एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने अब तक चीनी कंपनियों की 220 से ज्यादा मोबाइल एप्स को बैन कर दिया है। सरकार के इस कदम से चीन की बौखलाहट बढ़ गई है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को एप बैन मसले को लेकर बयान जारी किया गया है। इसमें मंत्रालय के प्रवक्ता गाओ फेंग ने कहा कि भारत के कदम चीनी कंपनियों के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ये हम पर दबाव बनाने की कोशिश है। फेंग ने कहा, भारत को अपने कारोबारी माहौल में सुधार करना चाहिए ताकि चीनी कंपनियों सहित सभी विदेशी निवेशकों के साथ निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार तय हो सके। गाओ ने कहा है कि एक तय अवधि के लिए, संबंधित भारतीय विभाग देश में चीनी उद्यमों और संबंधित सेवाओं पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। इससे चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमने इस पर गंभीर चिंता जताई है। गाओ ने उम्मीद जताई कि भारत दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की सकारात्मक गतिशीलता को बनाए रखने के लिए उचित उपाय करने में सक्षम होगा। भारत ने गलवान घाटी टकराव के बाद लिया था एक्शन : रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार ने इसी हफ्ते देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले 54 चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इससे पहले जून 2021 में भारत ने टिकटॉक, वीचैट और हेलो समेत 59 चीनी मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब सरकार ने इन एप्स को देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर खतरा करार दिया था। खुफिया एजेंसियों ने कहा था कि ये ऐप्स यूजर्स का डेटा जमा कर रही थीं और उसे बाहर भेज रही थीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन मसले पर रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले साहसी रुख दिखा रहा हो, लेकिन युद्ध की स्थिति में पश्चिमी देशों की तरफ से लगने वाले प्रतिबंधों को लेकर देश के अंदर गहरी चिंता है। रूस सरकार और देश के बड़े कारोबारी बीते कई हफ्तों से पश्चिमी प्रतिबंधों के असर से बचने के तरीकों पर विचार करते रहे हैं। इस सिलसिले में क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) ने यह जानने के लिए कई अध्ययन कराए हैं कि पश्चिमी प्रतिबंधों का रूस के उद्योगों पर क्या असर पड़ेगा। पश्चिमी देशों ने चेतावनी दे रखी है कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग कर दिया जाएगा। स्विफ्ट नाम से जाने वाली इस प्रणाली के जरिए ही अंतरराष्ट्रीय भुगतान का सारा काम होता है। पश्चिम की इस धमकी को रूस में बेहद गंभीरता से लिया गया है। सोवकोमबैंक पर लटक सकती है प्रतिबंध की तलवार : यहां से प्रकाशित अखबार द मास्को टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध और संभावित प्रतिबंधों की आशंका से रूस का कारोबार जगत आशंकित है। रूस की निजी कर्जदाता एजेंसी सोवकोमबैंक के संस्थापक सर्गेई खोतिम्स्की ने कहा- अभी ऐसा लगता है कि हमारे सिर पर किसी ने बंदूक तान रखी है और उसके साये में हम काम कर रहे हैं। अमेरिका ने जिन रूसी वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है, उनमें सोवकोमबैंक भी है। रूसी अखबार कोमेरसांत के मुताबिक जिन बैंकोंम करने के तरीकों पर सोच-विचार किया गया है, उनमें सरकारी बैंक स्बेरबैंक भी है। रूसी बैंकों में भी माइक्रोसॉफ्ट और एसएपी जैसे अमेरिका में बने सॉफ्टवेयर्स का ही इस्तेमाल होता है। इसके मुताबिक रूसी बैंक और कंपनियां इस बारे में स्विफ्ट सिस्टम के बिना कामें सार्वजनिक रूप से भले कुछ ना कह रही हों, लेकिन अंदर ही अंदर उनमें गहरी चिंता फैली हुई है। उनके अधिकारी इस बात से वाकिफ हैं कि उनके यहां बड़े पैमाने पर अमेरिका में निर्मित हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है। युद्ध की स्थिति में अमेरिकी कंपनियां इन्हें जाम कर दे सकती हैं। कारोबार ठप होने की चिंता : कारोबार से जुड़ी संस्था कॉम्पिटेंस सेंटर फॉर सब्सिट्यूशन फॉर इंपोर्ट की प्रमुख इल्या मासुख ने कहा- सूचना तकनीक का इस्तेमाल देशों पर दबाव बनाने और अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। मसलन, एरोफ्लोट पर ध्यान दीजिए। इस कंपनी पर जो सबसे हानिकारक प्रहार हो सकता है, उसका संबंध तकनीक से है। इसके विमानों को हवाई अड्डों पर ही पड़े रहने के लिए मजबूर किया जा सकता है, क्योंकि बिना एसएपी और ऑरेकल के वे उड़ान नहीं भर सकते। विशेषज्ञों ने बताया है कि रूस की सरकारी कंपनियों में जितने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है, उनमें सिर्फ एक तिहाई ही देश के अंदर बने हुए हैं। एरोफ्लोट, वीटीबी बैंक, और ट्रांसनेफ्ट जैसी कंपनियों में तो सिर्फ दस फीसदी देसी सॉफ्टवेयर का उपयोग होता है। ऐसे में अगर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तो रूस में कारोबार का बहुत बड़ा हिस्सा ठप हो जाएगा। ये चिंता रूस सरकार को भी सता रही है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि शायद इसी वजह से वह अब तनाव घटाने के संकेत दे रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्राजील के उत्तरी रियो डी जनेरियो के पेट्रोपोलिस शहर में मूसलाधार बारिश तथा भूस्खलन के कारण अब तक 104 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 35 लोग लापता हैं। खबर के मुताबिक बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के कारण बुधवार तक 104 लोगों की मौत हुयी थी, जिनमें से आठ बच्चे भी शामिल हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया भर में कोरोना का प्रकोप अब भी जारी है और बीते 28 दिन में दुनिया भर में जहां कोविड-19 संक्रमण के 41 करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं, वहीं इस दौरान दस अरब से अधिक लोगों ने वैक्सीन ले ली है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के कोरोना वायरस रिसोर्स सेंटर की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक दुनियाभर में कोरोना के मामलों की संख्या 41,78,09,571 हो गई है, जबकि मृतकों का आंकड़ा 58,51,050 पहुंच गया है। वहीं 10,25,71,09,696 लोगों ने वैक्सीन ले ली है। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के शीर्ष दस देशों में अमेरिका पहले स्थान पर है, जहां इस महामारी के कुल मामलों की संख्या 7,81,72,926 और अब तक कुल 9,28,519 लोगों की मौत हो चुकी है। गत 28 दिनों की अवधि में अमेरिका में 94,69,314 नये मामले सामने आये जबकि 66,801 लोगों की मौत हुई। दूसरे स्थान पर फ्रांस है जहां कोरोना के कुल मामलों की संख्या 2,21,31,431 है और यहां अब तक 1,36,856 लोगों ने महामारी से अपनी जान गंवा दी। फ्रांस में पिछले 28 दिन के दौरान 68,42,250 नये मामले सामने आये हैं जबकि 8,215 और मरीजों की मौत हो गयी। वहीं, भारत में जहां कुल संक्रमितों की संख्या 4,27,54,315 हो गई है, जबकि इस अवधि में 5,10,413 लोगों की मौत हो गई है। देश में अब तक 1,74,24,36,288 लोगों को कोरोना वैक्सीन दी जा चुकी है। इसके बाद ब्राजील का स्थान आता है जहां अब तक 2,78,19,996 लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि देश में मृतकों का आंकड़ा 6,41,096 हो गया है। जर्मनी में वैश्विक महामारी से अभी तक 1,30,93,881 लोग प्रभावित हुए हैं। देश में मृतकों का आंकड़ा 1,20,732 तक पहुंच गया है। ब्रिटेन में अभी तक 1,85,75,733 लोग इस महामारी से प्रभावित हुए हैं, जबकि 1,60,599 लोगों की इस जानलेवा वायरस से मौत हो चुकी है। रूस में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,44,45,698 हो गई है और इस महामारी से अब तक 3,35,521 लोगों की मौत हो गयी है। तुर्की में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 1,31,73,859 हो गई है। देश में कोरोना संक्रमण से अब तक 91,388 लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं इटली में संक्रमितों की कुल संख्या 1,22,65,343 है, जबकि देश में मृतकों का आंकड़ा 1,51,962 हो गया है। स्पेन में कोरोना से अब 1,07,44,394 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 97,350 लोगों की मौत हो चुकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्राजील के रियो दि जिनरियो राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा बुधवार तड़के जारी बयान में उक्त जानकारी दी गई। इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित पेट्रोपोलिस में राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है और यहां के मेयर रुबेन्स बोम्टेम्पो का कहना है कि हताहतों (मृतकों) की संख्या बढ़ सकती है। अभी तक 21 लोगों को सुरक्षित बचाने में कामयाबी मिली है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में 2011 में भारी बारिश के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। राहत एवं बचाव अभियान के बीच बुधवार को 49 वर्षीय रोसलीन विर्गिलियो के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, क्योंकि उन्हें मलबे में फंसी महिला का क्रंदन याद आ रहा था जिसे वह बचा नहीं सकीं। उन्होंने बताया, कल एक महिला मदद के लिए चिल्ला रही थी। मुझे यहां से बाहर निकालो। लेकिन हम कुछ नहीं कर सके। पानी और मिट्टी का मलबा धंस रहा था। उन्होंने कहा, दुर्भाग्यवश हमारा शहर बर्बाद हो गया है। गवर्नर क्लॉडियो कास्त्रो ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि यह युद्ध जैसी स्थिति है और वह प्रभावित क्षेत्रों से मलबा साफ करने के लिए आसपास के राज्यों से भारी मशीनरी सहित हर संभव मदद मंगवा रहे हैं। राज्य के दमकल विभाग ने मंगलवार देर रात एक बयान में बताया कि 180 सैनिक बचाव अभियान में जुटे हैं। विभाग ने बताया कि इलाके में दिन में तीन घंटे के भीतर 25.8 सेंटीमीटर बारिश हुई, जो इससे पहले के 30 दिन में हुई बारिश के बराबर है। रूस की यात्रा पर गए ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो ने ट्वीट किया कि उन्होंने अपने मंत्रियों को बारिश के कारण प्रभावित हुए लोगों की तत्काल मदद करने के निर्देश दिए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के आक्रमण के खतरे के बीच यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय, प्रमुख बैंकों और सेना पर श्रृंखलाबद्ध तरीके से मंगलवार को साइबर हमला किया गया। इस हमले की आड़ में और गंभीर साइबर हमला होने के संकेत अभी तक नहीं मिले हैं। तकनीकी भाषा में इसे "डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस" (डीडीओएस) हमला बताया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि किसी सर्वर को लक्षित कर उस पर इंटरनेट डेटा की बाढ़ कर देना, ताकि सामान्य तौर पर आने वाला डेटा बाधित हो जाए। इस हमले के कारण यूक्रेन की कम से कम 10 वेबसाइट बंद हो गईं, जिनमें रक्षा, विदेश और संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट शामिल थीं। इसके अलावा दो सबसे बड़े सरकारी बैंकों की वेबसाइट भी प्रभावित हुई। इस प्रकार के हमलों में वेबसाइट पर भारी मात्रा में "जंक डेटा" भेजा जाता है जिससे वेबसाइट नहीं खुलती। यूक्रेन के वरिष्ठ साइबर रक्षा अधिकारी विक्टर झोरा ने कहा कि इस डीडीओएस हमले से किसी अन्य प्रकार की क्षति होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रतिक्रिया दल हमलावरों का संपर्क काटने और सेवाएं बहाल करने में जुटी हैं। नेटवर्क प्रबंधन कंपनी "केन्टिक इंक" में इंटरनेट विश्लेषण के निदेशक डग मडोरी ने कहा कि हमलावरों के निशाने पर यूक्रेन की सेना और बैंक थे। यूक्रेन के सूचना मंत्रालय के रणनीतिक संचार और सूचना सुरक्षा केंद्र की ओर से जारी बयान में कहा गया कि निवेशकों के धन को कोई खतरा नहीं है। झोरा ने कहा कि इस हमले से यूक्रेन की सेनाओं की संचार व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हमले के पीछे कौन है, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि इसमें रूस का हाथ हो सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने मंगलवार को कहा कि सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहीं कुछ सैन्य टुकड़ियां अपने सैन्य अड्डे के लिए लौटने लगी हैं। हालांकि, रूस ने वापसी का ब्योरा नहीं दिया है। इससे यह उम्मीद जगी है कि शायद रूस की योजना यूक्रेन पर हमला करने की न हो। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रूसी रक्षा मंत्रालय ने जिन सैन्य टुकड़ियों के लौटने की बात कही है, वे कहां से लौट रही हैं और उनकी संख्या कितनी है। यह ऐलान रूसी विदेश मंत्री के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने संकेत दिए थे कि उनका देश उन सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर बातचीत जारी रखने के लिए राजी है, जिसने यूक्रेन संकट को जन्म दिया। तनाव पैदा होने के हफ्तों बाद रूस के रुख में यह परिवर्तन दिखा। हालांकि, अब भी पश्चिमी देशों के अधिकारी यह चेतावनी देना जारी रखे हुए हैं कि रूस किसी भी क्षण यूक्रेन पर हमला कर सकता है और वह सैन्य साजो सामान सीमा की ओर ले जा रहा है। कुछ तो बुधवार को संभावित हमले का दिन बता रहे हैं। इस बीच, ब्रसेल्स में नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, अभी तक हमने जमीन पर कोई तनाव नहीं देखा है, ना ही हमें यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों की उपस्थिति में कोई कमी दिखी है। इस ऐलान के बाद विश्व बाजार समेत रूसी मुद्रा रूबल के भाव में उछाल देखने को मिला है। हालांकि, यूक्रेन के नेता रूस की इस घोषणा पर संदेह जता रहे हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा, रूस लगातार कई तरह के बयान दे रहा है। यही वजह है कि हमने नियम बनाया है कि हम सुनी हुई बातों पर विश्वास नहीं करेंगे। हम देखने के बाद विश्वास करेंगे। पश्चिमी देश रूस को "अंतहीन वार्ता" में फंसा सकते हैं- पुतिन यूक्रेन के विदेश मंत्री ने अपने इतालवी समकक्ष की मेजबानी करके बातचीत की। दरअसल, मास्को गारंटी चाहता है कि नाटो, यूक्रेन और पूर्व सोवियत संघ के अन्य देशों को अपना सदस्य नहीं बनाएगा। वह यह भी चाहता है कि नाटो के सदस्य देश यूक्रेन में हथियारों की तैनाती पर रोक लगाएं और पश्चिमी यूरोप से अपने सैनिक वापस लें। पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देश रूस को "अंतहीन वार्ता" में फंसा सकते हैं। पुतिन ने सवाल किया कि क्या अभी भी समझौते पर पहुंचने का अवसर है। लावरोव ने कहा कि उनका मंत्रालय अमेरिका और उसके सहयोगियों को रूस के मुख्य अनुरोधों को दरकिनार करने की अनुमति नहीं देगा। उधर, व्हाइट हाउस की प्रमुख उप प्रेस सचिव कारीन जीन-पियरे ने कहा, अगर रूस सकारात्मक रूप से बातचीत का विकल्प चुनता है तो कूटनीति का रास्ता उपलब्ध रहेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के समक्ष यूक्रेन के मुद्दे पर बात की है। उन्होंने यूक्रेन पर रूस द्वारा किये जाने वाले संभावित हमले को लेकर अमेरिका की चिंता से उन्हें रूबरू कराया और इस तनाव के एक राजनयिक समाधान का जिक्र किया। प्राइस ने कहा, ब्लिंकन ने यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष के राजनयिक समाधान को जारी रखने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराया। अमेरिका को पता है कि रूस यूक्रेन पर किसी भी समय आक्रमण करने की क्षमता रखता है और अमेरिका को इसी की चिंता है जिसका जिक्र ब्लिंकन ने लावरोव के सामने किया और इस संघर्ष को रोकने के उपाय पर बल दिया।
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