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Published / 2025-03-12 14:23:42
अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध ने पकड़ी रफ्तार

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध तेज, ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम टैरिफ दोगुना करने का ऐलान किया

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा पर स्टील और एल्युमीनियम पर लगने वाले टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% करने की घोषणा की है। यह नया टैरिफ 12 मार्च से लागू होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि वे बिजली आपूर्ति के मामले में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं।

क्या है फैसले का कारण

इस फैसले का कारण ओंटारियो प्रांत का हालिया ऐलान बताया जा रहा है। कनाडा के ओंटारियो प्रांत ने कहा था कि वे अमेरिका के मिनेसोटा, न्यूयॉर्क और मिशिगन में बिजली उपयोगकर्ताओं से 25% अधिक शुल्क वसूलेंगे। इसके जवाब में ट्रम्प ने कनाडा पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला लिया है।

व्यापारिक संबंधों में आ सकती है खटास
इस बढ़ते व्यापार युद्ध से दोनों देशों के उद्योगों पर असर पड़ सकता है, खासकर स्टील, एल्युमीनियम और ऊर्जा क्षेत्र पर। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कनाडा और अमेरिका के व्यापार संबंधों में और खटास आ सकती है।

Published / 2025-03-12 14:20:34
अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध ने पकड़ी रफ्तार

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार युद्ध तेज, ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम टैरिफ दोगुना करने का ऐलान किया

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा पर स्टील और एल्युमीनियम पर लगने वाले टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% करने की घोषणा की है। यह नया टैरिफ 12 मार्च से लागू होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि वे बिजली आपूर्ति के मामले में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं।

क्या है फैसले का कारण

इस फैसले का कारण ओंटारियो प्रांत का हालिया ऐलान बताया जा रहा है। कनाडा के ओंटारियो प्रांत ने कहा था कि वे अमेरिका के मिनेसोटा, न्यूयॉर्क और मिशिगन में बिजली उपयोगकर्ताओं से 25% अधिक शुल्क वसूलेंगे। इसके जवाब में ट्रम्प ने कनाडा पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला लिया है।

व्यापारिक संबंधों में आ सकती है खटास
इस बढ़ते व्यापार युद्ध से दोनों देशों के उद्योगों पर असर पड़ सकता है, खासकर स्टील, एल्युमीनियम और ऊर्जा क्षेत्र पर। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कनाडा और अमेरिका के व्यापार संबंधों में और खटास आ सकती है।

Published / 2025-03-10 21:35:32
एक्स डाउन होने से दुनियाभर के लोग परेशान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनियाभर में एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एक्स डाउन होने की खबरें सामने आयी हैं। यूजर्स इस मुद्दे को लेकर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतें कर रहे हैं। 

वेबसाइट्स के आउटेज को ट्रैक करने वाली साइट डाउन डिटेक्टर के अनुसार, भारत में अब तक ट्विटर के डाउन होने की करीब 2000 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। वहीं, अमेरिका में  के ठप पड़ने की सूचना 18,000 यूजर्स ने दी है, जबकि ब्रिटेन में 10,000 यूजर्स ने इसे रिपोर्ट किया है। इस घटना पर अब तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

Published / 2025-02-26 21:12:07
अफगानिस्तान : भारी बर्फबारी-बारिश में 36 की मौत, 40 घायल

  • साइक ने कहा कि खराब मौसम के कारण 240 घर पूरी तरह नष्ट हो गये तथा 61 अन्य क्षतिग्रस्त हो गये। उन्होंने कहा, सर्वेक्षण दल प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गये हैं और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से सर्वेक्षण जारी है 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में भारी बर्फबारी और बारिश के कारण 36 लोगों की मौत हो गयी और 40 अन्य घायल हो गये। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने बुधवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता अब्दुल्ला जान साइक ने कहा कि देश के अधिकतर प्रांतों में कई दिनों तक हुई बारिश से सूखे का प्रभाव कम हुआ है, लेकिन इससे जानमाल की क्षति हुई है। 

