लंदन। ब्रिटेन में 19 जुलाई को कोरोना से मुक्ति का जश्न मनाया जाना था, पर हालात ऐसे बिगड़े हैं कि वहां कड़ा लॉकडाउन लगाने की नौबत आ सकती है। वो भी तब जब 50 फीसदी से ज्यादा आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। इसके अलावा 16 प्रतिशत आबादी को एक डोज दी जा चुकी है। ब्रिटेन में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आ चुकी है। शुक्रवार को 51,870 नये केस सामने आये हैं। इसी के साथ 6 महीने पुराना रेकॉर्ड टूट गया है। जनवरी के बाद पहली बार ब्रिटेन में 50 हजार से ज्यादा मामले आये हैं। यहां तक कि शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री साजिद जावेद भी कोरोना संक्रमित हो गये। हालात जिस तेजी से बिगड़ रहे हैं उसे देख कहा जा रहा है कि सरकार को फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ेगा। करीब 1200 से ज्यादा विशेषज्ञों ने सरकार को चेताया है कि लॉकडाउन से जुड़ी पाबंदियों को पूरी तरह हटाना खतरनाक और अनैतिक होगा। ब्रिटेन में कोरोना की तीसरी लहर के पीछे मुख्य रूप से वायरस का डेल्टा वेरियंट है। तीसरी लहर जिस तरह से विकराल रूप लेती जा रही है, दुनियाभर के एक्सपर्ट ब्रिटिश सरकार को चेता रहे हैं कि पाबंदियों को पूरी तरह से न हटाया जाये। कोरोना की तीसरी लहर जिस प्रकार से बढ़ रही है उससे यह आशंका बढ़ गयी है कि इसमें दूसरी लहर से ज्यादा लोग संक्रमित होंगे। जनवरी में दूसरी लहर का पीक आया था। 8 जनवरी को सबसे ज्यादा 67,803 नये केस आये थे। शुक्रवार को ब्रिटेन में कोरोना के 51,870 नये केस सामने आये। इससे पहले 15 जनवरी को 50 हजार से ज्यादा नये केस आये थे जब एक दिन में 55,553 लोग संक्रमित हुए थे। यह खबर भारत के लिए टेंश बढ़ानेवाली है। जहां ब्रिटेन की करीब 68 प्रतिशत आबादी या तो पूरी तरह या फिर आंशिक तौर पर वैक्सीनेट हो चुकी है, तो वहीं भारत में अभी तक 42 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन मिली है। इसमें दोनों डोज और सिंगल डोज दोनों शामिल हैं। वहीं इसमें सिंगल डोजवालों की संख्या ज्यादा है। ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन लगायी जा रही है। भारत में भी सबसे ज्यादा उसी वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है जिसे पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड के नाम से बना रही है। ब्रिटेन में तेजी से बढ़ रहे मामलों से भारत को सावधान हो जाने की जरूरत है।
एबीएन डेस्क। पोप फ्रांसिस की रविवार शाम को आंत की सर्जरी हुई। सोमवार सुबह उन्होंने रोम के अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ करते हुए बितायी। वेटिकन ने इटली की राजधानी के बड़े कैथोलिक अस्पताल, जेमेली पॉलीक्लिनिक में रविवार शाम को हुए आॅपरेशन के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। फ्रांसिस 10वें तल पर बने विशेष कमरे में रह रहे हैं, जो अस्पताल बिशप द्वारा इस्तेमाल किए जाने के लिए उपलब्ध रखता है। पोप जॉन पॉल विभिन्न चिकित्सीय समस्याओं के लिए वहां कई बार ठहरे थे। वेटिकन की तरफ से पोप फ्रांसिस की स्थिति पर रोजाना दो अपडेट मिलने की उम्मीद की जा रही है, जिसमें से पहली जानकारी सोमवार की सुबह आई है। वेटिकन ने रविवार देर रात कहा था कि 84 वर्षीय फ्रांसिस आंत की सर्जरी से अच्छी तरह से उबर रहे हैं। फ्रांसिस बड़ी आंत के सिगमॉइड वाले हिस्से के संकुचन से पीड़ित थे। वेटिकन ने कहा सर्जरी पहले से तय थी, हालांकि इसने अस्पताल में भर्ती होने की सूचना फ्रांसिस के जेमेली में प्रवेश कर जाने के बाद ही दी। पोप के अस्पताल में भर्ती होने से असंबंधित चिकित्सकों ने कहा कि ऐसे मामलों में आंत के प्रभावित हिस्से को फिर से अलग करना आम है। हालांकि, वेटिकन ने फौरन नहीं बताया कि किस तरह की सर्जरी की गई या यह कितने वक्त चली। ऐसी सर्जरी से स्वस्थ होने के लिए आमतौर पर अस्पताल में कई दिन बिताने पड़ते हैं।
एबीएन डेस्क। रविवार को एक मिलिट्री प्लेन क्रैश हो गया। प्लेन क्रैश में 92 सैनिक मौजूद थे। प्लेन 92 सैनिकों को लेकर कागायन डी ओरो सिटी से उड़ान भरी थी। लेकिन इस सी-130 प्लेन में आग लग गई। इस हादसे में 17 सैनिकों की मौत हो गई। 40 सैनिकों को बचा लिया गया है। यह घटना फिलीपींस की है। सी-130 (Sulu province) के जलते हुए मलबे से अब तक 40 लोगों को बचाया जा चुका है, जो सुलु प्रांत के जोलो द्वीप पर उतरने की कोशिश में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। प्लेन के मलबे से अबतक 17 जवानों के शव बरामद किये गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद तेज गति से चलाया गया। रॉयटर्स के मुताबिक, सोबेजाना ने बताया कि प्लेन दक्षिणी कागायन डी ओरो शहर से सैनिकों को ले जा रहा था। लेकिन विमान रनवे से चूक गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्लेन उस समय क्रैश हुआ जब ये सुलु प्रांत में जोलो द्वीप पर उतरने की कोशिश कर रहा था। विमान जमीन पर गिरने के बाद आग के गोले में तब्दील हो गया और विमान में सवार लोग इस हादसे की चपेट में आ गए। प्लेन में मौजूद ज्यादातर सैनिकों ने हाल ही में बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी। इन लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए मशहूर आइलैंड्स पर तैनात किया जाना था। फिलीपींस के इन आइलैंड्स पर मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। यहां फिरौती के लिए किसी का अपहरण होना आम बात है, इसलिए हमेशा बड़ी तादाद में सैनिक तैनात रहते हैं। ये इलाका दक्षिणी फिलीपींस में आता है। यहां अबु सैय्यफ नामक आतंकी संगठन एक्टिव है।
प्योंगप्यांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के कमजोर दिखने पर देश के लोगों का दिल टूट गया है और वे उनकी तबीयत को लेकर चिंतित हैं। सरकारी मीडिया में एक स्थानीय निवासी के हवाले से यह बात कही गई है। मीडिया में आई इस खबर को किम (37) के घरेलू समर्थन बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है, जो कोविड-19 महामारी, कुप्रबंधन, संयुक्त राष्ट्रीय की आर्थिक पाबंदियों और प्राकृतिक आपदाओं के चलते गहराती आर्थिक जटिलताओं से घिरे हैं। उत्तर कोरिया के सरकारी टीवी ने अज्ञात स्थानीय पुरुष के हवाले से शुक्रवार को कहा, उनको (किम को) कमजोर देखकर हमारे लोगों का बहुत दिल दुखता है। हर कोई कहता है कि स्वत: ही उनके आंसू निकल आते हैं। हाल ही में सरकारी मीडिया में आयीं तस्वीरों में किम का वजन तुलनात्मक रूप से काफी कम दिख रहा है। उत्तर कोरिया पर नजर रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि करीब 170 सेंटीमीटर (पांच फुट, आठ इंच) लंबे किम का पहले वजन 140 किलोग्राम था, जो हो सकता है कि 10 से 20 किलो कम हो गया हो। सियोल में कुछ विश्लेषकों ने कहा कि किम द्वारा अपने स्वास्थ्य में सुधार के लिए कम आहार लिये जाने की आशंका है, जबकि अन्य का अनुमान है कि स्वास्थ्य कारणों से उनका वजन कम हुआ।
आखिर कहां से आया कोरोना वायरस, क्या इसे इंसान ने बनाया या यह प्राकृतिका आपदा है। यह सवाल बार दुनियाभर के वैज्ञानिकों और नेताओं के मन में उठ रहे है। लेकिन अब एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है कि ये कोरोना प्राकृतिक रूप नहीं पनपा है बल्कि इसे वुहान लैब में विकसित किया गया है। हालांकि, चीन पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं कि ये वायरस वुहान लैब से ही निकला है। इस नई स्टडी में हुए खुलासे से चीन का सच सबके सामने आ सकता है। डेली मेल की खबर के अनुसार स्टडी में दावा किया गया है कि चीनी वैज्ञानिकों ने वुहान लैब में ही कोविड19 जैसा खतरनाक वायरस तैयार किया है और फिर इसके बाद इस जानलेवा वायरस को रिवर्स-इंजीनियरिंग वर्जन से इसे ढकने की कोशिश की, जिसे लगे कि कोरोना वायरस चमगादड़ से प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है। मिला यूनिक फिंगरप्रिंट : डेली मेल की खबर के मुताबिक, एचआईवी वैक्सीन पर सफल काम चुके ब्रिटिश प्रोफेसर एंगस डल्गलिश और नॉवे के वैज्ञानिक डॉ बिर्गर सोरेनसेन ने साथ मिलकर यह स्टडी की है। जब ये दोनों वैक्सीन बनाने के लिए कोरोना के सैंपल्स का अध्ययन कर रहे थे दौरान उन्हें वायरस में एक यूनिक फिंगरप्रिंट मिला था। उस समय उन्होंने कहा था बिना लैब में छेड़छाड़ किए ऐसा नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी स्टडी की फाइंडिंग्स को जर्नल में प्रकाशित करना चाहा तो कई बड़े साइंटिफिक जर्नल ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि उस समय लग रहा था कि कोरोना वायरस चमगादड़ या जानवरों से इंसानों में प्राकृतिक रूप से आया है। इतना ही नहीं, यूनिक फिंगरप्रिंट की बात सामने आने के बाद इसे फेक न्यूज बता कर खारिज कर दिया था। लेकिन कोरोना के एक साल भी फिर से आवाज तेज होने लगी है कि कोरोना कहां से आया क्या सच में इसे लैब में बनाया गया। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इसे लेकर खुफिया एजेंसियों से 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। आपको बता दें कि ब्रिटिश प्रोफेसर एंगस डल्गलिश लंदन में सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी में कैंसर विज्ञान के प्रोफेसर हैं तो नार्वे के वैज्ञानिक डॉ सोरेनसेन एक महामारी विशेषज्ञ हैं और इम्यूनर कंपनी के अध्यक्ष हैं, जो कोरोना की वैक्सीन तैयार कर रही है, जिसका नाम है बायोवैक-19 है।
कोरोना महामारी के प्रकोप से जूझ रहे भारत की स्थिति पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में महामारी के कारण भारत में स्थिति और भी खराब हो सकती है। बता दें पिचाई ने यह बातें एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान कहीं। सबसे खराब स्थिति आना अभी बाकी : पिचाई ने कहा, भारत की स्थिति अभी बहुत खराब है, लेकिन मुझे लगता है कि सबसे खराब स्थिति आना अभी बाकी है। इसके अलावा उन्होंने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत की मदद को अमेरिका की ओर से उठाए गए कदमों की तारीफ भी की। भारत की मदद के लिए अमेरिका की तारीफ की: गूगल सीईओ ने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्चतम स्तर पर बैठे लोग किस तरह से भारत समेत अन्य देशों में व्याप्त स्वास्थ्य संकट की ओर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बाइडेन, सचिव ब्लिंकन से लेकर अलग-अलग स्तरों पर अधिकारी इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि वो भारत और अन्य प्रभावित देशों को कैसे मदद कर सकते हैं। मदद को आगे आए हाथ : उल्लेखनीय है कि सुंदर पिचाई ने अभी हाल ही में भारत में कोरोना का हाल देखते हुए 135 करोड़ रुपये के रिलीफ फंड की घोषणा की थी। वहीं, अमेरिका की तरफ से शुक्रवार (30 अप्रैल) को कोविड-19 से लड़ने में जरूरी सामानों भरी मदद की पहली खेप भारत पहुंची थी। इसमें 440 ऑक्सीजन सिलेंडर व रेगुलेटर, 9 लाख 60 हजार रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट आदि सामान शामिल थे। अमेरिका के अलावा यूरोपीय संघ (ईयू) के कई सदस्य देश कोरोना महामारी से निपटने में मदद के लिए भारत को की मदद को आगे आए हैं। संघ के नागरिक रक्षा तंत्र के जरिये यूरोपीय देश जैसे आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्समबर्ग, पुर्तगाल और स्वीडन ने 27 अप्रैल को घोषणा की थी कि वे देश को ऑक्सीजन सांद्रक और वेंटिलेटर जैसी चिकित्सा आपूर्ति भेज रहे हैं। अब इस सूची में फ्रांस, इटली, ऑस्ट्रिया और फिनलैंड भी शामिल हो गए हैं। ईयू ने एक बयान में कहा कि आगामी दिनों में जर्मनी सहित ईयू के अन्य सदस्य देशों से भी मदद भेजे जाने की उम्मीद है।
एबीएन डेस्क। ब्राजील में महज एक महीने में कोरोना वायरस से 1,00,000 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के बाद लोगों के मरने की इस भयावह रफ्तार से ब्राजील में दहशत फैली हुई है। दक्षिण अमेरिका के इस देश में कोरोना से मरने वाले लोगों की कुल संख्या 400000 के पार पहुंच गई है। हालांकि, कोविड से हुई कुल मौतों के मामले में ब्राजील अब भी दुनिया में दूसरे नंबर पर है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने देश में हालात और बिगड़ने को लेकर आगाह किया है। अबतक 4 लाख से ज्यादा लोगों की मौत ब्राजील में इस वैश्विक महामारी से अप्रैल में सबसे अधिक मौत हुई हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस महीने के पहले दो दिनों में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हुई। पिछले दो हफ्तों में हर दिन करीब 2,400 लोगों की मौत हुई और स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को 3,001 और लोगों के मरने की जानकारी दी, जिससे देश में मृतकों की संख्या 401,186 पर पहुंच गई। कोरोना के एक और लहर की आशंका से बढ़ी चिंता स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण के मामले और मौत की संख्या घटने पर थोड़ी राहत की सांस ली, लेकिन उन्हें बीमारी की एक अन्य लहर आने की आशंका है जैसा कि कुछ यूरोपीय देशों में देखा गया। ऑनलाइन रिसर्च वेबसाइट आवर वर्ल्ड इन डेटा के अनुसार छह प्रतिशत से भी कम ब्राजीलियाई नागरिकों को कोविड-19 का टीका लगा है।
कनाडा और सयुक्त अरब अमीरात व फ्रांस सहित कई देशों के बाद अब आस्ट्रेलिया ने भी भारत से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। भारत में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय उड़ानों पर रोक लगाई है । देश के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की ओर से महामारी के मामलों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत आगामी 15 मई तक भारत से कोई उड़ान ऑस्ट्रेलिया नहीं जाएगी। इससे पहले थाइलैंड, सिंगापुर, बांग्लादेश और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों ने भी भारत से होने वाली यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। मंगलवार को लगातार छठे दिन भारत में संक्रमण के नए मामलों का आंकड़ा 3 लाख से अधिक दर्ज किए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख अधनम घेब्रेसस ने कहा, दुनिया के दूसरे बहुसंख्यक देश भारत में महामारी के कारण हालात हृदय विदारक है। बता दें कि भारत में पिछले 24 घंटे में 3.23 लाख नए केस सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में पिछले 24 घंटे में 3,23,144 नए कोरोना मामले आने से मरीजों की कुल संख्या 1,76,36,307 तक पहुंच गई है। वहीं एक दिन में 2771 लोगों की मौत हुई जिससे मृतकों की संख्या 1,97,894 पर पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय केे मुताबिक देश में 28,82,204 मरीज कोरोना का इलाज करा रहे हैं।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse