एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडोनेशिया में एक के बाद एक प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। कुछ घंटे के अंदर ही इंडोनेशिया के लोग बार बार खौफ में जी रहे हैं। पहले इंडोनेशिया में 7.7 मैग्नीच्यूड के साथ भूकंप के जोरदार झटके आये हैं, जो ऑस्ट्रेलिया तक महसूस किए गये हैं, वहीं अब इंडोनेशिया में ज्वालामुखी भी फूटा है, जिसके बाद सैकड़ों को लोगों को प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। इंडोनेशियाई नेशनल सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी ने 8 जनवरी 2023 को पश्चिम सुमात्रा प्रांत की राजधानी पडांग शहर में माउंट मारापी ज्वालामुखी क्षेत्र से 164 पर्वतारोहियों को ज्वालामुखी विस्फोट के बाद सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है।
वहीं, पडंग शहर के प्रमुख अब्दुल मलिक ने कहा कि, पर्वतारोही मारापी पर्वत की चढ़ाई कर रहे थे, जब ज्वालामुखी विस्फोट हुआ। उन्होंने कहा कि 7 जनवरी से राख का निकलना शुरू हो गया था और अब ज्वालामुखी विस्फोट हुआ है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले स्थानीय सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों की मदद से बसरनास ने राहत और बचाव अभियान चलाया था और सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर है। यहां की आबादी का एक बड़ा हिस्सा संक्रमित हो चुका है। अस्पतालों में बेड और डॉक्टरों की भारी कमी है। चीन भले ही अपने यहां के आंकड़ों को छुपा रहा हो, लेकिन दुनिया वहां पर कोरोना का कोहराम देख रही है, लेकिन ताजा हालातों को देखकर कहा जा सकता है कि चीन में हालात और बिगड़ने वाले हैं।
दरअसल, शनिवार से चीन का लूना न्यू ईयर शुरू हो चुका है। इसे 40 दिन का दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन कहा जाता है। दरअसल, यहां इस अवधि में बड़ी संख्या में लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। 21 जनवरी से इसको लेकर आधिकारी छुट्टियां शुरू हो रही हैं। 2020 के बाद ऐसा पहली बार है कि चीन में बिना यात्रा प्रतिबंधों के लूना न्यू ईयर मनाया जायेगा। बता दें कि 2020 से चीन में लागू जीरो कोविड पॉलिसी को खत्म कर दिया गया था और लोगों पर से प्रतिबंध भी हटा लिये गये थे। साथ ही चीन ने कोरोना संक्रमण के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अपनी सीमाएं भी खोल दी है।
40 दिन में 200 करोड़ लोग कर सकते हैं यात्रा
चीन के परिवहन मंत्रालय के एक अनुमान के मुताबिक, अगले 40 दिनों में 200 करोड़ से अधिक लोगों के यात्रा करने का अनुमान है। बता दें कि चीन में इस तरह की यात्राएं आमतौर पर नये साल के दिन से 15 दिन पहले शुरू होती हैं और लगभग 40 दिनों तक चलती हैं। ऐसे में संक्रमण और अधिक बढ़ने की आशंका है।
गली-कूचे में हो रहा अंतिम संस्कार
चीन के वर्तमान हालात इतने खराब हैं कि यहां सरकार लोगों के अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। ट्विटर पर शेयर किए जा रहे वीडियो में सड़कों पर अस्थायी दाह संस्कार दिख रहे हैं। एक सड़क पर एक शव के चारों ओर लोग दिख रहे हैं, जिसके बाद उसमें आग लगा दी जाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में अंतिम संस्कार के लिए काफी लंबी लाइनें हैं। लोगों को बस दस मिनट का ही समय दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यहां के अंतिम संस्कार स्थलों पर सामान्य से पांच गुना शव पहुंच रहे हैं।
हिरासत में लिये गये लोगों को रिहा करेगा चीन
चीनी सरकार ने शनिवार को कोरोनो वायरस से संबंधित घटनाओं के लिए हिरासत में लिये गये लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें, चीन रविवार को 12 बजे से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्रतिबंध को समाप्त कर देगा। इससे एक दिन पहले कोरोना बंदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया गया है।
बुजुर्गों को हो रही इलाज में मुश्किल
