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Published / 2026-06-13 22:04:21
16 महीने बाद फ्रांस में मिलेंगे मोदी और ट्रंप

मुलाकात में जुटेंगे पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, व्हाइट हाउस ने की पुष्टि 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 महीनों के बाद एक बार फिर मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात फ्रांस में होगी। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, अमेरिका पश्चिम एशिया में जारी जंग में शामिल है। 

शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। प्रस्थान से पहले जारी अपने बयान में उन्होंने भारत-फ्रांस संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि फ्रांस, भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण में एक विशेष स्थान रखता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा, भारत के रणनीतिक विजन में फ्रांस का एक खास स्थान है। इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत का दौरा किया था। उस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करते हुए विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया।

Published / 2026-06-12 20:58:34
अमेरिका-ईरान युद्ध थमने से निवेशकों को 10 लाख करोड़ का फायदा

अमेरिका-ईरान युद्ध थमने से शेयर बाजार में जोरदार तेजी, निवेशकों को 10 लाख करोड़ का फायदा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने के संकेतों के बीच वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में जोरदार उछाल आया। सेंसेक्स 1,695 अंक से अधिक चढ़ गया जबकि निफ्टी में करीब 461 अंक की तेजी दर्ज की गयी। 

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 1,695.40 अंक यानी 2.30 प्रतिशत उछलकर 75,527.95 अंक पर बंद हुआ। मार्केट की इस शानदार तेजी से निवेशकों की दौलत में 10 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ। 

कारोबार के दौरान एक समय यह 1,775.47 अंक यानी 2.40 प्रतिशत चढ़कर 75,608.02 अंक तक पहुंच गया। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 461.30 अंक यानी 1.99 प्रतिशत बढ़कर 23,622.90 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 483.75 अंक प्रतिशत चढ़कर 23,645.35 तक पहुंच गया था।  

विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयान से शेयर बाजार में तेजी का रुझान रहा। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने और दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सहमति बनने की बात कही है। इससे वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी और निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।  

10.17 लाख करोड़ बढ़ी दौलत 

11 जून 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप 4,51,83,025.178 करोड़ था। आज यानी 12 जून 2026 को यह उछलकर 4,62,00,318.80 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज 10,17,293.622 करोड़ का इजाफा हुआ है। 

इन शेयरों में रही तेजी 

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, इटर्नल और एचडीएफसी बैंक के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ, सेंसेक्स में शामिल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही नुकसान में रहने वाली कंपनियों में शामिल रहीं। सकारात्मक वैश्विक संकेतों से वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 3.98 प्रतिशत गिरकर 86.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 

एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 4.63 प्रतिशत और जापान का निक्की सूचकांक 2.81 प्रतिशत चढ़ा। चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी बढ़त में रहे। यूरोपीय बाजार भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।

Published / 2026-06-11 18:24:44
भारतीय जहाजों पर अमेरिका के हमले में तीन भारतीयों की मौत

भारतीय जहाजों पर अमेरिकी हमलों में 3 भारतीयों की मौत, भारत ने की पुष्टि, कहा- स्थिति पर हमारी पैनी नजर 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की आग अब भारतीय परिवारों तक पहुंच गयी है। ओमान तट के पास वाणिज्यिक जहाज एमटी सेटेबेलो पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भारत में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के बाद भारत सरकार ने नयी दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

नागरिक जहाजों को निशाना बनाये जाने पर गंभीर चिंता जतायी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों पर लगातार खतरा बढ़ रहा है और ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक अन्य पोत से जुड़ी नयी घटना की भी जांच चल रही है। 

तीनों भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि 

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि एमटी सेटेबेलो पर हुए हमले में लापता बताये गये तीनों भारतीय नाविकों की मौत हो गयी है। मृतकों की पहचान  दित्य शर्मा (23), हिमाचल प्रदेश), शिवानंद चौरसिया देवरिया, उत्तर प्रदेश व  पटनाला सुरेश आंध्र प्रदेश के रूप में हुई है। सोनोवाल ने कहा कि बचाये गये नाविकों और मृतकों के पार्थिव शरीरों को जल्द भारत लाने के निर्देश दिये गये हैं। 

