एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक बयान में हिज्जबुल्ला ने कहा कि उसने सीरिया के इजरायली कब्जे वाले गोलान हाइट्स की सीमा पर स्थित विवादित चेबा फार्म्स में इजरायली ठिकानों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और गोले का इस्तेमाल किये जाने की बात कही है।
फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा इजरायल पर विनाशकारी हमले की खबर से तो सभी वाकिफ हैं। लेकिन इजरायल और हमास की जंग के बीच लेबनान का आतंकी संगठन हिज्जबुल्ला भी कूद चुका है। हिज्जबुल्ला ने इजरायल के तीन ठिकानों पर रॉकेट और गोले दागे हैं।
एक बयान में हिज्जबुल्ला ने कहा कि उसने सीरिया के इजरायली कब्जे वाले गोलान हाइट्स की सीमा पर स्थित विवादित चेबा फार्म्स में इजरायली ठिकानों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और गोले का इस्तेमाल किए जाने की बात कही है। इसने फिलिस्तीनी प्रतिरोध के साथ अपनी एकजुटता की भी घोषणा की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह समूह वास्तव में क्या है?
हिज्बुल्लाह के नाम का अर्थ है ईश्वर की पार्टी और ये लेबनान का एक शिया इस्लामी आतंकवादी संगठन है। थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) ने इसे दुनिया का सबसे भारी हथियारों से लैस गैर-राज्य संगठन के रूप में वर्णित किया है, जिसके पास बिना निर्देशित तोपखाने रॉकेटों के साथ-साथ बैलिस्टिक, एंटीएयर, एंटीटैंक और एंटीशिप मिसाइलों का एक बड़ा और विविध भंडार है।
आधुनिक इतिहास में लेबनान 1943 तक फ्रांसीसी जनादेश के अधीन था और इसके समाप्त होने के बाद, सत्ता विभिन्न धार्मिक समूहों में विभाजित हो गयी, जिसमें देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे पद विशेष धार्मिक संप्रदायों के लोगों के लिए आरक्षित थे।
काउंसिल आन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर) के अनुसार, हिजबुल्लाह की उत्पत्ति लेबनानी गृहयुद्ध (1975-1990) के दौरान हुई थी, जो देश में बड़ी, सशस्त्र फिलिस्तीनी उपस्थिति पर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम था।
तनावपूर्ण जातीय और धार्मिक विभाजन के बीच 1948 के बाद से फिलिस्तीनी शरणार्थियों के आगमन यहूदी लोगों के लिए एक देश के रूप में इजराइल के निर्माण ने तनाव को और बढ़ा दिया। उनकी उपस्थिति के कारण 1978 में और फिर 1982 में फिलिस्तीनी गुरिल्ला लड़ाकों को खदेड़ने के लिए इजरायली सेनाओं ने दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया।
इससे हिजबुल्लाह का गठन हो गया, जो 1979 में ईरान में एक धार्मिक इस्लामी सरकार के गठन से भी प्रेरित है। सीएफआर के अनुसार ईरान और उसके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने नवोदित मिलिशिया को धन और प्रशिक्षण प्रदान किया।
इसलिए, यह पश्चिम एशिया की दो प्रमुख शक्तियों और उनकी प्रतिद्वंद्विता को भी दशार्ता है। अमेरिका का अनुमान है कि ईरान हिजबुल्लाह को करोड़ों डॉलर की फंडिंग देता है और उसके पास हजारों लड़ाके हैं।
यह पश्चिम एशिया में इजराइल और पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता है। इसने रूस और ईरान के साथ मिलकर पड़ोसी सीरिया में गृह युद्ध के दौरान राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का भी समर्थन किया है।
2000 के दशक के मध्य में लेबनानी राजनीति में अधिक दिखाई देने लगा और वर्तमान में देश की 128 सदस्यीय संसद में से 13 पर इसका कब्जा है। सहयोगियों के साथ वह सत्तारूढ़ सरकार का हिस्सा है। लेकिन हाल के वर्षों में, देश में बेरोजगारी, सरकारी ऋण और गरीबी जैसे बिगड़ते मुद्दों के साथ इसके काम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
