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Published / 2025-05-05 18:35:50
यदि युद्ध हुआ तो मिट जायेगा पाकिस्तान का वजूद

युद्ध हुआ तो मिटेगा पाकिस्तान, वायुसेना की शक्ति देख उड़ जायेगी दुश्मनों की नींद 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गये हैं। भारत सरकार ने कड़ा रूख अपनाते हुए सिंधु जल समझौता और पाकिस्तान को दिये जाने वाले वीजा सुविधा को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। इसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से राजनीतिक और सैन्य स्तर पर तीखी बयानबाजी की जा रही है। 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री हनीफ अब्बासी ने भारत को खुलेआम परमाणु हमले की धमकी देते हुए कहा कि हमारे पास गौरी, अब्दाली और गजनवी जैसी मिसाइलें हैं और 130 परमाणु हथियार हैं, जिनका रुख हिंदुस्तान की ओर है। 

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भी भारत को चेतावनी दी है कि यदि कोई एकतरफा कार्रवाई हुई तो उसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इन तीखी टिप्पणियों के चलते सीमा पार तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि भारत आने वाले दिनों में पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई कर सकता है। 

भारत की संपूर्ण सैन्य वायु शक्ति  

भारत के पास केवल राफेल ही नहीं, बल्कि सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, तेजस, और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे शक्तिशाली हथियार भी हैं। वहीं पाकिस्तान के पास एफ-16 के अलावा अधिकांश फाइटर जेट जैसे जेएफ-17, मिराज-3/5, और एफ-7, जो चीन द्वारा निर्मित हैं और तकनीकी रूप से पुराने हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की एयरफोर्स न केवल संख्या में बल्कि तकनीकी रूप से भी पाकिस्तान से कहीं अधिक मजबूत और रणनीतिक रूप से सक्षम है।

Published / 2025-04-29 21:57:42
एप्पल से उपजते अवसर

  • जरूरी है कि प्रक्रियाओं को तेजी से सहज बनाया जाए ताकि कंपनियां भारत की अफसरशाही के जाल में उलझकर नहीं रह जायें 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सप्ताहांत पर खबरें आईं कि टेक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी ऐपल अमेरिका भेजे जाने वाले अपने सभी आईफोन चीन के बजाय भारत में ही बनाना शुरू करना चाहती है। इसके पीछे की वजह समझना बहुत मुश्किल नहीं है। यह सही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टैरिफ की जंग सभी साझेदार देशों पर असर डालेगी (इनमें अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष वाले देश शामिल हैं) लेकिन चीन उनके खास निशाने पर है। 

अमेरिका ने हाल में कहा है कि चीन पर लगाया जा रहा दंडात्मक शुल्क हमेशा नहीं रहेगा मगर यह साफ है कि चीन के साथ कारोबार जोखिम में रहेगा। ऐसे में ऐपल या किसी अन्य बड़ी कंपनी के लिए समझदारी इसी में है कि वह अपने उत्पादन को यथासंभव चीन से बाहर ले जाए और जोखिम कम कर ले। 
अगर ऐपल वाकई अपना उत्पादन चीन से भारत ले आती है तो भारत के लिए यह की मोर्चों पर बहुत लाभदायक स्थिति होगी। स्थिति इसी सप्ताह स्पष्ट होगी, जब इस टेक दिग्गज कंपनी की तिमाही आय की रिपोर्ट आएगी और विश्लेषकों के प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे। 

वास्तव में ऐपल ठेके पर फोन बनवाकर भारत में अपना उत्पादन लगातार बढ़ा रही है। एक अनुमान के मुताबिक मार्च 2025 में समाप्त हुए वर्ष में भारत में 22 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन असेंबल किये गये, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 60 फीसदी अधिक आंकड़ा था। ऐपल हर वर्ष अमेरिका में करीब 6 करोड़ आईफोन बेचती है। अगर अमेरिका के लिए ये फोन 2026 से भारत में ही बनाए गए तो उत्पादन दोगुना करना पड़ सकता है। 

यह बड़ा मौका होगा। ध्यान देने वाली बात है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां देसी बाजार पर नजर जमाकर भारत आती हैं मगर ऐपल का जोर दुनिया भर के लिए यहीं पर उत्पादन करने पर है। हालांकि भारत में उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है मगर उत्पादन में यह वृद्धि अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए होगी। खबरों के मुताबिक 2024 में 1 लाख करोड़ रुपये के आईफोन निर्यात किये गये। इससे विनिर्माण के ठिकाने के तौर पर भारत की क्षमताओं का पता चलता है। 

खबर यह भी है कि हाल में स्थानीय मूल्यवर्द्धन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में उम्मीद है कि उत्पादन बढ़ने पर कलपुर्जे बनाने वाले भी भारत आना चाहेंगे। आर्थिक और भूराजनीतिक माहौल देखते हुए जोखिम कम करने वाली ऐपल इकलौती कंपनी नहीं होगी। दूसरी कंपनियां भी आयेंगी। चीन से दूरी बनाने का सिलसिला तो पिछले कुछ समय से चल रहा है लेकिन हालिया कारोबारी झटका इसमें तेजी ला सकता है और भारत के लिए यह अहम मौका होगा। 

किंतु कंपनियां खुदबखुद नहीं आयेंगी। भारत को भी निवेश आकर्षित करने के लिए प्रयास करना होगा। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकारों ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिनसे ऐपल का उत्पादन चीन से निकलकर भारत आ सकता है। लेकिन सभी कंपनियों के लिए ऐसा नहीं किया जा सकेगा। इसलिए जरूरी है कि प्रक्रियाओं को तेजी से सहज बनाया जाए ताकि कंपनियां भारत की अफसरशाही के जाल में उलझकर नहीं रह जाएं। 

उदाहरण के लिए जमीन आसानी से उपलब्ध करानी होगी। भारत बेशक अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम कर रहा है और खबरों के मुताबिक बात सही दिशा में चल रही है मगर हमें आयात शुल्क में काफी कमी करने की जरूरत है। ऐसा करने से कच्चे माल और उपकरण लाने में आसानी होगी तथा वैश्विक कंपनियों को भारत में पैर जमाने में मदद मिलेगी। 

इससे विनिर्माण को बल मिलेगा और भारत की बढ़ती श्रम शक्ति को रोजगार मिलेगा। भारत को यह मौका हाथ से निकलने नहीं देना चाहिए। यह आगे चलकर ह्यऐपल मूमेंटह्ण की तरह याद किया जाएगा, जो देश में विनिर्माण क्षेत्र की तकदीर बदलने वाला साबित हो सकता है।

Published / 2025-04-28 21:35:48
यूक्रेन में तीन दिन रहेगा संघर्षविराम

रूसी राष्ट्रपति का जंग के बीच बड़ा कदम 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के बीच एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि 8 मई से 10 मई 2025 तक यूक्रेन में तीन दिन का संघर्षविराम लागू रहेगा।  क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने स्पष्ट किया है कि रूस ने एकतरफा संघर्षविराम की पेशकश की है और उम्मीद जतायी है कि यूक्रेन भी इस संघर्षविराम का पालन करेगा। 

लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर यूक्रेन ने इस दौरान कोई भी युद्धविराम उल्लंघन किया, तो रूस जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहेगा।  इस संघर्षविराम की घोषणा का विशेष महत्व है क्योंकि 9 मई को रूस में विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिन द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी के खिलाफ सोवियत संघ की जीत की याद में हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 

रूस में यह दिन राष्ट्रीय गौरव और बलिदान की भावना से जुड़ा हुआ है। इस मौके पर बड़े पैमाने पर परेड, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। इसलिए रूस ने तय किया है कि युद्ध के बीच कम से कम इन तीन दिनों तक गोलाबारी और हिंसा पर विराम लगाया जाये।   

यूक्रेन की प्रतिक्रिया का इंतजार 

रूस ने संघर्षविराम की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अब सबकी नजर यूक्रेन की प्रतिक्रिया पर टिकी है। क्या यूक्रेन भी इस युद्धविराम का सम्मान करेगा? या फिर हालात वैसे ही तनावपूर्ण बने रहेंगे? यूक्रेन की तरफ से इस घोषणा पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।   

युद्ध की ताजा स्थिति 

  • पिछले कुछ महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच लड़ाई बेहद उग्र हो गयी है। 
  • कई इलाकों में भारी नुकसान हो चुका है और हजारों सैनिक और नागरिक जान गंवा चुके हैं। 
  • रूस ने हाल ही में पूर्वी यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर दबाव बढ़ाया है। 
  • वहीं यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से लगातार सैन्य सहायता मांगी है और कई जगहों पर जवाबी हमले भी तेज किये हैं।   

रूस के इस संघर्षविराम प्रस्ताव को शांति की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। अगर दोनों देश इस पहल का सम्मान करते हैं तो यह भविष्य में किसी बड़े शांति समझौते की ओर बढ़ने का रास्ता भी खोल सकता है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना जल्दबाजी होगी कि केवल तीन दिन की शांति से हालात स्थायी रूप से बदल जायेंगे।

Published / 2025-04-24 21:15:15
भारतीय उड़ानों के लिए पाकिस्तान ने अपनी वायु सीमा रोकी

पाकिस्तान ने भारतीय उड़ानों के लिए अपनी वायु सीमा बंद की, द्विपक्षीय व्यापार पर भी लगायी रोक 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों द्वारा परिचालित विमानों के लिए अपनी वायु सीमा को तत्काल प्रभाव से बंद करने और भारत के साथ सीधे या किसी अन्य देश के रास्ते सभी प्रकार का व्यापार बंद करने की गुरुवार को घोषणा की। 

पाकिस्तान ने इसके साथ ही भारत के बुधवार के फैसलोें के जवाब में उसी तरह सीमा के रास्ते आवागमन, सार्क वीजा और राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों की संख्या में कटौती की भी घोषणा की है। 

पाकिस्तान ने यह निर्णय मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी घटना के बाद अपने खिलाफ भारत द्वारा विभिन्न कदमों के जवाब में किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की यहां हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि समिति ने पाकिस्तान ने भारत के साथ लगे वाघा सीमा चौकी के मार्ग को तत्काल बंद कर दिया है और भारत के साथ सीमा पार का आवागमन पूरी तरह निलंबित किया जा रहा है। 

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान सार्क वीजा छूट योजना के तहत भारतीय नागरिकों के लिए जारी सभी वीजा निलंबित कर रहा है जिसमें केवल सिख तीर्थयात्रियों को छूट दी जायेगी। इस तरह के वीजा पर पाकिस्तान में रह रहे भारतीयों (सिख तीर्थयात्रियों को छोड़कर) को 48 घंटे के अंदर पाकिस्तान छोड़ना होगा। 

बयान के मुताबिक पाकिस्तान में इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में नियुक्त थल, नव और वायु सेना के सलाहकारों को अवांछित व्यक्ति घोषित करते हुए उन्हेंं हद से हद 30 अप्रैल तक पाकिस्तान से निकल जाने का समय दिया है और कहा कि इन पदों को समाप्त समझा जायेगा। 

इन पदों पर नियुक्त अधिकारियों के सहायक कर्मियों को भारत वापस जाने का निर्देश दिया गया है। बयान में कहा गया है कि 30 अप्रैल तक राजनयिकों और कर्मचारियों की संख्या 30 तक सीमित कर दी जाएगी। बैठक में प्रधानमंत्री शरीफ के अलावा सेना और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 

पाकिस्तान कि एनएससी ने भारत में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बैठक के बाद कल जारी घोषणाओं को धमकी भरा बताते हुए उसकी निंदा की है। पाकिस्तान ने कहा, सिंधु नदी जल संधि के अनुसार पाकिस्तान के पानी के प्रवाह को रोकने या उसका रास्ता बदलने तथा धारा के निचले क्षेत्र के देश के अधिकारों को हड़पने के किसी भी प्रयास को युद्ध की कार्रवाई मानी जायेगी और उसका राष्ट्र के पास सभी उपलब्ध शक्तियों के साथ पूरे बल से उत्तर दिया जायेगा। 

उल्लेखनीय है कि भारत ने कल पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने के विभिन्न निर्णयों के अंतर्गत वाघा बार्डर पोस्ट बंद करने, सार्क वीजा निलंबित करने, राजनयिक मिशनों की संख्या घटाने के साथ-साथ सिंधु जल संधि को भी तब तक निलंबित करने की घोषणा कि है जब तक कि पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता।

Published / 2025-04-24 12:01:53
श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए संत पेत्रुस महागिरजाघर में स्थानांतरित किया गया पोप का पार्थिव शरीर

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। संत पापा फ्राँसिस का पार्थिव शरीर, श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन हेतु बुधवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर में स्थानांतरित किया गया, जहाँ वह शनिवार सुबह अंतिम संस्कार तक रखा जाएगा।

वाटिकन प्रेस कार्यालय ने घोषणा की है कि संत पापा फ्राँसिस का अंतिम संस्कार शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को सुबह 10 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में होगा। इस पवित्र समारोह की अध्यक्षता कार्डिनल मंडल के डीन, कार्डिनल जोवान्नी बत्तिस्ता रे करेंगे। इस दौरान दुनियाभर से आए विश्वासियों, धर्माध्यक्षों और पुरोहितों की उपस्थिति रहेगी।

बुधवार सुबह, कासा सांता मार्था के चैपल से उनके पार्थिव शरीर वाले ताबूत को संत पेत्रुस महागिरजाघर लाया गया। कमरलेंगो कार्डिनल केविन फारेल ने प्रार्थना और अनुष्ठान का नेतृत्व किया। जुलूस सांता मार्था के प्रांगण से होते हुए बेल्स के आर्क के माध्यम से केंद्रीय द्वार से प्रवेश करते हुए महागिरजाघर पहुँचा।

प्रधान वेदी ऑल्टर ऑफ कनफेशन पर वचन की आराधना के बाद, श्रद्धालुओं के दर्शन प्रारंभ हुए। इसके बाद संत पापा के पार्थिव शरीर को संत मरिया मेजर महागिरजाघर के समाधि स्थल में ले जाया जाएगा।

Published / 2025-04-21 20:27:22
दिवंगत पोप ने जतायी थी अपने अंतिम संस्कार को एक सच्चे मसीही शिष्य के रूप में मनाने की इच्छा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 21 अप्रैल 2025 को पास्का सोमवार के दिन, 88 वर्षीय पोप फ्रांसिस का निधन वेटिकन स्थित उनके निवास, संत मर्था में सुबह 7:35 बजे हुआ। कार्डिनल केविन फैरेल ने उनकी मृत्यु की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन प्रभु और कलीसिया की सेवा में समर्पित किया। पोप ने सुसमाचार के मूल्यों को निष्ठा, साहस और प्रेम के साथ जीना सिखाया, विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए। 

ब्रोंकाइटिस और बाद में द्विपक्षीय निमोनिया से पीड़ित होने के कारण उन्हें 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 38 दिन इलाज के बाद वे संत मर्था लौटे, लेकिन उनकी स्थिति बिगड़ती रही। पूर्व में भी पोप फ्रांसिस को श्वसन संबंधी समस्याएं रही थीं। 

1957 में उन्होंने फेफड़े की सर्जरी करवाई थी। नवंबर 2023 में फ्लू के कारण उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा रद्द करनी पड़ी थी। अप्रैल 2024 में उन्होंने पोंटिफिकल अंतिम संस्कार विधि में बदलाव को मंजूरी दी थी, जिसमें सादगी और मसीह में विश्वास पर जोर दिया गया है। उन्होंने अंतिम संस्कार को एक सच्चे मसीही शिष्य के रूप में मनाने की इच्छा जताई थी।

Published / 2025-04-21 20:16:18
88 साल की उम्र में पोप फ्रांसिस का निधन

दुनिया छोड़ने से पहले गाजा पर कही ये बात 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पोप फ्रांसिस का निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे और काफी लंबे समय से बीमार थे। एपी की रिपोर्ट के अनुसार वेटिकन कैमरलेंगो के कार्डिनल केविन फेरेल ने उनके निधन की घोषणा की है। कार्डिनल केविन फेरल (जो वेटिकन के कैमरेलेंगो हैं) ने बताया  पोप फ्रांसिस का सोमवार को निधन हो गया। उन्होंने घोषणा की कि आज सुबह 7:35 बजे, रोम के बिशप फ्रांसिस परमात्मा के घर लौट गये। उनका संपूर्ण जीवन प्रभु और उनके चर्च की सेवा में समर्पित रहा। 

पोप फ्रांसिस का निधन वेटिकन में हुआ, जहां वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था और वह लगातार चिकित्सकीय देखरेख में थे। पोप फ्रांसिस का जीवन हमेशा ही विश्वभर में शांति, समानता और न्याय की दिशा में उनके प्रयासों के लिए याद रखा जायेगा। 

रविवार को पोप फ्रांसिस ने अपने ईस्टर रविवार के संबोधन में विचारों की स्वतंत्रता और सहनशीलता की अपील की थी। बेसिलिका की बालकनी से लगभग 35,000 लोगों को ईस्टर की शुभकामनाएं देने के बाद, फ्रांसिस ने अपनी पारंपरिक उरबी एट आर्बी (नगर और संसार के लिए) आशीर्वाद को एक सहयोगी को पढ़ने के लिए सौंप दिया। 

उन्होंने अपने भाषण में कहा, धर्म की स्वतंत्रता, विचारों की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के विचारों का सम्मान किये बिना शांति संभव नहीं है। इसके साथ ही, उन्होंने चिंताजनक एंटी-सेमिटिजम (यहूदी विरोधी भावना) की आलोचना की और गाजा में स्थिति को नाटकीय और दुखद बताया।

यह संदेश दुनिया भर में धार्मिक और विचारों की स्वतंत्रता, सहिष्णुता और सम्मान की आवश्यकता पर जोर देता है, और यह एक वैश्विक शांति का आह्वान था। पोप फ्रांसिस ने 2013 में पदभार संभाला था और वह पहले ऐसे पोप थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चर्च को और अधिक आधुनिक, समावेशी और अधिक मानवाधिकारों के पक्षधर बनाने का प्रयास किया। 

उन्होंने गरीबों और निर्धनों के लिए काम किया और चर्च के भीतर विभिन्न सुधारों का समर्थन किया। उनका योगदान चर्च के इतिहास में महत्वपूर्ण रहेगा और उनके कार्यों को भविष्य में भी याद किया जायेगा।

Published / 2025-04-20 18:24:25
AI से होगी मुक्त बुद्धिमत्ता युग की शुरुआत : बिल गेट्स

Bill Gates की भविष्यवाणी

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। बिल गेट्स ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि 2035 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डॉक्टरों, शिक्षकों और अन्य पेशेवरों की जगह ले लेगी जिससे एक ऐसे मुक्त बुद्धिमत्ता युग की शुरुआत होगी जिसमें विशेषज्ञ सेवाएं जैसे चिकित्सा सलाह और ट्यूशन व्यापक रूप से उपलब्ध और मुफ्त हो जाएंगी। गेट्स का मानना है कि इस बदलाव से खासकर भारत और अफ्रीका जैसे वंचित क्षेत्रों को लाभ होगा।

यह बदलाव सिर्फ सफेदपोश व्यवसायों तक सीमित नहीं रहेगा। गेट्स के अनुसार AI निर्माण, रसद, कृषि और विनिर्माण जैसे ब्लू-कॉलर क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव दिखाएगा। उनका मानना है कि इस बदलाव से समाज में काम की भूमिका को नया आकार मिलेगा। जैसे-जैसे AI अधिक कार्यों को अपने हाथ में लेगा पारंपरिक पूर्णकालिक नौकरियों की जगह छोटे कार्य सप्ताह, जल्दी सेवानिवृत्ति और अधिक अवकाश का समय आ सकता है।

गेट्स का कहना है कि समाजों को उत्पादकता और उद्देश्य जैसे मूलभूत अवधारणाओं पर पुनर्विचार करना होगा। हालांकि उनका मानना है कि AI के चलते एक प्रचुरता और सामर्थ्य का युग आएगा लेकिन उन्होंने नौकरी छूटने और बढ़ती असमानता के खतरे के बारे में भी चेतावनी दी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए गेट्स ने सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) और निष्पक्ष धन वितरण का प्रस्ताव दिया है।

इन बदलावों के बावजूद गेट्स को नहीं लगता कि AI सभी मानवीय भूमिकाओं की जगह ले पाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी नौकरियाँ, जिनमें रचनात्मकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और वास्तविक मानवीय जुड़ाव की आवश्यकता होती है जैसे कि थेरेपी, कला और देखभाल बनी रहेंगी।

गेट्स ने जिम्मेदार AI विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि पूर्वाग्रह, गलत जानकारी और एकाधिकार शक्ति जैसी समस्याओं से बचा जा सके। उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों से आग्रह किया कि वे AI को मानव-केंद्रित लक्ष्यों और समान प्रगति के लिए वैश्विक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाएं।

फिलहाल इस तेजी से बदलते समय में गेट्स की यह भविष्यवाणी हमें AI के भविष्य को लेकर विचार करने का एक नया दृष्टिकोण देती है जिसमें दोनों संभावनाएं और चुनौतियां छिपी हैं।

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