एबीएन डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है भयंकर रूप लेता जा रहा है। दरअसल, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुगंस्क को अलग देश के रूप में मान्यता दे दी जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। इस बीच अमेरिका एक्शन में आ गया है और ब्रिटेन सहित कई देशों ने रूस पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी आज यूक्रेन मसले पर मीटिंग हुई। जापान ने की प्रतिबंधों की घोषणा : जापान के प्रधानमंत्री ने रूस तथा यूक्रेन के उन दो अलगाववादी क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिनकी स्वतंत्रता को रूस ने मान्यता दे दी। इसी के साथ वह रूस पर कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर लौटने का दबाव बनाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल हो गए हैं। प्रधानमंत्री फुमियो कुशिदा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार यूक्रेन में रूस द्वारा की जा रही कार्रवाई के जवाब में जापान में रूसी सरकार के बॉन्ड को जारी करने तथा इसके वितरण पर प्रतिबंध लगाएगी। उन्होंने कहा कि जापान यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों से जुड़े लोगों को वीजा जारी करने पर भी रोक लगाएगा, अपने यहां उनकी संपत्तियां जब्त करेगा तथा दो इलाकों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाएगा। किशिदा ने यूक्रेन की संप्रभुत्ता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के लिए रूस की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, हम रूस से इस घटनाक्रम को हल करने के लिए कूटनीतिक प्रक्रिया पर लौटने का अनुरोध करते हैं। यूक्रेन पर बाइडेन और पुतिन के बीच बढ़ा गतिरोध : रूसी संसद द्वारा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को देश से बाहर सेना के प्रयोग की अनुमति देने के बाद मंगलवार को यूक्रेन के मुद्दे पर मॉस्को और पश्चिमी देशों के बीच गतिरोध बढ़ गया। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और यूरोपीय नेताओं ने इसके जवाब में रूस के बड़े व्यवसायियों और बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिए। बाइडन और पुतिन ने संकेत दिया है कि यह गतिरोध आगे और बढ़ सकता है। पुतिन, यूक्रेन पर डेढ़ लाख सैनिकों के साथ हमला करने को तैयार हैं और बाइडेन ने अभी तक रूस को आर्थिक रूप से अधिक नुकसान पहुंचाने वाले प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर हमला होता है तो पाबंदियां लगाई जाएंगी। ऑस्ट्रेलिया ने पुतिन के शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों पर कसा शिकंजा : रूस के यूक्रेन पर अनुचित, अकारण, अस्वीकार्य आक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों में से आठ पर प्रतिबंधों की घोषणा की। यूक्रेन के पूर्व में क्रेमलिन समर्थित स्टेटलेट्स में सैनिकों को आदेश देने के पुतिन के फैसले की आलोचना करते हुए, प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रतिबंधों की घोषणा की है। अभी पूर्ण सैन्य लामबंदी की जरूरत नहीं : यूक्रेन यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार रात घोषणा की कि रूस के आक्रमण करने की आशंका के चलते वह देश के कुछ आरक्षित सैनिकों को तैनाती के लिए बुला रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्ण सैन्य लामबंदी की अभी कोई आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रपति ने राष्ट्र को एक वीडियो के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि उनका आदेश केवल तथाकथित रिज़र्व सैनिकों पर लागू होता है, जो आम तौर पर संकट के समय सक्रिय हो जाते हैं और एक निश्चित समय के लिए सक्रिय रहते हैं। जेलेंस्की ने इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा, अभी पूर्ण सैन्य लामबंदी की जरूरत नहीं है। हमें यूक्रेन की सेना और अन्य सैन्य संरचनाओं में अतिरिक्त सैनिकों को शामिल करने की जरूरत है। यूक्रेन के सशस्त्र बलों में लगभग 250,000 सैनिक हैं और 140,000 सैनिकों