विदेश मंत्रालय और फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन आॅफ इंडिया (एफएसयूआई) के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले एमटी सेटेबेलो पर कुल 24 भारतीय चालक दल सदस्य सवार थे। ओमान के अधिकारियों के साथ चलाये गये बचाव अभियान में 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया। एफएसयूआई के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि जहाज से संपर्क टूट जाने से शुरुआती घंटों में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। 

अमेरिका ने हमले की बात स्वीकार की 

यूनाईटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने हमले की पुष्टि करते हुए दावा किया है कि जहाज कथित तौर पर ईरान से तेल ले जा रहा था और अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि कार्रवाई उसके समुद्री सुरक्षा अभियान का हिस्सा थी। हालांकि भारत ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना बंद होना चाहिए। 

भारत ने नयी दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जैसन मिक्स को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए और क्षेत्र में नागरिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं तत्काल रुकनी चाहिए। 

ओमान के पास नयी घटना से बढ़ी चिंता 

इस बीच मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने गुरुवार को बताया कि उसे ओमान के शिनास बंदरगाह के निकट एक अन्य पोत से जुड़ी घटना की सूचना मिली है। दूतावास ने कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। 

एफएसयूआई ने समुद्र में धुएं से घिरे एक जहाज की तस्वीरें भी जारी की हैं। यूनियन का दावा है कि उस पोत पर लगभग 20 भारतीय नाविक सवार हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

Published / 2026-05-30 21:43:32
कच्चे तेल की कीमत में सात हफ्तों में सबसे बड़ी गिरावट

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद से क्रूड आॅयल में सात हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों और होर्मुज की खाड़ी के फिर से खुलने की संभावना के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आयी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिली है। 

कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट 

इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत में 11% की गिरावट दर्ज की गयी, जो पिछले सात हफ्तों में सबसे अधिक है। शुक्रवार को जुलाई डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.66 डॉलर यानी 1.8 फीसदी गिरावट के साथ 92.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। 

डब्ल्यूटीआई भी 1.7 फीसदी गिरावट के साथ $87.36 प्रति बैरल रह गया। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल होर्मुज की खाड़ी से गुजरता है, इसलिए वहां तनाव कम होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।  

भारत पर प्रभाव  

भारत अपनी तेल जरूरतों का 90% आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह कमी देश के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है; उदाहरण के लिए, उन्हें हर गैस सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है। 

भविष्य की अनिश्चितता और चेतावनियां 

मोर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि यदि जून में होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है, तो तेल की कीमतें एक बार फिर उबाल मार सकती हैं। सऊदी अरामको के सीईओ के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में यह उथल-पुथल 2027 के अंत तक बनी रह सकती है।

Published / 2026-05-24 11:52:49
क्या वह सिर्फ़ एक धर्म-परिवर्तन के एजेंडे के लिए आए थे?

  • क्या वह सिर्फ़ एक धर्म-परिवर्तन के एजेंडे के लिए आए थे?
  • उनकी यात्रा का मकसद क्या था?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक अमेरिकी सांसद द्वारा लिखा गया एक लेख और उसके बाद भारत की उनकी यात्रा (एक ऐसी यात्रा जिसकी शुरुआत कोलकाता से हुई) हाल ही में एक बड़ी घटना बन गई।

अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से भारत यात्रा के दौरान एक अहम मुद्दा उठाने को कहा। यह मुद्दा भारतीय सरकार द्वारा मदर टेरेसा द्वारा स्थापित विश्व-प्रसिद्ध संस्था मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी के FCRA लाइसेंस को निलंबित किए जाने से जुड़ा था।

