चीफ ने यह भी कहा था कि यूक्रोन की रक्षा के लिए कोई फोर्स नहीं तैनात की जाएगी। हालांकि अब NATO के सदस्य देशों ने यूक्रेन के पड़ोसी देशों में अपनी सेनाएं भेज दी हैं। नाटो चीफ ने भी कहा है कि रूस की तरफ से अगर हमला किया जाता है तो उसका जवाब भी दिया जाएगा।

Published / 2022-02-20 03:08:02
चालबाज चीन के साथ बेहद कठिन दौर में हैं द्विपक्षीय संबंध : जयशंकर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को एक बार फिर चीन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चीन समझौतों का उल्लंघन कर सीमा पर बार-बार भारत के लिए चुनौती पेश कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सीमा के मौजूदा हालातों पर यह संबंध पर निर्भर करेंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे विदेश मंत्री ने यहां आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने भारत-चीन सीमा तनाव पर वैश्विक मंच के समक्ष अपनी बात रखते हुए गलवान घाटी में हुए संघर्ष की याद भी दिलाई। बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं संबंध : विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि समस्या यह है कि 45 साल तक सीमा पर शांति रही, सीमा प्रबंधन स्थिर था, 1975 से सीमा पर कोई जवान हताहत नहीं हुआ था। परंतु अब यह बदल गया है। चीन के साथ वास्तविक सीमा रेखा पर कम से कम सैन्य बलों की तैनाती को लेकर भारत ने समझौते किए थे। लेकिन चीन ने उन समझौतों का उल्लंघन किया। साफ है चीन के साथ हमारे संबंध बहुत कठिन दौर में हैं। जयशंकर यहां भारत-चीन सीमा तनाव और पश्चिम की ओर भारत के रुख में निर्णायक बदलाव को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंध बहुत कठिन दौर से गुजर रहे हैं और जून 2020 से पहले भी पश्चिम के साथ संबंध काफी अच्छे थे, इसलिए जहां तक पश्चिम के साथ अच्छे संबंधों का संबंध है, तो इसके पीछे वह कोई कारण नहीं और ना ही उसने इन्हें प्रभावत किया है। उल्लेखनीय है कि जून 2020 में गलवान घाटी में चीन ने वास्तविक सीमा रेखा का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैनिकों पर हमला बोला था। इस हिंसक झड़प में कई सैनिकों ने अपनी जान गवां दी थी। हालांकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन के ज्यादा सैनिकों की मौत हुई। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ गया था। गलवान संघर्ष के बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता भी हुई, लेकिन अभी तक इसका उचित हल नहीं निकला है।

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