बीजिंग के चेन नामक व्यक्ति की मानें तो चीन में कोविड के इलाज का बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि पिछले माह उनके 85 साल के पिता कोविड संक्रमित हुए तो उन्हें न एंबुलेंस मिली न डॉक्टर। जैसे तैसे उन्हें चायोयांग अस्पताल लेकर गये तो कहा गया कि वे या तो दूसरे अस्पताल जायें या पिता को गलियारे में आईवी ड्रिप लगवाकर बैठ जायें। वहां न बेड मिले, न श्वसन में सहायक मशीन और न अन्य मेडिकल उपकरण। हालांकि, विशेष संपर्कों के जरिए उनके पिता को दूसरे अस्पताल में जगह मिल गयी, लेकिन तब तक उन्हें फेफड़े में गंभीर संक्रमण फैल चुका था, वह जैसे तैसे बचे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन के कोरोना से निपटने के रवैये से डब्ल्यूएचओ समेत दुनिया के कई देश चिंतित दिख रहे हैं। चीन जिस तरह से कोरोना के आंकड़े छिपा रहा है उससे पड़ोसी देश तो सतर्क हो ही गये हैं उससे भी अधिक सतर्क अमेरिका दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बयान जारी कर ड्रैगन को नसीहत तक दे डाली है।
बाइडन ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हां मैं चीन के कोरोना से निपटने के इस रवैये से चिंतित हूं। चीन मामले की गंभीरता को समझ नहीं रहा है। इसलिए भारत, अमेरिका समेत कई देशों ने चीन से आने वाले यात्रियों के लिए जांच अनिवार्य कर दिया है। यानी जो भी यात्री चीन से आयेंगे उन्हें 72 घंटे भीतर के निगेटिव रिपार्ट के साथ-साथ आरटीपीसीआर टेस्ट से भी गुजरना होगा।
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि चीन फिलहाल कोरोना महामारी के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश है। चीन को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। चीन अपने फायदे के लिए महामारी को नजरअंदाज कर रहा है। बाइडन ने कहा कि चीन को टेस्टिंग बढ़ानी चाहिए ताकि सही आंकड़े सामने आ सके। चीन इसे नियंत्रण में करे और विवेकपूर्ण कदम उठाये ताकि हम किसी भी संभावित वेरिएंट के प्रसार को रोकने के लिए वह सब कुछ करें जो हम कर सकते हैं।
बाइडेन प्रशासन ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान का यह सुनिश्चित करने में साझा मत है कि तालिबान आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने दें। आतंकवाद एक अभिशाप बना हुआ है जिसने इतने सारे पाकिस्तानी, अफगान और अन्य निर्दोष लोगों की जान ले ली है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान का वास्तव में यह सुनिश्चित करने में साझा हित है कि तालिबान प्रतिबद्धताओं पर खरा उतरे और आईएसआईएस-के जैसे आतंकवादी समूह विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने अपने दैनिक समाचार सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा कि अल-कायदा की तरह टीटीपी अब क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने में सक्षम नहीं है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान की सरकार ने इस वर्ष देश की आबादी बढ़ाने की मुहिम में ज्यादा जोर लगाने का संकल्प लिया है। बच्चे पैदा करने के लिए परिवारों को प्रोत्साहित करने की अब नई योजना घोषित की गई है। इसके तहत टोक्यो महानगर से बाहर के इलाके में जाकर बसने वाले परिवार को हर बच्चे पर कम से कम दस लाख येन (लगभग 7,500 डॉलर) की सहायता दी जायेगी। यह योजना पहले से मौजूद है, लेकिन पहले इस सहायता की रकम सिर्फ तीन लाख येन थी।
सरकार का मकसद यह है कि दंपति अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित हों। योजना 2019 में शुरू की गई थी। इसके तहत परिवारों को उन इलाकों में जाकर बसने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जहां जन्म दर काफी घट चुकी है और आबादी में बुजुर्गों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक हो गई है। इसीलिए परिवारों को टोक्यो महानगर से वैसे इलाकों में जाकर बसने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नई घोषणा के मुताबिक जो लोग साइतामा, चिबा, कानागावा आदि जैसी जगहों पर रहते हुए अपने काम के सिलसिले में टोक्यो से आना-जाना करेंगे, वे भी इस योजना का लाभ पाने के हकदार होंगे। परिवारों को इस योजना के तहत लाभार्थी बनने के लिए तीन में से किसी एक शर्त को पूरा करना होगा। ये शर्तें हैं- जिस इलाके में जाकर वे बसे हैं, अगर वहां वे किसी छोटी या मझौली कंपनी में नौकरी कर रहे हों, नई जगह पर बसने के बावजूद इंटरनेट के जरिए अपना पुराना काम कर रहे हों, या बसने की नई जगह पर उन्होंने कोई बिजनेस शुरू किया हो।
सरकारी घोषणा के मुताबिक लगभग 1300 यानी देश की तकरीबन 80 फीसदी नगरपालिकाएं इस कार्यक्रम में हिस्सेदार हैं। 2021 में 1,184 परिवारों ने इस री-लोकेशन (नई जगह जाकर बसने की) योजना का लाभ उठाया। 2019 में 71 और 2020 में 290 परिवारों ने योजना का लाभ उठाया था।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक जापान सरकार का लक्ष्य देश को डिजिटल गार्डन नेशन बनाना है। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खास जोर दिया जा रहा है। इसी मकसद से लोगों को ग्रामीण इलाकों में जाकर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उन इलाकों में पर्याप्त आबादी रहे। नई योजना के तहत सरकार का लक्ष्य 2023 से 2027 तक दस हजार परिवारों को टोक्यो महानगर से दूसरी जगह जाकर बसने के लिए राजी कराना है।
परिवारों को उनमें मौजूद बच्चों की संख्या के मुताबिक प्रोत्साहन राशि देने का फैसला इसी मकसद से किया गया है। इस योजना के तहत जहां एक बच्चे वाले परिवार को दस लाख येन दिए जाएंगे, वहीं दो बच्चे वाले परिवार को 30 लाख येन की रकम मिलेगी। यह प्रोत्साहन राशि बिना इस बात का ख्याल किए दी जायेगी कि संबंधित परिवार की आमदनी कितनी है।
डिजिटल गार्डन नेशन योजना के तहत स्थानीय सरकारों को डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए सब्सिडी दी जा रही है। उन्हें अपने इलाके में बिना ड्राइवर वाली बसों को चलाने और रिमोट मेडिकल देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्या नडेला ने मंगलवार को कहा कि भारत को इस दशक के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने वाली तीन सकारात्मक बातें तकनीकी क्षेत्र में नजर आ रही हैं। इनमें तेजी से बढ़ते कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रोजेक्ट, भारतीय कार्य बल द्वारा अपनी क्षमताएं लगातार सुधारना और गिटहब पर डेवलपर्स की गतिविधियां शामिल हैं।
मुंबई में आयोजित माइक्रोसॉफ्ट फ्यूचर रेडी लीडरशिप समिट में नडेला ने कहा कि लगातार शिक्षा लेते रहना बेहद महत्वपूर्ण है। जब आपकी कार्य शक्ति अपनी क्षमताएं लगातार अपडेट करती है, बल्कि इस पर गर्व करती हैं तो बाजार भी इसके अच्छे परिणाम देता है। तीनों ही तथ्य मुझे भारत के प्रति बेहद सकारात्मक बना रही हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पिछले महीने प्रतिबंध हटाने के बाद से चीन में कोरोना के मामलों में भारी उछाल आया है। दुनिया के कई देश अब इस बात से चिंतित होने लगे हैं कि चीन कोरोना के सही आंकड़े पेश नहीं कर रहा है जिससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है कि कोरोना के प्रसार की वास्तविक स्थिति क्या है? यानी ड्रैगन की अपारदर्शिता लोगों के लिए खतरा बनकर सामने आ सकती है। बता दें कि भारी दबाव के बाद चीन ने सात दिसंबर को प्रतिबंधों को खोलना शुरू कर दिया जिसके बाद वहां 15 लोगों की मौत की सूचना सामने आई। इसके तुरंत बाद सरकार ने उन मानदंडों को संकुचित कर दिया जिनके द्वारा वायरस से होने वाली मौतों को दर्ज किया जाता है।
अधिकारियों ने भी माना डाटा का पैमाना बहुत छोटा : चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने पिछले हफ्ते स्वीकार किया था कि एकत्र किये गये डाटा का पैमाना अनिवार्य सामूहिक पीसीआर परीक्षण की तुलना में बहुत छोटा है। सीडीसी अधिकारी यिन वेनवु ने कहा कि अधिकारी अब अस्पतालों और स्थानीय सरकारी सर्वेक्षणों के साथ-साथ आपातकालीन कॉल वॉल्यूम और बुखार की दवा की बिक्री से डेटा संकलित कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों ने पिछले सप्ताह कहा था कि वे संक्रमण डाटा पर पारदर्शिता की कमी के कारण चीन से आगमन पर परीक्षण प्रतिबंध लगा रहे हैं।
चीन ने दैनिक संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े प्रकाशित करना बंद किया
बीजिंग ने स्वीकार किया है कि पिछले महीने अनिवार्य सामूहिक परीक्षण के अंत के बाद प्रकोप के पैमाने को ट्रैक करना असंभव हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने दैनिक राष्ट्रव्यापी संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े प्रकाशित करना बंद कर दिया है। यह जिम्मेदारी चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) को हस्तांतरित कर दी गयी है, जो चीन द्वारा आठ जनवरी को बीमारी के लिए अपने प्रबंधन प्रोटोकॉल को डाउनग्रेड करने के बाद महीने में केवल एक बार आंकड़े प्रकाशित करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमएफ प्रमुख ने चेतावनी दी कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन को 2023 तक एक कठिन शुरुआत का सामना करना पड़ेगा। इस जीरो-कोविड पॉलिसी के कारण चीन 2022 में नाटकीय रूप से काफी स्लो हो गया है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष ग्लोबल इकोनॉमी का एक तिहाई हिस्सा मंदी में रहेगा।
अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन में मंदी आने की वजह से साल 2022 की तुलना में साल 2023 ज्यादा कठिन होगा बीबीसी ने रविवार को सीबीएस न्यूज से जॉर्जीवा के हवाले से कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि ग्लोबल इकोनॉमी का एक तिहाई मंदी में होगा। उन्होंने कहा कि यहां तक कि जो देश मंदी की चपेट में नहीं हैं, वहां के करोड़ों लोगों के लिए मंदी जैसा महसूस होगा।
आईएमएफ प्रमुख ने आगे चेतावनी दी कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन को 2023 तक एक कठिन शुरुआत का सामना करना पड़ेगा। इस जीरो-कोविड पॉलिसी के कारण चीन 2022 में नाटकीय रूप से काफी स्लो हो गया है। 40 वर्षों में पहली बार 2022 में चीन की की ग्रोथ ग्लोबल इकोनॉमी के औसत से नीचे रहने की संभावना है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीने चीन के लिए कठिन होंगे और चीनी विकास पर प्रभाव नकारात्मक होगा, क्षेत्र पर प्रभाव नकारात्मक होगा, वैश्विक विकास पर प्रभाव नकारात्मक होगा। यह चेतावनी रूस-यूक्रेन युद्ध, बढ़ती कीमतों, उच्च ब्याज दरों और चीन में कोविड-19 महामारी की नई लहर के ग्लोबल इकोनॉमी पर दबाव के रूप में आयी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना महामारी के साए के बीच दुनिया के कई देशों में लोग नये साल का जश्न काफी उत्साह से मना रहे हैं। महामारी के खतरे के बीच कई लोग सड़क पर भी उतरे दिखे। लेकिन सबसे हैरान करने वाले दृश्य चीन से सामने आये हैं जहां कोरोना विस्फोट के कारण मच रही तबाही के बावजूद लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे नजर आये।
भारी संख्या में लोग गुब्बारे छोड़ने के साथ-साथ आतिशबाजी करते दिखे। कई लोग एक दूसरे के गले लगते भी दिखे। हालांकि, इस दौरान सभी लोग मास्क लगाये हुए दिखे।
चीन में नए साल पर इस तरह से लापरवाही को लेकर लोगों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बात भी की है। 17 वर्षीय वुहान हाई स्कूल के छात्र ने कहा कि पिछले साल के अंतिम महीने से कोरोना महामारी बहुत गंभीर स्थिति में है और मेरे परिवार के कुछ सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन हमलोग लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए यह जश्न मना रहे हैं।
लोगों के मन से डर भगाना चाहते हैं। वहीं एक महिला ने कहा कि मुझे पहले डर लगा कि मैं फिर से कहीं संक्रमित न हो जाऊं लेकिन फिर मैंने सड़कों पर भारी संख्या में लोगों को देखा फिर मैं खुद को रोक नहीं सकी।
ऑस्ट्रेलिया स्थित एक प्रकाशन न्यूज डॉट कॉम डॉट एयू ने बताया कि एक डेटा फर्म के अनुसार, चीन में कोरोना के कारण होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर प्रति दिन 9,000 हो गयी है। न्यूज डॉट कॉम डॉट एयू की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटिश-आधारित शोध फर्म एयरफिनिटी ने अनुमान लगाया है कि चीन में कोविड से मरने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है क्योंकि संक्रमितों की संख्या बढ़ गयी है।
एक दिन में कोरोना के 37 लाख मामले आ सकते हैं। 23 जनवरी तक चीन में कुल 5,84,000 मौतों की आशंका है। न्यूज डॉट कॉम डॉट एयू के अनुसार बीजिंग पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छुपाने का आरोप लगाया गया है, इसलिए सही संख्या का आकलन करना मुश्किल है। हालांकि, चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) ने पिछले हफ्ते पुष्टि की थी कि देश का मौजूदा प्रकोप दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा है।
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