एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को यूक्रेन पर रूसी हमले को रोकने और सेना को वापस बुलाने के प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस दौरान रूस ने प्रस्ताव पर वीटो किया। सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों में रूस भी शामिल है। उधर, भारत, चीन और यूएई ने हमले की निंदा करते मतदान में हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन पर हमले के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में 15 में से 11 सदस्य देशों ने वोट किया। वहीं, रूस ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल किया। उधर, भारत, चीन और यूएई ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, यूक्रेन में हाल ही में हुए घटनाक्रम से भारत बेहद परेशान है। हम आग्रह करते हैं कि हिंसा और शत्रुता को तत्काल समाप्त के सभी प्रयास किए जाएं। नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकाला गया है। हम भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जिसमें यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र शामिल हैं। इस बात से खेद है कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया है। हमें उस पर लौटना होगा। इन सभी कारणों से भारत ने इस प्रस्ताव पर परहेज करने का विकल्प चुना है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा, हमारे बुनियादी सिद्धांतों पर रूस का हमला ढीठ और बेशर्मी भरा है, यह हमारी अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए खतरा है। इन देशों ने रूस के खिलाफ किया वोट : रूस के खिलाफ प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, अल्बानिया, ब्राजील, गैबॉन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको और नॉर्वे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूसी सैनिकों ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर शुक्रवार को हमला शुरू दिया। सरकारी इमारतों के निकट गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें गूंज रही थीं। रूस की इस कार्रवाई से यूरोप में व्यापक युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। वहीं उसे रोकने के लिए दुनियाभर में प्रयास भी शुरू हो गए हैं। वहीं युद्ध से सैकड़ों लोगों के हताहत होने की सूचनाओं के बीच कीव में इमारतों, पुलों और स्कूलों के सामने भी गोलीबारी और विस्फोटों की घटनाएं हुई हैं। इससे इस बात के भी संकेत बढ़ रहे हैं कि रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन यूक्रेन की मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के नक्शे में बदलाव करने और रूस के शीतयुद्ध कालीन प्रभाव को बहाल करने के लिए यह पुतिन का अभी तक का सबसे बड़ा कदम है। हालांकि इस युद्ध में अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेन का कितना हिस्सा अब भी उसके कब्जे में है और कितने हिस्से पर रूस का नियंत्रण हो गया है। इस बीच क्रेमलिन ने बातचीत करने की कीव की पेशकश स्वीकार कर ली है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के प्रति नरमी दिखाते हुए किया जा रहा है, न कि मामले का कूटनीतिक हल निकालने के लिए। इसपर पश्चिमी देशों के नेताओं ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ऐसे हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है क्योंकि उन्हें आशंका है कि रूस लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई उनकी सरकार को बेदखल कर सकता है। यूक्रेन में बड़े पैमाने पर लोग हताहत हो सकते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। रूसी सेना ने कहा कि उसने कीव के बाहर एक रणनीतिक हवाई अड्डे और पश्चिम में एक शहर पर नियंत्रण कर लिया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने यूक्रेन की ओर कम से कम 137 लोगों की मौत की सूचना दी और सैकड़ों रूसी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया। रूसी अधिकारियों ने हताहतों का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है। फिलहाल मृतक संख्या को सत्यापित करना संभव नहीं हो सका है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा कि 25 नागरिकों की मौत हुई है जिनमें से ज्यादातर की मौत गोलाबारी और हवाई हमलों में हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसा माना जा रहा है कि एक लाख लोगों ने अपने घर छोड़े हैं। आशंका है कि युद्ध बढ़ने पर यह संख्या 40 लाख तक पहुंच सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के खिलाफ रूस का सैन्य अभियान लगातार जारी है। रूसी सैनिकों ने यूक्रेन की राजधानी कीव में शुक्रवार को हमला कर दिया और सरकारी क्वार्टरों के निकट गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें गूंज रही थी। इस युद्ध में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रूस की इस कार्रवाई से यूरोप में व्यापक युद्ध की आशंकाएं पैदा हो गई है और साथ ही उसे रोकने के लिए दुनियाभर में प्रयास भी शुरू हो गए हैं। इस बीच राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की संपत्तियां जल्द जब्त हो सकती हैं। 27 देशों वाला यूरोपीय संघ इस संबंध में सहमति के बेहद करीब है। लग्जमबर्ग के विदेश मंत्री जीन एसेलबोर्न ने शुक्रवार को यह दावा किया। आपको यह भी बता दें क यूक्रेन सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि रूस ने पिवडेन्नी के ब्लैक सी बंदरगाह के पास दो विदेशी जहाजों पर गोलीबारी की। रूस के साथ बातचीत को तैयार हुआ यूक्रेन : यूक्रेन के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा है कि यूक्रेन का नेतृत्व रूस के साथ बातचीत के लिए तैयार है और दोनों पक्ष वार्ता के प्रारूप पर चर्चा कर रहे हैं। शुक्रवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमत्रिी पेसकोव ने कहा कि यूक्रेन ने वारसॉ में वार्ता आयोजित करने की पेशकश की है, जबकि रूस ने म्स्किक में वार्ता करने की मंशा दिखाई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने हाल ही में यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर क्रेमलिन समर्थित मीडिया पर रोक लगा दी थी। अब रूस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फेसबुक पर आंशिक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन की लड़ाई गंभीर हो गई है। रूसी सेना द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले में बहुत से लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति का कहना है कि रूस के हमले में अब तक 157 लोग मारे जा चुके हैं। रोमानिया पहुंचा भारतीय नागरिकों का पहला बैच : यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों का पहला बैच सुसेआवा सीमा क्रॉसिंग के रास्ते रोमानिया पहुंच गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि अब सुसेआवा में हमारी टीम उन्हें भारत वापस लाने के लिए बुखारेस्ट ले जाएंगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। ज़ेलेंस्की ने ट्वीट कर कहा कि बाइडेन के साथ बातचीत के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने, ठोस रक्षा सहायता और युद्ध-विरोधी गठबंधन पर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति बाइडेन ने शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के साथ फोन पर करीब 40 मिनट तक बातचीत की। उन्होंने पश्चिमी देशों से और अधिक मदद करने का आग्रह किया। इससे पहले शुक्रवार को, बाइडेन ने यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा करने के लिए नाटो नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में भारतीय छात्र भी काफी डरे हुए हैं और जल्द ही वहां से निकलना चाहते हैं। इसी जद्दोजहद के बीच भारतीय छात्रों का एक दल पैदल ही यूक्रेन पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचने के लिए निकल पड़ा है। कॉलेज बस ने इन छात्रों को बॉर्डर से करीब 8 किलोमीटर दूर ही उतार दिया, जिसके बाद ये छात्रों को बॉर्डर तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ा। समाचार के मुताबिक, डैनली हेलित्सकी मेडिकल यूनिवर्सिटी के करीब 40 मेडिकल छात्रों को कॉलेज बस ने बॉर्डर से करीब 8 किमी दूर छोड़ दिया था और बॉर्डर तक का सफर इन्हें पैदल करना पड़ा। पोलैंड की सीमा से करीब 70 किमी दूर, लीव के मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट यूक्रेन के पड़ोसी देश से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि रूस के हमले बाद यूक्रेन के हवाईक्षेत्र को बंद कर दिया गया है। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद हजारों की संख्या में भारतीय स्टूडेंट्स यूक्रेन में फंस गए हैं। इस वक्त मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित कैसे बाहर निकाला जाए। भारत ने यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए हंगरी और पोलैंड की सीमाओं के जरिए सरकारी दलों को भेजा है। भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, सुरक्षित मार्गों की पहचान कर ली गई है। सड़क मार्ग से, यदि आप कीव से जाते हैं, तो आप नौ घंटे में पोलैंड और लगभग 12 घंटे में रोमानिया पहुंच जाएंगे। सड़क का नक्शा तैयार कर लिया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला आज दूसरे दिन भी जारी है। यूक्रेन की राजधानी कीव में शुक्रवार को एक रॉकेट एक बहुमंजिला अपार्टमेंट से जा टकराया, जिससे इमारत आग लग गई और कम से कम तीन लोग घायल हो गए। कीव के मेयर विटाली क्लिच्स्को ने यह जानकारी दी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी सेना का यह दावा झूठा है कि वह रिहायशी इलाकों को निशाना नहीं बना रही है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में सैन्य और रिहायशी, दोनों ही क्षेत्र रूसी हमलों का सामना कर रहे हैं। इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को कहा कि फ्रांस और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने सैन्य, ऊर्जा, वित्त सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़े रूसी नागरिकों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर मॉस्को पर बेहद कड़ा प्रहार करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से जुड़े कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देकर उसे यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मैक्रों ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को 1.5 अरब यूरो (लगभग 1.68 अरब डॉलर) की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन पर रूस के सैन्य आक्रमण में बेलारूस की सरकार को भी भागीदार करार दिया और कहा कि जल्द ही उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उधर, कीव में प्रवेश करने की कोशिशों में जुटी रूसी सेना शुक्रवार को सूमी शहर में दाखिल हो गई, जो यूक्रेन की राजधानी की ओर जाने वाले राजमार्ग पर स्थित है। क्षेत्रीय गवर्नर दमित्रो जिवित्स्की ने यह जानकारी दी। जिवित्स्की ने बताया कि यूक्रेनी सैनिकों ने वीरवार रात सूमी में रूसी सैनिकों का कड़ा मुकाबला किया, लेकिन रूसी सेना पश्चिम में कीव की तरफ बढ़ती चली गई। उन्होंने कहा कि सूमी से सैन्य वाहन कीव की ओर बढ़ रहे हैं। बहुत से वाहन पश्चिम की तरफ गुजर चुके हैं। जिवित्स्की के मुताबिक, रूसी सैन्य बलों ने उत्तर-पूर्वी शहर कोनोतोप पर भी कब्जा कर लिया है। उन्होंने क्षेत्र के बाशिंदों से रूसी सेना का मुकाबला करने की अपील की। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के अभियोजक करीम खान ने कहा कि वह यूक्रेन और उसके आसपास के क्षेत्रों के हालिया घटनाक्रमों को पूरी गंभीरता के साथ देख रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन की लड़ाई गंभीर हो गई है। रूसी सेना द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले में बहुत से लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति का कहना है कि रूस के हमले में अब तक 137 लोग मारे जा चुके हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने युद्ध का अनुभव रखने वाले यूरोपीय देशों से यूक्रेन की ओर से लड़ने की अपील की है। जिनपिंग ने की पुतिन से बात : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन की सरकारी मीडिया के बातचीत करने की अपील की है। पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर पहुंचे भारतीयों को दूतावास ने दी सलाह : पोलैंड की राजधानी वॉरसॉ में भारतीय दूतावास ने कहा है कि पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर सार्वजनिक साधन से पहुंचे भारतीय नागरिकों को शहयानी-मेदिका सीमा क्रॉसिंग पर पहुंचने की सलाह दी गई है।
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