एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के कैलिफोर्निया में दो दिन के अंदर ही गोलीबारी की दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं। बताया गया है कि यहां हाफ मून बे इलाके में स्थानीय समयानुसार सोमवार शाम शूटिंग की घटना हुई। इसमें सात लोगों की मौत की खबर है। इसके अलावा आइओवा राज्य में भी एक शूटिंग की घटना में दो लोगों की जान चली गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ है। पुलिस का कहना है कि हाफ मून बे इलाके में हुई घटना में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
गोलीबारी की घटना सोमवार दोपहर डेस मोइनेस आयोवा चार्टर स्कूल में हुई। गोलीबारी में घायल हुए छात्रों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना में तीन लोग घायल हुए थे, एक का उपचार किया जा रहा है। गोली लगने से घायल तीसरा व्यक्ति स्कूल का शिक्षक है जिसकी सर्जरी की गई है। हालांकि, अभी तक मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने गोली मारने वाले आरोपियों के नाम जारी नहीं किये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियों में हाल में हुई छंटनी के बाद बेरोजगार हो चुके आईटी क्षेत्र के हजारों भारतीय पेशेवर अब इस देश में रहने के लिए अपने कामकाजी वीजा के तहत निर्धारित अवधि के भीतर नया रोजगार पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक पिछले वर्ष नवंबर से आईटी क्षेत्र के करीब दो लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है। इनमें रिकॉर्ड संख्या में कटौती करने वाली कंपनियों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और अमेजन हैं।
सूत्रों ने बताया कि नौकरियों से निकाले गए लोगों में से 30 से 40 फीसदी भारतीय आईटी पेशेवर हैं। इनमें बड़ी संख्या एच-1बी या एल1 वीजा पर यहां आये लोगों की है। अब ये लोग अमेरिका में बने रहने के लिए विकल्प की खोज में हैं और नौकरी जाने के बाद विदेशी कामकाजी वीजा के तहत मिलने वाले कुछ महीनों की निर्धारित अवधि में नया रोजगार तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे अपनी वीजा स्थिति को भी बदल सकें। अमेजन में काम करने के लिए गीता (नाम परिवर्तित) महज तीन महीने पहले यहां आयी थीं। इस सप्ताह उन्हें बताया गया कि 20 मार्च उनके कार्यकाल का अंतिम दिन होगा। एच-1बी वीजा पर अमेरिका आई एक अन्य आईटी पेशेवर को माइक्रोसॉफ्ट ने 18 जनवरी को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
वह कहती हैं कि स्थिति बहुत खराब है। जो लोग एच-1बी वीजा पर यहां आए हैं, उनके लिए तो स्थिति और भी विकट है, क्योंकि उन्हें 60 दिन के भीतर नयी नौकरी ढूंढ़नी होगी या फिर भारत लौटना होगा। सिलिकॉन वैली में उद्यमी और सामुदायिक नेता अजय जैन भूतोड़िया ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र के हजारों कर्मचारियों को नौकरियों से निकाला जा रहा है, विशेषकर एच-1बी वीजा पर आए लोगों के लिए तो चुनौतियां और भी बड़ी हैं।
ग्लोबल इंडियन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन (जीआईटीपीआरओ) और फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने इन आईटी पेशेवरों की मदद करने के लिए रविवार को एक सामुदायिक पहल शुरू की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में एक हफ्ते में 13 हजार लोगों की मौत की खबर सामने आयी है। वहीं चीन के महामारी विशेषज्ञ का कहना है कि करीब 80 फीसदी चीनी नागरिक पहले ही वायरस की चपेट में आ चुके हैं ऐसे में निकट भविष्य में दूसरी लहर आने की कोई आशंका नहीं है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने रविवार को कहा कि 13 से 19 जनवरी के बीच सात दिनों में अस्पतालों में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 12,658 तक पहुंच गयी। जीरो-कोविड पॉलिसी के अचानक समाप्त किये जाने के बाद चीन में 8 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच लगभग 60,000 मौतें हुई थीं।
वहीं सीडीसी के मुख्य महामारी विज्ञानी वू जुयोउ ने अगले कुछ महीने में दूसरी लहर के संभावित खतरे को खारिज किया है वहीं चंद्र नव वर्ष के दौरान बुजुर्गों और कमजोर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वू ने शनिवार को चीनी सोशल मीडिया साइट वीबो पर लिखा कि चीनी नव वर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों के घूमने से कुछ हद तक महामारी के प्रसार को तेज कर हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
