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Published / 2022-02-27 15:31:24
रूस ने यूक्रेन पर लगाया रासायनिक हथियार इस्तेमाल करने का आरोप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की सेना तेजी से यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला कर रही है। यह हमले का चौथा दिन है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने भी इस बात को लेकर चिंता जताई है कि जल्द ही रूस राजधानी कीव पर कब्जा कर सकता है। राष्ट्रपति जेलेंस्की को अमेरिका ने यूक्रेन छोड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया और कहा कि वह रूस के खिलाफ डटे रहेंगे। अमेरिकी एजेंसी ने सैटलाइट तस्वीरें शेयर करते हुए दावा किया है कि यूक्रेन में काफी हद तक रूस ने कब्जा कर लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है कि रूस के हमले में यूक्रेन में करीब 240 आम नागरिक मारे गए हैं। वहीं यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए भारत ऑपरेशन गंगा चला रहा है। तिन ने न्यूक्लियर फोर्स को अलर्ट पर रखा : यूक्रेन में रूसी और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के बीच रूस की ओर से बड़ी खबर सामने आ रही है। खबर मिली है कि रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने न्यूक्लियर डेटरेंट फोर्स को अलर्ट पर रहने को कहा है। इस अलर्ट के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। पश्चिमी देशों ने इसे तीसरे विश्वयुद्ध से पहले ही आहत करार दिया है। उधर, रूसी मीडिया ने दावा किया है कि यूक्रेन जंग में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल कर रही है।

Published / 2022-02-27 15:25:14
कीव में तेज संघर्ष पर बोले बाइडेन- अब "तीसरा विश्व युद्ध" ही विकल्प

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के चौथे दिन कीव पर कब्जे के लिए रूस ने हमले और तेज कर दिए तेज कर दिए हैं। रूसी हमलों में अब तक सैंकड़ों नागरिकों के मारे जाने की खबर है। उधर, रूस के सेंट्रल बैंक पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया है। जर्मनी ने रूसी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि हमारे पास तीसरा विश्व युद्ध ही विकल्प नजर आ रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि, हमारे पास दो ही विकल्प हैं एक यह है कि हम रूस से सीधे लड़ें। यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत होगी। दूसरा यह है कि, यह सुनिश्चित किया जाए कि जो भी देश अंतरराष्ट्रीय काूनन का उल्लंघन करने उसे इसकी कीमत चुकानी पड़े। मिसाइल हमले में गैस पाइपलाइन उड़ाई : रूस काफी आक्रामक हो गया है। उसने यूक्रेन के खारकीव में एक गैस पाइपलाइन को उड़ा दिया है। वहीं वासिल्किव शहर में रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों से एक तेल डिपो को भी टारगेट किया गया है। कीव में तेल डिपो पर मिसाइल हमले के बाद जहरीला धुआं फैल गया है। इससे लोगों को सांस लेने तक में समस्या हो रही है। इस बीच चेतावनी जारी की गई है कि, लोग घरों से बाहर न निकलें और घर की खिड़की तक न खोलें।

Published / 2022-02-27 12:02:30
खारकीव में रूस ने उड़ाई गैस पाइपलाइन, रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोजल साइट पर भी एयरस्ट्राइक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन के छिड़ी जंग का आज चौथा दिन है। कीव पर कब्जे के लिए रूस ने हमले और भी ज्यादा तेज कर दिए हैं। रूसी हमलों में अब तक 64 नागरिकों के मारे जाने की खबर है। उधर, रूस के सेंट्रल बैंक पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया है। जर्मनी ने रूसी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। सोमवार को रूसी मुद्रा बाजार में हो सकती है भारी गिरावट : यूक्रेन में जंग छेड़ चुके रूस को कई आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच रूसी सेंट्रल बैंक के पूर्व शीर्ष अधिकारी ने आशंका जताई है कि, सोमवार तक रूसी मुद्रा बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। तेल डिपो पर मिसाइल हमला, गैस पाइपलाइन उड़ाई : रूस काफी आक्रामक हो गया है। उसने यूक्रेन के खारकीव में एक गैस पाइपलाइन को उड़ा दिया है। वहीं वासिल्किव शहर में रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों से एक तेल डिपो को भी टारगेट किया गया है। कीव पर कब्जे के लिए रूस ने चारों ओर से हमला बोल दिया है। रात नौ बजे के बाद से यहां दो धमाके हुए हैं। इस बीच खबर है कि रूस ने कीव के पास स्थित रेडियोएक्टिव वेस्ट डिस्पोजल साइट पर एयरस्ट्राइक कर दी है। हालांकि, अभी तक यहां से रिसाव की कोई खबर नहीं है।

Published / 2022-02-27 04:00:05
रूस-यूक्रेन विवाद : क्या है झगड़े की जड़, क्यों है तीसरे विश्व युद्ध का खतरा...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कई दिनों के तनाव व आशंकाओं के बाद आखिरकार रूस व यूक्रेन के बीच आज जंग छिड़ ही गई। अगले कुछ घंटों में यह निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। युद्ध ने यूरोप में महायुद्ध व तीसरे विश्व के हालात पैदा कर दिए हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है? सोवियत संघ के जमाने में कभी मित्र रहे ये प्रांत दो देश बनने के बाद एक दूसरे के शत्रु क्यों बन गए हैं? 10 बिंदुओं में समझिये पूरा मामला : 1. यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी है। 1991 तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ का हिस्सा था। 2. रूस और यूक्रेन के बीच तनाव नवंबर 2013 में तब शुरू हुआ जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का कीव में विरोध शुरू हुआ। जबकि उन्हें रूस का समर्थन था। 3. यानुकोविच को अमेरिका-ब्रिटेन समर्थित प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण फरवरी 2014 में देश छोड़कर भागना पड़ा। 4. इससे खफा होकर रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वहां के अलगाववादियों को समर्थन दिया। इन अलगाववादियों ने पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 5. 2014 के बाद से रूस समर्थक अलगाववादियों और यूक्रेन की सेना के बीच डोनबास प्रांत में संघर्ष चल रहा था। 6. इससे पहले जब 1991 में यूक्रेन सोवियत संघ से अलग हुआ था तब भी कई बार क्रीमिया को लेकर दोनों देशों में टकराव हुआ। 7. 2014 के बाद रूस व यूक्रेन में लगातार तनाव व टकराव को रोकने व शांति कायम कराने के लिए पश्चिमी देशों ने पहल की। फ्रांस और जर्मनी ने 2015 में बेलारूस की राजधानी मिन्स्क में दोनों के बीच शांति व संघर्ष विराम का समझौता कराया। 8. हाल ही में यूक्रेन ने नाटो से करीबी व दोस्ती गांठना शुरू किया। यूक्रेन के नाटो से अच्छे रिश्ते हैं। 1949 में तत्कालीन सोवियत संघ से निपटने के लिए नाटो यानी "उत्तर अटलांटिक संधि संगठन" बनाया गया था। यूक्रेन की नाटो से करीबी रूस को नागवार गुजरने लगी। 9. अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के 30 देश नाटो के सदस्य हैं। यदि कोई देश किसी तीसरे देश पर हमला करता है तो नाटो के सभी सदस्य देश एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। रूस चाहता है कि नाटो अपना विस्तार न करे। राष्ट्रपति पुतिन इसी मांग को लेकर यूक्रेन व पश्चिमी देशों पर दबाव डाल रहे थे। 10. आखिरकार रूस ने अमेरिका व अन्य देशों की पाबंदियों की परवाह किए बगैर गुरुवार को यूक्रेन पर हमला बोल दिया। अब तक तो नाटो, अमेरिका व किसी अन्य देश ने यूक्रेन के समर्थन में जंग में कूदने का एलान नहीं किया है। वे यूक्रेन की परोक्ष मदद कर रहे हैं, ऐसे में कहना मुश्किल है कि यह जंग क्या मोड़ लेगी। यदि यूरोप के देशों या अमेरिका ने रूस के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की तो समूची दुनिया के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है।

Published / 2022-02-26 17:24:32
कीव में "सख्त कर्फ्यू" तोड़ने वाले माने जायेंगे दुश्मन : मेयर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन की राजधानी के मेयर ने शहर में रूसी सैनिकों के हमले के चलते कर्फ्यू की अवधि को बढ़ा दिया है। मेयर विटाली क्लिट्स्चको ने टेलीग्राम पर कहा कि शाम पांच बजे से सुबह आठ बजे तक कीव में कड़ा कर्फ्यू लागू रहेगा। उन्होंने कहा, कर्फ्यू के दौरान सड़क पर मौजूद सभी नागरिकों को दुश्मन के तोड़फोड़ और टोही समूहों का सदस्य माना जाएगा।दो दिन पहले लागू किया गया कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक था। उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है तथा शांति और युद्धविराम पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव सर्गेई निकिफोरोव ने शनिवार को यहां यह जानकारी दी। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, मैं उन आरोपों का खंडन करता हूं जिसमें कहा जा रहा था कि हमने बातचीत करने से इनकार कर दिया है। यूक्रेन हमेशा से शांति और युद्धविराम पर बातचीत के लिए तैयार रहा है। यह हमारी स्थायी स्थिति है। हमने रूसी राष्ट्रपति के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। रूसी समाचार एजेंसी तास ने यह सूचना दी। निकिफोरोव के अनुसार, बातचीत के स्थान और समय के बारे में विचार-विमर्श चल रहा है। जितनी जल्दी वार्ता शुरू होगी, सामान्य जीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी। रूसी समाचार एजेंसी तास ने यह सूचना दी। निकिफोरोव के अनुसार, बातचीत के स्थान और समय के बारे में विचार-विमर्श चल रहा है। जितनी जल्दी वार्ता शुरू होगी, सामान्य जीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी। पुतिन ने गुरुवार सुबह एक टेलीविज़न संबोधन में कहा था कि डोनबास गणराज्यों के प्रमुखों के अनुरोध के जवाब में उन्होंने लोगों की रक्षा के लिए एक विशेष सैन्य अभियान चलाने का निर्णय लिया था। ये लोग पिछले आठ साल से यूक्रेन सरकार के दुर्व्यवहार को झेल रहे थे और नरसंहार का शिकार हुए थे। रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा था कि रूस की यूक्रेनी क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। घटनाक्रमों को स्पष्ट करते हुए, रूसी रक्षा मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि रूसी सैनिक यूक्रेनी शहरों को लक्षित नहीं कर रहे हैं। वह केवल हवाई हमलों और यूक्रेनी सेना के बुनियादी ढांचे को ही ध्वस्त कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि नागरिक आबादी को कोई खतरा नहीं है।

Published / 2022-02-26 15:11:19
यूक्रेन का दावा : युद्ध में 14 एयरक्राफ्ट, 8 हेलिकॉप्टर और 102 टैंक समेत रूस को भारी नुकसान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन ने गुरुवार से शुरू हुए युद्ध में रूस के 14 विमान, आठ हैलीकॉप्टर, 102 टैंक, 536 बीबीएम, 15 भारी मशीनी गन और एक बीयूके मिसाइल को मार गिराया है। सशस्त्र बलों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्रेमलिन ने अपने 3500 सैनिकों को खो दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के गुरुवार सुबह पांच बजे हमले की घोषणा की थी। रूसी सैनिकों के यूक्रेन में हवाई क्षेत्रों और सैन्य डिपो, नागरिकों ठिकानों पर हवाई हमले जारी है। रूस सैनिकों ने हवाई हमलों में यूक्रेन के सुमी, पोल्टावा, मारियुपोल और कीव शहरों को निशाना बनाया गया। काला सागर से रूस ने पूरे यूक्रेन में क्रूज मिसाइलें दागीं। रूस का हवाई हमला बेलारूस से शुरू हुआ और क्रीमिया पर कब्जा कर लिया।

Published / 2022-02-26 08:26:32
अमेरिका से रूठा रूस बोला- फुटबॉल के मैदान जितना 500 टन वजनी आईएसएस भारत या चीन पर गिरा दें?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन पर हमला बोलने के बाद रूस कई तरह के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर कुछ ऐसे प्रतिबंध लगाए हैं, जो उसके अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। इस बीच रूस ने एक बार फिर से दुनिया और विशेष तौर पर अमेरिका को धमकी दी है। रूस ने कहा है कि, अगर वह इस तरह से प्रतिबंध जारी रखेगा तो, वह अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) को यूरोप या संयुक्त राज्य पर गिरा देगा। दरअसल, वर्तमान में आईएसएस पर अमेरिका, रूस और जर्मनी जैसे कई देश मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत चार अमेरिकी, दो रूसी और एक जर्मन अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रैविटी में साथ-साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की घोषणा के बाद रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रमुख दमित्री रोगोजिन का बयान सामने आया है। उन्होंने ट्वीट करके अमेरिका को साफ लहजे में धमकी दी है। रोगोजिन ने ट्वीट में लिखा है, यदि आप हमारे साथ सहयोग रोकते हैं तो आईएसएस अनियंत्रित होकर कहीं भी गिर सकता है। विशेष तौर पर यह यूरोप या अमेरिका में गिर सकता है। भारत-चीन पर गिराने का भी है विकल्प : दिमित्री रोगोजिन ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि, हमारे पास इस 500 टन के ढांचे को भारत और चीन में गिराने का भी विकल्प खुला हुआ है। क्या आप उन्हें ऐसी संभावना से धमकाना चाहते हैं? आईएसएस रूस के ऊपर से नहीं उड़ता है। ऐसे में प्रतिबंध लगाने से पहले आप जान लें कि आपको क्या करना है? एक फुटबॉल के मैदान जैसा है आईएसएस का आकार : पृथ्वी के करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को स्थापित किया जा रहा है। इस स्पेस स्टेशन का वजन करीब 500 टन है और यह एक फुटबाल के मैदान जैसे आकार का है। ऐसे में अगर यह अनियंत्रित होकर कहीं भी गिरेगा तो भारी तबाही होगी। वहीं रूस, अमेरिका और जर्मनी इस पर मिलकर काम कर रहे हैं। रूस को मनाने नासा आया सामने : रूस की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा स्पेस स्टेशन गिराने की धमकी के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का बयान सामने आया है। नासा ने कहा है कि नए प्रतिबंध दोनों देशों के बीच अंतरक्षि सहयोग को खतरे में नहीं डालेंगे। हमारे साझा अंतरिक्ष कार्यक्रम में बदलाव की कोई योजना नहीं है। बाइडेन ने लगाए थे कई प्रतिबंध : यूक्रेन मसले पर अमेरिका ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। हाल ही में अमेरिका ने नए प्रतिबंधों के तहत प्रौद्योगिकी निर्यात को रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि नए प्रतिबंध रूस की सैन्य और एयरोस्पेस क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता को सीमित करेंगे।

Published / 2022-02-26 03:15:36
भारत, चीन और यूएई ने रोकी रूस के वीटो पावर की राह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को यूक्रेन पर रूसी हमले को रोकने और सेना को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस दौरान रूस ने प्रस्ताव पर वीटो किया। सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों में रूस भी शामिल है। उधर, भारत, चीन और यूएई ने हमले की निंदा करते मतदान में हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर हमले के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में 15 में से 11 सदस्य देशों ने वोट किया। वहीं, रूस ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल किया। उधर, भारत, चीन और यूएई ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, यूक्रेन में हाल ही में हुए घटनाक्रम से भारत बेहद परेशान है। हम आग्रह करते हैं कि हिंसा और शत्रुता को तत्काल समाप्त के सभी प्रयास किए जाएं। नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकाला गया है। हम भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जिसमें यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र शामिल हैं। इस बात से खेद है कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया है। हमें उस पर लौटना होगा। इन सभी कारणों से भारत ने इस प्रस्ताव पर परहेज करने का विकल्प चुना है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा, हमारे बुनियादी सिद्धांतों पर रूस का हमला ढीठ और बेशर्मी भरा है, यह हमारी अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए खतरा है। इन देशों ने रूस के खिलाफ किया वोट : रूस के खिलाफ प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, अल्बानिया, ब्राजील, गैबॉन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको और नॉर्वे हैं।

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