प्रांतीय अधिकारियों के प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला है कि बर्फबारी और बारिश के कारण देश भर में दर्जनों लोग मारे गए और घायल हुए हैं, जिनमें से अधिकतर दक्षिण-पश्चिमी फराह प्रांत में हैं। साइक ने कहा कि खराब मौसम के कारण 240 घर पूरी तरह नष्ट हो गए तथा 61 अन्य क्षतिग्रस्त हो गए।

उन्होंने कहा- सर्वेक्षण दल प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए हैं और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से सर्वेक्षण जारी है। प्रवक्ता ने कहा, बर्फबारी के कारण कुछ प्रांतों में सड़कें अवरुद्ध हो गयी हैं और लोक निर्माण मंत्रालय के सहयोग से उन्हें फिर से खोलने के प्रयास किये जा रहे हैं।

Published / 2025-02-26 12:12:58
पाकिस्तान में भी धूमधाम से मन रही महाशिवरात्रि

देख लीजिये सनातन का कमाल! 

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। पाकिस्तान के कटासराज मंदिर में पाकिस्तानी युवाओं ने बड़ी संख्या में शिवरात्रि मनाने का फैसला लिया है । कुम्भ में 70 करोड़ लोगों द्वारा त्रिवेणी स्नान से प्रभावित होकर पाकिस्तानियों ने भी तीन दिनों तक शिवरात्रि मनाने का फैसला किया है। चौंकिये नहीं   पाकिस्तान के हिन्दू भर नही युवा मुस्लिम भी इसमें शामिल होंगे। 

दरअसल सनातन के प्रति पाकिस्तान में बडी जिज्ञासा और उत्सुकता है। भले ही भारत औऱ पाकिस्तान के मुल्ला मौलवी छाती पीट रहे हों लेकिन पाकिस्तान के युवा  विद्रोह पर उतारू है। जब उन्हें अहसास होगा कि मक्का में भी मक्केश्वर बाबा ही विराजमान हैं तो उनका जोश और उफान पर होगा। वैसे भी भगवान शिव तो जनवादी चरित्र के भगवान हैं।

शिवरात्रि केवल शिव की रात्रि नही है ।शिव चेतना है तो पार्वती ऊर्जा। चेतना को ऊर्जा देने का यह अवसर है। लोग समझते हैं कि शिव के ज्योतिर्लिंग की संख्या 12 है लेकिन शिवरात्रि पर शिव के 64 लिंगो का प्रदर्शन हुए। बाकी के ज्योतिर्लिंग अभी खोजे नही जा सके या तय नही किये जा सके। वैदिक काल में पार्वती के नाम का उल्लेख नहीं है। अम्बिका , उमा , गौरी जैसे नाम ही प्रचलित थे । ईसापूर्व 300 के आसपास केनोपनिषद में पहली बार पार्वती नाम आया ।  

 यहां देवी पार्वती को सर्वोच्च परब्रह्म की शक्ति, या आवश्यक शक्ति के रूप में प्रकट किया गया है। उनकी प्राथमिक भूमिका एक मध्यस्थ के रूप में है, जो अग्नि, वायु और वरुण को ज्ञान देती है, जो राक्षसों के एक समूह की हालिया हार के बाद घमंड कर रहे थे। जाहिर है कि पार्वती अहंकार को आइना दिखाने का माध्यम भी है । शिव भी पार्वती के बिना अधूरे हैं । तभी तो उन्हें भी अर्धनारीश्वर होना पड़ा।

शिव सत्य के हैं, सुंदर हैं। सर्वव्यापी हैं , सर्वग्राह्य हैं । आदि हैं अनन्त हैं। सर्वहारा के हैं सर्वसम्पन्न के हैं। ईश्वर का यही रूप है जो राम , कृष्ण, बुद्ध सभी अवतारों के लिए पूज्य हैं। आखिर शिव में ऐसा क्या है? जो उत्तर में कैलास से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक वे एक जैसे पूजे जाते हैं। उनके व्यक्तित्व में कौन सा चुंबक है जिस कारण समाज के भद्रलोक से लेकर शोषित, वंचित, भिखारी तक उन्हें अपना मानते हैं। 

वे क्यों सर्वहारा के देवता हैं? राम का व्यक्तित्व मर्यादित है। कृष्ण का उन्मुक्त और शिव असीमित व्यक्तित्व के स्वामी। वे आदि हैं और अंत भी। शायद इसीलिए बाकी सब देव हैं। केवल शिव महादेव। वे उत्सव प्रिय हैं। शोक, अवसाद और अभाव में भी उत्सव मनाने की उनके पास कला है। वे उस समाज में भरोसा करते हैं। जो नाच-गा सकता हो। यह शैव परंपरा है। सिर्फ देश में ही नहीं विदेश में भी शिव की गहरी आस्था है। 

हिप्पी संस्कृति साठवें दशक में अमेरिका से भारत आई। हिप्पी आंदोलन की नींव यूनानियों की प्रति संस्कृति आंदोलन में देखी जा सकती है। पर हिप्पियों के आदि देवता शिव तो हमारे यहाँ पहले से ही मौजूद थे या यों कहे शिव आदि हिप्पी थे। अधनंगे, मतवाले, नाचते-गाते, नशा करते भगवान् शंकर। इन्हें भंगड़, भिक्षुक, भोला भंडारी भी कहते हैं। आम आदमी के देवता भूखो-नंगों के प्रतीक। 

वे हर वक्त समाज की सामाजिक बंदिशों से आजाद होने, खुद की राह बनाने और जीवन के नये अर्थ खोजने की चाह में रहते॒ हैं। यही मस्तमौला हिप्पीपन उनके विवाह में अड़चन था। कोई भी पिता किसी भूखे, नंगे, मतवाले से बेटी ब्याहने की इजाजत कैसे देगा। शिव की बारात में नंग-धड़ंग, चीखते, चिल्लाते, पागल, भूत-प्रेत, मतवाले सब थे। लोग बारात देख भागने लगे। शिव की बारात ही लोक में उनकी व्याप्ति की मिसाल है।

विपरीत ध्रुवों और विषम परिस्थितियों से अद्भुत सामंजस्य बिठानेवाला उनसे बड़ा कोई दूसरा भगवान् नहीं है। मसलन, वे अर्धनारीश्वर होकर भी काम पर विजेता हैं। गृहस्थ होकर भी परम विरक्त हैं। नीलकंठ होकर भी विष से अलिप्त हैं। 

उग्र होते हैं तो तांडव, नहीं तो सौम्यता से भरे भोला भंडारी। परम क्रोधी पर दयासिंधु भी शिव ही हैं। विषधर नाग और शीतल चंद्रमा दोनों उनके आभूषण हैं। उनके पास चंद्रमा का अमृत है और सागर का विष भी। साँप, सिंह, मोर, बैल, सब आपस का बैर-भाव भुला समभाव से उनके सामने है। वे समाजवादी व्यवस्था के पोषक। वे सिर्फ संहारक नहीं कल्याणकारी, मंगलकर्ता भी हैं। यानी शिव विलक्षण समन्वयक हैं। 

शिव गुट निरपेक्ष हैं। सुर और असुर दोनों का उनमें विश्वास है। राम और रावण दोनों उनके उपासक हैं। दोनों गुटों पर उनकी समान कृपा है। आपस में युद्ध से पहले दोनों पक्ष उन्हीं को पूजते हैं। लोक कल्याण के लिए वे हलाहल पीते हैं। वे डमरू बजाएँ तो प्रलय होता है, प्रलयंकारी इसी डमरू से संस्कृत व्याकरण के चौदह सूत्र भी निकलते हैं। इन्हीं माहेश्वर सूत्रों से दुनिया की कई दूसरी भाषाओं का जन्म हुआ।

शिव पहले पर्यावरण प्रेमी हैं, पशुपति हैं। निरीह पशुओं के रक्षक हैं। आर्य जब जंगल काट बस्तियाँ बसा रहे थे। खेती के लिए जमीन तैयार कर रहे थे। गाय को दूध के लिए प्रयोग में ला रहे थे पर बछड़े का मांस खा रहे थे। तब शिव ने बूढ़े बैल नंदी को वाहन बनाया। सांड़ को अभयदान दिया। जंगल कटने से बेदखल साँपों को आश्रय दिया। 

कोई उपेक्षितों को गले नहीं लगाता, महादेव ने उन्हें गले लगाया। श्मशान, मरघट में कोई नहीं रुकता। शिव ने वहाँ अपना ठिकाना बनाया। जिस कैलास पर ठहरना कठिन है। जहाँ कोई वनस्पति नहीं, प्राणवायु नहीं, वहाँ उन्होंने धूनी लगाई। दूसरे सारे भगवान् अपने शरीर के जतन के लिए न जाने क्या-क्या द्रव्य लगाते हैं। शिव केवल भभूत का इस्तेमाल करते है। उनमें रत्ती भर लोक दिखावा नहीं है। शिव उसी रूप में विवाह के लिए जाते हैं, जिसमें वे हमेशा रहते हैं। वे साकार हैं, निराकार भी।

शिव न्यायप्रिय हैं। मर्यादा तोड़ने पर दंड देते हैं। काम बेकाबू हुआ तो उन्होने उसे भस्म किया। अगर किसी ने अति की तो उनके पास तीसरी आँख भी है। लोकगीतों में भी शिव के बिंदासपन पर भक्त दीवाने हुए जाते हैं। ---शाला, दुशाला शिव के मनहु न भावे । मिरगा के छाला कहाँ पाएब हो शिव मानत नाही । या फिर - हाथी औ घोड़ा शिव के मनहु न भावे बसहा बैल कहाँ पायब हो... ऐसे आशुतोष को प्रणाम ।

Published / 2025-02-26 11:40:38
ट्रम्प के आते ही बिटकॉइन में 20% की गिरावट दर्ज

  • खत्म हुआ ट्रंप का जलवा, 20% गिरा Bitcoin, निवेशक हलकान

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही बिटकॉइन ने ऑल टाइम हाई का उछाल मारते हुए $109,114.88 (95,03,546.50 INR) के आकड़े को छुआ था लेकिन 25 फरवरी को यह अपने सबसे उच्च स्तर से गिरकर अपने सबसे निचले स्तर $86,873 पर पहुंच चुका है और इसमें लगभग ऑल टाइम का 20% की गिरावट देखने को मिली है। 

साल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आया। जब डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को शपथ ली, तो बिटकॉइन ने एक ऐतिहासिक उछाल लिया। उस दिन बिटकॉइन की कीमत $109,114 ( 95,14,571.67 INR) के पार पहुंच गई थी, जो इसके अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर थी। 

ट्रंप की राष्ट्रपति चुनाव में जीत और उनके द्वारा क्रिप्टो से जुड़े नियमों में ढील देने के वादे ने क्रिप्टो बाजार को उत्साहित कर दिया था। इसके बाद बिटकॉइन में ऐतिहासिक तेजी देखी गई। इस तेजी के बाद अब 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन में 7.08 % की गिरावट देखने को मिली और इसकी कीमत $86,873 (75,75,190.95 INR) पर आ गई। यानि लगभग कुल 1 महीनें में 19,39,381 INR का नुकसान हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप के वादों का असर बिटकॉइन पर

डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान के दौरान यह वादा किया गया था कि वह क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों में ढील देंगे और क्रिप्टो रिजर्व बनाने का भी प्रयास करेंगे। इससे ट्रंप की जीत के बाद क्रिप्टोकरेंसी के निवेशकों में उम्मीद का माहौल था। 

बिटकॉइन की कीमत $109,114 तक पहुंची और निवेशक उत्साहित थे कि अब उनका निवेश काफी लाभकारी होगा। यह बिटकॉइन के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। लेकिन, इस तेजी के बाद बिटकॉइन में 20% की गिरावट आई। 

क्रिप्टोकरेंसी की गिरावट का कारण

क्रिप्टोकरेंसी की गिरावट का एक और कारण चीन पर अमेरिकी निवेश प्रतिबंधों का लागू होना था। 25 फरवरी 2025 को बिटकॉइन में 7.08% की गिरावट देखने को मिली और इसकी कीमत $86,873 पर आ गई। 

चीन के खिलाफ अमेरिका की नीति के कारण निवेशकों में डर का माहौल था, जिससे क्रिप्टोकरेंसी में बिकवाली बढ़ी और बाजार को तगड़ा झटका लगा। इसके अलावा डॉलर पर भी दबाव बढ़ गया, क्योंकि ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की थी।

Published / 2025-02-18 17:56:10
क्या रूस-यूक्रेन में होगा युद्धविराम, जानें क्यों...

जेलेंस्की के साथ बात करने को पुतिन तैयार, अगर..., युद्धविराम की कोशिशों के बीच रूस का बड़ा बयान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस की सरकार ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि अगर जरूरी है तो राष्ट्रपति पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बात करने के लिए तैयार हैं। रूस की तरफ से यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब रूस और यूके्रन के बीच संघर्ष विराम की कोशिश हो रही है और इसे लेकर रूस और अमेरिका के राजनयिकों की मुलाकात भी हो रही है। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम की कोशिशें हो रही हैं। इसे लेकर मंगलवार को रूस के शीर्ष अधिकारी सऊदी अरब पहुंचे हैं। 

क्रेमलिन के प्रवक्ता ने बताया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव सोमवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद के लिए रवाना हुए, जहां वे मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज से मुलाकात करेंगे। दोनों पक्ष रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक की तैयारियों पर भी बातचीत करेंगे। 

रियाद में रूसी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को लेकर बातचीत होनी है, लेकिन इस बातचीत में यूक्रेन को ही आमंत्रित नहीं किया गया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका देश युद्ध समाप्त करने के लिए इस सप्ताह अमेरिका-रूस वार्ता में भाग नहीं लेगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यूक्रेन इस वार्ता में भाग नहीं लेगा इसलिए वह वार्ता के नतीजों को भी स्वीकार नहीं करेगा। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने की बात कही थी। ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका द्वारा कीव को अरबों डॉलर की सैन्य मदद देने के फैसले की भी आलोचना की।

Published / 2025-02-14 19:22:51
ट्रंप-मोदी की मैत्री से तिलमिलाया पाकिस्तान

आतंकवाद के खिलाफ और मजबूती से लड़ेंगे भारत-अमेरिका

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे पर दुनिया भर की नजरें थी। वहीं पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के साझा प्रेसवार्ता में सीमा-पार आतंकवाद को लेकर भी बड़ी घोषणा की गयी है। जिससे भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान तिलमिला गया है। दरअसल, पीएम मोदी और ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूती से एक साथ काम करेंगे ताकि कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद से निपटा जा सके। इस दौरान पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संयुक्त बयान में पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि उसकी भूमि का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए न किया जाये। दोनों नेताओं की इस प्रतिक्रिया पर पाकिस्तान बौखला गया है, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में पाकिस्तान का उल्लेख एकतरफा, भ्रामक और कूटनीतिक मानदंडों के विपरीत है।

 मामले में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि पाकिस्तान अपने बलिदानों को स्वीकार किये बिना इस तरह की टिप्पणियों को शामिल करने से हैरान है। पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक राणा को लॉस एंजिल्स में एक हिरासत केंद्र में रखा गया है। वहीं राणा के प्रत्यर्पण के लिए ट्रंप को धन्यवाद देते हुए, पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सीमा पार आतंकवाद को खत्म करने के लिए एकजुट कार्रवाई आवश्यक है। दोनों नेताओं के संयुक्त बयान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों को सबसे बड़ा खतरा बताया गया। बता दें कि, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही झटका देते हुए पाकिस्तान में परियोजनाओं के लिए 845 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग पहले ही निलंबित कर दी है।

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