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Published / 2022-09-30 07:11:11
यूक्रेन के दो क्षेत्रों को पुतिन ने जनमत संग्रह के बाद रूस में कराया शामिल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आज रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने यूक्रेन के कब्जे किए हुए 2 क्षेत्रों को अधिकारिक तौर पर रूस में शामिल किया है। इसके लिए क्रेमलिन में एक भव्य आयोजन किया गया है। इस बात की जानकारी मॉस्को ने दी है। रूस ने कहा है कि इन इलाकों में जनमत संग्रह कराया गया था इसके बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि इसे यूक्रेन और अन्य पश्चिमी देशों ने अवैध बताया है। आधिकारिक तौर पर फिलहाल रूस ने खेरसोन और जापोरिज्जिया को ही शामिल किया गया है। इनके अलावा लुहान्स्क और दोनेत्स्क को भी शामिल किया जाना है। यूक्रेन में रूसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मंगलवार को हुए जनमत संग्रह के बाद मॉस्को ने दावा किया था कि निवासियों ने अपने क्षेत्रों के औपचारिक रूप से रूस का हिस्सा बनने के लिए भारी समर्थन किया था। रूस के नियंत्रण वाले दक्षिणी और पूर्वी यूक्रेन के चार हिस्सों को शुक्रवार को औपचारिक रूप से देश में (रूस में) शामिल किए जाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में सात महीने से जारी युद्ध एक नये खतरनाक मोड़ पर पहुंचने की आशंका है। जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक ने जनमत संग्रह की निंदा करते हुए गुरुवार को बर्लिन में कहा, डरा धमका कर और कभी-कभी बंदूक की नोक पर भी लोगों को उनके घरों या कार्यस्थलों से मतपेटियों में मतदान करने के लिए ले जाया गया है। उन्होंने कहा, यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के विपरीत है। यह शांति के खिलाफ है। जब तक यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में यह रूसी फरमान कायम है, कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है। कोई भी नागरिक स्वतंत्र नहीं है। यूक्रेन के खेरसोन, जापोरिज्जिया, लुहान्स्क और दोनेत्स्क में मतदान हुआ था। यूक्रेन ने जनमत संग्रह को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया है। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि रूसी गोलाबारी में एक बच्चे सहित कम से कम आठ नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गये। यूक्रेन के डीनिप्रो में हुए हमले के बाद 12 साल की एक बच्ची को मलबे से बाहर निकाला गया। दक्षिणी और पूर्वी यूक्रेन के चार क्षेत्रों में मास्को-स्थापित प्रशासन ने मंगलवार रात दावा किया कि जनमत संग्रह में ज़ापोरिज्जिया क्षेत्र में 93% , खेरसोन क्षेत्र में 87%, लुहान्स्क क्षेत्र में 98% और दोनेत्स्क में 99% लोगों ने विलय का समर्थन किया है।

Published / 2022-09-29 05:40:44
अमेरिका : जयशंकर ने जब वीजा में देरी का मुद्दा उठाया, तो ब्लिंकन ने ठहराया कोरोना को जिम्मेदार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वाशिंगटन डीसी स्थित इंडिया हाउस में थिंक-टैंक और रणनीतिक समुदाय के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने बताया कि जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के समक्ष भारत से अमेरिकी वीजा आवेदनों के काफी संख्या में लंबित होने का मुद्दा उठाया। जयशंकर ने कहा कि वीजा में देरी के कारण कई छात्र और परिवार परेशान हैं। जयशंकर ने कहा कि कई परिवार अपने से लंबे समय से नहीं मिल पाए हैं। जयशंकर द्वारा उठा वीजा मुद्दे पर ब्लिंकन ने कहा कि वह इस मामले के प्रति संवेदनशील हैं और इसे सुलझाने के लिए उनके पास योजना है। ब्लिंकन ने माना, एच-1बी और अन्य कार्य वीजा लेने वालों में भारतीयों का बड़ा हिस्सा है। इनमें से बहुत से आईटी क्षेत्र से संबंधित हैं। इससे पहले एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के समक्ष भारत से अमेरिकी वीजा आवेदनों के काफी संख्या में लंबित होने का मुद्दा उठाया। इस पर शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि वह इस मामले के प्रति संवेदनशील हैं और इसे सुलझाने के लिये उनके पास योजना है। ब्लिंकन ने माना, एच-1बी और अन्य कार्य वीजा लेने वालों में भारतीयों का बड़ा हिस्सा है। इनमें से बहुत से आईटी क्षेत्र से संबंधित हैं। ब्लिंकन ने भारतीय नागरिकों के वीजा आवेदन लंबित होने के लिए कोविड-19 महामारी को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिका द्वारा मार्च 2020 में महामारी के चलते दुनियाभर में करीब सभी वीजा आवेदनों पर आगे बढ़ने की प्रक्रिया रोकने के बाद अमेरिकी वीजा सेवाएं अब लंबित आवेदनों के निस्तारण की कोशिश कर रही हैं। दोनों नेताओं ने कहा, प्रतिभा के विकास और आवाजाही को सुगम बनाना भी हमारे पारस्परिक हित में है। हम इस बात पर सहमत हुए कि इस पर आने वाली बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए। ब्लिंकन ने वीजा आवेदनों के विलंब पर कहा, हमारे साथ आप भी थोड़ा बर्दाश्त कीजिए। यह अगले कुछ माह में सुव्यवस्थित हो जायेगा, हम इस पर बहुत ध्यान दे रहे हैं। हालांकि जयशंकर ने साझा प्रेसवार्ता में एच-1बी वीजा का जिक्र नहीं किया। जयशंकर ने भारत और अमेरिका के संबंध आज दुनिया के बाकी हिस्सों को प्रभावित करते हैं। जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि आज हमारे संबंध पूरे विश्व को प्रभावित करते हैं। ऐसे कई देश हैं जो व्यक्तिगत और द्विपक्षीय रूप से बेहतरी के कुछ हिस्से के लिए हमारी ओर देखते हैं, जिसके लिए वे समाधान की उम्मीद करते हैं, जिसे दुनिया कई मायनों में खोज रही है।

