एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान में खतरनाक बाढ़ से बुरे हाल है। बाढ़ ने सिंध प्रांत में सिधु नदी के तेज प्रवाह के चलते 100 किलोमीटर चौड़ी एक आंतरिक झील बना डाली है। यह जानकारी उपग्रह से मिले चित्र से हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक NASA के मोडिस उपग्रह सेंसर से 28 अगस्त को ली गई नई तस्वीरें दिखाती हैं कि कैसे भारी बारिश और सिंध नदी के उफान ने पाकिस्तान के अधिकांश हिस्से को जलमग्न कर दिया है। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में दिख रहा है कि लगभग 100 किमी चौड़ी झील बन गई है। फसल का एक बड़ा हिस्सा पानी में समा गया है। तस्वीर में दिखने वाला पानी नीले रंग में है। यहां पहले कभी मिट्टी और घास हुआ करती थी लेकिन अब यहां झील नजर आ रही है। पाकिस्तानी मौसम विभाग का कहना है कि जब से उन्होंने मौसम का रिकॉर्ड रखना शुरू किया है तब से ये अब तक के सबसे खराब हालात हैं। पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की भीषण बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या गरुवार को 1,186 हो गई। वहीं, अधिकारी हजारों प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री मुहैया कराने के प्रयास में जुटे रहे। पिछले तीन दशकों में मॉनसून के दौरान भीषण बारिश से बाढ़ की शुरुआत हुई जिससे बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों समेत देश का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान पर बिजली-पानी के बाद एक और भारी संकट आ गया है, जिससे पूरे देश को इस मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान में इंटरनेट सर्विस काफी डाउन हो रही है, पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में इंटरनेट यूज करने वालों को काफी ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट में खराबी का मुख्य कारण केबल बताया जा रहा है, पाकिस्तान में इंटरनेट संकट भी गहराता जा रहा है, इस समस्या से लोगों को फिलहाल निजात नहीं मिलने वाली है। आईटी और टेलीकॉम मंत्री बोले : इंटरनेट आउटेज का प्रमुख कारण बाढ़ रहा, पानी को हटाने के लिए हैवी मशीनरी का उपयोग किया गया जिससे फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स डैमेज हो गए। पाकिस्तान के आईटी और टेलीकॉम मंत्री ने इसको लेकर टेक्निकल रिपोर्ट में मांगी है, उन्होंने निकट भविष्य में ऐसी घटनाएं ज्यादा होने की भी बात कही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के लुहांस्क क्षेत्र के गवर्नर सेरही हैदाई ने एक टेलीग्राम पोस्ट में दावा किया कि हमारे सैनिकों ने रूसी कब्जे वाले कादिवका शहर में एक होटल में स्थापित ठिकाने पर हमला किया है। उन्होंने यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में एक बेस को तबाह करके 200 रूसी हवाई पेराट्रूपर्स को मार दिया है। हैदाई का यह दावा ऐसे वक्त में आया है जब यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्रों में रूस की प्रगति कथित रूप से ठप हो गई है। यूक्रेनी सेना 2014 के बाद से ही लुहांस्क और पास स्थित दोनेस्क प्रशासित जिले में रूस समर्थित अलगाववादियों से संघर्ष कर रही है। यह संघर्ष रूस के क्रीमिया पर कब्जे के साथ शुरू हुआ था। लुहांस्क के गवर्नर सेरही हैदाई ने अपनी पोस्ट में उन इमारतों की तस्वीरें भी दिखाई जिसमें कई तबाह इमारतें दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी सैनिकों ने 19 जुलाई को पूर्वी यूक्रेन के दोनबास क्षेत्र में बीएम-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर दागा था। तब भी रूस को काफी क्षति हुई थी। शुक्रवार को यूक्रेनी सेना ने एक रूसी बेस पर हमला कर 200 एयरमैन मार दिए हैं। बता दें कि जुलाई में रूसी सेना द्वारा पूर्वी यूक्रेन के कई क्षेत्रों को कब्जे में लेने के बाद यूक्रेनी सेना उन्हें दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है। रूस ने कहा, यूक्रेनी गोलाबारी जारी : क्रैमलिन ने यूक्रेन के खिलाफ उन आरोपों को दोहराया कि उसने क्षेत्र में कई नागरिकों को निशाना बनाया है। बृहस्पतिवार को यूएन में रूसी राजदूत वसीली नेबेंजिया ने कहा कि दोनबास में यूक्रेन की आपराधिक गोलाबारी जारी है जिसमें पिछले महीने करीब 100 नागरिक मारे जा चुके हैं। उधर, रूस के राष्ट्रीय रक्षा प्रबंधन केंद्र के प्रमुख मिखाइल मिजन्त्सिेव ने कहा कि लुहांस्क-दोनेस्क से 24,000 से ज्यादा लोगों को निकाला गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में मास्को की सैन्य कार्रवाई के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को रूसी सेना को अपने सैनिकों की संख्या 137,000 से बढ़ाकर कुल 1.15 मिलियन (11 लाख 50 हजार) सैनिकों तक करने का आदेश दिया। एक जनवरी से प्रभावी होने वाले पुतिन के फरमान से यह साफ नहीं हुआ कि सेना बड़ी संख्या में सैनिकों का मसौदा तैयार करके स्वयंसेवी सैनिकों की संख्या में वृद्धि करके या दोनों के संयोजन से सैनिकों की संख्या बढ़ाएगी या नहीं। राष्ट्रपति के आदेश से रूसी सैन्य कर्मियों की कुल संख्या बढ़कर 2,039,758 हो जायेगी, जिसमें 1,150,628 सैनिक शामिल हैं। पिछले आदेश ने 2018 की शुरुआत में सेना की संख्या 1,902,758 और 1,013,628 रखी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका की प्रथम महिला, जिल बाइडन बुधवार को एक बार फिर कोरोना संक्रमित हो गईं हैं। उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। 24 अगस्त को उनका एक एंटीजन टेस्ट किया था, जिसमें वह कोरोना संक्रमित पाई गईं। व्हाइट हाउस का कहना है कि उन्हें हल्के लक्षणों का अनुभव हो रहा है। राष्ट्रपति के ठीक होने के हफ्तों बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति जो बाइडन कोविड-19 से उबर चुके हैं। वह भी इस महीने की शुरुआत में कोरोना वायरस से उबरने के बाद फिर संक्रमित हो गये। बाइडन की उप संचार निदेशक केल्सी डोनोह्यू ने कहा कि जांच में उनके वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई और वह डेलावेयर में ही रहेंगी, जहां वह संक्रमित होने के बाद पृथकवास में थीं। हालांकि, राष्ट्रपति बाइडन यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए 10 दिनों के लिए घर के अंदर मास्क पहनेंगे, क्योंकि वह जिल बाइडन के सबसे करीबी हैं। जो बाइडन भी हो चुके हैं कोरोना पॉजिटिव : इससे पहले जो बाइडन हाल के ही दिनों में दो बार कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। बाइडन को पहली बार 21 जुलाई को कोविड से संक्रमित पाया गया था। बाइडन ने अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले ही फाइजर की एंटी कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक लगवा ली थीं। उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भी हो चुकी हैं कोरोना संक्रमित : इसके बाद बाइडन ने सितंबर 2021 में पहली बूस्टर खुराक जबकि मार्च 2022 में टीके की एक अतिरिक्त खुराक ली थी। बाइडन से पहले उपराष्ट्रपति कमला हैरिस समेत व्हाइट हाउस के कई अधिकारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रूस ने एक रेलवे स्टेशन पर रॉकेट से हमला किया है। इस हमले में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। राष्ट्रपति व्लोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की जानकारी दी है। आपको बता दें कि जेलेंस्की कई दिनों इस बात को लेकर आगाह कर रहे थे कि रूस इस सप्ताह किसी बर्बर कार्रवाई का प्रयास कर सकता है। यूक्रेनी समाचार एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जेलेंस्की ने वीडियो के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि यह घातक हमला निप्रोपेट्रोवस्क क्षेत्र के चैपलने शहर में हुआ है। शहर की आबादी लगभग 3,500 है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि पूर्वी यूक्रेन में डोनेट्स्क के पश्चिम में लगभग 145 किमी (90 मील) पश्चिम में चैपलने शहर के एक स्टेशन पर एक ट्रेन पर रॉकेट से हमला हुआ है। जेलेंस्की ने कहा, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन दुर्भाग्य से मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है। यूक्रेन के राष्ट्रपति प्रशासन के उप प्रमुख किरिल टिमोशेंको ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक संदेश में कहा कि हमले में एक 11 वर्षीय बच्चे की भी मौत हुई है। इससे पहले दिन में, यूक्रेन के नियंत्रण वाले क्षेत्र के हर मीटर पर हवाई हमले के सायरन बजाए गए थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। खबर के मुताबिक, हमला करने के बाद से करीब 9 हजार यूक्रेनी सैनिक युद्ध में मारे जा चुके हैं। जनरल वेलेरी जालुज्नी के मुताबिक, यूक्रेन के कई बच्चों की देखभाल करने की जरूरत है क्योंकि उनके पिता अग्रिम पंक्ति पर तैनात हैं और उनमें से करीब 9,000 सैनिक जान गवां चुके हैं। रूस और यूक्रेन में जंग खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। पुतिन की सेना ने यूक्रेन के कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया है। यूरोप की रोटी की टोकरी कहे जाने वाले देश की हालत जर्जर हो गई है। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दो हफ्ते पहले अनुमान लगाया था कि रूस ने 70 हजार से 80 हजार सैनिकों को जंग में गंवा दिया है। इनमें मरने और घायलों को जोड़ा गया है। वहीं, अल जज़ीरा का कहना है कि, युद्धक्षेत्र के आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना असंभव है। जंग के बीच हजारों नागरिकों के मरने की खबरें भी प्राप्त हुई थीं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के दौरान 5,587 नागरिक मारे गए हैं और 7,890 घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी ने जंग की बदसूरत दास्तां बताते हुए कहा कि रूस के हमले के बाद से अब तक कम से कम 972 यूक्रेनी बच्चे मारे गए हैं या घायल हुए हैं। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि ये संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित आंकड़े हैं, लेकिन संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। नाइपर नदी पर बसे इस शहर में 12 जुलाई से रूसी हमले तेज होने के बाद हालात खराब हैं, यहां 850 इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं और उसकी करीब आधी आबादी शहर छोड़कर जा चुकी है। यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अभी तक जारी है। दोनों देशों के बीच इस साल फरवरी माह में युद्ध शुरू हुआ था, अभी तक हजारों लोगों की इस युद्ध में मौत हो चुकी है। लेकिन अभी भी यह युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि तब तक कोई शांति नहीं हो सकती है जबतक रूस अपनी सेना को वापस नहीं बुलाता है। ऐसे में स्पष्ट है कि रूस और यूक्रेन के बीच अभी यह टकराव और लंबा चल सकता है। जेलेंस्की ने साफ कहा था है कि जब तक रूस अपने सैनिक वापस नहीं बुलाता है शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शांति की संभावना की अपेक्षा तबतक नहीं की जा सकती है कि जबतक रूसी सैनिक वापस नहीं जाते हैं। इसके साथ ही जेलेंस्की ने व्लादिमीर पुतिन के साथ शांति वार्ता को लेकर बातचीत करने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जबतक सैनियों की वापसी नहीं होती है इसपर चर्चा नहीं होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि चीन ने भारत के साथ सीमा समझौतों की अवहेलना की है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी संबंध एकतरफा नहीं हो सकते है और इसमें परस्पर सम्मान होना चाहिए। क्षेत्र के साथ समग्र द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दक्षिण अमेरिका की अपनी छह दिवसीय यात्रा के पहले चरण में यहां पहुंचे जयशंकर ने शनिवार को यहां भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। भारत-चीन संबंधों पर एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच 1990 के दशक से समझौते हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने (चीनी) इसकी अवहेलना की है। कुछ साल पहले गलवान घाटी में क्या हुआ था, आप जानते हैं। उस समस्या का समाधान नहीं हुआ है और यह स्पष्ट रूप से प्रभाव डाल रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को हुए गतिरोध का समाधान करने के लिए दोनों पक्षों ने अब तक कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की वार्ता की है। वर्ष 2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे जयशंकर ने कहा कि संबंध एकतरफा नहीं हो सकते और इसे बनाए रखने के लिए परस्पर सम्मान होना चाहिए। जयशंकर ने कहा, वे हमारे पड़ोसी हैं और हर कोई अपने पड़ोसी के साथ मैत्री के साथ रहना चाहता है… मुझे आपका और आपको मेरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारा दृष्टिकोण बहुत स्पष्ट हैं कि यदि आपको बेहतर संबंध बनाने है, तो एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना चाहिए। प्रत्येक के अपने हित होंगे और हमें एक-दूसरे की चिंताओं के बारे में संवेदनशील होने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा, स्थायी संबंध एक तरफा नहीं हो सकते। हमें आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता की आवश्यकता है। पिछले सप्ताह बैंकॉक में जयशंकर ने कहा थ कि चीन ने सीमा पर जो किया है, उसके बाद भारत और उसके संबंध अत्यंत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि अगर दोनों पड़ोसी देश हाथ नहीं मिलाते हैं तो एशियाई शताब्दी नहीं आयेगी। जयशंकर ने बैंकॉक में प्रतिष्ठित चुलालांगकोर्न विश्वविद्यालय में "हिंद-प्रशांत का भारतीय दृष्टिकोण" विषय पर व्याख्यान देने के बाद कुछ सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही थी। ब्राजील के अलावा, जयशंकर पराग्वे और अर्जेंटीना का दौरा करेंगे और यह विदेश मंत्री के रूप में दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र की उनकी पहली यात्रा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य महामारी के बाद के युग में सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशना है।
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