एबीएन सेंट्रल डेस्क। क्यूबा की राजधानी हवाना के मध्य में एक आलीशान होटल में प्राकृतिक गैस के रिसाव के कारण हुए शक्तिशाली विस्फोट में एक बच्चे सहित कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य घायल हो गए। हवाना के गवर्नर रेनाल्डो गार्सिया जापाटा ने कम्युनिस्ट पार्टी के समाचार पत्र "ग्रैनमा" को बताया कि विस्फोट के समय 96 कमरों वाले साराटोगा होटल में कोई पर्यटक नहीं था, क्योंकि वहां मुरम्मत का काम चल रहा था। घटनास्थल का दौरा करने वाले राष्ट्रपति मिगुएल डिआज-कैनेल ने ट्वीट किया, यह कोई बम विस्फोट या हमला नहीं है। यह एक दुखद हादसा है। स्वास्थ्य मंत्रालय में अस्पताल सेवाओं के प्रमुख डॉ जूलियो गुएरा इजक्विएर्डो ने संवाददाताओं को बताया कि शुक्रवार को हुए इस हादसे में कम से कम 74 लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के एक ट्वीट के अनुसार, घायलों में 14 बच्चे शामिल हैं। डिआज-कैनेल ने बताया कि विस्फोट से प्रभावित होटल के पास की इमारतों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। क्यूबा के सरकारी टीवी चैनल के मुताबिक, विस्फोट एक ट्रक के कारण हुआ, जो होटल को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति कर रहा था। हालांकि, चैनल ने यह नहीं बताया कि गैस कैसे प्रज्वलित हुई। हादसे से जुड़े वीडियो में अग्निशमन कर्मियों को एक सफेद टैंकर ट्रक पर पानी का छिड़काव करते और उसे घटनास्थल से हटाते देखा जा सकता है। वीडियो में यह भी नजर आ रहा है कि विस्फोट से होटल के चारों तरफ धुएं का गुबार फैल गया। इसमें घबराए-सहमे लोग सड़क पर भागते दिखाई दे रहे हैं। यह दुर्घटना ऐसे समय में हुई है, जब क्यूबा कोरोना वायरस महामारी से तबाह हो चुके अपने पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। क्यूबा के स्वास्थ्य मंत्री जोस एंजेल पोर्टल ने द एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को बताया कि घायलों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि ओल्ड हवाना स्थित 19वीं सदी के इस होटल के मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है। दमकल विभाग के लेफ्टिनेंट कर्नल नोएल सिल्वा ने कहा, हम अब भी मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। होटल के बगल में स्थित 300 छात्रों वाले एक स्कूल को खाली करा लिया गया। गार्सिया ने कहा कि हादसे में पांच छात्रों को मामूली चोटें आई हैं। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है। होटल को पहली बार 2005 में क्यूबा सरकार के ओल्ड हवाना के पुनरुद्धार कार्यक्रम के तहत पुनर्निर्मित किया गया था। इसका स्वामित्व क्यूबा की सेना की पर्यटन व्यवसाय शाखा ग्रुपो डी टूरिज्मो गेविओटा एसए के पास है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका वित्तीय और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। साल 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से इस वक्त सबसे खराब आर्थिक स्थिति का सामना कर रहे इस देश में महंगाई के कारण बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। श्रीलंका की इस प्रकार की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई, साथ ही इससे भारत को क्या सबक लेनी चाहिए। इस गंभीर विषय पर एक्सएलआरआइ जमशेदपुर में एक्सपीजीडीएम डिपार्टमेंट की ओर से एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। इसमें पैनलिस्ट सदस्यों में राहुल बाजोरिया (एमडी बाकर्लेज कॉरपोरेट एंड इन्वेस्टमेंट बैंक), अंकुर शुक्ला (दक्षिण एशिया अर्थशास्त्री, ब्लूमबर्ग एलपी) आयुषी चौधरी (भारत और श्रीलंका अर्थशास्त्री, एचएसबीसी) और एक्सएलआरआइ के प्रोफेसर सह अर्थशास्त्री प्रो एचके प्रधान शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत एक्सएलआरआइ के प्रोफेसर अब्दुल कादिर के उद्घाटन भाषण से हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान और फिलीपींस में देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। लोग डर कर अपने घरों से बाहर सड़कों पर आ गए। अभी तक दोनों देशों में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। पाकिस्तान में 5.1 तीव्रता के भूकंप के झटके : पाकिस्तान में बसे शहर दलबंदिन से 49 किलोमीटर दक्षिण की ओर शुक्रवार रात करीब पौने एक बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.1 मापी गई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसकी जानकारी दी है। भूकंप का केंद्र 28.4517 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 64.3204 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 10.0 किमी की गहराई पर देखा गया। फिलीपींस में भी भूकंप : फिलीपींस में बोबोन नामक क्षेत्र से 77 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व की ओर शुक्रवार रात करीब बारह बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.3 मापी गई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसकी जानकारी दी है। भूकंप का केंद्र 28.4517 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 64.3204 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 68.27 किमी की गहराई पर देखा गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग के 70 दिन से अधिक बीत चुके हैं। यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में रूस को कब्जा करने बड़ी सफलता मिली है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में घुसने के लिए सेना को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में मात खाने के बाद रूस ने अब अपना अपनी गेमप्लान ही बदल दिया है। रणनीति में बदलाव करते हुए रूस पश्चिमी यूक्रेन के हिस्सों पर कब्जा जमाने की बजाय पूर्वी क्षेत्र के जिन इलाकों को कंट्रोल कर लिया गया है, उन पर पूरी तरह से पॉलिटिकल और मिलिट्री कंट्रोल स्थापित की तैयारी में जुट गया। रूस की कोशिश है कि जिन यूक्रेनी शहरों पर उसका कब्जा है वहां अब स्थानीय प्रशासन में अपने लोगों को स्थापित करे और स्थानीय लोगों से ट्रांजेक्शन में रूबल का इस्तेमाल करने का दबाव बनाया जाए। रूस की यह पॉलिसी ठीक वैसी ही पॉलिसी होगी, जैसी उसने 2014 में क्रीमिया को शामिल करते वक्त अपनाई थी।ब्रिटेन की सेना का कहना है कि रूस पूर्वी यूक्रेन के क्रामातोर्स्क और सेवेरोदोनेत्स्क शहरों पर कब्जा करने की कोशिश करेगा। ब्रिटिश सेना ने बुधवार को युद्ध के बारे में ट्विटर पर दैनिक ब्रीफिंग में यह टिप्पणी की। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रूस ने क्षेत्र में बढ़त बनाने की कोशिशों के तहत इजियम के निकट लगभग 22 बटालियन सामरिक समूहों को तैनात कर रखा है। रूस के तथाकथित बटालियन सामरिक समूह में पैदल सेना की इकाइयां शामिल हैं, जो टैंक, हवाई रक्षा उपकरणों और तोपों से लैस हैं। प्रत्येक इकाई में लगभग 800 सैनिक हैं। ब्रिटिश सेना ने कहा, यूक्रेन के रक्षा चक्र को भेदने में संघर्ष करने के बजाय रूस के इजियम की ओर बढ़ने की प्रबल संभावना है ताकि वह क्रामातोर्स्क और सेवेरोदोनेत्स्क शहरों पर कब्जा कर सके। हजारों यूक्रेनी शरणार्थी मेक्सिको सिटी में डेरा डालकर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लगभग 500 शरणार्थी मेक्सिको की राजधानी के पूर्वी हिस्से में एक स्थान पर मंगलवार को शिविरों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यह शिविर एक सप्ताह के लिये खुले हैं। हर दिन 50-100 लोग यहां आ रहे हैं। अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने संसद को बताया है कि यूक्रेन में युद्ध के पहले दो महीने के दौरान अमेरिका को रूस की सैन्य खामियों और क्षमता के बारे में बहुत सी जानकारी प्राप्त हुई है। पेंटागन के अधिकारियों ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है, रूस अपनी गलतियों से सीख रहा है। रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने मंगलवार को संसद की