एबीएन डेस्क। अमेरिका ने संभवत: पनडुब्बी से किए उत्तर कोरिया के हालिया बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बुधवार को आपात बैठक बुलाई है। सुरक्षा परिषद की क्रमवार मिलने वाली अध्यक्षता के तहत अमेरिका इस महीने इसका अध्यक्ष है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन के एक प्रवक्ता ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि उत्तर कोरिया के परीक्षणों को लेकर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई गई है। बैठक बुधवार को किए गए जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया ने संभवत: पनडुब्बी से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल का शनिवार को परीक्षण किया था। इस हफ्ते में यह उत्तर कोरिया का दूसरा परीक्षण है तथा इससे संकेत मिलते हैं कि वह आने वाले समय में और परमाणु परीक्षण कर सकता है। सिन्पो शहर के पूर्वी बंदरगाह के समीप समुद्र से यह परीक्षण किया गया, जहां उत्तर कोरिया का पनडुब्बियों का निर्माण करने वाला एक बड़ा शिपयार्ड है। यह ताजा परीक्षण उत्तर कोरिया का इस साल का 15वां मिसाइल परीक्षण है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका में सोमवार को पीएम महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद भारी हिंसा भड़क उठी। इसमें सत्ता पक्ष के सांसद अमरकीर्ति अथुकोराला ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। हालिया सप्ताहों की इस जबर्दस्त हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा घायल हो गए। पूरे श्रीलंका में बुधवार तक कर्फ्यू लगा दिया गया है, इसके बावजूद तनाव कायम है, क्योंकि भारी आर्थिक संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। देश भारी आर्थिक व राजनीतिक संकट में फंस गया है। विपक्ष का आरोप है कि देश का सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार इस संकट का जिम्मेदार है। श्रीलंका में संकट से राजपक्षे परिवार की छवि बुरी तरह धूमिल हुई है। पीएम के अलावा उनके भाई राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के भी इस्तीफे की मांग उठ रही है। कोलंबो में सेना तैनात : सोमवार को हुई जबर्दस्त हिंसा के बाद से पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है, आपातकाल पहले ही लगाया जा चुका है। राजधानी कोलंबो में हिंसा पर काबू करने के लिए सेना को तैनात किया गया है। ताजा हालात एक नजर में : • पीएम महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद अब देश में सर्वदलीय अंतरिम सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को महिंदा ने पद छोड़ने के साथ ही जनता से संयम बरतने की अपील की थी। • पीएम के इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों की प्रदर्शनकारियों से झड़प शुरू हो गई। कोलंबो में कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ भी भिड़ंत हुई। हिंसा में सत्तारूढ़ पार्टी एसएलपी के सांसद अमरकीर्ति समेत पांच लोग मारे गए। संघर्ष में 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। • हंबनटोटा में राजपक्षे परिवार के पैतृक घर में आग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो के टेंपल ट्रीज के पास पीएम आवास पर भी धावा बोलने की कोशिश की। • श्रीलंका में लोगों की मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। दूध से लेकर ईंधन तक नहीं मिल रहा है। खाद्यान्न की भारी कमी और बिजली कटौती से बुरा हाल है। • अमेरिका ने कहा है कि श्रीलंका के हालात पर हमारी पूरी नजर है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा चिंताजनक है। • राष्ट्रपति राजपक्षे ने एक बयान जारी कर संसद में सभी दलों को एक राष्ट्रीय सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। • श्रीलंका पर अरबों डॉलर का कर्ज है। बेशुमार महंगाई हो रही है। लोगों का जीना मुहाल है। • विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि सरकार प्रायोजित हिंसा के खिलाफ खुद का बचाव करने में हम सक्षम हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम दया में भी सक्षम हैं। आने वाली पीढ़ियां देख रही हैं कि हम अपना आक्रोश जताने का कौनसा तरीका चुनते हैं। अहिंसा ही श्रेष्ठ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक खबर के मुताबिक चीन सरकार ने अपनी एजेंसियों और सरकारी उद्यमों को विदेशी ब्रांड के तमाम पर्सनल कंप्यूटरों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है। उनकी जगह देश में बने कंप्यूटरों का इस्तेमाल शुरू करने को कहा गया है। इस कदम के पीछे मकसद संवेदनशील जगहों पर विदेशी टेक्नोलॉजी की पहुंच खत्म करना है। बताया जाता है कि तमाम एजेंसियों और उद्यमों को यह काम दो साल के अंदर पूरा करने को कहा गया है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक इस फैसले के कारण सिर्फ चीन सरकार के दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले पांच करोड़ कंप्यूटर बदले जाएंगे। इस खबर के मुताबिक चीन सरकार ने काफी समय पहले विदेशी ब्रांडों की जगह देश में विकसित कंप्यूटरों का इस्तेमाल करने का मन बनाया था। लेकिन ये काम धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। लेकिन अब अमेरिका से बढ़ रहे टकराव को देखते हुए चीन सरकार ने इसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया है। चीन सरकार का मकसद यह है कि अमेरिकी चिप, सर्वर और फोन पर उसकी निर्भरता को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए। एचपी और डेल पर गिरी गाज : कैनालिस नाम की एक एजेंसी के मुताबिक चीन में पर्सनल कंप्यूटर के सबसे प्रचलित ब्रांड एचपी और डेल टेक्नोलॉजीज हैं। उनके बाद चीनी कंपनी लेनेवो का नंबर है। अब नई नीति के तहत एचपी और डेल के कंप्यूटर बदल दिए जाएंगे। चीन पर्सनल कंप्यूटरों (पीसी) का बड़ा निर्यातक है। 2021 में उसके इस निर्यात में नौ फीसदी की वृद्धि हुई थी। लेकिन चीन से जो कंप्यूटर निर्यात होते हैं, उनमें बड़ी संख्या अमेरिकी कंपनियों के कंप्यूटरों की होती है। इन कंपनियों की मैनुफैक्चरिंग यूनिट चीन में हैं। कैनालिस के विश्लेषक एमा शू ने लिखा है- ह्यचीन के पीसी बाजार में बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। लेकिन 2021 में जो वृद्धि दर दर्ज हुई, उससे इस पर रोशनी पड़ी कि यहां कंपनियों के लिए कितने बड़े अवसर उपलब्ध हैं। सरकार के भीतर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसलिए स्थानीय ब्रांड के कंप्यूटरों की खरीदारी का चलन बढ़ा है। इस वजह से एचपी और डेल जैसी अमेरिकी कंपनियों को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इंटेल और एमएमडी पर भरोसा! : ब्लूमबर्ग के मुताबिक चीन सरकार ने जो ताजा आदेश जारी किया है, उसके तहत पीसी ब्रांड्स और सॉफ्टवेयर्स को शामिल किया गया है। लेकिन इंटेल और एमएमडी जैसी कंपनियों के उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। बताया जाता है कि इन कंपनियों की तकनीक का विकल्प अभी चीन के पास नहीं है। वेबसाइट यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में सूचना तकनीक (आईटी) संबंधी देसी उत्पादों को खरीदने की नीति के कारण माइक्रोसॉफ्ट और एचपी जैसी अमेरिकी कंपनियों ने चीन की सरकारी कंपनियों के साथ साझा उद्यम बनाने की नीति अपनाई है, ताकि उन्हें सरकारी खरीद के आॅर्डर मिलते रहें। इसके बावजूद समझा जाता है कि ताजा सरकारी नीति का लाभ लेनेवो, हुवावे, और इंस्पुर जैसी चीनी कंपनियों को मिलेगा। संभावना है की किंगसॉफ्ट और स्टैंडर्ड