Published / 2022-09-28 08:08:02
देश के नये प्रधानमंत्री बने सऊदी अरब के प्रिंस मो बिन सलमान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान को मंगलवार को शाही आदेश द्वारा देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। राजकुमार, राजा सलमान के उत्तराधिकारी हैं और उनके पास पहले से ही बहुत सी शक्तियां हैं। राजकाज के रोजमर्रा के काम भी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ही देखते हैं। सऊदी प्रेस एजेंसी ने मोहम्मद बिन सलमान की प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्ति की खबर दी। शाही आदेश में कहा गया कि राजा सलमान मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करना जारी रखेंगे। राजकुमार सलमान (35) को एमबीएस के नाम से भी संबोधित किया जाता है। वह 2030 तक सऊदी अरब की अर्थव्यस्था को बदलना और तेल पर उसकी निर्भरता को खत्म करना चाहते हैं। राजकुमार सलमान को 2018 में हुई पत्रकार खशोगी की हत्या से भी जोड़कर देखा जाता है।

Published / 2022-09-27 09:23:05
जापान के पूर्व पीएम आबे की मौत के ढाई महीने बाद अंतिम संस्कार, आखिर क्यों...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का आज स्टेट फ्यूनरल (राजकीय अंतिम संस्कार) टोक्यो में हुआ। इसमें दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने के लिए टोक्यो पहुंचे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टोक्यो पहुंच आबे को अंतिम विदाई दी। ये दुनिया का सबसे महंगा अंतिम संस्कार बताया जा रहा है। इसमें 97 करोड़ रुपये खर्च हुए। शिंजो आबे की आठ जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी को मौके से ही पकड़ लिया गया था। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आठ जुलाई को जब आबे की मौत हो गई थी, तो अब ढाई महीने बाद उनका अंतिम संस्कार क्यों हो रहा है? जापान में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया क्या होती है? क्यों आज हो रहा अंतिम संस्कार : दरअसल, आठ जुलाई को शिंजो आबे की हत्या हुई थी। इसके बाद परिवार ने बौद्ध परंपरा के अनुसार 15 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। आज जो स्टेट फ्यूनरल यानी राजकीय अंतिम संस्कार हुआ है वो सांकेतिक है। इसमें आबे की अस्थियों को श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। आबे की अंतिम विदाई के लिए दुनियाभर के 217 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। इस दौरान लोगों ने आबे से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके लिए जापान पहुंचे हैं। शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में से एक रहे हैं। जापान में कैसे होता है अंतिम संस्कार : जापान में ज्यादातर लोग बौद्ध परंपरा के अनुसार शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। इसके अनुसार मरने के बाद परिजन मृतक के होंठों पर पानी लगाते हैं। जिसे अंतिम समय का जल कहा जाता है। मौत के अगले दिन वेक की परंपरा है, जिसमें जान-पहचान वाले लोग जुटते हैं। वह मृतक की बॉडी का आखिरी दर्शन करते हैं। इस दौरान उनसे जुड़ी यादों को साझा करते हैं। पुरुष काले सूट, सफेद शर्ट और काली टाई लगा कर आते हैं। वहीं, महिलाएं काले रंग के कपड़े पहन कर आती हैं। कई बार लोग मृतक के परिजनों को काले या सिल्वर रंग के लिफाफे में पैसे भी देते हैं। बौद्ध परंपरा के अनुसार मंत्र भी पढ़े जाते हैं। इसके बाद हिंदू धर्म की तरह शवों को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है। मतलब शव को जलाने से जुड़ी परंपरा है। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के एक चेंबर में ताबूत को धीरे-धीरे खिसका दिया जाता है। इस दौरान परिजन वहां मौजूद रहते हैं। ताबूत के पूरी तरह से चेंबर में जाने के बाद परिजन वापस घर चले जाते हैं। दो से तीन घंटे बाद परिजनों को फिर से बुलाया जाता है और उन्हें मृतक के अवशेष दिये जाते हैं। परिजन चॉप स्टिक से हड्डियों को इकट्ठा करके कलश में रखते हैं। सबसे पहले पैर और फिर सिर की हड्डी कलश में रखी जाती है। सनातन धर्म में अस्थियां विसर्जित होती हैं, तो जापान में उसे दफन किया जाता है हिंदू परंपरा के अनुसार, मृतक की अस्थियों को नदियों में प्रवाहित कर दिया जाता है। वहीं, जापान में थोड़ा हटकर परंपरा है। वहां के लोग कलश में रखे अवशेष को पारिवारिक कब्र में दफन करते हैं। कई लोग सीधे अवशेष को दफन करने के लिए ले जाते हैं, तो वहीं कई लोग कुछ दिन अपने घर पर रखते हैं। कई बार इनको अलग-अलग बांट भी दिया जाता है। जापान में कलश में रखी अस्थियों को रखने की परंपरा भी है। इसके लिए कब्र के आकार की आलमारी बनती है। ये बहुमंजिला इमारतें भी होती हैं। 10 से 12 मंजिला इन इमारतों में कब्र के आकार की छोटी-छोटी आलमारी बनाई जाती हैं, जहां लोग अस्थि कलश रखते हैं। समय-समय पर यहां आकर परिजन श्रद्धांजलि भी देते हैं।

Published / 2022-09-27 08:59:20
रूस छोड़ भाग रहे खौफजदा लोग, बॉर्डर पर 20 किमी लंबा जाम

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पिछले हफ्ते यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को देखते हुए 3 लाख रिजर्व रूसी सैनिकों को तैनात करने के ऐलान के बाद वहां पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग रूस छोड़ने की फिराक में हैं। रूस से बाहर निकलने की कोशिश में अब इस कदर लंबा जाम लग रहा है जो स्पेस से भी दिखाई दे रहा है। रूसी-जॉर्जियाई बॉर्डर पर 20 किलोमीटर तक का लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। मैक्सार टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्वीरों में जॉर्जिया के साथ सटी सीमा पर रूस से बाहर जाने वाली कारों की एक बड़ी लंबी कतार दिख रही है, जो सोमवार को करीब 20 किमी तक बढ़ती चली गई और यह नजारा अपर लार्स बॉर्डर का है। स्थानीय रूसी लोगों ने मीडिया को बताया कि वे बाहर निकलने के लिए 40 से 50 घंटों तक का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच रूस में ही कल सोमवार को एक रूसी सैनिक अधिकारी को एक युवक ने गोली मार दी। लोग वहां पर पुतिन की क्रूर नई नीति 3 लाख अतिरिक्त सैनिकों की भर्ती का विरोध कर रहे हैं। कई अन्य बॉर्डर्स पर भी लग रही लंबी कतार : कुछ इस तरह की तस्वीरें मंगोलिया और रूस के बीच ख्यागट सीमा चौकी पर भी दिखाई दीं। रूसी सुरक्षा सेवाओं के अनुसार, रूसी सेना में शामिल होने से बचने के लिए अब तक 260,000 से अधिक पुरुष देश छोड़कर भाग गये हैं। क्रेमलिन के एक सूत्र ने नोवाया गजेटा यूरोप को बताया कि उन्होंने एक ऐसी खबरी देखी है जिसमें यह दावा किया गया कि बुधवार और शनिवार की रात के बीच 261,000 पुरुषों ने रूस छोड़ दिया था। हालांकि, अखबार ने यह भी कहा कि यह संख्या बहुत अधिक हो सकती है क्योंकि डेटा को अंतिम रूप में एकत्र करके रिपोर्ट करने में अधिक समय लग सकता है। सूत्र के हवाले से यह कहा गया कि प्रशासन के अंदर का माहौल ऐसा है कि सुरक्षा बल और रक्षा मंत्रालय बहुत देर होने से पहले पुतिन को इस आदेश से बाहर निकलने के लिए राजी कर सकेंगे। फिनलैंड भाग गए 8 हजार रूसी लोग : पहले से ही सोमवार को, ऐसी खबरें थीं कि रूसी सेना ने बख्तरबंद कर्मियों को जॉर्जिया के साथ बॉर्डर पर वेरखनी लार्स चेकपॉइंट पर भेज दिये हैं। सोमवार को, यह भी पता चला कि 8,000 से अधिक रूसी लोग सरकार के नये ऐलान से बचने की कोशिश में फिनलैंड भाग गये। फिलहाल क्रेमलिन की ओर से बॉर्डर्स को बंद करने को लेकर अभी तक किसी तरह के आदेश की घोषणा नहीं की गई है। एक दिन पहले कल 8,314 रूसियों ने फिनिश रसियन लैंड बॉर्डर से होते हुए फिनलैंड में प्रवेश कर लिया और यह एक हफ्ते से पहले की तुलना में यह संख्या दोगुनी है। फिनिश बॉर्डर गार्ड में इंटरनेशनल अफेयर्स यूनिट के प्रमुख मैटी पिटकैनिटी ने ट्वीट कर बताया कि शनिवार और रविवार के दौरान कुल 16 886 रूसी लोग यहां पहुंचे, जबकि रविवार को 5,068 रूसी बाहर निकल गये। पुतिन के ऐलान का रूस में भारी विरोध हो रहा है। जारी विरोध के बीच एक युवा हमलावर ने आर्मी रिक्रूटिंग चीफ पर फायरिंग कर दी। हमलावर ने आर्मी रिक्रूटिंग चीफ अलेक्जेंडर एलिसेव के ऊपर चार बार गोली चलायी।