FCRA लाइसेंस एक आधिकारिक अनुमति के तौर पर काम करता है, जो किसी संस्था को अपनी गतिविधियों के लिए विदेशी फंड प्राप्त करने और उसका इस्तेमाल करने के लिए ज़रूरी होता है। स्मिथ ने रूबियो से अनुरोध किया कि वे इस संस्था के लाइसेंस को रद्द किए जाने के संबंध में भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत करें।

मार्को रूबियो ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की, जहाँ उन्होंने मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था का व्यक्तिगत रूप से दौरा भी किया। यह कोई साधारण दौरा नहीं था; अमेरिकी पक्ष ने पहले ही इस संस्था को लेकर आपत्तियाँ उठाई थीं विशेष रूप से FCRA नियमों के संदर्भ में।

हालाँकि, भारत में FCRA एक कानूनी नियम है। इस कानून के ज़रिए सरकार यह नियंत्रित करती है कि विभिन्न धर्मार्थ संस्थाएँ विदेश से प्राप्त फंड का इस्तेमाल किस तरह करती हैं। यह भारत का आंतरिक मामला है; किसी भी संस्था को ऐसा लाइसेंस देना या रद्द करना पूरी तरह से देश की संप्रभुता पर निर्भर करता है। इस मुद्दे को विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए माना जाता है, क्योंकि बाहरी दुनिया के लिए मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी संस्था केवल गरीबों, अनाथों और बुज़ुर्गों की सेवा के लिए जानी जाती है। 

यह बात व्यापक रूप से प्रचलित है कि मदर टेरेसा ने इस संस्था की स्थापना की थी और बेसहारा लोगों को आश्रय प्रदान किया था। हालाँकि, भारतीय सरकार का कहना है कि इस संस्था को लेकर कुछ संदेह हैं; उनका आरोप है कि नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है और विदेश से प्राप्त फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता की कमी है।

नतीजतन, संस्था का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। भारत अपनी सीमाओं के भीतर काम करने वाली सभी संस्थाओं के खिलाफ़ ऐसी कार्रवाई करता है। यह पता लगाने के लिए एक जाँच चल रही है कि क्या इन फंडों का इस्तेमाल धार्मिक धर्म-परिवर्तन की गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

अमेरिका की ओर से इस तरह की आपत्तियाँ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है; उसे अपने कानून बनाने का स्वाभाविक अधिकार प्राप्त है। विदेशी नेताओं या संस्थाओं का भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना अनुचित है। हमें उम्मीद है कि अगर सीनेटर रूबियो की यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा होती है, तो भारत सरकार बिना किसी संदेह के अपना रुख स्पष्ट कर देगी।

हाल ही में पाँच राज्यों में चुनावों के समय सरकार ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की ईसाई संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लाने के उद्देश्य से लाए गए विधायी संशोधनों को लागू करने के लिए तैयार थी। उस चरण पर, केंद्र सरकार ने चुनाव के कारण इस पहल को फिलहाल के लिए टालने का निर्णय लिया।

इस विधायी विधेयक पर संसद में फिर से चर्चा होने की संभावना है। इसी पृष्ठभूमि में कई घटनाएँ एक साथ घटित हुईं: इसी समय, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि मार्को रूबियो की यात्रा कोलकाता से शुरू करने का निर्णय लिया; इसी बीच, अमेरिकी कांग्रेस के एक ईसाई सदस्य ने इस मुद्दे पर केंद्रित एक लेख लिखा था।

Published / 2026-05-14 20:50:55
ट्रंप की चीन यात्रा पर टिकी दुनियाभर की नजरें

ट्रंप की चीन यात्रा में दुनिया की सबसे हाई-सिक्योरिटी: पाखलखानों तक की जांच, पुतिन स्टाइल में ट्रंप का मल-मूत्र जायेगा वापस! 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा केवल एक कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे हाई-सिक्योरिटी आॅपरेशनों में से एक बन गयी है। अमेरिका और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों और साइबर निगरानी की आशंकाओं के चलते ट्रंप की सुरक्षा के लिए बेहद सख्त प्रोटोकॉल लागू किये गये हैं। 

अमेरिकी राष्ट्रपति के किसी भी विदेशी दौरे की तैयारी लगभग तीन महीने पहले शुरू हो जाती है। इसके लिए एक एडवांस सर्वे ग्रुप बनाया जाता है जिसमें कई अमेरिकी एजेंसियों के अधिकारी शामिल होते हैं। यह टीम एयर ट्रैफिक कंट्रोल, एयरपोर्ट आॅपरेटर और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय करती है। ट्रंप के विमान के रूट, एयरपोर्ट और यात्रा मार्गों की गहन जांच की जाती है।  

पाखलखानों तक की जांच 

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति के दौरे वाले इलाकों के आसपास मौजूद मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की भी जांच करती हैं। हाल ही में छोड़े गये मरीजों की जानकारी तक खंगाली जाती है। यह प्रोटोकॉल 1981 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले के बाद और सख्त किया गया था, जब एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ने उन पर गोली चला दी थी। ट्रंप जिन रास्तों से गुजरते हैं, वहां हर वाहन हटाया जाता है। सड़क किनारे पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहती है। हर इमारत, छत और सड़क की सुरक्षा जांच की जाती है। 

एयरफोर्स वन से पहले पहुंचते हैं कार्गो विमान 

ट्रंप के एयरफोर्स वन से पहले अमेरिकी सेना के उ-17 ग्लोबमास्टर कार्गो विमान रवाना होते हैं। इनमें हेलिकॉप्टर, हथियार, कम्युनिकेशन सिस्टम और राष्ट्रपति की विशेष लिमोजिन द बीस्ट भेजी जाती है। एयर फोर्स वन को अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस माना जाता है। इसमें मेडिकल यूनिट, आॅपरेशन रूम, सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम और मिसाइल डिफेंस फीचर्स मौजूद रहते हैं। ट्रंप जिस विशेष कार में सफर करते हैं, उसे कैडिलैक वन या द बीस्ट कहा जाता है। यह कार बुलेटप्रूफ, गैस-प्रूफ और विस्फोटरोधी होती है। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें राष्ट्रपति के ब्लड ग्रुप का खून भी रखा जाता है ताकि आपात स्थिति में तुरंत इलाज हो सके। 

होटल पर अमेरिकी सीक्रेट सर्विस का नियंत्रण 

जिस होटल में अमेरिकी राष्ट्रपति ठहरते हैं, उसके आसपास पार्किंग बंद कर दी जाती है। कई मंजिलों पर अमेरिकी सीक्रेट सर्विस का नियंत्रण रहता है। कमरों की खिड़कियों पर बुलेटप्रूफ सुरक्षा लगायी जाती है और बाथरूम तक की निगरानी होती है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बायो-सिक्योरिटी कारणों से राष्ट्रपति का जैविक कचरा भी वापस ले जाया जाता है। चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को अपने निजी फोन और लैपटॉप इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। उन्हें क्लीन डिवाइसेज दिये जाते हैं ताकि साइबर जासूसी से बचा जा सके। 

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन दुनिया के सबसे आक्रामक साइबर निगरानी वाले देशों में शामिल है, इसलिए अमेरिकी टीम पूरी तरह नियंत्रित डिजिटल माहौल में काम करती है। रिपोर्ट में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की सुरक्षा का भी जिक्र किया गया है। बताया गया कि उनकी बख्तरबंद औरस सेनाट लिमोजिन भी चलती-फिरती किले जैसी होती है, जो बम, गोली और रासायनिक हमलों से सुरक्षा देती है।

Published / 2026-05-13 21:22:23
रूस के परमाणु रिएक्टर कनेक्शन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

समुद्र में डूबे रूसी जहाज से जुड़ा बड़ा खुलासा

परमाणु रिएक्टर कनेक्शन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस का मालवाहक जहाज उरसा मेजर दिसंबर 2024 में भूमध्य सागर में डूब गया था। अब इस घटना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। स्पेन सरकार के एक दस्तावेज के अनुसार जहाज में ऐसे हिस्से मौजूद हो सकते थे जो पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाले परमाणु रिएक्टरों से जुड़े थे।  

यह जहाज Saint Petersburg से रूस के पूर्वी शहर Vladivostok जा रहा था। 23 दिसंबर 2024 को स्पेन और अल्जीरिया के बीच समुद्र में जहाज के इंजन कक्ष में विस्फोट हुआ, जिसके बाद वह डूब गया। हादसे में दो चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी जबकि 14 लोगों को बचा लिया गया था। 

स्पेन सरकार के दस्तावेज में कहा गया है कि बचाए जाने के बाद जहाज के कप्तान ने अधिकारियों को बताया था कि जहाज में पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाले दो परमाणु रिएक्टरों जैसे उपकरणों के हिस्से मौजूद थे। यह जानकारी स्पेन की संसद में जमा एक आधिकारिक दस्तावेज में सामने आई है।

जहाज की मालिक रूसी सरकारी कंपनी Oboronlogistika ने पहले दावा किया था कि जहाज पर आतंकी हमला हुआ था। कंपनी के अनुसार जहाज के पानी की सतह के पास तीन शक्तिशाली विस्फोट हुए थे, जिससे जहाज को भारी नुकसान पहुंचा। यह कंपनी रूस के रक्षा मंत्रालय से जुड़ी मानी जाती है और उस पर पहले से ही  अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के प्रतिबंध लगे हुए हैं।  

इस खुलासे के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है कि क्या जहाज सैन्य या परमाणु तकनीक से जुड़ा संवेदनशील सामान ले जा रहा था।  विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जहाज में वास्तव में परमाणु रिएक्टरों से जुड़े हिस्से थे, तो यह मामला केवल समुद्री दुर्घटना नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Published / 2026-05-06 18:58:27
होर्मुज संकट पर बड़ी राहत पर फैसला 48 घंटे में

होर्मुज संकट पर बड़ी राहत: अमेरिका-ईरान डील के बेहद करीब, 1 पन्ना बदलेगा खेल... फैसला 48 घंटे में 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों देश युद्ध समाप्त करने के बेहद करीब बताये जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एक पन्ने के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जो इस लंबे संघर्ष को खत्म करने का रास्ता खोल सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पर रोक लगाने और कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने का वादा कर सकता है। वहीं अमेरिका ईरान पर लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और विदेशों में फंसे अरबों डॉलर के फंड को जारी करने पर सहमत हो सकता है। 

इस संभावित डील का सबसे अहम पहलू स्ट्रेट आॅफ होर्मुज से जुड़ा है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और गैस की 20 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति गुजरती है। समझौते के तहत दोनों पक्ष इस रास्ते पर लगी पाबंदियों को हटाने और जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट में बड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद है कि अगले 48 घंटों में ईरान की ओर से अहम जवाब मिल जाएगा। 

हालांकि अभी तक किसी भी बिंदु पर अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन यह पहला मौका है जब दोनों देश इतने करीब पहुंचे हैं। इस समझौते के तहत 30 दिनों की एक वार्ता अवधि भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों पक्ष विस्तृत समझौते पर काम करेंगे। इस दौरान धीरे-धीरे अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटायेगा और ईरान भी जलडमरूमध्य पर लगाये गये प्रतिबंध कम करेगा। 

परमाणु मुद्दे पर बातचीत भी इस डील का बड़ा हिस्सा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 12 से 15 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाये, जबकि ईरान ने 5 साल का प्रस्ताव दिया है। अंतिम समझौते में इस अवधि को लेकर सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसके अलावा, ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार कर सकता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों द्वारा अचानक जांच भी शामिल होगी। 

यह अमेरिका की प्रमुख शर्तों में से एक है। इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है, जिसने हाल ही में होर्मुज क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई को सीमित करने का फैसला लिया है। वहीं मार्को रुबियो ने कहा है कि यह एक जटिल प्रक्रिया है और अंतिम समझौते तक पहुंचने में समय लग सकता है। 

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