सॉफ्टवेयर जैसी सॉफ्टवेयर क्षेत्र की चीनी कंपनियां अब माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी अमेरिकी कंपनियों के बाजार का बड़ा हिस्सा हड़प लेंगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने स्थानीय मीडिया के हवाले से दी है। इससे थोड़ी देर पहले खबर आई थी कि महिंदा राजपक्षे के समर्थकों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है, जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। प्रदर्शनकारी उनके आधिकारिक आवास के बाहर जुटे थे और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। स्थिति को काबू में करने के लिए सेना की तैनाती की गई। सरकार पर आर्थिक संकट से निपटने के लिए अंतरिम प्रशासन बनाने का दबाव है। भीषण विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच महिंदा राजपक्षे ने ट्वीट कर कहा, भावनाएं उबाल पर हैं। मैं आम लोगों से संयम बरतने और यह याद रखने का आग्रह करता हूं कि हिंसा से केवल हिंसा उत्पन्न होती है। जिस आर्थिक संकट से हम जूझ रहे हैं, उसे एक ऐसे आर्थिक समाधान की जरूरत है जिसे हल करने के लिए यह प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपने घर के बाहर इकट्ठा हुए समर्थकों से ये भी कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता। महिंदा ने कहा, ह्यमुझे विरोध और आंदोलन देखने की इतनी आदत हो गई है कि मुझे कोई भी नहीं रोक सकता। मैं किसी भी स्थिति का सामना करने का काफी अनुभव रखता हूं।एक महीने के भीतर दो बार लगा आपातकाल : इससे पहले शुक्रवार को एक विशेष कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति राजपक्षे ने शुक्रवार मध्य रात्रि से आपातकाल की घोषणा कर दी थी। यह दूसरी बार है जब श्रीलंका में लगभग एक महीने की अवधि में आपातकाल घोषित किया गया। साल 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। यह संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ है, जिसका मतलब है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है। नौ अप्रैल से पूरे श्रीलंका में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं, क्योंकि सरकार के पास आयात के लिए धनराशि खत्म हो गई है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। लोगों को इसकी वजह से तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हें घंटों बिजली कटौती से भी जूझना पड़ रहा है। उन्होंने इस संकट के लिए परिवारवाद को जिम्मेदार ठहराया है। यहां सरकार पर राजपक्षे परिवार का दबदबा रहा है। बढ़ते दबाव के बावजूद राष्ट्रपति राजपक्षे और उनके भाई एवं प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। फिलहाल महिंदा राजपक्षे के इस्तीफा देने की खबर आई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन से जंग के बीच रूस अपना 77वां विजय दिवस मना रहा है। इसी दिन रूस ने द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की घोषणा की थी। सोमवार को 77वें विजय दिवस को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में रूस की कार्रवाई की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई सोवियत लड़ाई से की। उन्होंने कहा, यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाई पश्चिमी देशों की नीतियों के खिलाफ सही समय पर दिया गया उचित जवाब है। रूस, यूक्रेन में अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हर वह चीज करें जिससे दुनिया में युद्ध फिर दोबारा न हो। अपने भाषण में पुतिन ने कहा, नाटो हमारी सीमा पर रूस के लिए खतरा पैदा कर रहा है। यूक्रेन में रूसी सैनिक पूरी तरह से अस्वीकार्य खतरे का सामना कर रहे हैं। हम अपनी जमीन के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, यूक्रेन परमाणु हथियारों की ओर बढ़ रहा है। हमने प्रण किया है कि रूस हिटलर की तरह यूक्रेन को भी जंग में पराजित कर देगा। इस जंग में जीत हमारी ही होगी। इस दौरान यूक्रेन जंग में मारे गए रूसी सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। रूस में विजय दिवस के मद्देनजर शहरों की सड़कें लाल रंग के सोवियत झंडों और नारंगी-काले रंग की धारीदार सैन्य रिबन से पटी हुई हैं। ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर से जुड़े स्मारकों पर पूर्व सैनिकों के समूह पुष्पांजलि अर्पित कर रहे हैं। रूस में द्वितीय विश्व युद्ध को ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर के तौर पर जाना जाता है। रूस के लिए क्यों अहम है ये दिन : विजय दिवस यानी 1945 में नाजी जर्मनी की हार का जश्न मनाने के लिए सोमवार को होने वाले समारोह की तैयारियां पहली नजर में पिछले वर्षों की तरह ही नजर आती हैं। लेकिन इस साल माहौल बहुत अलग है, क्योंकि रूसी सैनिक एक बार फिर युद्ध लड़ रहे हैं और प्राणों की आहुति दे रहे हैं। पड़ोसी देश यूक्रेन में जारी यह युद्ध 11वें हफ्ते में प्रवेश कर गया है। रूस सरकार ने इसे नाजियों के खिलाफ युद्ध बताया है। रूस के सबसे महत्वपूर्ण अवकाश के साथ जुड़े इस गौरव और देशभक्ति को आमतौर पर सैनिकों और सैन्य उपकरणों की रेड स्क्वायर से होकर गुजरने वाली बड़ी परेड के साथ मनाया जाता है। कुछ रूसियों को डर है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस मौके का इस्तेमाल यूक्रेन पर युद्ध की घोषणा करने के लिए करेंगे, जबकि पहले वह इसे यूक्रेन में एक विशेष सैन्य अभियान कहते रहे हैं। यूक्रेन के खुफिया प्रमुख कायरिलो बुडानोव ने कहा कि मॉस्को गुप्त रूप से ऐसी योजना की तैयार कर रहा है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने एलबीसी रेडियो से कहा कि पुतिन ऐसी जमीन तैयार कर रहे हैं, जिसमें वह कह सकें कि देखो, यह नाजियों के खिलाफ युद्ध है तथा इसमें मुझे और लोगों की जरूरत है। बहरहाल, क्रेमलिन ने ऐसी किसी भी योजना से इनकार करते हुए इन खबरों को गलत और बेतुका बताया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्विटर खरीदने के बाद टेस्ला के CEO एलन मस्क लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। एलन मस्क आए दिन कोई न कोई नया ट्वीट करके लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच ही लेते हैं। अब उनके नए ट्वीट ने हलचल मचा दी है। मस्क ने अफने नए ट्वीट में संदिग्ध हालातों में मौत की बात की है। उनका यह ट्वीट चर्चा में आ गया है। सोमवार सुबह एलन मस्क ने लिखा, अगर संदिग्ध हालातों में मेरी मौत हो जाती है तो यह काफी हद तक nice knowin ya होगा। मस्क के ट्वीट का सीधे तौर पर तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां मस्क Nice Knowin Ya गाने का जिक्र कर रहे हैं। जिस गाने या एलबम का मस्क ने जिक्र किया है वह TWENTY2 नाम के बैंड की है। यह साल 2018 में आई थी। मस्क के इस ट्वीट पर यूजर्स के मजेदार रिएक्शन आ रहे हैं। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि दुनिया को अभी मस्क की बहुत जरूरत है, इसलिए वह इतनी जल्दी नहीं जा सकते। वहीं एक अन्य ने लिखा कि हमें मस्क को हर कीमत पर बचाना होगा। वहीं एक यूजर ने लिखा कि क्या तुम्हारे जाने के बाद मुझे ट्विटर मिल सकता है। बता दें कि एलन मस्क ने पिछले महीने ही 44 अरब डॉलर में ट्विटर खरीदने की डील की है। ट्विटर की डील होने के बाद उन्होंने इसमें कई बदलाव करने की तरफ भी इशारा किया है, खासकर फ्री स्पीच का। वहीं हाल ही में उन्होंने ट्वीट किया था कि अब ट्विटर का इस्तेमाल करने पर पैसे देने होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन रविवार को अचानक पश्चिमी यूक्रेन पहुंची और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की पत्नी ओलेना जेलेंस्की से मुलाकात की। इसके साथ ही जिल रूस के हमले के बाद यूक्रेन जाने वाली अमेरिकी हस्तियों में शुमार हो गईं। जिल ने ओलेना से कहा, मैं मदर्स डे पर यहां आना चाहती थी। मुझे लगा कि यूक्रेन के लोगों को यह दिखाना चाहिये कि अमेरिका के लोग यूक्रेन के लोगों के साथ खड़े हैं। दोनों की मुलाकात यूक्रेन सीमा से लगे स्लोवाकिया के गांव में स्थित एक स्कूल में हुई। दोनों ने एक छोटी सी कक्षा में बैठकर एक दूसरे से बात की। ओलेना ने इस साहसिक कदम के लिये जिल का आभार व्यक्त किया और कहा, हम समझ सकते हैं कि युद्ध के दौरान अमेरिका की प्रथम महिला के यहां आने का क्या महत्व है। वह ऐसे समय में यहां आई हैं, जब रोजाना सैन्य हमले हो रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कोरोना से बुरा हाल है। यहां हालात अब फिर कंट्रोल से बाहर होते जा रहे हैं। कोविड के बढ़ते मामलों को देख प्रशासन ने शंघाई के कॉलेज और सीनियर हाई स्कूल के लिए प्रवेश परीक्षाओं को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया है। चीन की नेशनल हेल्थ कमीशन के अनुसार चीन में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 345 नए केस सामने आए हैं। फिलहाल चीन को छोड़कर किसी भी देश में लॉकडाउन नहीं है। 5 दिन के भीतर ही चीन के 20 और शहरों में लॉकडाउन लगाना पड़ा है। चीन में अब लॉकडाउन वाले शहरों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। साथ ही लॉकडाउन में आबादी भी 21 करोड़ से बढ़कर अब 34 करोड़ हो गई है। करीब 2.5 करोड़ की आबादी वाला शंघाई शहर पहले से लॉकडाउन में है और अब 2.15 करोड़ की आबादी वाली राजधानी बीजिंग में भी लॉकडाउन का खतरा बढ़ रहा है। शंघाई में अब भी लगभग 5 हजार से ज्यादा लोग रोज पॉजिटिव आ रहे हैं। चीन में जीरो कोविड पॉलिसी फेल होने के बावजूद राष्ट्रपति जिनपिंग अपनी जीरो कोविड पॉलिसी पर अड़े हुए हैं। जिनपिंग ने शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि जीरो कोविड पॉलिसी से ही कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सकता है। कोई भी देश चीन की इस पॉलिसी पर उंगली न उठाए। जीरो कोविड पॉलिसी में संक्रमण का केस आने पर मरीज को अनिवार्य रूप से अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।चीन अपनी जीरो कोविड पॉलिसी को कड़ाई से लागू करने पर आमादा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और राष्ट्रपति जिनपिंग के करीबी ली क्वांग ने शुक्रवार को कोरोना के खिलाफ मुकाबले के लिए अब सभी स्तरों पर सैन्य आदेश जारी करने की आवश्यकता जताई जिससे प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू किया जा सके। शंघाई के जेसे ही संक्रमण बेकाबू न हो जाए, इसके लिए बीजिंग में और भी सख्ती कर दी गई है। अभी बीजिंग में लॉकडाउन नहीं लगाया गया है, लेकिन रोज 1000 से ज्यादा केस आने के कारण 2 साल से 90 साल तक के सभी लोगों की टेस्टिंग के आदेश जारी किए गए हैं। बीजिंग के 60 सबवे को बिना लॉकडाउन की घोषणा के ही बंद कर दिया गया है। स्कूल, रेस्टोरेंट-बार और जिम बंद कर दिए गए हैं। चीन की विवादास्पद जीरो-कोविड पॉलिसी के चलते न सिर्फ चीन बल्कि दुनिया के लिए भी टेंशन बनती जा रही है। शी जिनपिंग सरकार ने जीरो-कोविड पॉलिसी को बदलने से साफ इनकार किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेजी से बढ़ते मामले फिर से बड़े पैमाने पर लॉकडाउन को मजबूर कर रहे हैं। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन कोरोना के अपने सबसे खराब प्रकोप से गुजर रहा है जिसका असर माल ढुलाई लागत और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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