एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी चीन की कड़ी चेतावनी के बीच मंगलवार को ताइवान में उतरीं। चीन ने चेतावनी दी थी कि ताइवान का दौरा करने वाले किसी भी अमेरिकी राजनेता ने आग से खेलने की कोशिश की तो अच्छा नतीजा नहीं होगा। पेलोसी का विमान स्थानीय समयानुसार रात 10:45 बजे ताइपे में उतरा। इस दौरान चीन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। चीनी वायु सेना के एसयू-35 लड़ाकू विमान ताइवान जलक्षेत्र में पहुंचे : स्थानीय मीडिया ने बताया कि जैसे ही स्पीकर पेलोसी का वायु सेना का विमान ताइपे के पास पहुंचा, चीनी वायु सेना के एसयू-35 लड़ाकू विमान ताइवान जलक्षेत्र को पार कर रहे थे। चीनी सोशल नेटवर्क वीबो पर साझा किए गए फुटेज में ताइवान जलक्षेत्र के साथ फ़ुजियान के तट पर टैंकों को दिखाया गया है। आगे के फुटेज में जियामेन शहर में सैनिक हथियारों के साथ चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। लेकिन ताइवान ने पेलोसी का गर्मजोशी से स्वागत किया। द्वीप की सबसे ऊंची इमारत ताइपे 101, स्पीकर पेलोसी के लिए एक स्वागत संदेश के साथ जगमगा उठी और समर्थकों ने उस होटल के बाहर स्वागत के बोर्ड रखे थे, जिसमें वह रुकेंगी। पेलोसी 1997 के बाद से ताइवान का दौरा करने वाली अमेरिका के सर्वोच्च पद पर आसीन अधिकारी हैं। व्हाइट हाउस उनकी लोकेशन से वाकिफ है। अमेरिकी बेस से 8 यूएस एफ-15 फाइटर जेट ने भरी उड़ान : एनएचके की रिपोर्ट के अनुसार पेलोसी की फ्लाइट को सुरक्षा प्रदान करने के लिए जापान के ओकिनावा में एक अमेरिकी बेस से 8 यूएस एफ-15 फाइटर जेट और 5 टैंकर विमानों ने उड़ान भरी था। पेलोसी को ताइवान ले जाने वाले विमान पर किसी भी चीनी हस्तक्षेप की स्थिति में अमेरिकी वायु सेना को गोलीबारी करने की छूट मिल चुकी है। वहीं पेलोसी के उतरने से पहले चीन ने ताइवान के ऊपर के हवाई क्षेत्र को सभी नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया था। एक वीडियो में ताइवान देश की सबसे ऊंची इमारत से पेलोसी का स्वागत करता दिख रहा है जिसपर "स्पीकर पेलोसी, ताइवान में स्वागत है" फ्लैश हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने मंगलवार को चार युद्धपोत और एक एयरक्राफ्ट कैरियर ताइवान के पूर्व में तैनात किए जिसे अमेरिकी नौसेना ने रूटीन तैनाती बताया। इससे पहले अमेरिका ने अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनों युद्धपोत और तीन सबमरीन को ताइवान की सीमा के बेहद करीब भेजा था। वहीं चीन ने भी बड़े पैमाने पर घातक युद्धपोत और फाइटर जेट ताइवान की ओर तैनात किए हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में चीन की सेना समुद्र के किनारे नजर आ रही है जहां से ताइवानी द्वीप सिर्फ 10 किमी दूर है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में गोलीबारी की एक घटना की सूचना मिली है, जिसमें कई लोगों के हताहत होने की सूचना मिली है। डीसी पुलिस विभाग का कहना है कि गोलीबारी की घटना की जांच चल रही है। वहीं बीते रविवार को अमेरिका में लॉस एंजिलिस के एक पार्क में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गयी जबकि कम से कम पांच अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि जिस समय पार्क में गोलीबारी हुई, उस समय वहां कार शो चल रहा था। लॉस एंजिलिस के पुलिस विभाग (एलएपीडी) ने बताया कि सान पैड्रो के पेक पार्क में अपराह्न तीन बजकर 50 मिनट पर गोलीबारी हुई। एलएपीडी के मुताबिक गोलीबारी की इस घटना को किसी एक विशेष व्यक्ति ने अंजाम नहीं दिया था। एलएपीडी के कैप्टन कैली मुनीज ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि इस घटना के शिकार लोगों की पहचान अब तक नहीं की जा सकी है। मुनीज ने कहा, पेक पार्क में बेसबॉल डायमंड पर हुई गोलीबारी की घटना में कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली। हम सबूतों को जुटाने और संभावित रूप से अतिरिक्त पीड़ितों के लिए पार्क को खाली करना जारी रख रहे हैं। उन्होंने कहा, हम यह नहीं जानते कि मौजूदा समय में वहां कितनी संख्या में गोलीबारी करने वाले मौजूद हैं। इससे पहले लॉस एंजिलिस दमकल विभाग ने कहा कि यह घटना कार शो में या उसके पास हुई और कम से कम तीन लोगों को गोलियां लगीं और उनमें से दो की हालत गंभीर है। दमकल विभाग के मुताबिक इस घटना में चार पुरुष और तीन महिलाओं समेत कुल सात लोग घायल हुए थे और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। पुलिस के मुताबिक इस घटना के सिलसिले में अब तक किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अमेरिका के आतंकविरोधी अभियान में अल-कायदा नेता अयमान अल-जवाहिरी के मारे जाने की पुष्टि की गई है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने रविवार को काबुल में यह अभियान छेड़ा था। अल-जवाहिरी एक सुरक्षित घर की बालकनी में था, जब ड्रोन ने उस पर दो मिसाइलें दागीं। हमले के दौरान उसके परिवार के अन्य सदस्य भी घर में मौजूद थे, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ। बाइडेन ने कहा कि उन्होंने अल-कायदा नेता के खिलाफ सटीक कार्रवाई के लिए अंतिम मंजूरी दे दी थी। उन्होंने कहा कि अल- जवाहिरी ने अक्टूबर- 2000 में अदन में अमेरिकी नौसैनिकों पर हमले समेत हिंसा की अन्य कृत्यों को भी अंजाम दिया था। इस हमले में 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे। मेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, चाहे कितना भी समय लगे, चाहे आप कहीं भी छिप जाएं, अगर आप हमारे लोगों के लिए खतरा हैं, तो हम आपको और आपके लोगों को ढूंढ निकालेंगे। वर्ष 2011 में ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अल-जवाहिरी ने अल-कायदा पर कब्जा कर लिया। उसने और बिन लादेन ने एक साथ 9/11 के हमलों की साजिश रची और तब से वह अमेरिका के वाछित आतंकवादियों में से एक बन गया। इस बीच तालिबान के एक प्रवक्ता ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां पिछले 20 वर्षों के असफल अनुभवों की पुनरावृत्ति हैं तथा अमेरिका, अफगानिस्तान और क्षेत्र के हितों के खिलाफ हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत व तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर चीन की सक्रियता लगातार जारी है जिससे उसके खतरनाक इरादे सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में चीन सरकार ने 2030 तक 1,00,000 से अधिक तिब्बतियों को उनके घरों से स्थानांतरित करने की योजना की घोषणा की है। इसके पीछे तिब्बतियों के परंपरागत जीवन को खत्म करने के साथ-साथ भारत समेत सीमावर्ती क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है। सिर्फ इतना ही नहीं, चीन हिमालय में नए गांव बसाने की योजना पर भी काम कर रहा है। हांगकांग में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक ड्रैगन विवादित हिमालय क्षेत्र में 624 गांव बनाने की तैयारी कर रहा है। हांगकांग में रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बतियों को विस्थापित करना चीन की रणनीति की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके तहत वह विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रामक ढंग से नए गांव बनाना चाहता है। तिब्बती प्रेस के मुताबिक ऐसा करके चीन एक तरफ इन क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की फिराक में है। वहीं दूसरी तरफ वह चाहता है कि भारत, भूटान और नेपाल अपनी ही सीमाओं में बंधे रहें। इस रिपोर्ट में चीन सरकार के डॉक्यूमेंट्स का हवाला दिया गया है। असल में चीन की यह योजना 2018 में लांच की गई उसकी रणनीति का हिस्सा है। तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन कम्यूनिस्ट पार्टी कमेटी द्वारा तैयार की गई इस योजना के मुताबिक चीन हिमालय पर 4800 मीटर से या उससे ऊपर रहने वाले तिब्बतियों को विस्थापित करेगा। चीन का तर्क है कि ऐसा करके वह पर्यावरण की रक्षा कर रहा है। हालांकि इस बारे में कोई भी वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि इस विस्थापन से पर्यावरण पर कोई अनुकूल प्रभाव पड़ने वाला है। हांगकांग में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे का असली मकसद पारंपरिक तिब्बती जीवन शैली को समाप्त करना था। विशेष रूप से, इन क्षेत्रों में तिब्बती पीढ़ियों के लिए खानाबदोश रहे हैं। यह सदियों से तिब्बती पठार पर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रह रहे हैं। अनुमान के मुताबिक जबरन पुनर्वास से करीब 20 लाख तिब्बती खानाबदोश विस्थापित होंगे। इसके चलते यह अपनी आजीविका खो देंगे और गरीबी में धकेल दिए जाएंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेपाल के काठमांडू में रविवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। इसका केंद्र नेपाल की राजधानी काठमांडू से 147 किमी दक्षिण पूर्व में था। भूकंप की वजह से फिलहाल किसी भी तरह से नुकसान की कोई खबर नहीं है। जानकारी के मुताबिक भूकंप का असर नेपाल से लगने वाले बिहार के भी कई जिलों में देखने को मिला है। सूत्रों के मुताबिक नेपाल से सटे बिहार के मधुबनी, समस्तीपुर, अररिया, कटिहार, सीतामढ़ी में रविवार सुबह 7ः58 बजे धरती हिली। इससे पहले पिछले महीने ही नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 मापी गई थी। भूकंप का केंद्र काठमांडू से 161 किमी दूर था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने संसद में इराकी झंडे और अल-सदर के फोटो लहराते हुए जमकर नारेबाजी की। दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोंकने और तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन आदि का इंतजाम किया था, हालांकि सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों को रोकने में विफल रहे। ईराक की संसद में घुसे प्रदर्शनकारी : ईराक में एक बार फिर से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को प्रधानमंत्री के नामांकन के विरोध में दूसरी बार बगदाद में संसद भवन पर धावा बोल दिया। इन प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर शिया नेता मुक्तदा अल-सदर के समर्थक थे। इससे पहले बुधवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने बगदाद स्थित संसद पर धावा बोल दिया था। मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में संसद परिसर में घुस गए और वहां तोड़फोड़ भी की थी। जमकर की तोड़फोड़ : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार की तरह ही शनिवार को भी प्रदर्शनकारियों ने संसद में इराकी झंडे और अल-सदर के फोटो लहराते हुए जमकर नारेबाजी की। दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोंकने और तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन आदि का इंतजाम किया था, हालांकि सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों को रोंकने में विफल रहे। प्रदर्शनकारी ससंद में लगी मेजों पर चलते हुए, सांसदों की कुर्सियों पर बैठे और इराकी झंडे लहराते देखे गए। हालांकि संसद में कोई विधायक, सांसद मौजूद नहीं था। इस दौरान एक व्यक्ति को इराकी संसद के अध्यक्ष की मेज पर लेटा हुआ देखा गया। मारत के अंदर केवल सुरक्षाकर्मी थे जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को आसानी से अंदर जाने की अनुमित दे दी। ये प्रदर्शनकारी पूर्व मंत्री और पूर्व प्रांतीय गवर्नर मोहम्मद शिया अल-सुदानी की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं, जो ईरान समर्थित हैं। बता दें कि अक्तूबर 2021 में इराक में चुनाव हुए थे, इसके बाद यह बड़ा प्रदर्शन है। बुधवार को विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब प्रतिस्पर्धी राजनीतिक गुट नई सरकार के गठन पर सहमत नहीं हो पाए। चुनाव के बाद सबसे बड़ा विरोध : अक्तूबर में संघीय चुनाव होने के बाद से यह सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है, और दूसरी बार शिया धर्मगुरु अल-सदर ने इस महीने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को संदेश देने के लिए जनता को जुटाने की अपनी क्षमता का इस्तेमाल किया है। वहीं इससे पहले भी अल सदर ने सरकार के खिलाफ भीड़ जुटाई थी। अल-सदर के बयान के बाद संसद से निकले प्रदर्शनकारी : वहीं, बुधवार को अनुयायियों के संसद पर कब्जा करने के कुछ घंटों बाद प्रभावशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने ट्विटर पर एक बयान जारी किया था। उन्होंने लोगों से घरों में सुरक्षित लौटने के लिए कहा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 1947 में जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था तो इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में 12.9% हिंदू अल्पसंख्यक रह गए थे। समय बदला, हालात बदले और 75 साल में हिंदू अल्पसंख्यकों की आबादी भी बदल गई। इस आबादी की पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में हिस्सेदारी 12.9% से 2.14% हो चुकी है। पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इन विपरित परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान के हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए एक अच्छी खबर आई। पहली बार पाकिस्तान में कोई हिंदू महिला डीएसपी बन पाई है। ये महिला है मनीषा रुपेता। मनीषा पाकिस्तान में डीएसपी के तौर पर नियुक्त होने वाली पहली हिंदू महिला हैं। सिंध लोक सेवा की परीक्षा पास करने और प्रशिक्षण हासिल करने के बाद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। आज हम आपको मनीषा के बारे में सबकुछ बताएंगे। कैसे उन्होंने तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए इस मुकाम को हासिल किया? जो 75 साल में नहीं हुआ वो अब कैसे हो गया?
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में लगातार दूसरी तिमाही में इकॉनमी में गिरावट आई है। इससे देश में मंदी की आशंका और गहरा गई है। अमेरिकी इकॉनमी में चालू वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब आर्थिक वृद्धि दर घटी है। वाणिज्य मंत्रालय के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी। लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी में गिरावट मंदी का संकेत है। हालांकि, आंकड़ा अभी स्थाई नहीं है, इसमें बदलाव हो सकता है। अभी इसे दो बार रिवाइज किया जाएगा। पिछले साल दूसरी तिमाही में देश की इकॉनमी 6.7 फीसदी की दर से बढ़ी थी। जीडीपी में गिरावट का आंकड़ा ऐसे समय जारी किया गया है, जब बढ़ती महंगाई और कर्ज की ऊंची लागत के कारण उपभोक्ता तथा कंपनियां प्रभावित हैं। इकॉनमी में लगातार दो तिमाहियों में गिरावट को मंदी कहा जाता है। इससे पहले अमेरिकी इकॉनमी में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सप्लाई चेन की समस्याओं, कमोडिटीज की कीमत और लेबर कॉस्ट में तेजी और लेबर तथा तेल की बढ़ती कीमत के कारण अमेरिका में महंगाई चार दशक के चरम पर है। इससे देश में मंदी की आशंका जोर पकड़ रही है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है और अगर वह मंदी की चपेट में आती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है। पॉलिसी रेट में बढ़ोतरी : उल्लेखनीय है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (केंद्रीय बैंक) ने बुधवार को लगातार दूसरी बार नीतिगत दर में 0.75 प्रतिशत की वृद्धि की। हालांकि, फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल और कई अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में कुछ नरमी जरूर है लेकिन उन्हें मंदी को लेकर संदेह है। इसका कारण श्रम बाजार में मजबूती है। 1.1 करोड़ नई नौकरियों के अवसर उपलब्ध हुए हैं और बेरोजगारी दर 3.6 प्रतिशत है जो अपेक्षाकृत काफी कम है। पिछले साल अमेरिकी की आर्थिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही थी।
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