एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की ओर से छेड़े गए इस युद्ध का असर दोनों ही देशों पर पड़ने की संभावना है। जहां पहले ही रूस-यूक्रेन कोरोनावायरस की वजह से बड़े नुकसान झेल चुके हैं। वहीं, अब युद्ध का नुकसान भी दोनों देशों को उठाना पड़ेगा। जर्मनी के कील इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों की तरफ से लगाया गया हर एक प्रतिबंध रूस के लिए कांटे की तरह है। इसमें कहा गया है कि अगर यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका रूस पर तेल और गैस से जुड़े प्रतिबंधों का एलान करते हैं, तो उसकी 120 लाख करोड़ रुपये (1600 अरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था, जो कि मुख्य तौर पर तेल-गैस के निर्यात पर निर्भर है, वह एक बार में 4.1 फीसदी तक गिर जाएगी। वहीं, अब तक लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से रूस का बाकी सामान का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है, जिससे रूस को लगातार नुकसान उठाने पड़ रहे हैं। पश्चिमी देशों की तरफ से मशीनरी और उपकरणों पर प्रतिबंधों की वजह से रूस को अर्थव्यवस्था में 0.5 फीसदी, मोटर वाहन और पार्ट्स में प्रतिबंधों की वजह से 0.3 फीसदी और इलेक्ट्रिक उपकरणों पर प्रतिबंध के चलते 0.1 फीसदी जीडीपी का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसके अलावा करीब एक दर्जन अन्य क्षेत्रों पर यूरोपीय देशों के प्रतिबंध से रूस की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह तबाह होने की संभावना है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर रूस इस बीच बाकी देशों की तेल-गैस सप्लाई बंद करने की धमकी देता है, तो भी इससे पुतिन सरकार का नुकसान ही ज्यादा है, क्योंकि इन हालात में रूस के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से घटता जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी सैनिकों ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा जमा लिया है। इसके बाद से यहां से होने वाले रेडिएशन में बढ़त दर्ज की गई है। यूक्रेन सरकार ने बीते गुरुवार को बताया था कि रूसी सैनिकों ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया है। इसी जगह पर साल 1986 में भयानक परमाणु त्रासदी हुई थी। इस क्षेत्र से होने वाले रेडिएशन पर नजर रखने वाली संस्थाओं ने बीते गुरुवार को बताया है कि यहां पर रेडिएशन बीस गुना तक बढ़ गया है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इस क्षेत्र में एक अन्य परमाणु हादसा होने की आशंकाएं काफी कम है। यूक्रेन के परमाणु नियामक के मुताबिक, रेडिएशन (विकिरण) में दर्ज की गई बढ़त की वजह 4000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस परमाणु संयंत्र क्षेत्र में अचानक गाड़ियों की आवाजाही का बढ़ना है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी क्षतिग्रस्त परमाणु रिएक्टर के करीब : रेडिएशन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी क्षतिग्रस्त परमाणु रिएक्टर के करीब दर्ज की गई है। यहां पर रेडिएशन के स्तर पर लगातार नजर रखी जाती है। यहां हर घंटे रेडिएशन की मात्रा मापी जाती है। रिएक्टर के करीब सामान्य स्थितियों में प्रति घंटे तीन माइक्रोसिएवर्ट्स रेडिएशन का सामना करना होता है। लेकिन गुरुवार को यह मात्रा बढ़कर प्रतिघंटे 65 माइक्रोसिएवर्ट्स तक पहुंच गई जो कि उस मात्रा की पांच गुना है जो एक ट्रांस-अटलांटिक फ्लाइट में होती है। शेफील्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी न्यूक्लियर मटीरियल विशेषज्ञ प्रोफेसर क्लेयर कॉरखिल ने बताया है कि यह बढ़ोतरी एक जगह पर केंद्रित थी और रिएक्टर क्षेत्र की तरफ आने वाली मुख्य सड़कों पर भी बढ़ोतरी देखी गई है। प्रोफेसर कॉरखिल कहती हैं कि चेर्नोबिल जोन में और इसके नजदीकी क्षेत्रों में वाहन और लोगों की आवाजाही बढ़ने से रेडियोऐक्टिव धूल उड़ी होगी। उन्होंने ये भी कहा है कि अगर आने वाले दिनों में आवाजाही नहीं होती है तो रेडिएशन लेवल गिरना चाहिए। लेकिन इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि चिंताजनक है। यूक्रेन सरकार ने बताया है कि रूसी