एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन मसले को लेकर रूस और नाटो सदस्यों के बीच जिनेवा में वार्ता हो रही है। इस वार्ता का मकसद यूक्रेन सीमा के पास रूस द्वारा की गई सैन्य तैनाती से उपजे तनाव को घटाना है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि उप विदेश मंत्री वेंडी शैरमन और उनके रूसी समकक्ष सेर्गई रिबकोफ के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। इस मसले पर इसी हफ्ते रूसी राजनयिकों की नाटो प्रतिनिधियों से भी मुलाकात होनी है। साथ ही, रूस की ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्यॉरिटी ऐंड को-ऑपरेशन इन यूरोप (ओएससीई) के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात प्रस्तावित है। वार्ता शुरू होने से पहले ही दोनों पक्ष कह चुके हैं कि उन्हें बातचीत के किसी सार्थक नतीजे पर पहुंचने की बहुत संभावना नहीं दिख रही है। इस बाबत 9 जनवरी को रूस के उप विदेश मंत्री सेर्गई रिबकोफ का बयान आया। इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित वार्ता से तनाव सुलझने की उम्मीद करना अभी बचकाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह वॉशिंगटन की ओर से दिए जा रहे हालिया संकेतों से निराश हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने भी वार्ता से बहुत ज्यादा उम्मीद न होने की बात कही। उन्होंने सीएनएन से कहा कि उन्हें इस मामले में हाल-फिलहाल किसी समझौते पर पहुंचने की संभावना नहीं दिख रही है। नाटो के सेक्रेटरी जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने भी कहा है कि इन वार्ताओं से फिलहाल तनाव घटने की उम्मीद नहीं दिख रही है। रूस का आरोप है कि मौजूदा तनाव के लिए पश्चिमी देश जिम्मेदार हैं। उसने नाटो से अपनी कथित विस्तारवादी नीति रोकने की गारंटी मांगी है। साथ ही, यह आश्वासन भी मांगा है कि यूक्रेन और जॉर्जिया को नाटो सदस्यता देने का प्रस्ताव भी रद्द कर दिया जाएगा। वहीं पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस यूक्रेन पर हमले की धमकी दे रहा है इसीलिए उसने यूक्रेनी सीमा के पास अपनी सेना और हथियार तैनात किए हैं। नाटो सदस्य चाहते हैं कि रूस बिना किसी शर्त के पहले यूक्रेनी सीमा के पास से अपनी सेना हटाए। रूस इन आरोपों से इनकार करता है। उसका दावा है कि उसकी सैन्य गतिविधियां आत्मरक्षा के लिए हैं। रूस और अमेरिका के बीच वार्ता असफल रहने पर यूरोपियन संघ को बड़ा नुकसान हो सकता है। यूरोप के रूस के साथ अहम व्यापारिक रिश्ते हैं। अगर वार्ता असफल रही और यूक्रेन तनाव कम नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। दिसंबर 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इस बाबत चेतावनी दे चुके हैं। बाइडेन ने कहा था कि यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है। ना ही उसकी सुरक्षा के लिए अमेरिका की कोई सैन्य प्रतिबद्धता है। इसलिए अगर रूस ने यूक्रेन पर अपनी आक्रामकता नहीं घटाई, तो अमेरिका वहां अपनी सेना नहीं भेजेगा। मगर वह इतना जरूर सुनिश्चित करेगा कि इस आक्रामकता के चलते रूस को बेहद गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ें। रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में यूरोप के व्यापारिक हितों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। रूस और यूरोप के बीच अहम व्यापारिक रिश्ते हैं। एक बड़ी चिंता रूस से आने वाली गैस आपूर्ति से भी जुड़ी है। रूस यूरोप को सालाना करीब 30 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस देता है। रूसी गैस सस्ती पड़ती है। हमेशा उपलब्ध रहती है। यह एक बड़ी वजह है कि यूरोपियन संघ की गैस की जरूरतों का लगभग 35 फीसदी हिस्सा रूस से