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Published / 2022-03-30 06:25:41
भारत की यात्रा करते समय ज्यादा सतर्क रहें नागरिक : अमेरिका

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका ने मंगलवार को एक नए यात्रा परामर्श में अपने नागरिकों से भारत की यात्रा करते समय अधिक सतर्क रहने का आग्रह किया और उन्हें जम्मू-कश्मीर तथा भारत-पाकिस्तान सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाने की सलाह भी दी है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक नए यात्रा परामर्श में कहा, अपराध और आतंकवाद के कारण भारत को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की यात्रा के जोखिम स्तर को कम करते हुए स्तर-3 से स्तर-2 किया जा रहा है। अमेरिका द्वारा आखिरी यात्रा परामर्श 25 जनवरी को जारी किया गया था। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक दिन पहले ही भारत में कोविड-19 के कम होते मामलों के मद्देनजर उसके लिए स्तर-1 का ट्रेवल हेल्थ नोटिस जारी किया था। दोनों परामर्श इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अमेरिका को लगता है कि भारत में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और भारत तथा पाकिस्तान सीमा पर उसका नजरिया हालांकि अब भी वही है, जहां वह अपने नागरिकों को यात्रा नहीं करने की ही सलाह दे रहा है। परामर्श में कहा गया, केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमले और हिंसक नागरिक प्रदर्शन की आशंका है। इस केन्द्र शासित प्रदेश पूर्वी लद्दाख क्षेत्र और उसकी राजधानी लेह को छोड़कर की यात्रा करने से बचें। विदेश मंत्रालय ने कहा कि छिटपुट हिंसा, खासकर भारत-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा और कश्मीर घाटी के पर्यटन स्थलों - श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम में होती हैं। भारत सरकार भी विदेशी पर्यटकों को नियंत्रण रेखा के पास कुछ क्षेत्रों में जाने से रोकती है। मंत्रालय ने कहा कि भारत और पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती है। वे लोग जो भारत या पाकिस्तान के नागरिक नहीं हैं, केवल सीमा के पास भारत में अटारी और पाकिस्तान में वाघा जा सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि सीमा आमतौर पर खुली रहती है, लेकिन यात्रा से पहले मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करें। पाकिस्तान में प्रवेश के लिए पाकिस्तानी वीज़ा की आवश्यकता है। भारत में मौजूद अमेरिकी नागरिक, भारत में ही पाकिस्तानी वीज़ा का आवेदन दें। अन्यथा भारत की यात्रा करने से पहले जहां भी हैं, उस देश में पाकिस्तानी वीज़ा के लिए आवेदन दें।

Published / 2022-03-30 05:03:22
यूक्रेन मसले पर पुतिन-मैक्रों ने की चर्चा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच इस्तांबुल में समाप्त हुई वार्ता के दौर को ध्यान में रखते हुए यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा की। क्रेमलिन ने मंगलवार को यह जानकारी दी। बयान में कहा गया है, यूक्रेन को लेकर सामयिक पहलुओं पर विचारों का आदान-प्रदान जारी है, जिसमें रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधियों के बीच अगले दौर की वार्ता शामिल है, जो आज इस्तांबुल में समाप्त हुई। क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन ने मैक्रों को मानवीय सहायता प्रदान करने और मारियुपोल सहित नागरिकों को निकालने के उपायों के बारे में जानकारी दी।

Published / 2022-03-30 05:00:57
रूस में जॉनसन एंड जॉनसन के उत्पादों की आपूर्ति बंद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी हेल्थ केयर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने मंगलवार को कहा कि वह रूस में पर्सनल केयर उत्पादों की आपूर्ति को बंद कर रही है। कंपनी ने कहा कि हमने रूस में अपने पर्सनल केयर उत्पादों की आपूर्ति को निलंबित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही कंपनी ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए अपने दान को पांच मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 10 मिलियन डॉलर तक करने की घोषणा की।

Published / 2022-03-29 13:14:38
शांति वार्ता में बोला रूस- कीव, चेर्निगिव में सैन्य गतिविधि करेंगे कम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जंग पिछले एक महीने से चल रहा है और यह युद्ध अनरवत जारी है। हमले में यूक्रेन पूरी तरह से तबाह हो चुका है और उसके लाखों लोग अपना घर छोड़कर दूसरे देशों में भागने को मजबूर हुए हैं। दूसरी ओर जंग को खत्म करने की कोशिशें जारी हैं। सुरक्षा गारंटी के बदले तटस्थ होने को तैयार यूक्रेन : यूक्रेन के वातार्कारों ने मंगलवार को कहा कि यूक्रेन ने रूस के साथ नवीनतम दौर की वार्ता में सुरक्षा गारंटी के बदले तटस्थ स्थिति अपनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब है कि वह सैन्य गठबंधन या मेजबान सैन्य ठिकानों में शामिल नहीं होगा। रूस ने कीव, चेर्निगिव के पास सैन्य गतिविधि को कम करने को कहा : एएफपी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने कीव, चेर्निगिव के पास अपनी सैन्य गतिविधि को ह्यमौलिक रूप सेह्ण कम करने के लिए कहा है। यूक्रेन के वातार्कारों ने यूक्रेन सुरक्षा की गारंटी के लिए ह्यअंतरराष्ट्रीयह्ण समझौते की गुजारिश की है।

Published / 2022-03-29 13:13:41
चीन : दो साल के सबसे बड़ा लॉकडाउन में 2.6 करोड़ आबादी घरों में कैद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन के शंघाई में कोविड-19 के मामलों का पता लगाने के लिए व्यापक पैमाने पर जांच करने के वास्ते सोमवार से दो साल में लगाया गया सबसे बड़ा लॉकडाउन शुरू हो गया। चीन की आर्थिक राजधानी और 2.6 करोड़ की आबादी वाले सबसे बड़े शहर शंघाई ने इससे पूर्व कोविड के मामले आने पर सीमित लॉकडाउन लगाया था जिनमें रिहायशी परिसरों और कार्य स्थलों को बंद किया गया था। शहरव्यापी लॉकडाउन दो चरणों में लागू होगा और वुहान के बाद सबसे बड़ा लॉकडाउन होगा। वुहान में ही 2019 के अंत में सबसे पहले कोरोना वायरस के मामले मिले थे और वहां पर 76 दिनों तक लॉकडाउन लगाया गया था। स्थानीय सरकार के अनुसार, शंघाई के वित्तीय केन्द्र पुडोंग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों को सोमवार तड़के से शुक्रवार तक बंद रखा जाएगा और शहर में व्यापक स्तर पर कोविड-19 संबंधी जांच की जा रही है। लॉकडाउन के दूसरे चरण में हुआंगपू नदी के पश्चिमी इलाकों में शुक्रवार से पांच दिवसीय लॉकडाउन रहेगा। स्थानीय लोगों को घर पर ही रहना होगा। कार्यालय तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी निलंबित रहेंगी। पहले ही, 2.6 करोड़ की आबादी वाले शहर के भीतर कई गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। शंघाई डिज़्नी पार्क भी बंद कर दिया गया है। मीडिया की खबरों के मुताबिक, वाहन निमार्ता टेस्ला ने भी शंघाई संयंत्र में उत्पादन बंद कर दिया है। शंघाई में रविवार को कोविड के 3500 मामले मिले थे जिनमें से 50 लोगों में संक्रमित होने के बावजूद संक्रमण के लक्षण नहीं थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सोमवार को बताया कि रविवार को 1219 नए मामले मिले हैं जिनमें से 1000 से ज्यादा मरीज पूर्वोत्तरी प्रांत जिलिन के हैं। इसी के साथ 4996 ऐसे मामले भी मिले हैं जिनमें संक्रमित होने के बावजूद संक्रमण के लक्षण नहीं थे। चीन में इस महीने 56,000 से अधिक संक्रमण के मामले सामने आए, जिनमें से अधिकतर मामले जिलिन में सामने आए हैं। जिलिन ने कई शहरों में यात्रा प्रतिबंध और आंशिक लॉकडाउन लगाया है जिसमें चांगचुन भी शामिल है। चीन ने वैश्चिक महामारी के खिलाफ ह्यशून्य सहिष्णुताह्ण की रणनीति अपनाई है, जिसके चलते मामले बढ़ने पर अधिकतर आर्थिक गतिविधियां बाधित कर दी जाती हैं। चीन में 87 प्रतिशत आबादी का कोविड-19 रोधी टीकाकरण हो चुका है। इस बीच सोमवार को सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने खबर दी है कि हुनान प्रांत में महामारी रोधी नीतियों को सख्ती से लागू करने में नाकाम रहने पर 19 अधिकारियों को दंडित करने का आदेश दिया गया है।

Published / 2022-03-29 13:08:37
मैक्सिको : मुर्गा लड़ाई के दौरान बंदूकधारियों का हमला, 20 की मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मैक्सिको के पश्चिमी राज्य मिचोआकेन में जिनापेकुआरो के निकट मुर्गा लड़ाई के कार्यक्रम में बंदूकधारियों के हमले में 20 लोगों की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। जिनापेकुआरो शहर के निकट रविवार देर रात हुए इस हमले में मारे गए लोगों में 3 महिलाएं भी शामिल हैं। अभियोजकों ने बताया कि हमलावरों ने हमले की स्पष्ट रूप से पहले से योजना बनाई थी और वे नाश्ता बनाने वाली एक कंपनी के चुराए गए ट्रक के जरिए परिसर में घुसे। ट्रक के वहां पहुंचते ही कई सशस्त्र हमलावर उसमें से निकले और उसी समय इमारत के बाहर खड़ी एक बस को अवरोधक के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि लोग बच कर नहीं निकल पाएं या मदद न मांग सकें। इलाके में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों और अन्य आपराधिक गिरोहों के बीच लड़ाई चलती रहती है। इस बात का संकेत है कि आपराधिक समूहों के बीच झगड़े के कारण यह हमला किया गया।

Published / 2022-03-28 18:19:35
समस्याओं से घिरी वैश्विक अर्थव्यवस्था, जानें तीन प्रमुख समस्याएं

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अजय शाह)। विश्व अर्थव्यवस्था के सामने अब तीन बड़े और अहम सवाल हैं। अमेरिका में वृहद आर्थिक स्थिरता को मुद्रास्फीति का संकट चुनौती दे रहा है और वहां मौद्रिक नीति संंबंधी रणनीति को लेकर भी चिंता है। चीन में एक बड़ी गैर बाजार अर्थव्यवस्था खड़ी की गई थी लेकिन वह आंतरिक विरोधाभासों से दो-चार हो रही है। वहां अलग तरह की निराशा का माहौल है। रूस की अर्थव्यवस्था हालांकि छोटी है लेकिन यूक्रेन युद्ध और आर्थिक गतिविधियों में अचानक गिरावट से विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि आने वाले वर्ष में भी इनका प्रभाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक वृहद आर्थिक का सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है अमेरिका। अमेरिकी वृहद आर्थिक नीति ने महामारी का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाई और भारत भी अमेरिका तथा अन्य विकसित देशों की विस्तारवादी वृहद आर्थिकी का एक अहम लाभार्थी रहा है। परंतु हालिया लड़ाई के दौरान बने हिंसा के माहौल में अमेरिकी वृहद नीति ने अच्छा काम किया। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने करीब दो फीसदी का मुद्रास्फीति लक्ष्य रखा है। लेकिन अमेरिकी मुद्रास्फीति उस दर को पार कर चुकी है। ऐसा चक्र निर्मित होने के भी संकेत हैं जहां वेतन वृद्धि के कारण कीमतों में भी वृद्धि हो जाए। बीते चार दशकों में जहां सभी विकसित बाजारों ने मुद्रास्फीति को लक्षित करना शुरू कर दिया तो ऐसी कठिनाइयां प्राय: दूर हो गईं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के मौजूदा रुख में दो बातें शामिल हैं। आशा की जा रही है कि नीतिगत दरों में एक वर्ष में 150 आधार अंकों की बढ़ोतरी की जाएगी। दावा किया जा रहा है कि इतनी वृद्धि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में लाने के लिए पर्याप्त होगी। इस स्थिति में दिक्कत यह है कि अल्प दरों में 150 आधार अंकों का इजाफा किए जाने के बाद भी यह वास्तविक संदर्भ में नकारात्मक बनी रहेगी। फेडरल रिजर्व का मानना है कि एक केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में इकलौता योगदान यही कर सकता है कि वह दो फीसदी की अनुमान वाली मुद्रास्फीति दर दे सकेे ताकि वृहद आर्थिक स्थिरता के हालात बन सकें जिसके तहत आम परिवार तथा कंपनियां बेहतर योजनाएं बना सकें। यदि मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने का यह सफर मुद्रास्फीति पर कोई असर नहीं डालता है तो 2022 के आखिर में और उसके बाद उसमें धीमापन रह सकता है। अमेरिकी मौद्रिक नीति ने संपूर्ण विश्व को प्रभावित किया है। जब अमेरिका तथा अन्य विकसित देशों में ब्याज दरें कम होती हैं तो वित्तीय पूंजी विश्व अर्थव्यवस्था के उन हिस्सों में जाती हैं जहां जोखिम ज्यादा है। मिसाल के तौर पर भारत में तकनीकी कंपनियां और अचल संपत्ति की कंपनियां। जब विकसित बाजारों की ब्याज दरें बढ़ती हैं तो वैश्विक आवंटक उनकी ओर वापस लौटते हैं और पूंजी भी जोखिम वाले बाजारों से वापस आती है। ऐसे में उन केंद्रीय बैंकों को मुश्किल होती है जो विनिमय दर नीति अपनाने का प्रयास करते हैं। विश्व अर्थव्यवस्था के लिए दूसरी समस्या चीन है। चीन एक बड़ी अर्थव्यवस्था है लेकिन उसके पास अच्छे संस्थान नहीं हैं और कई मायनों में संसाधनों का आवंटन अधिकारियों द्वारा किया जाता है, न कि मूल्य व्यवस्था द्वारा। इससे अस्थिरता आती है। कई वर्षों से अधिकारियों ने वृद्धि को गति देने के लिए उन नीतियों को अपनाया उधारी और अचल संपत्ति की उच्च कीमतों पर बल देती हैं। चीन में एवरग्रांड तथा अचल संपत्ति की कई अन्य कंपनियों की विफलता के बाद अर्थव्यवस्था मुश्किल का सामना कर रही है। सन 1970 के दशक के अंत से ही वैश्विक कंपनियों को लगने लगा था कि वे चीन में निवेश कर सकती हैं, उन्हें यकीन हो चला था कि वह एक उदार लोकतंत्र में परिपक्व बाजार अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। शी चिनफिंग के प्रभार संभालने के बाद चीन का रुख अंतर्मुखी हो गया और वह राष्ट्रवाद तथा अधिनायकवाद की ओर बढ़ गया। अच्छे संस्थानों के विकास की प्रक्रिया में स्थिरता आ गई। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक परिसंपत्ति आवंटक तथा गैर वित्तीय कंपनियों ने चीन को लेकर अपनी प्राथमिकता कम करनी शुरू कर दी। अमेरिकी आयात में चीन की हिस्सेदारी भी कम होने लगी क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपना उत्पादन चीन से दूर करना शुरू कर दिया। विश्व अर्थव्यवस्था के लिए तीसरी समस्या रूस है। रूस की अर्थव्यवस्था छोटी है, बल्कि भारत से भी छोटी है और अचानक युद्ध तथा आर्थिक प्रतिबंधों ने उसे बड़ा आर्थिक झटका दिया है। अधिकांश लोगों का ध्यान यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित है जो कि वास्तव में काफी अहम है। परंतु रूसी अर्थव्यवस्था को जो क्षति पहुंच रही है उससे विश्व अर्थव्यवस्था पर भी कई अनचाहे प्रभाव पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए श्रीलंका, मिस्र और तुर्की जैसे देशों पर काफी बुरा असर पड़ा है। रूस में कारोबार वाली वित्तीय कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है। चीन की तरह रूस में भी वैश्विक कंपनियों ने एकबारगी सोचा होगा कि वे उदार लोकतंत्र और बाजार अर्थव्यवस्था पर भरोसा कर सकती हैं। अब सभी बाहरी कारोबारियों को रूस में भारी घाटा हो रहा है। इस प्रकार चीन और रूस के रूप में क्रमश: एक बड़ी और एक छोटी अर्थव्यवस्था में बाहरी प्रतिभागियों को निराशा का सामना करना पड़ा। वैश्वीकरण में मूल समस्या घरेलू पूर्वग्रह की है। यह पूर्वग्रह विकसित बाजारों के परिसंपत्ति आवंटकों तथा बोर्ड सदस्यों के मस्तिष्क में रहता है कि वे विकसित बाजारों में बने रहें। चीन और रूस में भारी घाटा इस पूर्वग्रह को बल देगा। यह बात विश्व अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डालेगी। ये तीनों समस्याएं विश्व अर्थव्यवस्था को एक साथ प्रभावित कर रही हैं: अमेरिकी मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति की चिंता, चीन में वृहद स्थिरता की चिंता और रूस के रूप में एक छोटी अर्थव्यवस्था में अचानक गिरावट। ये समस्याएं अगर अलग-अलग आई होतीं तो इनसे निपटना आसान होता। परंतु ये तीनों एक साथ आई हैं और प्राय: अंत:संबंधित हैं। यह संभव है कि इन दिक्कतों की प्रतिक्रिया स्वरूप विश्व अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों में समस्याएं उत्पन्न हों। इसका तरीका हमें चौंका सकता है क्योंकि हमें अर्थव्यवस्था की इतनी समझ नहीं है कि हालात के घटित होने के सटीक तरीके का अनुमान लगा सकें। भारतीय कंपनियों या नीतिगत निर्णय लेने वालों में से अधिकांश का ध्यान अल्पावधि पर होता है। अब वक्त आ गया है कि अधिक रणनीतिक रुख अपनाया जाए और वैश्विक मामलों की समझ बढ़ाई जाए तथा प्रभाव के अप्रत्याशित चैनलों पर नजर रखी जाए।

Published / 2022-03-28 17:54:15
31 को होगी इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा, कुर्सी जाने का खतरा तेज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की किस्मत का फैसला आने वाले हफ्ते में होने वाला है। दरअसल, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली सोमवार को एक अहम सत्र के लिए शुरू हुई, जहां विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने 31 मार्च तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया. 31 मार्च शाम चार बजे अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। वहीं, इमरान के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 1 से 4 अप्रैल के बीच वोटिंग हो सकती है। दो दिनों के अंतराल के बाद अति-उत्साही नेशनल असेंबली सत्र की शुरुआत की। नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने इसकी अध्यक्षता की। सत्र की शुरुआत होने के बाद विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए डिप्टी स्पीकर से इजाजत मांगी। उन्होंने कहा, मैं अनुरोध करूंगा कि आप (सूरी) इस आइटम को सदन में पेश करने की अनुमति दें, क्योंकि ये प्रस्ताव पहले से ही एजेंडे में था। इसके बाद, यह पता लगाने के लिए मतदान हुआ कि क्या प्रस्ताव को स्वीकार किया जाना चाहिए। नियमों के अनुसार, सदन में मौजूद कुल सांसदों में से कम से कम 20 फीसदी के समर्थन की जरूरत होती है। अविश्वास प्रस्ताव पर 31 मार्च को होगी बहस : अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 161 सांसदों ने हां कहा। इसके बाद शरीफ ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसमें संवैधानिक प्रक्रिया के पहले चरण की सीमा तय की गई. संवैधानिक नियमों के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद उसे 3-7 दिनों के बीच वोटिंग होनी होती है। डिप्टी स्पीकर सूरी ने 31 मार्च को शाम 4 बजे तक के लिए नेशनल असेंबली को स्थगित कर दिया। इस दिन अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी। इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव पर जीत हासिल करने के लिए 342 सदस्यों वाले सदन में 172 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। लेकिन इमरान की राह कठिन नजर आ रही है।

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