वू ने कहा कि क्योंकि नई लहर ने देश में लगभग 80 प्रतिशत लोगों को संक्रमित कर दिया है, ऐसे में अगले दो से तीन महीनों में बड़े पैमाने पर महामारी का प्रकोप बढ़ने या दूसरी लहर की संभावना कम है।
चीन में जीवन सामान्य लेकिन खतरा टला नहीं : चीन के बिना किसी तैयारी किए पिछले महीने अपनी कोविड संबंधी सभी नियमों को खत्म कर दिया था। जिसके बाद से ही चीन में कोरोना मामलों में अचानक तेजी देखने को मिली थी। अधिकारियों ने कोविड से होने वाली मौतों की परिभाषा को सीमित करने के बाद मरने वालों की आधिकारिक संख्या पर संदेह जताया जा रहा है।
नये मामलों की शुरुआती लहर के बाद से, चीन के अधिकांश हिस्सों में जीवन काफी हद तक सामान्य हो गया है। अधिकारियों ने हालांकि लूनर न्यू ईयर के मौके पर यात्रा करने वालों की भीड़ के मद्देनजर ग्रामीण इलाकों में वायरस के और प्रसार को लेकर चिंता व्यक्त की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान का व्यापार घाटा 2022 में बढ़कर 156 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि ऊर्जा आयात बढ़ते के चलते ऐसा हुआ। मंत्रालय ने कहा कि व्यापार घाटा 1979 के बाद से सबसे अधिक है।
इसी साल से व्यापार घाटा के तुलनात्मक आंकड़े जमा करना शुरू किया गया था। वर्ष 2022 में आयात और निर्यात, दोनों रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गये।
समीक्षाधीन वर्ष में निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 766 अरब डॉलर हो गया, जिसकी अगुवाई वाहन उद्योग ने की। दूसरी ओर तेल, कोयला और प्राकृतिक गैस समेत आयात सालाना सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 922 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की मुश्किलें आये दिन बढ़ती जा रही हैं। घर से गोपनीय दस्तावेज मिलने के मामले में उनकी परेशानी कम होती नहीं दिख रही है। दरअसल, जो बाइडन के घर पर एक बार फिर से छापेमारी की गयी है। अमेरिकी न्याय विभाग की छापेमारी के दौरान बाइडन के घर से छह और गोपनीय दस्तावेज मिले हैं जो कि उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकती हैं।
इस बात की पुष्टि बाइडन के निजी वकील बॉब बाउर ने की है। वकील बॉब बाउर ने बताया कि यह तलाशी करीब 12 घंटे तक चली। वहीं जांच को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि नवंबर में उनके निजी कार्यालय में गोपनीय दस्तावेज पाये जाने से पहले उनका खुलासा नहीं करने पर कोई पछतावा नहीं है।
उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं और इसे जल्दी से हल करने के लिए उत्सुक हैं। मुझे लगता है कि आप पायेंगे कि वहां कुछ भी नहीं है। मुझे कोई पछतावा नहीं है। वकीलों ने मुझे जो बताया है, मैं उसका पालन कर रहा हूं। घटनाक्रम के सामने आने के बाद करीब हफ्ते भर में उनकी पहली सार्वजनिक टिप्पणी आयी है।
जानें उनकी हैप्पीनैस का राज.... एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे कोई दुख या तकलीफ न हो। अगर आपसे कहा जाए कि एक ऐसा इंसान है जो दुनिया का सबसे खुश शख्स माना जाता है तो आपको इस बात पर विश्वास ही नहीं होगा क्योंकि हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ उलझन बनी ही रहती है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं मैथ्यू रिचर्ड के बारे में। मैथ्यू रिचर्ड का जन्म फ्रांस में हुआ था। वह एक बौद्ध भिक्षु थे। उन्हें दुनिया का सबसे खुश इंसान होने का दर्जा प्राप्त है। मैथ्यू का दावा है कि वह कभी उदास नहीं होते। हालांकि यह सिर्फ उनका दावा नहीं है, वैज्ञानिकों ने उन पर रिसर्च भी की जिससे यह पता चला है कि वह दुखी नहीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मैथ्यू आखिरी बार 1991 में डिप्रैस हुए थे। साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी हैप्पीनैस इंडैक्स रिपोर्ट में मैथ्यू को दुनिया का सबसे खुश व्यक्ति घोषित किया था। यूनीलैड वैबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 76 वर्षीय मैथ्यू पर अमेरिका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट ने शोध किया था। उन्होंने मैथ्यू के सिर पर 256 सैंसर लगा दिए जिसमें यह पता चला कि जब रिचर्ड ध्यान करते थे, तो उनके मस्तिष्क में गामा तरंगें उत्पन्न होती थीं। ये गामा तरंगें ध्यान, सीखने और स्मृति से जुड़ी हैं। शोध में यह भी पाया गया कि उनके दिमाग का बायां प्रीफ्रंटल कॉर्टैक्स दाएं हिस्से की तुलना में अधिक सक्रिय था। इससे पता चला कि दिमाग का खुश हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है। इस प्रकार उन्होंने ध्यान के माध्यम से अपने मन को जगाया है। बता दें कि मैथ्यू रिचर्ड लोगों को खुश रहने का राज भी बताते हैं। उनका कहना है कि इंसान हमेशा अपने बारे में सोचता है। तब वह पूरी दुनिया को अपना दुश्मन मानता है और उनके साथ प्रतिस्पर्धा में रहता है। उनका कहा है कि यदि व्यक्ति सुखी रहना चाहता है तो उसे अपने बारे में सोचना बंद कर दूसरों के बारे में सोचना शुरू करना होगा। दूसरों के प्रति चिंता और परोपकार की भावना होती है तो वह खुद ही सुखी होने लगता है। उन्होंने अपने एक व्याख्यान में लोगों से कहा था कि यदि लोग प्रतिदिन 15 मिनट ध्यान करें और सुख देने वाली बातों पर विचार करें तो वे खुद ही प्रसन्नता से भर जाते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रमुख भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने कहा है कि उन्हें लगता है कि वह देश को नयी दिशा में ले जाने वाली नयी नेता हो सकती हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडन को दूसरा कार्यकाल मिलना संभव नहीं।
फॉक्स न्यूज को बृहस्पतिवार को दिये साक्षात्कार में साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने कहा कि वह संभावित राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हो रही हैं। 51 वर्षीय नेता ने कहा कि मुझे लगता है, आप नजर रखें। खैर, मैं यहां कोई घोषणा नहीं करने जा रही हूं। हालांकि, साक्षात्कार के दौरान हेली ने संकेत दिया कि वह अमेरिका की नई नेता हो सकती हैं।
हेली ने कहा कि लेकिन जब आप राष्ट्रपति पद की दौड़ देख रहे हैं, तो आप दो चीजों को देखते हैं। आप पहले देखते हैं कि क्या मौजूदा स्थिति नये नेतृत्व का संकेत दे रही है? दूसरा सवाल यह है कि क्या मैं वह व्यक्ति हूं, जो नया नेता उभर सके, हां, हमें एक नयी दिशा में जाने की जरूरत है? और क्या मैं वह नेता हो सकती हूं? हां, मुझे लगता है कि मैं वह नेता हो सकती हूं। अक्टूबर 2018 में ट्रम्प प्रशासन से इस्तीफा देने वाली हेली ने कहा कि उन्होंने गवर्नर और राजदूत के रूप में बहुत अच्छा काम किया था।
लुइसियाना के साथी रिपब्लिकन बॉबी जिंदल के बाद भारतीय मूल की दूसरी गवर्नर हेली ने कहा कि यह रिपब्लिकन पार्टी में नया नेतृत्व लाने का समय है।
साक्षात्कार के दौरान हेली ने इस बात पर भी जोर दिया कि एक डेमोक्रेट राष्ट्रपति बाइडन को दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जाना चाहिए। अगला अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पांच नवंबर, 2024 को होना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जर्मनी की जनसंख्या अप्रवासन के कारण 2022 के अंत तक कम से कम 8 करोड़ 43 लाख तक की रिकॉर्ड संख्या तक पहुंच गयी है। संघीय सांख्यिकी कार्यालय (डेस्टैटिस) ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
डेस्टैटिस की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश छोड़ने की तुलना में दस लाख 45 हजार से अधिक लोग जर्मनी आ गये। शुद्ध अप्रवास पिछले वर्ष की तुलना में चार गुना अधिक है और 1950 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से उच्चतम स्तर पर है।
फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर पॉप्युलेशन रिसर्च (बीआईबी) के अनुसंधान निदेशक सेबेस्टियन क्लूसेनर ने गुरुवार को शिन्हुआ को बताया कि नये आंकड़े बताते हैं कि जर्मनी में जनसंख्या के विकास के लिए बाहरी प्रवासन महत्वपूर्ण है।
इस बीच, डेस्टैटिस ने रेखांकित किया कि शुद्ध आप्रवासन के बिना, जनसंख्या 1972 के बाद पहले से ही सिकुड़ रही है, क्योंकि हर साल जितने लोग पैदा हुए थे, उससे कहीं अधिक लोगों की मृत्यु हुई है।
डेस्टैटिस ने कहा कि हाल के वर्षों में जर्मनी में आप्रवासन में वृद्धि मुख्य रूप से सीरिया, अफगानिस्तान और इराक में युद्ध और हिंसा के साथ-साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण हुई है। रोमानिया, बुल्गारिया और पोलैंड से लगातार अप्रवास भी देखा गया है।
जर्मन आर्थिक संस्थान के अनुसार, 2022 के मध्य में, यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सभी व्यावसायिक समूहों में आधे पांच लाख से अधिक कुशल श्रमिकों की कमी थी। सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। इसलिए जर्मन सरकार ने गैर-यूरोपीय संघ के देशों से कुशल श्रमिकों की भर्ती में तेजी लाने के लिए देश के कुशल आप्रवासन अधिनियम को अद्यतन किया।
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