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Published / 2021-09-18 09:54:52
तालिबानी काफिलों पर हमला, 3 की मौत, 20 घायल

एबीएन डेस्क। शनिवार को अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर में तालिबानी लड़ाकों के वाहन पर सीरियल ब्लास्ट करने की खबर आ रही है। सिलसिलेवार हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 20 से ज्यादा लोग घायल होने की सूचना है। उन्हें अस्पातल में भर्ती कराया गया है। नंगरहार प्रांत के अस्पताल प्रबंधन ने इसकी पुष्टि की है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, इसमें ज्यादातर आम नागिरक शामिल हैं। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है। जलालाबाद में शनिवार को हुए हमले की अभी किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन पूर्वी अफगानिस्तान इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक समूह का गढ़ है और वे अफगानिस्तान के नए तालिबान शासकों के शत्रु हैं।

Published / 2021-09-15 06:39:31
स्वच्छ ऊर्जा : जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में भारत-अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए बिल पेश

एबीएन डेस्क। अमेरिका के एक शीर्ष सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक विधेयक पेश किया। सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने भारत के साथ ऐसी कोशिशें करने पर गर्व जताया : उन्होंने जोर दिया कि जब दोनों देश साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक टीम के रूप में काम करते हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने भारत के साथ ऐसे प्रयास करने के प्रति गर्व जताया। विदेशी संबंध मामलों की समिति के अध्यक्ष सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज ने भारत के साथ स्वच्छ ऊर्जा व जलवायु सहयोग की प्राथमिकता के लिए ‘द प्रायोरिटाइजिंग क्लीन एनर्जी एंड क्लाइमेट को-ऑपरेशन विद इंडिया एक्ट ऑफ 2021 विधेयक पेश किया। जलवायु संबंधी मामलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के विशेष दूत जॉन केरी के नई दिल्ली में ‘क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग’ शुरू करने के एक दिन बाद यह विधेयक पेश किया गया। मेनेंडेज ने कहा, जलवायु परिवर्तन के साझा खतरे और भारत में बिजली की बढ़ती जरूरत को देखते हुए, भारत-अमेरिका को स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा, इस विधेयक के जरिये हम न केवल दोनों देशों के बीच, बल्कि हमारे विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्रों के बीच भी एक सफल साझेदारी की नींव रख रहे हैं।

Published / 2021-09-08 08:29:51
मेक्सिको भूकंप : 7.0 तीव्रता के भूकंप के झटकों से कांपा मेक्सिको

एबीएन डेस्क। भूकंप के तेज झटकों से मंगलवार रात मेक्सिको शहर कांप उठा। झटके इतने तेज थे कि दक्षिणी मेक्सिको शहर की ज्यादातर इमारतें हिलती हुईं दिखाई पड़ीं। इसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। अमेरिकी जियोलॉजिक सर्वे का कहना है कि ग्युरेरो से 11 किलोमीटर दूर अकापुल्को में 7.0 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इससे पहले ग्यूरेरो सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि शुरू में यूएसजीएस की ओर से रिएक्टर स्कूल पर 7.4 की तीव्रता मापी गई थी। इस कारण चट्टानों में दरार आ गई और कई जगह सड़कें धंस गईं। काफी देर तक रहा दहशत का माहौल : तेज भूकंप के झटकों के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर सड़क पर आ गए। झटके रुकने के बाद भी लोग काफी देर तक घरों के अंदर नहीं गए। न्यूज एजेंसी राउटर्स के मुताबिक लोग एक दूसरे को पकड़कर खुद को संभालने की कोशिश करते हुए दिखाई दिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह भूकंप सतह से 12 किलोमीटर नीचे टकराया। अब सुनामी का भी खतरा : 7.0 तीव्रता के झटकों के बाद अब मेस्किको में सुनामी का खतरा भी मंडरा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों की ओर से इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है और लोंगों को सतर्क रहने को कहा गया है। हालांकि,मेक्सिको सिटी मेयर क्लॉडिया शेनबम का कहना है कि अभी तक किसी भारी नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।

Published / 2021-09-06 09:25:25
तालिबान का सरकार गठन: पाकिस्तान, चीन, तुर्की समेत छह देशों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता

एबीएन डेस्क। अफगानिस्तान के सभी प्रांतों में कब्जे का दावा करने के बाद तालिबान ने जल्द ही सरकार गठन का फैसला किया है। इसके मद्देनजर संगठन ने चीन, पाकिस्तान, रूस, ईरान, कतर और तुर्की को सरकार गठन के कार्यक्रम के लिए न्योता भी भेजा है। तालिबान के इस न्योते से साफ है कि इन देशों की सरकारों ने पहले ही संगठन से संपर्क साधा है। गौरतलब है कि चीन, रूस, तुर्की और पाकिस्तान ने तो अपने दूतावासों में भी पहले की तरह काम जारी रखा है। हालांकि, भारत से तालिबान का अब तक कोई आधिकारिक संपर्क नहीं हुआ। एक दिन पहले ही तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने सरकार गठन को अगले सप्ताह तक स्थगित करने का एलान किया था। उसने कहा था कि तालिबान एक ऐसी सरकार बनाने के लिये संघर्ष कर रहा है जो समावेशी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हो। माना जा रहा है कि तालिबान अगले कुछ दिनों में काबुल में नई सरकार के गठन की घोषणा करेगा, जिसका नेतृत्व संगठन का सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कर सकता है। चीन से नियंत्रित होगा तालिबान? बताया सबसे अहम साझेदार इससे पहले अफगान तालिबान ने चीन को अपना सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा है कि उसे अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और तांबे के उसके समृद्ध भंडार का दोहन करने के लिए चीन से उम्मीद है। युद्ध से परेशान अफगानिस्तान व्यापक स्तर पर भूख और आर्थिक बदहाली की आशंका का सामना कर रहा है।तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि समूह चीन की वन बेल्ट, वन रोड पहल का समर्थन करता है जो बंदरगाहों, रेलवे, सड़कों और औद्योगिक पार्कों के विशाल नेटवर्क के जरिए चीन को अफ्रीका, एशिया और यूरोप से जोड़ेगी। मुजाहिद ने यह भी कहा था कि तालिबान क्षेत्र में रूस को भी एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है और वह रूस के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा।

Published / 2021-09-05 07:17:28
पंजशीर में संघर्ष: 600 तालिबानियों की मौत 1000 से ज्यादा ने घुटने टेके, अमेरिका ने जताई गृह युद्ध की आशंका

एबीएन डेस्क। तालिबान के लिए अफगानिस्तान का पंजशीर टेढ़ी खीर बन गया है। यहां पर कब्जे के लिए अभी भी संघर्ष जारी है। बार-बार तालिबान दावा कर रहा है कि उसके लड़ाकों ने पंजशीर को अपने कब्जे में ले लिया है, लेकिन अफगान प्रतिरोधी मोर्चे की ओर से इस दावे को खारिज किया जा रहा है। अब एक बार फिर खबर सामने आई है कि तालिबान और अफगान प्रतिरोधी मोर्च के बीच जारी संघर्ष में 600 से ज्यादा तालिबानी लड़ाकों को मौत के घाट उतार दिया गया है। न्यूज एजेंसी स्पुतनिक के मुताबिक प्रतिरोधी मोर्चे के प्रवक्ता फहीम दश्ती ने ट्वीट किया है कि उनके लड़ाकों ने 600 से ज्यादा तालिबानी मार तो गिराए ही हैं। एक हजार से ज्यादा ने आत्मसमर्पण भी कर दिया है। यह लड़ाई शनिवार की बताई जा रही है। तालिबान का दावा चार जिलों पर जमाया कब्जा : एक तरफ अफगान प्रतिरोधी मोर्चे ने 600 तालिबानियों को मार गिराने का दावा किया है तो दूसरी ओर तालिबान का कहना है कि उसने पंजशीर प्रांत के सात में से चार जिलों पर कब्जा जमा लिया है। अल जजीरा के मुताबिक, तालिबान के एक नेता का कहना है कि हमारी लड़ाई जारी थी और लड़ाके गवर्नर हाउस की ओर से बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में बारूदी सुरंगों के कारण लड़ाई धीमी पड़ गई। वहीं तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी का कहना है कि हमने खिंच व उनाबहा जिले पर अपना कब्जा जमा लिया है, इसके बाद पंजशीर प्रांत के सात में से चार जिले हमारे कब्जे में आ चुके हैं। उसने आगे कहा कि हमारे लड़ाके अब पंजशीर की ओर बढ़ रहे हैं। अहमद मसूद बोला हम लड़ते रहेंगे : तालिबान के दावे से इतर अफगान प्रतिरोधी मोर्चे के प्रवक्ता फहीन दश्ती का कहना है कि ख्वाक दर्रे में हमारे लड़ाकों ने हजारों तालिबानियों को घेर लिया है और रेवाक क्षेत्र में कब्जे में लिए गए वाहनों को छोड़ दिया गया है। उधर, पंजशीर के कमांडर अहमद मसूद ने फेसबुक पर लिखा है कि हमारी लड़ाई जारी रहेगी और पंजशीर में और मजबूत हो रहे हैं। साहेल का कहना है कि अफगानी प्रतिरोधी मोर्चे के लिए यह कठिन परिस्थिति है, लेकिन हम हार नहीं मानने वाले। तालिबान के खिलाफ जंग जारी रहेगी और हम जीत कर रहेंगे। अमेरिका ने जताई गृह युद्ध की आशंका : इस बीच अमेरिका के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष मार्क मिले ने अफगानिस्तान में गृह युद्ध की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में जिस तरह के हालात हैं, उससे जल्द ही गृह युद्ध छिड़ सकता है। मुझे नहीं पता कि तालिबानी सरकार को चला पाने और अपना शासन स्थापित करने में सक्षम है या नहीं। फॉक्स न्यूज़ से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर तालिबान अपना शासन स्थापित नहीं कर पाया तो आने वाले सालों में अफगानिस्तान में फिर से अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन विकसित होने लगेंगे