हिजबुल्लाह ने लक्षित हमले किये हैं जैसे कि 1983 में लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी और फ्रांसीसी सैनिकों के आवास वाले बैरक पर आत्मघाती हमला, जिसमें तीन सौ से अधिक लोग मारे गये थे। खाड़ी सहयोग परिषद जैसी कई पश्चिमी सरकारें इसे एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करती हैं।
खाड़ी सहयोग परिषद में छह पश्चिम एशियाई देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इजराइल और हिजबुल्लाह ने पहली बार 2006 में एक महीने तक युद्ध लड़ा था और अक्सर गोलीबारी होती रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। फिलिस्तीन और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण 1,23,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी में अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह जानकारी मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने दी।
ओसीएचए ने एक बयान में कहा कि रविवार रात 9 बजे तक, गाजा में 1,23,538 फिलिस्तीनी विस्थापित हो चुके थे। उल्लेखनीय है कि हमास ने इजरायल पर शनिवार सुबह गाजा पट्टी से एक अभूतपूर्व रॉकेट हमला किया।
इजरायली सेना के अनुसार हमास ने इजरायल पर 3,000 से ज्यादा रॉकेट दागे और हमास के दर्जनों लड़ाकों ने दक्षिणी इजरायल के सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ की। इजरायली सेना ने उसके बाद फिलिस्तीनी बलों से उन्हें फिर से जीतने के लिए दक्षिणी क्षेत्रों में अपने सैनिकों को भेजा और गाजा में हमास के ठिकानों पर हमला करना शुरू कर दिया।
इजरायली सरकार ने रविवार को घोषणा किया कि उसने बुनियादी कानून के अनुच्छेद 40 को लागू किया है, जिसका मतलब है कि देश आधिकारिक रूप से युद्ध में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष में दोनों पक्षों ने सैकड़ों मौत और हजारों घायल होने की रिपोर्टें हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के इज़ू द्वीप में रविवार को अंतर्राष्र्ट्रीय समयानुसार 2113 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। यह जानकारी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने सोमवार को दी।
भूकंप का केंद्र 29.79 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 140.04 डिग्री पूर्वी देशांतर में 10 किलोमीटर की गहराई में था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष के दूसरे दिन हमास के हमले में मरने वाले इजरायलियों की संख्या बढ़कर 1200 हो गई, जबकि गाजा पट्टी में सैकड़ों अन्य लोगों के मारे जाने की खबर है।
यह जानकारी इजरायली मीडिया ने रविवार रात को दी। सरकारी अधिकारियों के हवाले से इजरायल के सरकारी कान टीवी समाचार ने जानकारी दिया कि हमास के संयुक्त हमले में कम से कम 1200 लोग मारे गये।
इस्लामी समूह के आतंकवादियों ने सुरक्षा बाड़ तोड़ दिया और आसपास के समुदायों पर हमला किया, जिसमें कई लोग मारे गये और दर्जनों नागरिकों और सैनिकों को बंदी बना लिया गया। इसके साथ ही गाजा के आतंकवादियों ने दक्षिणी और मध्य इजराइल पर लगभग 3,500 रॉकेट दागे।
रविवार रात, इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इजरायल के अस्पतालों में घायलों की संख्या पर अपडेट जारी किया जिसमें कहा गया कि कम से कम 2,500 घायल हो गये, जिनमें 50 की हालत गंभीर है।
इजरायली सेना को दक्षिणी इजरायल में अभी तक पूर्ण नियंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है और हमास के आतंकवादी गाजा के पास कई समुदायों में इजरायली सैनिकों के साथ गोलीबारी कर रहे हैं। आईडीएफ होम फ्रंट कमांड ने दक्षिण में लोगों को अपने घरों में रहने के लिए कहा है।
इस बीच, गाजा में फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि गाजा में, इजरायल के हवाई हमलों में कम से कम 370 फिलिस्तीनी मारे गये और 2,200 अन्य घायल हो गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान में महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। बता दें, फिलहाल वे जेल में बंद हैं।
नरगिस मोहम्मदी ने मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई को लेकर नोबेल शांति पुरस्कार 2023 जीता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने कहा कि इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार उन सैकड़ों-हजारों लोगों को भी पहचान देता है, जिन्होंने महिलाओं को निशाना बनाने वाली भेदभाव और धार्मिक शासन की उत्पीड़क नीतियों के खिलाफ आवाज उठायी है।
ईरान में महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। वह 19वीं महिला हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। बता दें, फिलहाल वे जेल में बंद हैं।
नरगिस मोहम्मदी ने मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई को लेकर नोबेल शांति पुरस्कार 2023 जीता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने कहा कि इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार उन सैकड़ों-हजारों लोगों को भी पहचान देता है, जिन्होंने महिलाओं को निशाना बनाने वाली भेदभाव और धार्मिक शासन की उत्पीड़क नीतियों के खिलाफ आवाज उठायी है।
नोबेल समिति का कहना है कि नरगिस ने महिलाओं की आजादी और उनके हक के लिए कई बार आवाज उठायी है। वो 13 बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। समिति ने शांति पुरस्कार की घोषणा ईरान की महिलाओं के नारे जन- जिंदगी-आजादी के साथ की।
51 साल की नरगिस अब भी ईरान की एवान जेल में कैद हैं। उन्हें 31 साल की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनायी गयी है। ईरान ने उनको सरकार के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक मस्जिद के पास बम धमाका हुआ है, जिसमें 34 लोगों की मौत हो गयी है। मरने वालों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। यह घटना शुक्रवार को मस्तुंग जिले में हुई है।
बम धमाका उस वक्त हुआ, जब लोग ईद मिलादउन नबी के आयोजन में जुटे थे। असिस्टेंट कमिश्नर अताउल्लाह मुनीम ने बताया कि बम धमाके का असर इसलिए ज्यादा हुआ है क्योंकि मौके पर भारी भीड़ थी।
यह बम धमाका क्यों हुआ और इसके पीछे कौन थे। इस बात का खुलासा नहीं हुआ है। इसी जिले में महीने की शुरुआत में भी एक बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें 11 लोग घायल हो गये थे।
पुलिस ने बताया कि इस घटना में करीब 130 लोग जख्मी हुए हैं। यह आत्मघाती हमला बताया जा रहा है। पाकिस्तानी चैनलों पर दिखता है कि शवों का ढेर जमीन पर पड़ा है और जहां-तहां खून बिखरा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडोनेशिया के पुलाउ-पुलाउ तलौद में मंगलवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समय के अनुसार मंगलवार को तड़के 01.39 बजे महसूस किये गये भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.9 माफी गयी।
भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 100.1 किलो मीटर की गहराई में 4.73 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 127.50 डिग्री पूर्वी देशांतर में था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत की अध्यक्षता में जी-20 का सदस्य बने अफ्रीकी संघ के देशों में भारत को लेकर किस तरह का उत्साह और सोच बनी है इसका एक नजारा इस साल के अंत में सम्मिट इंडिया के अंतरराष्ट्रीय अभियान के तहत अफ्रीकी महाद्वीप के केन्या में मैराथन दौड़ का आयोजन में देखने को मिलेगा।
इसके साथ ही केन्या सरकार के सहयोग से भारतवंशी अफ्रीकन जनों के लिए अयोध्या की तरह एक भव्य राम मंदिर बनाने की पहल की जा रही है। सम्मिट इंडिया के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने केन्या चैप्टर का अध्य्क्ष डॉ स्वरूप रंजन मिश्रा को नियुक्त किया है जो वहां के संसद सदस्य हैं और सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय संगठक भी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse