एबीएन सेंट्रल डेस्क। दक्षिण चीन सागर में परिचालित हो रहा एक औद्योगिक सहायता पोत समुद्री तूफान की चपेट में आने पर डूब गया और इस घटना में दो दर्जन से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। हांगकांग बचाव सेवा ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बचाव कार्य के लिए विमान और हेलीकॉप्टर रवाना किये और शनिवार को स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे तक नौवहन दल के 30 सदस्यों में से तीन को सुरक्षित निकाला जा सका है। हांगकांग सरकारी उड़ान सेवा की ओर से जारी तस्वीरों में नौवहन दल के एक सदस्य को बचाव हेलीकॉप्टर की मदद लेते देखा गया जबकि पोत समुद्र की ऊंची लहरें के बीच डूब रहा था। दुर्घटना हांगकांग से तीन सौ किलोमीटर दक्षिण में हुई। उड़ान सेवा ने पोत के नाम का खुलासा नहीं किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन से आग्रह किया है कि वह व्यापार को विकृत करने वाले भारत के खतरनाक तरीकों को लेकर विश्व व्यापार संगठन (WHO) में उसके साथ विचार-विमर्श का एक औपचारिक अनुरोध दाखिल करें। बाइडन को लिखे पत्र में 12 सांसदों ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के वर्तमान नियम सरकारों को वस्तु उत्पादन के मूल्य के 10 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की अनुमति देते हैं, लेकिन भारत सरकार चावल और गेहूं सहित कई वस्तुओं के उत्पादन के आधे से अधिक मूल्य पर सब्सिडी देना जारी रखे हुए है। सांसदों ने पत्र में आरोप लगाया है कि भारत की ओर से नियमों का पालन नहीं किए जाने और बाइडन प्रशासन की ओर से "प्रवर्तन की कमी" ने चावल और गेहूं की कीमतों एवं उत्पादन को कम करके और अमेरिकी उत्पादकों को अनुपातहीन नुकसान की स्थिति में डालकर वैश्विक कृषि उत्पादन और व्यापार माध्यमों को नया रूप दिया है। पत्र में कहा गया है, भारत के ये तरीके वैश्विक स्तर पर खतरनाक रूप से व्यापार को विकृत कर रहे हैं और अमेरिकी किसानों और पशुपालकों को प्रभावित कर रहे हैं। पत्र सांसद ट्रेसी मान और रिक क्रॉफर्ड की अगुवाई में लिखा गया है। उन्होंने कहा, हम प्रशासन से डब्ल्यूटीओ में भारत के साथ विचार-विमर्श के लिए औपचारिक अनुरोध करने और अन्य डब्ल्यूटीओ सदस्यों के ऐसे घरेलू समर्थन कार्यक्रमों की निगरानी जारी रखने का आग्रह करते हैं जो व्यापार के निष्पक्ष तरीकों को नुकसान पहुंचाते हैं। भारत ने डब्ल्यूटीओ में अपने रुख का बचाव किया है। दुनिया भर के कई देशों और संगठनों ने अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए भारत के अडिग रुख की सराहना की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान की धरती शनिवार को जोरदार भूकंप से हिल गई। भूकंप इतना तेज था कि इसके झटके कतर, यूएई और चीन तक महसूस किए गए। ईरान की मीडिया ने भूकंप की तीव्रता 6.1 बताई जबकि अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार ये 6.0 तीव्रता का जलजला था। ईरान के सरकारी टीवी के हवाले से एएफपी ने बताया कि भूकंप की वजह से कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है और 44 घायल हुए हैं। ये भूकंप रात 1.32 बजे आया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र होर्मोज़गन प्रांत के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के दक्षिण-पश्चिम में 100 किलोमीटर दूर और जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। एएफपी के मुताबिक, इस बड़े भूकंप के कुछ मिनट पहले 5.7 तीव्रता का एक और झटका लगा था। बाद में भी कम के कम 7 झटके महसूस किए गए। भूकंप के केंद्र के नजदीक सायेह खोश गांव में राहत और बचाव का कार्य चलाया जा रहा है। इस गांव में करीब 300 लोग रहते हैं। बताया गया कि इस भूकंप की वजह के कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। लोग डर की वजह से सड़कों पर निकल आए। भूकंपों के लिहाज से ईरान को काफी सक्रिय माना जाता है। यहां रोजाना लगभग एक भूकंप आता है। ईरान के होर्मोज़गन प्रांत में पिछले साल नवंबर में 6.4 और 6.3 तीव्रता के दो भूकंप लगातार आए थे, जिसमें एक व्यक्ति की मौत की बात बताई गई थी। ईरान का सबसे घातक भूकंप 1990 में आया था, जिसकी तीव्रता 7.4 मापी गई थी। देश के उत्तरी इलाके में आए इस जलजले में करीब 40,000 लोग मारे गए थे। 2003 में 6.6 तीव्रता के भूकंप ने ऐतिहासिक महत्व के बाम शहर को तबाह कर दिया था, तब 26 हजार लोगों की मौत हुई थी। 2017 में पश्चिमी ईरान में 7 पॉइंट तीव्रता के भूकंप ने 600 लोगों की जान ले ली थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त राष्ट्र ने दुनियाभर के शहरों में रहने वाली आबादी से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कोरोना महामारी के कारण शहरों में रहने वालों की संख्या में तेजी से कमी आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के शहरों में रहने वालों की जनसंख्या पिछले स्तर पर पहुंच गयी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत की शहरी आबादी 2035 तक 67.5 करोड़ हो सकती है, जबकि चीन में शहरी जनसंख्या एक अरब से अधिक है। भारत 2035 में दुनिया का सबसे अधिक शहरी जनसंख्या वाला दूसरा देश होगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की शहरी आबादी के 2035 तक 67.5 करोड़ हो जाने का अनुमान है। शहरी जनसंख्या के मामले में चीन की एक अरब शहरी जनसंख्या के मुकाबले भारत दूसरे स्थान पर होगा। कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया में शहरों में रहने वालों की संख्या में कमी आई है। लेकिन 2050 तक शहरों में निवास करने वाली जनसंख्या में 2.2 अरब की वृद्धि होने की संभावना है। दुनिया में शहरीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र की बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से शहरीकरण पर कोविड-19 महामारी का अस्थायी असर पड़ा है, जिसकी वजह से शहरीकरण की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक शहरी आबादी पिछले स्तर पर आ गई है। भारत की शहरी आबादी में तेजी से हो रहा इजाफा : ₹रिपोर्ट के अनुसार 2035 में भारत की शहरी आबादी 67,54,56,000 तक पहुंचने का अनुमान है। भारत की 2020 में शहरी आबादी 48,30,99,000 थी। वहीं 2025 तक इसके 54,27,43000 और 2030 तक 60,73,42,000 हो जाने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2035 तक शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का प्रतिशत कुल आबादी का 43.2 प्रतिशत हो जाएगा। रिपोर्ट में चीन के बारे में कहा गया है कि वहां 2030 तक शहरी आबादी 1.05 अरब हो जाएगी। जबकि एशिया में शहरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या 2.99 अरब होगी। दक्षिण एशिया में यह संख्या 98.76 करोड़ होगी। भारत और चीन से बड़ी है आर्थिक वृद्धि : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों की वैश्विक आबादी में बड़ी हिस्सेदारी है। इन देशों में आर्थिक वृद्धि से वैश्विक असमानता पर सकारात्मक रूप से असर पड़ा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एशिया में पिछले दो दशकों में चीन और भारत की आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। इससे गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार खासकर निम्न आय वाले देशों में जन्म दर बढ़ने के साथ मौजूदा शहरी आबादी में वृद्धि जारी रहेगी। इसके साथ 2050 तक कुल वैश्विक आबादी में शहरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या 68 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान है, जो अभी 56 प्रतिशत है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया कि गरीबी और असमानता शहरों के समक्ष सबसे कठिन और जटिल समस्याओं में से एक है। 2035 तक 67.5 करोड़ होगी भारत की शहरी आबादी संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के शहरों में रहने वालों के ताजा आंकड़ों की रिपोर्ट को जारी किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण शहरों में रहने वालों की संख्या में कमी आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के शहरों में रहने वालों की संख्या पिछले स्तर पर पहुंच गयी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत की शहरी आबादी 2035 तक 67.5 करोड़ हो सकती है। जबकि चीन में शहरी जनसंख्या एक अरब से अधिक है। भारत 2035 में दुनिया का सबसे अधिक शहरी जनसंख्या वाला दूसरा देश होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने भारत में आल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा है कि पत्रकार जो कुछ भी लिखते हैं, ट्वीट करते हैं या कहते हैं उसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि यह आवश्यक है कि लोगों को निडर होकर अपनी बात कहने की अनुमति दी जाए। जुबैर को एक हिन्दू देवता के विरुद्ध 2018 में किये गए एक आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इस मुद्दे पर मंगलवार को पूछे गए एक सवाल के जवाब में महासचिव के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक ने कहा, मुझे लगता है कि पहली बात तो यह है कि दुनिया में कहीं पर भी यह बेहद जरूरी है कि लोगों को खुलकर अपनी कहने की अनुमति दी जाए। पत्रकारों को मुक्त होकर और किसी भय के बिना अपनी बात कहने की इजाजत होनी चाहिए। पाकिस्तान के एक पत्रकार ने पूछा था कि क्या वह जुबैर की रिहाई का आह्वान करते हैं, इसके जवाब में दुजारिक ने कहा, पत्रकार जो कुछ भी कहते हैं, लिखते हैं या ट्वीट करते हैं इसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। यह दुनिया में हर जगह लागू होता है। इस बीच, एक गैर सरकारी संगठन कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने भी जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की है। वाशिंगटन में सीपीजे के एशिया कार्यक्रम समन्वयक स्टीवन बटलर ने कहा, पत्रकार मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी से भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का स्तर और नीचे चला गया है। सरकार ने सांप्रदायिक मुद्दों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले प्रेस के सदस्यों के लिए एक असुरक्षित शत्रुतापूर्ण माहौल बना दिया है। उन्होंने कहा, अधिकारियों को तत्काल और बिना किसी शर्त के जुबैर को रिहा करना चाहिए और उन्हें बिना किसी दखलंदाजी के अपनी पत्रकारिता करने देना चाहिए। जुबैर की गिरफ्तारी से पहले गुजरात पुलिस ने तीस्ता सीतलवाड़ को, 2002 गुजरात दंगों के सिलसिले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए अदालत में गलत साक्ष्य पेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संस्था ने सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त की है और उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी पहुंचे। यूएई के मौजूदा राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने एयरपोर्ट पर उनका अभिवादन किया। शेख खलीफा के निधन पर शोक जताएंगे मोदी यूएई में मोदी, शेख खलीफा के निधन पर अपनी व्यक्तिगत संवेदना व्यक्त करेंगे, जिनका लंबी बीमारी के बाद 73 वर्ष की आयु में 13 मई को निधन हो गया था। शेख खलीफा के निधन (13 मई 2022) के पश्चात भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के दिवंगत राष्ट्रपति के सम्मान में 14 मई को राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा की थी। शोक के दिन पूरे देश में सभी सरकारी भवनों पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आधा झुका रहा। तब उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक महान और दूरदर्शी राजनेता के रूप में वर्णित किया था। शेख खलीफा संयुक्त अरब अमीरात के संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के सबसे बड़े बेटे थे। उन्होंने 3 नवंबर 2004 से अपनी मृत्यु तक यूएई के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक के रूप में कार्य किया। इससे पहले उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था और शेख खलीफा के निधन पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नेतृत्व के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। पीएम मोदी को 2019 में मिला था यूएई का सर्वोच्च सम्मान : यूएई की मोदी की अंतिम यात्रा अगस्त 2019 में हुई थी, जिस दौरान उन्हें यूएई के राष्ट्रपति द्वारा देश का सर्वोच्च पुरस्कार ‘आॅर्डर आॅफ जायद’ मिला था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शनिवार को बांग्लादेश के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन किया, जो पूरी तरह से देश के धन से निर्मित हुआ है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पद्मा पुल केवल ईंट और सीमेंट का ढेर नहीं, बल्कि बांग्लादेश के गौरव, क्षमता और शान का प्रतीक है। पद्मा नदी पर बने इस पुल की लंबाई 6.15 किलोमीटर है और यह दक्षिण पश्चिमी बांग्लादेश को राजधानी तथा देश के अन्य भागों से जोड़ता है। इस बहुद्देशीय सड़क-रेल पुल के निर्माण का खर्च, तीन अरब 60 करोड़ डॉलर है, जिसे पूरी तरह बांग्लादेश सरकार ने वहन किया है। हसीना ने पद्मा पुल के निर्माण से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। पद्मा पुल का उद्घाटन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूरी तरह घरेलू खर्च से निर्मित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा, मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि जिन्होंने पद्मा पुल की निर्माण योजना का विरोध किया और उसे पाइप ड्रीम बताया, उनके भीतर आत्मविश्वास की कमी थी। मुझे उम्मीद है कि यह पुल उनके अंदर विश्वास पैदा करेगा। उन्होंने कहा, यह पुल केवल ईंट, सीमेंट, लोहे और कंक्रीट का ढेर नहीं यह पुल हमारा गौरव है, यह हमारी क्षमता, शक्ति और शान का प्रतीक है। यह पुल बांग्लादेश के लोगों का है। इस बीच, भारतीय उच्चायोग ने इस परियोजना के पूरा होने पर बांग्लादेश सरकार को बधाई दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एशिया से लेकर यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में गिरावट देखी जा रही है। इसकी वजह है कि चीन में कोविड-19 प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन की युद्ध की वजह से सप्लाई चैन में रूकावटें आ रही हैं। जबकि, अमेरिका में मंदी के बढ़ते जोखिम से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरो जोन में ज्यादा कीमतों का मतलब है कि जून में मैन्युफैक्चर्ड सामान की मांग मई 2020 में महामारी के फैलने के बाद सबसे ज्यादा तेज है। S&P ग्लोबल का फैक्ट्री पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडैक्स 54.6 फीसदी से गिरकर 52.0 पर पहुंच गया है, जो करीब दो साल में सबसे निचला स्तर है। रिपोर्ट के मुताबिक, कैपिटल इकोनॉमिक्स के Jack Allen-Reynolds ने कहा कि जून के यूरो जोन पीएमआई सर्वे में दिखता है कि सर्विसेज सेक्टर में और गिरावट आएगी। जबकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आउटपुट अब गिरता ही दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा कि प्राइस इंडैक्स के बहुत मजबूत बने रहने के साथ, यूरो जोन स्टैगफ्लेशन के दौर में चला गया है। अमेरिका में अभी और बढ़ेगी महंगाई : रिपोर्ट- अर्थशास्त्रियों ने गुरुवार को पब्लिश हुए रॉयटर्स के एक पॉल में अनुमान लगाया था कि 12 महीनों के भीतर मंदी आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई, जो पिछले महीने 8.1 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी, उसके अभी रिकॉर्ड पर पहुंचना बाकी है। फेडरल रिजर्व के चेयर Jerome Powell ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय बैंक अमेरिका में मंदी लाने का काम नहीं कर रहा था। लेकिन वह कीमतों को काबू में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध था, चाहे इससे आर्थिक गिरावट आ जाए. उन्होंने मंदी की संभावना को सही बताया। महंगाई फेड के लगाए गए 2 फीसदी से स्तर से कम से कम तीन गुना ज्यादा चल रही है। रॉयटर्स द्वारा किए गए पोल में शामिल अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इसमें अगले महीने में 75 बेसिस प्वॉइंट्स की और बढ़ोततरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा आपको बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इस वित्त वर्ष में 7 से 7.8 फीसदी की ग्रोथ रह सकती है। कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इसकी वजह बेहतर कृषि उत्पादन और रूस-युक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा सुधर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था है।
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