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Published / 2022-05-19 12:53:50
टोक्यो में क्वाड नेताओं पर खतरा... सुरक्षा में 18,000 जवान लगा रहा जापान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान की राजधानी टोक्यो में 24 मई को क्वाड नेताओं की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, जापान के पीएम फुमियो किशिदा और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भाग ले रहे हैं। आॅस्ट्रेलिया में 21 मई को आम चुनाव हैं इसलिए यह साफ नहीं है कि आॅस्ट्रेलिया की ओर से क्वाड शिखर सम्मेलन में कौन भाग लेगा। इस बीच टोक्यो पुलिस ने कहा है कि क्वाड नेताओं की कड़ी सुरक्षा को लेकर करीब 18 हजार पुलिस अधिकारियों को टोक्यो में तैनात किया जाएगा। जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार टोक्यो के मेट्रोपॉलिटन एक्सप्रेसवे पर 22 मई से तीन दिनों के लिए यातायात प्रतिबंध लगाया जाएगा। टोक्यो मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग को आशंका है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बीच तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वातावरण में हमलों और व्यवधानों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में टोक्यो पुलिस ड्रोन का जवाब देने के लिए दंगा पुलिस और सुरक्षा दल भी तैनात करेंगे। 19 मई को टोक्यो पुलिस की स्पेशल दंगा यूनिट ने अमेरिकी दूतावास के पास एक सड़क का निरीक्षण किया है। टोक्यो पुलिस सॉफ्ट टारगेट पर हमलों के खिलाफ भी उपायों को भी मजबूत कर रही है जो कि आमतौर पर सरकार या सैन्य सुविधाओं की तुलना में कम सुरक्षित होते हैं लेकिन वहां बड़ी भीड़ हो सकती है। जैसे कि नेताओं के रहने के ठिकाने, टोक्यो स्टेशन और टोक्यो एयरपोर्ट।

Published / 2022-05-16 17:08:55
फ्रांस के पीएम का इस्तीफा, मैक्रों जल्द करेंगे नए नाम की घोषणा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। फ्रांस के प्रधानमंत्री ज्यां कास्तेक्स ने पिछले महीने मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अपेक्षित कदम के तहत सोमवार को इस्तीफा दे दिया। मैक्रों जल्द नए प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा करेंगे। एलिसी (फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय) ने एक बयान में कहा, कास्तेक्स औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा देने के लिए सोमवार को एलिसी राष्ट्रपति भवन आए, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। मैक्रों जल्द ही नए प्रधानमंत्री की घोषणा कर सकते हैं। फ्रांसीसी मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि श्रम मंत्री एलिजाबेथ बोर्न इस पद के लिए उनकी (मैक्रों की) पसंद हैं। फ्रांस में किसी राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान एक से अधिक प्रधानमंत्री का नियुक्त होना आम बात है। मैक्रों और उनके नए प्रधानमंत्री आने वाले दिनों में फ्रांस की पूर्ण नई सरकार नियुक्त करने के लिए बातचीत करेंगे। नए प्रधानमंत्री का पहला कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि जून में फ्रांस के संसदीय चुनाव में मैक्रों की मध्यमार्गी पार्टी और उसके सहयोगी अच्छा प्रदर्शन करें। मैक्रों ने फ्रांस में रहने की बढ़ती लागत के संबंध में एक विधेयक लाने का भी वादा किया। देश में खाद्य सामग्री और ऊर्जा (तेल एवं गैस) की कीमतें बढ़ रही हैं। यह विधेयक उनकी नई सरकार द्वारा तैयार किया जाएगा और संसदीय चुनाव के ठीक बाद पेश किए जाने की उम्मीद है। मैक्रों ने यह भी वादा किया कि नए प्रधानमंत्री सीधे हरित योजना के प्रभारी होंगे, जो फ्रांस की जलवायु संबंधी नीतियों के कार्यान्वयन में तेजी लाना चाहते हैं। मैक्रों ने अपने दूसरे कार्यकाल में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिए दोगुनी तेजी से कदम उठाए जाने का संकल्प लिया।

Published / 2022-05-16 16:21:47
अंतरराष्ट्रीय सेमिनार : भारत के रामानुरागियों से मिले मॉरीशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व के अनेक देशों में रामकथा अपने-अपने ढंग से लिखी गई है। मूल कथा तो एक ही है लेकिन स्थानीय संदर्भों के साथ मूल कथा में अनेक कथाएं और प्रसंग अलग ढंग से जुड़े हुए मिलते हैं। रामकथा विश्व संदर्भ महाकोष की तैयारी के संदर्भ में साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था, मुंबई से जुड़े 28 विद्वानों का एक दल संस्था के सचिव डॉ प्रदीप कुमार सिंह के नेतृत्व में 8 मई से 15 मई तक मॉरीशस के दौरे पर रहा। साप्ताहिक दौरा कार्यक्रम में दल के सदस्यों ने महात्मा गांधी संस्थान मॉरीशस, विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, वृहत पुरोहित संघ, फ्लिक एंड फ्लैक, रामायण केंद्र मॉरीशस, हिंदी प्रचारिणी सभा तथा राम कथा सेवा सदन के सदस्यों के साथ मिलकर मॉरीशस में राम कथा के विविध प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा की। मॉरीशस में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित संगोष्ठी में प्रोफेसर कृष्णा श्रीवास्तव, डॉ किरण त्रिपाठी, डॉ कुसुम सिंह, डॉ किरण शर्मा, डॉ सुनीता चौहान, डॉ पुष्पा सिंह, डॉ राजरानी, डॉ अंजली, साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के अध्यक्ष डॉ बनवारीलाल जाजोदिया, सुरेश चंद्र तिवारी, डॉ रंजय सिंह, डॉ माधुरी सिंह, अलका भटनागर, डॉ शीरीन कुरैशी, एडवोकेट रमा शंकर शुक्ल, मीमांसा ओझा, अरविंद श्रीवास्तव, डॉ हिमांशु मिश्र दीपक, डॉ नीतू कुमारी, आदि ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के वैश्विक संदर्भ पर आधारित अपने आलेखों की प्रस्तुति दी। साहित्यिक सांस्कृतिक शोध संस्था के सदस्यों के साथ संवाद करने के लिए मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ और मॉरीशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन से भी मुलाकात की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामकथा के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे शोध कार्य के बारे में उन्हें जानकारी दी। साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत विश्व हिंदी सचिवालय में हिंदी के वैश्विक प्रचार प्रसार में रामकथा की भूमिका पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन किया गया। इस दौरान अलग-अलग संस्थानों में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए जिसमें प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत, डॉ माधुरी सिंह, मीमांसा ओझा आदि ने मनभावन प्रस्तुतियां दी। ललित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में रामलीला का मंचन किया गया, जिसमें शबरी प्रसंग सहित रामकथा के अनेक प्रसंगों को दिखाया गया। अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने वाले मॉरीशस के विद्वानों में डॉ विनोद वाला अरुण, डॉ राजवंती मातादीन, सुनीता पाहुजा, डॉ सरिता बुधु, डॉ अलका धनपत, डॉ बी डी मुंजल, रामप्रताप, पी महादेव आदि शामिल रहे।

Published / 2022-05-16 05:22:01
शंघाई में सोमवार से दोबारा खुल सकेंगे कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के प्रकोप के चलते चीन ने कई शहरों में लॉकडाऊन लगा रखा है। खबर है कि शंघाई में सोमवार से सुपर मार्केट, मॉल और रेस्तरां को सोमवार से सीमित क्षमता के साथ दोबारा खोलने की अनुमति दे दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों को घरों से निकलने की अनुमति दी जाएगी या नहीं। शंघाई के उप महापौर चेन टोंग ने रविवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि किराने-दवा की दुकानों व मॉल को एक बार फिर खोलने की अनुमति दी जाएगी और इसके साथ ऐसे कदम उठाए जाएंगे, ताकि लोगों की आवाजाही को कम किया जा सके। टोंग के मुताबिक, कृषि बाजारों को भी पुनः खोलने की अनुमति दी जाएगी और बिना संपर्क के लेन-देन सुनिश्चित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि रेस्तरां में बैठकर भोजन करने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन लोग खाना घर ले जा सकेंगे। वहीं, शंघाई के परिवहन विभाग ने रविवार को कहा कि शहर में सभी सबवे लाइन बंद कर दी गई हैं और सेवाएं कब से शुरू होंगी, यह स्पष्ट नहीं है। चीन में रविवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,718 मामले सामने आए। ऐसा बताया जा रहा है कि ज्यादातर संक्रमितों में कोविड-19 से जुड़े लक्षण नहीं हैं।

Published / 2022-05-16 05:18:12
कैंसर से जंग लड़ रहे व्लादिमीर पुतिन की हालत गंभीर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गंभीर रूप से बीमार हैं और यूक्रेन में जो हो रहा है उसका एक कारण यह बीमारी भी है। एक पूर्व ब्रिटिश जासूस ने यह दावा किया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पुतिन को क्या बीमारी है। लेकिन इस ब्रिटिश जासूस ने कहा कि यूक्रेन पर हमला निश्चित रूप से पुतिन की इस बीमारी का कारण हो सकता है। क्रिस्टोफर स्टील, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प और 2016 के अमेरिकी चुनाव अभियान में रूसी हस्तक्षेप के आरोप को लेकर एक डोजियर लिखा था। उन्होंने स्काई न्यूज को बताया कि निश्चित रूप से हम रूस और अन्य माध्यमों से जो सुन रहे हैं वह यह है कि पुतिन वास्तव में गंभीर रूप से बीमार हैं। इस बीच रूसी नेता से करीबी संबंध रखने वाले एक खास व्यक्ति ने कथित तौर पर यह कहा है कि पुतिन ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। अमेरिकी पत्रिका न्यू लाइन्स को मिली एक रिकॉर्डिंग में इस शख्स को पश्चिमी बिजनेसमैन के साथ पुतिन की सेहत पर चर्चा करते हुए सुना गया था। इससे पहले पुतिन के ऑपरेशन को लेकर एक लोकप्रिय टेलीग्राम चैनल जनरल एसवीआर पर दावा किया गया था। इसमें बताया गया कि पुतिन के ऑपरेशन की पुष्टि क्रेमलिन के एक विश्वसनीय सूत्र ने की है। पुतिन को 18 महीने पहले पेट का कैंसर और पार्किंसन नाम की बीमारी है। वहीं, कुछ दिनों पहले डेली मेल में छपी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि, डिमेंशिया, पार्किंसंस रोग या कैंसर के लिए स्टेरॉयड ट्रीटमेंट लेने की वजह से पुतिन दिमागी बीमारी से पीड़ित हो गए हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 5 वर्षों में उनके फैसले लेने के तरीके में बदलाव आया है। इस साल ईस्टर के दौरान भी मॉस्को के एक चर्च में पहुंचे पुतिन के हाव-भाव को लेकर उनके बीमार होने का अंदेशा जताया गया था। हालांकि हर बार इन दावों का खंडन किया गया।

Published / 2022-05-14 17:33:57
आसियान नेताओं के साथ बाइडेन ने चीन के खिलाफ बनाई रणनीति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका और एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशन्स (आसियान) देशों के नेताओं की दो दिन की शिखर बैठक राष्ट्रपति जो बाइडेन की पहल पर शुरू हो गई है। ये पहला मौका है जब व्हाइट हाउस में आसियान नेताओं को एक साथ बुलाया गया है। इसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ देशों को लामबंद करने की बाइडेन प्रशासन के एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी कूटनीति विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया दुनिया में सबसे तेजी से उभर रहा आर्थिक क्षेत्र है। साथ ही यह इलाका अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रही होड़ का केंद्र है। आसियान के कई सदस्य देशों के चीन के साथ टकराव भरे रिश्ते भी हैं। उसे देखते हुए आसियान को लामबंद करना एक खास रणनीति का हिस्सा है। आसियान में दस देश शामिल हैं।गुरुवार को शिखर सम्मेलन की शुरुआत के मौके पर अमेरिका ने उस क्षेत्र के लिए 15 करोड़ डॉलर की एक विशेष पहल की घोषणा की। ये रकम स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल विकास पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने इस इलाके के लिए एक क्षेत्रीय व्यापार फ्रेमवर्क भी तैयार किया है, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस फ्रेमवर्क के तहत श्रम व्यवहार और डिजिटल ट्रेड के मानदंड तय किए जाएंगे। कूटनीति विशेषज्ञ जेम्स क्रैबट्री ने कहा है कि अमेरिका ने ऐसी आर्थिक योजना तैयार की है, जिससे आसियान देशों को लाभ होगा, जबकि उन्हें उसके लिए कोई कीमत नहीं चुकानी होगी। लेकिन अभी भी अमेरिका ऐसे व्यापार समझौते के लिए तैयार नहीं है, जिससे आसियान देशों की अमेरिकी बाजार में पहुंच आसान हो जाए। इसलिए बाइडेन की ताजा पहल कितनी प्रभावी होगी, उसको लेकर अलग-अलग राय जताई गई है। चीन ने आसियान के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर रखा है। 2009 में वह अमेरिका को पीछे छोड़ता हुआ आसियान का सबसे बड़ा व्यापार सहभागी बन गया। चीन ने इस क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर अरबों डॉलर खर्च करने का वादा भी किया है। इसलिए इन देशों को चीन के खिलाफ लामबंद करना एक कठिन चुनौती है। अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स की विश्लेषक जोशुआ कुर्लनांत्जिक ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा, बीते एक साल में इस क्षेत्र में चीन की अलोकप्रियता बढ़ी है। इसका प्रमुख कारण उसकी जोरों कोविड नीति है। इसके बावजूद इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि वॉशिंगटन में चल रही चर्चाओं पर चीन का साया पड़ा हुआ है।

Published / 2022-05-14 09:44:12
उत्तर कोरिया में कोरोना से पहली मौत; देश में लगा सख्त लॉकडाउन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर कोरिया में कोरोना का पहला केस मिलने के बाद शुक्रवार को एक मरीज की मौत हो गई। सरकारी मीडिया के मुताबिक फिलहाल देश में 1,87,000 लोगों को बुखार के लक्षण आ रहे हैं, जिस कारण उन्हें आइसोलेट कर दिया गया है। उत्तर कोरिया में 8 मई को कोरोना का पहला मामला सामने आने के साथ ही पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने 2020 के आखिर तक 13,259 लोगों के सैंपल्स की जांच की थी और इनमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। राजधानी प्योंगयांग में अप्रैल के आखिर में अचानक से लोग बुखार की चपेट में आने लगे। ये बुखार फैलते-फैलते प्योंगयांग के बाहर जा पहुंचा। अब तक कुल 3,50,000 लोगों में इस बुखार के लक्षण देखे गए हैं। हालांकि, इनमें से कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं इसका खुलासा नहीं किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश में फैल रहा बुखार असल में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया में रहने वाले 2.5 करोड़ लोग खतरे में हैं, क्योंकि यहां न तो किसी को वैक्सीन लगेगी, न ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी। नॉर्थ कोरिया ने ब्रिटेन और चीन जैसे देशों में बनी वैक्सीन खरीदने से साफ इंकार कर दिया था। इसके बजाय सरकार का कहना था कि उसने जनवरी 2020 में सभी बॉर्डर्स बंद कर कोरोना को देश के अंदर आने से रोक दिया है। कोरोना पर गुरुवार को हुई एक मीटिंग में किम जोंग को पहली बार टीवी पर मास्क पहने देखा गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्थ कोरिया के लिए असली खतरा कोरोना नहीं, बल्कि लॉकडाउन है। आबादी का बड़ा हिस्सा वैसे ही कुपोषण का शिकार है। पिछले दो सालों से बॉर्डर्स बंद होने के कारण वैसे भी व्यापार कम हुआ है। अब लॉकडाउन लगने से खाने और दवाओं में और कमी आ सकती है।

Published / 2022-05-14 09:31:36
17 मई से यूक्रेन में फिर शुरू होगा भारतीय दूतावास

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन-रूस के बीच जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। भारत सरकार फिर से यूक्रेन के दूतावास को खोलने जा रही है। 17 मई से यूक्रेन में भारतीय दूतावास फिर से काम करना शुरू कर देगा। बताते चलें कि रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद भारत ने यूक्रेन में स्थित अपना दूतावास अस्थाई रूप से बंद कर दिया था। भारत सरकार ने यूक्रेन में मौजूद दूतावास की मदद से फरवरी और मार्च के महीने में करीब 22 हजार भारतीयों को निकाला था। भारत सरकार ने यूक्रेन में फंसे लोगों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया था, इस ऑपरेशन में 100 से अधिक उड़ानें संचालित की गईं, जिसमें करीब 22 हजार से लोगों को निकाला गया था। गौरतलब है कि रूस ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने के फैसले के खिलाफ फरवरी में जंग छेड़ दी थी, जिसके बाद कई देशों ने यूक्रेन में अपने दूतावास अस्थाई रूप से बंद कर दिए थे।

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