एबीएन सेंट्रल डेस्क (श्याम सरन)। दुनिया वैश्विक आर्थिक वृद्धि के वाहक के रूप में चीन की भूमिका को लेकर इतनी अभ्यस्त हो चुकी है कि अब चीन में आर्थिक मंदी की आशंका अर्थशास्त्रियों, कारोबारियों और विद्वानों को समान रूप से चिंतित कर रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन का कद निरंतर बढ़ता जा रहा है। चीन का 19.9 लाख करोड़ डॉलर का नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वैश्विक जीडीपी का 15 फीसदी है जो इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाता है। विश्व व्यापार में भी इसकी अच्छी खासी हिस्सेदारी है और यह दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक तथा दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। दुनिया में धातुओं की कुल खपत का 50 फीसदी चीन में होता है। वह तेल का सबसे बड़ा आयातक भी है। अनुमान है कि चीन वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 30 फीसदी का हिस्सेदार है। चीन की अर्थव्यवस्था वैश्वीकृत है और वह दुनिया के सभी बड़े बाजारों से जुड़ा हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था और शेष विश्व के साथ उसके आर्थिक तथा वाणिज्यिक अंतसंर्बंधों का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ गहरा संबंध है। चीन की अर्थव्यवस्था में बीते कुछ समय से धीमापन आ रहा है। 2007-08 के वित्तीय और आर्थिक संकट के बाद वह इकलौता बड़ा देश है जिसने निरंतर 6 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की। 2022 में उसके 5.5 फीसदी की वृद्धि हासिल करने की बात कही गयी लेकिन लगता नहीं कि वह 3.5 फीसदी से अधिक वृद्धि हासिल कर पाएगा। यह विगत कई वर्षों की न्यूनतम दर है। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि चीन की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से चला आ रहा ढांचागत असंतुलन सामने आ रहा है। बीते चार दशक में संपत्ति क्षेत्र ही चीन की आर्थिक वृद्धि का वाहक रहा। जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रही। परिसंपत्ति बाजार का फाइनैंसिंग मॉडल शुरू से ही टिकाऊ नहीं था। आमतौर पर परिसंपत्ति डेवलपर अपार्टमेंट बनाने के पहले ही उसकी पूरी कीमत वसूल कर लेते हैं। ऐसे में जुटाए गए फंड का इस्तेमाल जमीन खरीदने तथा अन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। तब दूसरी परियोजना की बिक्री से संग्रहित राशि का इस्तेमाल पहली परियोजना के निर्माण में किया जा सकता है। लेकिन यह सिलसिला कभी भी बिखर सकता है। चीन में यही हुआ। चीन की सरकार ने परिसंपत्ति क्षेत्र को ठीक करने की कोशिश की जिससे परिसंपत्ति कीमतों में गिरावट आई। इससे बड़ी कंपनियां दिवालिया हो गईं और ऐसे में बड़ी तादाद में खरीदार कर्ज में रह गये जबकि उनके लिए घर नहीं थे। जून 2021 के बाद के 12 महीनों में परिसंपत्ति की बिक्री 22 फीसदी घटी। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार चीन के डेवलपरों ने बीते तीन वर्षों में 66 लाख वर्ग मीटर परिसंपत्ति बनानी शुरू की लेकिन वे इसका आधा ही पूरा कर सके। चीन में परिसंपत्ति का इस्तेमाल बचत के रूप में भी किया जाता है क्योंकि वहां निवेश के ठिकाने कम हैं और जमा दर बेहद कम है। अनुमान के मुताबिक 59 फीसदी चीनी परिवारों ने अचल संप?त्ति में निवेश किया है। हाल के वर्षों में पहली बार परिसंप?त्ति कीमतों में गिरावट का खपत व्यय पर काफी असर हुआ है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष अप्रैल में खुदरा बिक्री साल दर साल आधार पर 11.1 फीसदी घटी जबकि मई में इसमें 6.7 फीसदी की कमी आई। हालांकि जून में कुछ सुधार हुआ और यह 3.1 फीसदी धनात्मक रही। चीन में मांग कमजोर है इसलिए यही कारण है कि अन्य देशों की तुलना में वहां मुद्रास्फीति भी कम है और 2-2.5 फीसदी के दायरे में है। धीमी अर्थव्यवस्था का एक और संकेत बढ़ती बेरोजगारी में देखा जा सकता है। खासकर युवाओं में। 15 से 24 की आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 20 फीसदी है। चीन की अर्थव्यवस्था राष्ट्रपति शी चिनफिंग की कोविड शून्य नीति के कारण भी प्रभावित है। इसके चलते लॉकडाउन लग रहे हैं और शेष विश्व के साथ चीन का संपर्क प्रभावित हुआ है। ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस विपरीत आर्थिक माहौल के बीच भूराजनीतिक घटनाक्रम भी विपरीत है। अमेरिका के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के कारण भी दोनों देशों में अविश्वास बढ़ा है। ताइवान खाड़ी को लेकर उत्पन्न संकट इसका ताजा उदाहरण है। बाद वाला संकट कई वजहों से ज्यादा उल्लेखनीय है। ताइवान खाड़ी जापान और कोरिया से व्यापार और ईंधन प्रवाह के लिए अहम रास्ता है। अगर चीन वहां बार-बार सैन्याभ्यास करता है और नौवहन तथा हवाई सेवाएं बाधित होती हैं तो यह मार्ग बदलना होगा क्योंकि लागत बढ़ेगी और आपूर्ति शृंखला जटिल हो जाएगी। ताइवान चीन समेत कई देशों को उन्नत सेमीकंडक्टर का अहम आपूर्तिकर्ता है। इस सब के बीच वैश्विक उद्योगों को आपूर्ति बा?धित होगी। चीन और ताइवान का निवेश और व्यापार का रिश्ता बहुत गहरा है। यह तनाव उस पर असर डालेगा। इस वर्ष चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस भी होने वाली है जहां शी चिनफिंग पांच वर्ष का और कार्यकाल चाहेंगे। यूक्रेन युद्ध और ताइवान संकट को लेकर चीन की प्रतिक्रिया यकीनन उस बैठक में एक अहम कारक होगी। शी चिनफिंग ताइवान मामले पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकते नहीं नजर आना चाहेंगे क्योंकि वह चीनी नागरिकों के लिए भावनात्मक मुद्दा है। चीन अपनी महत्त्वाकांक्षी बेल्ट और रोड पहल के क्रियान्वयन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। महामारी के कारण उत्पन्न बाधा ने कई अन्य साझेदार देशों के आर्थिक कुप्रबंधन को भी उजागर किया तथा संसाधनों की सीमा को भी। इससे तमाम मोर्चों पर दिक्कत आई। श्रीलंका जैसे मामलों ने चीन की प्रतिष्ठा खराब की है कि वह अपने साझेदारों को कर्ज के जाल में फंसाता है। इसके चलते विकासशील देश चीन की विकास सहायता को लेकर बहुत चौकन्ने हो गए हैं। चीन इस पहल को समेट रहा है और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में भारी अधोसंरचना विकास के बजाय उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिनके भूराजनीतिक लाभ सामने आएं। भारत के लिए इन बातों का क्या मतलब है? पहला, अमेरिका-चीन विवाद बढ़ने के साथ चीन भारत और अमेरिका के बीच किसी भी तरह की सुरक्षा साझेदारी को लेकर अधिक चिंतित रहेगा और भारतीय सीमाओं पर दबाव भी बढ़ा सकता है। दूसरा, हमारे पड़ोस में चीन का प्रभुत्व कम हो सकता है? जिससे भारत के लिए यह अवसर बन सकता है कि भारत इस उपमहाद्वीप में अपना खोया हुआ प्रभाव दोबारा हासिल कर सके। तीसरा, चीन की जीडीपी वृद्धि में लगातार गिरावट वै?श्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे धीमेपन पर असर डालेगी और यह भारत की बाह्य आ?र्थिक संभावनाओं के लिए भी कोई अच्छी बात नहीं होगी। इन विरोधाभासी घटनाओं को संतुलित करना भारत की विदेश नीति के सामने एक जटिल चुनौती पेश करेगा। (लेखक पूर्व विदेश सचिव और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो हैं।)
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के कैलिफोर्निया में दो विमान आपस में टकरा गिए। गुरुवार को ये दोनों छोटे एयरक्राफ्ट आसमान में ही आपस में टकरा गए, जिसमे कई लोगों की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब वैटसोनविले शहर में विमान स्थानीय एयरपोर्ट पर लैंड करने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय अधिकारी ने बताया कि कई एजेंसियो ने वैटसोनविले म्युनिसिपल एयरपोर्ट पर 2 प्लेन जब लैंड करने की कोशिश कर रहे थे तो टकरा गए। हमारे पास कई लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट आई है। इस हादसे की जांच की जा रही है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार ट्विन इंजिन सेसना 340 विमान में दो लोग सवार थे, वहीं सिंगल इंजन सेसना 152 विमान जिसमे एक पायलट सवार था, वह क्रैश हो गया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हादसे में कितने लोग बच सके हैं। एफएफए और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड इस क्रैश की जांच कर रही है। वैटसोनविले के मेयर ने ब ताया कि इस हादसे में मृतकों को लेकर हम दुखी हैं। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करता हूं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सीरिया के बॉर्डर पर टर्की के लड़ाकू विमानों ने बड़ी बमबारी की है, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई है। 16 अगस्त को टर्की के विमानों ने सीरिया के कई ठिकानों पर बमबारी की, जिसमे 17 लड़ाके मारे गए हैं। हालांक यह साफ नहीं हो सका है कि मारे जाने वाले सरकार से जुड़े थे या फिर कुर्दिश सेना से। सेना के सूत्रों के अनुसार मारे जाने वालों में 3 सीरिया के सैनिक हैं, जबकि टर्की की छापेमारी में 6 लोग घायल हुए हैं। सेना के सूत्रों का कहना है कि सेना के आउटपोस्ट पर किसी भी तरह का हमला होता है तो हमारी सेना उसका जवाब देगी, हम इस तरह के हमले का तुरंत, सीधा और हर तरफ से जवाब देंगे। रिपोर्ट के अनुसार यह बमबारी कुर्दिश कब्जे वाले शहर कोबेन में हुई है, जहां पर टर्की और कुर्दिश सेना के बीच मुछभेड़ चल रही है। कुर्दिश के लड़ाकों ने भी टर्की के अंदर घुसकर बीती रात एक सैनिक को मार दिया है। टर्की के रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि 13 आतंकियों को मार गिराया गया है। यहां पर ऑपरेशन चल रहा था। सीरिया की कुर्डिश आर्मी का कहना है कि जुलाई माह से हमारे 13 लड़ाकों की मौत हुई है। बता दें कि टर्की ने कुर्दिश लड़ाकों को निशाना बनाने के लिए सीमा पर ऑपरेशन चला रखा है। वर्ष 2016 से ही इन लड़ाकों के खिलाफ टर्की लड़ाई लड़ रहा है। अहम बात यह है कि इस लड़ाई में सीरिया के सैनिक मुश्किल से ही मारे गए हैं। टर्की ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का विरोध करता है। आरोप है कि बशर कुर्दिश सेना का समर्थन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते टुर्की के विदेश मंत्री सीरिया और विपक्ष लड़ाकों के बीच सुलह की बात कही थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अपने ट्वीट्स को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहने वाले एलन मस्क ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स ने ट्विटर पर लिखा कि वह इंग्लिस फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहे हैं। उनके इस ट्वीट के बाद मानों इंटरनेट पर भूचाल आ गया। ट्विटर पर हर किसी में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि क्या वाकई टेस्ला चीफ इस फुटबॉल क्लब को खरीदने वाले हैं। दरअसल, मस्क ने आज सुबह एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, यह बहुत ही स्पष्ट है कि मैं आधा रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करता हूं और आधा डेमोक्रेटिक पार्टी का। इस ट्वीट के बाद उन्होंने एक और पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, मैं मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहा हूं, आपका स्वागत है। मस्क के इस ट्वीट पर यूजर्स ने कई सवाल दागे। सौदे को लेकर कितने गंभीर, पता नहीं : एलन मस्क इस तरह के ट्वीट अक्सर करते रहते हैं, जो चर्चा का विषय बनते हैं। इसलिए, उन्होंने ट्विटर पर तो मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीदने का एलान तो कर दिया, लेकिन खुद यूजर्स इस बार पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं और न ही एलन मस्क ने इस बारे में कुछ और लिखा है, जिससे पता चले कि वे इस सौदे के लिए कितना गंभीर हैं। हाल ही में ट्विटर से तोड़ा था सौदा : एलन मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया साइट ट्विटर से भी सौदा तोड़ लिया था। पहले उन्होंने ट्विटर के साथ एक बड़ी डील करी थी। हालांकि, बाद में इस डील से वह बाहर हो गए। इसको लेकर ट्विटर ने मस्क पर एक मुकदमा भी दायर किया है। ट्विटर ने कहा है कि अरबपति मस्क स्पैम खातों का इस्तेमाल सौदे से बाहर निकलने के बहाने के रूप में कर रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तरी अफगानिस्तान में मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग लापता हो गए हैं। तालिबान की सरकारी समाचार एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी। बाढ़ रविवार को उत्तरी परवान प्रांत में आई। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं और 17 लोगों के घायल होने की खबर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोमवार को कम से कम 100 लोग लापता हो गए। तलाश एवं बचाव अभियान जारी है। परवान प्रांत में तीन प्रभावित जिलों में बाढ़ के कारण दर्जनों घर बानी में बह गये। स्थानीय मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में अफगानिस्तान के अन्य 34 प्रांतों में और अधिक बारिश होने की आशंका है। गौरतलब है कि देश भर में भारी बारिश और बाढ़ के कारण जुलाई और जून में क्रमश: 40 और 19 लोगों की मौत हो गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सूडान में मौसमी मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 8,170 से अधिक मकान जलमग्न हो गए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूडान की राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल-जलील अब्दुल रहीम ने कहा कि उत्तरी कोर्दोफन प्रांत में 19 लोगों की मौत हुई है, इसके बाद नील नदी प्रांत में सात लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दारफुर क्षेत्र, जिसमें पांच प्रांत हैं, में 16 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने यह नहीं बताया कि पहली घटना कब हुई। सूडान का बरसात का मौसम आमतौर पर जून में शुरू होता है और सितंबर तक रहता है, अगस्त और सितंबर में बाढ़ चरम पर होती है। पिछले साल भी बाढ़ से 80 लोगों की मौत : देश की सरकारी सुना समाचार एजेंसी के अनुसार, अब्दुल रहीम ने कहा कि इस साल अब तक कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं। अब्दुल रहीम ने कहा कि बाढ़ और भारी बारिश से 16 सरकारी केंद्र और करीब 40 दुकानें जलमग्न हो गई हैं और देश भर में कम से कम 540 फेदान (एकड़) खेत क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा है कि मई के बाद से पूर्वी अफ्रीकी देश में भारी वर्षा से अनुमानित 38,000 लोग प्रभावित हुए हैं। पिछले साल बाढ़ और भारी बारिश से 80 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और देश भर में हजारों मकान बाढ़ के पानी में बह गये थे। तीन महीने तक आपातकाल : अधिकारियों ने 2020 में सूडान को एक प्राकृतिक आपदा क्षेत्र घोषित किया और बाढ़ और भारी बारिश के बाद देश भर में तीन महीने के लिए आपातकाल की स्थिति लागू कर दी और बाढ़ जनित घटनाओं में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई और 100,000 (एक लाख) से अधिक मकान जलमग्न हो गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की हालिया ताइवान यात्रा के बाद चीन ने अपने इस पड़ोसी स्वायत्त क्षेत्र की कड़ी सैन्य घेराबंदी कर ली है। सैन्य अभ्यास के जरिए उसने इस द्वीप देश को डराने की कोशिश की है। इसे लेकर दोनों देशों व अमेरिका के बीच तनातनी जारी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के उप सहायक और एशिया प्रशांत मामलों के समन्वयक कुर्ट कैंपबेल ने बड़ी बात कही है। दरअसल, चीन ताइवान को अपना स्वायत्त क्षेत्र मानता है, लेकिन वह एक स्वतंत्र देश के रूप में उसका अस्तित्व स्वीकार नहीं करता। वह उस पर अपना प्रभुत्व मानता है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को कैंपबेल ने कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा कि चीन के कदम मूल रूप से शांति व स्थिरता के खिलाफ हैं। आने वाले सप्ताहों में चीन ये कदम और तेज कर सकता है। वह ताइवान पर दबाव की कार्रवाई लगातार करता रहेगा। यह दबाव आने वाले हफ्तों और कई महीनों तक जारी रहेगा। इसका मकसद स्पष्ट रूप से ताइवान को डराना और उसकी आजादी को कम करना है। कैंपबेल ने कहा कि अमेरिका ताइवान के खिलाफ चीन के कदमों को देखते हुए शांतिपूर्वक ठोस कदम उठाता रहेगा ताकि क्षेत्र में शांति व स्थिरता कायम रखी जा सके। वह लंबे समय से चली आ रही अपनी नीति के अनुसार ताइवान की मदद करता रहेगा। चूंकि चुनौतियां लंबे समय तक रहने वाली है, इसलिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अमेरिकी कदम आगामी हफ्तों और महीनों में नजर आएंगे। हम नहीं झुकेंगे और धीरज के साथ प्रभावी कदम उठाएंगे। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों की इजाजत के मुताबिक जहां तक संभव होगा ताइवान के इलाकों में उड़ान भरना, समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही जारी रखेगा।इन कदमों में ताइवान की खाड़ी में हवाई और समुद्री परिवहन शामिल है। कैंपबेल ने कहा कि हम ताइवान रिलेशंस एक्ट के तहत अपनी वचनबद्धताओं को पूरा करेंगे। इसमें में ताइवान की आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करना और उसके खिलाफ ताकत या अन्य किसी तरह की जबरदस्ती के किसी भी प्रयास का विरोध करना शामिल है। ताइवान की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था या लोगों के जीवन को खतरे में डालने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। चीन द्वारा अमेरिका के साथ जलवायु परिवर्तन वार्ता स्थगित करने और संवाद के चैनलों को बंद करने के फैसलों का जिक्र करते हुए कैंपबेल ने बीजिंग से उन चैनलों को फिर से शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि कई देश इस इलाके में शांति और स्थिरता कायम रखने में गहरी रुचि रखते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क7 शहर में शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अंग्रेजी भाषा के मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला किया गया। इस दौरान रुश्दी की गर्दन से काफी खून निकला। रुश्दी पर उस समय हमला किया गया, जब वह पश्चिमी न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में व्याख्यान देने वाले थे। फिलहाल, अस्पताल में रुश्दी की सर्जरी की जा चुकी है और उनको वेंटिलेटर स्पोर्ट पर रखा गया है। वहीं हमलावर की पहचान न्यू जर्सी के 24 वर्षीय हादी मतार के तौर पर हुई है। सलमान रुश्दी पर हमले के बाद बांग्लादेश की मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन ने चिंता व्यक्त की है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, मुझे पता चला है कि सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हमला हुआ है। यह वाकई चौंकाने वाला है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। वे पश्चिम में रह रहे थे और उन्हें 1989 से सुरक्षा दी जा रही है। अगर, उन पर हमला हो सकता है तो जो भी इस्लाम की आलोचना करेगा, उस पर भी हमला हो सकता है। यह चिंता की बात है। सलमान रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली ने मीडिया को बताया कि उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। वह कुछ भी बोल नहीं पा रहे हैं। वहीं चाकू से किए गए हमले में उनकी हाथ की नसें भी कट गई हैं। वायली ने कहा, रुश्ती को हालत को देखते हुए कहा जा सकता है कि खबर अच्छी नहीं है। मशहूर लेखक सलमान रुश्ती की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं। आशंका है कि हमले में उनकी एक आंख भी खराब हो गई है। इसके अलावा उनके लीवर में भी चाकू घोंपी गई है, जिससे लीवर को भी नुकसान पहुंचा है।
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