एक समिति को बताया कि अगर संसद की ओर से धनराशि को मंजूरी दी जाती है तो यूक्रेन को टैंक-रोधी, विमान-रोधी और कंधे पर रखकर दागे जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें जैसे अहम हथियार मुहैया कराए जा सकते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का कहना है कि यूक्रेन में युद्ध ने पश्चिमी गोलार्ध में कोरोना वायरस महामारी के कारण बढ़ती गरीबी जैसी समस्याओं को और बदतर कर दिया है। वाशिंगटन में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने कई समस्याओं को बदतर बना दिया है। इनमें पूरे अमेरिका में उर्वरक से लेकर गेहूं, पेट्रोलियम जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने जैसी समस्याएं शामिल हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने अफगानिस्तान के शहर मजार-ए-शरीफ में दोहरे विस्फोटों की जिम्मेदारी ली है। इन विस्फोटों में नौ लोग मारे गये और 13 अन्य घायल हो गये। समाचार एजेंसी एएफपी ने शुक्रवार को बताया कि आईएस की इस्लामिक स्टेट- खुरासान प्रांत शाखा ने हमले की जिम्मेदारी ली है। वह वर्ष 2015 से अफगानिस्तान और पड़ोसी देश पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। समूह ने इससे पहले भी कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। गौरतलब है कि बल्ख प्रांत के मजार-ए-शरीफ में गुरुवार को दो विस्फोट हुए, जिसमें कम से कम नौ लोग मारे गये और 13 अन्य घायल हो गये। पहला धमाका एक शैक्षणिक संस्थान के पास किया गया, जबकि दूसरा विस्फोट एक वाहन में किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका के राष्ट्रपति देश में दशकों के सबसे बड़े आर्थिक संकट के चलते पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध का हल निकालने के लिए प्रस्तावित अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री के तौर पर अपने भाई की जगह किसी अन्य नेता को नियुक्त करने को राजी हो गये हैं। एक प्रमुख सांसद ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सांसद मैत्रीपाला सिरीसेना ने राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद कहा कि गोटबाया राजपक्षे इस बात से सहमत हुए हैं कि एक नये प्रधानमंत्री को नामित करने और संसद में सभी दलों के प्रतिनिधित्व वाले मंत्रिमंडल का गठन करने के लिये राष्ट्रीय परिषद की नियुक्ति की जाएगी। इस बीच, गोटबाया ने राजनीतिक दलों से अंतरिम सरकार के लिए बहुमत का आंकड़ा प्रस्तुत करने को कहा। सिरीसेना, राजपक्षे से पहले राष्ट्रपति थे। वह इस महीने की शुरूआत में करीब 40 अन्य सांसदों के साथ दलबदल करने से पहले सत्तारूढ़ दल के सांसद थे। हालांकि, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के प्रवक्ता रोहन वेलीविता ने कहा कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को हटाने के किसी इरादे से अवगत नहीं कराया है और यदि ऐसा कदम उठाया जाता है उस बारे में फैसले की घोषणा की जाएगी। इससे पहले, महिंदा राजपक्षे ने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया था और प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिश के तहत एक मिलीजुली सरकार गठित करने का प्रस्ताव दिया था। दोनों राजपक्षे बंधु, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पर अपने-अपने पदों पर काबिज हैं जबकि उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों ने अप्रैल की शुरूआत में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, जो गुस्साये प्रदर्शनकारियों को शांत करने की एक कोशिश प्रतीत होती है। इस बीच, राष्ट्रपति ने (अपने) सत्तारूढ़ एसएलपीपी गठबंधन के असंतुष्ट सांसदों के समूह को अभूतपूर्व आर्थिक संकट से निपटने के लिए एक अंतरिम सरकार के गठन के वास्ते उनके प्रस्ताव पर विपक्षी दलों से वार्ता शुरू करने को कहा। सिरीसेना के एसएलएफपी का एक प्रतिनिधिमंडल अंतरिम सरकार गठित करने की अपनी मांग पर जोर देने के लिए सुबह में राष्ट्रपति से मिला। बाद में, राष्ट्रपति ने सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग हो चुके एक अन्य असंतुष्ट खेमे के साथ बातचीत की। राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि राजनीतिक दल पांच सदस्यीय एक समिति गठित करने के लिए राजी हुए हैं, जो मुख्य विपक्षी एसजेबी और अन्य विपक्षी दलों से बातचीत करेगी। राष्ट्रपति ने अंतरिम सरकार बनाने के लिए उनसे 225 सदस्यीय संसद में 113 सांसदों का समर्थन जुटा कर अपना बहुमत दिखाने को कहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दक्षिण-पूर्वी नाइजीरिया की एक अवैध तेल रिफाइनरी में धमाका होने से 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। बताया जा रहा है कि धमाके से लगी आग आसपास की संपत्तियों तक फैल गई है। आइमो के राज्य सूचना आयुक्त डेक्लान एमेलुम्बा ने बताया कि शुक्रवार रात आग लगी तेजी से दो अवैध ईंधन भंडार तक फैल गई। उन्होंने कहा कि धमाके की वजह और मृतकों की सटीक संख्या का पता लगाया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में लोगों का 100 फीसदी वैक्सीनेशन के बावजूद कोरोना महामारी अपना प्रकोप दिखा रही है। चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में बढ़ते कोरोना मामलों ने तो पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। कोविड के चलते शंघाई में पिछले एक महीने से लॉकडाउन चल रहा है और करोड़ों लोग घरों में कैद हैं। सड़कों से ट्रैफिक नदारद है, सिर्फ पुलिस-प्रशासन और जरूरी सेवाओं में लगे लोगों को ही बाहर निकलने की इजाजत है। इसी कारण पूरे शंघाई में आर्थिक गतिविधियां भी पूरी तरह से बंद हो गई हैं लॉकडाउन का सबसे बुरा असर शंघाई बंदरगाह पर देखने को मिल रहा है। यहां बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज खड़े होने के कारण पूर्वी चीन सागर में अघोषित ट्रैफिक जाम लग गया है।कोरोना के कारण शंघाई प्रशासन ने बाहरी लोगों के शहर में आने पर रोक लगा रखी है। शहर के लोगों को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। पूरे शहर में बड़े पैमाने पर लोगों की टेस्टिंग की जा रही है। इतना ही नहीं, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के जरिए क्वारंटीन क्षेत्रों की निगरानी किया जा रहा है।बंदरगाह से कई किलोमीटर दूर खुले समुद्र में भी जहाज खड़े नजर आ रहे हैं। माल उतारने और चढ़ाने की इजाजत न होने के कारण जहाज के क्रू भी खुले समुद्र में फंसे हुए हैं। कई जहाजों पर तो खाने-पीने और दैनिक जरूरतों की चीजों की भी कमी होने लगी है। इसके बावजूद चीन अपने सख्त नियमों में बिलकुल भी ढील देने को तैयार नहीं है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन जहाजों को बंदरगाह पर आने या बंदरगाह पर खड़े जहाजों को बाहर जाने की इजाजत कब दी जाएगी। बाहर निकलने वाले लोगों को ड्रोन और हेलीकॉप्टरों पर लगे स्पीकरों के जरिए चेतावनी भी दी जा रही है। इतना ही नहीं, अगर किसी इलाके में ज्यादा लोगों की मौजूदगी का पता चलता है को वहां स्थानीय पुलिस को तुरंत भेजा जा रहा है।सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीरों में शंघाई बंदरगाह पर जहाजों की उपस्थिति को दिखाया जा रहा है। इस कारण पूरा बंदरगाह मालवाहक जहाजों की बढ़ती संख्या से भर गया है।बता दें कि मार्च के महीने से चीन में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज उछाल आया है जिसके बाद देश के केई शहरों में लॉकडाउन लगाना पड़ा है। इनमें शंघाई भी शामिल है जिसे चीन का वित्तीय, मैन्युफैक्चरिंग और शिपिंग हब माना जाता है। चीन की अर्थव्यवस्था के बारे में आए नए आंकड़ों से पता चलता है कि वहां पिछले महीने कोरोना की नई लहर के बाद लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से लोगों के खर्चों में कमी आई है और बेरोजगारी महामारी के शुरूआती दौर के बाद से अपने चरम पर पहुंच गई है।
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