आता है। रूसी सप्लाई लाइन के प्रभावित होने से यूरोप में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो जाएगा। पहले भी कुछ मौकों पर ऐसा हो चुका है। संघ की इस निर्भरता का इस्तेमाल कर रूस कई बार दवाब भी बनाता रहा है। मसलन, 2006 और 2009 में रूस ने गैस सप्लाई काट दी थी। इसके चलते जनवरी की ठंड के बीच पूर्वी यूरोप में गैस की किल्लत हो गई। यूरोपियन संघ ने कहा भी था कि वह ऊर्जा से जुड़ी जरूरतों में वह रूस से अपनी निर्भरता घटाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर बढ़ती निर्भरता को लेकर यूरोपियन संघ के बीच भी असहमति है। इन असहमतियों के केंद्र में है, नॉर्ड स्ट्रीम 2. यह तकरीबन 1,200 किलोमीटर लंबी एक गैस पाइपलाइन परियोजना है। करीब 9.5 अरब यूरो की लागत वाली ये पाइपलाइन बाल्टिक सागर होते हुए पूर्वी यूरोप को बायपास करके रूस से सीधे जर्मनी आती है। अमेरिका और पूर्वी यूरोप के कुछ देश इस पाइपलाइन का विरोध कर रहे थे। अमेरिका ने पाइपलाइन के निर्माण को लटकाने के लिए प्रतिबंध भी लगाए थे। मगर फिर लंबी वार्ता के बाद जुलाई 2021 में अमेरिका और जर्मनी के बीच एक समझौता हुआ। इसमें अमेरिका ने पाइपलाइन का निर्माण पूरा होने पर अपनी सहमति दी। बदले में जर्मनी ने आश्वासन दिया कि अगर मॉस्को ने अपने राजनैतिक हितों के लिए एनर्जी सेक्टर का बेजा इस्तेमाल किया, तो वह रूस पर सख्त रवैया अपनाएगा। यूक्रेन मसले पर बढ़े तनाव के बीच हालिया दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच टेलिफोन पर दो बार बातचीत हो चुकी है। 30 दिसंबर, 2021 को हुई आखिरी बातचीत में भी बाइडेन ने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। इस पर रूस ने कहा कि ऐसा हुआ, तो दोनों देशों के संबंध पूरी तरह से टूट जाएंगे। एक दूसरे को चेतावनियां देने के अलावा इस बातचीत में एक सकारात्मक चीज यह हुई कि दोनों देश जिनेवा में मिलकर विस्तृत वार्ता करने पर सहमत हुए। कई जानकारों की राय है कि यूरोपियन संघ को भी इस वार्ता में सीधे तौर पर शामिल किया जाना चाहिए था, क्योंकि यह मसला सीधे-सीधे यूरोप की शांति-सुरक्षा और आर्थिक हितों से भी जुड़ा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूरी दुनिया कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के कारण एक नई लहर का सामना कर रही है। ओमिक्रोन वेरिएंट अमेरिका में भी दस्तक दे दी है। अमेरिका में नवीनतम कोरोना आंकड़े सोमवार तक 6 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं, जो वैश्विक कोरोना संख्या का लगभग 20 फीसदी है। दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका है, वहीं दूसरे नंबर पर भारत का नाम आता है। दुनिया के बाकी देशों की तरह ब्रिटेन भी इस समय कोरोना वायरस के रिकॉर्ड मामलों का सामना कर रहा है। जान्स हापकिन्स यूनिवर्सिटी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में सबसे बुरी तरह से प्रभावित अमेरिका में सोमवार तक 6 करोड़ से ज्यादा मामले सामने आए हैं। यूनिवर्सिटी के सेंटर फार सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने सोमवार सुबह अपने नए अपडेट में बताया कि देश में कुल कोरोना वायरस मामलों की संख्या बढ़कर 60,072,321 पहुंच गई है, वहीं इस वायरस से मरने वालों की संख्या 837,594 हो गई है। इसके अलावा अगर वैक्सिनेशन की बात करें तो अमेरिका में 516,880,436 लोगों ने वैक्सीन लगवा लिया है। कोरोना वायरस के कारण अमेरिका में अब तक सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। दुनिया भर में कोरोना वायरस से मरने वालों में अकेले अमेरिका में 15 प्रतिशत से अधिक मरीज हैं। देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 9 नवंबर, 2020 को 1 करोड़ तक पहुंच गई थी। ये 1 जनवरी 2021 को 2 करोड़ की संख्या को पार कर गई जबकि 24 मार्च को 3 करोड़ से ज्यादा और 6 सितंबर को 4 करोड़ और 13 दिसंबर को 5 करोड़ से ज्यादा हो गई थी। दुनिया के बाकी देशों की तरह ब्रिटेन भी इस समय कोरोना वायरस के रिकॉर्ड मामलों का सामना कर रहा है। सरकार ने शनिवार को बताया कि देश में कोरोना वायरस से अब तक 150,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। ब्रिटेन यूरोप के उन देशों में शामिल है, जो वायरस से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ट्विटर पर एक मैसेज पोस्ट करते हुए कहा, कोरोना वायरस के कारण हमारे देश में मौत के भयानक आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने बताया कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए जाने के 28 दिनों के भीतर जान गंवाने वाले लोगों की संख्या महामारी की शुरुआत के बाद से 150,057 तक पहुंच गई है। वहीं, रूस अकेला ऐसा यूरोपीय देश है, जहां मरने वालों की संख्या लगभग 315,000 हो गई है। एक काले रंग के बैकग्राउंड वाले मैसेज को शेयर करते हुए जॉनसन ने कहा, जिन्होंने भी कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गंवाई है, उनमें से हर एक ही मौत उनके परिवारों, दोस्तों और समुदायों के लिए एक गहरा नुकसान है और मेरी संवेदना उनके साथ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन के तिआनजिन में कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के मामले सामने आने के बाद आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। क्षेत्र संक्रमण के इस स्वरूप के पहले स्थानीय प्रकोप का सामना कर रहा है, लेकिन इसकी संख्या फिलहाल कम है। यह मामले अगले महीने बीजिंग में शीत ओलंपिक खेलों की शुरुआत से पहले सामने आए हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने बताया कि सरकार ने तिआनजिन और उसकी 1.4 करोड़ आबादी को तीन हिस्सों में बांटकर पाबंदियां लगाई हैं। इसके तहत पहले चरण में, लोगों को घरों से बाहर निकलने की बिल्कुल इजाजत नहीं है। वहीं नियंत्रित इलाकों में हर परिवार के एक सदस्य को राशन आदि खरीदने के लिए घर से बाहर जाने की अनुमति है जबकि रोकथाम वाले इलाकों में लोगों को अपने क्षेत्रों के अंदर ही रहना होगा। तिआनजिन से राजधानी बीजिंग के लिए बस और ट्रेन सेवा को बंद कर दिया है और शहर के लोगों को बहुत जरूरी काम होने तक शहर नहीं छोड़ने को कहा गया है। शहर में रविवार को 20 बच्चे और वयस्क कोविड-19 से पीड़ित मिले थे जिनमें से कम से कम दो लोग वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप से संक्रमित थे। इसके बाद नगर में बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी गई है। रविवार को ही 20 और लोग संक्रमित पाए गए जिसके बाद कुल संख्या 40 पहुंच गई है। अधिकारियों ने पहले कहा था कि वायरस का प्रसार हो रहा है और मामलों की संख्या बढ़ सकती है। चीन ने चार फरवरी से शुरू हो रहे शीत ओलंपिक से पहले संक्रमण को लेकर कतई बर्दाश्त नहीं करने की रणनीति अपनाई है। वहीं तिआनजिन से काफी दूर स्थित शियान और यूझोउ शहरों में लाखों लोग अपने घरों में बंद हैं, क्योंकि वायरस के डेल्टा स्वरूप का वहां खासा प्रसार हुआ है। शियान के निवासी दो हफ्तों से ज्यादा समय से लॉकडाउन का सामना कर रहे हैं। 1.3 करोड़ की आबादी वाले शहर में सोमवार को वायरस के सिर्फ 15 मामले आए जिससे संकेत मिल रहे हैं कि पाबंदियां जल्द हटाई जा सकती हैं। यूझोउ शहर हेनान प्रांत में है। हेनान प्रांत में सोमवार को 60 और मामले मिले जिनमें से दो ओमीक्रोन स्वरूप के थे। यह मामले अनयांग शहर में मिले । चीन में वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप के एक दर्जन से ज्यादा मामले सामने आए हैं। विदेश से लौटे ज्यादातर लोग इस स्वरूप से संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें पृथक कर दिया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन में कोरोनावायरस महामारी के शुरू होने के बाद से अब तक 1.50 लाख लोगों की जान जा चुकी है। देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि महामारी ने देश पर खतरनाक असर किया है। उन्होंने देशवासियों से जल्द टीका लगवाने की अपील की और मदद के लिए देश की स्वास्थ्य सेवाओं का शुक्रिया जताया। ब्रिटेन में एक दिन पहले ही ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से 1.46 लाख नए केस दर्ज किए गए, जबकि 313 लोगों की मौत के मामले भी सामने आए। कोरोना की इसी रफ्तार की वजह से महामारी शुरू होने के लगभग दो साल बाद ब्रिटेन में डेढ़ लाख मौतें रिकॉर्ड हो गई हैं। पीएम जॉनसन ने कहा, अपने परिवार, दोस्तों और समुदायों में से किसी को भी गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रति मेरी संवेदनाएं। हमारी सरकार एक स्वतंत्र जांच बिठा चुकी है, ताकि हम पहले की गई गलतियो से बचें और पहले हुई मौतों की जिम्मेदारी तय कर सकें। हालांकि, दुनिया में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की बात की जाए तो ब्रिटेन अब भी तीसरे नंबर पर है। कोरोना केस और मौतों के मामले में पहले नंबर पर अमेरिका है। यहां अब तक कोरोना के करीब 6 करोड़ केस और 8.37 लाख मौतें दर्ज हुई हैं, वहीं दूसरा नंबर भारत का है, जहां कोरोना के 3.55 करोड़ केस और 4.83 लाख मौतें दर्ज हुई हैं। इसके बाद रूस, मेक्सिको और पेरु में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। संक्रमितों की संख्या में ब्रिटेन (1.44 करोड़) तीसरे और मौतों (1 लाख 50 हजार 537) में छठे नंबर पर है।
एबीएन डेस्क। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में रविवार को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 16 और लोगों की मौत हो गई, जो इस बीमारी के कारण राज्य में सर्वाधिक दैनिक मृतक संख्या है। न्यू साउथ वेल्स हेल्थ ने यह जानकारी दी। उसने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में संक्रमण के 30,000 से अधिक नए मामले सामने आए हैं। राज्य में इससे पहले संक्रमण के कारण सर्वाधिक दैनिक मृतक संख्या 15 थी। राज्य में पिछले साल 29 सितंबर और एक अक्टूबर को एक दिन में 15 लोगों की मौत इस वायरस के कारण हुई थी। न्यू साउथ वेल्स हेल्थ ने बताया कि राज्य में 1,927 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 151 लोग गहन चिकित्सा इकाई में हैं। इसके अलावा दो लाख से अधिक लोग घर में पृथक-वास में रह रहे हैं। इसके अलावा, विक्टोरिया में रविवार को 44,155 नए मामले पाए गए। स्वास्थ्य प्राधिकारियों द्वारा की गई जांच में पता चला है कि नए मामलों में से 80 प्रतिशत मामले ओमीक्रोन स्वरूप से संक्रमण के हैं। विक्टोरिया में रविवार को संक्रमण से आठ लोगों की मौत हुई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में जो बाइडेन प्रशासन ने रूस को नई जोरदार चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर रूस, यूक्रेन पर हमला करने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोप में अमेरिका की भविष्य की रणनीति की स्थिति के बारे में निर्णयों में लगातार बदलाव की संभावना जताई है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर रूस यूक्रेन में हस्तक्षेप करता है तो उसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन यूक्रेन में भविष्य में मिसाइलों की संभावित तैनाती को कम करने और पूर्वी यूरोप में अमेरिका और नाटो के सैन्य अभ्यासों को सीमित करने पर रूस के साथ चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस को यूक्रेन में हस्तक्षेप करने पर आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना होगा। इनमें रूसी संस्थाओं पर प्रत्यक्ष प्रतिबंधों के अलावा अमेरिका से रूस को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों और विदेश निर्मित उत्पादों पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं जो संभावित रूप से अमेरिकी क्षेत्राधिकार में आते हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब यूक्रेन को लेकर बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को स्विट्जरलैंड में वरिष्ठ अमेरिकी और रूसी अधिकारियों की बैठक होनी है। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका उन वार्ताओं में अपने यूरोपीय सुरक्षा रुख के कुछ सीमित पहलुओं पर चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि इस बात की कोई संभावना नहीं है कि रूस की मांग के अनुरूप अमेरिका पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति या हथियारों को कम करेगा। ऊर्जा और उपभोक्ता वस्तुओं पर प्रतिबंधों के अलावा अमेरिका और उसके सहयोगी अमेरिकी उपकरणों का उपयोग करने वाले उन्नत इलेक्ट्रॉनिक पुरज़ों, सॉफ्टवेयर और संबंधित प्रौद्योगिकी के रूस को निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि निर्यात नियंत्रण उद्देश्यों के लिए रूस को क्यूबा, ईरान, उत्तर कोरिया और सीरिया के साथ प्रतिबंधात्मक समूह में शामिल किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि इस क्षेत्र में अमेरिका का सॉफ्टवेयर, प्रौद्योगिकी और उपकरणों में वैश्विक प्रभुत्व होने के कारण, एकीकृत सर्किट और एकीकृत सर्किट वाले उत्पादों को प्राप्त करने की रूस की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होगी, जिसका असर एयरक्राफ्ट एवियोनिक्स, मशीन टूल्स, स्मार्टफोन, गेम कंसोल, टैबलेट और टीवी तक हो सकता है। इस तरह के प्रतिबंध महत्वपूर्ण रूसी उद्योग को भी लक्षित कर सकते हैं, जिसमें इसके रक्षा और नागरिक उड्डयन क्षेत्र शामिल हैं, जो रूस की कृत्रिम बुद्धि या क्वांटम कंप्यूटिंग में उच्च-तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित करेगा। जिनेवा में अमेरिका और रूस के बीच सोमवार को होने वाली सामरिक और सुरक्षा वार्ता से पहले एक अधिकारी ने शनिवार को कहा, हमें लगता है कि हम कम से कम रूसियों के साथ प्रगति की संभावना तलाश सकते हैं। सोमवार की बैठक के बाद बुधवार को रूस और नाटो के सदस्यों के बीच और बृहस्पतिवार को यूरोपीय लोगों के साथ चर्चा होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान के लोकप्रिय हिल स्टेशन मुर्री को शनिवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। पंजाब प्रांत के इस सुंदर शहर में अभूतपूर्व बर्फबारी और पर्यटकों की भीड़ के कारण नौ बच्चों सहित कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। हजारों वाहनों के शहर में प्रवेश करने के कारण रावलपिंडी जिले के मुर्री में सभी मार्ग अवरुद्ध हो गए जिससे पर्यटक सड़कों पर असहाय हो गए। डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1000 कारें हिल स्टेशन पर फंसी हुई हैं, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार ने बचाव कार्य में तेजी लाने और फंसे हुए पर्यटकों को सहायता प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं। पंजाब सरकार ने अस्पतालों, पुलिस थानों और प्रशासनिक कार्यालयों में आपातकाल की स्थिति लागू कर दी है। रेस्क्यू 1122 द्वारा जारी सूची के अनुसार नौ बच्चों सहित कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि वह मुर्री की सड़क पर पर्यटकों की दुखद मौत से स्तब्ध और परेशान हैं। खान ने एक ट्वीट में कहा, अभूतपूर्व बर्फबारी और मौसम की जांच के बिना लोगों की भीड़ के यहां पहुंचने से जिला प्रशासन को तैयार होने का मौका ही नहीं मिला। इस तरह की त्रासदियों की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए जांच का आदेश दिया है। आंतरिक मंत्री शेख राशिद ने एक वीडियो संदेश में कहा कि सड़कों को साफ करने और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए सेना को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि मुर्री ने 15-20 वर्षों के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों को देखा और इसके कारण एक संकट पैदा हुआ। राशिद ने कहा कि सरकार को इस्लामाबाद से मुर्री तक सड़क बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के आयुक्त व पुलिस उपायुक्त बचाव अभियान चला रहे हैं। राशिद ने कहा कि रात से अब तक 1,000 वाहन फंसे हुए हैं, जिनमें से कुछ को सुरक्षित निकाल लिया गया है। कारों में 16-19 मौतें हुई हैं। स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को भोजन और कंबल मुहैया कराया। उन्होंने कहा कि अधिकारी शनिवार शाम तक 1,000 वाहनों को निकाल लिया जाएगा। मुर्री के लिए रविवार रात नौ बजे तक सड़कें बंद रहेंगी।
एबीएन डेस्क। दुनिया भर में खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में लगातार 4 महीने तक बढ़ौतरी के बाद दिसम्बर में थोड़ी गिरावट आई। हालांकि अगर 2021 के पूरे साल को देखें तो इस दौरान खाने-पीने की कीमतें करीब 28 फीसदी बढ़ीं, जो साल 2011 के बाद से अब तक का सबसे अधिक औसत लेवल है। संयुक्त राष्ट्र की फूड एजैंसी ने गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। फूड एड एग्रीकल्चर आॅगेर्नाइजेशन (एफ.ए.ओ.) का फूड प्राइस इंडैक्स दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार वाली खाद्य वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखता है। दिसम्बर में यह इंडैक्स औसतन 133.7 अंक रहा, जो नवम्बर महीने के अंत में 134.9 अंक था। वहीं साल 2021 के सभी महीनों को मिलाकर देखने पर बैंचमार्क इंडैक्स का औसत 125.7 अंक रहा, जो पिछले साल के औसत अंक से 28.1 पर्सैंट अधिक है। वहीं साल 2011 के औसत 131.9 के बाद यह अब तक का सबसे उच्चतम औसत आंकड़ा है। मंथली इंडैक्स के 10 साल के उच्चतम स्तर पर होना बताता है कि कई फसलों को नुकसान पहुंचा है और इनकी मांग पिछले साल के मुकाबले अधिक मजबूत है। दुनिया भर में खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में लगातार 4 महीने तक बढ़ौतरी के बाद दिसम्बर में थोड़ी गिरावट आई। हालांकि अगर 2021 के पूरे साल को देखें तो इस दौरान खाने-पीने की कीमतें करीब 28 फीसदी बढ़ीं, जो साल 2011 के बाद से अब तक का सबसे अधिक औसत लेवल है। संयुक्त राष्ट्र की फूड एजैंसी ने गुरुवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। फूड एड एग्रीकल्चर आॅगेर्नाइजेशन (एफ.ए.ओ.) का फूड प्राइस इंडैक्स दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार वाली खाद्य वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर नजर रखता है। दिसम्बर में यह इंडैक्स औसतन 133.7 अंक रहा, जो नवम्बर महीने के अंत में 134.9 अंक था। वहीं साल 2021 के सभी महीनों को मिलाकर देखने पर बैंचमार्क इंडैक्स का औसत 125.7 अंक रहा, जो पिछले साल के औसत अंक से 28.1% अधिक है। वहीं साल 2011 के औसत 131.9 के बाद यह अब तक का सबसे उच्चतम औसत आंकड़ा है। मंथली इंडैक्स के 10 साल के उच्चतम स्तर पर होना बताता है कि कई फसलों को नुक्सान पहुंचा है और इनकी मांग पिछले साल के मुकाबले अधिक मजबूत है।
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