नई दिल्ली। देश में कच्चे इस्पात का उत्पादन सालाना आधार पर मई में 46.9 प्रतिशत बढ़कर 92 लाख टन रहा। विश्व इस्पात संघ (वर्ल्ड स्टील) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी। पिछले वर्ष मई में कच्चे इस्तपाल का उत्पादन 58 लाख टन था। वर्ल्ड स्टील ने कहा, विश्व इस्पात संघ (वर्ल्ड स्टील) को जानकारी देने वाले 64 देशों में आलोच्य माह के दौरान कच्चे इस्पात उत्पादन 16.5 प्रतिशत बढ़कर 17.44 करोड़ टन रहा। रिपोर्ट के अनुसार मई में चीन में कच्चे इस्पात का उत्पादन 6.6 प्रतिशत बढ़कर 9.95 करोड़ टन रहा जो एक साल पहले इसी महीने में 9.23 करोड़ टन था। वर्ल्ड स्टील के अनुसार मई में जापान का कच्चा इस्पात उत्पादन मई, 2020 के 59 लाख टन के मुकाबले 84 लाख टन पर पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार अमेरिका का उत्पादन मई 2020 के 42 लाख टन से बढ़ कर 72 लाख लाख टन रहा। इसके अलावा रूस का मई का उत्पादन 66 लाख टन, दक्षिण कोरिया का 60 लाख टन, जर्मनी का 35 लाख टन, ईरान का 26 लाख टन तथा तुर्की और ब्राजील का कच्चे इस्पात का उत्पादन 32-32 लाख टन रहा। विश्व इस्पात संघ के सदस्य वैश्विक इस्पात उत्पादन में 85 प्रतिशत योगदान करते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा है कि 5जी प्रौद्योगिकी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह पूरी तरह गलत है। अभी तक जो भी प्रमाण उपलब्ध हैं उनसे पता चलता है कि अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी पूरी तरह सुरक्षित है। सीओएआई ने इस बात पर जोर दिया कि 5जी प्रौद्योगिकी पासा पलटने वाली होगी और इससे अर्थव्यवस्था और समाज को जबर्दस्त फायदा होगा। सीओएआई रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने कहा कि भारत में दूरसंचार क्षेत्र में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण सीमा को लेकर पहले ही कड़े नियम हैं। वैश्विक रूप से मान्य मानकों की तुलना में भारत में नियम अधिक सख्त हैं। सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने कहा, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य मानक की तुलना में भारत में सिर्फ 10 प्रतिशत विकिरण की अनुमति है। विकिरण और उसके प्रभाव को लेकर जो भी चिंता जताई जा रही है वह सही नहीं है। ये भ्रम फैलाने वाली आशंकाएं हैं। जब भी कोई नई प्रौद्योगिकी आती है, तो ऐसा ही होता है।
मुंबई। देश में सभी को कोरोना की वैक्सीन लगाने पर 3.70 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च करना होगा। इसमें उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा खर्च करना होगा। उसे 67 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड से निपटने के लिए देश की पूरी आबादी के कुल वैक्सीन पर यह खर्च आएगा। यह तब होगा जब यह मान लिया जाए कि वैक्सीन की कीमत 360 रुपये से 2900 रुपये के बीच होगी। रइक ने रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि यदि हम यह भी मान लें कि केंद्र राज्यों को 50% टीके देता है तो राज्यों के लिए बाकी 50% खुद खर्च करना होगा। इसके मुताबिक, सिक्किम को वैक्सीन पर 20 करोड़ रुपए खर्च करना होगा। हालांकि यह परिस्थितियां एकदम एक्सट्रीम केसेस में है और सही कीमत के आधार पर है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हम इस परिदृश्य का विश्लेषण 20 प्रमुख राज्यों के वित्त वर्ष 2022 के कुल खर्च के साथ मैप करते हैं तो 2900 रुपए की वैक्सीन के आधार पर कुल खर्च का 16% बिहार के लिए होगा। उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों के लिए यह 12% होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि वैक्सीन की इतनी लागत तो जरूर ही होगी। क्योंकि वैक्सीन की अधिकतम लागत भी 3.7 लाख करोड़ रुपए होगी। हालांकि यह 5.5 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान से काफी कम है। यह नुकसान कोरोना की इस लहर के लॉकडाउन के अनुमान पर है। रइक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका पेमेंट रुपये में किया जाएगा। इस वजह से इसका असर हमारे डॉलर के रिजर्व पर अवश्य पड़ेगा। हालांकि, इस तरह के पेमेंट संभावित रूप से भारत में नए निवेश को भी फायदा दे सकते हैं, क्योंकि निवेशक इस तरह के बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन में भारी फायदा कमा सकते हैं। दूसरी लहर कमजोर हो रही है। कहा कि पिछले 7 दिनों के नए मामलों के आंकड़े देखें तो यह पता चलता है कि कोविड की दूसरी लहर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है। इसके अलावा, हर रोज कोरोना के जितने केस आ रहे हैं उससे कहीं ज्यादा लोग ठीक भी हो रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, नए मामलों में गांवों के जिलों की हिस्सेदारी अप्रैल 2021 के अंत में 45.5% से बढ़कर 52.9% हो गई है। यह पहली लहर के दौरान 53.7% के पीक से थोड़ा कम है। हालांकि, सितंबर 2020 की तुलना में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में स्थिति मामूली रूप से बेहतर है। चिंता यह है कि लॉकडाउन से जुड़े प्रतिबंधों के बढ़ने से मई महीने में आर्थिक गतिविधियों पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
एबीएन डेस्क। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने घरेलू उड़ानों का किराया बढ़ाने पर रोक की सीमा 31 मई 2021 तक कर दी है। मिनिस्ट्री ने बताया कि अगले महीने के अंत तक 80 फीसदी एयरलाइन कैपेसिटी को भी बरकरार रखा जाएगा। एविएशन मिनिस्ट्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। एविएशन मिनिस्ट्री की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन कंपनियों ने सरकार ने अपील की है कि कैपेसिटी घटाकर 60 फीसदी कर दिया जाए क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बुकिंग घट गई है। अप्रैल की शुरुआत में एविएशन कंपनियों ने मदद के लिए सरकार का दरवाजा खटखटाया था। ऐसे समय में जब एविएशन कंपनियों का बिजनेस सुधरने लगा था, तब संक्रमण की दूसरी लहर ने फिर से उन्हें बेपटरी कर दिया है। एयरलाइन कंपनियों ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सामने तीन मांगें रखी थीं।पहली, वित्तीय मदद ताकि उनका कारोबार चलता रहे। दूसरी, कैपेसिटी कैप मौजूदा 80 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दिया जाए। तीसरी, सरकार लोअर फेयर लिमिट को सख्ती से लागू कराए। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, अप्रैल में एयर पैसेंजर ट्रैफिक की ग्रोथ में 15 से 17% की गिरावट आ सकती है। मई 2020 के बाद से घरेलू पैसेंजर का ट्रैफिक फरवरी में 64% पर पहुंच गया था। मार्च 2021 में रोजाना औसतन 2.49 लाख यात्रियों ने फ्लाइट से यात्रा की है। 6 अप्रैल से 11 अप्रैल के दौरान मार्च की तुलना में इसमें 12% की अचानक गिरावट आई। देश में फैली कोरोना महामारी के बीच घरेलू एयरलाइन कंपनी विस्तारा ने डॉक्टरों और नर्सों के लिए खास ऑफर निकाला है। कंपनी ने कोविड महामारी के इस संकट काल में डॉक्टरों और नर्सों को देशभर में फ्री आने-जाने की सुविधा देने का ऐलान किया है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की ज्वाइंट सेक्रेटरी ऊषा पाधी को लिखे पत्र में कंपनी ने इस ऑफर के बारे में जानकारी दी है। इसके अलावा कंपनी ने कहा कि संकट के समय में हम इन वॉरियर्स की सभी सुविधाओं का ध्यान रखेंगे। ऊषा पाधी ने अपने ट्वीट में विस्तारा के इस लेटर का हवाला देते हुए कहा है कि विस्तारा सरकारी संगठनों और अस्पतालों की तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए एयर लॉजिस्टिक्स सुविधा देने के लिए तैयार है। इसके अलावा कंपनी ने कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में डॉक्टरों और नर्सों की मुफ्त हवाई यात्रा का प्रस्ताव रखा है। आइए हम मिलकर इस संकट का मुकाबला करें।
कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से सहमे उद्योग से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार बातचीत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सतत वृद्धि को बनाए रखने के लिए सरकार और उद्योगों के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। हम महामारी से निपटने के साथ अर्थव्यवस्था बचाने की भी कोशिश कर रहे हैं। उद्योग संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेमीनार में वित्तमंत्री ने कहा, महामारी की दूसरी लहर के बावजूद केंद्र सरकार कई ऐसे कदम उठा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार को सुनिश्चित किया जा सके। संकट के बीच सतत वृद्धि हासिल करने के लिए उद्योग जगत का साथ आना जरूरी है। सरकार और उद्योग के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। उद्योग जगत को यह महसूस करना होगा कि हम उनकी बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हमारे बीच अविश्वास का कोई कारण नहीं होना चाहिए। वित्तमंत्री ने रिजर्व बैंक को सरकार का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद अंग बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और केंद्रीय बैंक साथ मिलकर अर्थव्यवस्था और देश की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने पहले जो कदम उठाए थे, उसका नतीजा है कि दूसरी लहर के बावजूद अर्थव्यवस्था सुधार की राह पर है। सरकार ने पिछले साल 70 दिन का लंबा लॉकडाउन लगाया था। सरकार लॉकडाउन के पक्ष में बिलकुल नहीं सीतारमण ने एक बार फिर दोहराया कि पिछले साल की तरह सरकार देशभर में एकबारगी लॉकडाउन करने के पक्ष में बिलकुल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कदम से प्रवासी मजदूरों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। अभी सेंटिमेंट में ज्यादा कमी नहीं आई है। लिहाजा हम उद्योग जगत से अपील करते हैं कि वे सरकार पर भरोसा बनाए रखें। महामारी से निपटने के लिए हम टीकाकरण की गति और विस्तार को बढ़ाएंगे। कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए 4,650 करोड़ रुपये की मदद दी जा रही है। सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की ओर से जुलाई तक अधिक मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में यह मुफ्त मिलेगी। 2021-22 की विकास दर में 0.5 फीसदी कटौती घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन की स्थितियों को देखते हुए भारत के विकास दर अनुमान में कटौती कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि नए आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव में 2021-22 के दौरान भारत की विकास दर 10-10.5 फीसदी रह सकती है। एजेंसी ने पहले 11 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था। इक्रा ने कहा, अप्रैल-जून तिमाही के लिए हमने पहले 27.5 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह 20-25 फीसदी के दायरे में रह सकती है। संक्रमण के हालिया बढ़ते मामलों से उपभोक्ताओं के भरोसे में कमी आई है। कारोबारी भरोसा भी 93 फीसदी से गिरकर 90 के करीब पहुंच गया है।
