एबीएन सेंट्रल डेस्क (तेहरान)। इजरायल ने आखिर वो कर दिखाया जिसकी धमकी सालों से देता आ रहा था। तेहरान में विस्फोट, नतांज की परमाणु साइट पर हमला, और ईरान के टॉप मिलिट्री जनरल व दो प्रमुख न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की हत्या। मगर सवाल ये है कि जब ईरान के सबसे अहम ठिकानों को बमों से उड़ाया जा चुका है, उसके परमाणु प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश हो चुकी है, तब वो क्या बचा है जो इजरायल को पलटकर झटका दे सकता है? क्योंकि युद्ध सिर्फ बमों से नहीं जीता जाता, बल्कि रणनीति, टेक्नोलॉजी और सरप्राइज से जीता जाता है। और ईरान इसी मोर्चे पर इजरायल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनने जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में राजशाही की बहाली और हिंदू राष्ट्र की पुन: स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की बढ़ती तीव्रता को देखते हुए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए देशभर में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बनाई जा रही है। आंदोलन में शामिल कई नेता अब गिरफ्तारी से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए हैं।
सरकार ने राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के प्रमुख नेताओं रवींद्र मिश्र और धवल शमशेर राणा सहित 61 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर देशद्रोह, सार्वजनिक अशांति फैलाने और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोप लगाये गये हैं।
राजधानी काठमांडू के रिंग रोड क्षेत्र को आगामी दो महीनों के लिए प्रदर्शन मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है, जिससे वहां किसी प्रकार का धरना या रैली न हो सके। प्रधानमंत्री ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल के साथ नेपाली कांग्रेस और माओवादी केंद्र ने मिलकर इस आंदोलन के विरोध में साझा मोर्चा बनाया है। तीनों दल किसी भी सूरत में नेपाल को पुन: हिंदू राष्ट्र या राजशाही प्रणाली में ले जाने के पक्ष में नहीं हैं।
इस आंदोलन में कई हिंदूवादी संगठन और राजशाही समर्थक लोग सक्रिय रूप से शामिल हैं। ये लोग नेपाल को फिर से एक हिंदू राष्ट्र घोषित करने और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।
नेपाल में 2006 में राजशाही का अंत हुआ और 2008 में औपचारिक रूप से इसे एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया। इसके बाद 2015 में नया संविधान लागू किया गया, जिसमें सभी धर्मों को समान अधिकार प्रदान किये गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बीते रविवार को यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। यूक्रेन ने इस आपरेशन को स्पाइडर वेब नाम दिया। हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे शानदार, सफल और ऐतिहासिक बताया है। यह हमला बीते रविवार को हुआ, जिसमें 117 ड्रोन्स का इस्तेमाल करके रूस के कई हजार किलोमीटर अंदर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस आपरेशन की योजना डेढ़ साल से ज्यादा समय से बन रही थी।
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अब तीसरे साल में है। इस दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई बड़े हमले किये, लेकिन यूक्रेन का यह ताजा ड्रोन हमला अपनी रणनीति और प्रभाव के कारण खास है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि इस आपरेशन की तैयारी डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी।
जेलेंस्की ने कहा कि इस हमले में हर छोटी-बड़ी डिटेल पर बारीकी से काम किया गया। इसमें 117 ड्रोन्स और उतने ही ड्रोन आॅपरेटर्स शामिल थे। इन ड्रोन्स को रूस के सैन्य ठिकानों, खासकर हवाई अड्डों पर तैनात स्ट्रैटेजिक क्रूज मिसाइल कैरियर्स को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हमारे लोगों ने रूस के कई इलाकों में, जिसमें तीन अलग-अलग टाइम जोन्स शामिल थे, सटीक हमला किया। इस आॅपरेशन की खास बात यह थी कि हमारा कंट्रोल सेंटर रूस की खुफिया एजेंसी के आॅफिस के ठीक बगल में था। यह बात इस हमले की गुप्त और साहसिक प्रकृति को दर्शाती है। यूक्रेन ने न सिर्फ रूस की सीमा में घुसकर हमला किया, बल्कि इसे इतनी चतुराई से अंजाम दिया कि रूसी सेना को भनक तक नहीं लगी।