Published / 2021-08-27 09:41:29
एक के बाद एक बम धमाकों से दहला काबुल

एबीएन डेस्क। अफगानिस्तान के काबुल हवाई अड्डे में एक के बाद एक हुए आत्मघाती हमलां में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। खबरों के अनुसार इन हमलों में अब तक 90 लोग मारे गए हैं और 1338 लोग लोग घायल हो गए हैं। इसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। हमले में 12 और सेवारत कर्मी घायल हुए है और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। यह विस्फोट ऐसे समय हुआ है, जब अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के बाद से हजारों अफगान देश से निकलने की कोशिश कर रहे हैं और पिछले कई दिनों से हवाई अड्डे पर जमा हैं। काबुल हवाई अड्डे से बड़े स्तर पर लोगों की निकासी अभियान के बीच पश्चिमी देशों ने हमले की आशंका जतायी थी। अमेरिका के एक अधिकारी का कहना है कि “निश्चित तौर पर माना जा रहा है कि” काबुल हवाई अड्डे के पास हुए हमले के पीछे आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट का हाथ है। इस्लामिक स्टेट समूह तालिबान से अधिक चरमपंथी है और इसने असैन्य नागरिकों पर कई बार हमले किये हैं। पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि एक धमाका हवाईअड्डे के प्रवेश द्वार के पास हुआ जबकि दूसरा एक होटल से कुछ दूरी पर हुआ। उन्होंने कहा कि हमले में सैनिकों समेत कई लोग हताहत हुए हैं लेकिन कोई आंकड़ा नहीं दिया। एक अफगानिस्तानी व्यक्ति ने कहा कि काबुल हवाई अड्डे के एक द्वार के बाहर इंतजार कर रही भीड़ के बीच हुए धमाके के बाद उसे कुछ लोग मृत या घायल नजर आए। दूसरा धमाका होटल बारोन के पास हुआ जहां अफगान, ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिकों समेत अन्य लोग एकत्र थे जिन्हें देश छोड़ने के लिए हवाईअड्डे पर जाने से पहले हाल के दिनों में यहां ठहराया गया था। पिछले सप्ताह के दौरान इस युद्धग्रस्त देश से निकलने के लिए हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी जैसा माहौल देखने को मिला था। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबान के क्रूर शासन की आशंका के चलते तमाम लोग देश छोड़ने को आतुर नजर आ रहे हैं। कुछ देश पहले ही अफगानिस्तान से लोगों को निकालने का अभियान समाप्त कर चुके हैं और अपने सैनिकों और राजनयिकों को निकालना शुरू कर चुके हैं। तालिबान ने तय समयसीमा में निकासी अभियान के दौरान पश्चिमी बलों पर हमला नहीं करने का संकल्प जताया था। हालांकि, यह भी दोहराया है कि अमेरिका द्वारा 31 अगस्त की तय समयसीमा में सभी विदेशी सैनिकों को देश छोड़ना होगा।

