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Published / 2022-04-14 03:59:04
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का काला सच

एबीएन सेंट्रल डेस्क। तालिबान ने अफगानिस्‍तान पर सत्‍ता पर काबिज होने के बाद से ही अमेरिकी मददगार सरकारी अफसरों पर नजर रखी, महीनों तक जांच की और माफी देने तक का झांसा दिया और आखिर में सजा दे दी। खबर के मुताबिक 500 सरकारी अफसरों की हत्‍या हो चुकी है या फिर वे लापता हैं। हालांकि तालिबान ने इन आरोपों को निराधार बताया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तालिबान ने अमेरिकी मददगारों को तलाशने के लिए अफगानिस्‍तान के सैनिकों और सरकारी कर्मचारियों को लेकर कई हथकंडे अपनाए। खबरों में कहा गया है कि करीब 500 लोगों की अब तक हत्‍या हो चुकी है या फिर उन्‍हें बंधक बनाया हुआ है। इन सभी पर अमेरिकी सेना की मदद करने का आरोप है। न्‍यूज एजेंसी एएनआई ने अंग्रेजी अखबार न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की एक जांच के हवाले से बताया कि तालिबान ने सत्‍ता पर काबिज होने के बाद से ही सजा देना शुरू कर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार इसके कारण केवल छह महीनों में ही लगभग 500 सैन्‍य कर्मियों, अफसरों और राज्‍य के अधिकारियों की या तो हत्‍या हो गई या फिर वे अचानक लापता हो गए। कंधार से 114 लोगों के लापता होने और बगलान प्रदेश में 86 हत्‍याएं होने की जानकारी दी गई है। खबर के मुताबिक तालिबान ने ऐलान किया था कि अफगानिस्तान के सैनिकों, अफसरों और अन्‍य सरकारी अधिकारियों को माफ कर देंगे। रूस की सरकारी न्‍यूज एजेंसी स्‍पूतनिक में अफगानिस्‍तान के सैन्‍य कमांडर ने कई बातों का खुलासा किया है। अपनी पहचान को उजागर न करने की शर्त पर इस सैन्‍य कमांडर ने बताया कि तालिबान ने माफी देने के लिए सैन्‍य कर्मियों, सरकारी कर्मचाारी और अधिकारी और अन्‍य लोगों को पुलिस मुख्‍यालय में बुलाया था। मुख्‍यालय पहुंचे अफगानिस्‍तानियों से तालिबान ने पहले पूरी पूछताछ की और मारा-पीटा। इनमें से कुछ तो निर्मम पिटाई के कारण ही मर गए थे तो कुछ को तालिबान ने अपने तौर-तरीके से मौत के हवाले कर दिया। तालिबान ने इन लोगों से कहा कि कई सालों तक हमारे खिलाफ लड़े और हमारे साथियों को मार डाला। ऐसे में हम तुम्‍हें कैसे जिंदा छोड़ दें। सरकारी कर्मचारियों और सैन्‍य कर्मियों के बारे में तालिबान ने पहले ही सारी जानकारी जुटाई थी। इसमें फोरेंसिक वीडियो परीक्षा, स्‍थानीय मीडिया रिपोर्ट और पीड़ितों, गवाहों और पीड़ितों के परिजनों से सीधी बातचीत आदि शामिल है। प्रतिशोध में हत्‍या करने या सजा देने के आरोप झूठे हैं: तालिबान तालिबान ने कहा है कि ऐसे आरोपों में कोई सच्‍चाई नहीं है। हत्‍याओं या सजा देने जैसे आरोप निराधार हैं। तालिबान के प्रवक्‍ता का दावा है कि ये झूठी खबरें केवल दुनिया को गुमराह करने के लिए है। हालांकि अफगानिस्‍तान में तालिबान के सत्‍ता पर कब्‍जा कर लेने के बाद से हालात बदतर हैं। मानवाधिकार की स्थिति चिंताजनक हो गई है। तालिबान के डर से हजारों अफगानिस्‍तानियों ने देश को छोड़ दिया है।

Published / 2022-04-13 08:27:06
अमेरिका ने रूस को फिर भड़काया, यूक्रेन को करोड़ों डॉलर के हथियार भेजेंगे बाइडेन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को पहली बार व्लादिमीर पुतिन की सेना पर यूक्रेन में नरसंहार करने का आरोप लगाया है। रूस तबाह हुए बंदरगाह शहर मारियुपोल को अपने कब्जे में करने के लिए अपने अभियान को और तेज कर रहा है और इस बीच बाइडेन ने कहा है कि रूस की सेना यूक्रेन में जो कर रही है, वो एक नरसंहार है। बाइडेन के साथ साथ पश्चिमी देश लगातार रूस पर यूक्रेन में मानवाधिकार उल्लंघन और आम नागरिकों की हत्या करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि पूर्वी यूक्रेन में रूस भीषण हमले शुरू कर सकता है। जबकि पश्चिमी देशों ने रूस पर यूक्रेन में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर काफी ज्यादा आक्रामक हैं और वो कई बार पुतिन को युद्ध अपराधी कह चुके हैं। वहीं, इस बार बाइडेन ने पुतिन की सेना पर नरसंहार का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि हां, मैंने इसे नरसंहार कहा है। बाइडेन ने आयोवा में एक भाषण के दौरान इस शब्द को नियोजित करने के कुछ घंटों बाद संवाददाताओं से कहा कि उनके प्रशासन के एक सदस्य ने सबसे पहले नरसंहार शब्दा का इस्तेमाल किया है। बाइडेन ने कहा कि हम दुनिया के वकीलों को यह तय करने देंगे कि यह (नरसंहार) सही है या नहीं। लेकिन मुझे निश्चित तौर पर ऐसा लगता है। बाइडेन ने कहा कि, यह स्पष्ट और पूरी तरह स्पष्ट हो गया है, कि पुतिन... यूक्रेन लोगों के यूक्रेनी होने के विचार तक को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राष्ट्रपति बाइडेन के नरसंहार वाले बयान को यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सही ठहराया है और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने बार बार मास्को पर नरसंहार के प्रयास के आरोप लगाए हैं। वहीं, उन्होंने राष्ट्रपति जो बाइडेन के नरसंहार वाले ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति बाइडेन के बयान को एक सच्चे नेता का सच्चा शब्द बताया। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने लिखा कि बुराई के खिलाफ खड़े होने के लिए चीजों को उनके सही नाम से पुकारना जरूरी है। आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इससे पहले कई बार युद्ध अपराधी के तौर पर भी वर्णित कर चुके हैं और जब राजधानी कीव के एक उपनगर बूचा में कई सामूहिक कब्र मिले और सैकड़ों नागरिक कब्र में मरे मिले, तो एक बार फिर से बाइडेन ने पुतिन को युद्ध अपराधी कहा।

Published / 2022-04-12 10:56:21
दुनिया में कोरोना : 222 दिन में मिले थे पहले एक करोड़ संक्रमित, इस बार 62 दिन में ही दस करोड़

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हम सभी के लिए चिंता की खबर है। दुनियाभर में सोमवार को कोरोना मरीजों का आंकड़ा 50 करोड़ के पार हो गया। पहले केस से 50 करोड़ मरीज होने में महज 877 दिन लगे। खैर, राहत की बात ये है कि इनमें से 44 करोड़ 88 लाख लोग ठीक भी हो चुके हैं। लेकिन इसके साथ दुखद खबर भी है। अब तक संक्रमण के चलते दुनिया के 62 लाख लोगों ने जान गंवा दी है। ये आंकड़े worldometers.info/coronavirus ने जारी किए हैं। 17 नवंबर को कोरोनावायरस का पहला केस चीन में मिला था। इसके अगले 222 दिन यानी 25 जून 2020 तक दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा एक करोड़ हो गया। एक से 10 करोड़ मरीज होने में महज 214 दिन लगे। इसके बाद संक्रमण की रफ्तार ने ऐसी तेजी पकड़ी की महज 190 दिन में दुनियाभर में मरीजों का आंकड़ा 20 करोड़ हो गया। 20 से 30 करोड़ संक्रमित होने में 155 दिन लगे। इसके बाद संक्रमण ने ऐसा कहर बरपाया कि महज 34 दिन में ही 10 करोड़ नए मरीज मिल गए। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या 40 करोड़ पहुंच गई। अब 62 दिन में 40 करोड़ का ये आंकड़ा बढ़कर 50 करोड़ हो गया है। कोरोना का कहर सबसे ज्यादा अमेरिका पर बरसा। यहां अब तक 8.20 करोड़ लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। अच्छी बात ये है कि इनमें 7.99 करोड़ लोग ठीक भी हो गए, लेकिन 10 लाख लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। यहां अब तक 4.30 करोड़ लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 4.25 करोड़ लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 5.21 लाख लोगों की जान चली गई। अब भारत में महज 11 हजार लोग संक्रमित हैं। इनका इलाज चल रहा है। अब हर रोज 6 से 10 लाख लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं, जबकि 1500 से तीन हजार मौतें हो रहीं हैं। अच्छी बात ये है कि संक्रमण से प्रतिदिन 6 से 7 लाख लोग रिकवर भी हो रहे हैं। हालांकि, चिंता की बात ये है कि 10 देश ऐसे हैं, जहां कोरोना की चौथी लहर ने दस्तक दे दी है। इनमें अमेरिका, ब्राजील, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, रूस, इटली, फ्रांस, जापान, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रिया शामिल हैं। पिछले सात दिनों का आंकड़ा देखें तो सबसे ज्यादा 14 लाख मरीज साउथ कोरिया में मिले। इस बीच, यहां 2100 लोगों की जान भी चली गई। जर्मनी में सात दिनों में 10 लाख और फ्रांस में नौ लाख लोग संक्रमित पाए गए।

Published / 2022-04-12 08:34:26
हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत कई मुद्दों पर भारत-अमेरिका ने की चर्चा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और अमेरिका ने सोमवार को चौथी टू प्लस टू मंत्रिस्तरीय बैठक की, जिसमें दोनों पक्षों ने यूक्रेन सहित मौजूदा घटनाक्रमों पर चर्चा की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच इस क्षेत्र में अपने सहयोग की समीक्षा की। टू प्लस टू वार्ता में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और उनके भारतीय समकक्षों एस जयशंकर और राजनाथ सिंह ने भाग लिया। जयशंकर ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा, हमने अपने विदेश और रक्षा समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। हमें निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन की डिजिटल बैठक के माध्यम से प्राप्त मार्गदर्शन से लाभ हुआ है, जिसमें हम सभी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि टू प्लस टू वार्ता प्रारूप का उद्देश्य भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए एकीकृत दृष्टिकोण को और बढ़ावा देना है।

Published / 2022-04-11 14:13:32
शहबाज शरीफ को संसद ने चुना पाक का नया पीएम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के सियासी संकट के बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ को सोमवार को संसद ने निर्विरोध रूप से पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री चुन लिया। इससे पहले प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के शाह महमूद कुरैशी ने घोषणा की कि वह मतदान का बहिष्कार करेंगे और सदन से बहिर्गमन कर गए। नेशनल असेंबली में कुरैशी के चुनाव के बहिष्कार के बाद शहबाज (70) इस पद के लिये एक मात्र दावेदार बचे थे। इससे पहले राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा था कि वे अपने इस्तीफा नहीं देंगे। इमरान खान को शनिवार देर रात अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया था। अल्वी ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेतृत्व से सलाह मशविरा करने के बाद इस्तीफा नहीं देने का फैसला किया। खबर के अनुसार, राष्ट्रपति को अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन जारी रखने की सलाह दी गई है। इसके अनुसार, यदि विपक्ष के नेतृत्व वाली नई संघीय सरकार राष्ट्रपति को हटाने के लिए संवैधानिक मार्ग अपनाती है, तो पार्टी परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेगी। इस्तीफे के कारण पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसदों की स्थिति पर अनिश्चितता के बीच नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए पाकिस्तान नेशनल असेंबली का अहम सत्र सोमवार को शुरू हो गया। विपक्षी उम्मीदवार और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के उपाध्यक्ष तथा पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी नया प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में हैं। इमरान खान के उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए नेशनल असेंबली का अहम सत्र शुरू होने के कुछ मिनट बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी संसद में नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए मतदान का बहिष्कार करेगी। पूर्व विदेश मंत्री कुरैशी ने सदन में कहा कि देश के सामने दो रास्ते हैं- एक रास्ता आत्म सम्मान का है तो दूसरा गुलामी का। कुरैशी ने उन्हें नामित करके उन पर भरोसा करने के लिए इमरान खान की सराहना की और कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया आज समाप्त हो जाएगी क्योंकि कुछ को विजेता घोषित किया जाएगा, जबकि दूसरे को आजाद घोषित किया जाएगा। खान को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष ने 174 वोट जुटाए थे। अगर विपक्ष इतनी संख्या जुटा लेता है तो 70 वर्षीय शहबाज पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री होंगे। दोनों पक्षों ने चुनाव सुधारों पर चर्चा की और जनहित में मिलकर काम करने का संकल्प लिया। इससे पूर्व नामांकन दाखिल करने से पहले शहबाज ने उन सभी का विशेष आभार जताया जो संविधान के पक्ष में खड़े रहे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थकों ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री एवं पार्टी अध्यक्ष इमरान खान को सत्ता से बाहर करने के खिलाफ लाहौर के लिबर्टी चौक पर रोष रैली निकाली। पीटीआई के समर्थकों की यह रैली रविवार को रात नौ बजे शुरू हुई और सोमवार तड़के तीन बजे तक चली। रैली के दौरान महिलाओं और बच्चों समेत कई समर्थकों ने खान के साथ एकजुटता दिखाई। पाकिस्तान में प्रधानमंत्री पद के लिये विपक्ष के साझा उम्मीदवार शहबाज शरीफ के बेटे हमजा शहबाज सोमवार को धनशोधन मामले में विशेष अदालत के समक्ष पेश हो सकते हैं।

Published / 2022-04-10 16:24:56
अब पाकिस्तान के रास्ते भारत के खिलाफ साजिश रच रहा चीन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन ने अब हिंद महासागर में भारत को घेरने की बड़ी साजिश रची है। एक विदेशी मीडिया रिपोर्ट में इस बात की ओर इशारा किया गया है। वैसे तो चीन इस इलाके में अफ्रीका तक अपना जाल बिछाता जा रहा है, लेकिन भारत के नजरिए से पाकिस्तान के साथ मिलकर वह जिस तरह से रणनीतिक गुल खिला रहा है, वह बहुत ही खतरनाक है और भविष्य में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में जुटा हुआ है। एक समय पाकिस्तान इस मामले में अमेरिका का पिछलग्गू बना हुआ था, लेकिन आज चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ अपना मंसूबा कामयाब करना चाह रहा है। चीन की विदेश नीति एक संशोधनवादी मार्क्सवादी और बदला लेने वाले देश की रही है। अब उसने अपनी नजरें हिंद महासागर क्षेत्र पर अटका दी हैं, जिनमें पूर्वी अफ्रीकी देश भी शामिल हैं। पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन अब उन देशों में भी मिलिट्री बेस बनाने की कोशिशों में है, जिनके साथ उसके लंबे वक्त से अच्छे ताल्लुकात हैं और रणनीतिक तौर पर उनके हित भी सामान्य तरह के हैं। लेकिन, भारत के लिहाज से बड़ी बात ये है कि इसमें एशियाई देशों में पाकिस्तान भी हो सकता है। डेली सिख की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में चीन के पसंदीदा ठिकानों में केन्या, मोजांबिक और तंजानिया भी शामिल हैं। पाकिस्तान के रणनीतिक विचारक मूलरूप से चीन के भरोसे ही पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिकीकरण की उम्मीद करते आए हैं। इसके अलावा भारत के मुकाबले अपने सैन्य सामर्थ्य को पुख्ता रखने के लिए वे भी हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की आर्थिक और राजनीतिक मंसूबों की हिफाजत करने की रणनीति को भी अपनी नीति का हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए पाकिस्तानी नौसेना की भविष्य की भूमिका भी हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-भारत को बराबरी के मुकाबले को प्राप्त कराने पर आधारित है। डेली सिख की रिपोर्ट के मुताबिक यह पाकिस्तान के बाहरी रणनीतिक लाभार्थियों को खुश कर के अल्पकालिक फायदा उठाने वाली परंपरा पर आधारित है। पहले उसके साथ अमेरिका था और अब चीन है। चीन के रक्षा मंत्री वी फेंघे ने पाकिस्तानी नौसेना के चीफ अब्बास रजा के साथ मुलाकात (अप्रैल, 2019) में चीन-पाकिस्तान रक्षा और सुरक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ करार दिया था। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग बीते वर्षों में काफी बढ़ा है। अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी नौसेना की ताकत बढ़ी है और चीन से एडवांस जंगी जहाजों की डिलिवरी हो जाने के बाद इसमें और भी इजाफा हो जाएगा। चीन की राजनीतिक और आर्थिक सहायता के दम पर पाकिस्तानी नौसेना का विस्तार हो रहा है और यह बाबर जैसे क्रूज मिसाइल हासिल कर रहा है, जो कि चीन के सी 862 मिसाइल का नमूना है। हड़प्पा और जराबू जैसी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें भी हैं, जो की चीनी डिजाइन पर ही आधारित हैं। पाकिस्तानी नौसेना को चीन की मदद के विश्लेषण से ड्रैगन का जो इरादा जाहिर हो रहा है, उसमें कई महत्वपूर्ण चीजें हैं। उसके वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री कनेक्टिविटी, साउथ चाइना सी के लिए बायपास तैयार करना, अफ्रीकी महादेश तक पहुंचने के लिए छोटा रास्ता मिलना, ताकि मलक्का जल संधि का उसका झंझट हमेशा के लिए दूर हो जाए आदि शामिल हैं। यही नहीं सीपीईसी के चालू होने के बाद वह पाकिस्तानी नौसेना का इस्तेमाल हिंद महासागर क्षेत्र में अपने हितों के लिए करना चाहता है, जिसके जरिए वह इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के प्रभाव को कंट्रोल कर सके।

Published / 2022-04-10 16:20:52
सरकार गिरते ही इमरान ने शुरू किया नया संग्राम, कहा- जनता करेगी लोकतंत्र की रक्षा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री की कुर्सी अपने पास रखने के लिए इमरान खान ने दर्जनों हथकंडे अपनाए, लेकिन शनिवार देर रात बहुमत सिद्ध नहीं होने की वजह से उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद भी इमरान ने हार नहीं मानी है। रविवार को उन्होंने इस्लामाबाद में अपनी पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में हिस्सा लिया। जहां आगे की रणनीति तैयार की गई। अब वो लोगों से दोबारा स्वतंत्रता संग्राम शुरू करने की अपील कर रहे हैं। इमरान ने ट्वीट कर लिखा कि 1947 में पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बना, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम आज फिर से सत्ता परिवर्तन की एक विदेशी साजिश के खिलाफ शुरू होता है। हमेशा देश के लोग ही अपनी संप्रभुता और लोकतंत्र की रक्षा करते हैं। इसके अलावा इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने नेशनल असेंबली में सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक जब शाहबाज शरीफ का शपथ ग्रहण हो जाएगा, तो उनकी पार्टी के सदस्य इस्तीफा देना शुरू करेंगे। इमरान खान के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था, जिसको 174 वोट मिले। सरकार गिराने के लिए इमरान अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के इशारे पर ही ये अविश्वास प्रस्ताव आया है। इसके पीछे की वजह उनकी रूस यात्रा भी थी, जिससे अमेरिका चिढ़ा हुआ था। उन्होंने खुद के पास विदेशी साजिश के सबूत होने का भी दावा किया। वहीं अमेरिका ने भी अब इमरान के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। वाशिंगटन ने कहा कि उनके अधिकारी पाकिस्तान के हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। इमरान खान का आरोप बेबुनियाद है। उनका ये कहना भी गलत है कि मास्को की यात्रा की वजह से अमेरिका ने उनकी सरकार गिरवाई है।

Published / 2022-04-10 14:11:24
कौन हैं शाहबाज शरीफ?...जो इमरान के बाद बन रहे पाक के पीएम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान में कई दिनों तक चले सियासी ड्रामे के बाद शनिवार देर रात आखिरकार इमरान खान सरकार को अविश्वास प्रस्ताव में हार का सामना करने के बाद सत्ता से बाहर होना पड़ा है। पाकिस्तान के नेशनल एसेंबली में विपक्ष के लाए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 174 वोट पड़े। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। शाहबाज शरीफ का नाम बतौर पीएम विपक्ष ने इमरान खान की सरकार को गिराने से पहले ही घोषित कर दिया था। पाकिस्तान में आज तक कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। ऐसे में इमरान खान पाकिस्तान के इतिहास में पहले ऐसे प्रधानमंत्री भी बन गए हैं जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर का दरवाजा दिखाया गया है। कौन हैं शाहबाज शरीफ : 70 वर्षीय शहबाज शरीफ पाकिस्तान करे तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। वे एक कुशल प्रशासक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खासकर वे जब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने अपने शासन की शैली को दिखाया। पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शहबाज शरीफ ने कई बुनियादी ढांचो वाली मेगा-परियोजनाओं पर काम किया। नवाज शरीफ से इतर शहबाज शरीफ को पाकिस्तान में सेना के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि उनका भारत के प्रति रूख भी अधिक सकारात्मक है। शाहबाज शरीफ 13 अगस्त 2018 से पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के सदस्य हैं। शाहबाज सबसे ज्यादा लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। वे फिलहाल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) पार्टी के अध्यक्ष हैं। यह पार्टी इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (PTI) के बाद नेशनल असेंबली में फिलहाल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। भारत से नाता : शाहबाद शरीफ का जन्म लाहौर में बड़े कारोबारी घराने में 23 सितंबर 1951 को हुआ। उन्होंने लाहौर की एक सरकारी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और परिवार के बिजनेस को संभाला। उनके पिता मुहम्मद शरीफ एक कारोबारी थे। वे कारोबार के सिलसिले में अक्सर कश्मीर के अनंतनाग आया-जाया करते थे। बाद में उनका परिवार अमृतसर में बस गया। साल 1947 में बंटवारे के बाद परिवार लाहौर जाकर बस गया। शाहबाज शरीफ की मां पुलवामा की रहने वाली थीं। 1997 में पहली बार बने मुख्यमंत्री : परिवार का बिजनेस संभालते हुए शाहबाज ने 1980 के दशक में पंजाब में राजनीति में प्रवेश किया। साल 1997 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। 1999 में पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट के बाद शाहबाज शरीफ को परिवार सहित देश छोड़ सऊदी अरब जाना पड़ा। वह साल 2007 में फिर पाकिस्तान लौटे और 2008 में फिर पंजाब के मुख्यमंत्री बने। नवाज शरीफ का 2017 में पनामा पेपर्स के खुलासे में नाम आया है। इसके बाद शाहबाज शरीफ को PML-N पार्टी का प्रमुख बनाया गया और वे इस तरह राष्ट्रीय राजनीति में उतरे। साल 2018 के चुनाव में इमरान के PTI की जीत हुई और शाहबाद नेता विपक्ष बने। साल 2020 में शाहबाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार भी किया गया। हालांकि पिछले साल अप्रैल में लाहौर हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। कुल मिलाकर नवाज शरीफ और शाहबाज दोनों भाइयों को भ्रष्टाचार के कई मामले हैं पर शाहबाज को किसी भी आरोप में दोषी नहीं पाया गया है।

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