एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन में भले ही चरम पर पहुंचकर ओमिक्रॉन के मामले घटने के बाद पाबंदियां हटाई गईं लेकिन यूरोपीय देशों में इसका कहर बरकरार है। फ्रांस में लगातार दूसरे दिन कोरोना के चार लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। पिछले 24 घंटे में फ्रांस में 4.36 लाख नए मामले दर्ज किए गए। वहीं, जर्मनी में पिछले 24 घंटे में 1.21 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। उधर, न्यूजीलैंड में ओमिक्रॉन के बढ़ते कहर के बाद पीएम जेसिका अर्डर्न ने कहा है कि यदि महामारी सामुदायिक स्तर पर फैली तो देश में फिर से प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। अमेरिका-ब्राजील में बुरा हाल : अमेरिका में पिछले 24 घंटों के भीतर सात लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में हर दिन करीब 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पतालों में जबरदस्त दबाव है। इसी तरह ब्राजील में पिछले एक दिन के भीतर दो लाख से ज्यादा नए मामले दर्ज हुए। देश में लगातार दूसरे दिन देश का पिछला रिकॉर्ड टूटा है। इसी अवधि में देश में मृतक संख्या 350 रही। बाइडन ने माना, कोरोना से थक चुका है अमेरिका : एक दिन में जहां नए वैश्विक संक्रमित 34.61 लाख दर्ज हुए, वहीं 8,832 लोगों ने जान गंवाई। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने स्वीकार किया कि कोविड-19 के कारण अमेरिका के लोग थक चुके हैं और उनका मनोबल भी काफी गिर गया है। लेकिन इससे निपटने के लिए उन्होंने बेहतर ढंग से काम किया है। बाइडन ने राष्ट्रपति पद संभालने का एक साल पूरा होने की पूर्व संध्या पर कहा, अमेरिकी संसद में गतिरोध तोड़ने, मुद्रास्फीति तथा कोविड-19 से निपटने के लिए उन्हें अपने आर्थिक पैकेज के बड़े हिस्से के साथ समझौता करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया, अमेरिका में जहां कोरोना से लड़ाई अब भी जारी है, वहां लोगों ने इतना बेहतर प्रदर्शन किया है कि सोचा भी नहीं जा सकता है। इन दो वर्षों में लोगों ने शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत कुछ सहन किया है। अमेरिकी फार्मा कंपनी पुरस्कृत : अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर के सीईओ अल्बर्ट बौर्ला को 2022 के जेनेसिस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान कुछ ही महीनों में कोरोना टीका विकसित करने के लिए दिया गया है। सम्मान के तहत उन्हें करीब 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाएगी। जेनेसिस फाउंडेशन किसी यहूदी व्यक्ति को मानवता में उसके योगदान व यहूदी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए हर वर्ष अवॉर्ड देता है। ब्रिटेन ने पाबंदियां हटाईं : उधर, ब्रिटेन ने तीसरी लहर धीमी पड़ने के बाद कई पाबंदियां हटाने का एलान किया। ओमिक्रॉन की बढ़ती मुसीबतों के बीच ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने मास्क अनिवार्यता खत्म करने की घोषणा की। इसके अलावा ब्रिटेन में घर से काम खत्म कर दिया गया है। जॉनसन ने वैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कहा, ओमिक्रॉन चरम पर पहुंच चुका है और अब इसकी रफ्तार थमती दिख रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऑस्ट्रेलिया ने कोविड-19 रोधी टीके नोवावैक्स को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। इसके बाद यह देश में मंजूरी पाने वाला पांचवां कोविड रोधी टीका हो गया है। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी 2.6 करोड़ आबादी के लिए अमेरिका निर्मित इस टीके की 5.1 करोड़ खुराकों का ऑर्डर दिया है। इसकी आपूर्ति नुवाक्सोविड ब्रांड के नाम से होगी। ऑस्ट्रेलिया में फाइज़र, एस्ट्राजेनेका और मॉडर्ना के टीकों का पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है। जॉनसन एंड जॉनसन के टीके जनस्सेन को भी मंजूरी मिली हुई है लेकिन सरकार ने इसकी एक भी खुराक नहीं खरीदी है। नोवावैक्स टीका ऑस्ट्रलिया में अबतक टीका न लगवाने वाले 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा। हालांकि देश की 95 फीसदी जनसंख्या का टीकाकरण हो चुका है और उन्हें बूस्टर खुराक देने के लिए इस टीका का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उपचारात्मक जींस प्रशासन के प्रमुख जॉन स्केरिट ने कहा, इस देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बावजूद कुछ लोग हैं, जो नोवावैक्स का इंताजर कर रहे हैं और यह बहुत अच्छा है कि इसे अंततः स्वीकृति प्रदान कर दी गई। प्रोटीन आधारित टीका की दो खुराकें तीन हफ्ते के अंतराल पर लगाई जाती हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में 2019 से फैली कोरोना महामारी से हुई मौतों का असल आंकड़ा सरकारों द्वारा जारी आंकड़ों से दो से चार गुना तक ज्यादा है। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित पत्रिका नेचर ने एक शोध के आधार पर यह दावा किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से 55 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नेचर में प्रकाशित एक नए शोध में दावा किया गया है कि मौतों की वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है। दुनियाभर में बहस जारी है कि क्या विभिन्न देश विश्व मंच पर अपनी बदनामी व छवि खराब होने के डर से कोविड-19 की मृत्यु दर को छिपाते हैं? नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट में लंदन में द इकोनॉमिस्ट पत्रिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके व आंकड़ों के आधार पर यह दावा किया है। नेचर ने दावा किया कि कोविड-19 से वास्तविक मौतें सरकारी आंकड़ों से दो और चार गुना अधिक हो सकती हैं। नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट एक मशीन आधारित प्रक्रिया पर केन्द्रित है। इसमें संग्रहित आंकड़ों के आधार पर मौतों को लेकर यह अनुमान जताया गया है। इस शोध में दुनियाभर के देशों द्वारा कोविड-19 के शिकार लोगों की सूचना देने के तरीकों का उदाहरण देकर यह दावा किया गया है। जैसे कि नीदरलैंड्स में महामारी के आरंभिक दिनों में केवल उन्हीं लोगों को कोविड से मृत माना गया, जिन्हें संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहां उनकी मौत हुई। दूसरी ओर, बेल्जियम में सर्दी के शिकार लोगों की मौत को भी बगैर टेस्ट के कोविड-19 से मौत माना गया। नेचर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कोरोना मौतों के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का पहला आकलन जल्द आने वाला है। संगठन ने कोरोना से हुई मौतों की असल संख्या पता लगाने के लिए कई विशेषज्ञों की राय ली है। इन आंकड़ों की पांच साल पहले के मौतों के आंकड़ों से तुलना की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार धनी देशों में कोरोना से असल मौतें उनके मौजूदा आंकड़ों से एक तिहाई ज्यादा हो सकती हैं। वहीं गरीब देशों में यह संख्या मौजूदा आंकड़ों से 20 गुना तक ज्यादा हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कोरोना महामारी 1918-20 के बीच आई स्पेनिश फ्लू महामारी के बाद की सबसे बड़ी महामारी है। डब्ल्यूएमडी आंकड़ों के अनुसार रूस में 2021 के अंत तक कोरोना से 3 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी थी, लेकिन असल मौतों का आंकड़ा 10 लाख के पार हो सकता है। इसी तरह भारत व चीन समेत 100 से ज्यादा देशों में अतिरिक्त मौतों के आंकड़ों को उजागर नहीं किया गया है। इसकी वजह यह हो सकती है कि इन देशों की सरकर मौत के आंकड़े नहीं जुटा रही हैं या उनका तेजी से प्रकाशन नहीं किया जा रहा है। जबकि इन देशों में कोविड-19 से लाखों मौतें हुई हैं। भारत में पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मौत का तांडव देखा गया था। देश में कोरोना की शुरुआत से अब तक 4,87,000 से ज्यादा मौतें रिपोर्ट की गई हैं। लेकिन इकॉनामिस्ट के उक्त मॉडल के आधार पर देश में 50 लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान जताया गया है।
एबीएन डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस को समाप्त करना संभव नहीं है क्योंकि ऐसे वायरस कभी खत्म नहीं होते और अंत में पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं। अधिकारी ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि व्यवस्था में अंतर्निहित असमानताओं को ठीक करने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण के साथ इस साल कोविड-19 के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को समाप्त करना संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य आपात स्थिति कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक माइकल रयान ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन दावोस एजेंडा 2022 शिखर सम्मेलन में कहा कि करने की जरूरत यह है कि पूरी दुनिया की आबादी का अधिकतम टीकाकरण करके यह सुनिश्चित किया जाए कि महामारी के मामले वास्तव में निम्न स्तर के हो जाएं। उन्होंने कहा, मेरे विचार में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का अंत होगा और यह इस महामारी का अंत होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष ही इस लक्ष्य को प्राप्त करने का एक मौका है। पहली बार 2019 के अंत में चीन के वुहान में सामने आए इस वायरस का दुनिया भर में प्रसार हुआ और इसके विश्व स्तर पर 33 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं और इससे अब तक 55.5 लाख से अधिक व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने 30 जनवरी, 2020 को इसके प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल और 11 मार्च, 2020 को इसे एक महामारी घोषित किया था। इसी सत्र में कार्यकारी निदेशक, ऑक्सफैम इंटरनेशनल, गैब्रिएल बुचर ने कहा, महामारी को समाप्त करना संभव है यदि हम समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए मॉडल में वास्तव में आमूलचूल परिवर्तन करें। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा कि महामारी की परिभाषा हर दिन विकसित हो रही है। उन्होंने कहा, मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं, लेकिन एक बिंदु होगा जब हम टीकाकरण के एक निश्चित स्तर तक पहुंच जाएंगे। उम्मीद है कि ऐसा इस साल के अंत तक होगा, जब सभी को टीके की दो या तीन खुराक दे दी जाएंगी, तब शायद हम ऐसा कह सकते हैं। यह इस पर निर्भर करेगा किस प्रकार के नए स्वरूप सामने आते हैं और अस्पताल में भर्ती होने का स्तर नियंत्रण में रहता है।' वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या महामारी का अंत हो सकता है।
एबीएन डेस्क। लंबे समय से एस्टेरॉयड को धरती के लिए खतरा बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर एस्टेरॉयड धरती से टकराता है, तो बड़ी तबाही मच सकती है। बताया जाता है कि पृथ्वी का चक्कर लगाने वाला बड़ा एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रह सिर्फ एक बार पृथ्वी से टकराया था जिसके बाद डायनासोर दुनिया से खत्म हो गए थे। इसके बाद कई बार पृथ्वी से पास से गुजरने वाले एस्टेरॉयड के टकराने की बात कही गई, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। अब आज यानी 18 जनवरी को बुर्ज खलीफा (Burj Khallifa) से दोगुने आकार का एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के पास से गुजरेगा। बताया जा रहा है यह अभी तक का सबसे बड़ा एस्टेरॉयड है जिसका नाम 7482 (1994 PC1) है। इस एस्टेरॉयड की लंबाई करीब 1 किलोमीटर यानी 3280 फीट है। यह धरती से 19.3 लाख किलोमीटर दूर से गुजरेगा। इसलिए इससे धरती को कम खतरा है। अगर इसके रास्ते में थोड़ा भी बदलाव होता है, तो धरती के लिए खतरनाक हो सकता है और तबाही मच सकती है।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी इसको खतरनाक घोषित किया हुआ है। नासा का कहना है कि अगर इतना बड़ा एस्टेरॉयड धरती से टकराता, तो है बहुत बड़ी तबाही मच सकती है। इसलिए ऐसे एस्टेरॉयड को नासा ने संभावित खतरों की सूची में रखा हुआ है। हालांकि नासा ने बताया है कि 7482 (1994 PC1) सुरक्षित तरीके से धरती से 19.3 लाख किमी की दूरी से गुजरेगा। पहली बार साल 1994 में इसकी खोज की गई थी। 89 साल पहले 17 जनवरी 1933 को एस्टेरॉयड 7482 (1994 PC 1) धरती के सबसे पास से गुजरा था। उस समय यह 11 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरा था। अब यह 18 जनवरी 2105 को इतने ही करीब से धरती के पास से गुजरेगा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी धरती से एस्टेरॉयड को टकराने से रोकने के लिए तकनीक खोजने में लगी हुई है। इसके लिए अमेरिकी अतंरिक्ष एजेंसी ने डार्ट मिशन को लांच किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उद्योग जगत ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन दावोस एजेंडा 2022 शिखर सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को अपने संबोधन में सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एक भरोसेमंद और विश्वसनीय भागीदार की भूमिका निभाएगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हरित, स्वच्छ और सतत वृद्धि प्रक्रिया पर जोर दिया है, जो भारत की भविष्य की वृद्धि के प्रति भरोसा बढ़ाने वाला है। उद्योग मंडल फिक्की ने भी कहा कि सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता से वैश्विक निवेशकों के बीच भारत का आकर्षण और बढ़ेगा। फिक्की ने कहा, "उद्योग भारत की स्वच्छ, हरित, सतत और विश्वसनीय ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता का पूरा समर्थन करता है।"
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अफगानिस्तान के पश्चिम में स्थित बदगीस प्रांत में सोमवार दोपहर को दो बार आए भूकंप के झटकों से तुर्कमेनिस्तान से सटा यह सीमावर्ती इलाका बुरी तरह हिल उठा और इसके कारण हुए हादसों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। एक स्थानीय अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि भूकंप से प्रभावित हुए दूरदराज के गांवों में अभी भी राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रांत के संस्कृति एवं सूचना विभाग के प्रमुख बास मोहम्मद सरवरी ने बताया कि भूकंप के कारण हुई तबाही में कई घर ढह गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार 5.3 तीव्रता का पहला भूकंप दोपहर करीब दो बजे जबकि 4.9 तीव्रता का दूसरा भूकंप शाम करीब चार बजे महसूस किया गया। सरवरी के मुताबिक, प्रांत के दक्षिणी भाग में स्थित कदिस जिले में भूकंप से सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है और सबसे अधिक लोग हताहत हुए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर एक बड़े हमले की खबर सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, अबुधाबी के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और इसके करीबी इलाकों में सोमवार को तीन बड़े धमाके हुए। शक जताया जा रहा है कि यह हमले ड्रोन्स के जरिए किए गए। इन हमलों में तीन लोगों की मौत की खबर भी आई है। मृतकों में दो भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य लोगों के घायल होने की बात भी सामने आई है। धमाकों के बाद एयरपोर्ट में आग भी देखी गई। हालांकि, इससे पहले कि यूएई इस मामले की जांच शुरू कर पाता, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हमले की जिम्मेदारी ले ली। इस संगठन ने बयान जारी कर यूएई पर हमले शुरू करने की बात कही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, एयरपोर्ट पर यह धमाके अबुधाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के पेट्रोल ले जा रहे टैंकरों में हुए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि टैंकरों में आग लगने से ठीक पहले आसमान में ड्रोन जैसी आकृतियां देखी गई थीं, जो कि दो अलग-अलग इलाकों में गिरीं। बताया गया है कि एयरपोर्ट पर लगी आग से निपटने के लिए पुलिस और अधिकारियों की टीम भेज दी गई है। तियों के प्रवक्ता याह्या सारी से जुड़े एक ट्विटर अकाउंट में दावा किया गया है कि हूती आने वाले कुछ घंटों में यूएई पर सैन्य ऑपरेशन चलाएंगे। गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात लंबे समय से यमन में चल रहे गृह युद्ध का हिस्सा बना है। यूएई ने 2015 में अरब गठबंधन का हिस्सा बनते हुए यमन में सरकार बदलने की मांग कर रहे हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया था। हालांकि, 2019 के बाद से यमन में यूएई की गतिविधियां कम हुई हैं।
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