इस हमले की सबसे हैरान करने वाली बात थी इसकी रणनीति। बीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन ने छोटे-छोटे फर्स्ट-पर्सन व्यू ड्रोन्स का इस्तेमाल किया, जो रियल-टाइम वीडियो फीड के जरिए आॅपरेटर्स द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। इन ड्रोन्स को रूस के अंदर गुप्त रूप से ले जाया गया। इसके लिए खास तरह के ट्रकों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें लकड़ी के केबिन्स बने थे। इन केबिन्स की छतें रिमोट से खुलती थीं और फिर ड्रोन हवा में उड़कर पास के सैन्य ठिकानों पर हमला करते थे।
ये ड्रोन कई दिशाओं से एक साथ भेजे गये, जिससे रूस के रडार सिस्टम को चकमा देना आसान हो गया। इस हमले में रूस के पांच हवाई अड्डों मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाजान और अमूर क्षेत्रों में को निशाना बनाया गया। यूक्रेन का दावा है कि इस हमले में 41 रूसी विमान, जिनमें टीयू-95, टीयू-22एम3 और ए-50 जैसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स शामिल थे, नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए। यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (रइव) के दावा किया कि इस हमले से रूस को करीब 7 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
जेलेंस्की ने इस आपरेशन को इतिहास की किताबों में दर्ज होने वाला बताया। उन्होंने कहा, यह आपरेशन सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि यूक्रेन की तकनीक और रणनीति रूस से कहीं बेहतर है। न्यूज वेबसाइट द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट में जेलेंस्की के हवाले से कहा गया, यूरोप और अमेरिका के पास रूस से बेहतर हथियार हैं और हमारी रणनीति भी उनसे ज्यादा मजबूत है। आपरेशन स्पाइडर वेब इसका सबूत है।
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि इस हमले में शामिल सभी यूक्रेनी आपरेटर्स को रूस की जमीन से सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा, हमने अपने लोगों को समय रहते सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया। साथ ही, जेलेंस्की ने इस हमले को रूस के लिए जायज और उचित नुकसान बताया, क्योंकि यह उन ठिकानों पर किया गया जो यूक्रेन पर हमले के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।
हमले का समय और शांति वार्ता का कनेक्शन
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब यूक्रेन और रूस के बीच इस्तांबुल में शांति वार्ता शुरू होने वाली थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यूक्रेन ने इस आपरेशन की जानकारी पहले से ही ट्रंप प्रशासन को दे दी थी, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि उन्हें इसकी पहले से जानकारी नहीं थी।
जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला रूस को यह संदेश देता है कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस की ओर से वार्ता में गंभीरता न दिखाने पर और सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। जेलेंस्की ने कहा, हम शांति के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर इस्तांबुल की वार्ता से कुछ हासिल नहीं हुआ, तो रूस को और सजा मिलनी चाहिए।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले को आतंकी हमला करार दिया। रूस ने दावा किया कि उसने इवानोवो, रियाजान और अमूर क्षेत्रों में सभी ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। हालांकि, मरमंस्क और इरकुत्स्क में कुछ विमानों में आग लगने की बात स्वीकारी गयी। रूस ने कहा कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन यूक्रेन के दावों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, रूस को भारी नुकसान हुआ।
न्यूज वेबसाइट सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में इस्तेमाल हुए ड्रोन्स की खासियत थी उनकी सटीकता और गुप्त तरीके से काम करने की क्षमता। ये ड्रोन छोटे और हल्के थे, जिन्हें ट्रकों में छिपाकर ले जाया गया। इन ड्रोन्स को रिमोटली लॉन्च करने की तकनीक ने रूस की रक्षा प्रणाली को चकमा दे दिया। डिफेंस एक्सपर्ट पीटर लेटन ने कहा कि इस हमले से रूस की स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स की ताकत कमजोर हुई है, जो क्रूज मिसाइलों को ले जाने में सक्षम थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पराग्वे को लैटिन अमेरिकी महाद्वीप में भारत के महत्वपूर्ण साझीदारों में से एक बताते हुए आतंकवाद सहित सभी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में एक दूसरे से सीखने की जरूरत रेखांकित की। श्री मोदी ने यहां हैदराबाद हाउस में पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पलासियोस के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा, आपकी भारत यात्रा ऐतिहासिक है।
पराग्वे के राष्ट्रपति की यह दूसरी भारत यात्रा है। आप न केवल दिल्ली बल्कि मुंबई भी जा रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से आपसी संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मेरा मानना है कि आपसी सहयोग के माध्यम से हम साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हमारे पास डिजिटल प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा, रेलवे और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर हैं।
उन्होंने कहा, पराग्वे दक्षिण अमेरिका में हमारे महत्वपूर्ण साझीदारों में से है। हमारा भूगोल भले ही अलग हो, लेकिन हमारे लोकतांत्रिक आदर्श और जनकल्याण की एक ही सोच है। श्री मोदी ने कहा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और पराग्वे कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। साइबर अपराध, संगठित अपराध और नशीली दवाओं की तस्करी जैसी आम चुनौतियों से लड़ने के लिए सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
भारत और पराग्वे ग्लोबल साउथ का एक अभिन्न अंग हैं। हमारी आशाएं, आकांक्षाएं और चुनौतियां समान हैं, इसलिए हम एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकते हैं। हमें संतोष है कि कोविड महामारी के समय हम भारत में बनी वैक्सीन, पैराग्वे के लोगों के साथ साझा कर सके। ऐसी और भी क्षमताएं हम एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं।
श्री मोदी ने कहा, मुझे विश्वास है कि आपकी यात्रा आपसी विश्वास, व्यापार और घनिष्ठ सहयोग के स्तंभों को नई ताकत प्रदान करेगी। यह भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों में नए आयाम भी जोड़ेगा। पिछले साल, मैंने गुयाना में कैरिकॉम शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहाँ हमने कई विषयों पर बढ़ते सहयोग पर चर्चा की। हम इन सभी क्षेत्रों में पराग्वे और सभी लैटिन अमेरिकी देशों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा (एचएचएस) मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने 27 मई को घोषणा की कि अब स्वस्थ बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए कोविड-19 टीकाकरण अनिवार्य नहीं रहेगा। यह निर्णय रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) द्वारा अनुशंसित टीकाकरण सूची में से कोविड-19 वैक्सीन को हटाने के रूप में लागू होगा।
यह घोषणा एक वीडियो संदेश के माध्यम से सोशल मीडिया मंच एक्स पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गयी, जिसमें कैनेडी के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ के निदेशक जे. भट्टाचार्य और एफडीए आयुक्त मार्टी मकेरी भी शामिल थे। वीडियो में उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चों में वैक्सीन की आवश्यकता को साबित करने के पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं।
हालांकि, इस फैसले में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को बंद करने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया, जबकि उन्हें पहले उच्च जोखिम वाली श्रेणी में शामिल किया गया था। इस घोषणा से ठीक एक सप्ताह पहले 20 मई 2025 को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भी स्पष्ट किया था कि अब टीकों के नए संस्करण केवल 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के और गंभीर संक्रमण के उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए ही स्वीकृत किए जायेंगे। एफडीए ने टीका निर्माताओं से मांग की है कि वे अब ऐसे अध्ययन प्रस्तुत करें जो कम जोखिम वाले वर्गों में भी वैक्सीन की प्रभावशीलता को साबित कर सकें।
अमेरिकन कॉलेज आफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (एसीओजी) और अमेरिकन एकेडमी आॅफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) सहित कई स्वास्थ्य संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की है। एसीओजी ने कहा है कि गर्भवती महिलाओं को कोविड वैक्सीन देना मां और शिशु दोनों के लिए सुरक्षा कवच है। वहीं एएपी ने 2024-25 में बच्चों की कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती होने के आंकड़ों को टीकाकरण की आवश्यकता के पक्ष में रखा। यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है जब सीडीसी की वैक्सीनेशन सलाहकार समिति की अगली बैठक मात्र एक महीने दूर है, जिसमें 2025-26 के कोविड वैक्सीन दिशा-निर्देशों की समीक्षा की जानी है।
सीडीसी और एफडीए की नयी नीति के तहत अब केवल गंभीर जोखिम वाले लोग, जैसे कि कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, दमा और गर्भावस्था जैसी स्थितियों से पीड़ित लोगों को ही टीका दिया जायेगा। एफडीए द्वारा प्रकाशित सूची के अनुसार अमेरिका में 10-20 करोड़ लोग इस श्रेणी में आते हैं। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि इस नीति में उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के घरवालों या देखभाल करने वालों को शामिल न करना, संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ा सकता है।
अब भी छह महीने या उससे अधिक आयु के उच्च जोखिम वाले बच्चे टीके के पात्र हैं। बाजार में पहले से उपलब्ध टीके अब भी मिलेंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कब तक। टीकाकरण से बच्चों को लाभ होता है या नहीं, इस पर आंकड़े सीमित हैं। ऐसे में टीका लेने का निर्णय अब माता-पिता और डॉक्टरों के विवेक पर निर्भर होगा।
नयी नीति के तहत स्वस्थ वयस्कों के लिए कोविड-19 टीका पाना अब मुश्किल हो सकता है। उन्हें न तो बीमा में वैक्सीन का कवर मिलेगा और न ही व्यापक तौर पर इसकी सिफारिश की जायेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जोखिम-आधारित नीति से व्यापक जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि टीकाकरण की उच्च दर वाले समुदायों में वायरस के फैलाव की संभावना कम होती है।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। टेस्ला और स्पेस एक्स के प्रमुख एलन मस्क ने घोषणा की है कि उनका अमेरिकी सरकार में विशेष सरकारी कर्मचारी (SGE) के रूप में 130-दिन का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व Twitter) पर लिखा कि मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सरकारी खर्च को कम करने के दिए गए मौके के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। DOGE मिशन समय के साथ और मजबूत होता जाएगा।
Department of Government Efficiency (DOGE) एक प्रशासनिक इनोवेशन था, जिसमें मस्क को सरकारी खर्चों में कटौती और दक्षता बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस अभियान के माध्यम से अनावश्यक सरकारी खर्च की पहचान की गयी।
विदेशी सहायता और सार्वजनिक प्रसारण पर खर्च कम करने के सुझाव दिए गए। NPR, PBS और विदेशी सहायता कार्यक्रमों में $9।4 बिलियन की कटौती का प्रस्ताव रखा गया। यह कदम सरकारी सुधार और फालतू खर्च खत्म करने की दिशा में उठाया गया था। एलन मस्क का हटना ऐसे समय पर हुआ है, जब उन्होंने ट्रंप के बिग एंड व्यूटिफूल बिल की आलोचना की है।
बता दें कि बिग ब्यूटिफूल बिल में मल्टी-ट्रिलियन डॉलर की टैक्स ब्रेक, रक्षा खर्च में भारी वृद्धि और आव्रजन नियंत्रण उपाय से जुड़े खर्च शामिल है। इसको लेकर मस्क ने कहा कि यह बिल DOGE के काम को कमजोर करता है। इससे घाटा बढ़ सकता है। इस पर ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा था कि मैं इसके कुछ हिस्सों से खुश नहीं हूं, लेकिन हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।
मस्क के इस बयान को कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी समर्थन दिया सीनेटर रॉन जॉनसन (विस्कॉन्सिन) ने कहा कि मैं एलन के हतोत्साहित होने से सहानुभूति रखता हूं। हालांकि, राष्ट्रपति पर दबाव डालना किसी भी तरह से असर नहीं करता है।
हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि वे चाहते हैं कि सीनेट में बिल में कम से कम बदलाव हों, ताकि संतुलन बना रहे। हालांकि, बिल को लेकर अगर स्टेज में सीनेट बिल में बदलाव करेगी, जिसके बाद इसे फिर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वोटिंग के लिए लाया जाएगा।
सरकारी पद से हटते हुए एलन मस्क ने कहा अब मैं पूरी तरह से टेस्ला और स्पेसएक्स को समर्पित हूं। मैं अपने राजनीतिक खर्च को भी कम करूंगा, क्योंकि मेरा मानना है कि मैंने अपना योगदान दे दिया है। उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि वे राजनीति से पीछे हटकर अपनी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोहम्मद सिनवार हमास का गाजा चीफ और हमास के शीर्ष नेता याह्या सिनवार का भाई था। याह्या को इस्राइली सेना ने पिछले साल अक्तूबर में मार दिया था। इस्राइल ने हमास के कमांडर और याह्या सिनवार के भाई मोहम्मद सिनवार के मारे जाने पर अपनी मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आज इसकी पुष्टि की।
संसद में बोलते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि 13 मई को इस्राइली सेना के हवाई हमले में हमास कमांडर मोहम्मद सिनवार मार दिया गया था। संसद में बोलते हुए नेतन्याहू ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में इस्राइल द्वारा मारे गये हमास नेताओं की सूची में सिनवार को भी शामिल किया।
बता दें कि इससे पहले, इस्राइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा था कि जैसे संकेत मिल रहे हैं, उनसे लगता है कि मोहम्मद सिनवार व जकारिया सिनवार मारे जा चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई ) और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अपनी ओर से भारत के लिए अटूट समर्थन की बृहस्पतिवार को पुष्टि की। यूएई के एक सांसद ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा और पूरी मानवता के लिए बुराई करार दिया।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक संपर्क के तहत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में एक सर्वदलीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक बैठक के बाद संघीय राष्ट्रीय परिषद की रक्षा मामलों, आंतरिक और विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष अली राशिद अल नुएमी ने यह टिप्पणी की। अल नुएमी ने कहा, आतंकवाद केवल एक राष्ट्र या क्षेत्र के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक खतरा है।
हमारा मानना है कि हमें, एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में एक साथ आकर पूरी मानवता के लिए बेहतर भविष्य बनाने का प्रयास करना चाहिए। यह प्रतिनिधिमंडल उन सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक है, जिन्हें भारत ने अंतराराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान की साजिशों और आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के बारे में बताने के लिए विदेश दौरा करने का काम सौंपा है। ये प्रतिनिधिमंडल 33 देशों की राजधानियों की यात्रा करेंगे।
अल नुएमी ने कहा, आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। बुद्धिमान लोगों को इसके खिलाफ बोलना चाहिए। उन्होंने इस खतरे से निपटने के लिए अमीरात की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।भारत के साथ गहरे द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करते हुए यूएई के नेता ने कहा, हम आतंकवाद से लड़ने के प्रयासों में पहले से ही भारत के साथ सहयोग कर रहे हैं। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
उधर, जापान ने बृहस्पतिवार को कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और दुनिया के साथ है। जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल से बात कर रहे थे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल के नेता जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में तोक्यो से भारत के लिए समर्थन मांगा।
झा के नेतृत्व वाला दल 33 अलग-अलग देशों की राजधानियों में भारत का पक्ष रखने के लिये बनाए गए सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक है। ये प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इरादों और आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत करायेंगे।
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