एबीएन डेस्क। पेट्रोलियम पदार्थों और खनिजों की कीमतों में भारी वृद्धि होने से मार्च 2021 में थोक मूल्यों पर आधारित थोक मुद्रास्फीति की दर आठ वर्ष के उच्चतम स्तर 7.39 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि मार्च 2020 में थोक मूल्य थोक मुद्रास्फीति की दर 0.42 प्रतिशत रही थी। फरवरी 2021 में थोक मुद्रास्फीति की दर 4.17 प्रतिशत रही थी। आंकड़ों के अनुसार थोक मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने वृद्धि हुई है। मार्च 2021 में मुद्रास्फीति की दर 8 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है इससे पहले अक्टूबर 2012 में थोक मुद्रास्फीति की दर 7.2 प्रतिशत दर्ज की गयी थी। आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 में कच्चे तेल के दामों में 73.70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह पेट्रोल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 32.15 प्रतिशत की तेजी आई है। खनिज पदार्थों के दाम 10.20 प्रतिशत बढ़े हैं। इसके अलावा रसोई गैस-एलपीजी की कीमत 10.30 प्रतिशत और पेट्रोल की कीमत 18.48 प्रतिशत बढ़ी है। हाई स्पीड डीजल के दामों में 18.27 प्रतिशत की कमी आई है। खाद्य पदार्थों में धान की कीमतें 1.38 प्रतिशत, दाल दलहन 13.14 प्रतिशत, फल 16.33 प्रतिशत, दूध 2.65 प्रतिशत तथा मांस, मछली और अंडा 5. 38 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि मोटे अनाज के दाम 1.38 प्रतिशत, गेहूं 7.80 प्रतिशत , सब्जी 5.19 प्रतिशत, आलू 33.10 प्रतिशत नीचे आए हैं।
एबीएन डेस्क। देश की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को पुनर्गठित करने ओर इसमें बदलाव लाने की जरूरत है, जिससे इसे अधिक दक्ष बनाया जा सके। देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनी हीरो इलेक्ट्रिक ने यह राय जताई है। कंपनी का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन नीति में बदलाव कर वांछित बिक्री लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अप्रैल, 2019 में पेश की गई भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और विनिर्माण की योजना-दो (फेम-दो) के तहत मार्च, 2022 तक कम से कम 10 लाख द्रुत गति के इलेक्ट्रिक दोपहया को सड़कों पर लाने का लक्ष्य है। इस नीति को आए दो साल हो गए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 60,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया सड़कों पर आए हैं। 2020 में देश में सिर्फ 25,735 द्रुत गति के इलेक्ट्रिक दोपहिया बिके थे। हीरो इलेक्ट्रिक के प्रबंध निदेशक नवीन मुंजाल ने कहा, इस नीति के दो साल बीते चुके हैं और एक साल शेष हैं लेकिन अब तक इससे सिर्फ 60,000 वाहनों को लाभ हुआ है। अभी तक यह आंकड़ा 6 लाख से अधिक होना चाहिए था। ऐसे में कुछ ऐसा है जो काम नहीं कर रहा। इसके मद्देनजर नीति में बदलाव की जरूरत है। फेम-दो के दूसरे चरण के तहत अधिकतम कारखाना मूल्य वाले 10 लाख पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन 20,000 (प्रत्येक) रुपए का प्रोत्साहन पाने के पात्र हैं। अभी सिर्फ तेज रफ्तार इलेक्ट्रिक दोपहिया ही फेम-दो योजना का लाभ ले सकते हैं। मुंजाल ने कहा, यह इस तरह है कि यदि हम देखते हैं कि लक्ष्य प्राप्त हो रहा है, तो हम नया उत्पाद या नया प्रकाशन लाते हैं। यदि ऐसा नहीं है, तो हम चीजों में कुछ बदलाव करते हैं। इसी तरह इस नीति में भी बदलाव करने की जरूरत है, क्योंकि मौजूदा रूप में यह वैसा काम नहीं कर रही है, जैसा करने की जरूरत थी।' उन्होंने कहा कि नीति में कई चीजों मसलन गति, दायरे आदि को शामिल किया गया है, जिससे क्षेत्र की वृद्धि प्रभावित हो रही है। ‘यदि आप गति, दायरे आदि को लेकर काफी मानदंड तय कर देते हैं, तो यह सही तरीका नहीं है। यदि निश्चित संख्या में इंटरनल कम्बशन इंजनों को इलेक्ट्रिक में बदलना चाहते हैं, तो आप सब्सिडी का भुगतान शुरुआत में ही कर दें।
एबीएन डेस्क। दुनिया की दिग्गज इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला भारत के तीन शहरों में अपनी कारों का शोरूम खोलने के लिए जगह ढूंढ रही है, ऐसी खबर न्यूज एजेंसी रायटर ने कुछ सूत्रों के हवाले से दी है। रायटर ने यह भी बताया है कि टेस्ला ने भारत में सुनियोजित प्रवेश से पहले लॉबिंग और बिजनेस डेवलपमेंट के लिए एक टॉप एग्जिक्यूटिव को काम पर रखा है। मनुज खुराना प्रधानमंत्री के विज्ञान सलाहकार की अगुआई में परिवहन के भविष्य को लेकर बनाई सरकारी समिति का हिस्सा रह चुके हैं। जनवरी में बनाई लोकल कंपनी, जून तक बेचने लगेगी इंपोर्टेड मॉडल 3 सेडान : टेस्ला ने इसी साल जनवरी में एक लोकल कंपनी बनाई है, जिसके जरिए वह जून तक मॉडल3 सेडान मंगाकर बेचना शुरू कर सकती है। मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी शोरूम और सर्विस सेंटर के लिए दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में 20,000 से 30,000 वर्ग फुट का कमर्शियल स्पेस ढूंढ रही है। अक्टूबर में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने ट्वीटर पर कहा था कि उनकी कंपनी 2021 में भारत पक्का आएगी, लेकिन ऐसे ट्वीट वे पहले भी कर चुके थे। ऐसे में शोरूम के लिए जगह की तलाश और टॉप एग्जिक्यूटिव की हायरिंग बताती है कि टेस्ला भारत में एंट्री को लेकर काफी तेजी दिखा रही है। टेस्ला ने लॉबिंग के लिए देश में निवेश को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजेंसी इनवेस्ट इंडिया के फॉर्मर एग्जिक्यूटिव मनुज खुराना को हायर किया है। टेस्ला ने शोरूम के लिए जगह ढूंढने का काम ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट उइफए ग्रुप इंक को दिया है। स्पेस की तलाश में कई हफ्तों से जुटी उइफए ऐसी जगहों पर फोकस कर रही है जहां रईस कस्टमर्स को आने में आसानी हो। मेट्रो शहरों में लग्जरी कारों के कुछ शोरूम 8,000-10,000 वर्ग फुट एरिया में फैले हैं लेकिन ज्यादातर शोरूम छोटे हैं। दरअसल, दिल्ली और मुंबई में महंगी रियल एस्टेट प्रॉपर्टी की बहुत कमी है और ये प्रॉपर्टी के लिहाज से दुनिया के महंगे शहरों में गिने जाते हैं। खुराना टेस्ला की भारतीय बाजार में एंट्री प्रोसेस पर नजर रखेंगे लेकिन कंपनी के लिए यहां कारोबार करना आसान नहीं होगा। दरअसल, भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए चार्जिंग फैसिलिटी बहुत कम है, इंपोर्टेड कारों पर भारी भरकम टैक्स लगता है और इन गाड़ियों की बिक्री बेहद कम है। पिछले साल देश में कुल 24 लाख गाड़ियां बिकीं जिनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल सिर्फ 5,000 थीं जबकि चीन में 12.5 लाख बिकी थीं। हालांकि एनालिस्टों का कहना है कि भारत में रईसों की बढ़ती आबादी को देखते हुए आॅटोमोबाइल कंपनियां इस बाजार को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। वह भी तब, जब सरकार कम धुआं और गैस छोड़ने वाली ग्रीन गाड़ियों को बढ़ावा दे रही है। टेस्ला ने शुरुआत में गाड़ियां इंपोर्ट करने का प्लान बनाया है लेकिन पिछले महीने नितिन गडकरी ने कहा था कि अगर कंपनी इंडिया में गाड़ियां बनाने का वादा करती है तो सरकार उसकी प्रॉडक्शन कॉस्ट चीन से कम रखने के लिए वाजिब इनसेंटिव आफर करने को तैयार है।
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