एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारी बमबारी और गोलाबारी से यूक्रेनी शहरों के नष्ट होने के सिलसिले के बीच पोप फ्रांसिस यूक्रेन जा सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए पोप ने कहा कि वह यूक्रेन की यात्रा करने की सोच रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया ने सवाल पूछा कि क्या वह कीव जाने पर विचार कर रहे हैं, इस पर पोप फ्रांसिस ने एक लंबे विराम के बाद जवाब दिया, हां, इसकी योजना बन रही है। मीडिया से बातचीत शनिवार सुबह उनके विमान से माल्टा जाने के दौरान हुई। उन्होंने विमान में सवार 70 से अधिक पत्रकारों का अभिवादन करते हुए कहा कि यह एक अच्छी यात्रा होगी। 24 फरवरी को रूस ने किया था हमला : डोनेट्स्क और लुहांस्क के लोगों की सुरक्षा करने का हवाला देते हुए रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला कर दिया था। रूस ने इसे एक विशेष सैन्य अभियान का नाम दिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि विशेष अभियान का उद्देश्य यूक्रेनी सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना है, ताकि यूक्रेन का विसैन्यीकरण किया जा सके। मास्को ने कहा था कि यूक्रेन पर कब्जा करने की उसकी कोई योजना नहीं है। इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत का भी अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। हालांकि रूसी सेना कुछ इलाकों से हट गई है, लेकिन यूक्रेन के कई शहरों पर रूस के हमले लगातार जारी हैं और इसमें भारी तबाही हो रही है। दक्षिणी यूक्रेन के शहर मायकोलिव के गवर्नर विटाली किम ने आज बताया कि एक सरकारी इमारत पर हमले में कम से कम 35 लोग मारे गए हैं। एक ऑनलाइन पोस्ट में किम ने कहा कि हमले के बाद बचावकर्मियों द्वारा मलबे को हटाने और पीड़ितों की तलाश का काम जारी है। वहीं, आज कीव के एक गांव में एक यूक्रेनी पत्रकार का शव बरामद हुआ।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कोरोना के कारण हाहाकार मचा है। खासकर चीनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले शंघाई शहर में कोरोना से हालात बेकाबू हो गए हैं। ऐसे में चीनी सरकार ने कोरोना रोकने के लिए दोहरी पाबंदियां लागू कर दी है। ये पाबंदियां मानवता झकझोर करने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कोरोना के चलते बच्चों को मां-बाप से अलग करके क्वारंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है। चीनी सरकार की कठोर पाबंदियों से चीनी नागरिक खौफ में है। चीनी सरकार ने कोरोना महामारी की नई लहर में ऐसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं कि आम लोग खौफ में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नए आदेश के मुताबिक, बच्चों को मां-बाप से अलग किया जा रहा है। मां-बाप को अपने बच्चों की लोकेशन तक नहीं दी जा रही है। ताजा घटनाक्रम के मुताबिक कई लोग अपने बच्चों की खबर जानने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन फिर भी उन्हें बच्चों के बारे में जानकारी नहीं दी जा रही है। चीन की सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर शंघाई में कोरोना की सबसे ज्यादा मार है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, शहर की एक महिला एस्थर झाओ अपनी ढाई साल की बेटी को बुखार के बाद अस्पताल लेकर गई थी। घटना 26 मार्च की बताई जा रही है। जांच में पता लगा कि उसे कोरोना है। तीन दिन बाद उसकी मां भी कोरोना संक्रमित हो गई। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने दोनों (मां और बेटी) को अलग-अलग क्वारंटाइन सेंटर में भेज दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मां चीखती रही चिल्लाती रही लेकिन प्रशासन ने एक न सुनी और बेटी को मां से अलग कर दिया। आरोप यह भी है कि डॉक्टरों ने उसे धमकी दी कि अगर वो बेटी को बच्चों के लिए बने क्वारंटीन सेंटर में नहीं भेजेंगी तो उसे अस्पताल में ही छोड़ दिया जाएगा। डॉक्टरों ने मां-बाप को मोबाइल पर मैसेज से सिर्फ इतना बताया कि उनकी बच्ची ठीक है लेकिन कहां रखा गया है ये नहीं बताया। गौरतलब है कि शंघाई शहर में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 6311 नए मामले सामने आए। जिनमें बिना लक्षण वाले 6051 केस हैं जबकि 260 लोगों में कोरोना के लक्षण पाए गए हैं। इससे पहले शुक्रवार और गुरुवार को शंघाई में कोरोना के 4144 और 358 केस आए थे। जबकि चीन में 1 अप्रैल को 2129 कन्फर्म कोरोना केस मिले थे। हालांकि नंबरों के लिहाज से ये काफी कम हैं, लेकिन चीनी सरकार कोरोना केसों को लेकर बेहद गंभीर है और लोगों पर तमाम पाबंदियां लगा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। जिससे सिक्योरिटी फोर्सेज़ को फौरी तौर पर संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने का व्यापक अधिकार मिल गया है। राजपक्षे ने राजधानी में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के इकट्ठा होने के बाद सार्वजनिक आपातकाल की घोषणा करते हुए असाधारण राजपत्र जारी किया है और उनमें से कई ने आर्थिक नीतियों के खराब प्रबंधन के लिए सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति के आवास पर धावा बोलने की कोशिश की, जिसने देश में गड़बड़ी पैदा की है। राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना है कि श्रीलंका में सार्वजनिक आपातकाल था, जिसके लिए सख्त कानूनों को लागू करना जरूरी था। राजपक्षे ने राजधानी में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के इकट्ठा होने के बाद सार्वजनिक आपातकाल की घोषणा करते हुए असाधारण राजपत्र जारी किया है और उनमें से कई ने आर्थिक नीतियों के खराब प्रबंधन के लिए सरकार के खिलाफ राष्ट्रपति के आवास पर धावा बोलने की कोशिश की, जिसने देश में गड़बड़ी पैदा की है। राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना है कि श्रीलंका में सार्वजनिक आपातकाल था, जिसके लिए सख्त कानूनों को लागू करना जरूरी था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस द्वारा एक बार फिर से बयान जारी किया गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा है कि रूसी नेतृत्व और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आक्रामकता के कारण यूक्रेन में चल रहा युद्ध थम नहीं पा रहा है। इस युद्ध ने लाखों निर्दोष लोगों को विस्थापित कर दिया है और हजारों लोगों की जान ले ली है। जेन साकी ने आगे कहा कि यूक्रेन में अस्पतालों और घरों को निशाना बनाया जा रहा है। जेन साकी ने कहा कि दुनिया जानती है कि हमलावर कौन है और इसके अलावा, सैन्य रणनीति पर मेरी कोई टिप्पणी नहीं है। रूसी तेल डिपो पर हमले को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं : व्हाइट हाउस- वहीं रूसी तेल डिपो पर यूक्रेन द्वारा तथाकथित हमले को लेकर व्हाइट हाउस ने कहा कि हमने उन रिपोर्टों को देखा है। हम क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के बयानों पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं। अभी तक जो मेरे पास जानकारी है कि यूक्रेन ने इस मसले पर कोई बयान नहीं दिया है या इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं की है। इस युद्ध का मुख्य हमलावर पुतिन है: व्हाइट हाउस व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने आगे कहा कि मुझे बस ये पता है कि यह एक युद्ध है जिसे राष्ट्रपति पुतिन ने शुरू किया था। रूसी सेना ने इस क्रूर युद्ध के द्वारा यूक्रेन में लगातार बमबारी कर रही है। कई जगह हिंसा चरम पर है। साकी ने कहा कि हमने यूक्रेन के लोगों को अकारण रूसी क्रूरता का सामना करते हुए बहादुरी से लड़ते देखा है, लेकिन यहां एक हमलावर है और वह है राष्ट्रपति पुतिन और उनके निर्देश पर रूसी सेना यूक्रेन को तबाह करने में लगी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग लंबे समय तक खिंच गई है। न ही रूस पीछे हटने को तैयार है और न ही यूक्रेन झुकने को। ऐसे में यूक्रेन में भारी तबाही जारी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आॅस्ट्रेलिया, नीरदलैंड व बेल्जियम की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मैं अभी भी रूस के खिलाफ ठोस कदमों का इंतजार कर रहा हूं। हमें हमलावर पर तब तक दबाव बनाना होगा जब तक उसकी आक्रामकता न खत्म हो जाए। रूस के शहर बेल्गोरोद के गवर्नर ने दावा किया है कि उनके यहां के एक तेल डिपो पर यूक्रेनी सेना की ओर से एयरस्ट्राइक की गई है। वहीं, रूस और यूक्रेन के बीच आॅनलाइन माध्यम से वार्ता की शुरूआत भी हुई है। दूसरी ओर यूक्रेन के सशस्त्र बलों ने 17700 रूसी सैनिकों को मार गिराने का दावा करते हुए रूस को हुए नुकसान का ब्योरा दिया है। यूक्रेन ने रूस के तेल डिपो पर किया हमला : यूक्रेन की सीमा से जुड़े हुए रूसी शहर बेल्गोरोद के गवर्नर ने दावा किया है कि, उनके यहां के एक तेल डिपो पर यूक्रेनी सेना की ओर से एयरस्ट्राइक की गई है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के हेलीकॉप्टरों ने इस पर हमला किया। दरअसल, शुक्रवार सुबह यहां के तेल डिपो में भयानक आग की खबरें सामने आई थीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका की आर्थिक स्थिति लगातार चरमरा रही है। अब वह बिजली बचाने के लिए स्ट्रीट लाइट बंद कर रहा है। एक मंत्री ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दशकों अपने सबसे खराब आर्थिक संकट ने और अधिक बिजली कटौती को मजबूर कर दिया है। यहां मुख्य शेयर बाजार में कारोबार को भी रोक दिया गया है। 2.2 करोड़ लोगों का द्वीप दिन में 13 घंटे तक ब्लैकआउट से जूझ रहा है क्योंकि सरकार के पास ईंधन आयात के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा नहीं है। बिजली मंत्री पवित्रा वनियाराची ने संवाददाताओं से कहा कि हमने पहले ही अधिकारियों को बिजली बचाने में मदद करने के लिए देश भर में स्ट्रीट लाइट बंद करने का निर्देश दिया है। खाद्य मुद्रास्फीति 30.2% तक पहुंची : बिजली कटौती ने पहले से ही आवश्यक वस्तुओं की किल्लत से जूझ रहे श्रीलंकाई लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है और कीमतों में उछाल आ रहा है। सांख्यिकी विभाग ने गुरुवार को कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति मार्च में एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 18.7% पर पहुंच गई। मार्च में खाद्य मुद्रास्फीति 30.2% तक पहुंच गई, जो आंशिक रूप से मुद्रा अवमूल्यन और पिछले साल रासायनिक उर्वरकों पर प्रतिबंध के बाद ऐसा हुआ, हालांकि इसे बाद में उलट दिया गया था। फर्स्ट कैपिटल रिसर्च के शोध प्रमुख दिमंथा मैथ्यू ने कहा कि श्रीलंका ने एक दशक से अधिक समय में मुद्रास्फीति का सबसे खराब दौर का अनुभव किया है। डीजल शिपमेंट का हो रहा इंतजार : वन्नियाराची ने कहा कि शनिवार को भारत से 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद के तहत डीजल शिपमेंट की उम्मीद थी, हालांकि इससे हालात सुधरने की उम्मीद नहीं है। मंत्री ने कहा कि एक बार इसके आने के बाद हम लोड शेडिंग की अवधि को कम कर सकेंगे, लेकिन जब तक बारिश नहीं होती है, शायद मई में कुछ समय के लिए बिजली कटौती जारी रखनी होगी। हम और कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पनबिजली परियोजनाओं को चलाने वाले जलाशयों में जल स्तर रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है, जबकि गर्म, शुष्क मौसम के दौरान मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। बता दें कि श्रीलंका पर कई देशों का कर्ज है। यहां जनवरी में विदशी मुद्रा भंडार 70 फीसदी से ज्यादा घटकर 2.36 अरब डॉलर रह गया था, जिसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते ही देश में ज्यादातर जरूरी सामानों दवा, पेट्रोल-डीजल का विदेशों से आयात नहीं हो पा रहा है। बीते दिनों आई रिपोर्ट की मानें तो देश में कुकिंग गैस और बिजली की कमी के चलते करीब 1,000 बेकरी बंद हो चुकी हैं और जो बची हैं उनमें भी उत्पादन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कोरोना वायरस दो साल में पहली बार सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। चीन ने कोरोना पर काबू के लिए जिस जीरो कोविड पॉलिसी को अमल में लाया था वो फेल साबित हो रही है। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के संक्रमितों का आंकड़ा 62 हजार केस के पार पहुंच गया है। ऐसे में चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई समेत 5 शहरों में लॉकडाउन लगा है। अस्पतालों में नए मरीजों को जगह नहीं : चीन के लगभग 12 हजार सरकारी अस्पतालों में नए मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है। चीन ने कोरोना की पहली लहर के दौरान सख्त लॉकडाउन का नियम बनाया था। इसके तहत एक भी केस आने पर पूरे शहर में लॉकडाउन लगा दिया जाता था। ऐसे में उसके चिकित्सा ढांचे पर काफी असर पड़ा। शंघाई के 20 हजार बैंकर्स दफ्तरों में ही रह रहे हैं : चीन के बड़े व्यावसायिक हब शंघाई में अगले शुक्रवार तक पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया है। बैंकिंग और अन्य गतिविधियां बाधित नहीं हों, इसके लिए शंघाई के लगभग 20 हजार बैकर्स दफ्तरों में रह रहे हैं। यहीं सो भी रहे हैं। सरकार की ओर से उनके खाने का इंतजाम किया गया है। कोरोना के बढ़ते मामलों में भारत को खतरा : इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) एक्सपर्ट डॉ आरआर गंगाखेड़कर ने दिए इंटरव्यू में बताया कि वायरस जितना ज्यादा म्यूटेशन करता है खतरा उतना ही बढ़ता है। उन्होंने बताया कि चीन में कोविड का आउटब्रेक भारत को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए वहां की कोरोना स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। साथ ही चीन व अन्य देशों में फैल रहे कोरोने से भारत को होने वाले खतरे पर कई एक्सपर्ट्स अपनी राय दे चुके हैं और अधिकतर का यही मानना है कि भारत को भी सतर्क रहना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन के बीच आज 36वें दिन भी जंग जारी है। दोनों देशों में से कोई भी एक दूसरे के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने गुरुवार को कहा कि उनकी सेना देश के पूर्व में रूसी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर रही है। ताजा जानकारी के अनुसार रूस-यूक्रेन के बीच आज एक बार फिर से शांति वार्ता की जाएगी। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि रूस के कुछ अधिकारी राष्ट्रपति पुतिन को गुमराह कर रहे हैं और वास्तविक जानकारी नहीं दे रहे। अमेरिका ने कहा कि रूस की वित्तीय स्थिति सही नहीं है और इसलिए सलाहकार सच्चाई बताने से डर रहे हैं रूस-यूक्रेन के बीच आज 36वें दिन भी जंग जारी है। दोनों देशों में से कोई भी एक दूसरे के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है। इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने गुरुवार को कहा कि उनकी सेना देश के पूर्व में रूसी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर रही है। ताजा जानकारी के अनुसार रूस-यूक्रेन के बीच आज एक बार फिर से शांति वार्ता की जाएगी।
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