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Published / 2026-01-24 16:14:52
यूएस-ईरान तकरार का अब इंटरनेशनल हवाई सेवा पर असर

यूएस-ईरान तनाव चरम पर: प्रमुख यूरोपीय एयरलाइनों ने रोकीं मिडिल ईस्ट की उड़ानें 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर भी साफ दिखने लगा है। यूरोप की प्रमुख एयरलाइनों केएलएम, लुफ्थांसा और एयर फ्रांस ने मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। 

इन गंतव्यों में दुबई, रियाद, दम्माम और तेल अवीव जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। एयरलाइनों ने यह कदम क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और यात्रियों व क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया है। जानकारी के मुताबिक, फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती बढ़ने और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता के माहौल ने एयरलाइनों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। 

एयरलाइनों का कहना है कि वे हालात पर लगातार नजर बनाये हुए हैं और स्थिति सामान्य होने पर ही सेवाएं बहाल की जायेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान टकराव और गहराता है, तो मिडिल ईस्ट के हवाई मार्गों पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और वैश्विक एविएशन सेक्टर को भारी नुकसान होने की आशंका है।

Published / 2026-01-17 18:31:20
कोरोना के बाद नोरोवायरस से दहशत फैला रहा चीन

कोरोना के बाद अब नोरोवायरस से चीन में हड़कंप,  एक स्कूल में 100 से ज्यादा छात्र संक्रमित 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में एक बार फिर वायरस को लेकर चिंता बढ़ गयी है। कोविड-19 के बाद अब नोरोवायरस ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है। दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत में स्थित फोशान शहर के एक सीनियर हाई स्कूल में 100 से ज्यादा छात्र इस वायरस की चपेट में आ गये हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुल 103 छात्रों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि राहत की बात यह है कि सभी संक्रमित छात्रों की हालत सामान्य है। किसी भी छात्र को गंभीर समस्या नहीं हुई है और न ही किसी तरह की मौत की सूचना है। एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर को पूरी तरह से सैनिटाइज कर दिया गया है और छात्रों की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

नोरोवायरस के लक्षण 

संक्रमित छात्रों में पेट से जुड़ी परेशानियां सामने आयी हैं। उन्हें उल्टी और दस्त जैसी दिक्कतें हुईं, जो नोरोवायरस के आम लक्षण माने जाते हैं। सभी छात्रों को जरूरी इलाज दिया जा रहा है और वे चिकित्सकों की निगरानी में हैं। साथ ही यह पता लगाने के लिए जांच भी चल रही है कि वायरस किस वजह से फैला। 

ग्वांगडोंग प्रांत के रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार, इस इलाके में हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच नोरोवायरस के मामले ज्यादा सामने आते हैं। ठंड के मौसम में यह वायरस तेजी से फैलता है और खासतौर पर स्कूलों, हॉस्टल और भीड़भाड़ वाली जगहों पर इसका खतरा बढ़ जाता है। 

नोरोवायरस एक बेहद संक्रामक वायरस है, जो पेट के संक्रमण का कारण बनता है। इसे आम बोलचाल में स्टमक फ्लू भी कहा जाता है, हालांकि इसका फ्लू से कोई सीधा संबंध नहीं होता। इस वायरस से संक्रमित होने पर अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी महसूस होती है। यह वायरस बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, खासकर दूषित खाने, पानी या संक्रमित सतहों के संपर्क में आने से। 

हर साल करोड़ों लोग नोरोवायरस से प्रभावित 

दुनिया भर में हर साल करोड़ों लोग नोरोवायरस से प्रभावित होते हैं। आंकड़ों के अनुसार, सालाना करीब 68 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आते हैं। इनमें 5 साल से कम उम्र के लगभग 20 करोड़ बच्चे शामिल होते हैं। यह वायरस हर साल करीब 2 लाख लोगों की जान भी ले लेता है, जिनमें करीब 50 हजार बच्चे होते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों में देखने को मिलता है, जहां इलाज की सुविधाएं सीमित होती हैं। 

आर्थिक रूप से भी यह वायरस दुनिया को भारी नुकसान पहुंचाता है। इलाज और कामकाज के नुकसान को मिलाकर हर साल करीब 60 अरब डॉलर का आर्थिक असर पड़ता है। अमेरिका में तो यह वायरस खाने से फैलने वाली बीमारियों की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। 

नोरोवायरस का पहला बड़ा मामला

नोरोवायरस का पहला बड़ा मामला साल 1968 में अमेरिका के ओहायो राज्य के नॉरवॉक शहर में सामने आया था। उस समय एक स्कूल में एक साथ कई लोग बीमार पड़ गये थे। इसी घटना के बाद वैज्ञानिकों ने इस वायरस पर रिसर्च शुरू की थी। चूंकि यह बीमारी सबसे पहले नॉरवॉक शहर में पहचानी गई थी, इसलिए शुरुआत में इसे नॉरवॉक वायरस कहा गया, जो बाद में नोरोवायरस के नाम से जाना जाने लगा। 

मौसम के हिसाब से भी इस वायरस का असर अलग-अलग जगहों पर अलग समय में देखने को मिलता है। दुनिया के उत्तरी हिस्सों में यह बीमारी नवंबर से अप्रैल के बीच ज्यादा फैलती है, जबकि दक्षिणी हिस्सों में अप्रैल से सितंबर के बीच इसके मामले बढ़ते हैं। जो देश भूमध्य रेखा के पास स्थित हैं, वहां यह वायरस किसी खास मौसम तक सीमित नहीं रहता और साल भर फैल सकता है। 

फिलहाल चीन में स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से साफ-सफाई और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

Published / 2026-01-09 18:02:32
ट्रंप के टैरिफ अटैक से झुकने वाला नहीं है भारत

ट्रंप के टैरिफ कार्ड पर भारत ने दिया करारा जवाब, कहा- दबाव में नहीं बदलेगी हमारी ऊर्जा नीति 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्रंप द्वारा 500% टैरिफ लगाये जाने वाले सांकेतिक बयान पर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर अपना बयान देते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव या धमकी से नहीं, बल्कि अपने 1.4 अरब नागरिकों की जरूरतों से तय होती है।  

आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला- 

क्या है पूरा मामला? 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में द सेंक्शनिंग आॅफ रसिया एक्ट 2025 को समर्थन दिया है, जिसके तहत रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों विशेषकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500 % तक का भारी-भरकम आयात टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है।

भारत का जवाब 

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा कि भारत इस बिल और इसके घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य अपने नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा मुहैया कराना है। जायसवाल ने कहा कि हमारा रुख जगजाहिर है। हम वैश्विक बाजार के बदलते हालातों और अपनी एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरतों के हिसाब से ही फैसले लेते हैं।

 विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल भारत जैसे रणनीतिक सहयोगियों पर दबाव बनाने की एक कोशिश है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों के साथ समझौता नहीं करेगा।

Published / 2026-01-08 21:40:03
ट्रंप के टैरिफ अटैक से शेयर बाजार में हाहाकार

ट्रंप के टैरिफ कहर से निवेशकों के डूबे 7,68,426.45 करोड़ रुपये, बाजार में मचा हाहाकार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला गुरुवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अमरीका भारत पर रूसी तेल खरीदने पर 500 फीसदी का टैरिफ लगा सकता है। वैसे अभी तक इस बिल को संसद से मंजूरी नहीं मिली है लेकिन माना जा रहा है कि इस बिल को अमरीकी संसद का समर्थन मिल सकता है। 

अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में भारत पर एक मोटा टैरिफ अमरीकी सरकार की ओर से लग सकता है। इस टैरिफ के कहर के डर की वजह से भारत के शेयर बाजार में हाहाकार मच गया और सैंसेक्स में 780 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिली। खास बात तो यह है कि इस गिरावट की वजह से शेयर बाजार निवेशकों के 7,68,426.45 करोड़ रुपए डूब गए हैं।  

2 जनवरी को जहां सेंसेक्स 85,762 के स्तर पर था, वहीं आज 84,180 के स्तर पर बंद हुआ यानि चार कारोबारी सत्रों में इंडेक्स 1,582 अंक टूट चुका है। इस गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 9 लाख करोड़ रुपए घट गया है। 