Published / 2021-08-26 08:57:41
काबुल एयरपोर्ट पर भूख से तड़प रहे लोग

एबीएन डेस्क। अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद से आए दिन हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लोग बिना सामान लिए देश छोड़कर भाग रहे हैं। वहीं काबुल एयरपोर्ट पर पहुंच रहे लोगों के लिए भी विकट स्थिति खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक लोग यहां महंगे भोजन और पानी की वजह से भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार काबुल एयरपोर्ट पर एक पानी की बोतल 40 डॉलर यानी 3000 रुपये में मिल रही है। जबकि चावल की एक प्लेट के लिए 100 डॉलर यानी लगभग 7500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं एयरपोर्ट पर पानी या खाना कुछ भी खरीदना हो, यहां अफगानिस्तान की अपनी करेंसी भी नहीं ली जा रही। सिर्फ डॉलर में ही भुगतान स्वीकार किए जा रहे हैं। ऐसे में अफगानी नागरिकों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इतनी महंगाई के कारण लोग भूखे-प्यासे कतार में लग जा रहे हैं। सबसे मुश्किल हालात में बच्चे पड़ गए हैं जो भूख और प्यास के कारण बेहोशी की हालत में पहुंच रहे हैं। हालांकि इन लोगों का हौसला अब टूटने लगा है। शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया है। अधिकतर लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काबुल एयरपोर्ट के बाहर अब भी 50 हजार से ज्यादा लोग इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से यहां इतना भयानक जाम लगा हुआ है कि एयरपोर्ट तक पहुंचना नामुमकिन सा काम है।

Published / 2021-08-25 10:30:13
चीन की नजर अफगान के 741 अरब की खनिज संपदा पर

एबीएन डेस्क। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद चीन अब उसके साथ दोस्ताना बढ़ने की कोशिश में जुट गया है। कब्जे से पहले तालिबान चीन के लिए आंखों की किरकिरी था लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पाकिस्तान के स्पोर्ट से आंतक फैला रहे तालिबान के जरिए अपने हित साधने के लिए चीन अब इस आंतकी समूह के साथ काम करने को तैयार हो चुका है और इसका मुख्य कारण है अफगानिस्तान का बड़ा खजाना। अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसके पास 10 खरब डॉलर यानी करीब 741 खरब रुपए से भी ज्यादा की खनिज संपत्ति है। अगर सही से इस्तेमाल हो तो अफगानिस्तान में दुनिया का सबसे ज्यादा लीथियम रिजर्व भी है। हालांकि, पिछले चार दशकों से युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहे अफगानिस्तान को ये खनिज फायदा नहीं दे सके लेकिन अब चीन ने अपनी पैनी नजरें इसपर गड़ा दी हैं और यही कारण है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद तालिबान के साथ दोस्ती को तैयार है। हालांकि साल 2001 में अफगानिस्तान में वैश्विक अर्थव्यवस्था आज की परिस्थितियों की तुलना में काफी अलग थी। साल 2001 में अमेरिका की अफगानिस्तान में एंट्री से पहले यहां न तो टेस्ला जैसी कंपनी थी और न ही आईफोन। हालांकि अब ये आधुनिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। अब हाईटेक चिप और बड़ी क्षमता वाली बैटरी का जमाना है जिन्हें बनाने के लिए तरह-तरह के खनिजों की जरूरत है । साल 2003 से 2020 के बीच चीनी सेना में सीनियर कर्नल रहे झो बो ने न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार के एक लेख में लिखा, अमेरिकी सेना की वापसी के बाद चीन ही काबुल की ज्यादा से ज्यादा जरूरतों को पूरा कर सकता है। तालिबान को मान्यता देने से लेकर अफगान में निवेश तक और इसके एवज में चीन को अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे के विकास का मौका मिल सकता है और साथ में ही अफगान की 10 खरब डॉलर की खनिज संपत्ति तक उसकी पहुंच हो सकती है, जहां तक अभी कोई नहीं पहुंच सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने साल 2010 में ही यह अनुमान पेश किया था कि अफगानिस्तान में 10 खरब डॉलर से ज्यादा की खनिज संपत्ति है, जिसका अभी तक पता नहीं लग सका है। हालांकि, अफगान सरकार ने उस समय भी यह दावा किया था कि उनके पास इससे तीन गुना ज्यादा खनिज संपत्ति है। इसमें लीथियम रिजर्व के साथ ही दुर्लभ धातु भी शामिल हैं, जो ग्लोबल ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए जरूरी हैं। हालांकि, देश की खस्ता हालत की वजह से अभी तक इसकी खोज शुरू नहीं हो सकी।

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