सैन्य टुकड़ियों ने यूक्रेन की सैन्य टुकड़ियों के साथ भीषण संघर्ष के बाद राजधानी कीएव से लगभग 130 किलोमीटर उत्तर की दिशा में स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की सेना तेजी से यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला कर रही है। यह हमले का पांचवां दिन है। यूक्रेन की सेना डटकर रूस का सामना कर रही है लेकिन बताया जा रहा है कि उसके लिए यह बेहद मुश्किल दिन है। यूक्रेन की मदद के लिए यूरोपीय संघ ने हथियार भेजना का फैसला किया। वहीं यूक्रेन के मुद्दे को लेकर ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई। 15 सदस्यों में से 11 ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसको लेकर चर्चा कराने का समर्थन किया है। वहीं यूक्रेन का दावा है कि उसने 4300 से ज्यादा रूसी सैनिकों को मार गिराया है और 200 से ज्यादा को युद्धबंदी बनाया गया है। रूस ने रविवार को घोषणा की कि उसका एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए बेलारूस रवाना हो गया है, जिसके कुछ घंटे बाद यूक्रेन की ओर से यह प्रतिक्रिया आई है। यूक्रेन के अधिकारियों ने पहले इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वार्ता बेलारूस के बजाय कहीं और होनी चाहिए क्योंकि रूस ने बेलारूस में भारी संख्या में सैनिकों को तैनात कर रखा है। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल इगोर कोनाशेन्कोव ने रविवार को कहा, हमारे कुछ सैनिकों की जान गई है और कुछ घायल हुए हैं। उन्होंने मृतकों और घायलों की संख्या का खुलासा नहीं किया। मेजर जनरल कोनाशेन्कोव ने कहा कि यूक्रेन के सैनिकों के मुकाबले रूस कोकाफी कम नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस के साढ़े तीन हजार सैनिक मार गिराए। कोनाशेन्कोव ने यह भी कहा कि बृहस्पतिवार को हमला शुरू होने से लेकर अब तक रूस की सेना ने यूकेन के 1,067 सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है, जिनमें 17 कमान पोस्ट और संपर्क केंद्र, 38 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली और 56 रडार प्रणाली शामिल हैं। कोनाशेन्कोव और यूक्रेन के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ दुनिया भर में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। सप्ताहांत पर ब्रिटेन के कई हिस्सों में हजारों प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकाली। लंदन में रूस के दूतावास पर लोगों ने अंडे फेंके और दीवारों पर हमला खत्म करने संबंधी नारे लिख दिए। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला करने का आदेश दिया था। लंदन में शनिवार को डाउनिंग स्ट्रीट, मैनचेस्टर और एडिनबरा में प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ (ईयू) समेत पश्चिमी सहयोगी देशों ने रूस पर और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है तथा उसके बैंकों को एसडब्ल्यूआईएफटी बैंकिंग नेटवर्क से निकाल दिया है। इस कदम का मकसद रूस के तेल एवं गैस निर्यात को चोट पहुंचाना है। इससे पहले यूक्रेन पर रूस के हमले के विरोध में बर्लिन में लगभग एक लाख लोगों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने बताया कि मध्य बर्लिन में ब्रैंडनबर्ग गेट के आसपास भारी संख्या में लोग एकत्र हुए हैं, उन्हें अतिरिक्त जगह मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि रविवार को हुआ प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। विरोध प्रदर्शन में बच्चों समेत परिवारों ने भाग लिया। लोगों ने यूक्रेन के समर्थन में पीले और नीले झंडे लहराए। कुछ लोगों ने यूक्रेन छोड़ो, पुतिन जाओ-इलाज कराओ और यूक्रेन एवं दुनिया को शांत रहने दो... लिखी हुई तख्तियां लेकर भी प्रदर्शन किया। यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ दुनियाभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे पहले भी अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम के अलावा यूरोप के कई देशों में भी लोग सड़कों पर उतरे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, हमने रूस को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर निकालने के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ आज रात निर्णायक कार्रवाई की है, जिसमें एसडब्ल्यूआईएफटी से रूसी बैंकों को बाहर निकालने का पहला अहम कदम भी शामिल है। उन्होंने कहा, हम यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे कि पुतिन को अपनी आक्रामकता की कीमत चुकानी पड़े। इस बीच, ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रूस ने कहा कि सरकार हर उस ब्रिटिश नागरिक का समर्थन करेगी जो रूसियों के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेन के लोगों के साथ शामिल होना चाहते हैं और उन्हें अपना फैसला खुद करना है। ट्रूस ने बीबीसी से कहा- बिल्कुल, अगर लोग संघर्ष में समर्थन देना चाहते हैं, तो मैं उनका ऐसा करने के लिए समर्थन करूंगी। उन्होंने कहा, यूक्रेन के लोग आजादी और लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं... राष्ट्रपति पुतिन इसे चुनौती दे रहे हैं। ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत वादिम प्रिस्टाइको ने कहा कि बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक लड़ाई में यूक्रेन की ओर से लड़ने की अनुमति मांग रहे हैं। यूक्रेन पर रूसी हमले का रविवार को चौथा दिन था। इससे पहले रविवार को, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने विदेशी नागरिकों से यूरोप में सुरक्षा के लिए साथ आने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि उनका देश रूसी सेना के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेनी सेना में शामिल होने के इच्छुक विदेशियों के लिए स्वयंसेवकों की एक अंतरराष्ट्रीय फौज स्थापित कर रहा है। ज़ेलेंस्की के हवाले से उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर कहा गया है- यह सिर्फ रूस का यूक्रेन पर आक्रमण नहीं है, बल्कि यह यूरोप के खिलाफ युद्ध की शुरुआत है। यूरोपीय एकता के खिलाफ ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने ब्रिटिश सैनिक भेजने से इनकार किया लेकिन कहा कि ब्रिटेन इस लड़ाई में जिस तरह से भी होगा यूक्रेन का साथ देगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के कई हवाई अड्डों, ईंधन केंद्रों तथा अन्य प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद रविवार को रूसी सेना ने दक्षिण क्षेत्र में स्थित रणनीतिक बंदरगाहों पर भी नियंत्रण करन का प्रयास किया लेकिन शहरों में उसे जबरदस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। राजधानी कीव सुबह धमाकों से दहल उठी। अधिकारियों ने एक हवाई अड्डे पर विस्फोट की सूचना दी है। शहर की सुनसान पड़ी मुख्य सड़कों पर गिनती की कारें ही दिखीं। कीव में 39 घंटे के कर्फ्यू के कारण लोग सड़कों से दूर रहे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा, हम अपने देश के लिए लड़ रहे हैं, अपनी आजादी को बनाए रखने के लिए लड़ रहे हैं क्योंकि हमें ऐसा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, पिछली रात कठिन थी। भीषण गोलाबारी हुई, रिहायशी क्षेत्रों में भी बमबारी की गई और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। हमलावर सैन्य-असैन्य सभी स्थानों को निशाने पर ले रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के मुताबिक सैन्य बढ़त बनाने के बाद रूस ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए एक प्रतिनिधिमंडल को बेलारूस भेजा। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने अन्य स्थानों पर वार्ता का प्रस्ताव देते हुए कहा कि उनका देश बेलारूस में बैठक करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उसने आक्रमण में रूस की मदद की है। रूसी सैनिक रविवार को खारकीव के बाहरी इलाके तक पहुंच गए हैं। खारकीव रूस की सीमा से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। बाकी इलाकों में सेना भीतरी क्षेत्रों में दाखिल होने की कोशिश कर रही है। यूक्रेन की मीडिया और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में रूसी वाहनों को खारकीव में चक्कर लगाते हुए देखा गया और एक वाहन सड़क पर जलता नजर आया। एक वीडियो में यूक्रेनी सैनिकों को रूसी सैन्य वाहनों का निरीक्षण करते हुए देखा गया, जिन्हें रूसी सैनिक गोलाबारी में क्षतिग्रस्त होने के बाद छोड़ गए हैं। तस्वीरों व वीडियो से संकेत मिलता है कि रूसी सैनिकों को शहरों में यूक्रेनी सेना से कड़ा प्रतिरोध मिल रहा है। यूक्रेन के आम लोग भी स्वेच्छा से कीव और अन्य शहरों की रक्षा में मदद करने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने अधिकारियों द्वारा वितरित बंदूकें लीं और रूसी सेना से लड़ने के लिए मोर्चा संभाल लिया। यूक्रेन के अभियोजक कार्यालय के अधिकारी एंड्री सिन्युक ने रविवार को होरोमाडस्के टीवी चैनल को बताया कि सरकार सैन्य अनुभव रखने वाले कैदियों को रिहा कर रही है जो देश के लिए लड़ना चाहते हैं। उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या यह कदम सभी तरह के अपराधों के दोषी करार दिए गए कैदियों पर लागू होता है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने जवाबी कदम के साथ यूक्रेन को हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति करने तथा मास्को को और अलग-थलग करने के इरादे से कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। कीव के मेयर के अनुसार, वासिलकिव में हवाई अड्डे के पास एक तेल डिपो से आग की लपटें आसमान में फैल गईं। इस क्षेत्र में रूस की सेना से यूक्रेनी सैनिकों की भीषण लड़ाई हुई। राष्ट्रपति जेलेंस्की के कार्यालय ने कहा कि असैन्य जुलियानी हवाई अड्डे पर एक और विस्फोट हुआ। जेलेंस्की के कार्यालय ने यह भी कहा कि रूसी सेना ने खारकीव में एक गैस पाइपलाइन को उड़ा दिया। बमबारी के डर से कीव में बच्चों समेत लोगों ने बंकरों और भूमिगत मेट्रो स्टेशनों, अन्य जगहों पर पनाह ली।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की ओर से यूक्रेन में सेना भेजने के चार दिन बाद भी यूक्रेनी सेना ने घुटने नहीं टेके हैं। इसके चलते रूस की सेना को अब तक किसी बड़े शहर पर कब्जा करने में कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। उल्टा अपने कदमों के लिए रूस को ही यूरोपीय देशों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इन स्थितियों को लेकर अब रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भड़क उठे हैं। रविवार को उन्होंने अपनी परमाणु सेना को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। क्या रहा रक्षा मंत्री के साथ बैठक में पुतिन का आदेश : बताया गया है कि पुतिन ने यह आदेश रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और सैन्य प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव के साथ बैठक के बाद लिया। इसमें उन्होंने कहा, नाटो देशों के वरिष्ठ अधिकारी हमारे खिलाफ भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। पश्चिमी देश हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई भी कर रहे हैं। इसलिए मैं अपने रक्षा मंत्रालय और सेना को युद्ध के लिए परमाणु बलों को तैयार रखने का निर्देश देता हूं।गौरतलब है कि यूक्रेन में अपनी कार्रवाई को लेकर रूसी राष्ट्रपति पहले ही पश्चिमी देशों के अंजाम भुगतने की चेतावनी दे चुके हैं। क्या हैं पुतिन के इस आदेश के मायने : रूसी राष्ट्रपति की ओर से अपनी परमाणु सेना को हाई-अलर्ट पर रखे जाने का सीधा मलतब है कि पश्चिमी देशों की तरफ से यूक्रेन के बचाव के लिए उठाया गया कोई भी कदम रूस पर आक्रमण के तौर पर देखा जाएगा और इससे परमाणु युद्ध छिड़ने की आशंका है। दुनियाभर में हो रही पुतिन की इस धमकी की निंदा : परमाणु सेना को तैयार रखने के पुतिन के निर्देश की अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देशों ने निंदा की है। जहां अमेरिका ने पुतिन की इन धमकियों को गीदड़भभकी करार देते हुए कहा कि रूसी राष्ट्रपति ये कई बार कर चुके हैं। ब्लादिमीर पुतिन की ओर से परमाणु सेना को अलर्ट करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने एक समाचार कार्यक्रम में बयान दिया। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति पुतिन इस युद्ध को जिस तरीके से बढ़ा रहे हैं वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, हमें उनकी इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करनी चाहिए। पुतिन के आदेश का व्यावहारिक अर्थ क्या है यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। वहीं नाटो सेना के प्रमुख ने कहा कि पुतिन की इस तरह की धमकी खतरनाक और गैरजिम्मेदाराना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका ने इस साल 31 दिसंबर तक भारत में अपने दूतावासों में छात्रों तथा कामगारों समेत कई वीजा आवेदकों के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होकर साक्षात्कार देने की अनिवार्यता में छूट दी है। अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक ने भारतीय समुदाय के नेताओं को यह जानकारी मुहैया कराई। जिन आवेदकों को छूट मिली हैं, उनमें छात्र (एफ, एम और अकादमिक जे वीजा), कामगार (एच-1, एच-2, एच-3 और व्यक्तिगत एल वीजा), संस्कृति और असाधारण क्षमता के लोग (ओ, पी तथा क्यू वीजा) शामिल हैं। दक्षिण एशिया समुदाय के नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के एशियाई अमेरिकियों के लिए सलाहकार अजय जैन भूटोरिया ने दक्षिण मध्य एशिया के सहायक विदेश मंत्री डोनल लू से मुलाकात के बाद कहा, वीजा आवेदकों को इस सहयोग की काफी आवश्यकता थी। हमारे दोस्तों और करीबी परिजनों के लिए यह काफी मददगार होगा तथा उनकी कई चिंताएं खत्म हो गईं और असुविधाएं दूर होंगी। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की वेबसाइट पर प्रकाशित एक नोटिस के अनुसार, नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास और चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता तथा मुंबई में उसके वाणिज्य दूतावास योग्य आवेदकों को साक्षात्कार देने की छूट का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए 2022 के लिए 20,000 से अधिक अतिरिक्त छूट (ड्रॉप बॉक्स) अपॉइंटमेंट जारी करेंगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव में हमले तेज कर दिए हैं। कीव में जबरदस्त जंग चल रही है और रूसी जवान कीव पर नियत्रण पाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेन की मदद के लिए यूरोप के दूसरे देशों ने भी सैन्य साजो सामान भेजा है। अब ताजा खबर है कि रूस ने भी यूक्रेन से वार्ता के लिए दिलचस्पी दिखाई है और इसके लिए रूसी अधिकारी बेलारूस पहुंच गए हैं। यह जानकारी क्रेमलिन ने दी। बता दें कि शनिवार को ही रूसी समाचार एजेंसी ने बताया था कि यूक्रेन रूस से वार्ता के लिए राजी हो गया है। वार्ता के दौर शुरू की खबर आते ही दुनिया भर के लोगों को तीसरे विश्व युद्ध की आहट टलने की उम्मीद नजर आने लगी है। हालांकि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने वर्चुअल भाषण में अपनी शर्त रखते हुए कहा कि वो रूस के साथ बातचीत करने को तैयार है, लेकिन पड़ोसी देश बेलारूस में नहीं क्योंकि इसका इस्तेमाल आक्रमण के लिए लॉन्चपैड के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए वारसा, बुडापेस्ट, इस्तांबुल, बाकू का सुझाव दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए रूस का एक प्रतिनिधिमंडल बेलारूस पहुंचा है। उनके मुताबिक रूसी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति प्रशासन सहित अन्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल के साथ ये वार्ता गोमेल में होगी। स्पूतनिक की खबर के मुताबिक बेलारूसी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि मिन्स्क ने गोमेल में रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता के लिए आवश्यक सभी चीजें तैयार कर ली है। बता दें कि शनिवार को ये खबर सामने आई थी कि यूक्रेन रूस से बातचीत के लिए राजी हो गया है लेकिन वो ये बातचीत वर्सा में करना चाहता है जबकि रूस इस वार्ता को बेलारूस के मिन्स्क में करना चाहता था। काफी असमंजस के बाद यूक्रेन भी इस वार्ता के लिए राजी हो गया है। बता दें कि रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद रूस की तरफ से यूक्रेन पर चौतरफा हमला किया गया है। इसमें यूक्रेन को भारी क्षति भी उठानी पड़ी है साथ ही रूस को भी नुकसान हुआ है। इस बीच अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।
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