निवेशकों को कितना नुकसान 

बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, 2 जनवरी को एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,81,24,779.35 करोड़ रुपए था। मौजूदा सत्र में यह घटकर करीब 4,72,25,753.38 करोड़ रुपये रह गया यानी महज चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति में लगभग 899,025.97 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गयी है। वहीं एक दिन में निवेशकों के 768,426.45 करोड़ रुपये डूब गए हैं।  

बाजार क्यों टूट रहा है 

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे ज्यादातर वजहें वैश्विक और भू-राजनीतिक हैं। सबसे बड़ी चिंता अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे प्रस्ताव को समर्थन दिया है, जिसके तहत रूस से व्यापार जारी रखने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। 

इस आशंका ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। जनवरी में अब तक एफआईआई करीब 6,000 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। गौरतलब है कि साल 2025 में भी विदेशी निवेशकों की ओर से रिकॉर्ड आउटफ्लो देखा गया था। 

आगे बाजार का रुख क्या रहेगा 

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब निवेशकों की नजरें कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। साथ ही, अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर स्पष्टता आने से ही विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद की जा रही है।

Published / 2026-01-06 19:21:54
जापान में तेज भूकंप से भारी तबाही

बुरी तरह कांपने लगी इमरातें! घरों की छतें-सड़कें टूटीं, कई लोग घायल 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के पश्चिमी हिस्से में मंगलवार सुबह एक तेज भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, शिमाने प्रांत में सुबह 10:18 बजे (स्थानीय समय) आये इस भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गयी, जबकि इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था। 

भूकंप का असर शिमाने और पड़ोसी तोत्तोरी प्रांत में सबसे ज्यादा देखा गया, जहां जापान के सात-स्तरीय भूकंप पैमाने पर इसकी तीव्रता ऊपरी स्तर 5 तक दर्ज की गयी। भूकंप का केंद्र 35.3 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 133.2 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। 

मुख्य झटके के बाद दो शक्तिशाली आफ्टरशॉक भी महसूस किये गये। पहला आफ्टरशॉक 10:28 बजे (5.1 तीव्रता) और दूसरा 10:37 बजे (5.4 तीव्रता) पर दर्ज किया गया। लगातार झटकों के कारण लोगों में भय का माहौल बना रहा। 

मात्सुए शहर (शिमाने प्रांत) में गिरने और अन्य दुर्घटनाओं के कारण चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई घरों की छतों को नुकसान पहुंचा है।

Published / 2025-12-31 20:25:28
न्यूजीलैंड में आंग्ल नववर्ष 2026 का शानदार स्वागत

स्काई टावर पर भव्य आतिशबाजी, रंगीन रोशनियों से चमका आसमान 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। न्यूजीलैंड के आकलैंड शहर ने बुधवार को शानदार आतिशबाजी के साथ वर्ष 2026 का स्वागत किया। आकलैंड दुनिया के पहले प्रमुख शहरों में शामिल रहा, जहां नये साल की एंट्री हुई। शहर के प्रतिष्ठित स्काई टावर पर हुई भव्य आतिशबाजी ने रात के आसमान को रंगीन रोशनी से भर दिया।

सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) में हजारों लोग जश्न मनाने के लिए जुटे, जहां पूरे उत्साह और उल्लास के साथ नए साल का स्वागत किया गया। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा हैप्पी न्यू ईयर, न्यूजीलैंड! 

आकलैंड के बाद अब आस्ट्रेलिया में जश्न शुरू होगा, जहां सिडनी हार्बर ब्रिज और ओपेरा हाउस पर होने वाली ऐतिहासिक आतिशबाजी दुनिया भर का ध्यान खींचेगी। इसके बाद इंडोनेशिया के बाली, सिंगापुर के मरीना बे, नई दिल्ली, दुबई के बुर्ज खलीफा, लंदन की थेम्स नदी और न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में नए साल के भव्य आयोजन होंगे। 

हालांकि न्यूजीलैंड के पास स्थित दक्षिण प्रशांत द्वीप नीयू और समोआ दुनिया के अंतिम बसे हुए स्थानों में शामिल हैं, जहां नया साल सबसे अंत में मनाया जाता है। वहीं जापान में परंपरागत रूप से लोग साल की पहली सूर्योदय को देखकर नए वर्ष का स्वागत करेंगे।

Published / 2025-12-23 20:12:21
क्रिसमस से पहले रूस ने यूक्रेन को दहलाया

क्रिसमस से पहले रूस का कहर: यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला, 650 ड्रोन और 30 मिसाइलों से बरसाई मौत 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस ने क्रिसमस से कुछ दिन पहले यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक को अंजाम दिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के अनुसार, सोमवार रात रूस ने 650 से अधिक ड्रोन और 30 से ज्यादा मिसाइलें दागीं, जिनसे 13 अलग-अलग क्षेत्रों में भारी तबाही हुई। 

इस हमले में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें एक चार साल का मासूम बच्चा भी शामिल है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर बताया कि हमले का मुख्य निशाना यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली और नागरिक ढांचा था, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है। 

जेलेंस्की ने लिखा कि कीव क्षेत्र में एक महिला की ड्रोन हमले में मौत हो गयी, जबकि ख्मेलनित्स्की और झितोमिर क्षेत्रों में भी जानें गयींं। झितोमिर में एक आवासीय इमारत पर ड्रोन गिरने से चार साल के बच्चे की मौत हो गयी। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। 

हालांकि यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम ने बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें मार गिरायीं, लेकिन इसके बावजूद कई अहम ठिकाने हमले की चपेट में आ गये। जेलेंस्की ने कहा कि मरम्मत दल और ऊर्जा कर्मी तुरंत मौके पर तैनात कर दिये गये हैं ताकि हालात सामान्य किये जा सकें। 

हमले के समय पर सवाल उठाते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला क्रिसमस से पहले और शांति वार्ता के बीच किया गया, जो रूस की मंशा को साफ दर्शाता है। जब लोग अपने परिवारों के साथ घर में सुरक्षित रहना चाहते थे, तब यह हमला किया गया। यह दिखाता है कि पुतिन अब भी हत्या रोकने को तैयार नहीं हैं, जेलेंस्की ने कहा। 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर और कड़ा दबाव बनाने की अपील करते हुए कहा कि अब जवाब देने का वक्त है, ताकि रूस को शांति की ओर मजबूर किया जा सके। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने दावा किया कि रूस शांति के लिए प्रतिबद्ध है। 

उन्होंने बताया कि फ्लोरिडा के मियामी में अमेरिकी और रूसी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही। हालांकि जमीन पर हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

Published / 2025-12-20 23:07:09
रूस और यूक्रेन के बीच तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद!

  • रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या आयेगी गुड न्यूज? जेलेंस्की ने दी ये जानकारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को कहा कि अमेरिका ने मियामी में यूक्रेनी और रूसी टीमों के बीच वार्ता आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। दोनों देशों के अधिकारी युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता के एक और दौर के लिए वहां एकत्रित हुए हैं।

जेलेंस्की ने कहा, जहां तक मुझे समझ आया है, उन्होंने इस प्रारूप का प्रस्ताव रखा है: यूक्रेन, अमेरिका, रूस। उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय देश भी उपस्थित हो सकते हैं और पहले से हो चुकी बैठक के संभावित परिणामों को समझने के बाद इस तरह की संयुक्त बैठक आयोजित करना तर्कसंगत होगा।

रूस ने फिर किया हमला

इस बीच शनिवार को भी रूस के हमले जारी रहे। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा ने शनिवार को बताया कि दक्षिणी यूक्रेन के ओडेसा में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर रूसी मिसाइल हमले में आठ लोग मारे गए और 27 घायल हो गए। इसी बीच, क्रेमलिन का एक दूत लगभग चार साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा प्रस्तावित योजना पर बातचीत के लिए फ्लोरिडा जाने वाला था।

ये चर्चाएं ट्रंप प्रशासन के महीनों से चल रहे शांति प्रयासों का हिस्सा हैं, जिनमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल थीं। यूक्रेन के मुख्य वार्ताकार ने शुक्रवार देर रात कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका में अमेरिकी और यूरोपीय सहयोगियों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर ली हैं।

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