को रिज़र्व (तैनाती के लिए तैयार) में रखा गया हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन संकट पर फिर शांति प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ ज्यादा बिगड़ा नहीं है, बशर्ते कीव (यूक्रेन) नाटो देशों की सदस्यता का विचार छोड़ दे। पुतिन ने मौजूदा हालात और मिंस्क समझौते से पीछे हटने के हालात के लिए भी कीव को ही जिम्मेदार ठहराया। क्रेमलिन (रूस का राष्ट्रपति भवन) ने एक बार फिर अपने फैसले के साथ खड़े रहने की मजबूती दिखाई है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने रूस को यूक्रेन में घुसपैठ के लिए जिम्मेदार ठहराया और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी जनसभा में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी हलचल बताया है। नई दिल्ली यूक्रेन के हालात पर गंभीरता से नजर रख रहा है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय पेरिस में हैं और समझा जा रहा है कि अपने समकक्ष के साथ सभी क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। भारत ने यूक्रेन में पैदा हुए जटिल हालात और महाशक्तियों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका के बीच बातचीत तथा कूटनीतिक समाधान के जरिए समस्या का हल निकालने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बढ़ गई है हलचल : राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि बहुत अच्छा होता कि यूक्रेन अब नाटो देशों के संगठन में शामिल होने का विचार त्याग दे। यूक्रेन पूरी तरह से हथियारों से मुक्त हो। वह पार्टी न बने और निष्पक्ष देश की तरह व्यवहार करे। राष्ट्रपति ने कहा कि मिंस्क समझौता अब खत्म हो चुका है और इसके लिए कीव (यूक्रेन) जिम्मेदार है। पुतिन ने इसे यूक्रेन के लिए आखिरी मौका बताया है। इसके साथ यह भी जोड़ा है कि वह डोनबास क्षेत्र में किसी तरह का नरसंहार नहीं होने देना चाहते। यह संदेश देकर पुतिन ने यह बताने की कोशिश की है कि वह रूस की सुरक्षा, एकता, अखंडता और इसकी संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा वह किसी बड़ी जंग के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन स्थितियों ने मजबूर किया तो कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। एक और नया डेवलपमेंट भी हुआ। राष्ट्रपति पुतिन की रूस की संसद ने डोनेत्स्क (डीपीआर) और लुहांस्क (एलपीआर) में सेना तैनात करने की इजाजत दे दी है। नाटो महासचिव स्टोलेनबर्ग ने सख्त बयानों को देने का सिलसिला जारी रखा है। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन पर हमले की योजना को अंतिम रूप देने में लगा है। उन्होंने कहा कि हम अभी भी रूस से अपने कदम पीछे खींचने के लिए कह रहे हैं। इस तनावपूर्ण क्षण में भी अभी यूक्रेन की महत्वाकांक्षा थमने का नाम नहीं ले रही है। विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि पश्चिमी देश अंतत: कीव की आवाज सुनेंगे। रूस को गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों को भुगतना पड़ेगा। जी-7 के देशों के विदेश मंत्रियों ने रूस द्वारा एलपीआर और डीपीआर को मान्यता देने की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय रूस पर दबाव बनाने की कोशिशों में जुट गया है। क्यों दी जा रही है मिंस्क समझौते की दुहाई : मिंस्क समझौता, युद्ध विराम का समझौता है। हालांकि यह कभी कारगर नहीं हो सका। यह समझौता यूक्रेन, रूस और यूरोपीय संस्था ओएससीआई के बीच में हुआ था। पहली बार यह 2014 में डोनेत्स्क और लुहांस्क में अलगाववादी आंदोलन को शांतिपूर्व खत्म करने के इरादे से किया गया था। इसमें सभी पक्षों के सहमत होने, हस्ताक्षर करने के बाद भी युद्ध विराम में सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद मिंस्क-2 समझौता भी हुआ, लेकिन इस समझौते के बाद भी युद्ध विराम के आसार नहीं बन पाए। यूक्रेन के विद्रोही इस क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाने और उसे स्वतंत्र घोषित कराने के प्रयास में लगे रहे। लेकिन यह मान लिया गया कि मिंस्क-2 में बनी सहमति ही भविष्य में समाधान निकालने वाली कोशिशों का आधार बनेगी। इस समझौते के सफल न हो पाने की सबसे बड़ी अड़चन एक शर्त रही। इस शर्त के मुताबिक डोनेत्स्क और लुहांस्क से सभी विदेशी लड़ाकों, सेनाओं, सैन्य उपकरणों को हटाना होगा। यह इसलिए मुमकिन नहीं हो पाया कि इसका सीधा संबंध रूस से था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लगभग एक माह से रूस की सेनाएं अमेरिका-यूरोप की धमकियों को दरकिनार करते हुए युद्धाभ्यास कर रही है और यूक्रेन के दो प्रांतों में घुस गईं। यहां तक कि रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के दो प्रांतों को आजाद देश घोषित कर चुके हैं। रूस की इस कार्रवाई के बाद अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है। अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने का ऐलान किया है। बाइडेन ने साफ तौर पर कह दिया है कि वो नाटो की इंच-इंच जमीन की रक्षा करेंगे। रूस के यूक्रेन पर "अनुचित, अकारण, अस्वीकार्य" आक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों में से आठ पर प्रतिबंधों की घोषणा की। यूक्रेन के पूर्व में क्रेमलिन समर्थित स्टेटलेट्स में सैनिकों को आदेश देने के पुतिन के फैसले की आलोचना करते हुए, प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रतिबंधों की घोषणा की है। • न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि यूक्रेन को लेकर रूस और अमेरिका की तनातनी के बीच रूसी सेना के सैकड़ों ट्रक का काफिला यूक्रेन बॉर्डर की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया है। यह काफिला रूसी शहर बेलगोरोद से होते हुए यूक्रेन बॉर्डर की नजदीक जा रहा है। वहीं हंगरी ने भी घोषणा की है कि वो यूक्रेन से लगी बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती करेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता देने के बाद उन्होंने जिनेवा में अपने रूसी समकक्ष के साथ होने वाली बैठक रद्द कर दी है। ब्लिंकन ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि रूस की कार्रवाई दर्शाती है कि वह मौजूदा संकट के समाधान के वास्ते कूटनीतिक रास्ता अपनाने को लेकर गंभीर नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार रात घोषणा की कि रूस के आक्रमण करने की आशंका के चलते वह देश के कुछ आरक्षित सैनिकों को तैनाती के लिए बुला रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्ण सैन्य लामबंदी की अभी कोई आवश्यकता नहीं है। यूक्रेन के सशस्त्र बलों में लगभग 250,000 सैनिक हैं और कुछ 140,000 सैनिकों को रिज़र्व (तैनाती के लिए तैयार) में रखा गया हैं। • यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा है कि छोटे बड़े हमले जैसा कुछ नहीं होता है। हमला सिर्फ हमला है। हम प्लान A के तहत हर तरह के डिप्लोमैटिक टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद प्लान B में अपने हर शहर, हर गांव और एक एक इंच जमीन के लिए तब तक लड़ेंगे, जब तक जीत नहीं जाते। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन के यूक्रेन में सेना भेजने के आदेश की तारीफ करते हुए उन्हें जीनियस बताया है। एक रेडियो प्रोग्राम में बोलते हुए ट्रम्प ने कहा, कल मैंने पूरा घटनाक्रम टीवी पर देखा, तभी मैंने कहा यह तो जीनियस है। मैंने कहा पुतिन कितने चालाक हैं, यह लोग यूक्रेन के अंदर जाएंगे और शांति स्थापित करने वाली सबसे मजबूत शांति सेना बन जाएंगे। वहीं, व्हाइट हाउस प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा- अभी डिप्लोमैटिक रास्ते खुले हैं, हम कभी भी डिप्लोमैटिक दरवाजे को पूरी तरह बंद नहीं करेंगे, लेकिन कूटनीति तब तक सफल नहीं हो सकती है जब तक रूस अपने तरीके नहीं बदलता।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रतिबंधों की घोषणा की है। दो रूसी वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान करते हुए राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि रूस, पश्चिमी देशों के साथ और व्यापार नहीं कर पाएगा। हमारे पास कई कदम हैं जो उठाए जाने हैं। उन्होंने कहा कि हम दोनों देशों के बीच जारी विवाद को सुलझाने की कोशिश करते रहेंगे। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने यूक्रेन से अपने राजनयिक कर्मियों को बाहर निकालने का फैसला किया है। मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यूक्रेन में रूसी राजनयिकों को कई धमकियां मिली हैं और राजनयिक कर्मियों को शीघ्र अति शीघ्र निकाला जाएगा। इस फैसले से पहले रूस ने यूक्रेन के विद्रोही क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दे दी और रूसी संसद ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में सैन्य बलों के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। एंटोनी ब्लिंकन ने रद्द की रूसी विदेश मंत्री के साथ बैठक : अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि रूस द्वारा यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता देने के बाद उन्होंने जिनेवा में अपने रूसी समकक्ष के साथ होने वाली बैठक रद्द कर दी है। ब्लिंकन ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि रूस की कार्रवाई दर्शाती है कि वह मौजूदा संकट के समाधान के वास्ते कूटनीतिक रास्ता अपनाने को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक रद्द कर दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति की घोषणा- अतिरिक्त सैनिकों की होगी तैनाती : यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्लादिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार रात घोषणा की कि रूस के आक्रमण करने की आशंका के चलते वह देश के कुछ आरक्षित सैनिकों को तैनाती के लिए बुला रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्ण सैन्य लामबंदी की अभी कोई आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रपति ने राष्ट्र को एक वीडियो के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि उनका आदेश केवल तथाकथित रिज़र्व सैनिकों पर लागू होता है, जो आम तौर पर संकट के समय सक्रिय हो जाते हैं और एक निश्चित समय के लिए सक्रिय रहते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन और रूस के बीच हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन की सीमा में घुसने और दो शहरों डोन्त्सक और लुहांस्क पर कब्जा करने के लिए रूसी सैनिक भेज दिए हैं। 100 से ज्यादा मिलिट्री ट्रक यूक्रेन की सीमा की ओर जाते दिखाई दिए हैं। इधर, अमेरिका ने भी बाल्टिक देशों में अपने सैनिक व हथियार भेजना शुरू कर दिया है। वहीं ब्रिटेन, कनाडा के अलावा कई देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यूक्रेन-रूस के बीच संघर्ष एक बड़े युद्ध की आशंका की ओर बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच रूसी सीनेटरों ने भी पुतिन को देश के बाहर सेना के प्रयोग की मंजूरी दे दी है। इसके बाद यूक्रेन की ओर रूसी हथियारों को जखीरा भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 100 से ज्यादा मिलिट्री ट्रकों को काफिला यूक्रेन सीमा की ओर जाता दिखाई दिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने मंगलवार को रूस के साथ जारी अपनी अहम नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है। जर्मनी की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब रूस ने यूक्रेन के दो शहरों- डोनेत्स्क और लुहांस्क में अपने सैनिकों को भेजना शुरू किया है। नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन यूरोप और पूरे रूस के लिए कितनी अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रूस इस परियोजना के जरिए जर्मनी को अपनी तेल-गैस की सप्लाई दोगुनी करने वाला था और इससे पुतिन सरकार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना थी। जर्मनी की ओर से इस परियोजना को रद्द करते हुए कहा गया है कि वह यूक्रेन के खिलाफ रूस की कार्रवाई का सख्त विरोध करती है। चांसलर शोल्ज ने कहा कि रूस का बातचीत की मेज पर लौटना जरूरी है और इस तरह के एकतरफा फैसलों को रोकना पूरी दुनिया की जरूरत है। जानें क्या है नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन परियोजना : 1. नॉर्ड स्ट्रीम 1200 किमी लंबी पाइपलाइन है। यह बाल्टिक सागर से होते हुए पश्चिमी रूस से उत्तर-पूर्वी जर्मनी तक जाती है। जर्मनी इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट के जरिए रूस से मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई दोगुनी करना चाहता है। 2. 83 हजार करोड़ रुपये के खर्च से निर्मित इस पाइपलाइन का काम सितंबर 2021 में पूरा हो चुका है। हालांकि, अभी कुछ अहम मंजूरी मिलना बाकी है, जिसकी वजह से पाइपलाइन का उद्घाटन नहीं हुआ है। 3. इस पाइपलाइन से जर्मनी को हर 55 अरब घन मीटर गैस की सप्लाई हो सकेगी, जिससे जर्मनी के 2.6 करोड़ घरों को ठंड के मौसम में भी गैस-पेट्रोल की आपूर्ति बिना रुके जारी रहेगी। इस प्रोजेक्ट का मालिकाना हक रूस की सरकारी कंपनी गैजप्रोम के पास है। रूस अभी नॉर्ड स्ट्रीम 1 पाइपलाइन के जरिए जर्मनी को गैस भेजता है। इसकी क्षमता अभी सालाना 55 अरब घन मीटर गैस सप्लाई करने की है। नई पाइपलाइन से यह आपूर्ति दोगुनी हो जाएगी। रूस के लिए कितना अहम है ये प्रोजेक्ट : 1. अगर इस पाइपलाइन से रूस ने जर्मनी को गैस की सप्लाई शुरू कर दी, तो इसे पुतिन की बड़ी कूटनीतिक चाल के तौर पर देखा जाएगा। दरअसल, रूस फिलहाल यूरोप की कुल ऊर्जा जरूरतों (तेल-गैस) का 40 फीसदी से ज्यादा सप्लाई करता है। ऐसे में उसकी यह पाइपलाइन यूरोप के सबसे अमीर देश जर्मनी को अपने ऊपर पूरी तरह निर्भर बना लेगी। इससे न चाहते हुए भी जर्मनी को रूस के प्रतिबंधों के डर से उसके आगे मजबूर होना पड़ेगा। 2. रूस के पाइपलाइन प्रोजेक्ट का अमेरिका, यूक्रेन और पोलैंड विरोध करते रहे हैं। रूस अभी ज्यादातर नैचुरल गैस की सप्लाई यूक्रेन के रास्ते करता है। जबकि नॉर्ड स्ट्रीम 1 और नॉर्ड स्ट्रीम 2 यूक्रेन से होकर नहीं जातीं। इससे रूस को यूक्रेन को किसी भी तरह की राशि नहीं देनी होती। फिलहाल इस प्रोजेक्ट से यूक्रेन को 2 अरब डॉलर की ट्रांजिट फीस का नुकसान तो होता ही है, साथ ही उसके हाथ में रूस पर लगाम लगाने वाली भी कोई योजना नहीं रहती। रूस को कितना नुकसान होगा : अगर इस प्रोजेक्ट पर किसी भी तरह की रोक लगती है तो इससे रूस की कमाई पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। उसे अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तेल-गैस की सप्लाई समुद्री या सड़क मार्ग से करनी होगी, जिसमें उसे काफी आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही इससे यूक्रेन को बड़ा फायदा होगा। यूरोप को कितने नुकसान की संभावना : अगर नॉर्ड स्ट्रीम प्रोजेक्ट पर रोक लगती है तो इससे जर्मनी के साथ बाकी यूरोपीय देशों में भी गैस संकट गहराने का खतरा है, क्योंकि रूस नाराजगी में यूरोप को की जाने वाली तेल और गैस की बाकी सप्लाई को रोक कर यूरोपीय देशों को घुटने पर लाने की कोशिश कर सकता है। यूरोप के ज्यादातर देश फिलहाल प्राकृतिक गैस और तेल के आयात के लिए रूस पर ही निर्भर हैं। यूरोप की मदद के लिए कैसे आगे आ सकता है अमेरिका : नॉर्ड स्ट्रीम 2 पर प्रतिबंध के बाद रूस का यूरोप को गैस-तेल की सप्लाई बंद करने का कदम खतरनाक साबित हो सकता है। अमेरिका ने इससे बचने के लिए हाल ही में कतर से संपर्क किया है, जिसके पास अरब जगत में जबरदस्त गैस और तेल के संसाधन हैं। अमेरिका कतर की मदद से रूस से बाधित होने वाली सप्लाई को फिर से यूरोप के लिए चालू करवा सकता है और रूस को यूक्रेन पर हमले से रोकने में सफलता हासिल कर सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुक्त राज्य अमरीका इस साल ज्यादा भारतीयों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड उपलब्ध करवाएगा। अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) के मुताबिक इस साल उच्च प्राथमिकता श्रेणियों के तहत भारतीयों के लिए अधिक वीजा उपलब्ध होंगे। यूएससीआईएस ने कहा है कि योग्य रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड आवेदक उच्च वरीयता श्रेणी में जा सकते हैं क्योंकि 30 सितंबर को समाप्त होने वाले चालू वित्तीय वर्ष के लिए इन श्रेणियों में उपलब्ध रोजगार-आधारित अप्रवासी वीजा की संख्या ज्यादा कर दी गई है। सामान्य से दोगुना अधिक होंगे वीजा : वित्तीय वर्ष 2022 के लिए समग्र रोजगार-आधारित वार्षिक सीमा सामान्य से लगभग दोगुनी है, क्योंकि इस सीमा में वित्तीय वर्ष 2021 से सभी बिना इस्तेमाल के परिवार-प्रायोजित वीजा संख्या शामिल है, जो लगभग 140,000 थे। पात्र आवेदक अपनी स्थिति को प्राथमिकता कार्यकर्ता या दूसरे उन्नत डिग्री या असाधारण क्षमता वाले व्यवसायों में गैर-नागरिक के लिए फाइल कर सकते हैं। भारतीय नागरिकों को आवेदकों की उच्च संख्या के कारण रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए सबसे लंबे समय तक प्रतीक्षा समय का सामना करना पड़ता है। खत्म होगा लंबे समय का इंतजार : इमिग्रेशन डॉट कॉम के मैनेजिंग अटॉर्नी राजीव एस खन्ना ने कहा है कि यह उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद होगा जो कई सालों से इंतजार कर रहे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि यदि वे तेजी से आगे बढ़ते हैं तो बहुत से लोग ईबी2 श्रेणी के तहत अपने ग्रीन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। अतीत में कई लोगों ने अपने एप्लिकेशन को ईबी2 से ईबी3 में डाउनग्रेड कर दिया था क्योंकि वह श्रेणी तेजी से आगे बढ़ रही थी। वे अब वापस ईबी2 में अपग्रेड कर सकते हैं। खन्ना ने कहा कि यूएससीआईएस अधिक से अधिक ग्रीन कार्ड स्वीकृत करना चाहता है, क्योंकि परिवार कोटा से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। ऐसा अतीत में इतनी बड़ी संख्या में नहीं हुआ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन से अलग हुए दो शहरों डोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र के रूप में मान्यता दे दी है। उन्होंने सोमवार को देश के नाम संबोधन में इसका एलान किया। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में यूक्रेन को अमेरिका का उपनिवेश बताते हुए कहा कि यूक्रेन का शासन अमेरिका के हाथों की "कठपुतली" है। रूस के इस फैसले से यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की पश्चिम देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंकाएं गहरा गई है। राष्ट्रपति की सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद पुतिन ने यह घोषणा की और इसी के साथ मॉस्को समर्थित विद्रोहियों और यूक्रेनी बलों के बीच संघर्ष के लिए रूस के सैन्य बल और हथियार भेजने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि पूर्वी यूक्रेन में दो अलगाववादी शहरों डोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र के रूप में मान्यता दी जाएगी। राष्ट्रपति पुतिन ने मान्यता देने से जुड़े एक आदेश पर हस्ताक्षर भी किए हैं, इसके साथ ही डोनेत्स्क और लुहांस्क में सेना भेजकर शांति अभियान चलाने का भी आदेश दिया है। इससे पहले, यूक्रेन के अलगाववादी नेताओं ने टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान के जरिए रूस के राष्ट्रपति से अनुरोध किया था कि वे अलगाववादी क्षेत्रों की स्वतंत्रता को मान्यता दें और मित्रता संधियों पर हस्ताक्षर करके उनके खिलाफ जारी यूक्रेनी सेना के हमलों से उनकी रक्षा करने के लिए सैन्य सहायता भेजें। रूस के निचले सदन ने भी पिछले सप्ताह इसी प्रकार की अपील की थी। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को देश के नाम संबोधन में कहा कि यूक्रेन को पूरी तरह से कम्युनिस्ट शासन के तहत रूस ने बनाया था, लेकिन कट्टरपंथी इसकी स्वतंत्रता का श्रेय लेते हैं। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी और राष्ट्रवादी यूक्रेन की स्वतंत्रता का श्रेय लेते हैं, लेकिन उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कि कम्युनिस्ट पार्टी ने यूटोपियन फंतासी और राष्ट्रवाद के संक्रमण के भविष्य के बारे में कभी नहीं सोचा था।
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