एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बताया है। मुख्य न्यायाधीश ने इमरान की गिरफ्तारी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा है कि यह बिल्कुल गलत हुआ है। हम पाकिस्तान को जेल नहीं बनने दे सकते हैं।
बताते चलें कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में हालात कंट्रोल से बाहर दिख रहे हैं। पंजाब से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक में उनके समर्थकों ने जमकर बवाल काटा है। हालात को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट बंद है और सभी सोशल मीडिया ऐप्स को डाउन किया गया है।
यही नहीं हालात इसके बाद भी नहीं सुधरे तो फिर पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल भी लग सकता है, जो हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं। पाकिस्तानी मीडिया में इस बात की चर्चा है। द न्यूज के मुताबिक यदि राज्य सरकारें हालात संभाल नहीं पाईं तो फिर आपातकाल घोषित हो सकता है।
पाकिस्तान के संविधान के आर्टिकल 232 में आपातकाल के प्रावधान का जिक्र है। इसके तहत यदि किसी सूबे में व्यवस्था खराब होती है और उसे राज्य सरकार संभाल नहीं पाती है तो फिर इमरजेंसी लग सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित राज्य की ओर से एक प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति भेजने की जरूरत है।
इसके बाद प्रधानमंत्री की सलाह के बाद राष्ट्रपति आपातकाल पर फैसला लेते हैं। फिलहाल दोनों ही राज्यों में विधानसभा नहीं हैं और उन्हें भंग किया जा चुका है। ऐसे में प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति खुद ही आपातकाल पर फैसला ले सकते हैं।
संविधान के अनुसार यदि राष्ट्रपति खुद ही फैसला लेते हैं तो फिर 10 दिनों के अंदर संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलना जरूरी है। आपातकाल के दौरान संसद के पास यह अधिकार होता है कि वह किसी भी राज्य के लिए जरूरी कानून बना सके।
बता दें कि पाकिस्तान में इमरान खान समर्थकों का बवाल जारी है। पेशावर में पाकिस्तान रेडियो की इमारत में आग लगाना हो या फिर रावलपिंडी में सेना के मुख्यालय में घुसकर उपद्रव करना। इमरान खान के समर्थक किसी भी तरह से मानने को तैयार नहीं हैं। यही नहीं पेशावर में तो बुधवार को फायरिंग के दौरान 4 लोगों की मौत हो गई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से पाकिस्तान में बवाल मचा है। इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतर आये हैं और विरोध-प्रदर्शन लगातार हिंसक होता जा रहा है। पाकिस्तान में इस समय हालात काफी बेकाबू हो गये हैं। इसी बीच सामाचार मिला है कि खान की पार्टी के दूसरे बड़े नेता शाह महमूद कुरैशी को भी गिरफ्तार कर लिया है। शाह महमूद कुरैशी इमरान सरकार में विदेश मंत्री रह चुके हैं।
बता दें, शाह महमूद कुरैशी और असद उमर लगातार इमरान खान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के महासचिव असद उमर को भी हिरासत में ले लिया गया है।
इस्लामाबाद पुलिस के मुताबिक पार्टी महासचिव उमर पार्टी अध्यक्ष इमरान खान की गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें राज्य की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में अरेस्ट कर लिया है।
पीटीआई के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने उमर की गिरफ्तारी के वीडियो साझा किए, जिसमें कई पुलिसकर्मी उसे घेरे हुए थे और एक पुलिस वैन की ओर उमर को घसीटते हुए ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। पीटीआई नेता एवं अधिवक्ता बाबर अवान ने दावा किया कि उमर की गिरफ्तारी गैर कानूनी ढंग से की गयी है उन्हें सिंध हाई कोर्ट द्वारा सुरक्षात्मक जमानत मंजूर की गयी थी।
इस्लामाबाद में आज मीडिया से बात करते हुए अधिवक्ता अवान ने कहा, एसएचसी ने उन्हें स्पष्ट रूप से सुरक्षात्मक जमानत मंजूर की थी और यहां तक कि अन्य मामलों में भी वह जमानत पर थे।
8 दिन की रिमांड पर भेजे गये इमरान खान
पाकिस्तान की एक भ्रष्टाचार रोधी अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आठ दिन के लिए राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) की रिमांड में भेज दिया, जबकि यहां एक सत्र अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में आरोपित किया। ब्यूरो के आदेश पर मंगलवार को अर्द्धसैनिक बल ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के एक कक्ष में घुस कर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष को गिरफ्तार किया था।
बुधवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच खान (70) को यहां जवाबदेही अदालत संख्या-1 में उसी न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरयम को लंदन में संपत्ति रखने से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी करार दिया था। मरयम को बाद में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में आरोपमुक्त कर दिया, जबकि शरीफ का मामला अब भी लंबित है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तार के बाद पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। गिरफ्तारी के बाद इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतर आये हैं और कई शहरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना को अंजाम दिया है।
समर्थकों ने रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और लाहौर में कोर कमांडर के आवास पर धावा बोल दिया। खान की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पूरे पाकिस्तान में अगले 30 दिनों के लिए धारा 144 लागू कर दी गयी है। स्कूल-कॉलेज को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है। पूरे देश में मोबाइल इंटरनेट को सस्पेंड कर दिया गया है।
देशभर में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इमरान खान की गिरफ्तारी कल यानी मंगलवार को हुई। एक नजर अब तक के बड़े अपडेट्स पर डाल लेते हैं। इमरान खान की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब दो दिन पहले ही उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सीनियर अधिकारी पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था। इस मामले में सेना और प्रधानमंत्री ने इमरान पर पलटवार भी किया था।
पाकिस्तान की आंतरिग मंत्री राणा सनाउल्लाह खान ने कहा है कि मामले में कई नोटिस जारी होने के बाद इमरान अदालत में पेश नहीं हुए। एनएबी ने उन्हें देश के खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उनके साथ कोई बदसलूकी नहीं की गयी है।
बुधवार सुबह-सुबह प्रदर्शकारियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के घर में आग लगा दी। पुलिस की गाड़ी फूंक दी। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। आज होने वाली परीक्षाएं रद्द कर दी गयी है। कई शहरों में इंटरनेट को स्लो कर दिया गया है।
पीटीआई के आधिकारिक ट्विटर हैंडल के अनुसार लाहौर, पेशावर, कराची, गिलगित सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। वहीं, डॉन की खबर के मुताबिक, मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान इस्लामाबाद में 5 पुलिस अधिकारी घायल हो गये।
इमरान की गिरफ्तारी के बाद पीटीआई के महासचिव असद उमर ने ट्वीट कर कहा कि पार्टी के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति आगे की प्लानिंग तय करेगी कि क्या करना है और क्या नहीं।
इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इमरान खान की गिरफ्तारी की वैधता पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर गिरफ्तारी अवैध निकली तो इमरान को रिहा करना होगा।
इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इमरान खान की गिरफ्तारी के 15 मिनट के भीतर आंतरिक मंत्री सचिव और इस्लामाबाद पुलिस प्रमुख को अदालत में पेश होने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट आइए और बताइए कि गिरफ्तारी क्यों और किस मामले में हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पाक रेंजर्स ने इमरान खान को गिरफ्तार किया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट के बाहर ही इमरान खान को गिरफ्तार कर लिया गया।
अर्धसैनिक बलों ने उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह भ्रष्टाचार के एक मामले में सुनवाई के लिये इस्लामाबाद हाईकोर्ट में मौजूद थे। इधर, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इमरान खान को अगवा कर लिये जाने का आरोप लगाया है।
पीटीआई ने ट्वीट किया कि पाकिस्तान रेंजर्स ने पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान का अपहरण कर लिया। गिरफ्तारी के बाद इमरान खान को मेडिकल चेकअप के लिए इस्लामाबाद से रावलपिंडी ले जाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अर्धसैनिक बलों ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। इमरान खान की पार्टी ने यह जानकारी दी। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष खान को रेंजर्स ने उस वक्त हिरासत में लिया, जब रिश्वतखोरी के आरोप में वह अदालत में पेश हुए थे।
उनके वकील फैसल चौधरी ने यह बात कही। पूर्व सूचना मंत्री और पीटीआई के उपाध्यक्ष फवाद चौधरी ने कहा कि अदालत पर रेंजर्स का कब्जा है और वकीलों को यातना दी जा रही है। उन्होंने कहा, इमरान खान की कार को घेर लिया गया है। पीटीआई के एक और नेता अजहर मसवानी ने आरोप लगाया कि रेंजर्स द्वारा अदालत के अंदर से 70 वर्षीय खान का अपहरण किया गया।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने देश भर में प्रदर्शन का तत्काल आह्वान किया है। पार्टी के एक अन्य नेता ने ट्विटर पर वीडियो संदेश में कहा, वे इमरान खान को प्रताड़ित कर रहे हैं। वे खान साहब को पीट रहे हैं। उन्होंने खान साहब के साथ कुछ किया है।
पार्टी की वरिष्ठ नेता शिरीन मजारी के अनुसार, लाहौर से संघीय राजधानी इस्लामाबाद आए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष अदालत में एक बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजर रहे थे, तभी रेंजर्स ने कांच की खिड़की को तोड़ दिया और वकीलों तथा खान के सुरक्षा कर्मचारियों की पिटाई करने के बाद उन्हें (खान को) गिरफ्तार कर लिया।
टीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि रेंजर खान को कॉलर से पकड़कर ले जा रहे हैं और उन्हें कैदी वाहन में बैठाया जा रहा है। राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से पुष्टि की कि खान को प्रॉपर्टी कारोबारी मलिक रियाज को जमीन स्थानांतरित करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें एनएबी को सौंपा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि खान को अल-कादिर ट्रस्ट मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, उनकी गिरफ्तारी का वारंट आज सुबह जारी किया गया था और उसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
मजारी ने कहा, कौन सा कानून? न्यायालयों पर रेंजरों द्वारा हमला किया गया जैसे कि एक कब्जे वाली भूमि पर हमला कर रहे हों- वकीलों और आईएचसी कर्मचारियों को भी पीटा गया। यह आज का पाकिस्तान है- एक फासीवादी राष्ट्र, जहां अर्धसैनिक बलों द्वारा उच्च न्यायालय पर हमला किया गया।
मजारी ने ट्वीट किया, सरकारी आतंकवाद-इमरान खान को अदालत परिसर से अगवा करने के लिए आईएचसी परिसर में घुसी। जंगल कानून चल रहा है। रेंजर्स ने वकीलों को पीटा, इमरान खान के साथ हिंसा की और उनका अपहरण किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि खान को प्रताड़ित किया जा रहा है, लेकिन स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की हत्या की कोशिश का आरोप यूक्रेन पर लगने के बाद दोनों देशों के बीच घमासान बढ़ गया है। आक्रामकता बढ़ने के साथ ही रूसी सेना ने यूक्रेन पर हमले तेज कर दिये हैं, जिसके बाद यूक्रेन की राजधानी कीव से ओडेसा तक धमाके हुए।
यूक्रेन पर रूस के हमले के चौदह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संकट कम नहीं हो रहा है। रूसी राष्ट्रपति भवन पर ड्रोन हमले के बाद रूस ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को मारने के प्रयास का आरोप लगाया था। इसके बाद अचानक रूसी सेना की आक्रामकता बढ़ गयी है।
यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में रूसी सेना की कार्रवाई तेज हो गयी है। यहां के लोगों ने गुरुवार सुबह भी धमाकों की आवाज सुनी। यूक्रेन के क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन ने कहा कि कीव में सभी एयर डिफेंस सिस्टम काम कर रहे हैं और सेना लोगों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है।
रूस की सेना ने खेरसन में जोरदार हमले किये, जिनमें 21 लोगों की मौत हो गयी। खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जानकारी दी कि इन हमलों में 48 लोग घायल भी हुए हैं। यूक्रेनी अफसरों ने बताया कि रूस के हमलों में 12 लोग शहर में ही मारे गये, जबकि पास के गांवों में भी मृतकों की खोज जारी है। अब तक नौ के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इन हमलों के बीच खेरसन में कर्फ्यू जारी है।
इस बीच यूक्रेन के ड्रोन हमले से दक्षिण रूस में तेल रिफाइनरी में आग लग गयी। यूक्रेन की ओर से यह हमला इल्स्की रिफाइनरी के पास हुआ, जो काला सागर बंदरगाह के करीब नोवोरोसियस्क में मौजूद है। दावा किया गया कि तेल के बड़े भंडार में आग लगी है।
इससे पहले यूक्रेन के कथित हमले के दौरान रूस के क्रैस्नोदार क्षेत्र में एक ईंधन डिपो में आग लग गई थी। यह इलाका रूस और क्रीमिया को जोड़ने वाले पुल के काफी करीब है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है कि उसने रूसी राष्ट्रपति को मारने के लिए क्रेमलिन पर ड्रोन से हमला किया है। यह खबर रायटर्स ने रूसी न्यूज एजेंसी के हवाले से जारी की है। क्रेमलिन ने इस हमले को एक प्लान्ड टेररिस्ट एक्शन माना है।
बताया जा रहा है कि इस हमले में दो ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया है। दोनों ड्रोन्स को रूसी डिफेंस फोर्सेस ने तबाह कर दिया है। क्रेमलिन की ओर से बयान जारी करके बताया गया है कि राष्ट्रपति पुतिन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और बिल्डिंग में भी किसी तरह का मटेरियल डैमेज ड्रोन अटैक में नहीं हुआ है।
पिछले महीने की 27 तारीख को भी मॉस्कों से थोड़ी ही दूरी पर एक ड्रोन का मलबा बरामद किया गया था। रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने कहा था कि यूक्रेन की ओर से भारी विस्फोटकों के साथ यह ड्रोन रूसी राष्ट्रपति को जान से मारने के लिए भेजा गया था। हालांकि यह ड्रोन टारगेट पर पहुंचने से पहले ही क्रैश हो गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के कमांडर इगोर गिरकिन ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ वैगनर ग्रुप सैन्य विद्रोह कर सकता है। उल्लेखनीय है कि वैगनर ग्रुप प्राइवेट आर्मी का संचालन करता है। इसके प्रमुख येवेगेनी प्रिगोझिन हैं। येवेगेनी प्रिगोझिन कभी पुतिन के करीबी रहे हैं। वैगनर ग्रुप की आर्मी यूक्रेन के बाखमुत में तैनात है। येवेगेनी का आरोप है कि व्लादिमीर पुतिन उनके सैनिकों की कोई मदद नहीं कर रहे। इसलिए वह अपने सैनिकों को यूक्रेन के मोर्चे से हटा सकते हैं। रूसी कमांडर इगोर गिरकिन का कहना है कि अगर शीर्ष नेतृत्व से बात किये बिना येवेगेनी अपने सैनिकों को मोर्चे से हटाते हैं तो इसे सैन्य विद्रोह ही माना जायेगा। रूस के कमांडर इगोर ने कहा कि अगर प्रिगोझिन अपने सैनिकों को हटाते हैं तो यह रूस के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। सनद रहे वैगनर ग्रुप के प्रमुख येवेगेनी प्रिगोझिन रूस के कट्टरपंथियों में काफी लोकप्रिय हैं। वह शक्तिशाली नेता के रूप में उभर रहे हैं।
चार महीने से छात्राओं को दिया जा रहा जहर एबीएन सेंट्रल डेस्क। चार महीने से अधिक समय से महिलाओं को बीमार करने वाले रहस्यमय जहर के हमलों की नवीनतम श्रृंखला के बाद कम से कम 20 ईरानी स्कूली छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक अधिकारी ने ईरान वायर को बताया कि लड़कियों को उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज में चिकित्सा सुविधाओं के लिए ले जाया गया। हिजाब कानून के कथित उल्लंघन के मामले में हिरासत में ली गयी 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी की मौत के बाद लड़कियों द्वारा ईरानी मौलवी शासन के खिलाफ देशव्यापी विरोध के बाद जहरखुरानी के पहले मामले सामने आये ईरान के खुफिया मंत्रालय ने शुक्रवार को विदेशी ताकतों पर स्कूली छात्राओं को जहर देने के संदेह पर डर पैदा करने का आरोप लगाया। कहा कि इसकी जांच में वास्तविक जहर नहीं मिला है। सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ का इलाज करा रही छात्राएं पश्चिम अजरबैजान में आपातकालीन सेवा के प्रमुख ने समाचार एजेंसी आईएसएनए को बताया कि जहरखुरानी की शिकार लड़कियों का सीने में दर्द और सांस की तकलीफ के लिए इलाज किया जा रहा है। सभी स्कूली छात्राओं की हालत स्थिर है। यह हालिया घटना तबरेज के बाघमीशेह कस्बे में हुई, जब ईरानी स्कूलों में फारसी नव वर्ष की छुट्टी के बाद कक्षाएं फिर से शुरू हो गयी थीं। नवंबर 2022 से अनुमानित 5,000 स्कूली लड़कियों ने जहरखुरानी की घटनाओं के कारण मितली, बेहोशी, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई और दिल की धड़कन की शिकायत की है। दर्जनों को अस्पताल में उपचार आवश्यकता है। 200 से अधिक स्कूलों में अभिभावकों ने इस मुद्दे को उठाया है और स्कूली छात्रों सहित कई ने लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवाज बुलंद की है। संयुक्त राष्ट्र ने ईरान सरकार की आलोचना की संयुक्त राष्ट्र ने स्कूली छात्राओं की रक्षा करने में असफल रहने और जहरखुरानी के हमलों को रोकने या मामले की स्वतंत्र जांच नहीं कराने के लिए इस्लामिक गणराज्य की निंदा की है। ये हमले पहली बार सितंबर 2022 में महसा अमिनी की मौत के कुछ ही हफ्तों बाद शुरू हुए। इसके बाद ही ईरानी सुरक्षा बलों ने देशव्यापी कार्रवाई शुरू की। संयुक्त राष्ट्र ने ईरान के प्रमुख शहरों में 1200 से अधिक स्कूली छात्राओं के जानबूझकर जहर को रोकने में विफल रहने के लिए ईरानी शासन की आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र ने उनकी रक्षा करने, आगे हमलों को रोकने और अपराधियों को दंडित करने के लिए जांच का नेतृत्व करने में राज्य की विफलता पर सवाल उठाया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ईरान में स्कूली छात्राओं को जहर देने का पहला मामला 30 नवंबर 2022 को कोम शहर में दर्ज किया गया था। उसके बाद से 20 प्रांतों में 91 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के स्कूलों के खिलाफ लक्षित रासायनिक हमलों की सूचना मिली है। सरकार ने विदेशी ताकतों पर फोड़ा ठीकरा राज्य मीडिया द्वारा जारी की गयी एक मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार इस संकट को हवा देने में विदेशी ताकतों की भूमिका निश्चित और निर्विवाद है। व्यक्तियों, समूहों और पश्चिमी मीडिया ने पिछले कुछ महीनों में इस पर ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही साथ विदेशी राजनेताओं और अंतर्राष्ट्रीय निकायों ने भी। छात्रों के बीच शरारत और सामूहिक उन्माद को जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्रीय अन्वेषण और प्रयोगशाला जांच में छात्राओं में जहर पैदा करने में सक्षम कोई जहरीला पदार्थ नहीं देखा गया है। इसके साथ ही जहर से कोई मौत या बीमारी की घटना भी सामने नहीं आयी है।
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