Published / 2022-09-27 08:24:00
कर्मियों को सीपीडीसीएल की हिदायत : फोन पर कम, काम पर ज्यादा ध्यान दो...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोग अब ज्यादातर अपने मोबाइल फोन में ही डूबे हुए नजर आते हैं। दफ्तर हो या घर हाथ में मोबाइल एक पल भी लोगों से छूटता नहीं। सरकारी कर्मचारियों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर यह राज्य रोक लगाने जा रहा है। कार्यालय में "व्यवधान रहित" माहौल बनाने के मकसद से सरकारी आंध्र प्रदेश केंद्रीय बिजली वितरण निगम लिमिटेड (सीपीडीसीएल) के सभी कर्मचारियों पर 1 अक्टूबर से ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सीपीडीसीएल ने कहा कि संचार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट वास्तव में शोर पैदा करने का माध्यम बन गये हैं क्योंकि अपने काम के घंटे के दौरान कर्मचारी अपने मोबाइल फोन पर समय बर्बाद कर रहे हैं, जिससे कार्यालय के दैनिक काम में बाधा आ रही है। सीपीडीसीएल ने कहा कि इसलिए सीपीडीसीएल की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जे पद्म रेड्डी ने कार्यालय में कार्य अवधि के दौरान कर्मचारियों द्वारा मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। हालांकि, संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिबंध से छूट दी गई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह संभवत: किसी भी सरकारी संगठन में अपनी तरह का पहला आदेश है। एक अक्टूबर से सीपीडीसीएल के सभी कार्यालयों में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों, रिकॉर्ड सहायकों, टाइपिस्टों, कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सहायकों तथा आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्यस्थल में प्रवेश करते समय अपने मोबाइल फोन जमा करने होंगे। सीएमडी ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी कर्मचारी को कार्य के दौरान किसी से फोन पर बात करने या संदेश भेजने की अनुमति नहीं होगी। वे सिर्फ लंच ब्रेक और चाय अवकाश के दौरान फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आपात स्थिति में कर्मचारियों को अपने उच्च अधिकारियों को मोबाइल फोन पर सूचित करना होगा।

Published / 2022-09-27 07:57:06
ईरान : हिजाब की आग में अब तक 75 की मौत, सर्वोच्च नेता खामेनेई को हटाने के लग रहे नारे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान में हिजाब के खिलाफ सुलगती आग अब भड़क चुकी है। एक अधिकारी समूह ने कहा कि मोरैलिटी पुलिस हिरासत में कुर्द महिला महसा अमीनी की मौत के बाद भड़की हिंसा में अब तक 75 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि देश में प्रदर्शन से उत्पन्न अशांति के खिलाफ ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग किया, जिसमें 75 से अधिक लोगों की मौत हो गयी।वहीं, ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक मौत का आंकड़ा 41 बताया है। इस हिंसक प्रदर्शन में मरने वालों में सुरक्षा बलों के सदस्य भी शामिल हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के तीन दशक से अधिक के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया। ईरान में महसा अमीनी की मौत से उत्पन्न हिजाब मामले की आग दुनिया भर में फैलती जा रही है। ईरान समेत विदेशों में इसको लेकर एंटी-हिजाब प्रदर्शन जारी हैं। ईरानी महिलाएं अपने हिजाब जला रही हैं और बाल काट कर विरोध जता रही हैं। वह हिजाब कानून का विरोध कर रही हैं। अमेरिका ने महिलाओं के इस विरोध प्रदर्शन में साथ देने का वादा किया है। बताया जा रहा है कि महसा को ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने इसलिए गिरफ्तार किया था क्योंकि उन्होंने ठीक से हिजाब नहीं पहना था जो देश में महिलाओं के लिए तय ड्रेस कोड के खिलाफ है। वहीं, अमेरिका ने महिला की कथित तौर पर पुलिस कस्टडी में मौत के मामले को लेकर ईरान की मोरैलिटी पुलिस पर प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने कहा कि एंटी हिजाब प्रदर्शन के दौरान 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि, महसा अमीनी की मौत के बाद महिलाओं के हिजाब पहनने को लेकर बनाये गये सख्त कानून पर ईरानी महिलाओं ने सवाल खड़े कर दिये हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने एएफपी को बताया कि तेहरान और अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारी सोमवार की रात फिर से सड़कों पर उतर आये। 16 सितंबर को अमिनी की मौत के बाद से देशव्यापी प्रदर्शन जारी है।

Published / 2022-09-26 17:52:22
पैसे भूल मौज करें गूगल के कर्मचारी : सुंदर पिचाई

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई अपने सफलता को लेकर आए दिन चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस समय वो अपने एक अनोखे बयान को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। लगातार दूसरी तिमाही में उम्मीद से कम कमाई होने पर गूगल ने अपने कर्मचारियों के यात्रा और मनोरंजन के लिए बजट को घटा दिया है। इसके बाद यह जानकारी सामने आई थी कि इस बदलाव को लेकर कंपनी में कई कर्मचारी नाखुश हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कर्मचारियों से कहा है कि वो इन बातों से परेशान होने के बजाय, काम का मजा लें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिचाई को पिछले हफ्ते हुई एक मीटिंग में अपने कर्मचारियों के सवालों का सामना करना पड़ा था। इस मीटिंग में पिचाई से कॉस्ट कटिंग को लेकर सवाल पूछे गये थे। इस दौरान उन्होंने सवालों के जवाब देते हुए कहा कि मौज मस्ती हमेशा नहीं होती, हमें हमेशा मस्ती की तुलना पैसे से नहीं करनी चाहिए। गूगल में हायरिंग पर दिया जवाब : इस मीटिंग में जब पिचाई से गूगल में हायरिंग के बारे में भी पूछा गया। सुंदर पिचाई से कर्मचारियों ने कहा कि इस तरह से सुविधाओं में कमी करने से कर्मचारियों को कमजोर बना रही है। पिचाई ने गूगल पर हायरिंग प्रक्रिया को धीमा करने को लेकर जानकारी दी। उन्होंने संकेत दिया कि गूगल के पास बहुत अधिक लोग हैं और कंपनी इन संख्याओं को नहीं दर्शाती है। साथ ही कहा कि यह कॉस्ट कटिंग बुरे वक्त के लिए की गई है। सर्च इंजन गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा मुझे लगता है कि आप एक हार्डवर्किंग स्टार्टअप के साथ काम कर रहे हैं इसलिए मजे कर रहे होंगे और इसकी पैसों से तुलना नहीं होनी चाहिए। मुझे याद है जब गूगल शुरू हुआ था और इतना बड़ा नहीं था तब सिर्फ काम की बातें होती थी। आईटी कंपनियों पर असर : बता दें कि इन दिनों टेक कंपनियां प्रतिकूल आर्थिक स्थिति को देखते हुए कमर कस रही हैं। दुनियाभर में ब्याज दरें बढ़ रही हैं और स्टार्टअप कल्चर अब इतना आसान नहीं रहा। ऐसे में गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों में उम्मीद से कम कमाई हो रही है। इसलिए ये कंपनियां कर्मचारियों के पर्क और दूसरी सुविधाओं में कटौती कर रही हैं।

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