एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर उसके पड़ोसी देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अंकुश लगाने में विफल रहते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक प्रवक्ता ने सख्त लहजे में पड़ोसी देशों को संबोधित करते हुए कहा, यदि आप 200 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेल कीमतों को सहन कर सकते हैं, तो इस खेल को जारी रखें। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को इजरायल ने ईरान के करीब 30 फ्यूल डिपो को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। इस हमले के बाद तेहरान के कई इलाकों में भीषण आग लग गई और कई किलोमीटर दूर तक धुएं के गुबार दिखाई दिये। बताया जा रहा है कि इजरायल ने हमले की जानकारी पहले अमेरिका को दी थी लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले का पैमाना उनकी उम्मीद से कहीं बड़ा था।
अमेरिका ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि अगर ईरान के ऊर्जा ढांचे पर इस तरह के हमले जारी रहे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तेल से जुड़े ढांचे पर हमला होने से आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आ सकती है।
इजरायल का कहना है कि जिन फ्यूल डिपो को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ईरानी सेना और उससे जुड़े सैन्य ढांचे को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था। हालांकि इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे हमले ईरान के अंदर सरकार के खिलाफ गुस्सा कम करने के बजाय लोगों को और अधिक एकजुट कर सकते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान और इजरायल, अमेरिका के बीच युद्ध को आज सात दिन चुके हैं। इस युद्ध को लेकर खबर सामने आई है कि ईरान में मरने वालों की संख्या 1332 हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा घर तबाह हुए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-इजराईल जंग से बढ़े तनाव के बीच ईरान ने दुनिया की तेल लाइफलाइन होर्मुज क्षेत्र पर कब्जा करने का दावा किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति गुजरती है।
ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि अगर दुश्मन देशों के जहाज इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधि करेंगे तो उन्हें मिसाइल और ड्रोन से उड़ा दिया जाएगा। यह चेतावनी सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ हार्मोस में जहाजरानी की सुरक्षा से जुड़ी है। यहां किसी भी टकराव का असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान आधारित चैनल ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को देश की एक्सपर्ट असेंबली द्वारा नया सर्वोच्च नेता चुना गया है।
वे दिवंगत नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे बताए जाते हैं। हालांकि इस नेतृत्व परिवर्तन की आधिकारिक पुष्टि ईरानी राज्य संस्थानों की ओर से स्पष्ट रूप से सामने आना बाकी है। ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है।
मिसाइल और ड्रोन हमले दोनों ओर से जारी है । ईरान में 1000 से अधिक मौतों के दावा किया जा रहा है। 180 से ज्यादा बच्चों की मौत की रिपोर्ट है। मृतकों के आंकड़ों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा पूर्ण पुष्टि अभी जारी है, लेकिन मानवीय संकट गहराता दिख रहा है।
अगर होर्मुज मार्ग बाधित होता है, तो एशिया और यूरोप की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है। ईरान की चेतावनी और नेतृत्व बदलाव की खबरें इस संघर्ष को सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक संकट में बदल सकती हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका बेहद अहम होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया की धरती पर जंग की आहट अब और तेज हो गई है। इस्राइल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई पांचवें दिन भी जारी है। बमबारी तेज है और ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है।
ऐसे में हालात बिगड़ते देख अमेरिकी गृह विभाग ने पश्चिम एशिया छोड़ना चाहने वाले अमेरिकियों के लिए तैयारी शुरू कर दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ANI को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हम युद्ध रोकने के लिए तैयार हैं।
हम बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन बातचीत सम्मान के साथ होनी चाहिए, ईरान के खिलाफ कुछ हुक्म देने के लिए नहीं। हम अपना बचाव कर रहे हैं। हम अपना हक ढूंढ रहे हैं और कुछ नहीं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच चीन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है।बीजिंग ने इन हमलों को ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स ऑफ द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन को हमलों की पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की।
उन्होंने खाड़ी देशों से अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने और विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करने का आह्वान किया। रॉयटर्स के अनुसार, तेहरान पर हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च तक 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई। ईरान और उसके सहयोगी संगठनों, जैसे हिजबुल्लाह, ने जवाबी हमले किए हैं। संघर्ष अब खाड़ी के कई बड़े शहरों दुबई, अबू धाबी और दोहा तक फैल चुका है।
वांग यी ने अपने बयान में कहा कि हालिया अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और ईरान की लाल रेखाओं को पार करती है। लेकिन क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत जरूरी है। चीन ने संकेत दिया है कि वह तनाव कम करने में सकारात्मक भूमिका” निभाना चाहता है।
अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहा है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय देशों से संयम और वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील भी कर रहा है। बीजिंग के लिए यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और अरबों डॉलर के आर्थिक हितों का सवाल भी है।
चीन ईरान और कई खाड़ी देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से लेता है। वैश्विक व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर निर्भर है। ओमान जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, लंबे समय से अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।ओमान ने 2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) समझौते के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान-इजरायल में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी एयर क्षमताओं को बढ़ाने का ऐलान किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ईरान इस वक्त दोहरे संकट से गुजर रहा है। एक तरफ अमेरिका और इस्राइल के साथ भीषण जंग छिड़ी हुई है, तो दूसरी तरफ कुदरत ने भी मुश्किल बढ़ा दी है।
इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच मंगलवार को ईरान के दक्षिणी हिस्से में भूकंप के तेज झटके महसूस किये गये। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, यह भूकंप दक्षिणी ईरान के गेराश शहर के पास आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई।
भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक किसी बड़े नुकसान या जानमाल के हानि की कोई खबर नहीं है। हालांकि, जंग के बीच आए इस भूकंप ने लोगों को दहशत में ला दिया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। तेल आपूर्ति के मामले में भारत फिलहाल सुरक्षित है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्ता है, जहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है।
ईरान की सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को बताया कि जवाबी कार्रवाई में इस रास्ते को बंद कर दिया गया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने जहाजों को चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजर सकता। लेकिन भारत के अधिकारी और एक्सपर्ट कहते हैं कि निकट भविष्य में तेल की कमी नहीं होगी।
देश के पास कच्चे तेल का स्टॉक इतना है कि कम से कम 10 दिनों की जरूरत पूरी हो सकती है। इसके अलावा तैयार पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन का स्टॉक भी 5 से 7 दिनों या इससे ज्यादा का है। रिफाइनरियों के टैंकों में कच्चा तेल और ईंधन भरा पड़ा है। इसलिए अगर यह बंदी कुछ दिनों की रही तो भारत पर असर कम होगा।
भारत अपनी 88 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है। इसमें से लगभग आधा हिस्सा, यानी 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन, होर्मुज से होकर आता है। ये तेल मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, वअए और कुवैत से आता है। इसी रास्ते से भारत का 60 फीसदी एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और लगभग सारा एलपीजी (रसोई गैस) भी आता है।
कतर और यूएई जैसे देशों से गैस इसी रास्ते से पहुंचती है। अगर यह बंदी लंबी चली तो समस्या बढ़ सकती है। खासकर एलपीजी और एलएनजी पर असर पड़ सकता है क्योंकि इनके लिए लंबे अनुबंध होते हैं और स्पॉट मार्केट में ज्यादा विकल्प नहीं मिलते। लेकिन कच्चे तेल के लिए विकल्प ज्यादा हैं।
अधिकारी बताते हैं कि लंबे समय तक बंदी हुई तो भारत अपनी खरीदारी बदल सकता है। रूस से तेल की खरीदारी बढ़ाई जा सकती है। पहले अमेरिकी दबाव में रूस से कम खरीदा गया था, लेकिन अब जरूरत पड़ने पर फिर से मॉस्को से खरीद सकते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मध्य पूर्व से जहाज को भारत पहुंचने में 5 दिन लगते हैं, जबकि रूस से कम से कम एक महीना।
इसलिए आर्डर पहले से प्लान करने पड़ेंगे। इसके अलावा वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे देशों से भी तेल लिया जा सकता है। दुनिया में कुल मिलाकर पर्याप्त तेल है। साथ ही भारत के पास स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी हैं, जो एक हफ्ते की जरूरत पूरी कर सकते हैं।
इस घटना का सबसे तुरंत असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड पिछले हफ्ते करीब सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया, लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। साल की शुरुआत से अब तक करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
ट्रेडर्स अगले हफ्ते और ज्यादा उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ मॉडल्स कहते हैं कि अगर आपूर्ति में दिक्कत हुई तो कीमत 80 डॉलर तक जा सकती है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी, फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत बढ़ना सबसे बड़ा खतरा है। लेकिन लंबे समय तक पूरी तरह बंदी होने की संभावना कम है।
केप्लर के एक्सपर्ट सुमित रितोलिया कहते हैं कि भारत की विविध स्रोतों से खरीदारी, रूस का विकल्प और स्टॉक के बफर से भौतिक कमी का खतरा कम है। मुख्य समस्या कीमतों में उतार-चढ़ाव और उसका आर्थिक असर होगा। सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है। फिलहाल कोई पैनिक नहीं है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो गैस और एलपीजी की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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