एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में धूमधाम के साथ लोग छठ पर्व मनाते हैं। छठ पर्व हिंदू धर्म में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। पहले यह पर्व पूर्वांचल तक सीमित था, लेकिन अब यह पर्व पूरे भारतवर्ष अलावा लंदन में भी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इसमें उपवास करके सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। इस पर्व का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। इस बार लंदन में बिहार का मुख्य त्योहार छठ पूजा का बड़े स्तर पर आयोजन होने जा रहा है। इस वर्ष पहली बार इंग्लैंड में बिहारी कनेक्ट यूके ग्रुप द्वारा बड़े स्तर पर छठ का होगा। लंदन में बड़े स्तर पर छठ पूजा का आयोजन होने जा रहा है। मौके पर सभी प्रवासी बिहारी अपने इस महापर्व का मिल-जुल कर आनंद ले सकेंगे। इसकी जानकारी लंदन में रह रहे बिहारी कनेक्ट के प्रेसिडेंट डॉ उदेश्वर कुमार सिंह के साथ ग्रुप के सदस्य कैप्टन ओम प्रकाश, अजय कुमार, संदीप गुप्ता, डॉ बिरेंद्र राय, राजीव सिंह व विजय राय ने दी। साथ ही ऐसा माना जाता है कि रामायण और महाभारत काल से ही छठ पर्व मनाया जा रहा है। रामायण काल में माता सीता ने छठ पर्व की पूजा अर्चना की थी, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि महाभारत काल में सबसे पहले द्रौपदी ने छठ की पूजा की थी। इसी तरह से कुछ लोग इसे स्त्रियों का पर्व कहते है, लेकिन पुरूषों के बिना भी छठ पर्व में पूजा की कई रस्म अधूरी रह जाती है। छठ पूजा सूर्य उपासना का महापर्व है। यह त्योहार चार दिन तक मनाया जाता है। छठ पूजा का महापर्व लोगों का प्रकृति के प्रति समर्पण भाव को दर्शाता है। बिहार के लोग देश से लेकर विदेश तक जहां कही भी गए, अपनी संस्कृति भी साथ लेते गये। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है, जिसमें उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूरी दुनिया को सूर्य का महत्व बताना ही इस महान पर्व का लक्ष्य है। इस वर्ष छठ महापर्व 28 अक्टूबर से शुरू हो रहा है और 31 अक्टूबर को सूर्योदय के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होगा। इस वर्ष लंदन में 15 परिवार से अधिक सदस्य एक साथ छठी मइया का व्रत करने जा रहे हैं। छठ महापर्व आयोजकों द्वारा सभी व्रतियों के लिए रिसॉर्ट में रहने का प्रबंद किया गया है। बता दें कि जो श्रद्धालु इस पर्व को देखने आ रहे है। उनके लिए आसपास के होटल बुक किये गये हैं। इसके अलावा बता दें कि पूजा की अधिकतम सामग्री भारत से मंगवाई जा रही है। साथ ही बता दें कि पूजा में किसी प्रकार की कोई रुकावट नहीं आये, इसके लिए कई स्वयंसेवी इन तीनों दिन उपलब्ध रहेंगे। ये सभी स्वयंसेवी व्रत का प्रसाद बनाने से लेकर श्रद्धालुओं के सफल आवा-गमन को संचालित करेंगे। इसके साथ ही संध्या अर्घ्य के दिन हजारों की संख्या में ठेकुआ बनाने का प्रबंध किया जा रहा है, जिसे इंग्लैंड में रहने वाले सभी बिहार वासियों के घर प्रसाद स्वरूप भेजा जायेगा, ताकि वे देश से बाहर रहकर भी अपने आप को इस महापर्व का हिस्सा समझ सके। इस पर्व को लेकर सभी तैयारियां हो गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का एक हफ्ते से जारी महासम्मेलन (कांग्रेस) का समापन सत्र शनिवार को शुरू हो गया। लगभग दो हजार प्रतिनिधियों के पार्टी के संविधान में बदलाव को मंजूरी देने की उम्मीद है, जो चीनी नेता शी जिनपिंग की सत्ता पर पकड़ को और बढ़ा सकता है। वे अगले पांच सालों के लिए लगभग 200 सदस्यों की एक नई केंद्रीय समिति को औपचारिक रूप से मंजूरी देंगे। सीपीसी का 20वां अहम महासम्मेलन आज पार्टी की शक्तिशाली और शीर्ष नेताओं वाली केंद्रीय समिति के चुनाव के साथ संपन्न होगा। पार्टी के महासम्मेलन में आने वाले पांच सालों के लिए देश का एजेंडा तय किया जाता है। सीपीसी हर पांच साल में इस महा सम्मेलन का आयोजन करती है, जिसमें पूरे देश की शाखाओं के कुल 2296 निर्वाचित प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। ये 20वां महा सम्मेलन आज पार्टी का संचालन करने वाली केंद्रीय समिति के चुनाव के साथ संपन्न होगा। मौजूदा केंद्रीय समिति में 376 सदस्य हैं, जिनमें से 205 पूर्णकालिक सदस्य जबकि 171 वैकल्पिक सदस्य हैं। नई केंद्रीय समिति की बैठक रविवार को राजनीतिक ब्यूरो का चुनाव करने के लिए होगी, जो स्थायी समिति का चुनाव करेगी। स्थायी समिति पार्टी की सबसे शक्तिशाली यूनिट है जो देश पर शासन करती है। स्थायी समिति की बैठक भी उसी दिन होगी जिसमें महा सचिव का चुनाव होगा। महासचिव ही 1.4 अरब आबादी वाले देश का शीर्ष नेता होता है। मौजूदा राजनीतिक ब्यूरो में 25 सदस्य हैं, जबकि स्थायी समिति में 69 वर्षीय जिनपिंग सहित सात सदस्य हैं। जिनपिंग साल 2002 से ही पार्टी के महा सचिव हैं। कयास लगाये जा रहे हैं कि स्थायी समिति रविवार को अप्रत्याशित रूप से शी को तीसरे कार्यकाल के लिए महासचिव बनाने का प्रस्ताव किया जायेगा। जिनपिंग इस साल सीपीसी प्रमुख और राष्ट्रपति के तौर पर अपना 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। पार्टी संस्थापक माओत्से तुंग के बाद वह पहले चीनी नेता होंगे जो सत्ता में तीसरे कार्यकाल तक कायम रहेंगे। माओत्से तुंग ने करीब तीन दशक तक शासन किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि नया कार्यकाल मिलने का अभिप्राय जिनपिंग का भी माओ की तरह जीवनपर्यंत सत्ता में रहना हो सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वो महज 45 दिन ही इस पद पर रह पाईं। इस्तीफा देने के बाद ट्रस ने कहा कि जिस काम के लिए उन्हें चुना गया था वो नहीं कर पाई। इससे पहले बुधवार देर रात गृह मंत्री सुएला ब्रैवरमैन ने पद से इस्तीफा दे दिया था। एक बार फिर ब्रिटेन में चुनाव होंगे। प्रधानमंत्री की रेस में भारतवंशी पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक आगे बताए जा रहे हैं। बता दें कि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री लिज ट्रस की सरकार से एक वरिष्ठ मंत्री के इस्तीफे और संसद के निचले सदन में सदस्यों द्वारा जमकर आलोचना के बृहस्पतिवार के घटनाक्रम के बाद अब उनके (ट्रस के) पद पर बने रहने को लेकर संशय पैदा हो गया था। पिछले महीने सरकार ने एक आर्थिक योजना पेश की थी, जिसके असफल होने के कारण आर्थिक उथल-पुथल और राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इसके बाद ट्रस को वित्त मंत्री बदलने के अलावा अपनी कई नीतियों को भी उलटना पड़ा। साथ ही उनके कार्यकाल के दौरान सत्तारूढ़ कन्जरवेटिव पार्टी में अनुशासनहीनता भी देखने को मिली है। कन्जरवेटिव पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि ट्रस को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, हालांकि वह अपनी जगह कायम हैं और साफ कह चुकी हैं कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। कन्जरवेटिव पार्टी के सांसद साइमन होरे ने कहा कि सरकार अव्यवस्थित हो गई है। उन्होंने बृहस्पतिवार को बीबीसी से कहा, किसी के पास ठोस योजना नहीं है। यह दिन-प्रतिदिन एक-दूसरे से उलझने के समान है। उन्होंने कहा कि ट्रस के पास स्थिति को बदलने के लिए लगभग 12 घंटे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री एनी-मैरी ट्रेवलिन ने बृहस्पतिवार को सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार स्थिरता प्रदान करने में जुटी है। हालांकि वह इस बात की गारंटी नहीं दे पाईं कि ट्रस अगले चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगी। ट्रेवलिन ने कहा, "फिलहाल, मुझे लगता है कि यह सही है। जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जिसके मद्देनजर कन्जरवेटिव पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि ट्रस को हटाकर ही कोई उम्मीद की जा सकती है। लेकिन वे इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि उन्हें कैसे हटाया जाए। इसके अलावा अभी तक ट्रस के विकल्प के तौर पर कोई नाम भी सामने नहीं आया है। इससे पहले, भारतीय मूल की ब्रिटिश गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने लंदन में मंत्रिस्तरीय संचार के लिए अपने निजी ई-मेल का इस्तेमाल करने की गलती के बाद बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। ब्रेवरमैन (42) ने अपने ट्विटर हैंडल पर त्यागपत्र पोस्ट किया। उन्होंने कहा, मैंने गलती की। मैं इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करती हूं। ब्रेवरमैन ने कहा, मैंने अपने व्यक्तिगत ई-मेल से एक विश्वसनीय संसदीय सहयोगी को एक आधिकारिक दस्तावेज भेजा। जैसा कि आप जानते हैं, दस्तावेज आव्रजन के बारे में मंत्रिस्तरीय बयान था, जिसका प्रकाशन होना था। पिछले शुक्रवार को क्रासिंस्की क्वार्टेंग को वित्त मंत्री पद से हटा दिया गया था और उनके उत्तराधिकारी, वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने सोमवार को सरकार के मिनी-बजट में कटौती कर दी थी। इस कदम से ट्रस के नेतृत्व के लिए संकट और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। साथ ही उनके प्रधानमंत्री बने रहने पर भी संकट के बादल मंडराने लगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने रविवार को यहां सप्ताह भर चलने वाले अपने कांग्रेस सत्र का आगाज किया, जिसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रिकॉर्ड तीसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए समर्थन मिलने की उम्मीद है। जिनपिंग को तीसरे कार्यकाल की मंजूरी मिलने के साथ ही शीर्ष नेताओं के 10 साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने का तीन दशकों से अधिक समय तक चला आ रहा नियम टूट जायेगा। शी (69) के अलावा चीनी नेतृत्व में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली क्विंग समेत सभी शीर्ष अधिकारियों को इस सप्ताह के दौरान व्यापक फेरबदल में हटा दिया जायेगा। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की 20वीं नेशनल कांग्रेस ऐसे वक्त में हो रही है कि जब शी चिनफिंग के तथा व्यापक पाबंदियों और लॉकडाउन के जरिए कोरोना को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की उनकी नीति के खिलाफ विरोध के सुर उठे हैं जो अपने आप में विरले है। इन पाबंदियों के कारण दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी आ रही है। कांग्रेस में 2,296 ‘‘निर्वाचित' प्रतिनिधि बंद कमरे में होने वाली बैठक में शामिल होंगे। कांग्रेस के प्रवक्ता सुन येली ने शनिवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस 16 अक्तूबर से 22 अक्तूबर तक आयोजित की जाएगी। शी आज कांग्रेस के समक्ष अपनी कार्य रिपोर्ट पेश कर सकते हैं। पांच साल में एक बार होने वाली इस कांग्रेस के मद्देनजर गुरुवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में राजधानी बीजिंग के उत्तर पश्चिम में ऐसे बैनर लटके हुए देखे गए जिसमें शी की कोविड नीति और निरंकुश शासन का विरोध किया गया था। बीजिंग में विश्वविद्यालयों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के गढ़ हैदियां जिले में एक पुल पर लगे बैनरों में लिखा हुआ था, भोजन, न कि कोविड जांच, सुधार, न कि सांस्कृतिक क्रांति, आजादी, न कि लॉकडाउन, वोट, न कि नेता, प्रतिष्ठा, न कि झूठ, नागरिक, न कि गुलाम। ऐसे बैनर लगाए जाने के बाद बीजिंग में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पर्यवेक्षकों के अनुसार, देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर चिंताओं के अलावा पिछले 10 साल में अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी कार्रवाई को लेकर भी असंतोष है। इस कांग्रेस पर नेतृत्व परिवर्तन और राष्ट्रपति शी को अभूतपूर्व रूप से तीसरा तथा संभवत: जीवन भर का कार्यकाल मिलने को लेकर देश और विदेश भर की निगाहें टिकी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके ताज में लगे कोहिनूर हीरे की भारत वापसी की मांग जोर पकड़े हुए है। 108 कैरेट का यह बेशकीमती हीरा पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के बेटे महाराजा दलीप सिंह ने 1849 में महारानी विक्टोरिया को भेंट किया था। 1937 में महारानी ने इसे अपने ताज में जड़वा लिया था। उत्तराधिकारी के नाते बाद में यह मुकुट एलिजाबेथ द्वितीय ने पहना था। सितंबर में महारानी एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग लगातार हो रही है। यह कोहिनूर दुनिया के सबसे बड़े व वजनी हीरे में शुमार है। इसकी वापसी की मांग को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची से सवाल किया गया। बागची ने कहा कि सरकार इस मसले के संतोषजनक समाधान में लगातार जुटी हुई है। उन्होंने इस बारे में सरकार द्वारा कुछ सालों पहले संसद में दिये गये बयान का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सरकार ने संसद में कहा था कि हम यह मामला ब्रिटिश सरकार के सामने समय समय पर उठाते रहे हैं। मामले के संतोषजनक हल के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। कैमिला को नहीं मिलेगा ताज : महारानी एलिजाबेथ के पिछले माह निधन के बाद ब्रिटेन में प्रिंस चार्ल्स अब किंग चार्ल्स III बन गये हैं। ब्रिटेन के राजपरिवार के वे अब राजा बन गये हैं। अगले साल मई में उनका औपचारिक राज्याभिषेक होगा। पहले कहा जा रहा था कि किंग चार्ल्स की पत्नी क्वीन कंसोर्ट कैमिला को यह कोहिनूर जड़ा ताज पहनाया जायेगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि यह ताज कैमिला को नहीं मिलेगा। कोहिनूर के स्वामित्व को लेकर विवाद और दूसरी पत्नी होने के नाते कैमिला की राजपरिवार में हैसियत के चलते वह इससे वंचित रहेंगी। बता किंग चार्ल्स तृतीय की पहली पत्नी डायना का एक सड़क हादसे में दशकों पूर्व निधन हो गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने पाकिस्तान पर निशाना साधा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए एक फंड जुटाने के कार्यक्रम के दौरान बाइडन ने पाकिस्तान को दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक करार दिया। इतना ही नहीं बाइडन ने इटली और हंगरी जैसे देशों पर भी निशाना साधा। गौरतलब है कि बाइडन लगातार दक्षिणपंथी देशों में लोकतंत्र की गिरती स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध में पुतिन के समर्थन करने वाले देशों पर बयान देते रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने इन तीन देशों को घेरा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि इस देश ने बिना किसी सामंजस्य के परमाणु हथियार जुटा रखे हैं। बाइडन के इस बयान की टाइमिंग काफी अहम है। दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अमेरिका में थे। यहां उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री के साथ कई और नेताओं से मुलाकात भी की थी। माना जा रहा था कि बाजवा की यह मुलाकात अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों के लिए अहम साबित होगी। हालांकि, अब बाइडन के इस बयान से एक बार फिर अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों में पड़ी दरार सामने आ गई है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का काफी करीबी माना जाता है। इसे लेकर बाइडन ने खतरा जताते हुए कहा, आप दुनियाभर में जारी चर्चाओं को देखें, खासकर लोकतंत्र के क्या मायने हैं, इस मुद्दे पर। लेकिन जब आप हंगरी को देखते हैं, जो कि एक नाटो का सदस्य है। मैं आपको उसके लोकतंत्र के बारे में बताकर बोर कर सकता हूं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। तुर्की की कोयला खदान में बड़ा हादासा हो गया है। तुर्की की कोयला खदान में विस्फोट होने से 25 लोगों की मौत हो गयी हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के उत्तरी बार्टिन प्रांत में एक कोयला खदान में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत हो गयी और दर्जनों लोग फंसे हुए हैं। धमाका शुक्रवार को काला सागर तट पर अमासरा स्थित प्लांट में हुआ। रिपोर्ट मुताबिक जिस वक्त खदान में धमाका हुआ, वहां करीब 110 लोग काम कर रहे थे। इसलिए अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि कितने लोग अब भी अंदर खदान में फंसे हुए हैं। लगभग 28 लोग घायल हैं। तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहार्टिन कोकास ने कहा कि अभी तक 11 लोगों को कोयले की खदान में से रेस्क्यू करके बचाया गया है। विस्फोट के समय खदान में करीब 110 लोग काम कर रहे थे, जिनमें से लगभग आधे 300 मीटर अंदर गहरे खदान में काम कर रहे थे। हादसे में घायल 28 लोगों का अस्पताल में इलाज तल रहा है। ये कोयले का खदान 300 से 350 मीटर गहरी है, ये एक जोखिम भरा क्षेत्र है। वहीं तुर्की के ऊर्जा मंत्री फातिह डोनमेज ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि विस्फोट संभवतः फायरएम्प-कोयला खदानों में पाये जाने वाली ज्वलनशील गैसों की वजह से हुआ। हालांकि हम इस मामले की तह तक जायेंगे। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। हादसे की जगह अपने दोस्तों और प्रियजनों की तलाश में भीड़ इकट्ठा हो गई है। बार्टिन प्रांत के गवर्नर ने नुर्ताक अरसलान ने कहा कि विस्फोट लगभग खदान की एंट्री गेट से 300 मीटर (985 फीट) नीचे हुआ। यह खदान राज्य के स्वामित्व वाली तुर्की हार्ड कोल एंटरप्राइजेज की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में मौजूदा सरकार के खिलाफ असंतोष पनपने के संकेत मिल रहे हैं। गुरुवार को बीजिंग में दुकानों के बाहर अचानक कई बैनर नजर आने लगे। उनमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पद से हटाने और कोरोना पाबंदियां खत्म करने जैसे कई नारे लिखे हुए थे। यह पहला मौका है जब जिनपिंग के खिलाफ ऐसे बैनर नजर आये हैं। चीन की राजधानी बीजिंग की सड़कों पर इन बैनरों की कई तस्वीरें व वीडियो ट्विटर पर कल तेजी से वायरल हुए। ट्विटर चीन में ब्लॉक है। जिनपिंग के खिलाफ सोशल मीडिया में नाराजगी तब खुलकर सामने आई है, जब चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का 10 साल में दो बार होने वाला सम्मेलन शुरू होने वाला है। इन बैनरों पर राष्ट्रपति जिनपिंग को पद से हटाने और कठोर कोरोना पाबंदियां खत्म करने की मांग की गई थी। सोशल मीडिया में वायरल ये बैनर बीजिंग के उत्तर-पश्चिमी हैडियन जिले में टंगे नजर आए थे। कुछ ही समय में स्थानीय प्रशासन ने उन्हें हटवा दिया, लेकिन तब तक इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए दुनियाभर में फैल चुकी थी। जिनपिंग का यह विरोध इसलिए अहम है, क्योंकि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी आगामी 20 वें सम्मेलन में राष्ट्रपति के तौर पर उनके तीसरे कार्यकाल पर मुहर लगाने जा रही है। बीजिंग में होने वाले इस सम्मेलन को लेकर चीन की सरकारी एजेंसियां व अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। इसलिए जैसे ही ये बैनर दिखे, उन्हें तत्काल हटा दिया गया। वायरल वीडियो में से एक पर लिखा था, हम कोविड परीक्षण नहीं चाहते हैं, हमें खाना चाहिए। हम लॉकडाउन नहीं चाहते हैं, हम मुक्त होना चाहते हैं। बता दें, चीन में शून्य कोविड नीति लागू होने के कारण अलग अलग इलाकों में बार-बार लॉक डाउन लगाया जा रहा है। इससे कारोबारियों व आम लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे चीन के लोग निराश हैं। न्यूज एजेंसियों ने जिनपिंग विरोधी बैनरों को लेकर जब चीन की पुलिस से उसके आधिकारिक वीचैट के जरिये संपर्क कर प्रतिक्रिया जानना चाही तो किया गया तो कोई जवाब नहीं दिया गया। चीन में इंटरनेट पर कड़ा पहरा है। सोशल मीडिया पर भी पाबंदी है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse