एबीएन डेस्क। इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर सेमरू ज्वालामुखी फटने के कारण यहां मरने वालों की संख्या 13 पहुंच गई है। इसकी पुष्टि रविवार को एक टीवी चैनल के हवाले से की गई। वहीं इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन ने बताया कि मरने वाले 13 लोगों में से दो की पहचान कर ली गई है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोग घायल भी हुए हैं, जिसमें कई अस्पताल में भर्ती हैं। सरकार का कहना है कि ज्यादातर लोग ज्वालामुखी फटने के कारण जल गए हैं। सुबह आया था भूकंप : इंडोनेशिया के टोबेलो से 259 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा की ओर आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे से मिली जानकारी के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.0 दर्ज की गई है। हालांकि, नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
एबीएन डेस्क । कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से मुकाबले में मदद के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का विशेषज्ञ दल दक्षिण अफ्रीका पहुंचा है। यह दल गौतेंग प्रांत में मामलों से निपटने के प्रयासों में मदद करेगा। ओमिक्रॉन करीब 30 देशों में फैल चुका है। डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका के क्षेत्रीय आपातकालीन निदेशक डॉ. सलाम गुए ने बताया कि निगरानी और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग में मदद के लिए विशेषज्ञों का एक दल गौतेंग भेजा गया है, जबकि एक दल पहले से ही दक्षिण अफ्रीका में मौजूद है और जीनोम अनुक्रमण में मदद कर रहा है। गौतेंग प्रांत दक्षिण अफ्रीका का प्रमुख आर्थिक केंद्र है। पिछले एक सप्ताह से देशभर के 80 फीसदी संक्रमण यहीं सामने आए हैं। बृहस्पतिवार को दक्षिण अफ्रीका में 11,500 नए संक्रमण दर्ज किए गए। दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) ने बताया कि करीब 75 फीसदी संक्रमण के पीछे नया वैरिएंट है। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री फाहला का कहना है कि संक्रमण की चौथी लहर शुरू हो चुकी है। 52,300 नए मामले : अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के मुताबिक पूरे महाद्वीप में इस स्पताह में 52,300 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जो बीते सप्ताह से 105 फीसदी ज्यादा हैं। डब्ल्यूएचओ के अफ्रीका के निदेशक डॉ. मोएती ने अफ्रीकी देशों को कोविड के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को लेकर सावधानी बरतने की सलहा देते हुए कहा कि महाद्वीप में संक्रमण की वृद्धि को रोकना ही एकमात्र उपाय है, क्योंकि यहां पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
एबीएन डेस्क। फ्रांस ने देश में 5-11 आयु वर्ग के बच्चों के लिए कोरोना वायरस टीकाकरण को मंजूरी दे दी है। फ्रांस के उच्च स्वास्थ्य प्राधिकरण (एचएएस) ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि फ्रांसीसी चिकित्सा नियामक यूरोपीय संघ के स्तर पर 5-11 आयु वर्ग के बच्चों के लिए बायोएनटेक / फाइजर वैक्सीन के अनुमोदन का अनुसरण करता है। यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) ने 25 नवंबर को इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए कोविड -19 वैक्सीन के उपयोग का विस्तार करने की सिफारिश की है। बयान में कहा गया है कि मौजूदा महामारी विज्ञान के संदर्भ में और उपलब्ध आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए एचएएस ने 5-11 आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण की सिफारिश की थी जिसे मंजूरी दे दी गई है। एचएएस ने स्कूलों में रोकथाम के उपायों को मजबूत करने, प्रतिबंधों को बनाए रखने और कोविड -19 के परीक्षण आयोजित करने की भी सिफारिश की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन में ओमिक्रॉन वेरिएंट के दो मामलों का पता चलने के बाद पीएम बोरिस जॉनसन ने कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए नए उपायों की घोषणा की है, जिसमें दुकानों में अनिवार्य मास्क और इंग्लैंड में प्रवेश करने वाले यात्रियों के लिए पीसीआर परीक्षण शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शुक्रवार को ओमिक्रॉन पर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच प्रधानमंत्री ने कोविड -19 के खिलाफ अपनी रक्षा को अधिकतम करने के लिए यूके द्वारा उठाए जा रहे कदमों की एक श्रृंखला निर्धारित की। डाउनिंग स्ट्रीट प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए जॉनसन ने कहा कि ब्रिटेन में आने वाले किसी भी व्यक्ति को दूसरे दिन कोविड -19 के लिए एक पीसीआर परीक्षण लेने के लिए कहा जाएगा और जब तक वे एक नकारात्मक परीक्षण प्रदान नहीं करते हैं तब तक उन्हें सेल्फ आइसोलेट करना होगा। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में दुकानों और सार्वजनिक परिवहन पर फेस कवरिंग के नियम भी कड़े किए जाएंगे। ब्रिटेन में ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित लोगों के सभी पुष्ट मामलों के संपर्क मंं आने वाले लोगों के लिए 10 दिनों का सेल्फ आइसोलेट होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारी बूस्टर वैक्सीन कार्यक्रम तक पहुंच बढ़ाने के मामले की भी जांच कर रहे हैं। जॉनसन ने चेतावनी दी कि यह टीकों की प्रभावशीलता को कम कर सकता है, क्योंकि उन्होंने एसेक्स में नॉटिंघम और ब्रेंटवुड में दो मामलों की पहचान के बाद ब्रिटेन के नियमों को मजबूत करने की घोषणा की थी। प्रसार को धीमा करने के प्रयास में जॉनसन ने वैक्सीन बूस्टर अभियान के विस्तार के साथ-साथ तीन सप्ताह में अस्थायी और एहतियाती उपायों की समीक्षा करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमें ट्रांसमिसिबिलिटी के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। हमें वायरस से बचाव के लिए टीकों की क्षमता के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी लेकिन इसमें थोड़ा समय लगने वाला है। इसके अलवा प्रधानमंत्री ने कहा मुझे पूरा विश्वास है कि यह क्रिसमस पिछले क्रिसमस की तुलना में काफी बेहतर होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के सबसे बड़े और सबसे पुराने मदरसे में से एक दारुल उलूम हक्कानिया मदरसा ने दुनिया के किसी भी स्कूल की तुलना में अधिक तालिबान नेताओं को शिक्षित किया है। अब इस मदरसे के एल्युमिनी अफगानिस्तान में तालिबान सरकार में टॉप पोस्ट्स पर हैं। इसी मदरसे के पूर्व छात्रों ने तालिबान आंदोलन की स्थापना की और 1990 के दशक में अफगानिस्तान पर शासन किया। मदरसे के चांसलर रहे समीउल हक में 2018 में इस्लामाबाद में हत्या कर दी गई थी। उन्हें "तालिबान का पिता" के नाम से जाता था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना अक्सर अपने नेताओं का इस्तेमाल तालिबान को प्रभावित करने के लिए करती है। इस स्कूल के आलोचक और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स इसे जिहाद का यूनिवर्सिटी कहते हैं और पूरे क्षेत्र में हिंसा फैलाने और हिंसा फैलाने में मदद करने का आरोप लगाते हैं। कइयों को लगता है कि ये मदरसा पाकिस्तान में चरमपंथ को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि मदरसे का दावा है कि वह बदल गया है। न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि मदरसे ने कहा है कि तालिबान को यह बताने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए कि वह पहले जैसे नहीं हैं और अब बदल चुके हैं। तालिबान सरकार में गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी भी दारुल उलूम हक्कानिया मदरसे से पढ़े हुए हैं। अमेरिकी सरकार ने सिराजुद्दीन पर 37.5 करोड़ रुपये का इनाम रखा हुआ है। सिराजुद्दीन के साथ ही विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बकी हक्कानी भी इसी मदरसे के एल्युमिनी हैं। मदरसे का कहना है कि न्याय मंत्री, जल और बिजली मंत्रालय सहित कई तरह के गवर्नर, सैन्य कमांडर और जज भी हक्कानिया मदरसा से शिक्षा ली है। मदरसे के वाइस चांसलर रशीदुल हक़ सामी ने न्यू यॉर्क टाइम्स से बातचीत करते हुए कहा है कि हमें गर्व है कि अफगानिस्तान में हमारे छात्रों ने पहले सोवियत संघ को तोड़ा और अब अमेरिका को लौटा दिया है। यह मदरसे के लिए एक सम्मान की बात है कि यहां के ग्रेजुएट अब मंत्री हैं और तालिबान सरकार में टॉप पोस्ट्स पर हैं।
एबीएन डेस्क। कोविड-19 महामारी फैलने के तकरीबन दो साल बाद दुनिया बीते दिनों सामने आए वायरस के नए स्वरूपों से दहशत में है और संभवत: अधिक खतरनाक एक और नए स्वरूप से जूझती नजर आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक समिति ने कोरोना वायरस के नए स्वरूप को ओमीक्रॉन नाम दिया है और इसे बेहद संक्रामक चिंताजनक स्वरूप करार दिया है। इससे पहले इस श्रेणी में कोरोना वायरस का डेल्टा स्वरूप था जिससे यूरोप और अमेरिका के कई हिस्सों में लोगों ने बड़े पैमाने पर जान गंवाई। अमेरिका ने 7 देशों पर लगाया ट्रैवल बैन : दक्षिणी अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया स्वरूप सामने आने के बाद अमेरिका, कनाडा, रूस और कई अन्य देशों के साथ यूरोपीय संघ ने उस क्षेत्र से आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका सोमवार से दक्षिण अफ्रीका और क्षेत्र में सात अन्य देशों से आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगाएगा। बाइडन ने कहा कि इसका मतलब है कि देश लौट रहे अमेरिकी नागरिकों और स्थायी निवासियों के अलावा इन देशों से न कोई आएगा और न ही कोई वहां जाएगा। यह पूछे जाने पर कि अमेरिका ने सोमवार तक का इंतजार क्यों किया, इस पर बाइडन ने कहा, केवल इसलिए कि मेरे चिकित्सा दल ने यही सिफारिश की है। संक्रमित हो चुके हो चुके लोगों पर फिर संक्रमण का खतरा : अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नए स्वरूप के बारे में कहा, ऐसा लगता है कि यह तेजी से फैलता है। नई यात्रा पाबंदियों की घोषणा करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा, मैंने फैसला किया है कि हम सतर्कता बरतेंगे। WHO ने कहा कि ओमीक्रॉन के वास्तविक खतरों को अभी समझा नहीं गया है लेकिन शुरुआती सबूतों से पता चलता है कि अन्य अत्यधिक संक्रामक स्वरूपों के मुकाबले इससे फिर से संक्रमित होने का जोखिम अधिक है। इसका मतलब है कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं और उससे उबर गए हैं, वे फिर से संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि, यह जानने में हफ्तों का वक्त लगेगा कि क्या मौजूदा टीके इसके खिलाफ कम प्रभावी हैं। अमेरिका ने 7 देशों पर लगाया ट्रैवल बैन : दक्षिणी अफ्रीका में कोरोना वायरस का नया स्वरूप सामने आने के बाद अमेरिका, कनाडा, रूस और कई अन्य देशों के साथ यूरोपीय संघ ने उस क्षेत्र से आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका सोमवार से दक्षिण अफ्रीका और क्षेत्र में सात अन्य देशों से आने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगाएगा। बाइडन ने कहा कि इसका मतलब है कि देश लौट रहे अमेरिकी नागरिकों और स्थायी निवासियों के अलावा इन देशों से न कोई आएगा और न ही कोई वहां जाएगा। यह पूछे जाने पर कि अमेरिका ने सोमवार तक का इंतजार क्यों किया, इस पर बाइडन ने कहा, ‘‘केवल इसलिए कि मेरे चिकित्सा दल ने यही सिफारिश की है।' संक्रमित हो चुके हो चुके लोगों पर फिर संक्रमण का खतरा : अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नए स्वरूप के बारे में कहा, ऐसा लगता है कि यह तेजी से फैलता है। नई यात्रा पाबंदियों की घोषणा करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा, मैंने फैसला किया है कि हम सतर्कता बरतेंगे। WHO ने कहा कि ओमीक्रॉन के वास्तविक खतरों को अभी समझा नहीं गया है लेकिन शुरुआती सबूतों से पता चलता है कि अन्य अत्यधिक संक्रामक स्वरूपों के मुकाबले इससे फिर से संक्रमित होने का जोखिम अधिक है। इसका मतलब है कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं और उससे उबर गए हैं, वे फिर से संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि, यह जानने में हफ्तों का वक्त लगेगा कि क्या मौजूदा टीके इसके खिलाफ कम प्रभावी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में एक बार फिर कोरोना बेकाबू हो चुका है। कोरोना वायरस अब यहां तेजी से बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट के अनुसार बीते सप्ताह 11 से 18 नवंबर के बीच 1,41,905 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वायरस का यह रूप दुनिया के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में संक्रमण की गति में बीते दो सप्ताह की तुलना में 32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार अक्तूबर में 5 से 11 वर्ष के 8300 बच्चे संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती हुए। इसमें से 172 ने दम तोड़ दिया। CDC ने कहा है कि महामारी की तेज गति के बीच 2300 स्कूलों को बंद किया गया, जिससे 12 लाख बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। अब स्कूल खुलने के साथ ही संक्रमण बेकाबू होने लगा है, जो आने वाले समय के लिए चेतावनी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एक डराने वाली खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया वैरिएंट मिला है। नेशनल इंस्टीट्यूट फार कम्युनिकेबल डिजीज ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। बताया गया कि वैज्ञानिक इस नए कोरोना स्वरूप के संभावित प्रभावों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। जीनोमिक सीक्वेंसिंग के बाद पता चला है कि वैरिएंट बी 1.1.529 के अब तक 22 मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले श्रीलंका में 19 नवंबर को कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट का एक नया उप-वंश का पता चला था। इसका वैज्ञानिक नाम बी 1.617.1 एवाई 104 रखा गया था और यह इस द्विपीय देश में पैदा होने वाला कोरोना वायरस का तीसरा म्यूटेशन था। दरअसल, अब तक कोरोना का डेल्टा वैरिएंट बेहद संक्रामक साबित हुआ है और इस साल की शुरूआत और मध्य में पूरी दुनिया में तेजी से इस बीमारी के मामले बढ़ने की वजह बना था।
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